रील के लाइक्स नहीं, रियल लाइफ में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती हैं किताबें : योगी आदित्यनाथ

- पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी ने किया विमोचन

- कानपुर के परौंख गांव से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा में सादगी, परिश्रम और पुरुषार्थ की मिसाल बने रामनाथ कोविन्द

- यूपी के 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय की व्यवस्था, डिजिटल लाइब्रेरी का भी विस्तार

 - लखनऊ और गोरखपुर के पुस्तक मेलों में उमड़ी पाठकों की भीड़, मुख्यमंत्री योगी बोले- अवसर मिले तो किताबें खरीदते हैं लोग

लखनऊ, 14 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से निकलकर पुस्तकों से जुड़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि आज लोग स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर पांच से सात घंटे बिता रहे हैं। इसमें से एक-दो घंटे भी अच्छी पुस्तकें पढ़ने में लगाएं तो जीवन को नई दिशा मिल सकती है। सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने के बजाय अपनी रियल लाइफ में आगे बढ़ना अधिक उपयोगी है। अच्छी पुस्तकें जीवन की सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होती हैं। युवाओं को महापुरुषों की जीवनी और आत्मकथाएं पढ़नी चाहिए, जिनसे संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

मुख्यमंत्री योगी बुधवार को लोकभवन सभागार में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे भारतीय की जीवनगाथा है, जिसने अभावों को अपनी ढाल नहीं बनाया, बल्कि संघर्ष, परिश्रम और पुरुषार्थ के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया। यह आत्मकथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

 - गांवों तक पहुंच रही पुस्तकें, डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं। इनमें एक कक्ष पुस्तकालय के लिए निर्धारित है, जहां गांव के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। डिजिटल लाइब्रेरी भी विकसित की जा रही हैं। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा भी व्यापक स्तर पर पुस्तकालयों तक पहुंचनी चाहिए। सरकार इस दिशा में प्रयास करेगी।

गोरखपुर में लखनऊ से ज्यादा बिकी थीं पुस्तकें

मुख्यमंत्री योगी ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पुस्तक मेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में आयोजकों को आशंका थी कि आज के दौर में पुस्तकें कौन खरीदेगा। लखनऊ में पुस्तक मेला लगा तो बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद गोरखपुर में उससे भी अधिक पुस्तकें बिकीं। हाल में लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में भी युवाओं और विद्यार्थियों की अच्छी भागीदारी रही। उन्होंने कहा कि लोगों में पढ़ने की रुचि है, जरूरत उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने की है।

- अभावों को बनाया संघर्ष की ताकत

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कानपुर के परौंख गांव में गरीब परिवार में जन्मे रामनाथ कोविन्द ने बचपन में ही मां को खो दिया। गांव के विद्यालय से पढ़ाई शुरू की और उच्च शिक्षा प्राप्त कर अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। भाजपा संगठन, राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बड़ा वही होता है, जिसमें संघर्ष का जज्बा हो। विपरीत परिस्थितियों से पलायन के बजाय उनका मुकाबला करना महानता की पहचान है।

- राष्ट्रपति बनने के बाद भी नहीं भूले गांव और पुराने साथी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी रामनाथ कोविन्द का अपनी जन्मभूमि परौंख से लगाव बना रहा। वह अवसर मिलते ही गांव जाते हैं। पुराने साथियों और चाय-चाट वालों से भी उनके संबंध कायम हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा सुविधाओं के विकास के लिए प्रयास किए। वहां के विद्यालय भवन को विकसित कर राज्य सरकार को समर्पित किया गया, जिसे आवासीय विद्यालय के रूप में आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री योगी ने भगवान श्रीराम के जन्मभूमि प्रेम का उदाहरण देते हुए कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।

- पद बड़ा हो, संस्कार नहीं बदलने चाहिए : केशव मौर्य

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता, सादगी और अहंकार से मुक्त रहने की प्रेरणा देती है। व्यक्ति कितना भी बड़ा पद प्राप्त कर ले, उसके संस्कार और विचार नहीं बदलने चाहिए। रामनाथ कोविन्द का जीवन इसका उदाहरण है।

- गरीब परिवार का बेटा राष्ट्रपति बने, यही गणतंत्र की खूबसूरती : ब्रजेश पाठक

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानपुर के छोटे से गांव में जन्मा गरीब परिवार का व्यक्ति अपनी योग्यता और कार्यक्षमता के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। यही भारतीय गणतंत्र की खूबसूरती है। पूर्व राष्ट्रपति का जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शिता की मिसाल है।

- विधायकों के लिए मांगी पुस्तक की 500 प्रतियां

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को ‘कच्चे घर, पक्के इरादे’ की यात्रा बताया। उन्होंने प्रकाशक से विधानसभा सदस्यों के लिए पुस्तक की 500 प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा ने कहा कि प्रदेश के विद्यालयों और पुस्तकालयों में अच्छी हिंदी पुस्तकों की पहुंच बढ़ी है। किताबें बच्चों तक पहुंच रही हैं।

- पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का किया सम्मान

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत के गायन से हुआ। मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। उनकी पत्नी सविता कोविन्द का भी स्वागत किया। पूर्व राष्ट्रपति ने अतिथियों के साथ आत्मकथा के हिंदी संस्करण का विमोचन किया।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उनकी पत्नी सविता कोविन्द, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

2027 में अपनी इज्जत भी नहीं बचा पाएगी सपा : ओपी राजभर

- ओवैसी की भीड़ देखकर गोपनीय सर्वे करा रहे अखिलेश, राजभर बोले- मुस्लिम वोटों पर सपा की पकड़ हो रही कमजोर
- यूपी में ओवैसी की सक्रियता ने अखिलेश यादव के उड़े होश, राजभर बोले- इस बार सपा को मुस्लिम सिखाएगा सबक
- आजमगढ़ में भी अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी', राजभर का दावा- इस बार सपा का होगा बुरा हाल

लखनऊ, 13 अक्टूबर। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों में उमड़ रही भीड़ को देखकर अखिलेश यादव डरे हुए हैं और AIMIM के साथ गठबंधन के फायदे-नुकसान को लेकर सपा गोपनीय सर्वे करा रही है।
राजभर ने कहा कि यूपी में ओवैसी की बढ़ती सक्रियता ने सपा को चिंता में डाल दिया है। सपा से अब मुस्लिम समाज अपनी हिस्सेदारी मांग रहा है क्योंकि उसे यह एहसास हो गया है कि अखिलेश यादव ने मुस्लिमों को केवल धोखा दिया है।
- मुसलमानों के नेता अब ओवैसी हैं, अखिलेश नहीं
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ओवैसी ने पहले ही अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था। लेकिन तब सपा ने इसपर ध्यान नहीं दिया। लेकिन अब ओवैसी की रैलियों में आ रही भारी भीड़ को देखते हुए सपा गोपनीय सर्वे कराने में जुट गई है।
राजभर ने कहा कि ओवैसी जिन राज्यों में सक्रियता से चुनाव लड़ते हैं, वहां मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा उनकी पार्टी की ओर जाता है। राजभर ने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया, जहां RJD नेता तेजस्वी यादव और पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने ओवैसी को हल्के में लेने की गलती की थी। राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी ओवैसी की सक्रियता सपा के पारंपरिक मुस्लिम समर्थन को प्रभावित कर सकती है।
- सपा ने मुसलमानों को दरी बिछाने तक सीमित रखा
राजभर ने सपा पर मुस्लिम समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी में मुस्लिम विधायक, सांसद और नेता होने के बावजूद कोई अखिलेश यादव से यह मांग करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता कि मुस्लिम समाज के समर्थन के बदले उसे सत्ता में नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को सपा में बराबर की राजनीतिक हिस्सेदारी देने के बजाय उसे पार्टी के लिए काम करने तक सीमित रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुस्लिम समाज सपा को लगातार समर्थन देता रहा है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए किसी मुस्लिम नेता का नाम घोषित करने की मांग क्यों नहीं उठती? राजभर ने कहा कि ओवैसी इसी सवाल को उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, मुस्लिम समाज को अब केवल किसी दूसरे नेता को मुख्यमंत्री बनाने की राजनीति करने के बजाय अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नौकरी और सत्ता में भागीदारी पर भी ध्यान देना चाहिए।
- 20 प्रतिशत वाला हिस्सेदारी की बात करेगा
राजभर ने कहा कि ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं को स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर आगे बढ़ने का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समाज अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर विधानसभा में प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में है और उसे किसी दूसरे दल पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्रतिनिधित्व की मांग करनी चाहिए। राजभर ने कहा कि पहले मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के साथ रहता था, लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रहेगी। राजभर के मुताबिक, ओवैसी और पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अय्यूब की सक्रियता से मुस्लिम मतदाताओं के सामने दूसरे राजनीतिक विकल्प भी मौजूद हैं।
- आजमगढ़ में अखिलेश को झटका देंगे ओवैसी
राजभर ने आजमगढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में प्रचार के बिना ओवैसी को आजमगढ़ में करीब तीन प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन इस बार ओवैसी अभी से सक्रिय हैं। इस बार आजमगढ़ में भी सपा का बुरा हाल होगा।
- 2017 में जो इज्जत बची थी, वह भी चली जाएगी
राजभर ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों का एकमुश्त वोट सपा को नहीं मिलेगा। अखिलेश यादव और सपा को लेकर मुस्लिमों में भयानक नाराजगी है। राजभर ने कहा कि इस बार के चुनाव में सपा का पूरा सफाया हो जाएगा। जो इज्जत 2017 में बच गई थी वो भी 2027 में चली जाएगी।
उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाएं तलाशेगा दक्षिण कोरियाई प्रतिनिधिमंडल
- सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण पर जोर; प्रस्तावित ‘कोरिया सिटी’ और औद्योगिक भूमि बैंक की दी गई जानकारी

ग्रेटर नोएडा/लखनऊ, 13 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और दक्षिण कोरिया के साथ औद्योगिक एवं कारोबारी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में इन्वेस्ट यूपी ने ग्रेटर नोएडा में दक्षिण कोरियाई कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ गोलमेज बैठक आयोजित की। बैठक में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल कलपुर्जों, विशेष रसायनों और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में प्रस्तावित ‘कोरिया सिटी’ की जानकारी भी साझा की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप आयोजित इस बैठक का उद्देश्य वैश्विक निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
- 400 से अधिक कोरियाई कंपनियों का प्रतिनिधित्व
कोरिया वर्ल्ड क्लास एंटरप्राइज एसोसिएशन (KWCEA) का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल 12 से 15 अक्टूबर तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व KWCEA और यूनिटेक कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन सेउंग-हो ली कर रहे हैं। यह संगठन सरकार समर्थित वर्ल्ड क्लास एंटरप्राइज कार्यक्रम के तहत 400 से अधिक कोरियाई कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल नोएडा और गाजियाबाद की प्रमुख औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी इकाइयों का भी भ्रमण करेगा। प्रस्तावित कार्यक्रम में एचसीएलटेक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), संवर्धना मदरसन, डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियों के दौरे शामिल हैं। इन दौरों के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल को प्रदेश की विनिर्माण क्षमताओं, तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
- निवेश नीतियों और औद्योगिक भूमि की दी गई जानकारी
गोलमेज बैठक में 18 कंपनियों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPELC) की प्रबंध निदेशक जसजीत कौर, इन्वेस्ट यूपी की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) गजल भारद्वाज, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की एसीओ प्रेरणा सिंह और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के एसीओ मनीष मीना ने की।
बैठक में विभिन्न विभागों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की ओर से प्रदेश में निवेश के अवसरों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। UPELC ने उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स नीति, इन्वेस्ट यूपी ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति, GNIDA ने औद्योगिक भूमि बैंक और YEIDA ने प्रस्तावित कोरिया सिटी से संबंधित जानकारी साझा की। इसके बाद निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और कारोबारी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने दिखाई रुचि
दक्षिण कोरियाई प्रतिनिधिमंडल में यूनिटेक, हाना माइक्रोन, डोंगजिन सेमिकेम और शिला इंडस्ट्रियल सहित कई कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इन कंपनियों की विशेषज्ञता सेमीकंडक्टर, विशेष रसायन, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, ऑटोमोबाइल कलपुर्जों और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में है। बैठक में संबंधित क्षेत्रों से जुड़े भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में निवेश की संभावनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध बुनियादी ढांचे और निवेश प्रोत्साहन व्यवस्थाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इससे प्रदेश में तकनीक आधारित विनिर्माण, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं के विकास और भारतीय एवं कोरियाई कंपनियों के बीच कारोबारी सहयोग को बढ़ाने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ।
- निवेश प्रोत्साहन नीतियों पर भी फोकस
इन्वेस्ट यूपी ने प्रतिनिधिमंडल को उत्तर प्रदेश एफडीआई/एफसीआई, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनियां निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 और उत्तर प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीति-2024 की जानकारी दी। इन नीतियों के माध्यम से प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश, वैश्विक कारोबारी केंद्रों की स्थापना और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से अवगत कराया गया।
बैठक का समापन नेटवर्किंग और संभावित कारोबारी साझेदारियों पर चर्चा के साथ हुआ। इस पहल को उत्तर प्रदेश और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे प्रदेश में वैश्विक निवेश आकर्षित करने, औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाने और सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सहित प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण क्षेत्रों के विस्तार की संभावनाओं को बल मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी डीप स्टेट की मदद से देश में अराजकता फैलाना चाहती है कांग्रेस : बृजलाल
- राज्यसभा सांसद का आरोप, राहुल गांधी और विपक्षी दल विदेशी शक्तियों के हाथों में खेल रहे
- बोले- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती ताकत अमेरिका समेत विदेशी शक्तियों को नहीं आ रही रास
- नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तरह भारत में भी अस्थिरता पैदा कर सरकार गिराने की साजिश का लगाया आरोप
- मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का आरोप लगाते हुए कहा- कांग्रेस को आज भी चाहिए अपने प्रति प्रतिबद्ध न्यायपालिका

लखनऊ, 13 अक्टूबर। भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर अमेरिकी डीप स्टेट की मदद से देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल विदेशी शक्तियों के हाथों में खेल रहे हैं। इनका उद्देश्य देश में अराजकता पैदा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को गिराना है। इसके लिए नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां पैदा करने की कोशिश की जा रही है। बृजलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज किसी भी महाशक्ति से आंख में आंख डालकर बात करता है। भारत की यह बढ़ती ताकत अमेरिका और अन्य विदेशी शक्तियों को पसंद नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी डीप स्टेट की इसमें मुख्य भूमिका है और कांग्रेस सहित विपक्षी दल उसके इशारे पर काम कर रहे हैं।
बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में नहीं आ पा रही है और आगे भी सत्ता में आने की संभावना नहीं देख रही है। इसलिए अब विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अस्थिरता पैदा करना चाहती है। उन्होंने सीजेपी को भी इसी साजिश का हिस्सा बताते हुए आम आदमी पार्टी की बी टीम करार दिया। आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं को दबाव में लेकर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाना चाहते हैं।
- मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का लगाया आरोप
बृजलाल ने कहा कि 12 अक्टूबर को राहुल गांधी अपने सहयोगियों अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने पहुंचे थे। वे चुनाव आयोग और एसआईआर समेत अन्य मामलों को लेकर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मिलना चाहते थे। मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए ईमेल के माध्यम से संवैधानिक परंपराओं की जानकारी दी। कांग्रेस ने इस पत्र को अपने एक्स हैंडल पर सार्वजनिक कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने मुख्य न्यायाधीश के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इस्तीफे की मांग की। यहां तक कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश कार्रवाई नहीं कर सकते तो इस्तीफा दे दें, उनका विकल्प नियुक्त कर लिया जाएगा। बृजलाल ने इसे सर्वोच्च न्यायपालिका का घोर अपमान और मुख्य न्यायाधीश को धमकाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर लेते तो राहुल गांधी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद की तरह फिर कोई फर्जी नैरेटिव गढ़ लेते।
- इंदिरा गांधी के दौर से कांग्रेस को चाहिए प्रतिबद्ध न्यायपालिका
बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस की प्रतिबद्ध न्यायपालिका की सोच उसके पुराने इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने जस्टिस बहरूल इस्लाम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें 1962 और 1968 में राज्यसभा भेजा। इसके बाद वह गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश बने। वर्ष 1980 में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया। बृजलाल ने आरोप लगाया कि बिहार के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को सहकारी बैंक घोटाले से जुड़े मामले में राहत देने के बाद बहरूल इस्लाम ने सर्वोच्च न्यायालय से इस्तीफा दिया और कांग्रेस ने 1983 में उन्हें तीसरी बार राज्यसभा भेज दिया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1973 में केशवानंद भारती मामले के फैसले के बाद इंदिरा गांधी सरकार ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर जस्टिस एएन रे को मुख्य न्यायाधीश बनाया। इसी तरह आपातकाल के दौरान एडीएम जबलपुर मामले में जीवन के अधिकार के पक्ष में असहमति जताने वाले जस्टिस एचआर खन्ना की वरिष्ठता की अनदेखी कर जस्टिस एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
बृजलाल ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ऐसे न्यायाधीशों को महत्व दिया जो सरकार की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करें। राहुल गांधी भी अपनी पार्टी की उसी पुरानी नीति के अनुसार प्रतिबद्ध न्यायपालिका चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता से बाहर होने के कारण कांग्रेस अब न्यायपालिका पर दबाव बनाने और विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही है।
सर्वाेदय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगी निःशुल्क जेईई-नीट कोचिंग
- दक्षणा फाउंडेशन की संयुक्त चयन परीक्षा (जेडीएसटी-2027) के माध्यम से कक्षा 12 विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को मिलेगा अवसर
- चयनित विद्यार्थियों को एक वर्ष तक निःशुल्क कोचिंग, आवास और भोजन की सुविधा, पात्र विद्यार्थी ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन

लखनऊ,13 अक्टूबर, 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वाेदय विद्यालयों में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का सुनहरा अवसर है। दक्षणा फाउंडेशन की ओर से संयुक्त दक्षणा चयन परीक्षा (जेडीएसटी-2027) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। इसके तहत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक वर्ष तक जेईई अथवा नीट की निःशुल्क तैयारी के साथ आवास और भोजन की सुविधा भी मिलेगी। यह सुविधा पुणे के निकट स्थित दक्षणा वैली परिसर में उपलब्ध कराई जाएगी।
- कक्षा 10 के अंकों के आधार पर तय होगी पात्रता
शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा 12 विज्ञान वर्ग में अध्ययनरत और मई 2027 तक बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी निर्धारित मानकों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इंजीनियरिंग वर्ग में छात्र के लिए सामान्य श्रेणी में कक्षा 10 के गणित एवं विज्ञान विषयों में निर्धारित कटऑफ 85 प्रतिशत और छात्रा के लिए 80 प्रतिशत है। अन्य आरक्षित श्रेणियों के लिए कटऑफ अलग-अलग निर्धारित है। मेडिकल वर्ग में सामान्य श्रेणी के लिए 80 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 75 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 65 प्रतिशत कटऑफ निर्धारित है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी अलग कटऑफ का प्रावधान है।
पात्रता के अनुसार छात्रों के परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम और छात्राओं के लिए पांच लाख से कम होनी चाहिए। सर्वाेदय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे कक्षा 12 विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को इस अवसर की जानकारी दें और पात्र विद्यार्थियों को आवेदन के लिए प्रेरित करें। इससे आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कठिनाई का सामना करने वाले विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकेगा। दक्षणा फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट https://apply.scholarship.dakshana.org  पर जेडीएसटी-2027 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर चकबंदी कार्य में तेजी, 11 गांवों में प्रक्रिया समाप्त; 6 गांव चकबंदी से मुक्त

- लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण पर जोर, निर्विवाद उत्तराधिकार व नामांतरण के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान

लखनऊ, 13 अक्टूबर। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए अभियान तेज कर दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को चकबंदी से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने के साथ ही सरकार की विभिन्न लाभार्थीपरक योजनाओं का लाभ समय से उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबे समय से लंबित चकबंदी प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए विभिन्न जिलों के गांवों में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
चकबंदी आयुक्त के निर्देश पर प्रदेश के चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया से पृथक किया गया है। इनमें जनपद उन्नाव के अजगवां, पिडना और सादाबाद तथा बरेली के मगरासा गांव शामिल हैं, जहां पिछले 12 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। इसके अतिरिक्त बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष तथा बांदा के काजीपुर (गि.) गांव में दो वर्ष से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को समाप्त करते हुए इन गांवों को प्रक्रिया से बाहर किया गया है।
यह निर्णय उन गांवों के संबंध में लिया गया है, जहां ग्राम विकास योजनाओं के कारण, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने अथवा गुटबंदी और दलगत विवादों के चलते चकबंदी कार्य आगे बढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा था। विशेष प्रयासों के बावजूद प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे न बढ़ने की स्थिति में संबंधित गांवों को चकबंदी से पृथक करने के निर्देश दिए गए।
- आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण
लंबित चकबंदी मामलों के निस्तारण में तेजी लाते हुए आठ जनपदों के कुल 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया समाप्त की गई है। इनमें छह गांवों को धारा-6(1) के तहत प्रक्रिया से पृथक किया गया, जबकि पांच गांवों में धारा-52(1) के अंतर्गत चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण की गई।
धारा-52(1) के तहत चकबंदी पूरी किए गए गांवों में महराजगंज जनपद का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी। बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से चकबंदी चल रही थी। वहीं, बस्ती जनपद के औराडीहा तथा प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से लंबित प्रक्रिया को अथक प्रयासों के बाद पूरा किया गया।
- निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के लिए विशेष अभियान
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रदेश के समस्त बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को निर्देश दिए हैं कि निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के शत-प्रतिशत निस्तारण के लिए 15 अक्टूबर 2026 से 15 नवंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाए। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रकरणों का नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करते हुए निदेशालय को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएं कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार अथवा नामांतरण का मामला जनपद में लंबित नहीं है।
इसके साथ ही अभियान की अवधि के बाद भी निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों की पहचान कर संबंधित चकबंदीकर्ता और सहायक चकबंदी अधिकारियों के संबंध में आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- तीन वर्ष से अधिक पुराने वादों का प्राथमिकता पर होगा निस्तारण
चकबंदी न्यायालयों में लंबित वादों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है। समस्त उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को तीन वर्ष से अधिक पुराने वादों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
- न्यायालयों और अभिलेखों के निरीक्षण के निर्देश
चकबंदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों तथा चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर निरीक्षण टिप्पणी उपलब्ध करानी होगी।
इन निर्देशों के माध्यम से शासन का जोर चकबंदी प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा करने, किसानों के भूमि संबंधी मामलों का शीघ्र समाधान करने और न्यायालयों में वर्षों से लंबित वादों का निस्तारण सुनिश्चित करने पर है।
दंगा किया तो बाप-दादाओं की कमाई से भी धोना पड़ेगा हाथ : मुख्यमंत्री योगी
*बरेली क्लब ग्राउंड में भाजपा प्रत्याशी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो के समर्थन में शिक्षक सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित*
*मुख्यमंत्री योगी ने कहा- बरेली में दंगा करने वाले अब जेल में मना रहे उर्स, उपद्रव नहीं उत्सव से है यूपी की पहचान*
*बोले मुख्यमंत्री योगी- शिक्षक सरकारी कर्मचारी नहीं, राष्ट्र और युग निर्माता हैं, उनके सम्मान और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की*
*मुख्यमंत्री योगी ने कहा- सपा सरकार में चयन बोर्ड में बैठाए जाते थे परिवार और रिश्तेदार, भर्ती प्रक्रिया को किया गया प्रदूषित*
*बोले मुख्यमंत्री योगी- अब 14 दिन में मुख्य परीक्षा और अगले 14 दिन में परिणाम, पहले छह महीने करना पड़ता था इंतजार*
*मुख्यमंत्री योगी ने कहा- यूपी में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना बढ़ी*

बरेली, 13 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दंगाइयों को चेताया कि अब उत्तर प्रदेश में दंगा किया तो बाप-दादाओं की कमाई से भी हाथ धोना पड़ेगा। वर्ष 2017 से पहले बरेली में पर्व-त्योहार आते ही दंगे होते थे। अब दंगा करने वाले जेल में उर्स मना रहे हैं। उनका इशारा मौलाना तौकीर रजा की ओर था। उन्होंने कहा कि यूपी की पहचान अब उपद्रव से नहीं, उत्सव से है। कानून-व्यवस्था में बदलाव से प्रदेश के प्रति धारणा बदली है।
मुख्यमंत्री योगी बरेली क्लब ग्राउंड में शिक्षक-एमएलसी चुनाव, बरेली/मुरादाबाद क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो के समर्थन में मंगलवार को शिक्षक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक कर्मचारी नहीं, राष्ट्र और युग निर्माता हैं। उनके सम्मान और स्वास्थ्य की चिंता सरकार की जिम्मेदारी है। वर्ष 2017 से पहले शिक्षा व्यवस्था चौपट थी, लेकिन शिक्षकों ने शिक्षा की ज्योति बुझने नहीं दी।
*शिक्षकों को कैशलेस इलाज, बीमा कवर भी*
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और स्ववित्तपोषित संस्थानों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी गई है। शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइये भी इससे जुड़े हैं। माध्यमिक शिक्षकों को 80 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक बीमा कवर मिला है। रसोइयों को पांच लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य कवर और दो लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा दी गई है। राज्य शिक्षक पुरस्कार की राशि और संख्या भी बढ़ाई गई है।
*सपा राज में रिश्तेदारों के भरोसे था चयन बोर्ड*
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में 1.60 लाख से अधिक पद रिक्त थे। सरकार ने साढ़े छह वर्षों में इतने ही शिक्षकों की पारदर्शी भर्ती की। सपा सरकार में चयन बोर्ड में परिवार और रिश्तेदारों को बैठाकर नियुक्तियां प्रभावित की जाती थीं। अब योग्य युवाओं को बिना भेदभाव नौकरी मिल रही है।
उन्होंने कहा कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं पांच से 24 फरवरी के बीच होंगी। मुख्य परीक्षा 14 दिन में पूरी होगी और अगले 14 दिन में परिणाम आएगा। पहले छह महीने लगते थे।
*ग्रामीण विद्यार्थियों को भी आधुनिक शिक्षा के अवसर*
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव केवल भवनों के निर्माण तक सीमित नहीं है। ऑपरेशन कायाकल्प और प्रोजेक्ट अलंकार से विद्यालयों में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और अटल टिंकरिंग लैब से ग्रामीण विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि गांव के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वे आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ सकें।
*माफिया पर कार्रवाई से सपा को पीड़ा*
मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार में मुख्यमंत्री आवास पर गरीबों और शिक्षकों के बजाय गैंगस्टर, दंगाई और फिरौती वसूलने वाले बुलाए जाते थे। अब माफिया पर कार्रवाई से सपा नेताओं को पीड़ा होती है। उन्होंने बरेली की नाथ नगरी के रूप में पहचान और संभल के 68 तीर्थ व 19 कूप के पुनर्जीवन का उल्लेख किया।
*हर जिले में विश्वविद्यालय देने की तैयारी*
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना बढ़ी है। शाहजहांपुर में स्वामी सुखदेवानंद और मुरादाबाद में गुरु जंभेश्वर के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित हुए हैं। भदोही और कुशीनगर में भी विश्वविद्यालय दिए गए हैं। सरकार एक जिला-एक विश्वविद्यालय की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 23 अक्टूबर को शिक्षक मतदाताओं को मतदान के लिए अवकाश मिलेगा। उन्होंने डॉ. हरि सिंह ढिल्लो को सरदार के साथ असरदार बताते हुए जिताने की अपील की।
*शिक्षक चुनाव से मिलेगा विधानसभा चुनाव का संकेत : खन्ना*
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि यह चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षित वर्ग में भाजपा की लोकप्रियता का संकेत देगा। सरकार ने छह करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देने वाले अखिलेश यादव मुख्यमंत्री योगी के जवाब के बाद चुप हैं।
*विपक्ष को नहीं दिखता विकास : गुलाब देवी*
माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने शिक्षकों के हित में ऐतिहासिक कार्य किए हैं। विपक्ष को प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के विकास कार्य नहीं दिखते। उल्लू को दिन में नहीं दिखता तो इसमें सूर्य का दोष नहीं है। डॉ. हरि सिंह ढिल्लो शिक्षकों के लिए सहज उपलब्ध हैं।
*कार्यक्रम में ये रहे मौजूद*
सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर, अरुण कुमार सक्सेना, संजय गंगवार, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार और राज्यसभा सदस्य श्रुति गंगवार मौजूद रहीं। अंत में धर्मपाल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी को स्मृति चिह्न भेंट किया।
एक संत, कई रहस्य और जवाब की तलाश… अब पर्दे पर खुलेगा ‘देवराहा बाबा’ का अनसॉल्व्ड कोड!
लखनऊ। क्या हर रहस्य का जवाब होता है? क्या आस्था और विज्ञान के बीच कोई ऐसा रास्ता है, जहां सवाल तो बहुत हों, लेकिन जवाब तलाशना आसान न हो? संत देवराहा बाबा के जीवन और उनसे जुड़ी रहस्यमयी जनश्रुतियों को लेकर कुछ ऐसे ही सवाल अब फिल्म के पर्दे पर उठने की तैयारी है। चर्चित नाटककार, लेखक और निर्देशक मुकेश वर्मा इस विषय पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। फिल्म का नाम ‘देवराहा बाबा — THE UNSOLVED CODE’ रखा गया है।
फिल्म की कहानी सिर्फ एक संत के जीवन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें रहस्य, अध्यात्म, इतिहास और सच्चाई की तलाश को भी जगह दी जाएगी। कहानी का मुख्य किरदार एक खोजी पत्रकार होगा, जो देवराहा बाबा से जुड़ी मान्यताओं और उनके व्यक्तित्व के बारे में जानने निकलता है। उसकी यह खोज उसे ऐसे सवालों के सामने खड़ा करती है, जो उसकी सोच और नजरिये को बदलने लगते हैं।
पत्रकार की इस यात्रा के जरिए दर्शकों को भी सवाल करने और अपने नजरिये से चीजों को समझने का मौका मिलेगा। कहानी में यह जानने की कोशिश होगी कि लोगों के बीच प्रचलित मान्यताओं के पीछे क्या आधार हैं और आस्था को समझने के लिए इतिहास, तर्क और अनुभव किस तरह मदद कर सकते हैं।
देवराहा बाबा को लेकर लंबे समय से लोगों के बीच कई तरह की कहानियां और मान्यताएं प्रचलित रही हैं। मुकेश वर्मा इन्हीं चर्चाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों को सिनेमाई अंदाज में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। फिल्म में किन प्रसंगों को शामिल किया जाएगा और कहानी किस तरह आगे बढ़ेगी, यह पटकथा और निर्माण के दौरान तय होगा।
मुकेश वर्मा रंगमंच और लेखन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह हिंदी फिल्म ‘मल्लाह’ का लेखन और निर्देशन भी कर चुके हैं। अब ‘देवराहा बाबा — THE UNSOLVED CODE’ के जरिए वह एक ऐसे विषय को बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें रहस्य के साथ इंसानी जिज्ञासा और आध्यात्मिक सवाल भी अहम होंगे।
फिल्म निर्माण के लिए अनुभवी रंगकर्मियों और नए कलाकारों को जोड़ने की योजना है। अभिनय में रुचि रखने वाले कलाकारों को इस परियोजना से जुड़ने का अवसर मिल सकता है। कलाकारों के चयन और ऑडिशन से जुड़ी जानकारी आगे साझा की जाएगी।
फिलहाल फिल्म की शूटिंग, कलाकारों और रिलीज की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन फिल्म के शीर्षक और विषय ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या इस कहानी में रहस्य का जवाब मिलेगा या दर्शक भी कुछ नए सवाल लेकर सिनेमाघर से बाहर निकलेंगे?

फिल्म: देवराहा बाबा — THE UNSOLVED CODE
लेखन एवं निर्देशन: मुकेश वर्मा
कलाकार: चयन प्रक्रिया प्रस्तावित है।
अखिलेश का PDA परिवार और पैसे तक सिमटा : अनिल राजभर
- लोहिया के आदर्शों से सपा का कोई लेना-देना नहीं,  अनिल राजभर ने अखिलेश को घेरा
- परिवारवाद और अपराधियों को संरक्षण देना सपा का एजेंडा ; कैबिनेट मंत्री ने लगाया आरोप
- चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर अभी से 2027 की हार का बहाना बनाने में जुट गए हैं अखिलेश : दिनेश प्रताप सिंह
- मंत्री ने कहा - साढ़े चार साल सोते हैं और चुनाव आते ही जाति-धर्म की राजनीति करने लगते हैं अखिलेश
- लोहिया को छोड़ अतीक-मुख्तार की विचारधारा पर चल रहे अखिलेश; बीजेपी का तीखा हमला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर और धर्मपाल सिंह के साथ बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने सोमवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। तीनों ने सपा के परिवारवाद, PDA, महिला सुरक्षा और चुनाव आयोग को लेकर अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाए।
कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया परिवारवाद की राजनीति के विरोधी थे और उन्होंने सनातन परंपरा के सम्मान की बात की थी। राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अब लोहिया के सिद्धांतों से दूर हो चुकी है। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव की राजनीति का लोहिया के समाजवाद से कोई संबंध नहीं रह गया है।
राजभर ने चुनाव आयोग पर अखिलेश यादव के सवालों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का अंदेशा है, इसलिए वह पहले से ही हार के बहाने तैयार कर रही है।

- फर्जी मतदाताओं के नाम हटने से परेशान है विपक्ष : धर्मपाल सिंह
कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर कहा कि विपक्ष के पास विकास और जनकल्याण का कोई ठोस एजेंडा नहीं है। उनके मुताबिक, जनता के बीच स्वीकार्यता घटने के कारण विपक्ष एसआईआर को मुद्दा बना रहा है। धर्मपाल सिंह ने कहा कि फर्जी नाम हटने से विपक्ष परेशान है और इसी वजह से चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।
धर्मपाल सिंह ने कहा कि सपा सरकार के दौरान महिलाओं  के सुरक्षा की क्या स्थिति थी ये पूरा प्रदेश जानता है। उन्होंने कहा कि सपाई को देखकर ही बेटियां सहम जाती थीं। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आज भाजपा सरकार में महिलाओं, बेटियों, व्यापारियों और आम लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता है।

- चुनाव जीतने पर आयोग ठीक, हारने पर सवाल : दिनेश प्रताप सिंह
भाजपा प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने चुनाव आयोग के प्रमुख को हटाने की मांग और विपक्ष के प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए को हराने के लिए विपक्ष कई तरीके आजमा चुका है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी कमियों पर विचार करने के बजाय सत्ता हासिल करने के लिए दूसरे रास्ते तलाश रहा है। उन्होंने अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन राज्यों में विपक्ष चुनाव जीतता है, वहां चुनाव आयोग, ईवीएम और मतगणना की व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन हार मिलने पर पूरी व्यवस्था पर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने इसे विपक्ष का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि जनता ऐसे नैरेटिव को समझती है।
दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा प्रमुख चुनाव नजदीक आने पर जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश अपनी कमियों पर विचार करने के बजाय भाजपा और सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लोहिया जी के विचारों से कोई लेना-देना नहीं है। वो मुख्तार और अतीक के विचारों को फॉलो करते हैं।
68 हजार ग्राम प्रहरियों को कैशलेस इलाज के साथ अब 3500 रुपये मानदेय

- बरेली पुलिस लाइन में ग्राम प्रहरी सम्मान समारोह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित, उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान

- मुख्यमंत्री योगी ने कहा- मानदेय में एकमुश्त 40 प्रतिशत की वृद्धि, हर ग्राम प्रहरी को सालाना 12 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे

- बोले मुख्यमंत्री योगी- पहले यूपी के लोगों को दूसरे राज्यों में छिपानी पड़ती थी पहचान, अब गले मिलने को आगे आते हैं लोग

- मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 2017 से पहले सत्ता में बैठे लोग ही कराते थे लूटपाट, पुलिस भी कार्रवाई करने से हिचकती थी

- बोले मुख्यमंत्री योगी- मुट्ठी भर अराजक तत्वों की करतूतों का खामियाजा भुगतते थे 25 करोड़ प्रदेशवासी

- मुख्यमंत्री योगी ने कहा- पहले पर्व-त्योहारों पर उपद्रव का डर, अब माफिया मिट्टी में मिले और यूपी में उत्सव का माहौल

 बरेली, 13 अक्तूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों का मानदेय एक हजार रुपये बढ़ाने के साथ ही उनके परिवारों को पांच लाख रुपये सालाना कैशलेस इलाज की सौगात दी। मानदेय में एकमुश्त 40 प्रतिशत की वृद्धि से अब उन्हें 2500 के बजाय 3500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। प्रत्येक ग्राम प्रहरी को सालाना 12 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में ग्राम प्रहरियों को महज 1500 रुपये मानदेय मिलता था। वर्ष 2019 में इसे बढ़ाकर 2500 रुपये किया गया था। अब जिम्मेदारी के साथ उनकी सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं।

बरेली की रिजर्व पुलिस लाइन में ग्राम प्रहरी सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में पर्व-त्योहार आते ही उपद्रव शुरू हो जाते थे। मुट्ठी भर अराजक तत्वों की करतूतों का खामियाजा 25 करोड़ प्रदेशवासियों को भुगतना पड़ता था। दूसरे राज्यों में यूपी के लोगों को अपनी पहचान छिपानी पड़ती थी। अब स्थिति बदल चुकी है। जो लोग पहले सौ कदम दूर रहते थे, आज यूपी का नाम सुनकर गले मिलने आते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार ने प्रदेश के प्रति देश-दुनिया की धारणा बदल दी है।

- शहर में सीसीटीवी, गांव में ग्राम प्रहरी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शहरों में सीसीटीवी कैमरे जिस तरह अपराधियों पर नजर रखते हैं, गांवों में ग्राम प्रहरी वही भूमिका निभाएं। संदिग्ध गतिविधियों, अपराध और जमीन कब्जाने वालों की सूचना तत्काल पुलिस तक पहुंचाएं। थानाध्यक्ष अथवा हलके के दारोगा सप्ताह में कम से कम एक दिन ग्राम प्रहरियों के साथ बैठक करें। इससे सूचना तंत्र मजबूत होगा और छोटी घटनाओं को बड़ा विवाद बनने से रोका जा सकेगा। मुख्यमंत्री योगी ने गृह विभाग को रिक्त पदों पर स्थानीय स्तर से नियुक्तियां करने के निर्देश भी दिए।

- पहले सत्ता में बैठे लोग ही कराते थे लूटपाट

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले सत्ता में बैठे लोग ही लूटपाट कराते थे। पुलिस भी कार्रवाई करने में असहाय रहती थी। अब अपराधियों के मन में कानून का भय है। शहरों में सीसीटीवी और एआई तकनीक से संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी हो रही है। बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को कठोर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि माफिया मिट्टी में मिल गए हैं। प्रदेश में अब दंगा और उपद्रव नहीं होता। कानून-व्यवस्था बेहतर होने से निवेश, व्यापार और रोजगार बढ़े हैं।

- शक्तिपीठों पर भीड़ बदली व्यवस्था का प्रमाण

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले नवरात्र और दूसरे पर्वों पर उपद्रव की आशंका रहती थी। अब नवरात्र के प्रथम दिन से ही गांव-गांव में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित हो रही हैं। विंध्यवासिनी धाम में पिछले दिनों सवा दो से ढाई लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मंगलवार सुबह छह बजे तक डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। देवीपाटन धाम में भी डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। सीतापुर के ललिता देवी मंदिर और सहारनपुर की शाकंभरी पीठ पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ है। यह भयमुक्त वातावरण का परिणाम है।

- ग्राम प्रहरी की सूचना टाल सकती है अनहोनी

मुख्यमंत्री योगी ने ग्राम प्रहरियों से वन्यजीवों के खतरे, अफवाहों और भू-माफिया की गतिविधियों की सूचना भी प्रशासन को देने को कहा। मुख्यमंत्री योगी ने पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच और बिजनौर का उल्लेख करते हुए कहा कि समय पर मिली सूचना बड़ी अनहोनी रोक सकती है। बिजनौर में 40 से अधिक तेंदुओं का रेस्क्यू किया गया है। प्रदेश की 57,600 से अधिक ग्राम पंचायतों और लगभग 1.05 लाख राजस्व गांवों में ग्राम प्रहरियों की सजगता महत्वपूर्ण है। गांव सुरक्षित होंगे तो आत्मनिर्भर बनेंगे। इससे विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत का संकल्प मजबूत होगा।

- 11 ग्राम प्रहरियों को साफा पहनाकर किया सम्मानित

मुख्यमंत्री योगी ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 ग्राम प्रहरियों को मंच पर साफा पहनाकर और गिफ्ट हैम्पर देकर सम्मानित किया। इनमें बरेली के फरीदपुर से राजवीर सिंह, सिरौली से कुंवर पाल सिंह, बहेड़ी से राम राठौर, पीलीभीत के सुनगढ़ी से राजेंद्र बाल्मीकि, शाहजहांपुर के पुवायां से कमलेश, मुरादाबाद के कांठ से कमलेश सिंह सैनी, बिजनौर की शहर कोतवाली से राजेश सैनी, संभल के हजरतनगर गढ़ी से अनिल बाल्मीकि, रामपुर के टांडा से ध्यान सिंह चौहान, शाहबाद से प्रकाश और अमरोहा के नौगावां सादात से तेजपाल प्रजापति शामिल रहे। समारोह में ग्राम प्रहरियों के योगदान पर लघु फिल्म भी दिखाई गई।

- सुरेश खन्ना बोले- ग्राम प्रहरियों का बढ़ाया सम्मान

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने मानदेय बढ़ाकर ग्राम प्रहरियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है। ग्रामीण शांति व्यवस्था में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में प्रदेश की तस्वीर बदली है। उन्होंने छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा किया।

- धर्मपाल सिंह बोले- सपा का पीडीए फेल

पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गांवों में अब चोरी और गुंडागर्दी का भय नहीं है। सरकार की आलोचना करने वालों को ग्रामीण स्वयं जवाब देते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका पीडीए फेल हो चुका है। भाजपा के पीडीए का अर्थ पहली बार 2017, दूसरी बार 2022 और अगली बार 2027 बताया।

- डीजीपी बोले- गांव और थाने के बीच महत्वपूर्ण कड़ी

अपने संबोधन से पहले पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी को मां दुर्गा की प्रतिमा भेंट की। वहीं संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी गांव और थाने के बीच सूचना एवं संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। अपराध, भूमि विवाद और शांति भंग की आशंका की सूचना तत्काल पुलिस को दें। साइबर ठगी और सोशल मीडिया की अफवाहों के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करें। डिजिटल वालंटियर्स और व्हाट्सऐप समूहों से सूचना तंत्र मजबूत होगा।

- कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में मंत्री जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर, अरुण कुमार सक्सेना, संजय सिंह गंगवार, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, राज्यसभा सदस्य श्रुति गंगवार, महापौर डॉ. उमेश गौतम और अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद मौजूद रहे।