'मैं IAS अफसर हूं...' कहकर रचाई शादी, फिर 40 लाख की डिमांड : बरेली की 'फर्जी अफसर दुल्हन' गिरफ्तार
-  फेसबुक पर दोस्ती के बाद हुई शादी, पति ने लगाया जेवर हड़पने, ठगी और हत्या के प्रयास का आरोप; पुलिस जांच में जुटी

बरेली/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बरेली से कथित फर्जी पहचान के जरिए शादी और ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक महिला पर खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बताकर युवक से शादी करने, लाखों रुपये के जेवर हड़पने, 40 लाख रुपये की मांग करने और विरोध करने पर पति की हत्या का प्रयास करने का आरोप लगा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है।

-  फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती, शादी तक पहुंचा रिश्ता
फरीदपुर थाना क्षेत्र के पचौमी गांव निवासी अभिषेक के अनुसार उसकी पहचान फेसबुक पर बदायूं जिले के बिल्सी थाना क्षेत्र की रहने वाली साधना से हुई थी। बातचीत के दौरान साधना ने खुद को चयनित IAS अधिकारी बताया और दावा किया कि एक न्यायालयीन मामले के कारण उसकी नियुक्ति रुकी हुई है। अभिषेक का कहना है कि इसी भरोसे पर दोनों ने 7 फरवरी 2025 को विवाह कर लिया।

-  सरकारी नौकरी दिलाने का भी दिया भरोसा
शिकायत में कहा गया है कि साधना के पिता नरेंद्र पाल सिंह, भाई सूर्यप्रताप और रिश्तेदार राजेंद्र सिंह ने भी परिवार को भरोसा दिलाया कि कोर्ट का मामला खत्म होते ही साधना IAS अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाल लेगी। साथ ही यह भी कहा गया कि वह अपने प्रभाव से अभिषेक को सरकारी नौकरी दिला देगी।

-  जेवर हड़पने और 40 लाख रुपये मांगने का आरोप
अभिषेक का आरोप है कि शादी के बाद साधना ने कोर्ट केस और नियुक्ति का हवाला देकर घर के सोने-चांदी के जेवर अपने कब्जे में ले लिए। शिकायत के मुताबिक करीब 15 तोला सोना, डेढ़ किलो चांदी, सोने की चेन, अंगूठी और अन्य कीमती सामान उसने अपने पास रख लिया। इसके बाद परिवार पर 20 बीघा जमीन बेचकर अस्पताल बनवाने और 40 लाख रुपये देने का दबाव बनाया। विरोध करने पर कथित तौर पर पूरे परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई।

-  पति ने लगाया हत्या के प्रयास का आरोप
अभिषेक ने आरोप लगाया कि 12-13 मार्च 2026 की रात साधना ने उसका गला दबाकर हत्या करने की कोशिश की। किसी तरह वह वहां से बच निकला और डायल-112 पर सूचना दी। बाद में गांव में पंचायत भी हुई। शिकायत के अनुसार पंचायत में साधना ने जेवर अपने पास होने की बात स्वीकार की थी।

-  पुलिस ने किया गिरफ्तार, जांच जारी
पीड़ित ने 28 जून को फरीदपुर थाने में साधना, उसके पिता, भाई और रिश्तेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने एफआईआर के आधार पर कार्रवाई करते हुए साधना को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले में पति की शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और सभी आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
सारे नियम कानून सवर्ण के खिलाफ बन रहे हैं संबौधानिक व्यवस्था में सवर्ण को पीछे धकेला जा रहा है : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष
लखनऊ । सारे नियम कानून सवर्ण के खिलाफ बन रहे हैं संवैधानिक व्यवस्था में सवर्ण को पीछे धकेला जा रहा है हम बिखरे हुए हैं वोट बैंक नहीं ,एक होने का समय है यह बाते सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा की बैठक लेते हुए कहा चौबे ने आगे कहा कि एससीएसटी एक्ट व आरक्षण की इतनी प्रताड़ना के बाद भी सवर्ण समाज के बहुत सारे लोग विभिन्न दलों में अपने बच्चों का व सवर्ण समाज का सुनहरा भविष्य तलाश रहे हैं। वे यातो मूरख है या फिर मानसिक रूप से पागल हो गए हैं बंद करो भाजपा सपा बसपा कांग्रेस की चाटुकारिता ताकि इन राजनीतिक दलों की सवर्ण समाज की एकजुटता और राजनीतिक ताग़त का एहसास हो सके भाजपा के जो सवर्ण नेता यूजीसी पर नहीं बोले उनको वोट दे कर क्या समझते हो यह नेता तुम्हारे लिए मुसीबत में खड़े होगे।

कभी नहीं सभी सवर्ण को बताना चाहता हु सवर्ण अभी भी नहीं जागे तो आप के बच्चों का भविष्य खत्म हो जाएगा सवर्ण अभी कहते थे कि विकल्प क्या है राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा सवर्ण का विकल्प ही नहीं सभी समस्या का समाधान है ग्वालियर उच्चन्यालय वार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल कुमार मिश्रा राष्ट्रीय अध्यक्ष है पूर्व न्यायधीश चंद्रभूषण पांडेय राष्ट्रीय संयोजक है उत्तर प्रदेश के प्रभारी एक प्रदेश अध्यक्ष पूर्व पुलिस उप महानिरीक्षक IPS जुगल किशोर तिवारी जी है जिनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 के विधान सभा चुनाव में राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा से पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो कोई शेर कहता है, कोई महाशेर लेकिन समाज पूछ रहा है _जब सवर्ण समाज पर संकट था तब आप कहा थे? क्या कभी भी UGC जैसे गंभीर मुद्दे पर बोले ? क्या भारत भूषण तिवारी हत्या कांड पर श्रद्धांजलि देवे गए क्या भरत तिवारी हत्या पर कुछ बोले क्या समाज के दर्द मे कभी खड़े दिखाई दिए? सच तो यह है कि कुछ लोग सिर्फ जय_जयकार करने में लगे हैं। आज जब सत्ता ने धक्का दे दिया तब मगर मक्छ की आशु बहा रहे हैं नम्बर सबका आयेगे यह तो ट्रेलर है पूरी पिक्चर बाकी है सत्ता के लिए राजनीत नहीं समाज के लिए संघर्ष चाहिए जो समाज के UGC मुद्दे पर एससीएसटी एक्ट के तहत उत्पीड़न होने पर,युवाओ और शाहिद भरत तिवारी की हत्या पर कभी नहीं बोला आरक्षण जो सवर्ण बच्चों के प्रतिभा का हत्या कर रहा है उस पर नहीं बोला ऐसे कुल कलंकियों का साथ देना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ है।
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड देगा उत्कृष्ट इकाइयों को पुरस्कार, 18 जुलाई तक करें आवेदन

-  मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना और पीएम रोजगार सृजन योजना के लाभार्थियों का होगा चयन, दिए जाएंगे पुरस्कार



लखनऊ। उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'पुरस्कार योजना' के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली ग्रामोद्योग इकाइयों और लाभार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। योजना के तहत चयनित इकाइयों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ए.के. गौतम ने बताया कि चयन उन इकाइयों का किया जाएगा, जिन्हें पिछले तीन वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना अथवा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है और जिन्होंने उत्पादन, बिक्री तथा रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

इच्छुक लाभार्थियों को अपनी प्रगति रिपोर्ट, उत्पादन एवं बिक्री का विवरण, बैंक से प्राप्त ऋण संबंधी जानकारी तथा रोजगार सृजन के आंकड़ों सहित आवेदन पत्र 18 जुलाई 2026 शाम 5 बजे तक जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, 8 कैंट रोड, कैसरबाग, लखनऊ में जमा करना होगा।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने बताया कि प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन जनपद स्तरीय चयन समिति करेगी। चयनित इकाइयों के प्रस्ताव आगे की प्रक्रिया के लिए परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग कार्यालय, लखनऊ मंडल को भेजे जाएंगे, जहां मंडल स्तर पर अंतिम चयन कर पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्रामोद्योग इकाइयों को प्रोत्साहित करना तथा स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
डॉ. अभिषेक शुक्ला सर्वश्रेष्ठ शोध पुरस्कार से सम्मानित
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के 30वें दीक्षांत समारोह में आज न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अभिषेक एस. शुक्ला को प्रतिष्ठित डॉ. एस.एस. अग्रवाल उत्कृष्ट शोध पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। डॉ. शुक्ला को यह सम्मान उनके शोध पत्र "ब्रेन सर्जरी के बाद प्रारंभिक पोस्ट-ऑपरेटिव सीटी स्कैन की नैदानिक महत्ता और उपयोगिता: एक संभावित अध्ययन" के लिए प्रदान किया गया। इस अध्ययन में 339 मरीजों पर किए गए शोध में पाया गया कि स्थिर या अपेक्षित न्यूरोलॉजिकल स्थिति वाले मरीजों में सर्जरी के तुरंत बाद रूटीन सीटी स्कैन से मरीजों के उपचार में बहुत कम बदलाव आता है। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि विस्तृत न्यूरोलॉजिकल जांच के साथ आवश्यकता पड़ने पर ही चयनात्मक सीटी स्कैन करना अधिक कुशल और लागत प्रभावी तरीका है।यह शोध कार्य *न्यूरोसर्जरी विभाग, एसजीपीजीआई के मार्गदर्शन में पूर्ण किया गया। पुरस्कार प्राप्त करने पर डॉ. अभिषेक एस. शुक्ला ने कहा कि मुझे एस.एस. अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर अत्यंत गर्व है। मैं अपने विभाग, गुरुओं और संस्थान का आभार व्यक्त करता हूँ। यह सम्मान मुझे भविष्य में भी रोगियों के हित में शोध कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।
मुख्यमंत्री योगी से मिले अनुराग ठाकुर, आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश और विकास के मुद्दों पर हुई चर्चा
-  पूर्व केंद्रीय मंत्री बोले- प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई गति दे रही है योगी सरकार

लखनऊ। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न समसामयिक और विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
मुलाकात के बाद अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को उत्तर प्रदेश सरकार 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के माध्यम से प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय और अभिनंदनीय प्रयास कर रही है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने कानून-व्यवस्था, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उनके अनुसार प्रदेश आज भयमुक्त और माफियामुक्त वातावरण के साथ लोककल्याण और सांस्कृतिक विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश देश के विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की मासिक समीक्षा बैठक में महिला संस्थानों के निरीक्षण की प्रगति पर मंथन
-  अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी हुई चर्चा


लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की मासिक समीक्षा बैठक मंगलवार को आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक का शुभारंभ अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान, उपाध्यक्ष अपर्णा यादव एवं चारू चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

बैठक में आयोग के पदाधिकारियों द्वारा पिछले माह प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आयोजित महिला जनसुनवाई, वन स्टॉप सेंटर, महिला चिकित्सालय, महिला बंदीगृह तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के निरीक्षण की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान सामने आए मुद्दों पर चर्चा करते हुए अध्यक्ष ने आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों को पत्र भेजकर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में आगामी माह में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों, महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण से जुड़े अभियानों तथा आयोग की कार्ययोजना पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक के अंत में आयोग की सदस्य सचिव रेणु तिवारी ने सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए बैठक का समापन किया।

बैठक में आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान, उपाध्यक्ष अपर्णा यादव एवं चारू चौधरी सहित सदस्य हिमानी अग्रवाल, सुनीता श्रीवास्तव, पूनम द्विवेदी, अनीता गुप्ता, अनुपमा सिंह लोधी, गीता बिंद, गीता विश्वकर्मा, पुष्पा पांडेय, मीनाक्षी भराला, ऋतु शाही, एकता सिंह, प्रतिभा कुशवाहा, रेनू गौड़ तथा अन्य अधिकारी एवं गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' देशहित में जरूरी, इसे जल्द लागू किया जाए: ए.के. शर्मा
-  लखनऊ में संयुक्त संसदीय समिति के साथ बैठक, मंत्री बोले- बार-बार चुनाव से विकास कार्य प्रभावित होते हैं; 'वन वोटर लिस्ट' का भी किया समर्थन

लखनऊ। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विषय पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्यों के साथ मंगलवार को लखनऊ के एक होटल में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने इस व्यवस्था को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल बताते हुए इसे देशहित में शीघ्र लागू करने की वकालत की। उन्होंने 'वन वोटर लिस्ट' लागू करने का भी समर्थन किया।

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
ए.के. शर्मा ने कहा कि वर्ष 2021 से राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान उन्होंने लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय सहित कई चुनाव देखे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा व्यवस्था जारी रहती है तो आठ वर्षों में आठ चुनावों जैसी स्थिति बन जाती है। इससे चुनाव से पहले और बाद में प्रशासन लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहता है, जिससे विकास कार्यों और सामान्य प्रशासनिक गतिविधियों की गति प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' लागू होने से चुनावों की आवृत्ति कम होगी, चुनावी खर्च में कमी आएगी, सुरक्षा बलों की बार-बार तैनाती की आवश्यकता घटेगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इसके साथ ही प्रशासन विकास कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेगा और जनता को समयबद्ध सेवाएं मिलेंगी।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने के लिए प्रशासनिक दक्षता और विकास की निरंतरता आवश्यक है। उनके अनुसार, एक साथ चुनाव की व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रणाली को अधिक प्रभावी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार साबित होगी।
बैठक में उपस्थित अन्य मंत्रियों ने भी देशहित में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' लागू किए जाने का समर्थन किया। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह व्यवस्था लोकतंत्र को और मजबूत करेगी तथा विकास कार्यों में तेजी लाने में सहायक होगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों से इस विषय पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
यूपी की बेड एंड ब्रेकफास्ट व होम स्टे नीति-2025 में बड़ा बदलाव, अब 8 कमरे तक होंगे पंजीकृत
-  एसओपी में संशोधन से हितधारकों को मिली राहत, ऑटो-रिन्यूअल की प्रक्रिया भी हुई आसान: पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025 को अधिक प्रभावी और लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से इसकी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों में कम से कम 1 और अधिकतम 8 कमरों का पंजीकरण कराया जा सकेगा। पहले यह सीमा अधिकतम 6 कमरों तक थी।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संशोधित एसओपी का उद्देश्य हितधारकों को अधिक सुविधाएं प्रदान करना और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि 9 या उससे अधिक कमरों वाले भवन इस नीति के तहत पंजीकरण के पात्र नहीं होंगे। साथ ही, होम स्टे के लिए यह अनिवार्य होगा कि प्रतिष्ठान का मालिक या उसका परिवार उसी भवन में निवास करता हो।
मंत्री ने बताया कि बेड एंड ब्रेकफास्ट श्रेणी में भी अब अधिकतम 8 कमरों का पंजीकरण कराया जा सकेगा। इसके अलावा 16 बिस्तरों वाली डॉर्मेट्री को भी इस श्रेणी में पात्र इकाई माना जाएगा। पहले यह सीमा 12 बिस्तरों तक थी।
संशोधित व्यवस्था के तहत होम स्टे, ग्रामीण होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के पंजीकरण प्रमाणपत्र का ऑटो-रिन्यूअल अब आवेदक स्वयं उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के पोर्टल पर कर सकेंगे। ऑटो-रिन्यूअल की प्रक्रिया पंजीकरण की वैधता समाप्त होने से तीन महीने पहले शुरू की जा सकेगी।
यदि निर्धारित समय सीमा में ऑटो-रिन्यूअल नहीं कराया जाता है, तो ऐसे मामलों में जिला स्तरीय समिति उचित कारणों के आधार पर निर्णय लेगी।
सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से होम स्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
योगी का बड़ा हमला: 'हनुमानगढ़ी पर नमाज पढ़वाने वाले देश की आस्था और अस्मिता पर कर रहे प्रहार'


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार काे कहा कि जिनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि नहीं है, वे देश की अस्मिता व आस्था पर लगातार प्रहार कर रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मामले में ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी निष्पक्ष जांच कर रही है और आरोपिताें के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। नैतिक आधार पर इस्तीफे भी हुए हैं। लेकिन, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आड़ में जो लोग आस्था के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं, हिंदू धामों पर प्रहार कर रहे हैं, ये वही लोग हैं जो गरीबों के हक पर डकैती डालते थे और हनुमानगढ़ी जैसे पवित्र स्थल पर नमाज पढ़वाने का कुत्सित प्रयास करते थे।

आज उत्तर प्रदेश 'बीमारू' राज्य की श्रेणी से बाहर

मुख्यमंत्री ने जनता से राष्ट्रीय मूल्यों को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी ताकतों से सजग रहने की अपील की। मुख्यमंत्री मंगलवार को लखनऊ में एक निजी न्यूज़ चैनल के विशेष कॉन्क्लेव 'ऊंचाइयों पर यूपी' को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पिछले 9 वर्षों से अधिक समय के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में आए युगांतकारी परिवर्तनों और उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और डबल इंजन सरकार के दृढ़ संकल्प से आज उत्तर प्रदेश 'बीमारू' राज्य की श्रेणी से बाहर निकलकर देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।

बेटियों को यूपी से बाहर भेज देते थे लोग

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में 2017 से पहले हर तीसरे दिन दंगा होता था, महीनों तक कर्फ्यू रहता था। बेटी व व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। 35 से ज्यादा ऐसे जनपद थे, जहां लोगों ने बेटी को यूपी के बाहर हॉस्टल या रिश्तेदार के घर भेजकर पढ़ाई कराई। अन्य लोग बेटियों की सुरक्षा के लिए उन्हें स्कूल भेजना ही बंद कर देते थे। व्यापारी को पता नहीं होता था कि घर लौट पाएगा या नहीं। किसान अपने खेत में जाने से डरता था।

विस्फोटों से जुड़ता था यूपी का नाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस वक्त देश में कहीं विस्फोट होता था, तो यूपी का नाम जुड़ता था। पिछली सरकारों में दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर सम्मानित किया जाता था। माफियाओं के सामने सरकारें नतमस्तक होकर नाक रगड़ती थीं। नई पीढ़ी को यह जानकारी देने की आवश्यकता है। लेकिन, पिछले 9 वर्षों में हमारी पहचान दंगा, कर्फ्यू और उपद्रवमुक्त उत्तर प्रदेश के रूप में बनी है। उत्तर प्रदेश में अब बेटी, व्यापारी समेत हर व्यक्ति सुरक्षित है।

75 जिलों के 79 उत्पादों को जीआई टैग के साथ जोड़ा गया

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का वातावरण नहीं बना होता तो कोई निवेशक यूपी में नहीं आता। हमने 2017 अक्टूबर में इन्वेस्टर समिट की योजना बनाई और इसके लिए पॉलिसी तैयार की। नतीजा यह कि यूपी को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं, जिसमें 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट धरातल पर उतारे जा चुके हैं। 2017 के पहले लखनऊ की चिकनकारी, फिरोजाबाद का ग्लास, मुरादाबाद का पीतल, मेरठ का स्पोर्ट्स, भदोही का कालीन व बनारस का साड़ी उद्योग दम तोड़ रहा था।

उद्यमियों व कारोबारियों के पास घर बैठने के सिवा कोई चारा नहीं था। डबल इंजन सरकार बनी तो हमने ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) के रूप में इनकी ब्रांडिंग की। 75 जिलों के 79 उत्पादों को जीआई टैग के साथ जोड़ा गया है। ओडीओपी के तहत वर्तमान में 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी में कार्यरत हैं, जिनमें सवा तीन करोड़ युवाओं को रोजगार मिला है। यूपी आज 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ओडीओपी उत्पाद निर्यात कर रहा है।

यूपी का बजट 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी के बजट को 3 लाख करोड़ से बढ़कर 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 2016-17 में यूपी की कुल जीएसडीपी 12 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। तब प्रति व्यक्ति आय महज 43 हजार रुपये थी, जो अब 1.20 लाख रुपये से अधिक है। उत्तर प्रदेश में महिला कार्यबल केवल 12 प्रतिशत था, आज वह 38 प्रतिशत से अधिक है। बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत से भी कम रह गई है। यह तस्वीर नए उत्तर प्रदेश को पेश करती है।

एक्सप्रेसवे में 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी

सीएम ने कहा कि अब देश के कुल एक्सप्रेसवे में 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे व देश का सबसे बड़ा गंगा एक्सप्रेसवे भी प्रारंभ हो चुका है। सोमवार से लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे शुरू हुआ है। अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी हो या जिला मुख्यालय, सभी फोरलेन से जुड़े हैं। देश का पहला इनलैंड वॉटरवे, रैपिड रेल व रोपवे के साथ जल्द ही जुड़ने वाला वाराणसी शहर भी यूपी में है। सबसे ज्यादा एयरपोर्ट व मेट्रो का संचलान यूपी में हो रहा है। रेलवे का सबसे बड़ा नेटवर्क भी यूपी के पास है। ये सब 9 वर्ष पहले सिर्फ सपना था।

122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले यूपी सरकार ने आम महोत्सव आयोजित किया, जिसमें हजारों टन आम निर्यात किया गया। दुनियाभर के लोग यूपी का आम खरीदने के लिए लाइन में खड़े थे। 2014 से पहले किसान सुविधाओं के अभाव में आत्महत्या करने के लिए मजबूर था। 2007 से 2017 के बीच यूपी की 29 चीनी मिलें बंद हुईं या बेच दी गईं। 3-3 करोड़ में बेची जाने वाली चीनी मिलों की जमीन ही सैकड़ों करोड़ रुपये की थी। हमारी सरकार ने 2017 से अब तक 3.23 लाख करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों के खातों में किया है। 122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा है। देश के अंदर गन्ना, चीनी व एथेनॉल उत्पादन में यूपी नंबर-1 है।

24 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में पिछले 9 वर्ष में 24 लाख हेक्टेयर लैंड को सिंचाई सुविधा दी गई है। बाणसागर परियोजना दशकों से लंबित थी, जिसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत पूरा किया। 2.5 लाख हेक्टेयर लैंड को इससे सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई। बुंदेलखंड में अर्जुन सहायक परियोजना दशकों से लंबित थी, जिसे पूरा करवाया गया। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को योजना आयोग ने 1970 के दशक में स्वीकृत किया था। 1977 में इसकी आधारशिला रखी गई, लेकिन यह कभी पूरी नहीं हो पाई।

तब इस पर कुल 100 करोड़ खर्च होने थे, लेकिन समय पर कार्य न होने के कारण 10 हजार करोड़ रुपए खर्च करने पड़े। किसान को 10 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। 9 लाख से अधिक युवाओं को प्रदेश में सरकारी नौकरी दी गई। अकेले यूपी पुलिस में 2 लाख 25 हजार से अधिक भर्तियां की गईं। यूपी पुलिस में 2017 के पहले केवल 10 हजार महिला पुलिसकार्मिक थीं, जिनकी संख्या अब 45 हजार हो गई है।

12 हजार रुपये सालाना पेंशन की सुविधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में वेलफेयर स्कीम के जरिए 16 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त राशन का लाभ मिल रहा है। 1.6 करोड़ परिवार ऐसे हैं, जिनको निराश्रित महिला पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन या फिर दिव्यांगजन पेंशन के माध्यम से 12 हजार रुपये सालाना पेंशन की सुविधा का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। 25 लाख से अधिक महिलाओं-बालिकाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का लाभ दिया जा रहा है। 5 लाख से अधिक माताओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत योजना का सुविधा दी जा रही है। 6 लाख से अधिक बालिकाओं की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत शादी कराई गई है। अब पिता इस बात के लिए चिंतित नहीं होता है कि बेटी बड़ी हो गई है तो उसकी शादी के लिए पैसा कहां से आएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार और IIM इंदौर के बीच हुआ MoU, शहरी निकायों को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण
-  क्षमता संवर्धन, अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा, व्यवहार आधारित प्रशिक्षण से मजबूत होगा शहरी सुशासन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत अर्बन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (UTRI), लखनऊ और भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM), इंदौर के बीच शहरी विकास, क्षमता संवर्धन, प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मंगलवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान किया गया। यह प्रक्रिया वर्चुअल माध्यम से नगर विकास विभाग के सचिव एवं यूटीआरआई के निदेशक अनुज कुमार झा तथा आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय की उपस्थिति में संपन्न हुई।
इस साझेदारी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा देना तथा व्यवहार आधारित (Behavioural) शहरी प्रशासन विकसित करना है। साथ ही सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) प्रणाली को भी अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।
समझौते के तहत पहले चरण में वरिष्ठ अधिकारियों, नगर आयुक्तों, पार्षदों, जनप्रतिनिधियों और यूटीआरआई के मेंटर्स के लिए व्यवहार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम संचालित होंगे, जिससे प्रदेश के सभी शहरी निकायों के लिए एक मजबूत प्रशिक्षण तंत्र विकसित किया जा सके। इसके अलावा शहरी विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक शिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे तथा मिशन कर्मयोगी की तर्ज पर ई-लर्निंग और वेबिनार आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे।
एमओयू के तहत स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM), स्मार्ट सिटी अवधारणा, यातायात प्रबंधन, आईईसी रणनीति, प्रशिक्षण मॉड्यूल निर्माण, शोध एवं नीति आधारित अनुसंधान पर भी संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। आईआईएम इंदौर विभिन्न शहरी निकायों का व्यवहार विश्लेषण (Behavioural Analysis) कर उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी आईईसी कार्ययोजना तैयार करेगा तथा स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन आधारित अभियानों को मजबूती देगा। साझेदारी के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले और अपेक्षाकृत कमजोर शहरी निकायों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाएगा, ताकि श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को पूरे प्रदेश में लागू किया जा सके।
नगर विकास विभाग के सचिव एवं यूटीआरआई के निदेशक अनुज कुमार झा ने कहा कि यह समझौता ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता संवर्धन और नवाचार आधारित सुशासन को नई दिशा देगा। वहीं, आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहा कि व्यवहार आधारित प्रशिक्षण, शोध और नियमित समीक्षा के माध्यम से शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी, नागरिक-केंद्रित और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। यह पहल उत्तर प्रदेश में सतत, स्मार्ट और बेहतर शहरी विकास के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।