रामपथ पर उतरी रामायण की दिव्य छटा, 21 झांकियों ने जीवंत किए प्रभु श्रीराम के प्रसंग
- ढोल-नगाड़ों की थाप और लोकनृत्यों के बीच निकली दीपोत्सव की भव्य शोभायात्रा, राममय हुई रामनगरी
- सात झांकियों में रामायण के सातों कांडों का चित्रण, 14 झांकियों में दिखी उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा
- महिला कलाकारों ने कंधों पर ढोल रखकर दी प्रस्तुति, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा रामपथ
- पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया शोभायात्रा का शुभारंभ, बोले- हर साल अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहा दीपोत्सव
अयोध्या, 7 नवंबर, 2026। रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव का उल्लास चरम पर नजर आया। रामपथ पर निकली भव्य शोभायात्रा ने श्रद्धालुओं को रामायण के विभिन्न प्रसंगों से रूबरू कराया। सजे-धजे रथों पर सवार प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के स्वरूपों के दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप और कलाकारों के मनमोहक प्रदर्शन ने पूरे माहौल को राममय बना दिया।
शोभायात्रा में सबसे खास आकर्षण महिला कलाकारों की ढोल वादन प्रस्तुति रही। कंधों पर ढोल रखकर थाप देती कलाकारों की टोली ने लोगों का ध्यान खींचा। नगाड़ों और ताशों की गूंज के बीच कलाकारों के हैरतअंगेज करतब और अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्यों ने उत्सव में सांस्कृतिक रंग भर दिए। रामायण के प्रसंगों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती झांकियों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। जगह-जगह जय श्रीराम के जयकारों से रामपथ गूंजता रहा।
- तीन किलोमीटर की यात्रा में दिखे रामायण के सातों कांड
साकेत महाविद्यालय परिसर से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर शोभायात्रा को रवाना किया। करीब तीन किलोमीटर की यात्रा पूरी कर शोभायात्रा रामकथा पार्क पहुंची। इस बार इसमें कुल 21 आकर्षक झांकियां शामिल की गईं। इनमें सात झांकियां रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीं, जबकि 14 झांकियों के माध्यम से योगी सरकार की विकास योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। रामायण आधारित झांकियों में बालकांड के रामजन्म और बाल लीलाओं से लेकर अयोध्याकांड के वनगमन तक की कथा दिखाई गई। अरण्यकांड के वनवासी जीवन, किष्किन्धाकांड में सुग्रीव और हनुमान से प्रभु श्रीराम की भेंट, सुंदरकांड में हनुमान जी के शौर्य, लंकाकांड में रावण के साथ युद्ध और उत्तरकांड के प्रसंगों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इन दृश्यों के जरिए दर्शकों को रामकथा की यात्रा का क्रमबद्ध अनुभव मिला।
- झांकियों में योजनाओं से लेकर डिफेंस कॉरिडोर तक की झलक
शोभायात्रा में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ प्रदेश के विकास कार्यों को भी प्रमुखता दी गई। जल जीवन मिशन, एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी), कृषि एवं पशुपालन, आयुष्मान कैशलेस योजना, स्वच्छ एवं हरित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, उत्तर प्रदेश पुलिस और मिशन शक्ति की झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आत्मनिर्भर नारी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को भी झांकियों में स्थान दिया गया। इन प्रस्तुतियों के जरिए उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और सरकारी योजनाओं को जनसामान्य के सामने रचनात्मक अंदाज में रखा गया। विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से आयोजन को देश की सांस्कृतिक विविधता का मंच बना दिया।
- 'दीपोत्सव अब उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं, विश्व का पर्व बन चुका है'
शोभायात्रा की भव्यता पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव का स्वरूप हर वर्ष और अधिक दिव्य, भव्य तथा अलौकिक होता जा रहा है। हर बार हम अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हैं और इस बार भी नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में दीपोत्सव का विशेष महत्व है। यह केवल उत्तर प्रदेश का आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि विश्वभर में पहचान बना चुका पर्व है।
मंत्री ने कहा कि रामायण के सातों कांडों पर आधारित झांकियां अयोध्या की धार्मिक पहचान, सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का दर्शन करा रही हैं। शाम को आयोजित होने वाला मुख्य दीपोत्सव कार्यक्रम भी भव्य और यादगार होगा।
- झांकियों ने जीता श्रद्धालुओं का दिल
शोभायात्रा देखने पहुंचे गोंडा के राजेश कुमार, लखनऊ के भूपेंद्र वर्मा, उन्नाव के सुशील कुमार ने कहा कि अयोध्या का बदलता स्वरूप आकर्षित करता है। दीपोत्सव की भव्यता और रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां देखकर मन आनंदित हो गया। जौनपुर से आए राम कुमार ने कलाकारों की प्रस्तुतियों और रामकथा के चित्रण की सराहना की। बलरामपुर की सुशीला ने कहा कि रामायण के प्रसंगों को जिस जीवंतता के साथ दिखाया गया, उसने मन मोह लिया।
रामपथ पर मौजूद श्रद्धालु देर तक झांकियों को निहारते रहे। प्रभु श्रीराम के स्वरूपों के दर्शन के दौरान कई लोगों ने हाथ जोड़कर नमन किया तो कुछ भावुक भी हो उठे। ढोल-नगाड़ों की थाप, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों और रामनाम के जयघोष के बीच अयोध्या की सड़कों पर भक्ति और उत्सव का अनूठा नजारा दिखाई दिया। शोभायात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अयोध्या में दीपोत्सव केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं, बल्कि रामायण की परंपरा, लोकसंस्कृति और सामूहिक आस्था का जीवंत उत्सव बन चुका है।


















Nov 07 2026, 18:20
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
0- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
3.9k