देश में श्रीराम के आचरण को जी रहे दो योगी, एक 'कर्मयोगी' मोदी और दूसरे सीएम योगी: सी.पी. राधाकृष्णन

- 'हिंदू हृदय सम्राट' हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

- दिव्य-भव्य दीपोत्सव में शामिल हुए उपराष्ट्रपति, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी के साथ रामकथा पार्क में किया प्रभु का तिलक-पूजन

- सत्ता नहीं चरित्र बल ही असली महानता, श्रीराम की राह पर चल रहे पीएम मोदी और सीएम योगी: उपराष्ट्रपति

- राम जन्मभूमि आंदोलन के कारण एक सामान्य कृषक परिवार का व्यक्ति बना देश का उपराष्ट्रपति: सी.पी. राधाकृष्णन

- अयोध्या के 10वें दीपोत्सव में बोले उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन- राम मंदिर हिंदुओं के आत्मसम्मान का प्रतीक

- राम मंदिर हिंदुओं के आत्मसम्मान का प्रतीक, आम आदमी भी देख रहा कारोबारी बनने का सपना: उपराष्ट्रपति

- यूपी के 'विरासत भी, विकास भी' मॉडल की उपराष्ट्रपति ने की सराहना, कहा- विकसित भारत 2047 के निर्माण में देश का नेतृत्व करेगा उत्तर प्रदेश

- आलोकित अयोध्या-अलौकिक अयोध्या': राम कथा पार्क में पुष्पक विमान से उतरे प्रभु, हुआ भरत मिलाप और राज्याभिषेक

अयोध्या, 07 नवंबर। "भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि वास्तविक महानता सत्ता या पद में नहीं, बल्कि चरित्र बल और अपने कर्तव्यों के प्रति अटूट निष्ठा में होती है। आज प्रभु श्रीराम के चरित्र और उनके आचरण का अनुसरण देश में दो योगी कर रहे हैं, एक 'कर्मयोगी' नरेंद्र मोदी हैं और दूसरे यहां योगी आदित्यनाथ हैं।" उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रामनगरी अयोध्या में आयोजित दसवें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। राम कथा पार्क में आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने मिलकर राम मंदिर को हिंदुओं के आत्मसम्मान का प्रतीक बना दिया है और अयोध्या आज 'विरासत भी, विकास भी' विजन का एक साकार उदाहरण बन गई है।

समारोह के दौरान 'आलोकित अयोध्या-अलौकिक अयोध्या' की परिकल्पना भी जीवंत होती दिखी। राम कथा पार्क में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम, माता सीता एवं अनुज लक्ष्मण जी का प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन हुआ। भावपूर्ण 'भरत मिलाप' के पश्चात प्रभु श्रीराम एवं माता जानकी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन और आरती-वंदन किया गया। त्रेतायुग की स्मृतियों को ताजा करते हुए प्रभु श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक भी संपन्न हुआ, जिसके साक्षी हजारों श्रद्धालु बने।

उपराष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री को कहा 'हिंदू हृदय सम्राट'

समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए उन्हें 'हिंदू हृदय सम्राट' कहकर संबोधित किया। मुख्यमंत्री के साथ संसद के अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "हमारे हिंदू हृदय सम्राट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी उस समय संसद में मेरे सहयोगी हुआ करते थे। वह बिल्कुल युवा थे और मुझे अच्छी तरह याद है कि उनके भाषणों में उस समय भी वैसा ही ओज था, जितने ओजस्वी वह आज हैं।"

रामशिला पूजन से जुड़ी मां की यादें साझा कर भावुक हुए उपराष्ट्रपति 

उपराष्ट्रपति ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी अपनी मां की यादों को साझा करते हुए बताया कि जब अशोक सिंघल ने रामशिला पूजन का आह्वान किया था, तब उनकी मां ने राम मंदिर के लिए अपने सिर पर ईंट ढोई थी और शिला पूजन का नेतृत्व किया था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "उस समय मेरी मां ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि सुदूर दक्षिण, रामेश्वरम से चलकर उनका बेटा एक दिन देश का उपराष्ट्रपति बनेगा और राम जन्मभूमि पर इस समारोह का हिस्सा बनकर गर्व की अनुभूति करेगा।" उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष और साधु-संतों की तपस्या के बाद राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर साकार हुआ है।

राम मंदिर आंदोलन ने कृषक पुत्र को बनाया उपराष्ट्रपति 

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे एक बेहद सामान्य कृषक परिवार से आते हैं और आज उपराष्ट्रपति बने हैं। यह केवल इसलिए संभव हुआ क्योंकि अयोध्या का राम मंदिर आंदोलन चलाया गया और तमाम रामभक्तों ने इसके लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि आज शताब्दियों के बाद युगों-युगों की साध पूरी हुई है। अगर राम जन्मभूमि पर राम मंदिर नहीं बनता, तो कहां बनता?

पहले कोई सुरक्षित नहीं था, आज आम आदमी देख रहा कारोबारी बनने का सपना 

उपराष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश की सुधरी कानून व्यवस्था की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि पहले जब वे उत्तर प्रदेश आते थे, तो उन्हें सुरक्षित महसूस नहीं होता था। कानून-व्यवस्था पुलिस के नहीं, गुंडों के हाथों में होती थी। लेकिन आज यूपी में प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षित है और यह महानतम उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की है। 

उन्होंने वाराणसी के एक व्यक्ति का उदाहरण दिया, जिसने अपराध की राह छोड़कर अब एक छोटे व्यापारी के रूप में बेखौफ अपना काम शुरू कर दिया है। उपराष्ट्रपति कहा कि जन्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता, व्यक्ति केवल अपने चारित्रिक बल से श्रेष्ठ बनता है, जैसे महर्षि वाल्मीकि ने एक सामान्य परिवार से आकर दुनिया को महानतम ग्रंथ रामायण दिया।

'विकसित भारत 2047' में सभी राज्यों का नेतृत्व करेगा उत्तर प्रदेश 

उपराष्ट्रपति ने यूपी की अर्थव्यवस्था की प्रगति पर बोलते हुए कहा कि आज यूपी देश की जीडीपी में 9% का योगदान दे रहा है। 2026-27 के लिए ₹9 लाख करोड़ से अधिक का ऐतिहासिक बजट मुख्यमंत्री की विकास दृष्टि को दर्शाता है और जल्द ही यह राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने वाला है। प्रयागराज में आयोजित पिछले महाकुंभ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद एक भी अप्रिय घटना का न होना यूपी के सुरक्षित और विकसित मॉडल का प्रमाण है। उन्होंने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए पूर्ण विश्वास जताया कि उनका राज्य 'विकसित भारत 2047' की यात्रा में सभी राज्यों का नेतृत्व करेगा। उन्होंने अंत में कहा कि हमारा लक्ष्य दूसरों पर राज करना नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर भारत को दुनिया की एक महाशक्ति बनाना है।

सत्ता से बड़ा है कर्तव्य और वैभव से बड़ा है चरित्र, प्रभु श्रीराम का जीवन देता है यही संदेश: राज्यपाल

राम केवल नाम नहीं, भारत की आत्मा और हमारी राष्ट्रीय चेतना के आधार हैं: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

रामकथा पार्क में आयोजित हुआ दीपोत्सव का दसवां संस्करण, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल हुईं शामिल

'आलोकित अयोध्या-अलौकिक अयोध्या': रामकथा पार्क में पुष्पक विमान से उतरे प्रभु, हुआ भरत मिलाप और राज्याभिषेक

प्राचीन आध्यात्मिक पहचान और आधुनिक विकास के संगम से रोजगार का प्रमुख केंद्र बन रही अवधपुरी: राज्यपाल

विगत 10-12 वर्षों में 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर आना देश की ऐतिहासिक उपलब्धि: राज्यपाल

सरयू के घाटों को स्वच्छ, निर्मल और अयोध्या को प्लास्टिक मुक्त बनाने का राज्यपाल ने किया आह्वान

अयोध्या, 07 नवंबर। "राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचार, एक संस्कार और भारत की आत्मा हैं। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्ता से बड़ा कर्तव्य है, अधिकार से बड़ा दायित्व है और वैभव से बड़ा चरित्र है।" उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रामनगरी अयोध्या स्थित रामकथा पार्क में आयोजित दसवें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। सरयू के पावन तट पर असंख्य दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच उन्होंने कहा कि अयोध्या आज करोड़ों लोगों की अटूट आस्था और सनातन चेतना का जीवंत केंद्र बन चुकी है, जहां की मिट्टी के कण-कण में रामत्व का भाव समाहित है।

समारोह के दौरान 'आलोकित अयोध्या-अलौकिक अयोध्या' की परिकल्पना भी साकार होती दिखी। रामकथा पार्क में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम, माता सीता एवं अनुज लक्ष्मण जी का प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन हुआ। इस दौरान भावपूर्ण 'भरत मिलाप' के पश्चात प्रभु श्रीराम एवं माता जानकी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन और आरती-वंदन किया गया। त्रेतायुग की स्मृतियों को ताजा करते हुए प्रभु श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक भी संपन्न हुआ, जिसके साक्षी हजारों श्रद्धालु बने।

लोक कल्याण और सुशासन का संकल्प है रामराज्य 

राज्यपाल ने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना केवल शासन व्यवस्था का आदर्श नहीं है, बल्कि न्याय, समानता, संवेदना और लोक कल्याण पर आधारित समाज की स्थापना का संकल्प है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास का स्मरण करते हुए कहा कि उनके महाकाव्यों ने श्रीराम के चरित्र और आदर्शों को जन-जन और घर-घर तक पहुंचाया, जिसके कारण श्रीराम आज भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के मुख्य आधार बने हुए हैं।

विकास और रोजगार का नया केंद्र बनी अयोध्या 

राज्यपाल ने कहा कि अयोध्या आज अपनी प्राचीन आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों से जोड़ रही है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की निरंतर बढ़ती संख्या से यहां होटल, धर्मशाला, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प, फूल-माला और स्थानीय उत्पादों से जुड़े हजारों परिवारों के लिए रोजगार के असीमित अवसर सृजित हो रहे हैं। अयोध्या की रामलीला, लोककला, संगीत और पारंपरिक खानपान को अब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का किया आह्वान 

दीपोत्सव के वास्तविक संदेश को प्रकृति से जोड़ते हुए राज्यपाल ने सरयू नदी की निर्मलता और अयोध्या के पर्यावरण को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने आमजन से स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त वातावरण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव की सार्थकता तभी है, जब हमारे दीपों का प्रकाश प्रकृति के संरक्षण और समाज के कल्याण का भी माध्यम बने।

अंतिम पायदान के व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का प्रकाश 

राज्यपाल ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने सिखाया है कि समाज में कोई भी व्यक्ति उपेक्षित नहीं होना चाहिए। शासन का वास्तविक उद्देश्य समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सुख, सुरक्षा और सम्मान का प्रकाश पहुंचाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं इसी उद्देश्य को साकार कर रही हैं। विगत 10-12 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

अंतरिक्ष से लेकर रक्षा क्षेत्र तक गूंज रहा भारत का डंका 

बदलते और आत्मनिर्भर होते भारत का खाका खींचते हुए राज्यपाल ने कहा कि एक समय था जब हमें अंतरिक्ष तकनीक और हथियारों के आयात के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज चंद्रयान-3 की सफलता, आदित्य-एल1, स्पेस डॉकिंग तकनीक और 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवा दिया है। आज हमारे युवा केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में नए अवसर पैदा करने वाले बन गए हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जो 140 करोड़ देशवासियों के नए आत्मविश्वास का प्रतीक है।

युवाओं और समाज के लिए राज्यपाल का संकल्प 

राज्यपाल ने भारतीय संस्कृति की विशेषता बताते हुए कहा कि हमारा एक दीप सिखाता है कि स्वयं जलकर भी दूसरों के जीवन को प्रकाशित किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से भगवान श्रीराम के जीवन से अनुशासन, नेतृत्व, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का आह्वान किया। राज्यपाल ने उपस्थित जनसमूह को संकल्प दिलाया कि हम किसी गरीब बच्चे की शिक्षा का दीप बुझने नहीं देंगे, किसी बेटी के सपनों को सीमित नहीं होने देंगे, किसी बुजुर्ग को अकेला नहीं छोड़ेंगे और समाज में प्रेम व समरसता को मजबूत बनाएंगे। अपनी खुशियों की रोशनी से दूसरों के जीवन में आशा का संचार करना ही दीपावली का वास्तविक संदेश है।

रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले अयोध्या आएं, लेकिन पहले माफी मांगें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में अयोध्या में दीपोत्सव के 10वें संस्करण का हुआ आयोजन, मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

- कथा की मर्यादा तक नहीं जानते अयोध्या को रक्तरंजित करने वाले लोग: मुख्यमंत्री

- श्रीराम भारत राष्ट्र के प्राण और आत्मसम्मान, त्रेता युग की याद दिला रही आज की अयोध्या

- अब अयोध्या में न कर्फ्यू लगेगा, न रामभक्तों पर कोई गोली चलाने का दुस्साहस करेगा

- 25 हजार दीपों से शुरू हुआ दीपोत्सव, इस बार 30 लाख दीपों से जगमगाएगी रामनगरी

अयोध्या, 07 नवम्बर 2026। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को दीपोत्सव के मंच से अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलवाने और संतों पर लाठियां बरसाने वालों को निशाने पर लिया। कहा कि ऐसे लोग अयोध्या जरूर आएं, लेकिन पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगें। अपने कृत्यों का पश्चाताप करें। प्रभु श्रीराम सबके प्रति कृपालु हैं, वे क्षमा कर देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी जय श्रीराम बोलने पर गोलियां चलती थीं, आज वही अयोध्या त्रेता युग की स्मृतियों को जीवंत कर रही है।

मुख्यमंत्री शनिवार को श्री अयोध्या धाम में आयोजित दीपोत्सव के 10वें संस्करण को संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के सामान्य किसान परिवार से निकलकर उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति समर्पण के बल पर अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम की चेतना ही भारत की चेतना है। श्रीराम भारत राष्ट्र के प्राण और आत्मसम्मान हैं। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई 'अवधपुरी अति रुचिर बनाई, देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज की अयोध्या को देखकर त्रेता युग का स्मरण होता है। जिस प्रकार 14 वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्रीराम के लौटने पर अयोध्या सजी होगी, वैसी ही अनुभूति आज रामनगरी करा रही है।

कथा को मुशायरे के दायरे में लाने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन्होंने कभी अयोध्या की गलियों को रक्तरंजित किया, वे आज भी अपने लोभ का संवरण नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे लोग कथा में पहुंचते हैं तो उन्हें कथा की मर्यादा तक का ज्ञान नहीं होता। कथा और मुशायरे का अंतर भी नहीं समझ पाते। अपनी उच्छृंखल वृत्ति से कथा की पवित्र परंपरा को अपवित्र करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि जिन्होंने न्यायालयों में वकीलों की फौज खड़ी कर श्रीराम के अस्तित्व को नकारने का प्रयास किया था, आज वे भी राम के अस्तित्व को स्वीकार कर रहे हैं। यह वैचारिक विजय है। श्रीराम ने वनवासियों, निषादराज और माता शबरी सहित सबको अपनाया। आज श्रीराम जन्मभूमि परिसर में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, माता शबरी और गृध्रराज जटायु की उपस्थिति उसी समरसता का संदेश देती है। हालांकि, कोई मारीच बनकर आएगा तो राम के बाणों से बच नहीं पाएगा।

अब न कर्फ्यू लगेगा, न संतों का अपमान होगा

मुख्यमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन में कारसेवकों के बलिदान, संतों के संघर्ष और अशोक सिंघल के नेतृत्व में चले आंदोलन का स्मरण किया। कहा कि पांच सौ वर्षों की चुनौतियों के बाद रामलला अपने जन्मस्थान पर विराजमान हुए हैं। रामभक्तों ने जो इतिहास रचा है, उसे अब कोई मिटा नहीं सकता। अयोध्या अब कभी कर्फ्यू के दायरे में नहीं आएगी। यहां न कोई दंगा-फसाद करने का दुस्साहस कर पाएगा और न संतों का अपमान होगा।

तीन घंटे बिजली वाली अयोध्या आज सोलर सिटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी अयोध्या में महज तीन घंटे बिजली मिलती थी। आज यह स्मार्ट सिटी के साथ सोलर सिटी भी बन चुकी है। धर्म पथ, भक्ति पथ, श्रीराम पथ और जन्मभूमि पथ श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं अयोध्या के विकास में लगाई गई हैं या उन पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे, लेकिन हजारों वर्षों तक यहां हवाई अड्डा नहीं बन पाया। आज महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। राम की पैड़ी में सरयू का जल प्रवाहित हो रहा है। माता शबरी के नाम पर रसोई और निषादराज के नाम पर रैन बसेरे आधुनिक अयोध्या की पहचान बन रहे हैं।

30 लाख दीपों से आलोकित होगी रामनगरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 हजार दीपों से शुरू हुआ दीपोत्सव दसवें संस्करण में 25 लाख की सीमा पार कर चुका है। इस बार उपराष्ट्रपति के हाथों दीप प्रज्वलन के साथ अयोध्या में 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य है। यह आयोजन दुनिया भर के करोड़ों रामभक्तों को भावनात्मक रूप से जोड़ रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को दीपोत्सव और दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए रामराज्य की अवधारणा को साकार करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जयवीर सिंह, राकेश सचान, सतीश चंद्र शर्मा, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर, स्वामी श्रीधराचार्य, स्वामी राघवाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीमहंत कमलनयन दास, श्रीमहंत राम लखन दास, जगद्गुरु सतुआ बाबा सहित अनेक संत और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

रामपथ पर उतरी रामायण की दिव्य छटा, 21 झांकियों ने जीवंत किए प्रभु श्रीराम के प्रसंग

- ढोल-नगाड़ों की थाप और लोकनृत्यों के बीच निकली दीपोत्सव की भव्य शोभायात्रा, राममय हुई रामनगरी

- सात झांकियों में रामायण के सातों कांडों का चित्रण, 14 झांकियों में दिखी उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा

- महिला कलाकारों ने कंधों पर ढोल रखकर दी प्रस्तुति, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा रामपथ

- पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया शोभायात्रा का शुभारंभ, बोले- हर साल अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहा दीपोत्सव

अयोध्या, 7 नवंबर, 2026। रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव का उल्लास चरम पर नजर आया। रामपथ पर निकली भव्य शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं को रामायण के विभिन्न प्रसंगों से रूबरू कराया। सजे-धजे रथों पर सवार प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के स्वरूपों के दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप और कलाकारों के मनमोहक प्रदर्शन ने पूरे माहौल को राममय बना दिया।

शोभायात्रा में सबसे खास आकर्षण महिला कलाकारों की ढोल वादन प्रस्तुति रही। कंधों पर ढोल रखकर थाप देती कलाकारों की टोली ने लोगों का ध्यान खींचा। नगाड़ों और ताशों की गूंज के बीच कलाकारों के हैरतअंगेज करतब और अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्यों ने उत्सव में सांस्कृतिक रंग भर दिए। रामायण के प्रसंगों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती झांकियों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। जगह-जगह जय श्रीराम के जयकारों से रामपथ गूंजता रहा।

- तीन किलोमीटर की यात्रा में दिखे रामायण के सातों कांड

साकेत महाविद्यालय परिसर से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर शोभायात्रा को रवाना किया। करीब तीन किलोमीटर की यात्रा पूरी कर शोभायात्रा रामकथा पार्क पहुंची। इस बार इसमें कुल 21 आकर्षक झांकियां शामिल की गईं। इनमें सात झांकियां रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीं, जबकि 14 झांकियों के माध्यम से योगी सरकार की विकास योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। रामायण आधारित झांकियों में बालकांड के रामजन्म और बाल लीलाओं से लेकर अयोध्याकांड के वनगमन तक की कथा दिखाई गई। अरण्यकांड के वनवासी जीवन, किष्किन्धाकांड में सुग्रीव और हनुमान से प्रभु श्रीराम की भेंट, सुंदरकांड में हनुमान जी के शौर्य, लंकाकांड में रावण के साथ युद्ध और उत्तरकांड के प्रसंगों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इन दृश्यों के जरिए दर्शकों को रामकथा की यात्रा का क्रमबद्ध अनुभव मिला।

- झांकियों में योजनाओं से लेकर डिफेंस कॉरिडोर तक की झलक

शोभायात्रा में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ प्रदेश के विकास कार्यों को भी प्रमुखता दी गई। जल जीवन मिशन, एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी), कृषि एवं पशुपालन, आयुष्मान कैशलेस योजना, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस और मिशन शक्ति की झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा।

इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को भी झांकियों में स्थान दिया गया। इन प्रस्तुतियों के जरिए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और सरकारी योजनाओं को जनसामान्य के सामने रचनात्मक अंदाज में रखा गया। विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से आयोजन को देश की सांस्कृतिक विविधता का मंच बना दिया।

- 'दीपोत्सव अब उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं, विश्व का पर्व बन चुका है'

शोभायात्रा की भव्यता पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव का स्वरूप हर वर्ष और अधिक दिव्य, भव्य तथा अलौकिक होता जा रहा है। हर बार हम अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हैं और इस बार भी नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में दीपोत्सव का विशेष महत्व है। यह केवल उत्तर प्रदेश का आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि विश्वभर में पहचान बना चुका पर्व है।

मंत्री ने कहा कि रामायण के सातों कांडों पर आधारित झांकियां अयोध्या की धार्मिक पहचान, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का दर्शन करा रही हैं। शाम को आयोजित होने वाला मुख्य दीपोत्सव कार्यक्रम भी भव्य और यादगार होगा।

- झांकियों ने जीता श्रद्धालुओं का दिल

शोभायात्रा देखने पहुंचे गोंडा के राजेश कुमार, लखनऊ के भूपेंद्र वर्मा, उन्नाव के सुशील कुमार ने कहा कि अयोध्या का बदलता स्वरूप आकर्षित करता है। दीपोत्सव की भव्यता और रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां देखकर मन आनंदित हो गया। जौनपुर से आए राम कुमार ने कलाकारों की प्रस्तुतियों और रामकथा के चित्रण की सराहना की। बलरामपुर की सुशीला ने कहा कि रामायण के प्रसंगों को जिस जीवंतता के साथ दिखाया गया, उसने मन मोह लिया।

रामपथ पर मौजूद श्रद्धालु देर तक झांकियों को निहारते रहे। प्रभु श्रीराम के स्वरूपों के दर्शन के दौरान कई लोगों ने हाथ जोड़कर नमन किया तो कुछ भावुक भी हो उठे। ढोल-नगाड़ों की थाप, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों और रामनाम के जयघोष के बीच अयोध्या की सड़कों पर भक्ति और उत्सव का अनूठा नजारा दिखाई दिया। शोभायात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अयोध्या में दीपोत्सव केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं, बल्कि रामायण की परंपरा, लोकसंस्कृति और सामूहिक आस्था का जीवंत उत्सव बन चुका है।


बाराबंकी में अधिवक्ता के बेटे की हत्या को लेकर अखिलेश पर बरसे ओम प्रकाश राजभर, पूछा- चुप क्यों हैं?

  • 'यादव ही यादव की हत्या कर रहा है', कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर का अखिलेश पर तीखा हमला
  • अपने विधायकों को संभाल नहीं पा रहे अखिलेश, जनता सब देख रही है: सपा पर राजभर ने साधा निशाना
  • 2027 छोड़िए अगले जन्म तक भी सत्ता में नहीं आएंगे अखिलेश, राजभर का सपा प्रमुख पर निशाना

लखनऊ, 07 नवंबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बाराबंकी में अधिवक्ता के बेटे की हत्या के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा विधायक धर्मराज उर्फ सुरेश यादव ने किसानों की जमीन हड़पने के लिए बाधा बन रहे अधिवक्ता राम मनोहर यादव के बेटे अभिनव यादव की हत्या करवा दी, लेकिन अखिलेश यादव चुप्पी साधे हुए हैं।

राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि अखिलेश यादव सत्ता के सपने देखने के बजाय सच्चाई देखें। यहां यादव ही यादव की हत्या कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव होते तो ऐसा नहीं होने देते। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश इसलिए चुप हैं, क्योंकि आरोपी विधायक उनकी ही जाति का है, लेकिन पीड़ित युवक भी यादव समाज से था।

  • 2027 छोड़िए अगले जन्म में भी सत्ता में नहीं आएंगे अखिलेश

राजभर ने जौनपुर के विशाल यादव हत्याकांड का जिक्र करते हुए सपा विधायक लकी यादव पर आरोपियों को बचाने और अखिलेश यादव पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा नेताओं के ऐसे कृत्यों को जनता देख और समझ रही है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि आप 2027 छोड़िए अगले जन्म तक भी सत्ता में नहीं आएंगे। राजभर ने अखिलेश यादव पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जो नेता अपने विधायकों को नहीं संभाल सकता, जनता उसे अपना नेतृत्व कभी नहीं सौंपेगी।

मलेशिया में सुनी अयोध्या के दीपोत्सव की चर्चा, सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया से रामनगरी पहुंचे शेन

- राम की पैड़ी से दीपोत्सव की तैयारियां देख अभिभूत हुए विदेशी पर्यटक, बोले- अद्भुत है राम नगरी, यहां आकर मिलती है सकारात्मक ऊर्जा

- श्रीराम मंदिर और दीपोत्सव की वैश्विक ख्याति खींच रही विदेशी पर्यटकों को, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से रूबरू हो रहे दुनिया भर के लोग

अयोध्या, 6 नवंबर। रामनगरी अयोध्या की ख्याति अब देश की सीमाओं से निकलकर सात समंदर पार तक पहुंच रही है। भव्य श्रीराम मंदिर और दीपोत्सव की विश्वव्यापी चर्चा विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसकी एक मिसाल ऑस्ट्रेलिया से अयोध्या पहुंचे पर्यटक शेन हैं, जो मलेशिया में भारतीय समुदाय के बीच दिवाली की तैयारियां देखने के बाद रामनगरी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भव्यता को करीब से अनुभव करने यहां पहुंचे हैं। राम की पैड़ी पर बैठकर दीपोत्सव की तैयारियों और शहर की जगमगाहट को निहारते शेन अयोध्या के आकर्षण से खासे प्रभावित नजर आए। उन्होंने यहां के माहौल को अद्भुत बताते हुए कहा कि अयोध्या में उन्हें सकारात्मक ऊर्जा के साथ सुरक्षा और सुकून का एहसास हो रहा है।

- मलेशिया में मिली अयोध्या के दीपोत्सव की जानकारी, तभी बना आने का कार्यक्रम

ऑस्ट्रेलिया निवासी शेन इन दिनों भारत की आध्यात्मिक यात्रा पर हैं। भारत आने से पहले वह मलेशिया में थे। वहां भारतीय समुदाय के बीच दिवाली की तैयारियों और उत्सव को देखकर उनकी दिलचस्पी भारतीय परंपराओं में और बढ़ गई। इसी दौरान उन्हें अयोध्या के दीपोत्सव की भव्यता के बारे में पता चला। रामनगरी में दीपावली किस तरह मनाई जाती है और यहां की सांस्कृतिक विरासत कैसी है, इसे अपनी आंखों से देखने की इच्छा उन्हें अयोध्या तक खींच लाई।

शेन का कहना है कि अयोध्या पहुंचकर उन्हें बेहद अच्छा अनुभव हो रहा है। यहां का वातावरण सकारात्मकता से भरा है। दीपोत्सव की तैयारियां और पूरे शहर में की गई आकर्षक सजावट देखकर वह काफी प्रभावित हैं। उनके लिए यह यात्रा महज पर्यटन नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक मान्यताओं, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर भी है।

- जगमगाती सड़कें और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र

दीपोत्सव को लेकर अयोध्या में की गई सजावट और तैयारियों ने शेन को विशेष रूप से आकर्षित किया है। शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर रोशनी की आकर्षक व्यवस्था, एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित हो रही झलकियां और विभिन्न स्थानों पर आयोजित धार्मिक व लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां उन्हें खूब पसंद आ रही हैं। लता मंगेशकर चौक की साज-सज्जा और रामनगरी में दिखाई दे रही उत्सवी छटा ने उनके अनुभव को और यादगार बना दिया है।

शेन के मुताबिक, अयोध्या में अलग-अलग परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों का जिस तरह संगम दिखाई दे रहा है, वह शानदार है। दीपोत्सव भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अनूठा माध्यम है। उन्होंने यहां की सुरक्षा व्यवस्था की भी तारीफ की। उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया से आने के बावजूद उन्हें अयोध्या में किसी तरह की असुरक्षा महसूस नहीं हो रही है। यह शहर बेहद सुंदर है और यहां का वातावरण मन को शांति देता है।

- श्रीराम मंदिर के बाद विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी अयोध्या

शेन सोमवार तक अयोध्या में प्रवास करेंगे। इस दौरान वह दीपोत्सव और दीपावली के आयोजनों को करीब से देखेंगे। इसके बाद उनकी वाराणसी जाने की योजना है। भारत की आध्यात्मिक यात्रा पर निकले शेन के लिए अयोध्या का अनुभव इस यात्रा का खास पड़ाव बन गया है। श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से मजबूत हुई है। शहर में विकसित हो रही आधारभूत सुविधाएं, बेहतर सड़कें, धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और बड़े सांस्कृतिक आयोजन रामनगरी को वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दे रहे हैं। दीपोत्सव की भव्यता ने भी इस आकर्षण को और विस्तार दिया है। मलेशिया में अयोध्या के दीपोत्सव की चर्चा सुनकर ऑस्ट्रेलिया से पहुंचे शेन की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि रामनगरी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुंच रही है। अयोध्या आने वाले विदेशी सैलानी यहां सिर्फ मंदिरों के दर्शन ही नहीं कर रहे, बल्कि भारतीय परंपराओं, लोक संस्कृति और उत्सवों को भी करीब से अनुभव कर रहे हैं।

भैया दूज के बाद फिर बंटेंगे नियुक्ति पत्र, शिक्षा, पुलिस, राजस्व में युवाओं को मिलेगी नौकरी: मुख्यमंत्री योगी

तीसरी बार भी आएंगे, बिना रुके नौजवानों को देते रहेंगे नौकरियां: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

सैफई सिंडिकेट खत्म, अब प्रतिभाशाली युवाओं को मिल रहा उनका हक: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

दीपावली से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4,543 नवचयनित उपनिरीक्षकों को वितरित किए नियुक्ति पत्र

पिछली सरकारों में परीक्षा कोई और देता था और नौकरी किसी और को मिलती थी: मुख्यमंत्री

भर्ती में न सिफारिश चली, न लेनदेन, मेरिट से चुने गए 4,543 उपनिरीक्षक: मुख्यमंत्री 

नौकरी का सिलसिला जारी रहेगा, छह महीने में एक लाख और युवाओं को देंगे नियुक्ति पत्र: मुख्यमंत्री 

लखनऊ, 6 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में युवाओं को सरकारी नौकरी देने और नियुक्ति पत्र वितरित करने का सिलसिला बिना रुके जारी रहेगा। दीपावली के बाद भैया दूज के अगले दिन राजस्व विभाग के 1,200 से अधिक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इसके बाद होमगार्ड, पुलिस और शिक्षा विभाग के चयनित युवाओं को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वह तीसरी बार भी आएंगे और युवाओं को नियुक्ति पत्र देने के कार्यक्रम आगे बढ़ाएंगे।

दीपावली से पहले धनतेरस के अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन्स, लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के 4,543 नवचयनित उपनिरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को अवसर देने के अपने कर्तव्य का लगातार निर्वहन करेगी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण का यह अभियान बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके आगे बढ़ेगा। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की प्रतिभा को अवसर देना और युवाओं की ऊर्जा का लाभ उत्तर प्रदेश की समृद्धि के लिए उठाना है।

- भैया दूज के बाद राजस्व विभाग से शुरू होगा अगला चरण

मुख्यमंत्री ने आगामी नियुक्तियों का विवरण देते हुए बताया कि दीपावली के बाद भैया दूज के अगले दिन राजस्व विभाग के 1,200 से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के माध्यम से होमगार्ड भर्ती की प्रक्रिया पूरी की गई है। चयनित अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस में 32 हजार कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। फिलहाल अभ्यर्थियों के सत्यापन का कार्य चल रहा है। सत्यापन पूरा होने के बाद नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। वहीं, करीब 25 हजार शिक्षकों के नियुक्ति पत्र वितरण के लिए समय मांगा गया है। सरकार उन्हें भी नियुक्ति पत्र देने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगी।

- तीसरी बार भी आएंगे, चलता रहेगा नियुक्ति पत्र वितरण का सिलसिला

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण का सिलसिला यहीं नहीं थमेगा। आगामी कार्यक्रमों में भी युवाओं को सरकारी सेवा से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि तीसरी बार भी नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और उस अवसर पर भी युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।

- युवाओं को अवसर देना सरकार का कर्तव्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज या व्यवस्था का भविष्य तभी सुरक्षित हो सकता है, जब वह अपने युवाओं की प्रतिभा का सम्मान करे और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए। जो समाज अपने युवाओं की उपेक्षा करता है, उसका कोई भविष्य नहीं हो सकता। युवाओं को अपनी क्षमता साबित करने के लिए मंच और अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण सरकार की कृपा या अनुकंपा नहीं है। यह सरकार का कर्तव्य है, जिसका निर्वहन पारदर्शी और ईमानदार तरीके से किया जा रहा है। जब चयन की प्रक्रिया निष्पक्ष होती है तो उसके परिणाम भी सकारात्मक दिखाई देते हैं। प्रदेश के युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर मिलना नए उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण पहचान है।

- साढ़े नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को मिली नौकरी, गिनाए आंकड़े

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस में 2.26 लाख से अधिक पुलिस अधिकारियों और कार्मिकों की भर्ती की गई है। विभिन्न विभागों में सरकारी नौकरी पाने वाले युवाओं की संख्या 9.5 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने हाल के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए बताया कि 25 अगस्त को कृषि विभाग के 3,572 अधिकारियों, 19 सितंबर को 818 अभ्यर्थियों, 20 सितंबर को पुलिस विभाग के 912 अभ्यर्थियों, 22 सितंबर को शिक्षा विभाग के 3,567 अभ्यर्थियों और 28 सितंबर को पंचायती राज विभाग के 1,375 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए।

इसी क्रम में 8 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश पुलिस में 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए, जबकि 5 नवंबर को 28 फॉरेंसिक साइंटिस्ट को नियुक्ति पत्र दिए गए। अब 4,543 नवचयनित उपनिरीक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के लिए लगातार काम कर रही है और आने वाले समय में भी अलग-अलग विभागों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।

- पारदर्शी भर्ती से टूटा सैफई सिंडिकेट का दौर

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती थीं। कई मामलों में आवेदन करने वाला व्यक्ति कोई और होता था, परीक्षा में बैठने वाला कोई और और नियुक्ति किसी अन्य व्यक्ति को मिल जाती थी। ऐसी कई भर्तियों से जुड़े मामले आज भी न्यायालय में लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में नियुक्तियों का मतलब केवल 'सैफई सिंडिकेट' हुआ करता था। पारदर्शी और ईमानदारी से भर्ती होना प्रदेश के युवाओं के लिए एक दिवास्वप्न था। परीक्षा कोई और देता था और नौकरी का नियुक्ति पत्र किसी और को मिल जाता था, लेकिन हमारी सरकार ने युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले उस 'सैफई सिंडिकेट' को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले भर्ती प्रक्रिया कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहती थी, लेकिन अब प्रदेश के सभी जिलों के युवाओं को समान अवसर मिल रहे हैं। सरकार ने उस व्यवस्था को समाप्त किया है, जिसमें भर्ती पर किसी खास समूह का प्रभाव रहता था। अब प्रदेश के हर जिले के प्रतिभाशाली युवा अपनी योग्यता के आधार पर सरकारी सेवा में चयनित हो रहे हैं।

- पुलिस की क्षमता और प्रशिक्षण व्यवस्था में हुआ विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश पुलिस के सामने आधारभूत सुविधाओं और प्रशिक्षण क्षमता की कमी बड़ी चुनौती थी। उस समय एक साथ बड़ी संख्या में उपनिरीक्षकों की भर्ती होने पर उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। अब उत्तर प्रदेश पुलिस की एक साथ 60 हजार कार्मिकों को प्रशिक्षण देने की क्षमता विकसित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया गया है। प्रदेश के 56 जिलों में पुलिसकर्मियों के लिए ऊंची आवासीय इमारतें बनाई गई हैं। यूपी एसएसएफ और यूपी एसडीआरएफ जैसी नई इकाइयां गठित की गई हैं। पीएसी को पुनर्गठित कर उसकी बटालियनों को मजबूत किया गया है। पहले प्रदेश में केवल दो साइबर थाने थे, जबकि अब हर जिले में साइबर थाना और प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। सात जिलों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली भी लागू की गई है।

- पीड़ितों के साथ खड़े रहना पुलिस की जिम्मेदारी: सुरेश खन्ना

कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की धारणा बदली है। नवचयनित उपनिरीक्षक एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उन्हें हमेशा पीड़ित के साथ खड़ा होना चाहिए। ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करने से उत्तर प्रदेश पुलिस की प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

- पुलिस बल की क्षमता और आधारभूत ढांचे का विस्तार: डीजीपी

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि नियुक्ति पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि अगले 35 से 40 वर्षों की सेवा यात्रा की शुरुआत है। वर्ष 2017 के बाद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पुलिस बल की क्षमता और आधारभूत संरचना में व्यापक विस्तार हुआ है। इस अवधि में 2.26 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है। प्रदेश में 134 नए पुलिस थाने, सात महिला थाने और 95 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। 74 थानों के आवासीय भवनों के अतिरिक्त पुलिस लाइन्स में 24 ट्रांजिट हॉस्टल, 60 पुरुष हॉस्टल और 62 महिला हॉस्टल का निर्माण कराया गया है।

- होनहारों को मिले नियुक्ति पत्र :-

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शाहजहांपुर की अंशु गंगवार, संत रविदास नगर के अभय यादव, देवरिया के रवि प्रताप कुशवाहा, प्राची सविता, बलिया की साक्षी गोंड, गाजीपुर के रंजीत खरवार, गोरखपुर के अभिषेक कुमार पाल, जौनपुर के अनूप कुमार मौर्य, हमीरपुर के अजहरुद्दीन खान, संत कबीर नगर के निलय मिश्रा, सहारनपुर की फरहत जहां, आगरा की श्वेता भदौरिया, गाजीपुर के आशुतोष राय, जौनपुर के अमित कुमार दुबे और कानपुर के मयंक शाक्य सहित चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए।

- कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित:-

इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, डॉ. नीरज बोरा, ओम प्रकाश श्रीवास्तव, अमरेश कुमार और अम्बरीश कुमार, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और नवचयनित अभ्यर्थियों के परिजन उपस्थित रहे।

यादवों में भी भेदभाव कर रहे अखिलेश, मंत्री ओपी राजभर का सपा प्रमुख पर तीखा हमला

- ‘पहला ऐसा यादव नेता देखा, जो अहीर-अहीर में भी भेद करता है’, ओपी राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना

- इस बार ग्वाला समाज सपा को 2022 से भी बुरे दौर में पहुंचाएगा: मंत्री ओम प्रकाश राजभर

- राजभर ने उठाया सवाल, कहा - अखिलेश ने कितने घोसी और कितने कमरिया को टिकट दिए?

लखनऊ, 06 नवंबर। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाया कि 2017 से 2024 तक सपा ने कितने घोसी (ग्वाला) और कितने कमरिया समाज के लोगों को टिकट दिया। उन्होंने सपा प्रमुख पर यादव समाज में ही भेदभाव करने का आरोप लगाया। राजभर ने अखिलेश पर तंज कसते हुए लिखा कि गाय-भैंस की सेवा करने वाला अहीर समाज अब उनकी राजनीति समझने लगा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव 15 फीसदी कमरिया समाज को अपना मानते हैं, जबकि 85 फीसदी घोसी यानी ग्वाला समाज की अनदेखी कर रहे हैं।

- अहीर-अहीर में भेदभाव क्यों?

सुभासपा प्रमुख ने कहा कि उन्होंने पहली बार ऐसा यादव नेता देखा है, जो अहीर समाज के बीच ही भेद पैदा करता है। अखिलेश जाति के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं। राजभर ने अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि अब उन्हें जाग जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में 85 फीसदी ग्वाला समाज सपा को 2022 से भी बुरा दौर दिखाएगा।