ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर पर कसा तंज, कहा - सत्ताइस में सपा साफ
*कुर्सी की ख्वाहिश पाले दिल्ली में दरी बिछा रहे हैं, ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर कसा व्यंग्य*

*'इंडी गठबंधन में लोडर बन गए हैं अखिलेश यादव', दिल्ली प्रदर्शन की तस्वीर शेयर कर सपा पर बरसे राजभर*

*दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों से तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिलेगा, राजभर ने अखिलेश को दी नसीहत*

लखनऊ, 14 अक्टूबर। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा पोस्ट किया है। राजभर ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन की एक तस्वीर शेयर करते हुए अखिलेश को 'पिछलग्गू' बताया। उन्होंने लिखा कि विपक्षी गठबंधन में अखिलेश की असली हैसियत उनके दिल्ली वाले दोस्तों ने सबके सामने दिखा दी है। दरअसल, इंडी गठबंधन की भीड़ वाली इस तस्वीर में अखिलेश यादव सबसे पीछे नजर आ रहे है।
ओमप्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में लिखा,'प्रिय अखिलेश यादव जी, दिल्ली में पिछलग्गू बनके घूमने में मजा आ रहा है कि नहीं?' उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि गठबंधन में अखिलेश की असली हैसियत उनके दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों ने सबके सामने दिखा दी है।
राजभर ने लिखा कि अखिलेश की स्थिति ऐसी लग रही है, जैसे उन्हें बारात वाले ट्रैक्टर में जबरन ठूंस दिया गया हो। उन्होंने आगे तंज कसा कि अखिलेश दूल्हे के दोस्त के ममेरे भाई के नाराज फूफा जैसे दिखाई दे रहे हैं।
*अवतारी भैया जी अब भीड़ में खो जा रहे हैं*
राजभर ने अखिलेश यादव के समर्थकों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा कि जो समर्थक अखिलेश को 'अवतारी भैया जी' बताते नहीं थकते थे, अब वही देख रहे होंगे कि उनके भैया जी सबके सामने 'लोडर' बनकर भीड़ में खो जा रहे हैं।
राजभर ने अखिलेश की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर तंज कसते हुए लिखा, 'कुर्सी की ख्वाहिश पाले दरी बिछाने में लगे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन की नैया की पतवार राहुल गांधी के हाथ में चली गई है।
*दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे महाराज?*
राजभर ने अखिलेश यादव के दिल्ली दौरे पर सवाल उठाते हुए लिखा कि चुनाव उत्तर प्रदेश में होना है, लेकिन अखिलेश दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। उन्होंने तंज कसा, 'और जाइए, भाग-भाग के दिल्ली! करा लिये न घनघोर बेइज्जती?' राजभर ने आगे लिखा, 'आप भी गजब करते हैं! चुनाव यूपी में है और आप दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं...! दूसरे की बारात में कब तक सहबाला बनेंगे महाराज?'
*दिल्ली वाले मतलबी दोस्तों से तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिलेगा*
राजभर ने अखिलेश यादव को आगाह करते हुए लिखा कि दिल्ली के मतलबी दोस्तों से उन्हें तिरस्कार के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला। उन्होंने कहा कि जिस तरह अखिलेश दिल्ली की भीड़ में खो गए हैं, उसी तरह इस बार उत्तर प्रदेश में भी विपक्ष की भीड़ में उनका पता नहीं चलेगा।
*सत्ताइस में सपा साफ होने जा रही है*
राजभर ने अपने पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव की राजनीतिक गतिविधियों पर निशाना साधते हुए लिखा, आपके आजकल के लच्छनों से तो यही समझ में आ रहा है कि 'सत्ताइस में सपा साफ' होने जा रही है।
मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के तहत अब किसानों को मिलेंगी कृषि उपयोगी मशीनें : जितेंद्र प्रताप सिंह

- मंडी परिषद की प्रस्तावित व्यवस्था में 43 इंच टीवी की जगह मिलेगी चारा काटने की मशीन, अन्य उपहारों में भी किया गया बदलाव

- पावर स्प्रेयर और आठ हॉर्स पावर के पंपिंग सेट को रखा गया बरकरार, उपहारों की उपयोगिता बढ़ाने पर जोर

लखनऊ, 14 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों को कृषि कार्यों में सहूलियत देने और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के तहत दिए जाने वाले उपहारों में बदलाव किया गया है। इसी के तहत लकी ड्रॉ के माध्यम से किसानों को दिए जाने वाले उपहारों की सूची में संशोधन का किया गया है। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसे उपकरण उपलब्ध कराना है, जिनका इस्तेमाल वे खेती-किसानी और कृषि से जुड़े कार्यों में कर सकें।

    निदेशक, राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के अंतर्गत वर्तमान में दिए जा रहे कुछ उपहारों के स्थान पर कृषि उपयोगी मशीनें और उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए गठित समिति की बैठक में उपहारों की उपयोगिता और वितरण व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया गया। नवीनतम बदलाव के अनुसार 43 इंच के एलईडी टीवी के स्थान पर तीन हॉर्स पावर की चारा काटने वाली मशीन दी जाएगी। इससे किसानों को पशुपालन संबंधी कार्यों में भी मदद मिलेगी।

 इस योजना के तहत वर्तमान में द्वितीय उपहार के रूप में 43 इंच का टीवी दिया जाता है। इसके स्थान पर तीन हॉर्स पावर की चारा काटने की मशीन दी जाएगी। इसकी अनुमानित कीमत 30 हजार रुपये प्रति उपहार है। प्रत्येक संभाग में ऐसे तीन उपहार दिए जाने की व्यवस्था होगी। इससे किसानों को पशुओं के लिए चारा तैयार करने में सुविधा मिलेगी और श्रम की बचत भी होगी।

प्रथम उपहार के रूप में आठ हॉर्स पावर का पंपिंग सेट पहले की तरह ही दिया जाएगा। इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये प्रति उपहार है और प्रत्येक संभाग में दो उपहार दिए जाने का प्रावधान है। वहीं, पावर स्प्रेयर को भी उपहारों की सूची में शामिल रखा गया है। इसके लिए प्रति उपहार अनुमानित कीमत पांच हजार रुपये है।

- उपहारों की श्रेणियों में भी किया गया बदलाव

योजना के अंतर्गत उपहारों की विभिन्न श्रेणियों के लिए निम्नलिखित व्यवस्था की गई है—

- प्रथम उपहार: 35 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर

- द्वितीय उपहार: वर्तमान में 900 लीटर क्षमता वाले पावर टिलर (11 किलोवाट) तथा 13.7 एचपी क्षमता के उपकरणों के स्थान पर छोटे ट्रैक्टर (20 हॉर्स पावर से कम) को शामिल किया गया है।

- तृतीय उपहार: पावर टिलर/रीपर जैसे उपकरणों के स्थान पर 100 सीसी क्षमता वाली मोटरसाइकिल को शामिल किया गया है।

- चतुर्थ उपहार: सोलर पावर पैक संयंत्र को उपहार के रूप में शामिल किया गया है।

- समिति की संस्तुति के आधार पर लिया गया निर्णय

 गठित समिति ने उपहार वितरण के दौरान आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर विचार किया है। समिति की संस्तुति के आधार पर प्रथम उपहार के रूप में ट्रैक्टर को यथावत रखते हुए अन्य उपहारों की खरीद एवं वितरण की व्यवस्था में बदलाव करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के छमाही ड्रॉ और बंपर ड्रॉ के अंतर्गत वितरित किए जा रहे उपहारों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए संशोधित व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।किसानों और कृषि उपज के व्यापारियों को राहत देने के लिए राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की विभिन्न योजनाओं में कृषि उपयोगी संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। परिषद के दस्तावेज में किसानों को निःशुल्क प्लास्टिक कैरेट और व्यापारियों को प्लास्टिक शीट वितरित करने की योजना है। इसके साथ ही कृषि शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और मंडी परिसर में दुर्घटना या अग्निकांड की स्थिति में आर्थिक सहायता देने की भी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान तथा कृषि महाविद्यालय से स्नातक करने वाले छात्रों की छात्रवृत्ति रुपए 3000 से बढ़ाकर रूपये 5000 की गयी है।

- किसानों को मिलेंगे निःशुल्क प्लास्टिक कैरेट

मंडी परिषद की योजना के तहत किसानों को कृषि उपज की तुड़ाई और परिवहन के दौरान उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक कैरेट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सब्जियों और फलों की तुड़ाई के समय से ही कैरेट का इस्तेमाल करने वाले किसानों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था है। मंडी समितिवार किसानों की संख्या के आधार पर कैरेट वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 'क' श्रेणी की मंडियों में 500 किसानों को चार-चार कैरेट देने का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल 2,000 कैरेट वितरित किए जाने हैं। 'ख' श्रेणी की मंडियों में 250 किसानों को चार-चार कैरेट यानी कुल 1,000, 'ग' श्रेणी की मंडियों में 200 किसानों को कुल 800 और 'घ' श्रेणी की मंडियों में 150 किसानों को कुल 600 कैरेट देने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह इन चार श्रेणियों के लिए कुल 4,400 प्लास्टिक कैरेट का वितरण प्रस्तावित है।

परिषद की इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों, व्यापारियों और कृषि शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को अलग-अलग स्तर पर सहयोग देना है। प्लास्टिक कैरेट और शीट वितरण से जहां कृषि उपज के रखरखाव में सहूलियत मिल सकती है, वहीं छात्रवृत्ति और दुर्घटना सहायता जैसी योजनाएं लाभार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर सकती हैं। योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित मंडी समिति से पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और उपलब्ध सहायता के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

बाढ़ प्रभावित सैंथा क्षेत्र में राहत कार्यों का जायजा लेने पहुंचे नगर विकास मंत्री, नागरिकों से किया संवाद

- इस चुनौतीपूर्ण समय में हम जनता के साथ खड़े हैं : एके शर्मा

- जलभराव के बाद स्वच्छता, दवा छिड़काव और बीमारियों की रोकथाम पर विशेष जोर

- ड्रोन तकनीक से दवा छिड़काव का निरीक्षण कर अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी इसके उपयोग के दिए निर्देश

- बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित की, सफाईकर्मियों का बढ़ाया उत्साह

लखनऊ,14 अक्टूबर 2026। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने बाढ़ राहत कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से आज लखनऊ की मलिहाबाद विधानसभा के अंतर्गत सैंथा ग्रामीण क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का पुनः स्थलीय निरीक्षण किया। नगर निगम के नवविस्तारित क्षेत्र में शामिल सैंथा में उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों, साफ-सफाई तथा प्रभावित नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जैसे-जैसे बाढ़ का पानी उतर रहा है, वैसे-वैसे मक्खी-मच्छरों के प्रकोप तथा प्रदूषित जल और वायु से मनुष्यों एवं पशुओं में बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, दवा छिड़काव और जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बीमारियों की रोकथाम हो सके।निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री शर्मा ने ड्रोन तकनीक से किए जा रहे दवा छिड़काव का जायजा लिया और अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी आवश्यकता के अनुसार इस तकनीक से दवा छिड़काव कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्वच्छता एवं स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े कार्यों में पूरी तत्परता बरतने को कहा।

मंत्री श्री शर्मा ने बाढ़ राहत शिविर एवं राहत चिकित्सा शिविर का निरीक्षण कर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली और आवश्यक व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने पानी निकल चुके क्षेत्रों में साफ-सफाई का जायजा लिया और सफाईकर्मियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाकर सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने निर्देशित किया के नगर निगम के अधिकारी, सफाईकर्मी और अन्य संबंधित कर्मचारी आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाएं।

इस दौरान मंत्री श्री शर्मा ने बाढ़ प्रभावित नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रभावित परिवार तक राहत सामग्री एवं आवश्यक सुविधाएं पहुंचाई जाएं तथा चिकित्सा, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।स्थानीय निवासियों ने बताया कि लखनऊ नगर निगम एवं प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों, नागरिकों और पशुओं तक राहत एवं बचाव कार्य पहुंचाने तथा साफ-सफाई के लिए सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं।

मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार और प्रशासन जनता के साथ खड़े हैं। बाढ़ प्रभावितों को राहत पहुंचाना और जनजीवन सामान्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है। राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। इस अवसर पर नगर आयुक्त गौरव कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री योगी ने सुशासन से यूपी के विकास को दी नई गति : रामनाथ कोविन्द

- लोकभवन में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों का जताया आभार

 - मोदी-योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्की छत के साथ दी गरिमा, टपकती छत के नीचे बीता था मेरा बचपन : पूर्व राष्ट्रपति

- यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प को सराहा

 लखनऊ, 14 अक्टूबर 2026। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए विकास कार्यों और सुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को नई ऊर्जा दी है। उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयासों को अभूतपूर्व गति मिली है। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से आवागमन सुगम हुआ है। सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से गरीब परिवारों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी के संकल्प की भी प्रशंसा की।

पूर्व राष्ट्रपति बुधवार को लोकभवन सभागार में अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह उनके लिए भावनात्मक अवसर है। इससे पहले अनेक मंचों से लोगों को संबोधित किया, लेकिन आज चर्चा का विषय उनका अपना जीवन है। इसी प्रदेश में जन्मे, यहीं की मिट्टी में पले-बढ़े और शिक्षा प्राप्त की। उत्तर प्रदेश ही उनकी कर्मभूमि भी बना।

- भाजपा में राष्ट्र सर्वोपरि, राजनीति का उद्देश्य राष्ट्रसेवा

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति के लिए भाजपा को चुनने का प्रमुख कारण पार्टी में राष्ट्र सर्वोपरि की भावना है। यहां जातिवाद, क्षेत्रवाद और वंशवाद से ऊपर उठकर समावेशी विकास पर बल दिया जाता है। इसी पार्टी में साधारण शिक्षक का पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री, कल्याण सिंह मुख्यमंत्री, गरीब परिवार में जन्मे योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। समाज के कमजोर वर्ग से आने वाला व्यक्ति भी राष्ट्रपति बन सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की सच्ची विजयगाथा है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। उनसे राजनीति को सत्ता प्राप्त करने के बजाय राष्ट्रसेवा का माध्यम मानने की प्रेरणा मिली।

- टपकती छत के नीचे बीता बचपन, आज गरीबों को मिल रहे पक्के घर

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि कानपुर देहात के छोटे से गांव में उनका साधारण घर था। बरसात में छत टपकती थी। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने पर वे स्मृतियां फिर ताजा हो गई थीं। तब उन्होंने कहा था कि देश के किसी गांव में आज भी कोई छोटा-सा रामनाथ टपकती छत के नीचे खड़ा होकर बेहतर भविष्य के सपने देख रहा होगा। आज मोदी और योगी सरकार ने करोड़ों गरीबों को पक्के मकान के साथ गरिमा और सुरक्षा का एहसास कराया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता शिक्षा को जीवन बदलने का माध्यम मानते थे। जमीन दान करने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव से मिले भाईचारे, संवेदना और बड़ों के सम्मान के संस्कार जीवनभर उनके साथ रहे।

- यूपी से राष्ट्रपति बनना करोड़ों लोगों के सपनों का सम्मान

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए, लेकिन यहां जन्मे किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति बनने का अवसर पहली बार मिला। इसे वह अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों लोगों के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान मानते हैं। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता की शक्ति दिखाई। उन्होंने बताया कि उनकी आत्मकथा आने वाले दिनों में देश की सभी क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित की जाएगी।

रील के लाइक्स नहीं, रियल लाइफ में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती हैं किताबें : योगी आदित्यनाथ

- पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी ने किया विमोचन

- कानपुर के परौंख गांव से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा में सादगी, परिश्रम और पुरुषार्थ की मिसाल बने रामनाथ कोविन्द

- यूपी के 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय की व्यवस्था, डिजिटल लाइब्रेरी का भी विस्तार

 - लखनऊ और गोरखपुर के पुस्तक मेलों में उमड़ी पाठकों की भीड़, मुख्यमंत्री योगी बोले- अवसर मिले तो किताबें खरीदते हैं लोग

लखनऊ, 14 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से निकलकर पुस्तकों से जुड़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि आज लोग स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर पांच से सात घंटे बिता रहे हैं। इसमें से एक-दो घंटे भी अच्छी पुस्तकें पढ़ने में लगाएं तो जीवन को नई दिशा मिल सकती है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने के बजाय अपनी रियल लाइफ में आगे बढ़ना अधिक उपयोगी है। अच्छी पुस्तकें जीवन की सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होती हैं। युवाओं को महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़नी चाहिए, जिनसे संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

मुख्यमंत्री योगी बुधवार को लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे भारतीय की जीवनगाथा है, जिसने अभावों को अपनी ढाल नहीं बनाया, बल्कि संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया। यह आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

 - गांवों तक पहुंच रही पुस्तकें, डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं। इनमें एक कक्ष पुस्तकालय के लिए निर्धारित है, जहां गांव के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। डिजिटल लाइब्रेरी भी विकसित की जा रही हैं। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए। सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी।

गोरखपुर में लखनऊ से ज्यादा बिकी थीं पुस्तकें

मुख्यमंत्री योगी ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुस्तक मेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि आज के दौर में पुस्तकें कौन खरीदेगा। लखनऊ में पुस्तक मेला लगा तो बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद गोरखपुर में उससे भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों की अच्छी भागीदारी रही। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि है, जरूरत उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने की है।

- अभावों को बनाया संघर्ष की ताकत

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कानपुर के परौंख गांव में गरीब परिवार में जन्मे रामनाथ कोविन्द ने बचपन में ही मां को खो दिया। गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू की और उच्च शिक्षा प्राप्त कर अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बड़ा वही होता है, जिसमें संघर्ष का जज्बा हो। विपरीत परिस्थितियों से पलायन के बजाय उनका मुकाबला करना महानता की पहचान है।

- राष्ट्रपति बनने के बाद भी नहीं भूले गांव और पुराने साथी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी रामनाथ कोविन्द का अपनी जन्मभूमि परौंख से लगाव बना रहा। वह अवसर मिलते ही गांव जाते हैं। पुराने साथियों और चाय-चाट वालों से भी उनके संबंध कायम हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए प्रयास किए। वहां के विद्यालय भवन को विकसित कर राज्य सरकार को समर्पित किया गया, जिसे आवासीय विद्यालय के रूप में आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री योगी ने भगवान श्रीराम के जन्मभूमि प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।

- पद बड़ा हो, संस्कार नहीं बदलने चाहिए : केशव मौर्य

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और अहंकार से मुक्त रहने की प्रेरणा देती है। व्यक्ति कितना भी बड़ा पद प्राप्त कर ले, उसके संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। रामनाथ कोविन्द का जीवन इसका उदाहरण है।

- गरीब परिवार का बेटा राष्ट्रपति बने, यही गणतंत्र की खूबसूरती : ब्रजेश पाठक

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के छोटे से गांव में जन्मा गरीब परिवार का व्यक्ति अपनी योग्यता और कार्यक्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती है। पूर्व राष्ट्रपति का जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता की मिसाल है।

- विधायकों के लिए मांगी पुस्तक की 500 प्रतियां

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ की यात्रा बताया। उन्होंने प्रकाशक से विधानसभा सदस्यों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में अच्छी हिंदी पुस्तकों की पहुंच बढ़ी है। किताबें बच्चों तक पहुंच रही हैं।

- पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का किया सम्मान

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत के गायन से हुआ। मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। उनकी पत्नी सविता कोविन्द का भी स्वागत किया। पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों के साथ आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उनकी पत्नी सविता कोविन्द, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

2027 में अपनी इज्जत भी नहीं बचा पाएगी सपा : ओपी राजभर

- ओवैसी की भीड़ देखकर गोपनीय सर्वे करा रहे अखिलेश, राजभर बोले- मुस्लिम वोटों पर सपा की पकड़ हो रही कमजोर
- यूपी में ओवैसी की सक्रियता ने अखिलेश यादव के उड़े होश, राजभर बोले- इस बार सपा को मुस्लिम सिखाएगा सबक
- आजमगढ़ में भी अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी', राजभर का दावा- इस बार सपा का होगा बुरा हाल

लखनऊ, 13 अक्टूबर। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही भीड़ को देखकर अखिलेश यादव डरे हुए हैं और AIMIM के साथ गठबंधन के फायदे-नुकसान को लेकर सपा गोपनीय सर्वे करा रही है।
राजभर ने कहा कि यूपी में ओवैसी की बढ़ती सक्रियता ने सपा को चिंता में डाल दिया है। सपा से अब मुस्लिम समाज अपनी हिस्सेदारी मांग रहा है क्योंकि उसे यह एहसास हो गया है कि अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को केवल धोखा दिया है।
- मुसलमानों के नेता अब ओवैसी हैं, अखिलेश नहीं
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ओवैसी ने पहले ही अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। लेकिन तब सपा ने इसपर ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब ओवैसी की रैलियों में आ रही भारी भीड़ को देखते हुए सपा गोपनीय सर्वे कराने में जुट गई है।
राजभर ने कहा कि ओवैसी जिन राज्यों में सक्रियता से चुनाव लड़ते हैं, वहां मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा उनकी पार्टी की ओर जाता है। राजभर ने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया, जहां RJD नेता तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने ओवैसी को हल्के में लेने की गलती की थी। राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी ओवैसी की सक्रियता सपा के पारंपरिक मुस्लिम समर्थन को प्रभावित कर सकती है।
- सपा ने मुसलमानों को दरी बिछाने तक सीमित रखा
राजभर ने सपा पर मुस्लिम समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी में मुस्लिम विधायक, सांसद और नेता होने के बावजूद कोई अखिलेश यादव से यह मांग करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता कि मुस्लिम समाज के समर्थन के बदले उसे सत्ता में नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को सपा में बराबर की राजनीतिक हिस्सेदारी देने के बजाय उसे पार्टी के लिए काम करने तक सीमित रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुस्लिम समाज सपा को लगातार समर्थन देता रहा है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करने की मांग क्यों नहीं उठती? राजभर ने कहा कि ओवैसी इसी सवाल को उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, मुस्लिम समाज को अब केवल किसी दूसरे नेता को मुख्यमंत्री बनाने की राजनीति करने के बजाय अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नौकरी और सत्ता में भागीदारी पर भी ध्यान देना चाहिए।
- 20 प्रतिशत वाला हिस्सेदारी की बात करेगा
राजभर ने कहा कि ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं को स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर आगे बढ़ने का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर विधानसभा में प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में है और उसे किसी दूसरे दल पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्रतिनिधित्व की मांग करनी चाहिए। राजभर ने कहा कि पहले मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ रहता था, लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रहेगी। राजभर के मुताबिक, ओवैसी और पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अय्यूब की सक्रियता से मुस्लिम मतदाताओं के सामने दूसरे राजनीतिक विकल्प भी मौजूद हैं।
- आजमगढ़ में अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी
राजभर ने आजमगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में प्रचार के बिना ओवैसी को आजमगढ़ में करीब तीन प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन इस बार ओवैसी अभी से सक्रिय हैं। इस बार आजमगढ़ में भी सपा का बुरा हाल होगा।
- 2017 में जो इज्जत बची थी, वह भी चली जाएगी
राजभर ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का एकमुश्त वोट सपा को नहीं मिलेगा। अखिलेश यादव और सपा को लेकर मुस्लिमों में भयानक नाराजगी है। राजभर ने कहा कि इस बार के चुनाव में सपा का पूरा सफाया हो जाएगा। जो इज्जत 2017 में बच गई थी वो भी 2027 में चली जाएगी।
उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं तलाशेगा दक्षिण कोरियाई प्रतिनिधिमंडल
- सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण पर जोर; प्रस्तावित ‘कोरिया सिटी’ और औद्योगिक भूमि बैंक की दी गई जानकारी

ग्रेटर नोएडा/लखनऊ, 13 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और दक्षिण कोरिया के साथ औद्योगिक एवं कारोबारी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में इन्वेस्ट यूपी ने ग्रेटर नोएडा में दक्षिण कोरियाई कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ गोलमेज बैठक आयोजित की। बैठक में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल कलपुर्जों, विशेष रसायनों और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में प्रस्तावित ‘कोरिया सिटी’ की जानकारी भी साझा की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप आयोजित इस बैठक का उद्देश्य वैश्विक निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
- 400 से अधिक कोरियाई कंपनियों का प्रतिनिधित्व
कोरिया वर्ल्ड क्लास एंटरप्राइज एसोसिएशन (KWCEA) का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल 12 से 15 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व KWCEA और यूनिटेक कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन सेउंग-हो ली कर रहे हैं। यह संगठन सरकार समर्थित वर्ल्ड क्लास एंटरप्राइज कार्यक्रम के तहत 400 से अधिक कोरियाई कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल नोएडा और गाजियाबाद की प्रमुख औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी इकाइयों का भी भ्रमण करेगा। प्रस्तावित कार्यक्रम में एचसीएलटेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), संवर्धना मदरसन, डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियों के दौरे शामिल हैं। इन दौरों के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश की विनिर्माण क्षमताओं, तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
- निवेश नीतियों और औद्योगिक भूमि की दी गई जानकारी
गोलमेज बैठक में 18 कंपनियों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPELC) की प्रबंध निदेशक जसजीत कौर, इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) गजल भारद्वाज, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की एसीओ प्रेरणा सिंह और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के एसीओ मनीष मीना ने की।
बैठक में विभिन्न विभागों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की ओर से प्रदेश में निवेश के अवसरों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। UPELC ने उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स नीति, इन्वेस्ट यूपी ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति, GNIDA ने औद्योगिक भूमि बैंक और YEIDA ने प्रस्तावित कोरिया सिटी से संबंधित जानकारी साझा की। इसके बाद निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और कारोबारी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने दिखाई रुचि
दक्षिण कोरियाई प्रतिनिधिमंडल में यूनिटेक, हाना माइक्रोन, डोंगजिन सेमिकेम और शिला इंडस्ट्रियल सहित कई कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इन कंपनियों की विशेषज्ञता सेमीकंडक्टर, विशेष रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, ऑटोमोबाइल कलपुर्जों और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में है। बैठक में संबंधित क्षेत्रों से जुड़े भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश की संभावनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध बुनियादी ढांचे और निवेश प्रोत्साहन व्यवस्थाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इससे प्रदेश में तकनीक आधारित विनिर्माण, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं के विकास और भारतीय एवं कोरियाई कंपनियों के बीच कारोबारी सहयोग को बढ़ाने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।
- निवेश प्रोत्साहन नीतियों पर भी फोकस
इन्वेस्ट यूपी ने प्रतिनिधिमंडल को उत्तर प्रदेश एफडीआई/एफसीआई, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनियां निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 और उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति-2024 की जानकारी दी। इन नीतियों के माध्यम से प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश, वैश्विक कारोबारी केंद्रों की स्थापना और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से अवगत कराया गया।
बैठक का समापन नेटवर्किंग और संभावित कारोबारी साझेदारियों पर चर्चा के साथ हुआ। इस पहल को उत्तर प्रदेश और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे प्रदेश में वैश्विक निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाने और सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सहित प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण क्षेत्रों के विस्तार की संभावनाओं को बल मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी डीप स्टेट की मदद से देश में अराजकता फैलाना चाहती है कांग्रेस : बृजलाल
- राज्यसभा सांसद का आरोप, राहुल गांधी और विपक्षी दल विदेशी शक्तियों के हाथों में खेल रहे
- बोले- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती ताकत अमेरिका समेत विदेशी शक्तियों को नहीं आ रही रास
- नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह भारत में भी अस्थिरता पैदा कर सरकार गिराने की साजिश का लगाया आरोप
- मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का आरोप लगाते हुए कहा- कांग्रेस को आज भी चाहिए अपने प्रति प्रतिबद्ध न्यायपालिका

लखनऊ, 13 अक्टूबर। भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर अमेरिकी डीप स्टेट की मदद से देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल विदेशी शक्तियों के हाथों में खेल रहे हैं। इनका उद्देश्य देश में अराजकता पैदा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को गिराना है। इसके लिए नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश की जा रही है। बृजलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज किसी भी महाशक्ति से आंख में आंख डालकर बात करता है। भारत की यह बढ़ती ताकत अमेरिका और अन्य विदेशी शक्तियों को पसंद नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी डीप स्टेट की इसमें मुख्य भूमिका है और कांग्रेस सहित विपक्षी दल उसके इशारे पर काम कर रहे हैं।
बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में नहीं आ पा रही है और आगे भी सत्ता में आने की संभावना नहीं देख रही है। इसलिए अब विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अस्थिरता पैदा करना चाहती है। उन्होंने सीजेपी को भी इसी साजिश का हिस्सा बताते हुए आम आदमी पार्टी की बी टीम करार दिया। आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं को दबाव में लेकर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाना चाहते हैं।
- मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का लगाया आरोप
बृजलाल ने कहा कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी अपने सहयोगियों अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने पहुंचे थे। वे चुनाव आयोग और एसआईआर समेत अन्य मामलों को लेकर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलना चाहते थे। मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए ईमेल के माध्यम से संवैधानिक परंपराओं की जानकारी दी। कांग्रेस ने इस पत्र को अपने एक्स हैंडल पर सार्वजनिक कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने मुख्य न्यायाधीश के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इस्तीफे की मांग की। यहां तक कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश कार्रवाई नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे दें, उनका विकल्प नियुक्त कर लिया जाएगा। बृजलाल ने इसे सर्वोच्च न्यायपालिका का घोर अपमान और मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर लेते तो राहुल गांधी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद की तरह फिर कोई फर्जी नैरेटिव गढ़ लेते।
- इंदिरा गांधी के दौर से कांग्रेस को चाहिए प्रतिबद्ध न्यायपालिका
बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस की प्रतिबद्ध न्यायपालिका की सोच उसके पुराने इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने जस्टिस बहरूल इस्लाम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें 1962 और 1968 में राज्यसभा भेजा। इसके बाद वह गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश बने। वर्ष 1980 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। बृजलाल ने आरोप लगाया कि बिहार के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को सहकारी बैंक घोटाले से जुड़े मामले में राहत देने के बाद बहरूल इस्लाम ने सर्वोच्च न्यायालय से इस्तीफा दिया और कांग्रेस ने 1983 में उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेज दिया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1973 में केशवानंद भारती मामले के फैसले के बाद इंदिरा गांधी सरकार ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर जस्टिस एएन रे को मुख्य न्यायाधीश बनाया। इसी तरह आपातकाल के दौरान एडीएम जबलपुर मामले में जीवन के अधिकार के पक्ष में असहमति जताने वाले जस्टिस एचआर खन्ना की वरिष्ठता की अनदेखी कर जस्टिस एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ऐसे न्यायाधीशों को महत्व दिया जो सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करें। राहुल गांधी भी अपनी पार्टी की उसी पुरानी नीति के अनुसार प्रतिबद्ध न्यायपालिका चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से बाहर होने के कारण कांग्रेस अब न्यायपालिका पर दबाव बनाने और विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही है।
सर्वाेदय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगी निःशुल्क जेईई-नीट कोचिंग
- दक्षणा फाउंडेशन की संयुक्त चयन परीक्षा (जेडीएसटी-2027) के माध्यम से कक्षा 12 विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को मिलेगा अवसर
- चयनित विद्यार्थियों को एक वर्ष तक निःशुल्क कोचिंग, आवास और भोजन की सुविधा, पात्र विद्यार्थी ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन

लखनऊ,13 अक्टूबर, 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वाेदय विद्यालयों में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का सुनहरा अवसर है। दक्षणा फाउंडेशन की ओर से संयुक्त दक्षणा चयन परीक्षा (जेडीएसटी-2027) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। इसके तहत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक वर्ष तक जेईई अथवा नीट की निःशुल्क तैयारी के साथ आवास और भोजन की सुविधा भी मिलेगी। यह सुविधा पुणे के निकट स्थित दक्षणा वैली परिसर में उपलब्ध कराई जाएगी।
- कक्षा 10 के अंकों के आधार पर तय होगी पात्रता
शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग में अध्ययनरत और मई 2027 तक बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी निर्धारित मानकों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इंजीनियरिंग वर्ग में छात्र के लिए सामान्य श्रेणी में कक्षा 10 के गणित एवं विज्ञान विषयों में निर्धारित कटऑफ 85 प्रतिशत और छात्रा के लिए 80 प्रतिशत है। अन्य आरक्षित श्रेणियों के लिए कटऑफ अलग-अलग निर्धारित है। मेडिकल वर्ग में सामान्य श्रेणी के लिए 80 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 75 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 65 प्रतिशत कटऑफ निर्धारित है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी अलग कटऑफ का प्रावधान है।
पात्रता के अनुसार छात्रों के परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम और छात्राओं के लिए पांच लाख से कम होनी चाहिए। सर्वाेदय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे कक्षा 12 विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को इस अवसर की जानकारी दें और पात्र विद्यार्थियों को आवेदन के लिए प्रेरित करें। इससे आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कठिनाई का सामना करने वाले विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा। दक्षणा फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट https://apply.scholarship.dakshana.org  पर जेडीएसटी-2027 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चकबंदी कार्य में तेजी, 11 गांवों में प्रक्रिया समाप्त; 6 गांव चकबंदी से मुक्त

- लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर, निर्विवाद उत्तराधिकार व नामांतरण के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान

लखनऊ, 13 अक्टूबर। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को चकबंदी से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने के साथ ही सरकार की विभिन्न लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ समय से उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबे समय से लंबित चकबंदी प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए विभिन्न जिलों के गांवों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
चकबंदी आयुक्त के निर्देश पर प्रदेश के चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया से पृथक किया गया है। इनमें जनपद उन्नाव के अजगवां, पिडना और सादाबाद तथा बरेली के मगरासा गांव शामिल हैं, जहां पिछले 12 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। इसके अतिरिक्त बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष तथा बांदा के काजीपुर (गि.) गांव में दो वर्ष से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को समाप्त करते हुए इन गांवों को प्रक्रिया से बाहर किया गया है।
यह निर्णय उन गांवों के संबंध में लिया गया है, जहां ग्राम विकास योजनाओं के कारण, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने अथवा गुटबंदी और दलगत विवादों के चलते चकबंदी कार्य आगे बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा था। विशेष प्रयासों के बावजूद प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे न बढ़ने की स्थिति में संबंधित गांवों को चकबंदी से पृथक करने के निर्देश दिए गए।
- आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण
लंबित चकबंदी मामलों के निस्तारण में तेजी लाते हुए आठ जनपदों के कुल 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया समाप्त की गई है। इनमें छह गांवों को धारा-6(1) के तहत प्रक्रिया से पृथक किया गया, जबकि पांच गांवों में धारा-52(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण की गई।
धारा-52(1) के तहत चकबंदी पूरी किए गए गांवों में महराजगंज जनपद का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। वहीं, बस्ती जनपद के औराडीहा तथा प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से लंबित प्रक्रिया को अथक प्रयासों के बाद पूरा किया गया।
- निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के लिए विशेष अभियान
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रदेश के समस्त बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को निर्देश दिए हैं कि निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के शत-प्रतिशत निस्तारण के लिए 15 अक्टूबर 2026 से 15 नवंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाए। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रकरणों का नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करते हुए निदेशालय को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएं कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार अथवा नामांतरण का मामला जनपद में लंबित नहीं है।
इसके साथ ही अभियान की अवधि के बाद भी निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों की पहचान कर संबंधित चकबंदीकर्ता और सहायक चकबंदी अधिकारियों के संबंध में आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- तीन वर्ष से अधिक पुराने वादों का प्राथमिकता पर होगा निस्तारण
चकबंदी न्यायालयों में लंबित वादों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है। समस्त उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को तीन वर्ष से अधिक पुराने वादों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
- न्यायालयों और अभिलेखों के निरीक्षण के निर्देश
चकबंदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों तथा चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर निरीक्षण टिप्पणी उपलब्ध करानी होगी।
इन निर्देशों के माध्यम से शासन का जोर चकबंदी प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा करने, किसानों के भूमि संबंधी मामलों का शीघ्र समाधान करने और न्यायालयों में वर्षों से लंबित वादों का निस्तारण सुनिश्चित करने पर है।