*विश्व रेबीज दिवस पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने दिए बचाव के टिप्स बताए*
रिपोर्ट/लालजी
सुल्तानपुर,विश्व रेबीज दिवस के मौके पर पशु मुख्य चिकित्साधिकारी, सुल्तानपुर
डॉ. सुनील कुमार ने आम जनमानस को रेबीज बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया -
बीमारी कैसे होती है-कुत्ता, बिल्ली, बन्दर या नेवला के काटने से रेबीज वायरस फैलता है।
घाव का प्राथमिक उपचार क्या है-जैसे ही कुत्ता, बिल्ली, बच्चे या जानवर को काटे तो सर्वप्रथम साबुन और पानी या डिटॉल के पानी से लगातार 15 मिनट तक घाव को धोयें। रनिंग वाटर के नीचे से धोने से घाव पर जो वायरस या कुत्ते की लार होती है वह बह जाता है।
क्या न करें-घाव में मिर्च आदि न लगायें। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि कभी भी घाव को बांधें नहीं,न ही टांके लगवाएं। ऐसा करने से वायरल घाव में ही रह जायेगा,वायरस मल्टीप्लाई करके दिमाग तक नर्वस के नर्वों से पहुंच जायेगा। एक बार अगर व्यक्ति को बीमारी हो गई तो उसका इलाज संभव नहीं होता।
इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन कब लगवाएं-तुरन्त डॉक्टर से एंटी रेबीज टीका 0, 3, 7, 28 वें दिन लगवायें। यदि पागल कुत्ते ने काटा है तो काटने के स्थान पर घाव में ही एंटी ग्लोबुलिन इंजेक्शन अवश्य लगवायें। यदि किसी पशु को पागल कुत्ते ने काटा है तो पशु को 0, 3, 7, 14, 28, 90 दिनों पर टीका एंटी रेबीज लगवायें।
इन्क्यूबेशन पीरियड-1 दिन से 16 वर्ष तक हो सकता है।
बचाव / कंट्रोल-कुत्ते को सोते समय, खाना खाते समय या पीछे से कभी भी न छुयें, अन्यथा कुत्ता काट सकता है।
विश्व रेबीज दिवस पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का संदेश-सुल्तानपुर,विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी सुल्तानपुर *डॉ. सुनील कुमार* ने आंकड़ों पर चिंता जताते हुए बताया कि रेबीज आज भी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में रेबीज से हर साल लगभग
59,000 मौतें होती हैं। इनमें से
95%
मौतें एशिया और अफ्रीका महाद्वीपों में होती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि
इन कुल मौतों में से *35% मौतें अकेले भारत में होती हैं।
डॉ. कुमार ने आम जनमानस से अपील करते हुए कहा कि-
"मेरी यही कामना है कि समस्त देशवासी रेबीज बीमारी से बचें, स्वस्थ रहें।"उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी,घाव की तुरंत धुलाई और समय पर टीकाकरण से इस जानलेवा बीमारी से 100 प्रतिशत बचा जा सकता है।
Oct 01 2026, 18:48
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