जेवर एयरपोर्ट के पास विकसित होगी ‘सिंगापुर सिटी’, औद्योगिक साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान

- वित्त एवं औद्योगिक विकास मंत्री नन्दी ने सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ की बैठक

- इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एआई और ग्रीन एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा

लखनऊ: 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश में वैश्विक निवेश को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में बुधवार को वित्त एवं औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने होटल ताज पैलेस में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक सहयोग और आधुनिक औद्योगिक एवं शहरी विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के निकट ‘सिंगापुर सिटी’ और हाईटेक इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने की परिकल्पना पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेस्ट मैनेजमेंट और आधुनिक शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में सिंगापुर की कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रस्तावित ‘सिंगापुर सिटी’ को प्रदेश में सिंगापुर की कंपनियों के कारोबार विस्तार और औद्योगिक निवेश के लिए एक मजबूत आधार के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी मंथन किया गया।

बैठक में मंत्री नन्दी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रदेश की मजबूत औद्योगिक आधारभूत संरचना, बेहतर कनेक्टिविटी, कुशल मानव संसाधन और निवेश-अनुकूल नीतियां वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसर सृजित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि सिंगापुर ने तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक औद्योगिक व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं और निवेश के अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। ऐसे में सिंगापुर की तकनीकी विशेषज्ञता और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता का समन्वय दोनों पक्षों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। इससे निवेश विस्तार, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि को नई गति मिलेगी।

- जेवर एयरपोर्ट के आसपास निवेश की व्यापक संभावनाएं

मंत्री नन्दी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र ने निवेश के नए द्वार खोले हैं। इस क्षेत्र में आधुनिक औद्योगिक इकाइयों, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ‘सिंगापुर सिटी’ विकसित करने की परिकल्पना पर काम कर रही है, ताकि सिंगापुर की कंपनियों को उत्तर प्रदेश में कारोबार स्थापित करने और उसका विस्तार करने के लिए बेहतर अवसर एवं मजबूत आधार मिल सके। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग और आधुनिक लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, तकनीक आधारित उद्योगों के विस्तार से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तर प्रदेश की वैश्विक औद्योगिक पहचान और सुदृढ़ होगी।

बैठक में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के चेयरमैन मार्क ली, सीईओ कोक पिंग सून, एसबीएफ इंडिया बिजनेस कमेटी के चेयरमैन प्रसून मुखर्जी, यूनिवर्सल सक्सेस एंटरप्राइजेज के एमडी प्रशांत मुखर्जी, आईएचसीएल (टाटा ग्रुप) के एमडी एवं सीईओ पुनीत छतवाल और एग्रीकैप इंटरनेशनल के सीईओ विशाल विजय सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुमोदित कार्ययोजनाओं को लोकार्पण के लिए दिसम्बर तक तैयार की जाए : जयवीर सिंह

- पर्यटन मंत्री ने कहा- दीपोत्सव-2026 तथा देव दीपावली का आयोजन भव्य एवं अविस्मरणीय ढंग से किया जाए

- पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने की संस्कृति तथा पर्यटन विभाग की समीक्षा

लखनऊ: 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को पर्यटन भवन में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के कार्यकलापों की गहन समीक्षा करते हुए कार्यदायी संस्थाओं एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुमोदित कार्य योजनाओं को नवम्बर तक पूरा करते हुए दिसम्बर में लोकार्पण के लिए तैयार किया जाए। उन्होंने सभी क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारियों को राज्य योजना अंतर्गत सम्मिलित परियोजनाओं के आगणनों को तीन दिन के अंदर प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। विलम्ब होने की दशा में जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्यवाही की जायेगी।

उन्होंने कार्ययोजना के अंतर्गत आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए जिलाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर उनका समाधान करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने 01 अप्रैल, 2026 से 26 अक्टूबर, 2026 तक कुल प्राप्त उपयोगिता प्रमाण पत्रों के विवरण की भी समीक्षा की। इसके अलावा पीपीपी मॉडल पर आवंटित संपत्तियों से लीज रेंट की वसूली की भी जानकारी ली। 

बैठक में बताया गया कि रामगढ़ ताल गोरखपुर तथा देवरिया एवं नैमिषारण्य सीतापुर में लीज रेंट बकाया नहीं है। इसके अलावा कालिंजर बांदा, राधाकुण्ड मथुरा, सुमेर सिंह किला इटावा, देवाशरीफ बाराबंकी, शिकोहाबाद फिरोजाबाद, गोपीगंज भदोही, मुंशीगंज अमेठी, कपिलवस्तु का कोई भी बकाया नहीं है। इसके अतिरिक्त विन्ध्याचल मिर्जापुर, भदोही झील महल रेस्टोरंेट मऊ तथा आगरा, मथुरा की सम्पत्तियों से लीज रेंट वसूला जा चुका है। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 तक जिला महोत्सव हेतु उपलब्ध कराई गयी धनराशि के सापेक्ष सम्पन्न कार्यक्रमों का विवरण एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र की समीक्षा की।

पर्यटन मंत्री ने दीपोत्सव-2026 में किये जाने वाले आयोजन एवं उनके सापेक्ष क्रियान्वयन की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिये कि दीपोत्सव-2026 को भव्य एवं अविस्मरणीय बनाने में कोई कोेताही न की जाए। इसके अतिरिक्त देव दीपावली वाराणसी-2026 के आयोजन की भी समीक्षा की। उन्होंने संग्रहालयों के क्यूरेशन कार्य, मूर्तियों के निर्माण एवं स्थापना तथा मा0 मंत्री परिषद के विचारार्थ लंबित प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए वेबसाइट पर क्यूआर कोड को लिंक कराने का कार्य निर्धारित समय में पूरा कर लिया जाए। उन्होंने प्राचीन, ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्व के स्थलों का शिलालेखन का कार्य, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, मान्यताओं एवं किवदंतियों को शामिल करते हुए किया जाए।

पर्यटन मंत्री ने पूर्व बैठकों में लिये गये निर्णय के सापेक्ष अनुपालन की भी समीक्षा की। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार के संभावित योजनाओं की स्थिति, राही पर्यटक आवास गृहों को प्रबंधकीय संविदा पर संचालन की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह चुनावी वर्ष है, इसलिए युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए सभी लंबित परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ पूरा करें।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पर्यटन संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात, निदेशक संस्कृति संजय कुमार सिंह, निदेशक एवं विशेष सचिव पर्यटन मृदुल चौधरी, विशेष सचिव संस्कृति श्रीमती दीपा रंजन, एमडी पर्यटन विकास निगम आशीष कुमार, पर्यटल सलाहकार जेपी सिंह के अलावा मंजू चौधरी, रेनू रंग भारती, तुहिन द्विवेदी एवं अन्य अधिकारी मौजूद थे।

विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में ऊर्जा क्षेत्र की होगी अहम भूमिका: ए.के. शर्मा
- स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार, सस्ती बिजली और आधुनिक ग्रिड व्यवस्था पर जोर, ORF की अंतरराष्ट्रीय विषयवस्तु वाली बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए ऊर्जा मंत्री

लखनऊ, 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वच्छ, सतत और किफायती ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि देश के भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और विकास की गति बनाए रखने में ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और उपभोक्ताओं को भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना जरूरी है।
ऊर्जा मंत्री बुधवार को ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) की ओर से ‘Powering Viksit Bharat 2047: Subnational Pathways for India's Energy Transition’ विषय पर आयोजित बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, विद्युत आपूर्ति को विश्वसनीय एवं किफायती बनाने, बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
- सौर ऊर्जा के विस्तार और आधुनिक तकनीक पर जोर
मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने में ऊर्जा क्षेत्र की अहम भागीदारी है। उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने के साथ प्रदेशवासियों को सुलभ और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का विस्तार करना होगा। इसके साथ ही विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की जरूरत है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करके प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाया जा सकता है।
- राज्यों के बीच समन्वय से ऊर्जा संक्रमण को मिलेगी गति
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि देश में ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सफल प्रयोगों का आदान-प्रदान जरूरी है। प्रत्येक राज्य की ऊर्जा संबंधी जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप नीतियां तैयार करने से स्वच्छ ऊर्जा के विकास को गति मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वच्छ, सतत और किफायती ऊर्जा व्यवस्था के निर्माण के जरिए राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, आधुनिक विद्युत ढांचे और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था पर केंद्रित प्रयास प्रदेश को भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
गोमती नदी में छोड़ी गईं 50 हजार मछलियों की अंगुलिकाएं, जलीय जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
- उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य विकास मंत्री संजय निषाद की मौजूदगी में रिवर रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित, मछुआरों की आजीविका मजबूत करने पर जोर

लखनऊ, 28 अक्टूबर। गोमती नदी में मछलियों की प्राकृतिक आबादी बढ़ाने और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के उद्देश्य से बुधवार को रिवर रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। लक्ष्मण पार्क स्थित रिवर फ्रंट पर आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की मौजूदगी में 50 हजार मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को नदी में छोड़ा गया। इस पहल से नदी में मत्स्य संसाधनों के संवर्धन, स्थानीय मछली प्रजातियों के संरक्षण और मछुआरा समुदाय की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में प्रयास किए गए।
कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक पद्धति से तैयार 80 से 100 मिलीमीटर आकार की गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज अंगुलिकाओं का गोमती नदी में संचय किया गया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मछलियों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ जलीय जैव विविधता को संरक्षित करना और नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में योगदान देना है।
- नदी संरक्षण में अहम है रिवर रैंचिंग
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि नदियों की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने और मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने में रिवर रैंचिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जनभागीदारी के जरिए प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के सम्मान, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है। मछुआरा समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उनके पारंपरिक व्यवसाय को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदी में मछलियों की उपलब्धता बढ़ने से मत्स्य क्षेत्र के विकास और इससे जुड़े लोगों की आजीविका को भी सहारा मिल सकता है।
- मछुआरों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश सरकार नदियों में मत्स्य संपदा के संरक्षण, जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देने और मछुआरा समुदाय की आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। रिवर रैंचिंग प्राकृतिक जल संसाधनों में मछलियों की आबादी बनाए रखने और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल है।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में उपयुक्त प्रजातियों की गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ा जाता है। अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर इससे मछलियों की प्राकृतिक आबादी बढ़ने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहन मिलता है।
मंत्री ने कहा कि नदी और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर पारंपरिक मछुआरा परिवारों की आजीविका को मजबूत करना भी इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। स्थानीय और देशज मछली प्रजातियों के संरक्षण के साथ मत्स्य क्षेत्र में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के विशेष सचिव सुशील कुमार, उप निदेशक पुनीत कुमार, उप निदेशक उग्रसेन सिंह, उप निदेशक सृष्टि यादव सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
उप्र के ओशो अद्वैत ने मात्र 6 वर्ष की आयु मे सभी 12 ज्योतिर्लिंग और 4 धाम की यात्रा कर रचा कीर्तिमान

 ​लखनऊ। ​सुशांत गोल्फ सिटी (अंसल एपीआई), लखनऊ निवासी मात्र 6 वर्ष 1 महीने के बालक ओशो अद्वैत ने सनातन धर्म के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों और 4 धामों की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। माता तृप्ति पंडित और पिता संयोग कुमार राजपूत के सुपुत्र ओशो अद्वैत ने इतनी छोटी उम्र में यह कठिन और भक्तिमयी यात्रा पूरी कर सभी को अचंभित व प्रेरित किया है। ​ओशो अद्वैत की यह भक्ति यात्रा 06 मई 2023 को बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ शुरू हुई थी, जो 22 अक्टूबर 2026 को बाबा केदारनाथ के दर्शन के साथ संपन्न हुई।

- 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा का विवरण:

​काशी विश्वनाथ – 06 मई 2023

​ओंकारेश्वर – 16 नवंबर 2024

​महाकालेश्वर – 18 नवंबर 2024

​त्र्यंबकेश्वर – 11 मार्च 2025

​भीमाशंकर – 12 मार्च 2025

​घृष्णेश्वर – 13 मार्च 2025

​वैद्यनाथ – 08 जून 2025

​सोमनाथ – 24 जून 2025

​नागेश्वर – 26 जून 2025

​मल्लिकार्जुन – 11 अगस्त 2025

​रामेश्वरम – 13 अगस्त 2025

​केदारनाथ – 22 अक्टूबर 2026

- 4 धाम यात्रा का विवरण:

​द्वारका – 25 जून 2025

​रामेश्वरम – 13 अगस्त 2025

​जगन्नाथ पुरी – 28 अगस्त 2026

​बद्रीनाथ – 19 अक्टूबर 2026

उल्लेखनीय है कि ​इतनी अल्प आयु में दुर्गम पहाड़ियों और कठिन मौसम की परवाह किए बिना भगवान शिव और विष्णु के इन सभी परम पवित्र धामों के दर्शन करना ओशो अद्वैत की अद्भुत ईश्वर भक्ति और परिवार के दृढ संकल्प को दर्शाता है। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है।

सपा का पीडीए सिर्फ ढोंग; अखिलेश की नजर में पिछड़ों और दलितों का कोई सम्मान नहीं : ओपी राजभर

- कहा - अखिलेश यादव सिर्फ अपनी जाति को आगे बढ़ाते हैं; सत्ता में रहते क्यों याद नहीं आए कश्यप-प्रजापति ?
- सपा की काली करतूत से जनता अच्छी तरह वाकिफ, यूपी में फिर बनेगी एनडीए सरकार: राजभर का दावा

लखनऊ। कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज अखिलेश यादव सत्ता से बाहर हैं, तो उन्हें पिछड़ी जातियों की अहमियत समझ आ रही है। लेकिन जब वे सत्ता में थे, तब केवल अपनी जाति को आगे बढ़ाने में लगे हुए थे। तब उन्होंने कश्यप, प्रजापति, पाल, नाई, गोंड़ और बंजारा जैसी जातियों के लिए कुछ नहीं किया।
- ‘गैर यादव पिछड़ों से अखिलेश को कोई लेना-देना नहीं’
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पूरा देश जानता है कि अखिलेश यादव केवल अपनी जाति को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जब वो सपा के साथ सरकार में थे, तब अखिलेश यादव से पिछड़ों को प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाते थे। लेकिन तब अखिलेश यादव पूछते थे कि ये कौन लोग हैं और कहां रहते हैं। आज जब जनता ने इन्हें सत्ता से बाहर कर दिया तो उन्हें इनके सम्मान की चिंता सता रही है। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को पिछड़ों और दलितों से कोई मतलब नहीं है। बस वो चुनाव जीतने के लिए पीडीए का ढोंग फैला रहे हैं। लेकिन यूपी की जनता अब सपा के काले इरादों को समझ चुकी है।
- ‘संविधान खतरे में नहीं, अखिलेश को परिवार बचाने की चिंता’
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को संविधान की चिंता नहीं है। बल्कि उनकी पूरी कोशिश है कि उनका परिवार राजनीति में बना रहे। इसके लिए वे लगातार जनता के बीच भ्रम और झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी के रहते हुए संविधान को कोई खतरा नहीं हो सकता।
गोवंश संरक्षण के लिए मंडी परिषद देगी 69.16 करोड़, दस वर्षों में 15 गुना बढ़ा प्रावधान
- गोसेवा आयोग को 34.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी
- मंडियों की कुल आय का तीन प्रतिशत गोवंश संरक्षण पर होगा खर्च

लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण पर खर्च किया जा रहा है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 69.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें से 34.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग को जारी कर दी गई है। बीते दस वर्षों में गोवंश संरक्षण के लिए मंडी परिषद का वार्षिक वित्तीय प्रावधान 15 गुने से अधिक बढ़ा है। वर्ष 2016-17 में इस मद में महज 4.51 करोड़ रुपये दिए गए थे।
मंडी परिषद मंडी शुल्क, सेस और अन्य मदों से प्राप्त कुल आय का तीन प्रतिशत गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराती है। इस धनराशि का उपयोग पंजीकृत गोशालाओं में संरक्षित निराश्रित गोवंश के चारे, आश्रय, टीकाकरण, चिकित्सा और देखभाल संबंधी व्यवस्थाओं में किया जाता है। इस प्रकार कृषि उपज के विपणन से प्राप्त राजस्व गोवंश संरक्षण का भी आर्थिक आधार बन रहा है।
गोवंश संरक्षण के लिए वर्ष 2019 में गोसेवा आयोग को दिए जाने वाले अनुदान का प्रावधान दो प्रतिशत किया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंडी परिषद के संचालक मंडल ने परिषद की कुल आय का तीन प्रतिशत गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसके तहत धनराशि दो किस्तों में जारी की जाती है। पहली किस्त में डेढ़ प्रतिशत राशि दी जाती है, जबकि शेष डेढ़ प्रतिशत पहली किस्त का उपयोगिता प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी किया जाता है।
मंडी परिषद की ओर से गोसेवा आयोग को दिए जाने वाले अनुदान में पिछले वर्षों के दौरान लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में 31.69 करोड़ रुपये, 2023-24 में 45.66 करोड़ रुपये और 2024-25 में 51.50 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 59.14 करोड़ रुपये पहुंच गई। गोवंश के भरण-पोषण के साथ गो-आश्रय स्थलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर है। इसके अंतर्गत दूध, गोबर और कम्पोस्ट जैसे उत्पादों के विक्रय से अतिरिक्त आय अर्जित कर आश्रय स्थलों के संचालन में उपयोग करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे गोशालाओं के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकेंगे।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में निराश्रित गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंडी परिषद किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए भी आर्थिक सहयोग दे रही है। इससे गोशालाओं में गोवंश के भरण-पोषण और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027: निर्वाचन आयोग ने कसी तबादलों पर लगाम, 30 नवंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
- तीन साल से एक ही जिले में तैनात निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों का होगा स्थानांतरण, मंडलायुक्त से लेकर पुलिस, आबकारी और परिवहन विभाग के अधिकारियों तक लागू होंगे निर्देश
- पिछले विधानसभा चुनाव या उपचुनाव में तैनात अधिकारियों को उसी क्षेत्र में दोबारा जिम्मेदारी देने पर भी रोक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 की तैयारियों के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की तैनाती एवं स्थानांतरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावमुक्त बनाए रखना है। इन निर्देशों के तहत निर्धारित अवधि से एक ही जिले में तैनात निर्वाचन कार्यों से सीधे जुड़े अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा। राज्य सरकार को इस संबंध में की गई कार्रवाई की समेकित रिपोर्ट 30 नवंबर, 2026 तक आयोग को भेजनी होगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि आयोग ने चुनाव से जुड़े अधिकारियों की तैनाती के लिए स्पष्ट मानक तय किए हैं। निर्देशों के अनुसार, ऐसे अधिकारी जिन्होंने पिछले चार वर्षों की अवधि में 31 मई, 2027 तक एक ही जनपद में तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें निर्धारित स्थानांतरण नीति के अनुरूप जिले से बाहर तैनात किया जाएगा। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अपने-अपने स्तर पर की गई कार्रवाई का विवरण निर्धारित समयसीमा में निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराना होगा।
- प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नगर निकायों तक लागू होंगे नियम
स्थानांतरण नीति के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी समेत निर्वाचन कार्यों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े समान स्तर के अधिकारियों पर भी ये नियम लागू होंगे।
आयोग के निर्देश मंडलायुक्तों, नगर आयुक्तों तथा नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में कार्यरत संबंधित अधिकारियों पर भी प्रभावी होंगे। पुलिस विभाग में उप निरीक्षक और उनसे वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के साथ आबकारी विभाग के उप निरीक्षक एवं उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी निर्धारित नीति के अनुसार स्थानांतरित किया जाएगा। परिवहन विभाग के सब-इंस्पेक्टर और उनसे वरिष्ठ क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती में भी इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
- गृह जनपद में तैनाती नहीं, पुरानी चुनावी जिम्मेदारी भी बनेगी बाधा
आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर तथा पुलिस इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों को उस विधानसभा क्षेत्र या जनपद में दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा, जहां उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए किसी उपचुनाव के दौरान जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे अधिकारियों को संबंधित क्षेत्र में पद पर बने रहने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
- कुछ श्रेणियों को मिलेगी छूट
आयोग ने राज्य मुख्यालयों में तैनात संबंधित विभागीय अधिकारियों, निर्वाचन कार्यों से असंबद्ध तकनीकी कर्मचारियों तथा सेक्टर ऑफिसर और जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अधिकारियों को सामान्यतः इस स्थानांतरण नीति से छूट दी है। हालांकि, ऐसे अधिकारियों के कामकाज और आचरण पर संबंधित पर्यवेक्षकों, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी तथा रिटर्निंग ऑफिसर को निगरानी रखनी होगी, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहे।इसके अलावा 31 मई, 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को भी स्थानांतरण नीति से छूट दी जाएगी। हालांकि, ऐसे अधिकारियों को निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों का प्रभार नहीं सौंपा जाएगा।आयोग के इन निर्देशों के अनुपालन को आगामी विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। निर्धारित समयसीमा में स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने और उसकी रिपोर्ट सौंपने से चुनाव के दौरान अधिकारियों की निष्पक्ष तैनाती सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
एक स्नातक तथा पांच शिक्षक क्षेत्र के उम्मीदवार विजयी घोषित

लखनऊ, 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 05 स्नातक व 06 शिक्षक द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत अभी तक प्राप्त सूचना के अनुसार 01 स्नातक तथा 05 शिक्षक क्षेत्र के उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया गया है।

घोषित परिणाम निम्नवत हैं- 

1. मेरठ स्नातक क्षेत्र- दिनेश कुमार गोयल (भारतीय जनता पार्टी)

2. लखनऊ शिक्षक क्षेत्र- उमेश द्विवेदी (भारतीय जनता पार्टी) 

3. वाराणसी शिक्षक क्षेत्र- लाल बिहारी यादव (समाजवादी पार्टी) 

4. आगरा शिक्षक क्षेत्र- डॉo आकाश अग्रवाल (समाजवादी पार्टी) 

5. मेरठ शिक्षक क्षेत्र- श्रीचन्द शर्मा (भारतीय जनता पार्टी) 

6. बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र- डाo हरि सिंह ढिल्लो (भारतीय जनता पार्टी)

एक सप्ताह में मान्यता प्राप्त पत्रकारों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करें: सूचना निदेशक

- AB-PMJAY के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु पोर्टल को Go-Live करने की सहमति

- सूचना निदेशक विशाल सिंह की अध्यक्षता में AB-PMJAY पोर्टल संचालन का प्रशिक्षण सम्पन्न

लखनऊ। सूचना निदेशालय के सभागार में सूचना निदेशक, विशाल सिंह की अध्यक्षता में स्टेट हेल्थ एजेंसी, आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों एवं उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु विकसित किए गए नवीन पोर्टल के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। 

सूचना निदेशक सिंह द्वारा पोर्टल को Go-Live किये जाने की सहमति प्रदान की गई, तत्पश्चात स्टेट हेल्थ एजेंसी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अधिकारियों द्वारा पोर्टल के Process Flow का प्रस्तुतिकरण किया गया। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को आयुष्मान कार्ड जारी करने की प्रक्रिया, आवेदन, सत्यापन और कार्ड डाउनलोड करने की पूरी प्रक्रिया को लाइव डेमो के माध्यम से समझाया गया। इस प्रक्रिया में मुख्यालय एवं प्रदेश के समस्त जिला सूचना कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। 

सूचना निदेशक ने बताया कि पोर्टल को पत्रकारों के लिए सरल एवं सुगम बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक मान्यता प्राप्त पत्रकार बंधु व उनके परिजनों को इसका त्वरित लाभ मिल सकें। उन्होंने प्रदेश के समस्त जनपदीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे पत्रकार, जो मान्यता प्राप्त है, उनके व उनके परिजनों के आयुष्मान कार्ड अभी तक नहीं बने है, एक सप्ताह के अंदर समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करे। साथ ही मुख्यालय को भी अवगत कराए, ताकि मुख्यालय स्तर से अग्रेतर कार्यवाई त्वरित गति से सुनिश्चित करायी जा सके। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही न बरती जाएं।

बैठक में वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक सतीश चन्द्र भारती, डॉ. जितेन्द्र प्रताप सिंह, अमित कुमार यादव, महेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी/ कर्मचारी उपस्थित रहे।