यूएन में भारत ने उड़ाई पाकिस्‍तान के दावों की धज्जियां, ओसामा बिन लादेन का नाम लेकर घेरा

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है। भारत की फर्स्‍ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और दोहरे रवैये का आरोप लगाया 'फॉर्म 47 सरकार' और लादेन का जिक्र कर पाकिस्तान को उसी की भाषा में करारा जवाब दिया।

ओसामा बिन लादेन का नम लेकर घेरा

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली ने आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि की कुछ अजीब बातें सुनीं। यह घटना न्यूयॉर्क शहर और दुनिया के भयानक 9/11 आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाने के ठीक दो हफ्ते बाद हुई है। इस संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है क्योंकि इसका मास्टरमाइंड, ओसामा बिन लादेन, पाकिस्तानी सेना की प्रमुख एकेडमी के ठीक पास रह रहा था। यही वह संस्था थी जिसके सामने आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने इतना गहरा सम्मान दिखाया। हालांकि, पाकिस्तान के लोग जिसे खुद 'फॉर्म 47 सरकार' कहते हैं, उससे ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है।

भारत ने पाकिस्तान की बखिया उधेड़ी

संयुक्त राष्ट्र में बारतीय प्रतिनिधि पेटल ने आगे कहा, हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानव मूल्यों पर ऐसे उपदेश सुने जो उस सरकार की तरफ से आए हैं, जिसकी राजधानी इस समय अपने ही लोगों से बचाने के लिए सुरक्षा घेरे में है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि यह ‘सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए चलने वाली सरकार’ है। सरकार में चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन असली फैसले कौन लेता है, इसमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान की हकीकत उसके 27वें संविधान संशोधन और उसके असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से भी सामने आती है।

‘दिन में सुरक्षा और रात में आतंकवाद’

यूएनजीए में पेटल गहलोत ने पाकिस्तानी पीएम को सुनाते हुए कहा कि हमने जो बातें सुनीं, वे ऐसे लोगों की तरफ से आईं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रहा है। वे दिन में सुरक्षा की बात करते हैं, लेकिन असल में रात में आतंकवाद फैलाते हैं। इस सभा में धार्मिक असहिष्णुता के बारे में ऐसी सरकार ने टिप्पणी की, जो खुद ईशनिंदा कानूनों पर टिकी है।

‘खोखली बातें दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं’

भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने आगे कहा दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है। कोई भी खोखली और दिखावटी बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती। इस पूरे मुद्दे की जड़ में पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की नीति है। हमने पिछले साल दिखा दिया था कि आतंकवादियों के लिए न कोई सुरक्षित जगह होगी और न ही छिपने की जगह। आतंकवाद से अपनी रक्षा करना हमारा अधिकार है और हम इसका इस्तेमाल करेंगे। अगर पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद जारी रहा, तो इसके नतीजे होंगे। इससे उन रिश्तों पर भी असर पड़ेगा, जो अब तक दोस्ती और सद्भावना के आधार पर बनाए गए थे। हमें भरोसा है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि जैसा पाकिस्तान का प्रतिनिधि उन्हें दिखाने की कोशिश करता है।

देवघर: पेयजल सचिव अबु इमरान ने की संताल परगना के 6 जिलों की समीक्षा, लापरवाह संवेदकों पर कार्रवाई के निर्देश

देवघर/रांची:- पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अबु इमरान ने देवघर समाहरणालय में संताल परगना प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सभी छह जिलों—देवघर, दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, जामताड़ा और पाकुड़ में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत क्रियान्वित की जा रही पेयजल योजनाओं तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की प्रगति की जिलावार विस्तृत समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर आ रही समस्याओं का त्वरित निराकरण करें और शेष बचे कार्यों को हर हाल में तय समय सीमा के भीतर पूरा करना सुनिश्चित करें।

सचिव श्री अबू इमरान ने जल जीवन मिशन (JJM) के तहत निर्देश दिया कि आगामी 02 अक्टूबर को 'जल अर्पण दिवस' के रूप में मनाने और सभी पूर्ण हो चुकी योजनाओं के लिए 'हर घर जल' सर्टिफिकेशन (प्रमाणन) के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। इसके साथ ही उन्होंने सभी पेयजल योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने तथा जलापूर्ति के दौरान जल की गुणवत्ता की जांच पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कार्य में शिथिलता या लापरवाही बरतने वाले एजेंसी व संवेदकों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जल स्रोतों की सुरक्षा के मद्देनजर उन्होंने इंटेकवेल के आसपास किसी भी प्रकार के खनन और बालू उठाव पर पूर्ण रूप से रोक लगाने का कड़ा आदेश जारी किया। इसके अलावा, विभिन्न विभागों में लंबित एनओसी (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज करने, SNS SPARSH Onboarding, Sujal ID Creation और लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने की बात कही गई। योजनाओं के सुचारू संचालन व बेहतर रखरखाव के लिए जल शुल्क के संग्रह को बढ़ाने पर जोर दिया गया, साथ ही निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए Consumer ID सृजन एवं बिजली विभाग के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित करने की हिदायत दी गई।

समीक्षा बैठक के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत भी कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए 5-Star ODF Plus गांवों की संख्या बढ़ाने हेतु विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। इसके अंतर्गत PM-JANMAN, सांसद आदर्श ग्राम योजना और आकांक्षी क्षेत्रों के गांवों को प्राथमिकता के आधार पर 5-Star ODF Plus घोषित करने का निर्देश दिया गया है। सचिव ने शौचालय निर्माण एवं उनकी स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा पूर्व में ODF Plus घोषित हो चुके गांवों के भौतिक सत्यापन कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा। गांवों को पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और एकल-उपयोग प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए सभी ग्रामसभाओं में अनिवार्य रूप से प्रस्ताव पारित कराए जाएंगे।

इस समीक्षा बैठक में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री सौरभ कुमार भुवानिया ,उप विकास आयुक्त देवघर, दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, जामताड़ा के साथ पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के वरीय पदाधिकारी, सभी अधीक्षण अभियंता, सभी संबंधित जिलों के कार्यपालक अभियंता, एवं अन्य विभागीय अधिकारी, संबंधित एजेंसी के अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।

गोलमुरी केनरा बैंक में दिनदहाड़े 42 लाख की डकैती

एंकर : जमशेदपुर के गोलमुरी थाना क्षेत्र से सामने आ रही है, जहां केनरा बैंक में दिनदहाड़े भीषण डकैती की वारदात से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हथियारबंद बदमाशों ने बैंक में घुसकर कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड को बंधक बनाया और बैंक के चेस्ट में रखी करीब 42 लाख रुपये की नकदी लेकर फरार हो गए।

बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह करीब 9 बजकर 10 मिनट पर बैंक का प्यून बैंक खोलने पहुंचा था। इसी दौरान करीब पांच से सात हथियारबंद बदमाश बैंक के अंदर दाखिल हुए और प्यून को अपने कब्जे में ले लिया।

इसके बाद जैसे-जैसे बैंक के कर्मचारी पहुंचते गए, बदमाश उन्हें भी बंधक बनाते गए। करीब 10 बजे बैंक मैनेजर के पहुंचने के बाद बदमाशों ने उन्हें भी अपने कब्जे में ले लिया। आरोप है कि बदमाशों ने दबाव बनाकर बैंक का चेस्ट खुलवाया और उसमें रखी नकदी लेकर मौके से फरार हो गए।

डकैती के दौरान बैंक के सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट किए जाने की भी सूचना है। वारदात के बाद बैंक के फर्श पर खून के धब्बे भी दिखाई दिए हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि विरोध करने पर गार्ड के साथ मारपीट की गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और पूरे बैंक परिसर को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि बदमाशों की पहचान की जा सके। साथ ही पुलिस बदमाशों के भागने के रास्ते और संभावित ठिकानों की भी जांच कर रही है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। लूटी गई रकम, बदमाशों की सही संख्या और घटना में इस्तेमाल किए गए हथियारों को लेकर आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

गोलमुरी में बैंक के अंदर हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और डकैतों की तलाश में पुलिस की छापामारी भी जारी है।

एशियन गेम्स में भारत ने जीता पहला गोल्ड, महिला क्रिकेट में लगातार दूसरा गोल्ड

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एशियन गेम्स में भारत का स्वर्ण पदक का खाता खुल गया है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया है। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरा गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है।

श्रीलंका को हराकर गोल्ड का कब्जा

श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में टीम इंडिया ने 147 रन से विशाल जीत दर्ज की। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में तीन विकेट पर 216 रन बनाए। 217 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। पूरी टीम 15.4 ओवर में 69 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत ने मुकाबला 147 रन से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को संभलने का मौका नहीं दिया।

एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार स्वर्ण

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीता है। भारत ने इससे पहले 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में भी महिला क्रिकेट का स्वर्ण पदक जीता था। इस बार भी टीम ने अपने स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव किया।

2024 एशिया कप के बाद श्रीलंका के खिलाफ लगातार आठ जीत

2024 एशिया कप फाइनल में मिली हार के बाद भारत ने श्रीलंका को लगातार आठ मैचों में शिकस्त दी है। 2026 एशिया कप फाइनल में भी भारत ने श्रीलंका को 72 रन से हराया था। एशियन गेम्स के फाइनल में यह दबदबा और मजबूत हुआ। भारत के एशियन गेम्स 2026 में कुल पदकों की संख्या सात हो गई है और टीम पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गई है।

गुजरात के सोमनाथ मंदिर और अहमदाबाद बीजेपी कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली

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गुजरात में अहम जगहों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। ईमेल के जरिए दी गई इस धमकी में सोमनाथ मंदिर, बीजेपी के कार्यालयों समेत कई अहम लोगों और संस्थानों को निशाना बनाने की बात कही गई है। धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग और बम निरोधक दस्ते की टीम मौके पर पहुंची और परिसर की जांच शुरू कर दी।

अज्ञात ईमेल के जरिए ये धमकी

एक अज्ञात ईमेल के जरिए ये धमकी दी गई है। एक अनजान व्यक्ति ने ईमेल भेजकर दावा किया कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर और कई अन्य जगहों पर बम रखे गए हैं। ईमेल में देश-विरोधी और विवादित बातें थीं और आरोपी ने पाकिस्तान के समर्थन में नारे लिखकर डर फैलाने की कोशिश की।

अहमदाबाद नगर पुलिस को मिला ईमेल

धमकी भरा ईमेल अहमदाबाद नगर पुलिस को मिला। इसमें खानपुर स्थित भाजपा कार्यालय के अलावा सोमनाथ मंदिर और कोबा स्थित भाजपा कार्यालय समेत कई अन्य स्थानों को निशाना बनाने की बात कही गई है।

संबंधित स्थानों पर जांच शुरू

बम की धमकी वाला ईमेल मिलने के बाद अहमदाबाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट हो गईं। पुलिसकर्मी, फायर ब्रिगेड और डॉग स्क्वॉड की एक टीम शहर के खानपुर इलाके में स्थित बीजेपी ऑफिस पहुंची। परिसर की अच्छी तरह से तलाशी ली गई और डॉग स्क्वॉड की मदद से हर कोने की जांच की गई।

जांच में नहीं मिली कोई संदिग्ध चीज

अहमदाबाद पुलिस ने परिसर की सघन तलाशी ली। ऑपरेशन के दौरान कोई संदिग्ध चीज न मिलने पर लोगों ने राहत की सांस ली। फिलहाल राज्य की सभी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और साइबर क्राइम ब्रांच ने ईमेल भेजने वाले अनजान व्यक्ति का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है।

लोजपा महिला प्रकोष्ठ की समीक्षा बैठक में बीनू राय व राखी देवी को मिली नई जिम्मेदारी


रामगढ़। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) महिला प्रकोष्ठ की समीक्षा बैठक सह स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। बैठक में संगठन की मजबूती, महिला कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी एवं आगामी सांगठनिक गतिविधियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री चंद्रप्रभा भाटिया एवं झारखंड प्रभारी सुश्री इंदु कश्यप सहित पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बैठक के दौरान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) महिला प्रकोष्ठ की रामगढ़ जिला अध्यक्ष शिवानी सिन्हा ने संगठन का विस्तार करते हुए परसोतीया, वार्ड नंबर-4 निवासी बीनू राय को रामगढ़ महिला प्रकोष्ठ का जिला प्रधान महासचिव तथा राखी देवी को जिला उपाध्यक्ष मनोनीत किया।

नवमनोनित जिला उपाध्यक्ष राखी देवी को महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री चंद्रप्रभा भाटिया ने नियुक्ति पत्र प्रदान करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। वहीं, झारखंड प्रभारी सुश्री इंदु कश्यप ने जिला प्रधान महासचिव बीनू राय को नियुक्ति पत्र सौंपकर उनके उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

नवमनोनित जिला प्रधान महासचिव बीनू राय एवं जिला उपाध्यक्ष राखी देवी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रप्रभा भाटिया, झारखंड प्रभारी इंदु कश्यप, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आशा राय एवं रामगढ़ जिला अध्यक्ष शिवानी सिन्हा के प्रति आभार व्यक्त किया। दोनों ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जिस विश्वास और जिम्मेदारी के साथ उन्हें दायित्व सौंपा है, उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगी। साथ ही रामगढ़ जिले में अधिक से अधिक महिलाओं को संगठन से जोड़कर महिला प्रकोष्ठ को मजबूत एवं सशक्त बनाने की दिशा में कार्य करेंगी।

इस अवसर पर लोजपा (रामविलास) के झारखंड प्रदेश सचिव केवल पासवान, रामगढ़ जिला अध्यक्ष आशीष गुप्ता, महिला प्रकोष्ठ झारखंड प्रदेश उपाध्यक्ष मीता देवी, लेबर सेल रामगढ़ जिला अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, जिला महासचिव श्याम चंद्रवंशी, रामदास पासवान, रितेश गुप्ता, अजीत प्रसाद, निर्मल महतो, पप्पू साव, कृष्ण महतो, लाला करमाली, राजकिशोर पासवान, पप्पू राम, रणजीत मिश्रा, ऋषिकेश पांडा, राजेंद्र नायक, अमर राम, कर्णवीर सिंह, मिथलेश रजक, बिट्टू सोनी, मनोज पासवान, शिवकुमार सोनी, अंकित कुमार, सौरभ सोनकर, रिशु कुमार, बंटी कुमार, पवन सिंह, सूरज सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने नवमनोनित पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

राहुल गांधी ने लगाया विपक्षी दलों को खत्म करने का आरोप, बीजेपी ने किया पलटवार

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चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का सिंबल फ्रीज कर दिया है। जिसपर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ-साथ चुनाव आयोग पर निशाना साधा। अब केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने कांग्रेस नेता पर पलटवार किया है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को भस्मासुर कहा

सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने आज एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा- पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। बीजेपी नेता ने कहा कि इन तीन दलों का नाम लेकर राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाने का प्रयास किया। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी पढ़ाई-लिखाई नहीं करते हैं, उन्हें इतिहास पता करना चाहिए।

राहुल गांधी को अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता- सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'भारत की राजनीति के सदा सर्वदा व्याकुल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जिनको देश और यहां की संस्कृति और धर्म के बारे में कुछ पता है। लेकिन आज ये पता लगा उनको अपनी पार्टी के बारे में भी नहीं पता है। आज उन्होंने टीएमसी, एनसीपी का नाम लिया और कहा बीजेपी इनको खत्म कर रही है। मैं उनको बताना चाहता हूं कि ये पार्टियां स्वयं कांग्रेस से टूटकर बनी थीं। कांग्रेस ने न जाने की कितनी पार्टियों को तोड़ा।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर अलग पार्टी बनाई- सुधांशु त्रिवेदी

बीजेपी नेता ने कहा, 'ममता बनर्जी ने कांग्रेस से परेशान होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। राहुल गांधी परिवार का ही इतिहास पता कर लीजिए। इंदिरा गांधी ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ वोट करवा दिया था। अभी अशोक गहलोत कुछ समय पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे थे उन्होंने ही कहा है उनको निपटा दिया गया।'

पूर्व पीएम चंद्रशेखर और चरण सिंह का लिया नाम

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, 'जनता पार्टी की सरकार ने चौधरी चरण सिंह जी के साथ धोखा किसने दिया। अभी राजस्थान में आधा दर्जन हाथी निगल गए थे। बसपा ने समर्थन दिया फिर भी उनके विधायकों को अपने में शामिल कर लिया। एनटी रामाराव की पार्टी के साथ भी यही किया। चंद्रशेखर जी के साथ भी यही किया। तीन महीने में ही उनकी सरकार को गिरा दिया था। देवगौड़ा और गुजराल जी की सरकार भी कांग्रेस ने गिराई। 1980 में जब सत्ता में आए तो 9 राज्यों की सरकारों को इसलिए डिसमिस कर दिया कि उनकी केंद्र से सरकार चली गई थी। अपने दौर का ही देख लो कितने मुख्यमंत्रियों को खा गए। गुलाम नबी आजाद, अमरिंदर सिंह, विजय बहुगुणा इनको खा गए।'

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

दरअसल टीएमसी के नाम और निशान छिन लिए जाने के बाद कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न - भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। उन्होंने कहा, वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। राहुल गांधी ने कहा, यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।

झारखंड और ओडिशा के 7 ठिकानों पर ईडी का छापा, कोऑपरेटिव बैंक घोटाले मामले में कार्रवाई

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झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में कथित घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंच गई है। ईडी ने शुक्रवार को झारखंड और ओडिशा में एक साथ 7 ठिकानों पर छापेमारी की है। रांची की ईडी टीम ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई शुरू की है।

4.14 करोड़ के फर्जीवाड़े से जुड़ा मामला

ये कार्रवाई झारखंड स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (जेएससीबी) की सरायकेला शाखा के साथ बड़े पैमाने पर हुई धोखाधड़ी की चल रही जांच से जुड़ी है। मामले में कारोबारी संजय कुमार डालमिया का नाम सामने आया है। यह धोखाधड़ी व्यवसायी संजय कुमार डालमिया ने जेएससीबी के तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से की थी। मामला कथित 4.14 करोड़ के फर्जीवाड़े से जुड़ा हैं।

दस्तावेजों और संपत्तियों की पड़ताल

आरोप है कि बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। अब ईडी इस पूरे मामले में पैसों के लेन-देन और कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेजों और संपत्तियों की पड़ताल कर रही है। ईडी ने पैसों के लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज और संपत्तियां को खंगालना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी की रडार पर तत्कालीन बैंक अधिकारियों की भूमिका है।

वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’, टीएमसी विवाद पर राहुल गांधी का केन्द्र और चुनाव आयोग पर हमला

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ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को बारतीय निर्वाचन आयोग ने फ्रीज कर दिया है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ ही चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।

टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जोड़ा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी विवाद को शिवसेना और एनसीपी से जुड़े मामलों से जोड़ते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, ‘पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न।’ राहुल गांधी ने दावा किया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ रहे हैं और उनके चुनाव चिन्ह छीने जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताते हुए कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है।

‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’

राहुल गांधी ने कहा कि अगर पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने अपने बयान में ‘वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी’ को लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि आयोग का काम जनता के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक आयोग ऐसी ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलट देती हैं।

राहुल बोले- यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर मतदाता की है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उनका यह बयान चुनाव आयोग की ओर से टीएमसी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद आया है।

टीएमसी का नाम और निशान छिना

बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीएमसी के विधायकों में टूट हो गई। अधिकतर विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया। बागी गुट की अगुवाई अरूप रॉय कर रहे हैं। इसके बाद टीएमसी के नाम और पार्टी सिंबल को लेकर जंग शुरू हो गई। दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने पहुंचा। चुनाव आयोग ने उपचुनाव से पहले अंतरिम व्यवस्था लागू कर दी है। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फूल और घास के आरक्षित चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया है।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, टीएमसी का सिंबल और नाम दोनों चुनाव आयोग ने किए फ्रीज

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इस साल बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। पहले सत्ता हाथ से निकली, उसके बाद पार्टी में टूट और विधायक-सांसदों के बंटवारे के बाद अब ‘नाम और निशान’ भी फिलहाल छिन गई है। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीएमसी) पर दावे को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला सुनाते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह दोनों को फ्रीज कर दिया है।

पार्टी के नाम और निशान का छिन गया

भारत निर्वाचन आयोग एआईटीएमसी के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी। आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में साफ किया कि ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों ही गुट आगामी उपचुनावों में मूल पार्टी के नाम और निशान का उपयोग नहीं कर सकेंगे। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को 18 सितंबर 2026 की सुबह 11 बजे तक अपनी प्राथमिकता के आधार पर तीन नए नामों और तीन फ्री सिंबल्स के विकल्प पेश करने का निर्देश जारी किया है।

अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे

बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुट आमने-सामने हैं। इसमें एक गुट की कमान पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ में है। वहीं दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों ही खेमे खुद को असली और वैध तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं। अब चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि दोनों गुट अपने-अपने लिए अलग नाम चुन सकते हैं। यदि वे चाहें तो अपने नाम के साथ मूल पार्टी 'एआईटीएमसी' से संबंध का जिक्र भी कर सकते हैं। साथ ही दोनों गुटों को चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित मुक्त चुनाव चिन्हों (फ्री सिंबल्स) की सूची में से अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।

आगामी उपचुनावों में दोनों गुट दिखेंगे दो नए नाम और निशान

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर दोनों गुटों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। दोनों पक्ष खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे हैं और पार्टी के संगठन तथा चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद अब आगामी उपचुनावों में दोनों गुट अलग-अलग नाम और अलग-अलग चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे। फिलहाल आयोग के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों गुट नए नाम और चुनाव चिन्ह के रूप में क्या विकल्प चुनते हैं?

1998 से शुरू हुआ तृणमूल कांग्रेस का सफर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का सफर 1998 से शुरू हुआ था। कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाई। पार्टी को उसका नाम और चुनाव चिन्ह मिला और उसी साल लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस पहली बार मैदान में उतरी। करीब तीन दशक तक बंगाल के मतदाताओं ने तृणमूल को इसी नाम और इसी निशान के साथ देखा। चुनावी पोस्टर से लेकर ईवीएम तक यही पहचान पार्टी और उसके उम्मीदवारों को बाकी दलों से अलग करती रही। लेकिन आज 2026 में उसी मूल नाम और निशान के साथ चुनाव लड़ने की स्थिति फिलहाल नहीं है।