पूर्व नौकरी के आवेदन की जानकारी न देने से पुरानी पेंशन का हक नहीं छीनेगा: कलकत्ता हाईकोर्ट*
*कोलकाता:* सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इसलिए कि एक नव-नियुक्त कर्मचारी ने अपनी पुरानी नौकरी के आवेदन की जानकारी नहीं दी थी, उसे पुरानी पेंशन योजना (OPS) के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा और न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि पूर्व आवेदनों के खुलासे से संबंधित प्रक्रियात्मक नियमों की व्याख्या उदारता से की जानी चाहिए, खासकर जब मामला पुरानी पेंशन योजना जैसी कल्याणकारी योजना का हो।
*मामले की पृष्ठभूमि:*
याचिकाकर्ता ने मई 2002 में चपरासी (Peon) के पद के लिए आवेदन किया था और बाद में 2005 में लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के पद के लिए भी आवेदन किया था। वह चपरासी के पद पर चयनित होकर नौकरी में शामिल हो गया।
चपरासी के रूप में काम करते हुए ही LDC पद का रिजल्ट आया और वह उसमें भी चयनित हो गया। उसे 12 मार्च, 2007 को नियुक्ति पत्र दिया गया। उसने 14 मार्च, 2007 को चपरासी पद से इस्तीफा दे दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा था कि उसका चयन LDC के रूप में हो गया है। उसका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया और उसे 23 मार्च, 2007 को कार्यमुक्त कर दिया गया। उसने 27 मार्च, 2007 को LDC के पद पर ज्वाइन कर लिया।
उसके नए नियुक्ति पत्र में उल्लेख किया गया था कि वह नई पेंशन योजना (NPS), 2004 के तहत आएगा।
*विवाद क्या था:*
केंद्र सरकार ने एक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) जारी किया था, जिसमें एकमुश्त विकल्प दिया गया था कि जिन कर्मचारियों के पद का विज्ञापन 22.12.2003 (NPS की अधिसूचना की तारीख) से पहले आया था, वे पुराने CCS (पेंशन) नियम, 1972 के तहत आने का विकल्प चुन सकते हैं। इस विकल्प को चुनने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2023 थी।
कर्मचारी ने OPS के लिए आवेदन किया। लेकिन उसका दावा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसने चपरासी पद से "तकनीकी इस्तीफा" (Technical Resignation) नहीं लिया, बल्कि सीधे इस्तीफा दिया था, और चपरासी के पद पर ज्वाइन करते समय अपने लंबित LDC आवेदन के बारे में नहीं बताया था।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी।
*हाईकोर्ट में दलीलें:*
कर्मचारी ने तर्क दिया कि उसने कभी भी तथ्य नहीं छिपाए। उसके इस्तीफा पत्र में दूसरी नौकरी मिलने का उल्लेख था। उसने 17 अगस्त, 2016 के OM का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि उचित माध्यम से आवेदन करने के बाद दिया गया इस्तीफा एक तकनीकी औपचारिकता माना जाना चाहिए।
वहीं, विभाग का तर्क था कि उसे चपरासी पद पर ज्वाइन करते समय ही अपने पुराने लंबित आवेदन की जानकारी देनी चाहिए थी, और ऐसा न करने के कारण वह NPS के तहत ही रहेगा।
*कोर्ट की टिप्पणी:*
रिट याचिका को स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने कहा कि उसके इस्तीफे को तकनीकी इस्तीफा ही माना जाना चाहिए। कल्याणकारी योजना का उद्देश्य पेंशन लाभ देना है, और अनजाने में हुई एक तकनीकी चूक से किसी का अधिकार खत्म नहीं हो सकता।
कोर्ट ने अधिकारियों को याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्देश दिया है।
इस फैसले से ऐसे कई कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है जो इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं।
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Oct 06 2026, 18:28
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