विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में ऊर्जा क्षेत्र की होगी अहम भूमिका: ए.के. शर्मा
- स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार, सस्ती बिजली और आधुनिक ग्रिड व्यवस्था पर जोर, ORF की अंतरराष्ट्रीय विषयवस्तु वाली बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए ऊर्जा मंत्री

लखनऊ, 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वच्छ, सतत और किफायती ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि देश के भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और विकास की गति बनाए रखने में ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और उपभोक्ताओं को भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना जरूरी है।
ऊर्जा मंत्री बुधवार को ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) की ओर से ‘Powering Viksit Bharat 2047: Subnational Pathways for India's Energy Transition’ विषय पर आयोजित बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। बैठक में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, विद्युत आपूर्ति को विश्वसनीय एवं किफायती बनाने, बिजली ग्रिड के आधुनिकीकरण और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
- सौर ऊर्जा के विस्तार और आधुनिक तकनीक पर जोर
मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने में ऊर्जा क्षेत्र की अहम भागीदारी है। उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा संसाधनों को बढ़ावा देने के साथ प्रदेशवासियों को सुलभ और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि भविष्य की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का विस्तार करना होगा। इसके साथ ही विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की जरूरत है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करके प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाया जा सकता है।
- राज्यों के बीच समन्वय से ऊर्जा संक्रमण को मिलेगी गति
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि देश में ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सफल प्रयोगों का आदान-प्रदान जरूरी है। प्रत्येक राज्य की ऊर्जा संबंधी जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप नीतियां तैयार करने से स्वच्छ ऊर्जा के विकास को गति मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वच्छ, सतत और किफायती ऊर्जा व्यवस्था के निर्माण के जरिए राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, आधुनिक विद्युत ढांचे और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था पर केंद्रित प्रयास प्रदेश को भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
गोमती नदी में छोड़ी गईं 50 हजार मछलियों की अंगुलिकाएं, जलीय जैव विविधता को मिलेगा बढ़ावा
- उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य विकास मंत्री संजय निषाद की मौजूदगी में रिवर रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित, मछुआरों की आजीविका मजबूत करने पर जोर

लखनऊ, 28 अक्टूबर। गोमती नदी में मछलियों की प्राकृतिक आबादी बढ़ाने और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के उद्देश्य से बुधवार को रिवर रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। लक्ष्मण पार्क स्थित रिवर फ्रंट पर आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की मौजूदगी में 50 हजार मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को नदी में छोड़ा गया। इस पहल से नदी में मत्स्य संसाधनों के संवर्धन, स्थानीय मछली प्रजातियों के संरक्षण और मछुआरा समुदाय की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में प्रयास किए गए।
कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक पद्धति से तैयार 80 से 100 मिलीमीटर आकार की गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज अंगुलिकाओं का गोमती नदी में संचय किया गया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मछलियों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ जलीय जैव विविधता को संरक्षित करना और नदी के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में योगदान देना है।
- नदी संरक्षण में अहम है रिवर रैंचिंग
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि नदियों की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने और मत्स्य संसाधनों को बढ़ाने में रिवर रैंचिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जनभागीदारी के जरिए प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मत्स्य पालकों के सम्मान, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है। मछुआरा समुदाय को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उनके पारंपरिक व्यवसाय को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदी में मछलियों की उपलब्धता बढ़ने से मत्स्य क्षेत्र के विकास और इससे जुड़े लोगों की आजीविका को भी सहारा मिल सकता है।
- मछुआरों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि प्रदेश सरकार नदियों में मत्स्य संपदा के संरक्षण, जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देने और मछुआरा समुदाय की आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। रिवर रैंचिंग प्राकृतिक जल संसाधनों में मछलियों की आबादी बनाए रखने और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल है।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में उपयुक्त प्रजातियों की गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज अंगुलिकाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों में छोड़ा जाता है। अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर इससे मछलियों की प्राकृतिक आबादी बढ़ने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहन मिलता है।
मंत्री ने कहा कि नदी और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर पारंपरिक मछुआरा परिवारों की आजीविका को मजबूत करना भी इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। स्थानीय और देशज मछली प्रजातियों के संरक्षण के साथ मत्स्य क्षेत्र में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के विशेष सचिव सुशील कुमार, उप निदेशक पुनीत कुमार, उप निदेशक उग्रसेन सिंह, उप निदेशक सृष्टि यादव सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
उप्र के ओशो अद्वैत ने मात्र 6 वर्ष की आयु मे सभी 12 ज्योतिर्लिंग और 4 धाम की यात्रा कर रचा कीर्तिमान

 ​लखनऊ। ​सुशांत गोल्फ सिटी (अंसल एपीआई), लखनऊ निवासी मात्र 6 वर्ष 1 महीने के बालक ओशो अद्वैत ने सनातन धर्म के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों और 4 धामों की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। माता तृप्ति पंडित और पिता संयोग कुमार राजपूत के सुपुत्र ओशो अद्वैत ने इतनी छोटी उम्र में यह कठिन और भक्तिमयी यात्रा पूरी कर सभी को अचंभित व प्रेरित किया है। ​ओशो अद्वैत की यह भक्ति यात्रा 06 मई 2023 को बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ शुरू हुई थी, जो 22 अक्टूबर 2026 को बाबा केदारनाथ के दर्शन के साथ संपन्न हुई।

- 12 ज्योतिर्लिंग यात्रा का विवरण:

​काशी विश्वनाथ – 06 मई 2023

​ओंकारेश्वर – 16 नवंबर 2024

​महाकालेश्वर – 18 नवंबर 2024

​त्र्यंबकेश्वर – 11 मार्च 2025

​भीमाशंकर – 12 मार्च 2025

​घृष्णेश्वर – 13 मार्च 2025

​वैद्यनाथ – 08 जून 2025

​सोमनाथ – 24 जून 2025

​नागेश्वर – 26 जून 2025

​मल्लिकार्जुन – 11 अगस्त 2025

​रामेश्वरम – 13 अगस्त 2025

​केदारनाथ – 22 अक्टूबर 2026

- 4 धाम यात्रा का विवरण:

​द्वारका – 25 जून 2025

​रामेश्वरम – 13 अगस्त 2025

​जगन्नाथ पुरी – 28 अगस्त 2026

​बद्रीनाथ – 19 अक्टूबर 2026

उल्लेखनीय है कि ​इतनी अल्प आयु में दुर्गम पहाड़ियों और कठिन मौसम की परवाह किए बिना भगवान शिव और विष्णु के इन सभी परम पवित्र धामों के दर्शन करना ओशो अद्वैत की अद्भुत ईश्वर भक्ति और परिवार के दृढ संकल्प को दर्शाता है। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है।

सपा का पीडीए सिर्फ ढोंग; अखिलेश की नजर में पिछड़ों और दलितों का कोई सम्मान नहीं : ओपी राजभर

- कहा - अखिलेश यादव सिर्फ अपनी जाति को आगे बढ़ाते हैं; सत्ता में रहते क्यों याद नहीं आए कश्यप-प्रजापति ?
- सपा की काली करतूत से जनता अच्छी तरह वाकिफ, यूपी में फिर बनेगी एनडीए सरकार: राजभर का दावा

लखनऊ। कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज अखिलेश यादव सत्ता से बाहर हैं, तो उन्हें पिछड़ी जातियों की अहमियत समझ आ रही है। लेकिन जब वे सत्ता में थे, तब केवल अपनी जाति को आगे बढ़ाने में लगे हुए थे। तब उन्होंने कश्यप, प्रजापति, पाल, नाई, गोंड़ और बंजारा जैसी जातियों के लिए कुछ नहीं किया।
- ‘गैर यादव पिछड़ों से अखिलेश को कोई लेना-देना नहीं’
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पूरा देश जानता है कि अखिलेश यादव केवल अपनी जाति को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जब वो सपा के साथ सरकार में थे, तब अखिलेश यादव से पिछड़ों को प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाते थे। लेकिन तब अखिलेश यादव पूछते थे कि ये कौन लोग हैं और कहां रहते हैं। आज जब जनता ने इन्हें सत्ता से बाहर कर दिया तो उन्हें इनके सम्मान की चिंता सता रही है। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को पिछड़ों और दलितों से कोई मतलब नहीं है। बस वो चुनाव जीतने के लिए पीडीए का ढोंग फैला रहे हैं। लेकिन यूपी की जनता अब सपा के काले इरादों को समझ चुकी है।
- ‘संविधान खतरे में नहीं, अखिलेश को परिवार बचाने की चिंता’
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को संविधान की चिंता नहीं है। बल्कि उनकी पूरी कोशिश है कि उनका परिवार राजनीति में बना रहे। इसके लिए वे लगातार जनता के बीच भ्रम और झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी के रहते हुए संविधान को कोई खतरा नहीं हो सकता।
गोवंश संरक्षण के लिए मंडी परिषद देगी 69.16 करोड़, दस वर्षों में 15 गुना बढ़ा प्रावधान
- गोसेवा आयोग को 34.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी
- मंडियों की कुल आय का तीन प्रतिशत गोवंश संरक्षण पर होगा खर्च

लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की कृषि मंडियों से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण पर खर्च किया जा रहा है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 69.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें से 34.58 करोड़ रुपये की पहली किस्त उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग को जारी कर दी गई है। बीते दस वर्षों में गोवंश संरक्षण के लिए मंडी परिषद का वार्षिक वित्तीय प्रावधान 15 गुने से अधिक बढ़ा है। वर्ष 2016-17 में इस मद में महज 4.51 करोड़ रुपये दिए गए थे।
मंडी परिषद मंडी शुल्क, सेस और अन्य मदों से प्राप्त कुल आय का तीन प्रतिशत गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराती है। इस धनराशि का उपयोग पंजीकृत गोशालाओं में संरक्षित निराश्रित गोवंश के चारे, आश्रय, टीकाकरण, चिकित्सा और देखभाल संबंधी व्यवस्थाओं में किया जाता है। इस प्रकार कृषि उपज के विपणन से प्राप्त राजस्व गोवंश संरक्षण का भी आर्थिक आधार बन रहा है।
गोवंश संरक्षण के लिए वर्ष 2019 में गोसेवा आयोग को दिए जाने वाले अनुदान का प्रावधान दो प्रतिशत किया गया था। इसके बाद वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंडी परिषद के संचालक मंडल ने परिषद की कुल आय का तीन प्रतिशत गोसेवा आयोग को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसके तहत धनराशि दो किस्तों में जारी की जाती है। पहली किस्त में डेढ़ प्रतिशत राशि दी जाती है, जबकि शेष डेढ़ प्रतिशत पहली किस्त का उपयोगिता प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी किया जाता है।
मंडी परिषद की ओर से गोसेवा आयोग को दिए जाने वाले अनुदान में पिछले वर्षों के दौरान लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-20 में 31.69 करोड़ रुपये, 2023-24 में 45.66 करोड़ रुपये और 2024-25 में 51.50 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 59.14 करोड़ रुपये पहुंच गई। गोवंश के भरण-पोषण के साथ गो-आश्रय स्थलों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर है। इसके अंतर्गत दूध, गोबर और कम्पोस्ट जैसे उत्पादों के विक्रय से अतिरिक्त आय अर्जित कर आश्रय स्थलों के संचालन में उपयोग करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे गोशालाओं के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकेंगे।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में निराश्रित गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंडी परिषद किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए भी आर्थिक सहयोग दे रही है। इससे गोशालाओं में गोवंश के भरण-पोषण और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027: निर्वाचन आयोग ने कसी तबादलों पर लगाम, 30 नवंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
- तीन साल से एक ही जिले में तैनात निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों का होगा स्थानांतरण, मंडलायुक्त से लेकर पुलिस, आबकारी और परिवहन विभाग के अधिकारियों तक लागू होंगे निर्देश
- पिछले विधानसभा चुनाव या उपचुनाव में तैनात अधिकारियों को उसी क्षेत्र में दोबारा जिम्मेदारी देने पर भी रोक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा सामान्य निर्वाचन-2027 की तैयारियों के मद्देनजर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की तैनाती एवं स्थानांतरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावमुक्त बनाए रखना है। इन निर्देशों के तहत निर्धारित अवधि से एक ही जिले में तैनात निर्वाचन कार्यों से सीधे जुड़े अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा। राज्य सरकार को इस संबंध में की गई कार्रवाई की समेकित रिपोर्ट 30 नवंबर, 2026 तक आयोग को भेजनी होगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि आयोग ने चुनाव से जुड़े अधिकारियों की तैनाती के लिए स्पष्ट मानक तय किए हैं। निर्देशों के अनुसार, ऐसे अधिकारी जिन्होंने पिछले चार वर्षों की अवधि में 31 मई, 2027 तक एक ही जनपद में तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें निर्धारित स्थानांतरण नीति के अनुरूप जिले से बाहर तैनात किया जाएगा। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अपने-अपने स्तर पर की गई कार्रवाई का विवरण निर्धारित समयसीमा में निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराना होगा।
- प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नगर निकायों तक लागू होंगे नियम
स्थानांतरण नीति के दायरे में जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी समेत निर्वाचन कार्यों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े समान स्तर के अधिकारियों पर भी ये नियम लागू होंगे।
आयोग के निर्देश मंडलायुक्तों, नगर आयुक्तों तथा नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में कार्यरत संबंधित अधिकारियों पर भी प्रभावी होंगे। पुलिस विभाग में उप निरीक्षक और उनसे वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के साथ आबकारी विभाग के उप निरीक्षक एवं उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी निर्धारित नीति के अनुसार स्थानांतरित किया जाएगा। परिवहन विभाग के सब-इंस्पेक्टर और उनसे वरिष्ठ क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती में भी इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
- गृह जनपद में तैनाती नहीं, पुरानी चुनावी जिम्मेदारी भी बनेगी बाधा
आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण की कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर तथा पुलिस इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों को उस विधानसभा क्षेत्र या जनपद में दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा, जहां उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए किसी उपचुनाव के दौरान जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे अधिकारियों को संबंधित क्षेत्र में पद पर बने रहने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।
- कुछ श्रेणियों को मिलेगी छूट
आयोग ने राज्य मुख्यालयों में तैनात संबंधित विभागीय अधिकारियों, निर्वाचन कार्यों से असंबद्ध तकनीकी कर्मचारियों तथा सेक्टर ऑफिसर और जोनल मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात अधिकारियों को सामान्यतः इस स्थानांतरण नीति से छूट दी है। हालांकि, ऐसे अधिकारियों के कामकाज और आचरण पर संबंधित पर्यवेक्षकों, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी तथा रिटर्निंग ऑफिसर को निगरानी रखनी होगी, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहे।इसके अलावा 31 मई, 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को भी स्थानांतरण नीति से छूट दी जाएगी। हालांकि, ऐसे अधिकारियों को निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों का प्रभार नहीं सौंपा जाएगा।आयोग के इन निर्देशों के अनुपालन को आगामी विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। निर्धारित समयसीमा में स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी करने और उसकी रिपोर्ट सौंपने से चुनाव के दौरान अधिकारियों की निष्पक्ष तैनाती सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
एक स्नातक तथा पांच शिक्षक क्षेत्र के उम्मीदवार विजयी घोषित

लखनऊ, 28 अक्टूबर, 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के 05 स्नातक व 06 शिक्षक द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत अभी तक प्राप्त सूचना के अनुसार 01 स्नातक तथा 05 शिक्षक क्षेत्र के उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया गया है।

घोषित परिणाम निम्नवत हैं- 

1. मेरठ स्नातक क्षेत्र- दिनेश कुमार गोयल (भारतीय जनता पार्टी)

2. लखनऊ शिक्षक क्षेत्र- उमेश द्विवेदी (भारतीय जनता पार्टी) 

3. वाराणसी शिक्षक क्षेत्र- लाल बिहारी यादव (समाजवादी पार्टी) 

4. आगरा शिक्षक क्षेत्र- डॉo आकाश अग्रवाल (समाजवादी पार्टी) 

5. मेरठ शिक्षक क्षेत्र- श्रीचन्द शर्मा (भारतीय जनता पार्टी) 

6. बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र- डाo हरि सिंह ढिल्लो (भारतीय जनता पार्टी)

एक सप्ताह में मान्यता प्राप्त पत्रकारों का विवरण पोर्टल पर अपलोड करें: सूचना निदेशक

- AB-PMJAY के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु पोर्टल को Go-Live करने की सहमति

- सूचना निदेशक विशाल सिंह की अध्यक्षता में AB-PMJAY पोर्टल संचालन का प्रशिक्षण सम्पन्न

लखनऊ। सूचना निदेशालय के सभागार में सूचना निदेशक, विशाल सिंह की अध्यक्षता में स्टेट हेल्थ एजेंसी, आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों एवं उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु विकसित किए गए नवीन पोर्टल के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। 

सूचना निदेशक सिंह द्वारा पोर्टल को Go-Live किये जाने की सहमति प्रदान की गई, तत्पश्चात स्टेट हेल्थ एजेंसी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अधिकारियों द्वारा पोर्टल के Process Flow का प्रस्तुतिकरण किया गया। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को आयुष्मान कार्ड जारी करने की प्रक्रिया, आवेदन, सत्यापन और कार्ड डाउनलोड करने की पूरी प्रक्रिया को लाइव डेमो के माध्यम से समझाया गया। इस प्रक्रिया में मुख्यालय एवं प्रदेश के समस्त जिला सूचना कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया। 

सूचना निदेशक ने बताया कि पोर्टल को पत्रकारों के लिए सरल एवं सुगम बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक मान्यता प्राप्त पत्रकार बंधु व उनके परिजनों को इसका त्वरित लाभ मिल सकें। उन्होंने प्रदेश के समस्त जनपदीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे पत्रकार, जो मान्यता प्राप्त है, उनके व उनके परिजनों के आयुष्मान कार्ड अभी तक नहीं बने है, एक सप्ताह के अंदर समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करे। साथ ही मुख्यालय को भी अवगत कराए, ताकि मुख्यालय स्तर से अग्रेतर कार्यवाई त्वरित गति से सुनिश्चित करायी जा सके। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही न बरती जाएं।

बैठक में वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी संजय कुमार सिंह, सहायक निदेशक सतीश चन्द्र भारती, डॉ. जितेन्द्र प्रताप सिंह, अमित कुमार यादव, महेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी/ कर्मचारी उपस्थित रहे।

श्रम संवाद 2026 का समापन- चारों श्रम संहिताओं के अनुपालन पर विस्तृत मार्गदर्शन, उद्योग जगत की शंकाओं का मौके पर समाधान

लखनऊ, 27 अक्टूबर 2026।
श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, भारत सरकार तथा श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में होटल ताज, लखनऊ में आयोजित दो-दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण एवं जागरूकता कार्यक्रम “श्रम संवाद 2026” के दूसरे दिन आज चारों श्रम संहिताओं के अनुपालन पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए।
मा0 राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन, उत्तर प्रदेश सरकार श्री मनोहर लाल मन्नू कोरी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मा. राज्य मंत्री, श्रम एवं सेवायोजन श्री मनोहर लाल मन्नू कोरी ने कहा कि श्रमिक कल्याण और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस दोनों सरकार की प्राथमिकता हैं। श्रमिकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। नई श्रम संहिताओं से उद्योग जगत को अनेक समस्याओं से छुटकारा मिलेगा, उत्पादकता बढ़ेगी तथा भर्ती और वेतन में पारदर्शिता आएगी।
उन्होंने बताया कि श्रम कल्याण के कई क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है, और निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय व पेंशन जैसी व्यवस्थाएँ संचालित हैं। कार्यक्रम के लिए लखनऊ को चुनने हेतु उन्होंने श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का आभार व्यक्त किया।
प्रधान श्रम एवं रोज़गार सलाहकार आलोक चन्द्र ने कहा कि श्रम कानूनों का लगभग 90 प्रतिशत क्रियान्वयन राज्य स्तर पर होता है, इसलिए केंद्र व राज्य को साथ मिलकर काम करना होगा और प्रवर्तन एजेंसियों, उद्योग, एचआर व विधिक सलाहकारों में स्पष्टता ज़रूरी है।
निदेशक, श्रम सुधार, डॉ. पी.के. जेना ने बताया कि श्रम संवाद देश के 116 औद्योगिक जनपदों में आयोजित किया जाना है; लखनऊ का यह 17वाँ आयोजन है। 29 श्रम कानूनों को समाहित कर बनी चारों संहिताएँ 21 नवंबर 2025 से पूरे देश में लागू हैं। उन्होंने वैधानिक राष्ट्रीय फ्लोर वेज, सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन, वेतन की एकल परिभाषा, गिग व प्लेटफॉर्म श्रमिकों को पहली बार कानूनी पहचान व सामाजिक सुरक्षा, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को एक वर्ष पर ग्रेच्युटी, आवागमन के दौरान दुर्घटना पर मुआवज़ा, रजिस्टर 84 से घटकर 8 किये जाने और रिटर्न 31 से घटकर एक किये जाने, एकल पंजीकरण व एकल लाइसेंस, नियुक्ति पत्र अनिवार्य, तथा छंटनी व स्थायी आदेश की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 किये जाने तथा अब निरीक्षक “इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर” होंगे, कार्यवाही से पहले 30 दिन का सुधार नोटिस मिलेगा और अपराधों के शमन (कंपाउंडिंग) की व्यवस्था पहली बार की गई है।
वेतन संहिता पर निदेशक, मंत्रालय सुश्री ऋचा शर्मा ने ओवरटाइम पर दोगुनी दर, मासिक वेतन अगले माह की 7 तारीख तक, तथा सेवा समाप्ति या त्यागपत्र पर अंतिम वेतन दो दिन में देने के प्रावधान बताए। उन्होंने राज्य से बोनस संबंधी अधिसूचनाएँ शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया।
अपर श्रमायुक्त, नोएडा श्री राकेश द्विवेदी ने प्रदेश की वेतन नियमावली की जानकारी दी, जिसमें वेतन दरें 8 घंटे व 26 दिन के आधार पर, न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण 5 वर्ष में, महँगाई भत्ता वर्ष में दो बार (अप्रैल व अक्टूबर), नॉमिनी की नई व्यवस्था तथा सभी अभिलेखों के लिए एकल रजिस्टर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बकाया के दावों में अब यह साबित करने का दायित्व नियोक्ता पर है कि भुगतान हो चुका है।
औद्योगिक संबंध संहिता पर डॉ. आर.जी. मीणा ने बताया कि हड़ताल नोटिस पर समझौता वार्ता अब सभी प्रतिष्ठानों में अनिवार्य है, मॉडल स्थायी आदेश अपनाने पर केवल सूचना देनी होगी, और प्रमाणन 60 दिन में न होने पर उसे प्रमाणित माना जाएगा। छंटनी किए गए श्रमिकों के लिए 15 दिन के वेतन के बराबर री-स्किलिंग फंड की व्यवस्था है। अपर श्रमायुक्त, लखनऊ सुश्री कल्पना श्रीवास्तव ने वार्ताकार यूनियन व वार्ता परिषद की मान्यता, शिकायत निवारण समिति और 300 से अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में ले-ऑफ, छंटनी व बंदी के लिए अनुमति के प्रावधान समझाए।
सामाजिक सुरक्षा संहिता पर उप श्रमायुक्त (मुख्यालय) श्री अजय मिश्रा ने बताया कि प्रदेश की नियमावली 27 अगस्त से लागू है। इसके अंतर्गत ग्रेच्युटी का भुगतान 30 दिन में करना होगा, 26 सप्ताह का मातृत्व लाभ व 3,500 चिकित्सा बोनस मिलेगा, आवागमन दुर्घटना पर मुआवज़ा एक माह में देना होगा, और अभिलेख 5 वर्ष तक सुरक्षित रखने होंगे।
व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता पर कारखाना विभाग के बृजेश सिंह ने 7 दिन में डीम्ड पंजीकरण, निःशुल्क सुरक्षा उपकरण, 100 से अधिक महिला कर्मियों पर महिला कल्याण अधिकारी, प्रतिदिन 8 व प्रति सप्ताह 48 घंटे की कार्य-सीमा, तथा जोखिम-आधारित निरीक्षण की जानकारी दी, जिसमें कम जोखिम वाली इकाइयों के लिए स्व-प्रमाणन है। श्री राकेश द्विवेदी ने बताया कि ठेकेदार को लाइसेंस तभी लेना होगा जब वह 50 से अधिक ठेका श्रमिक रखे, और पूरे देश या एक राज्य के लिए एकल लाइसेंस लिया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना पर सुश्री ऋचा शर्मा एवं ईपीएफओ के श्री उदय बक्शी ने बताया कि लगभग रू0 1 लाख करोड़ की यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक लागू है और इसका लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक रोज़गार है। पहली बार नौकरी पाने वालों को 15,000 तक और नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी 3,000 प्रतिमाह तक प्रोत्साहन मिलता है। देशभर में लगभग 5.81 लाख प्रतिष्ठान पंजीकृत हो चुके हैं और 4,000 करोड़ से अधिक वितरित हुए हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश में लगभग 174 करोड़ शामिल हैं। उन्होंने उद्योगों से लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने में सहयोग का आह्वान किया। सत्र में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना पर भी जानकारी दी गई।
बाल श्रम एवं बंधुआ श्रम सत्र में राज्य समन्वयक श्री सैयद रिज़वान अली ने बताया कि 14 वर्ष तक के बच्चों से काम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है और 18 वर्ष तक विनियमित है। पहली बार अपराध पर 6 माह से 2 वर्ष तक की सज़ा और 20,000 से 50,000 तक जुर्माना है, और सभी अपराध संज्ञेय हैं। बाल श्रम की सूचना पहचान बताए बिना ऑनलाइन पोर्टल पर दी जा सकती है। बंधुआ श्रम के लिए हर जनपद और तहसील में सतर्कता समितियाँ गठित हैं।
सेवानिवृत्त आईएएस श्री अशोक कुमार ने अपने जनपद का अनुभव साझा किया, जहाँ समुदाय, शिक्षकों, अभिभावकों और नियोक्ताओं की भागीदारी से 25 वर्षों से बाल श्रम शून्य है। उन्होंने बाल श्रम उन्मूलन के लिए “होल ऑफ गवर्नमेंट” दृष्टिकोण पर बल दिया और मा. मुख्यमंत्री के उत्तर प्रदेश को 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प की सराहना की।
प्रश्न सत्र में उद्योगों के प्रतिनिधियों ने निरंतर प्रक्रिया वाले उद्योगों में कार्य-घंटे, फिक्स्ड टर्म से स्थायी हुए कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, अनेक स्थलों पर पंजीकरण और ठेकेदारों की प्रतिभूति राशि जैसे प्रश्न रखे, जिनका अधिकारियों ने समाधान किया।
अन्त में विशेष सचिव, श्रम श्री कुणाल सिल्कू ने दोनो दिवस में उपस्थित रहे सभी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारीगण व उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारीगण व श्रम विभाग के सभी अधिकारीगण सहित उपस्थित सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में सचिव, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड सुश्री पूजा अग्रवाल, कल्याण आयुक्त श्री प्रद्युम्न कुमार राणा सहित केंद्र व राज्य के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए उद्योग प्रतिनिधि, एचआर प्रोफेशनल, विधिक सलाहकार और सिविल सोसाइटी के सदस्य सहित लखनऊ क्षेत्र लखनऊ की अपर श्रमायुक्त श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, नोएडा के अपर श्रमायुक्त श्री राकेश द्विवेदी, मुख्यालय कानपुर के अपर श्रमायुक्त श्री पी0के0 सिंह, उप श्रमायुक्त श्री अजय मिश्रा, उप श्रमायुक्त ए0के0 सिंह, उप श्रमायुक्त गोविन्द यादव, श्रम विभाग के क्षेत्रीय उप श्रमायुक्त
व जनपदों से सहायक श्रमायुक्त व जनपदों से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों सहित लगभग 300 प्रतिभागियों द्वारा किया गया।
कभी बेटियों का स्कूल जाना था मुश्किल, आज रात दो बजे भी बेखौफ लौटती हैं घर: मुख्यमंत्री योगी
- एक मीडिया संस्थान के यूथ आइकॉन कॉन्क्लेव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित
- पहले पहचान छिपाने को मजबूर थे यूपी के लोग, सुरक्षा के संकट से जूझते थे परिवार: मुख्यमंत्री योगी
- एचसीएल में नाइट शिफ्ट करने वाली बेटियां बाराबंकी, उन्नाव और सीतापुर से बेफिक्र होकर आती-जाती हैं
- आठ फ्रेम में सुनाई बदले उत्तर प्रदेश की कहानी, सुरक्षा से रोजगार और तकनीक तक के बदलाव गिनाए
- छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियों का लक्ष्य, अगले सप्ताह साढ़े चार हजार दारोगाओं को नियुक्ति पत्र

लखनऊ, 27 अक्टूबर। कभी उत्तर प्रदेश में बेटियों का स्कूल जाना भी मुश्किल था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए दूसरे राज्यों में भेजने को मजबूर थे। आज वही बेटियां रात दो बजे भी अपनी ड्यूटी पूरी करके बेखौफ घर लौट रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राजधानी में एक मीडिया संस्थान के यूथ आइकॉन कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए प्रदेश की कानून व्यवस्था में आए बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के सामने दो बड़े संकट थे। पहला पहचान का और दूसरा सुरक्षा का। प्रदेश के बाहर जाने पर लोग अपनी पहचान छिपाने को मजबूर होते थे और प्रदेश के भीतर सुरक्षा की चिंता सताती थी। आज उत्तर प्रदेश की पहचान उसके प्रतिभाशाली युवाओं, उद्योगों और उपलब्धियों से हो रही है। कार्यक्रम में खेल, उद्यमिता, कला, संस्कृति, सामाजिक कार्य और डिजिटल क्रिएशन सहित विभिन्न क्षेत्रों के 37 यूथ आइकॉन को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि इनकी सफलता लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।
मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया पर प्रचलित 'बिफोर एंड आफ्टर' रील का उदाहरण देते हुए साढ़े नौ वर्ष में बदले उत्तर प्रदेश की कहानी आठ फ्रेम में सुनाई। पहले फ्रेम में प्रदेश की पहचान और कानून व्यवस्था, दूसरे में सरकारी भर्तियों में सिफारिश के स्थान पर योग्यता को अवसर, तीसरे में खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां और चौथे में युवाओं के रोजगार देने वाला बनने की बात रखी। पांचवें फ्रेम में आधुनिक तकनीक, छठे में अर्थव्यवस्था, निवेश और बुनियादी ढांचे, सातवें में आस्था और पर्यटन से रोजगार तथा आठवें फ्रेम में विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की यह यात्रा युवाओं के विश्वास और अवसरों में आए बदलाव की कहानी भी है।
-  रात दो बजे भी बेखौफ घर लौटती हैं बेटियां
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बेटियों की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित रहते थे। साधन संपन्न परिवार बेटियों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में भेजते थे, जबकि गरीब परिवारों की बेटियों के लिए स्कूल जाना भी चुनौती था।
उन्होंने लखनऊ स्थित एचसीएल की महिला कर्मचारियों का उदाहरण दिया। बताया कि बाराबंकी, उन्नाव और सीतापुर से महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम करने आती हैं। हाल ही में उनसे बातचीत के दौरान पूछा था कि रात में घर लौटने में परेशानी तो नहीं होती। महिलाओं ने बताया कि रात दो बजे भी ड्यूटी समाप्त होने पर वे बेखौफ घर लौटती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे कानून व्यवस्था में आए बदलाव का उदाहरण बताया।
-  माफिया मिट्टी में मिल चुके, अब अपराधी बेच रहे केला
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफिया का वर्चस्व था। अब माफिया मिट्टी में मिल चुके हैं और अपराधी केला बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया जैसी स्थिति थी, जबकि आज वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से हर जिले के विशिष्ट उत्पाद को पहचान मिल रही है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनसे 3.25 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। सरकार पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर भी उपलब्ध करा रही है।
-  बिना परीक्षा दिए मिल गया था नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकार बनने के बाद एक ऐसी नियुक्ति का मामला सामने आया, जिसमें संबंधित व्यक्ति ने न आवेदन किया था और न परीक्षा दी थी, फिर भी उसे नियुक्ति पत्र मिल गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले नियुक्तियों में सिफारिश और लेनदेन हावी था। अब योग्यता के आधार पर चयन हो रहा है। साढ़े नौ वर्ष में साढ़े नौ लाख सरकारी नियुक्तियां की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य है। अगले सप्ताह लगभग साढ़े चार हजार सब इंस्पेक्टरों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। 32 हजार से अधिक पुलिस कांस्टेबलों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने होमगार्ड तथा विभिन्न भर्ती आयोगों के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों का भी उल्लेख किया।
-  1400 खिलाड़ियों को मिली सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने खिलाड़ियों को पदक के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति देने की व्यवस्था की है। अब तक लगभग 1400 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने पारुल चौधरी, राजकुमार पाल और ललित उपाध्याय का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रदेश में सम्मान और रोजगार दोनों मिल रहे हैं। सरकार का संदेश है कि देश के लिए पदक लाओ और उत्तर प्रदेश में पद पाओ।
-  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना बनी सरकारी शार्क टैंक
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब 25 हजार हो गई है। एक हजार करोड़ रुपये का फंड ऑफ फंड बनाया गया है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत प्रतिवर्ष एक लाख युवाओं को बिना ब्याज और बिना गारंटी ऋण देने की व्यवस्था है। इसे सरकार का अपना 'शार्क टैंक' बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें युवाओं को अपनी इक्विटी भी नहीं देनी पड़ती।
उन्होंने बताया कि एचसीएल के लखनऊ परिसर में कर्मचारियों की संख्या लगभग सौ से बढ़कर 12,500 हो गई है। कंपनी ने छह हजार और युवाओं की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया है। ब्रह्मोस परियोजना में प्रदेश के 500 युवाओं को रोजगार मिला है। मिसाइलों की बिक्री से प्रदेश सरकार को 35 करोड़ रुपये का जीएसटी भी प्राप्त हुआ है।
-  साइबर सुरक्षा के नए मुख्यालय को मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि मंगलवार को कैबिनेट ने साइबर सुरक्षा के नए मुख्यालय को मंजूरी दी है। लखनऊ में एआई सिटी, कानपुर में ड्रोन तकनीक और नोएडा में रोबोटिक्स के क्षेत्र में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि एआई निर्णय दे सकता है, लेकिन निर्णायक मनुष्य को ही बनना होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था 12 लाख करोड़ से बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये होने और 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से रोजगार के नए अवसर बने हैं। आस्था और पर्यटन भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं।
-  2047 के भारत का नेतृत्व करेंगे आज के युवा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब आज के युवा अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व कर रहे होंगे। इसलिए उन्हें अभी से अपनी प्रतिभा और परिश्रम के माध्यम से भविष्य की तैयारी करनी होगी। उन्होंने युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना और मतदान करना केवल अधिकार नहीं, लोकतांत्रिक कर्तव्य भी है। युवाओं को अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहना चाहिए।
-  37 यूथ आइकॉन का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में मीडिया संस्थान की ओर से खेल, उद्यमिता, कला, संस्कृति, सामाजिक कार्य और डिजिटल क्रिएशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले 37 यूथ आइकॉन को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।