नागरी प्रचारिणी सभा करेगी डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का सम्मान तुलसी जयन्ती समारोह में मुख्य वक्ता होंगे बलिया के साहित्यकार डॉ. विद्यासागर
संजीव सिंह
बलिया। देवरिया की शताब्दी से अधिक पुरानी प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था नागरी प्रचारिणी सभा इस वर्ष अपने प्रमुख वार्षिक आयोजन ‘तुलसी जयन्ती समारोह-2026’ में बलिया के साहित्यकार, दार्शनिक एवं वेदांत-विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित करेगी। समारोह में डॉ. उपाध्याय मुख्य वक्ता के रूप में तुलसी-साहित्य पर अपना व्याख्यान भी देंगे। 19 अगस्त 2026 को देवरिया स्थित नागरी प्रचारिणी सभा के ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ में आयोजित होने वाले समारोह में यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। हिंदी साहित्य और भारतीय ज्ञान-परंपरा के क्षेत्र में डॉ. उपाध्याय की सक्रियता को देखते हुए सभा द्वारा उनका चयन किया गया है। पराधीन भारत में वर्ष 1915 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया हिंदी भाषा, साहित्य और नागरी-प्रचार की दीर्घ परंपरा से जुड़ी संस्था है। काशी की नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा वर्ष 1893 से प्रारंभ हिंदी-नागरी जागरण की राष्ट्रीय धारा ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी और देवनागरी के प्रति चेतना को व्यापक आधार प्रदान किया। इसी व्यापक हिंदी-जागरण की पृष्ठभूमि में देवरिया की नागरी प्रचारिणी सभा ने पूर्वांचल में अपनी विशिष्ट साहित्यिक पहचान बनाई। एक शताब्दी से अधिक की यात्रा में संस्था ने साहित्यिक गोष्ठियों, वाचन-संस्कृति, तुलसी जयन्ती, हिंदी दिवस, पुस्तक-विमोचन, साहित्यिक संवाद और साहित्यकार-सम्मान की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया है। देवरिया शहर के मध्य स्थित नागरी प्रचारिणी सभा का भवन संस्था की गौरवशाली साहित्यिक यात्रा का प्रतीक है। सभा के आर्यभाषा पुस्तकालय एवं वाचनालय में लगभग 30 हजार पुस्तकों का संग्रह है। प्रत्येक रविवार होने वाली साहित्यिक गोष्ठियों के साथ ही वर्षभर विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सभा के नवीन मुख्य भवन का उद्घाटन 13 जून 1965 को तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री मोरारजी देसाई द्वारा किया गया था। संस्था का ऐतिहासिक ‘तुलसी सभागार’ लंबे समय से तुलसी जयन्ती सहित अनेक महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजनों का केंद्र रहा है। नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया की साहित्यिक परंपरा से आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, अज्ञेय, महादेवी वर्मा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. रामकुमार वर्मा, डॉ. रामदरश मिश्र, डॉ. विद्यानिवास मिश्र, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, सेठ गोविंद दास और पं. कमलापति त्रिपाठी जैसे मूर्धन्य साहित्यकारों एवं सार्वजनिक जीवन की विभूतियों का संबंध रहा है। इसके अतिरिक्त डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रो. राजबली पांडेय, चंद्रबली पांडेय, प्रो. गिरीश्वर मिश्र, डॉ. रामदेव धुरंधर, तेजेंद्र शर्मा, डॉ. पुष्पिता अवस्थी, सरन घई, डॉ. स्वदेश भारती और सत्यदेव त्रिपाठी जैसे राष्ट्रीय, अकादमिक और प्रवासी हिंदी-जगत से जुड़े व्यक्तित्व भी संस्था की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। तुलसी जयन्ती समारोह में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय का व्याख्यान तुलसीदास के साहित्य, दर्शन, लोकमंगल-दृष्टि और भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विविध आयामों पर केंद्रित रहेगा। मुख्य वक्ता के रूप में उनका चयन और ‘नागरी तुलसी सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित किया जाना समारोह का प्रमुख आकर्षण होगा। बलिया के साहित्यकार को देवरिया की ऐतिहासिक साहित्यिक संस्था द्वारा प्रदान किया जा रहा यह सम्मान पूर्वांचल की साहित्यिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
Aug 16 2026, 23:35
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