नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सर्च अभियान में आईईडी बन रही है बाधक,इस माह मार्च 2025 में हुए 3 विस्फोट,एक जवान शहीद, 5 घायल
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों द्वारा जमीन के अंदर लगाए गए आईईडी सुरक्षा बलों के लिए घातक साबित हो रहे हैं. जैसे-जैसे सुरक्षा बल नक्सलियों के करीब पहुंच रहे हैं, वैसे-वैसे विस्फोट की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं.
अकेले मार्च 2025 में विस्फोट की तीन घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें पांच जवान घायल हुए हैं, जबकि सीआरपीएफ के एक सब इंस्पेक्टर शहीद हुए हैं.
सारंडा क्षेत्र में पुलिस के लिए नक्सल विरोधी अभियान पड़ रहा है भारी
झारखंड के सारंडा क्षेत्र ही एकमात्र ऐसा इलाका बचा है, जहां से नक्सलियों के एक बड़े समूह का सफाया किया जाना है, जिन पर एक करोड़ रुपये के कई इनाम भी हैं.
ऑपरेशन में लगे सुरक्षा बल किसी भी तरह सारंडा को फतह करना चाहते हैं, लेकिन जमीन के अंदर बिछाई गई मौत की सामग्री उनकी राह में रोड़ा बन रही है.
इस माह हुए 3 विस्फोट
मार्च 2025 के महीने में नक्सलियों द्वारा तीन बार विस्फोट किए गए हैं. 5 मार्च को हुए विस्फोट में तीन जवान घायल हुए थे, 16 मार्च को हुए विस्फोट में एक जवान घायल हुआ था, जबकि 22 मार्च को हुए विस्फोट में सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर सुनील मंडल शहीद हो गए थे और सीआरपीएफ के एक हेड कांस्टेबल घायल हुए थे.
बेहद खतरनाक हैं ये इलाके
चाईबासा के जराइकेला, रेंगरा, टोंटो, सोनुवा, जेटेया, गुदरी और तुम्बाहाटा ऐसे इलाके हैं, जहां जंगलों में कदम-कदम पर नक्सलियों ने मौत का साजो-सामान बिछा रखा है. इन वन क्षेत्रों में विस्फोटों के कारण पिछले डेढ़ साल में 22 ग्रामीणों की जान जा चुकी है. हालात ऐसे हैं कि बाइक से जंगल में अभियान पर निकलने वाले जवान भी आईईडी बमों का शिकार बन रहे हैं.
नक्सलियों के निशाने पर सुरक्षा बल
झारखंड के कोल्हान इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच निर्णायक लड़ाई चल रही है. कोल्हान की जंग पुलिस बहुत पहले ही जीत जाती, लेकिन नक्सलियों द्वारा जंगल क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा के लिए लगाए गए आईईडी बम अब तक इस जंग को जीतने में बाधा बने हुए हैं.
नवंबर 2022 से अब तक 26 सुरक्षाबल हो चुके घायल
नवंबर 2022 से अब तक कोल्हान में आईईडी बमों के विस्फोट से 26 सुरक्षाबल घायल हो चुके हैं.इनमें 209 कोबरा बटालियन के इंस्पेक्टर प्रभाकर साहनी, हवलदार अलख दास, मुकेश कुमार सिंह, अजय लिंडा, भरत सिंह राय, फारूकी शाहरुख खान, वीरपाल सिंह, प्रिंस सिंह, अमरेश सिंह, सौरभ कुमार, संतोष और चिरंजीव पात्रे विस्फोट में घायल हुए हैं. सभी को आनन-फानन में एयरलिफ्ट कर रांची ले जाया गया.
अधिकांश जवान अपनी चोटों से उबर चुके हैं लेकिन कई अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. कोल्हान में सीआरपीएफ के कई जवान भी घायल हुए हैं, जिनमें इंशार अली, राकेश कुमार पाठक, पंकज कुमार यादव और संजीव कुमार शामिल हैं. 22 मार्च को हुए विस्फोट में सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर शहीद हो गए थे, जबकि हेड कांस्टेबल गर्ग घायल हुए थे.
नवंबर 2023 से अब तक 22 ग्रामीणों की मौत
कोल्हान में सुरक्षा बलों के बाद सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है, नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी में विस्फोट होने से अब तक 24 ग्रामीणों की जान जा चुकी है, जबकि 14 गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
जान बचाने के लिए ग्रामीणों को भी बनाया जा रहा निशाना
झारखंड के नक्सल इतिहास में नक्सली संगठन हमेशा ग्रामीणों को निशाना बनाते रहे हैं. कभी मुखबिरी के नाम पर तो कभी शरण न देने के नाम पर, लेकिन पुलिस के जोरदार अभियान के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है. झारखंड के अधिकांश नक्सली इलाकों से माओवादियों को खदेड़ दिया गया है. लेकिन कोल्हान में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां नक्सली अभी भी खुद को बचाने में कामयाब हैं, लेकिन यह सफलता ग्रामीणों के खून से मिली है.घने बीहड़ों में नक्सलियों ने खुद को बचाने के लिए पूरे जंगल में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं. ऐसे जंगलों में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं, जहां ग्रामीण रोजाना आते-जाते हैं, नतीजतन बारूदी सुरंगों के विस्फोट में ग्रामीण लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं.
60 से ज्यादा नक्सली हैं इनामी
दरअसल, कोल्हान में शीर्ष नक्सली नेताओं ने शरण ले रखी है. बूढ़ा पहाड़ के बाद कोल्हान ही एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां नक्सलियों ने अपना मुख्यालय बनाया है. मुख्यालय होने के कारण यहां एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नेता भी रहते हैं. जानकारी के अनुसार, सारंडा में मिसिर बेसरा, अनमोल दा, टेक विश्वनाथ उर्फ संतोष, मोछू, चमन, कांडे, अजय महतो, सागेन अंगारिया और अश्विन जैसे खतरनाक नक्सली कमांडर मौजूद हैं, जिन पर एक करोड़ रुपये का इनाम है. इनके साथ 60 से अधिक लड़ाके हैं, जो गुरिल्ला युद्ध में माहिर हैं.
अभियान जारी, जल्द होगा खात्मा
कोल्हान में आईईडी विस्फोटों में ग्रामीणों की मौत और जवानों के घायल होने के सवाल पर झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने कहा कि कोल्हान में नक्सलियों की धार कुंद हो चुकी है, उनके पास अब कुछ नहीं बचा है. नतीजतन, वे आईईडी बम के जरिए लड़ाई की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों और जवानों को नुकसान पहुंच रहा है. लेकिन हमने उन्हें खत्म करने का लक्ष्य तय किया है और इसी लक्ष्य के अनुसार पुलिस केंद्रीय बलों के साथ मिलकर काम कर रही है. बहुत जल्द नक्सलियों का आखिरी गढ़ भी उनके हाथ से निकल जाएगा.
Mar 24 2025, 20:30