नागरी प्रचारिणी सभा करेगी डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का सम्मान तुलसी जयन्ती समारोह में मुख्य वक्ता होंगे बलिया के साहित्यकार डॉ. विद्यासागर
संजीव सिंहबलिया। देवरिया की शताब्दी से अधिक पुरानी प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था नागरी प्रचारिणी सभा इस वर्ष अपने प्रमुख वार्षिक आयोजन ‘तुलसी जयन्ती समारोह-2026’ में बलिया के साहित्यकार, दार्शनिक एवं वेदांत-विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित करेगी। समारोह में डॉ. उपाध्याय मुख्य वक्ता के रूप में तुलसी-साहित्य पर अपना व्याख्यान भी देंगे। 19 अगस्त 2026 को देवरिया स्थित नागरी प्रचारिणी सभा के ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ में आयोजित होने वाले समारोह में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। हिंदी साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा के क्षेत्र में डॉ. उपाध्याय की सक्रियता को देखते हुए सभा द्वारा उनका चयन किया गया है। पराधीन भारत में वर्ष 1915 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया हिंदी भाषा, साहित्य और नागरी-प्रचार की दीर्घ परंपरा से जुड़ी संस्था है। काशी की नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा वर्ष 1893 से प्रारंभ हिंदी-नागरी जागरण की राष्ट्रीय धारा ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी और देवनागरी के प्रति चेतना को व्यापक आधार प्रदान किया। इसी व्यापक हिंदी-जागरण की पृष्ठभूमि में देवरिया की नागरी प्रचारिणी सभा ने पूर्वांचल में अपनी विशिष्ट साहित्यिक पहचान बनाई। एक शताब्दी से अधिक की यात्रा में संस्था ने साहित्यिक गोष्ठियों, वाचन-संस्कृति, तुलसी जयन्ती, हिंदी दिवस, पुस्तक-विमोचन, साहित्यिक संवाद और साहित्यकार-सम्मान की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है। देवरिया शहर के मध्य स्थित नागरी प्रचारिणी सभा का भवन संस्था की गौरवशाली साहित्यिक यात्रा का प्रतीक है। सभा के आर्यभाषा पुस्तकालय एवं वाचनालय में लगभग 30 हजार पुस्तकों का संग्रह है। प्रत्येक रविवार होने वाली साहित्यिक गोष्ठियों के साथ ही वर्षभर विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सभा के नवीन मुख्य भवन का उद्घाटन 13 जून 1965 को तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री मोरारजी देसाई द्वारा किया गया था। संस्था का ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ लंबे समय से तुलसी जयन्ती सहित अनेक महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजनों का केंद्र रहा है। नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया की साहित्यिक परंपरा से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, महादेवी वर्मा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. रामकुमार वर्मा, डॉ. रामदरश मिश्र, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, सेठ गोविंद दास और पं. कमलापति त्रिपाठी जैसे मूर्धन्य साहित्यकारों एवं सार्वजनिक जीवन की विभूतियों का संबंध रहा है। इसके अतिरिक्त डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रो. राजबली पांडेय, चंद्रबली पांडेय, प्रो. गिरीश्वर मिश्र, डॉ. रामदेव धुरंधर, तेजेंद्र शर्मा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी, सरन घई, डॉ. स्वदेश भारती और सत्यदेव त्रिपाठी जैसे राष्ट्रीय, अकादमिक और प्रवासी हिंदी-जगत से जुड़े व्यक्तित्व भी संस्था की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। तुलसी जयन्ती समारोह में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का व्याख्यान तुलसीदास के साहित्य, दर्शन, लोकमंगल-दृष्टि और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विविध आयामों पर केंद्रित रहेगा। मुख्य वक्ता के रूप में उनका चयन और ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित किया जाना समारोह का प्रमुख आकर्षण होगा। बलिया के साहित्यकार को देवरिया की ऐतिहासिक साहित्यिक संस्था द्वारा प्रदान किया जा रहा यह सम्मान पूर्वांचल की साहित्यिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

बलिया। देवरिया की शताब्दी से अधिक पुरानी प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था नागरी प्रचारिणी सभा इस वर्ष अपने प्रमुख वार्षिक आयोजन ‘तुलसी जयन्ती समारोह-2026’ में बलिया के साहित्यकार, दार्शनिक एवं वेदांत-विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित करेगी। समारोह में डॉ. उपाध्याय मुख्य वक्ता के रूप में तुलसी-साहित्य पर अपना व्याख्यान भी देंगे। 19 अगस्त 2026 को देवरिया स्थित नागरी प्रचारिणी सभा के ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ में आयोजित होने वाले समारोह में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। हिंदी साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा के क्षेत्र में डॉ. उपाध्याय की सक्रियता को देखते हुए सभा द्वारा उनका चयन किया गया है। पराधीन भारत में वर्ष 1915 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया हिंदी भाषा, साहित्य और नागरी-प्रचार की दीर्घ परंपरा से जुड़ी संस्था है। काशी की नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा वर्ष 1893 से प्रारंभ हिंदी-नागरी जागरण की राष्ट्रीय धारा ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी और देवनागरी के प्रति चेतना को व्यापक आधार प्रदान किया। इसी व्यापक हिंदी-जागरण की पृष्ठभूमि में देवरिया की नागरी प्रचारिणी सभा ने पूर्वांचल में अपनी विशिष्ट साहित्यिक पहचान बनाई। एक शताब्दी से अधिक की यात्रा में संस्था ने साहित्यिक गोष्ठियों, वाचन-संस्कृति, तुलसी जयन्ती, हिंदी दिवस, पुस्तक-विमोचन, साहित्यिक संवाद और साहित्यकार-सम्मान की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है। देवरिया शहर के मध्य स्थित नागरी प्रचारिणी सभा का भवन संस्था की गौरवशाली साहित्यिक यात्रा का प्रतीक है। सभा के आर्यभाषा पुस्तकालय एवं वाचनालय में लगभग 30 हजार पुस्तकों का संग्रह है। प्रत्येक रविवार होने वाली साहित्यिक गोष्ठियों के साथ ही वर्षभर विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सभा के नवीन मुख्य भवन का उद्घाटन 13 जून 1965 को तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री मोरारजी देसाई द्वारा किया गया था। संस्था का ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ लंबे समय से तुलसी जयन्ती सहित अनेक महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजनों का केंद्र रहा है। नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया की साहित्यिक परंपरा से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, महादेवी वर्मा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. रामकुमार वर्मा, डॉ. रामदरश मिश्र, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, सेठ गोविंद दास और पं. कमलापति त्रिपाठी जैसे मूर्धन्य साहित्यकारों एवं सार्वजनिक जीवन की विभूतियों का संबंध रहा है। इसके अतिरिक्त डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रो. राजबली पांडेय, चंद्रबली पांडेय, प्रो. गिरीश्वर मिश्र, डॉ. रामदेव धुरंधर, तेजेंद्र शर्मा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी, सरन घई, डॉ. स्वदेश भारती और सत्यदेव त्रिपाठी जैसे राष्ट्रीय, अकादमिक और प्रवासी हिंदी-जगत से जुड़े व्यक्तित्व भी संस्था की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। तुलसी जयन्ती समारोह में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का व्याख्यान तुलसीदास के साहित्य, दर्शन, लोकमंगल-दृष्टि और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विविध आयामों पर केंद्रित रहेगा। मुख्य वक्ता के रूप में उनका चयन और ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित किया जाना समारोह का प्रमुख आकर्षण होगा। बलिया के साहित्यकार को देवरिया की ऐतिहासिक साहित्यिक संस्था द्वारा प्रदान किया जा रहा यह सम्मान पूर्वांचल की साहित्यिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

हरिद्वार:साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रेमियों के लिए हरिद्वार में एक विशेष साहित्यिक आयोजन होने जा रहा है। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय द्वारा रचित खण्डकाव्य ‘गाण्डीव के पार’ के लोकार्पण समारोह का आयोजन 29 अगस्त 2026, शनिवार को हरिद्वार में किया जाएगा। दिव्य गंगा सेवा मिशन, हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम अवधूत मंडल आश्रम, बड़ा हनुमान मंदिर, निकट शंकर आश्रम, हरिद्वार में प्रातः 11 बजे से शुरू होगा। पूर्व मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि समारोह में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, माननीय पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड एवं पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार तथा श्री मदन कौशिक, माननीय कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं शिक्षाविदों की भी विशेष उपस्थिति रहेगी। विशिष्ट अतिथियों में प्रो. (डॉ.) श्रीशिर पाण्डेयजी, कुलपति, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट; प्रो. (डॉ.) रमाकांत पाण्डेयजी, कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार; प्रो. (डॉ.) शिव शंकर मिश्राजी, कुलपति, महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय, उज्जैन, मध्य प्रदेश तथा प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार त्रिपाठीजी, कुलपति, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, देहरादून शामिल हैं। ‘गाण्डीव के पार’ को लेकर साहित्य जगत में उत्सुकता डॉ. विद्यासागर उपाध्याय द्वारा लिखित ‘गाण्डीव के पार’ खण्डकाव्य के लोकार्पण को भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक विमर्श की दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। समारोह में काव्य-कृति की साहित्यिक विशेषताओं, भारतीय परंपरा तथा समकालीन संदर्भों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म और भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज से जोड़ना तथा नई पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक विरासत से परिचित कराना है। साहित्य प्रेमियों एवं गणमान्य नागरिकों से समारोह में सहभागिता की अपील की गई है।
संजीव सिंह बलिया!15 अगस्त — भारतीय स्वतंत्रता दिवस के 80वें पर्व पर 111 वर्ष पुरानी साहित्यिक संस्था नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया ने साहित्यिक परंपरा को सम्मान देते हुए डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को 'तुलसी सारस्वत सम्मान' हेतु और तुलसी जयन्ती समारोह 2026 के मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया है। इस आमंत्रण पर डॉ. उपाध्याय ने गहरी कृतज्ञता और भावनात्मक.Accept कर सम्मान को स्वीकार करते हुए संस्था की इतिहासिक उपलब्धियों और तुलसी चेतना की महत्ता पर प्रकाश डाला। मुख्य विवरण: नगरी प्रचारिणी सभा, देवरिया की स्थापना 1915 में हुई और यह संस्था काशी की नागरी प्रचारिणी परंपरा की शाखा के रूप में राष्ट्रीय साहित्यिक-जागरण का अभिन्न अंग रही है। स्वतंत्रता-पूर्व काल में यह संस्था साहित्यिक कार्यक्रमों के माध्यम से देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के लिए क्रांतिकारियों के विचारों को पनाह देती रही। स्वतंत्रता के बाद से इसका स्वरूप अधिकाधिक साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हुआ। सभा का आर्यभाषा पुस्तकालय वाचनालय 50 एयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है और उसमें लगभग 30 हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं, जो इस संस्था की साहित्यिक गहराई और बल को दर्शाती हैं। तुलसी सभागार में प्रतिवर्ष आयोजित तुलसी जयंती समारोह संस्था की प्रमुख पारंपरिक रचना है; 1965 में सभा के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री मोरारजी देसाई द्वारा किया गया था, जो इसकी प्रतिष्ठा को दर्शाता है। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के शब्द (उद्धरण): "नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया की उस दीर्घजाती परंपरा से जुड़कर मुझे अत्यंत आह्लाद हुआ। तुलसी-चेतना और देवनागरी के लिए यह मंच पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है।" — डॉ. विद्यासागर उपाध्याय इतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व: काशी की नागरी प्रचारिणी सभा 1893 से हिंदी और देवनागरी के राष्ट्रीय आंदोलन की अग्रणी संस्था रही है, और देवरिया शाखा ने भी साहित्यिक गोष्ठियों, तुलसी जयंती, हिंदी दिवस तथा लेख-सम्मान की निरंतर परंपरा निभाई है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, महादेवी वर्मा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. रामकुमार वर्मा जैसे साहित्यिक पुरोधाओं का इस मंच से लंबा नाता रहा है, जो इसकी साहित्यिक स्तरीयता को प्रमाणित करता है। तुलसी जयन्ती समारोह 2026 में साहित्यिक गोष्ठियां, व्याख्यान और सम्मान-समारोह आयोजित होंगे; डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के मुख्य भाषण में तुलसीदास की रचनाओं के समकालीन संदर्भ तथा भाषा-संस्कृति की स्वतंत्र चेतना पर प्रकाश डाला जाएगा। सभा के पदाधिकारीगण ने आमजन एवं साहित्यिक वर्ग से आयोजन में भाग लेकर परंपरा को सजीव बनाए रखने का आह्वान किया है। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अपने पत्र में गोस्वामी तुलसीदास के श्लोक "पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं" का उल्लेख करते हुए भारत की राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ भाषा, संस्कृति और आत्मगौरव की स्वतंत्र चेतना को अक्षुण्ण रखने का संदेश दिया
संजीव सिंह बलिया! शिक्षा क्षेत्र रसड़ा के कोप ग्राम के उच्च प्राथमिक विद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर इको क्लब के बलिया प्रभारी पर पर्यावरणविद शैलेन्द्र प्रताप यादव द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम ने आज विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह व संवेदनशीलता की लहर दौड़ा दी। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त दर्शनशास्त्री डॉ. विद्यासागर उपाध्याय और समाज-चिंतक प्राथमिक शिक्षक संघ नगरा के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप यादव ने विभाजन के दुखद पहलुओं तथा उस दौर की जटिल सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को गहराई से समझाया, जिससे श्रोताओं में इतिहास के प्रति गंभीरता और सहानुभूति बनी। बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि शिक्षा में पर्यावरण संरक्षण, खेल और संस्कार का समन्वय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है। खंड शिक्षा अधिकारी पवन कुमार सिंह ने विद्यालय को केवल ज्ञान का केंद्र न मानते हुए बताया कि यह समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने और संस्कार देने का माध्यम भी है। उन्होंने यह भी कहा कि हराभरा, स्वच्छ और सौंदर्यपूर्ण विद्यालय निरीक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं और वहां का वातावरण उत्साहवर्धक होता है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रत्येक भाग लेने वाले विद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेना और लगभग प्रत्येक स्कूल में 21-21 पौधे रोपना रहा। आयोजक शिक्षक शैलेन्द्र प्रताप ने बताया कि उनके विद्यालय के साथ-साथ आसपास के कई ग्रामों के विद्यालयों ने भी इस पहल को अपनाया है और इसे पूरे महीने निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया है। कार्यक्रम की सफलता में स्कूल परिवार, शिक्षकों और अनेक स्थानीय गणमान्यों ने सक्रिय योगदान दिया। प्रमुख सहयोगियों में बलवंत सिंह, उदय नारायण, गणेश यादव, उमेश कुमार, संतोष कुमार गोयल, संजय कुमार चौहान, बृजेश यादव, सियातुल्लाह अंसारी, अनुरानी, लक्ष्मी यादव, रोशन, अजय सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सुजीत सिंह, संतोष वर्मा, राजेश यादव और शैलेंद्र सिंह जैसे लोगों का नाम उल्लेखनीय रहा। आयोजक ने सभी अतिथियों, सहयोगियों, शिक्षक साथियों, बच्चों और ग्रामीण नागरिकों का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त किया और कहा कि यह आयोजन इतिहास की समझ, संस्कार, खेल तथा पर्यावरण चेतना को जोड़ने की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल न केवल इस विद्यालय तक सीमित रहेगी बल्कि पूरे प्रदेश के विद्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। आखिर में आयोजक ने कहा—“हमारा संकल्प है कि विद्यालय ज्ञान का केंद्र बने, संस्कार का केंद्र बने और प्रकृति संरक्षण का भी केंद्र बने।” विभाजन की स्मृतियों से मिली सीख ने आज एकता व हरित भविष्य के प्रति दृढ़ संकल्प को और मजबूत किया।
संजीव सिंह रसड़ा, बलिया! 15 अगस्त 2026 — शनिवार की स्वर्णिम सुबह सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, रसड़ा के प्रांगण में 80वें स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व बड़े उत्साह, राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, अभिभावक और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्ण भागीदारी दिखाई और देशभक्ति के गीतों तथा नारों से वातावरण गुंजायमान रहा। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज के सम्मानजनक ध्वजारोहण के साथ हुई, जिसे विद्यालय के प्रधानाचार्य संजीव सिंह चौहान तथा विशिष्ट अतिथियों के साथ मिलकर किया गया। तत्पश्चात् विद्यालय के वरिष्ठ विद्यार्थियों ने अनुशासनवद्ध और प्रभावशाली मार्च-पास्ट प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित जनमानस का मन मोह लिया। उत्कृष्ट अतिथि-सूची में लखनऊ विश्वविद्यालय के विशिष्ट अतिथि सुधीर मिश्रा तथा सरबजीत सिंह के साथ-साथ विद्यालय निदेशक अखिलेश सिंह और इंदिरा सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई। अतिथियों ने विद्यार्थियों और अध्यापकगण की समिति का अभिवादन किया और स्वतंत्रता दिवस के महत्त्व पर प्रकाश डाला। विद्यालय के प्रधानाचार्य संजीव सिंह चौहान ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आज का विद्यार्थी केवल किताबी सफलता तक सीमित न रहे, बल्कि अनुशासन, सत्यनिष्ठा, करुणा और समाज के प्रति दायित्व-बोध जैसे गुण अपनाकर एक आदर्श नागरिक बने। उन्होंने जोडकर कहा कि "नवभारत के निर्माण में विद्यार्थियों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है" और उन्होंने राष्ट्रहित के कामों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। कार्यक्रम के सांस्कृतिक हिस्से में छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीतों, नृत्य तथा नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों ने उपस्थित विशिष्ट अतिथियों और अभिभावकों से व्यापक प्रशंसा प्राप्त की और समारोह को भावनात्मक रूप से समृद्ध किया। समापन समारोह में विद्यालय द्वारा उपस्थित सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों में मिष्ठान और जलपान वितरण कर धन्यवाद ज्ञापित किया गया। देशभक्ति के जोश और सकारात्मक ऊर्जा के बीच यह भव्य आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। जय हिंद!
संजीव सिंह बलिया — 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर 15 अगस्त को शिक्षा क्षेत्र नगरा के रघुनाथपुर प्राथमिक विद्यालय में भव्य ध्वजारोहण और देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक ब्रजेश कुमार सिंह तेगा, ग्राम प्रधान शिल्पी सिंह और विशिष्टअतिथि व रघुनाथपुर प्रधान पद के प्रत्याशी मनीष कुमार 'सोनू' यादव ने संयुक्त रूप से तिरंगा फहराकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं स्थानीय ग्रामीणों ने खड़े होकर तिरंगे को सलामी दी और राष्ट्रगीत गाया, जिससे परिसर में अनुशासन और एकता की भावना स्पष्ट दिखी। कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात फेरि से हुई, उसके बाद सभी ने एक स्वर में राष्ट्रगान गाया। बच्चों ने देशभक्ति पर आधारित गीत, संक्षिप्त भाषण व नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोहा। प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों की निष्ठा और उत्साह साफ झलक रहा था, जिससे कार्यक्रम और भी प्रभावशाली बना। मुख्य अतिथि शिल्पी सिंह और विशिष्ट अतिथि मनीष 'सोनू' यादव ने अपने संबोधनों में स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद कराते हुए बच्चों से देश के प्रति निष्ठा और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखने का आह्वान किया। अतिथियों ने स्नेहपूर्वक सभी विद्यार्थियों में कॉपी, पेन, पेंसिल, इरेज़र तथा चॉकलेट व कुरकुरे जैसी शैक्षिक व नाश्ते की सामग्री वितरित की, जिससे बच्चों में खुशी और पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहन बढ़ा। कार्यक्रम संयोजक शिक्षक संजीव कुमार सिंह के नेतृत्व में सहायक अध्यापिका किरन यादव, रेनु यादव, सुनीता सिंह, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता किरन सिंह, रसोइया मालती, रेखा, मीरा, सफाईकर्मी लल्लन राम तथा गांव के सम्मानित ग्रामीणों सहित विद्यालय के समस्त स्टाफ ने आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई। समारोह के अंत में बच्चों में मिठाइयां बांटी गईं और कार्यक्रम उल्लासपूर्ण तरीके से समापन हुआ। यह आयोजन न केवल स्वतंत्रता दिवस की गरिमा व भावना को सजीव करता है, बल्कि यह दर्शाता है कि शिक्षा व सामुदायिक सहयोग के माध्यम से ग्रामीण विद्यालयों में भी देशभक्ति, अनुशासन और सामाजिक चेतना का पोषण संभव है। रघुनाथपुर प्राथमिक विद्यालय के इस जागरूकता एवं उत्साह पूर्ण कार्यक्रम ने छोटे विद्यालयों की सामाजिक व शैक्षणिक ऊर्जा को उजागर कर दिया।
(बलिया)। नगर पंचायत के दुर्गा चौक पर शुक्रवार को रसड़ा के पूर्व विधायक स्व. उमाशंकर सिंह की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भाजपा, सपा और अन्य दलों के कई नेताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत नेता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सामाजिक कामों को याद किया। कार्यक्रम की खास बात थी कि राजनीतिक मतभेदों को पीछे रखते हुए विभिन्न विचारधाराओं के नेता एक मंच पर दिखाई दिए। आयोजन में भाजपा से डॉक्टर प्रोफेसर समरजीत सिंह तथा सपा से अखिलेश यादव समेत इरफान अहमद पिंटू यादव, पंकज कुमार, इमरान भाई, कमलेश, मनोज यादव आदि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने स्व. उमाशंकर सिंह के जनसंपर्क और क्षेत्रीय विकास में योगदान को सराहा और कहा कि उनका समाज के प्रति समर्पण लंबे समय तक याद रखा जाएगा। स्थल पर जैसे-जैसे श्रद्धांजलि सभा की जानकारी फैली, वैसे-वैसे समर्थकों और स्थानीय नागरिकों की भीड़ बढ़ती चली गई। लोगों ने पुष्प देकर संवेदना व्यक्त की और एकता का संदेश दिया। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वैच्छिक आयोजन था और इसका उद्देश्य दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करना तथा सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना था। यह श्रद्धांजलि सभा स्थानीय राजनीति में एक सकारात्मक संदेश बनकर उभरी — यह दर्शाती है कि लोकसेवा और सम्मान के मुद्दे राजनीतिक रेखाओं को पार कर समाज को जोड़ सकते हैं।
8 hours ago
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