10 अगस्त को झारखंड में राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको: अल्बर्ट एक्का चौक पर 3 घंटे का चक्का जाम

रांची: केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको अभियान को सफल बनाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय रांची में संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त मजदूर संगठनो के और से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश संयोजक भंते जैनेंद्र तथागत सीटू के प्रतीक मिश्रा का निर्माण बॉस खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव इम्तियाज़ खान जिला सचिव अजय कुमार सिंह उपस्थित थे

10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक रोड ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। इसमें सैकड़ों की तादाद में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र-नौजवान शामिल होंगे।

मुख्य मांगें:

1. 4 श्रम कानून/लेबर कोड वापस लो

2. असंगठित मजदूरों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू करो

3. 12 घंटे की जगह 8 घंटे काम का समय तय करो

4. भूमि बैंक रद्द करो

5. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो

6. किसानों, महिलाओं एवं छात्रों का कर्ज माफ करो

7. विस्थापन नीति एवं पुनर्वास नीति बनाओ

8. मनरेगा में 250 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की गारंटी करो

9. JPSC परीक्षा रद्द करो एवं JSSC पेपर लीक मामले में वर्तमान जजों की कमेटी से न्यायिक जांच करो

नेताओं के बयान:

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसानों-मजदूरों के रास्ता रोको अभियान का तन-मन-धन से समर्थन करती है और सड़कों पर उतरकर आंदोलन में साथ देगी।

झारखंड राज किसान सभा के प्रदेश संयोजक भारतीय जैनेंद्र तथागत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही है, सार्वजनिक संस्थाओं को बेच रही है। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। पेपर लीक के कारण छात्र-युवा आत्महत्या कर रहे हैं। इन सभी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। सीटू के अनिर्बन बस एवं प्रतीक मिश्रा ने कहा

कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में रास्ता रोको-रेल रोको_ आंदोलन को सफल बनाएं।

बैठक में उपस्थित:*

महेंद्र पाठक - प्रदेश सचिव, भाकपा

अजय कुमार सिंह - जिला सचिव, भाकपा रांची

अशोक यादव - महासचिव, एटक

भंते जैनेंद्र तथागत - प्रदेश संयोजक, किसान सभा

इशहाक अंसारी - जिला सचिव, किसान सभा

छुमु उरांव, प्रतीक मिश्रा - सीटू

परफूल लिंडा - आदिवासी जन अधिकार मंच

शुभेंदु सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच एवं एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाया गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल ताबड़तोड़ दो पोस्ट कर सीआईडी जांच की कार्यप्रणाली एवं इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी (CID) की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। यह अविश्वास निराधार नहीं है। जिस सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है। वास्तविकता तो यह थी कि सीजीएल के अधिकांश प्रश्न पिछले प्रश्नपत्रों से हूबहू उठाए गए थे और चयनित 'खास' उम्मीदवारों को पहले से ही उन सवालों की कोचिंग दे दी गई थी, लेकिन सीआईडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से अवैध उगाही का दागदार इतिहास रहा है। ऐसे दागी अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों के अनुभव से विहीन अफसरों वाली सीआईडी महज सरकार की कठपुतली बनकर रह गई है।

उन्होंने कहा कि इसी कठपुतली एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपों की कोई जांच कराए बिना ही जानबूझकर एक बेहद कमजोर एफआईआर दर्ज की है, ताकि सत्ताधारी दल के राजनेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को सुरक्षित निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का घिनौना खेल खेल रही है। एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआईडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी।

श्री मरांडी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह महज कोई साधारण पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुनियोजित महाघोटाला है जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं के इशारे पर पैसों के बदले पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित किया जा सके। सबसे हैरानी और सीआईडी की नीयत पर शक पैदा करने वाली बात तो यह है कि जब यह तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है कि परीक्षा कराने वाली दागी एजेंसी के पीछे का मुख्य व्यक्ति अभय कुमार तिवारी खुद धोखाधड़ी के जरिए कई अन्य परीक्षाओं में नौकरियां पा चुका है, तो सीआईडी ने उन पुरानी परीक्षाओं के हेरफेर के मामले में अब तक कोई नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? सीआईडी जानबूझकर केवल छोटे उम्मीदवारों और निजी एजेंसियों को मोहरा बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे असली गुनाहगारों को छुआ तक नहीं जा रहा।

उन्होंने कहा कि सीआईडी का पिछला इतिहास हमेशा से सच को दबाने और समझौता करने वाला रहा है। ऐसे में राज्य के हर युवा और नागरिक का अब सरकार से सीधा सवाल है कि अगर उसके हाथ वाकई साफ हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है, तो वह इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप देती?

वहीं अपने दूसरे पोस्ट में श्री मरांडी ने कहा है कि झारखंड में आज सिपाही से लेकर एसपी तक हर कोई जानता है कि राज्य में पुलिस का असली नियंत्रण डीजीपी के पास नहीं, बल्कि मनोज कौशिक के पास है, जिनका अतीत कोयले के काले कारोबार और भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग एसपी रहते हुए उन पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका भंडाफोड़ तत्कालीन ईमानदार और कड़क आईजी मुरारीलाल मीणा ने किया था।

इसके बाद उन पर दूसरी गाज तब गिरी जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें दर्ज हुईं। शुरुआत में नीरज सिन्हा जैसे विवादास्पद अधिकारी (जिन्होंने खुद जेएसएससी घोटाले में फंसने के डर से हाल ही में इस्तीफा दे दिया) ने जांच की दिशा भटकाकर मामले को गोल-गोल घुमाने और रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब वही ईमानदार अफसर मुरारीलाल मीणा एसीबी के चीफ बनकर आए, तो रुकी हुई जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।

यह दूसरी बार था जब मनोज कौशिक कानूनी शिकंजे में फंसे; एसीबी की निष्पक्ष जांच में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने इन आरोपों की पुष्टि करते हुए, उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को सीधे पत्र लिखा। इन दो-दो ठोस आधिकारिक जांच रिपोर्टों और दागी कारनामों के बावजूद, आज आलम यह है कि पुलिस महकमे के सारे कामकाज और 'धंधे' का निर्देश अधिकारी डीजीपी से नहीं, बल्कि मनोज कौशिक से लेते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता से लेकर विपक्ष तक सब जानते हैं कि पुलिस के नियंत्रण में कोयला, बालू और पत्थर चोरी के कारोबार का पूरा कंट्रोल किसके हाथ में है और कौन इसे संचालित और मैनेज करवा रहा है। सरकार जानबूझकर सीआईडी और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे ही दागदार अफसरों को चुनकर बैठाती है ताकि वे कानून के प्रति नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं और उनके दलालों के नौकर बनकर काम करें। इसका जीता-जागता प्रमाण तब मिला जब सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जांच की दिशा भटका दी और सत्ता के दलालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में सीआईडी की तरफ से भ्रामक शपथ पत्र दिलवाकर पूरी जांच की हवा निकाल दी। सत्ता के मनमाफिक ये सारे गैर-कानूनी काम करके वह सरकार के सबसे बड़े चहेते बन गए हैं। मनोज कौशिक के इसी काले इतिहास, उन पर हुई दो-दो आधिकारिक जांचों और वर्तमान की सत्ता-परस्ती को देखते हुए यह साफ हो चुका है कि झारखंड में अब किसी को भी सीआईडी जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है।

बिग न्यूज:JPSC-JSSC विवाद पर बड़ी बैठक ,देवेन्द्रनाथ महतो गुट और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हो रही है बात चित

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों और सरकार के बीच शनिवार को एक और दौर की मह्त्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है।

JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच का 8-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कड़े सुरक्षा घेरे में स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच चुका है.शुक्रवार की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज की इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में JLKM नेता देवेन्द्रनाथ महतो पिछले 6 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया .

शुक्रवार को सरकार और छात्रों के दूसरे गुट के बीच हुई वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। हालांकि, दोनों ही पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालने के पक्ष में हैं।

देवेन्द्रनाथ महतो की बिगड़ती सेहत के बीच, आज की यह बैठक बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या आज की वार्ता से अभ्यर्थियों की मांगों पर कोई ठोस सहमति बन पाती है या गतिरोध यूं ही बरकरार रहेगा।

नोट: इस खबर से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए बने रहिए streetbuzz.co.in साथ।

रांची में बैठे प्रदर्शनकारियों से राहुल गांधी ने की बात, मांगों पर सीएम हेमंत से बात करने का दिलाया भरोसा

#jharkhand

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है। आज 14वें दिन भी स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से फोन पर बात की है और हर संभव मदद का भरोसा दिया है। बता दें कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नीत गठबंधन का एक घटक दल है।

छात्रों को दिया हर संभव मदद का भरोसा

छात्र नेताओं ने दावा किया कि गुरुवार देर शाम राहुल गांदी से फोन पर बातचीत हुई। धरना दे रहे छात्र नेताओं की राहुल गांधी से बातचीत रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के मोबाइल फोन के माध्यम से कराई गई। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वो इस मामले को लेकर सीएम हेमंत सोरेन से भी बात कर सकते हैं।

मांगों की सूची व्हाट्सएप पर मंगाई

ये बातचीत लगभग 10 मिनट तक चली। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा कि वे अपनी सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन उन्हें व्हाट्सएप पर भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पूरे मामले पर झारखंड सरकार से बात करेंगे और छात्रों की मांगों के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए।

क्या है छात्रों की मांगें?

प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए। उन्होंने जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया।

वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित

इधर, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक अधिवक्ता को शामिल किया गया। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के समक्ष केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें रखेंगे। पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद रहेंगे।

जेपीएससी-जेएससीसी परीक्षा विवाद पर डटे आंदोलकारी छात्र, सीएम हेमंत से वार्ता का इंतजार

#jpscjsccexamcontroversystudentstoholdtalkswith_government

झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तैयार

जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों आंदोलन के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। सरकार के साथ होने वाली बातचीत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में राज्य सरकार के साथ वार्ता होगी। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक वकील को शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के दौरान सभी मांगे और तथ्य केवल छात्र प्रतिनिधि ही सरकार के सामने रखेंगे।

वार्ता के प्रस्ताव के बाद भी नहीं आया बुलावा

सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अब तक छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर राष्ट्रभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र अपनी बात रख रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच।

-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

झारखंड सरकार युवाओं को दे रही रोजगार के अवसर; जेएसएससी सीजीएल-2023 के सफल अभ्यर्थियों ने संभाली जिम्मेदारी।

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित CGL-2023 परीक्षा में सफलता प्राप्त कर विभिन्न अंचलों में नियुक्त हुए अंचल निरीक्षक (सर्किल इंस्पेक्टर) और कानूनगो ने सोमवार को रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री से औपचारिक मुलाकात की। समाहरणालय स्थित सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में उपायुक्त ने नए अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।

सरकार की नीतियों का परिणाम

उपायुक्त ने सभी नव नियुक्त कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और युवाओं को रोजगार देने की प्रतिबद्धता का सुखद परिणाम है। उन्होंने जोर दिया कि प्रतिभाशाली अधिकारियों के आने से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी।

डीसी के 4 महत्वपूर्ण गुरुमंत्र:

उपायुक्त ने नव नियुक्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए चार प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:

सीखने की प्रवृत्ति: प्रशासनिक करियर की शुरुआत में निरंतर सीखना आवश्यक है। कभी भी अहंकार (ईगो) को अपने काम के बीच न आने दें।

क्षेत्रीय अनुभव: कागजी कार्यवाही के साथ-साथ फील्ड में जाकर भूमि संबंधी मामलों और राजस्व संग्रहण की बारीकियों को समझें।

जनता से व्यवहार: आम जनता के साथ शालीनता और धैर्य से पेश आएं। दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ईमानदारी: अपने कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता बरतें ताकि शासन की छवि उज्ज्वल बनी रहे।

अबुआ साथी: जनता के लिए नई पहल

कार्यक्रम के दौरान रांची जिला प्रशासन के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर 9430328080 (अबुआ साथी) का भी उल्लेख किया गया, जिसके माध्यम से जनता सीधे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकती है। उपायुक्त ने विश्वास जताया कि ये युवा अधिकारी राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सेतु का काम करेंगे।

उत्पाद सिपाही बहाली की दौड़ 10 सितंबर से फिर शुरू, पलामू के चियांकी केंद्र में परीक्षा नहीं |

Ranchi | 10-09-2024 : एडीजी मुख्यालय आरके मल्लिक ने कहा कि जेएसएससी द्वारा आयोजित उत्पाद सिपाही (JSSC Excise Constable) की बहाली के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा छह केंद्रों पर 10 सितंबर से शुरू होगी. वहीं, पलामू के चियांकी हवाई अड्डा स्थित केंद्र पर अब शेष शारीरिक दक्षता परीक्षा नहीं होगी. इस केंद्र के शेष अभ्यर्थियों, जिनकी परीक्षा तीन से नौ सितंबर 2024 तक होनी थी, वह अब बाकी के छह चयन पर्षद के केंद्रों पर ली जायेगी. यह परीक्षा 19-20 सितंबर तक होगी. क्योंकि 14 से 17 सितंबर तक अवकाश है.



झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: पेसा नियमावली 2025 को मंजूरी, JSSC परीक्षा नियमों में संशोधन और नई नियुक्तियों का रास्ता साफ

रांची: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट ने पेसा (PESA) नियमावली 2025 के गठन को स्वीकृति देकर अनुसूचित क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है।

प्रमुख निर्णय और उनके प्रभाव:

1. नियुक्ति और रोजगार में तेजी: सरकार ने JSSC की मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर की परीक्षा संचालन नियमावलियों में आवश्यक संशोधन किए हैं, जिससे लंबित नियुक्तियों में तेजी आएगी। साथ ही, सीधी नियुक्ति हेतु नई आयु सीमा का निर्धारण और परिवहन विभाग में 21 मोटरयान निरीक्षकों (MVI) के पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।

2. कस्तूरबा विद्यालयों का कायाकल्प: राज्य के 21 कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास निर्माण के लिए ₹51.16 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, आकांक्षा कार्यक्रम के शिक्षकों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है।

3. सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर: दुमका और जमशेदपुर (बहरागोड़ा) में सड़कों के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के लिए लगभग ₹73 करोड़ के प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। वहीं, सरकारी आवासों और कार्यालयों के पुनर्विकास के लिए NBCC के साथ MoU को हरी झंडी मिली है।

4. लापरवाह डॉक्टरों पर कार्रवाई: कर्तव्य से अनधिकृत रूप से गायब रहने के कारण साहेबगंज की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ० मिनी सिन्हा और ओरमांझी की दंत चिकित्सक डॉ० रीमा को सेवा से बर्खास्त करने का कड़ा फैसला लिया गया है।

5. किसानों और पशुपालकों के लिए पहल: राँची के काँके स्थित राजकीय बेकन फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने के लिए हैदराबाद के राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान के साथ समझौता किया गया है। साथ ही बागवानी विकास के लिए बेंगलुरु के संस्थान से परामर्शी सेवा लेने पर सहमति बनी है।

हाईकोर्ट के फैसले से JSSC-CGL अभ्यर्थियों में खुशी की लहर!


CBI जांच की मांग वाली याचिका खारिज; रिजल्ट जारी करने का निर्देश मिलते ही रांची में जश्न

रांची, 4 दिसंबर 2025।

झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) के कथित पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर देने के बाद राज्यभर के हजारों अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। बुधवार को फैसला आने के कुछ ही घंटों के भीतर, राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जमा हो गए और जमकर जश्न मनाया।

जश्न और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया

खुशी का इजहार: अभ्यर्थियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर खुशी जाहिर की और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर अपनी खुशी बांटी।

राहत की सांस: अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से रिजल्ट जारी होने का इंतजार कर रहे थे, जिससे उनकी तैयारी और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे थे। हाईकोर्ट द्वारा रिजल्ट जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली है।

नई शुरुआत: कई अभ्यर्थियों ने इस फैसले को अपने 'करियर की नई शुरुआत' बताते हुए सरकार और आयोग से जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने की अपील की।

न्यायालय का फैसला

हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर शामिल थे, ने 3 नवंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मुख्य निर्णय: अदालत ने बुधवार को सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया और आयोग को परिणाम जारी करने का निर्देश दिया।

रोक: हालांकि, कोर्ट ने उन दस अभ्यर्थियों के रिजल्ट पर रोक लगा दी है, जिन्होंने कथित तौर पर नेपाल में रहकर परीक्षा की तैयारी की थी।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता समीर रंजन ने बहस की थी। उन्होंने सुनवाई के दौरान दावा किया था कि 22 सितंबर 2024 को आयोजित परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र लीक हुआ था। उनकी दलीलों में व्हाट्सएप चैट, संदिग्धों के बयान, नेपाल कनेक्शन और कथित भुगतान के सबूतों का हवाला दिया गया था।

अल्बर्ट एक्का चौक पर जुटे अभ्यर्थियों ने कहा कि हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से लंबे समय से अटकी भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है और हजारों युवाओं में नई उम्मीद जगी है।

सर्प संरक्षणकर्मी शिव खनाल सम्मानित

10 अगस्त को झारखंड में राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको: अल्बर्ट एक्का चौक पर 3 घंटे का चक्का जाम

रांची: केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको अभियान को सफल बनाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय रांची में संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त मजदूर संगठनो के और से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश संयोजक भंते जैनेंद्र तथागत सीटू के प्रतीक मिश्रा का निर्माण बॉस खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव इम्तियाज़ खान जिला सचिव अजय कुमार सिंह उपस्थित थे

10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक रोड ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। इसमें सैकड़ों की तादाद में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र-नौजवान शामिल होंगे।

मुख्य मांगें:

1. 4 श्रम कानून/लेबर कोड वापस लो

2. असंगठित मजदूरों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू करो

3. 12 घंटे की जगह 8 घंटे काम का समय तय करो

4. भूमि बैंक रद्द करो

5. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो

6. किसानों, महिलाओं एवं छात्रों का कर्ज माफ करो

7. विस्थापन नीति एवं पुनर्वास नीति बनाओ

8. मनरेगा में 250 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की गारंटी करो

9. JPSC परीक्षा रद्द करो एवं JSSC पेपर लीक मामले में वर्तमान जजों की कमेटी से न्यायिक जांच करो

नेताओं के बयान:

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसानों-मजदूरों के रास्ता रोको अभियान का तन-मन-धन से समर्थन करती है और सड़कों पर उतरकर आंदोलन में साथ देगी।

झारखंड राज किसान सभा के प्रदेश संयोजक भारतीय जैनेंद्र तथागत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही है, सार्वजनिक संस्थाओं को बेच रही है। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। पेपर लीक के कारण छात्र-युवा आत्महत्या कर रहे हैं। इन सभी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। सीटू के अनिर्बन बस एवं प्रतीक मिश्रा ने कहा

कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में रास्ता रोको-रेल रोको_ आंदोलन को सफल बनाएं।

बैठक में उपस्थित:*

महेंद्र पाठक - प्रदेश सचिव, भाकपा

अजय कुमार सिंह - जिला सचिव, भाकपा रांची

अशोक यादव - महासचिव, एटक

भंते जैनेंद्र तथागत - प्रदेश संयोजक, किसान सभा

इशहाक अंसारी - जिला सचिव, किसान सभा

छुमु उरांव, प्रतीक मिश्रा - सीटू

परफूल लिंडा - आदिवासी जन अधिकार मंच

शुभेंदु सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच एवं एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाया गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल ताबड़तोड़ दो पोस्ट कर सीआईडी जांच की कार्यप्रणाली एवं इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी (CID) की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। यह अविश्वास निराधार नहीं है। जिस सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है। वास्तविकता तो यह थी कि सीजीएल के अधिकांश प्रश्न पिछले प्रश्नपत्रों से हूबहू उठाए गए थे और चयनित 'खास' उम्मीदवारों को पहले से ही उन सवालों की कोचिंग दे दी गई थी, लेकिन सीआईडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से अवैध उगाही का दागदार इतिहास रहा है। ऐसे दागी अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों के अनुभव से विहीन अफसरों वाली सीआईडी महज सरकार की कठपुतली बनकर रह गई है।

उन्होंने कहा कि इसी कठपुतली एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपों की कोई जांच कराए बिना ही जानबूझकर एक बेहद कमजोर एफआईआर दर्ज की है, ताकि सत्ताधारी दल के राजनेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को सुरक्षित निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का घिनौना खेल खेल रही है। एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआईडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी।

श्री मरांडी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह महज कोई साधारण पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुनियोजित महाघोटाला है जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं के इशारे पर पैसों के बदले पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित किया जा सके। सबसे हैरानी और सीआईडी की नीयत पर शक पैदा करने वाली बात तो यह है कि जब यह तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है कि परीक्षा कराने वाली दागी एजेंसी के पीछे का मुख्य व्यक्ति अभय कुमार तिवारी खुद धोखाधड़ी के जरिए कई अन्य परीक्षाओं में नौकरियां पा चुका है, तो सीआईडी ने उन पुरानी परीक्षाओं के हेरफेर के मामले में अब तक कोई नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? सीआईडी जानबूझकर केवल छोटे उम्मीदवारों और निजी एजेंसियों को मोहरा बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे असली गुनाहगारों को छुआ तक नहीं जा रहा।

उन्होंने कहा कि सीआईडी का पिछला इतिहास हमेशा से सच को दबाने और समझौता करने वाला रहा है। ऐसे में राज्य के हर युवा और नागरिक का अब सरकार से सीधा सवाल है कि अगर उसके हाथ वाकई साफ हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है, तो वह इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप देती?

वहीं अपने दूसरे पोस्ट में श्री मरांडी ने कहा है कि झारखंड में आज सिपाही से लेकर एसपी तक हर कोई जानता है कि राज्य में पुलिस का असली नियंत्रण डीजीपी के पास नहीं, बल्कि मनोज कौशिक के पास है, जिनका अतीत कोयले के काले कारोबार और भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग एसपी रहते हुए उन पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका भंडाफोड़ तत्कालीन ईमानदार और कड़क आईजी मुरारीलाल मीणा ने किया था।

इसके बाद उन पर दूसरी गाज तब गिरी जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें दर्ज हुईं। शुरुआत में नीरज सिन्हा जैसे विवादास्पद अधिकारी (जिन्होंने खुद जेएसएससी घोटाले में फंसने के डर से हाल ही में इस्तीफा दे दिया) ने जांच की दिशा भटकाकर मामले को गोल-गोल घुमाने और रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब वही ईमानदार अफसर मुरारीलाल मीणा एसीबी के चीफ बनकर आए, तो रुकी हुई जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।

यह दूसरी बार था जब मनोज कौशिक कानूनी शिकंजे में फंसे; एसीबी की निष्पक्ष जांच में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने इन आरोपों की पुष्टि करते हुए, उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को सीधे पत्र लिखा। इन दो-दो ठोस आधिकारिक जांच रिपोर्टों और दागी कारनामों के बावजूद, आज आलम यह है कि पुलिस महकमे के सारे कामकाज और 'धंधे' का निर्देश अधिकारी डीजीपी से नहीं, बल्कि मनोज कौशिक से लेते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता से लेकर विपक्ष तक सब जानते हैं कि पुलिस के नियंत्रण में कोयला, बालू और पत्थर चोरी के कारोबार का पूरा कंट्रोल किसके हाथ में है और कौन इसे संचालित और मैनेज करवा रहा है। सरकार जानबूझकर सीआईडी और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे ही दागदार अफसरों को चुनकर बैठाती है ताकि वे कानून के प्रति नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं और उनके दलालों के नौकर बनकर काम करें। इसका जीता-जागता प्रमाण तब मिला जब सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जांच की दिशा भटका दी और सत्ता के दलालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में सीआईडी की तरफ से भ्रामक शपथ पत्र दिलवाकर पूरी जांच की हवा निकाल दी। सत्ता के मनमाफिक ये सारे गैर-कानूनी काम करके वह सरकार के सबसे बड़े चहेते बन गए हैं। मनोज कौशिक के इसी काले इतिहास, उन पर हुई दो-दो आधिकारिक जांचों और वर्तमान की सत्ता-परस्ती को देखते हुए यह साफ हो चुका है कि झारखंड में अब किसी को भी सीआईडी जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है।

बिग न्यूज:JPSC-JSSC विवाद पर बड़ी बैठक ,देवेन्द्रनाथ महतो गुट और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हो रही है बात चित

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों और सरकार के बीच शनिवार को एक और दौर की मह्त्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है।

JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच का 8-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कड़े सुरक्षा घेरे में स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच चुका है.शुक्रवार की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज की इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में JLKM नेता देवेन्द्रनाथ महतो पिछले 6 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया .

शुक्रवार को सरकार और छात्रों के दूसरे गुट के बीच हुई वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। हालांकि, दोनों ही पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालने के पक्ष में हैं।

देवेन्द्रनाथ महतो की बिगड़ती सेहत के बीच, आज की यह बैठक बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या आज की वार्ता से अभ्यर्थियों की मांगों पर कोई ठोस सहमति बन पाती है या गतिरोध यूं ही बरकरार रहेगा।

नोट: इस खबर से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए बने रहिए streetbuzz.co.in साथ।

रांची में बैठे प्रदर्शनकारियों से राहुल गांधी ने की बात, मांगों पर सीएम हेमंत से बात करने का दिलाया भरोसा

#jharkhand

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है। आज 14वें दिन भी स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से फोन पर बात की है और हर संभव मदद का भरोसा दिया है। बता दें कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नीत गठबंधन का एक घटक दल है।

छात्रों को दिया हर संभव मदद का भरोसा

छात्र नेताओं ने दावा किया कि गुरुवार देर शाम राहुल गांदी से फोन पर बातचीत हुई। धरना दे रहे छात्र नेताओं की राहुल गांधी से बातचीत रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के मोबाइल फोन के माध्यम से कराई गई। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वो इस मामले को लेकर सीएम हेमंत सोरेन से भी बात कर सकते हैं।

मांगों की सूची व्हाट्सएप पर मंगाई

ये बातचीत लगभग 10 मिनट तक चली। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा कि वे अपनी सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन उन्हें व्हाट्सएप पर भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पूरे मामले पर झारखंड सरकार से बात करेंगे और छात्रों की मांगों के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए।

क्या है छात्रों की मांगें?

प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए। उन्होंने जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया।

वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित

इधर, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक अधिवक्ता को शामिल किया गया। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के समक्ष केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें रखेंगे। पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद रहेंगे।

जेपीएससी-जेएससीसी परीक्षा विवाद पर डटे आंदोलकारी छात्र, सीएम हेमंत से वार्ता का इंतजार

#jpscjsccexamcontroversystudentstoholdtalkswith_government

झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तैयार

जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों आंदोलन के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। सरकार के साथ होने वाली बातचीत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में राज्य सरकार के साथ वार्ता होगी। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक वकील को शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के दौरान सभी मांगे और तथ्य केवल छात्र प्रतिनिधि ही सरकार के सामने रखेंगे।

वार्ता के प्रस्ताव के बाद भी नहीं आया बुलावा

सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अब तक छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर राष्ट्रभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र अपनी बात रख रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच।

-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

झारखंड सरकार युवाओं को दे रही रोजगार के अवसर; जेएसएससी सीजीएल-2023 के सफल अभ्यर्थियों ने संभाली जिम्मेदारी।

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित CGL-2023 परीक्षा में सफलता प्राप्त कर विभिन्न अंचलों में नियुक्त हुए अंचल निरीक्षक (सर्किल इंस्पेक्टर) और कानूनगो ने सोमवार को रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री से औपचारिक मुलाकात की। समाहरणालय स्थित सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में उपायुक्त ने नए अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।

सरकार की नीतियों का परिणाम

उपायुक्त ने सभी नव नियुक्त कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और युवाओं को रोजगार देने की प्रतिबद्धता का सुखद परिणाम है। उन्होंने जोर दिया कि प्रतिभाशाली अधिकारियों के आने से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी।

डीसी के 4 महत्वपूर्ण गुरुमंत्र:

उपायुक्त ने नव नियुक्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए चार प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:

सीखने की प्रवृत्ति: प्रशासनिक करियर की शुरुआत में निरंतर सीखना आवश्यक है। कभी भी अहंकार (ईगो) को अपने काम के बीच न आने दें।

क्षेत्रीय अनुभव: कागजी कार्यवाही के साथ-साथ फील्ड में जाकर भूमि संबंधी मामलों और राजस्व संग्रहण की बारीकियों को समझें।

जनता से व्यवहार: आम जनता के साथ शालीनता और धैर्य से पेश आएं। दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ईमानदारी: अपने कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता बरतें ताकि शासन की छवि उज्ज्वल बनी रहे।

अबुआ साथी: जनता के लिए नई पहल

कार्यक्रम के दौरान रांची जिला प्रशासन के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर 9430328080 (अबुआ साथी) का भी उल्लेख किया गया, जिसके माध्यम से जनता सीधे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकती है। उपायुक्त ने विश्वास जताया कि ये युवा अधिकारी राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सेतु का काम करेंगे।

उत्पाद सिपाही बहाली की दौड़ 10 सितंबर से फिर शुरू, पलामू के चियांकी केंद्र में परीक्षा नहीं |

Ranchi | 10-09-2024 : एडीजी मुख्यालय आरके मल्लिक ने कहा कि जेएसएससी द्वारा आयोजित उत्पाद सिपाही (JSSC Excise Constable) की बहाली के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा छह केंद्रों पर 10 सितंबर से शुरू होगी. वहीं, पलामू के चियांकी हवाई अड्डा स्थित केंद्र पर अब शेष शारीरिक दक्षता परीक्षा नहीं होगी. इस केंद्र के शेष अभ्यर्थियों, जिनकी परीक्षा तीन से नौ सितंबर 2024 तक होनी थी, वह अब बाकी के छह चयन पर्षद के केंद्रों पर ली जायेगी. यह परीक्षा 19-20 सितंबर तक होगी. क्योंकि 14 से 17 सितंबर तक अवकाश है.



झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: पेसा नियमावली 2025 को मंजूरी, JSSC परीक्षा नियमों में संशोधन और नई नियुक्तियों का रास्ता साफ

रांची: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के विकास, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट ने पेसा (PESA) नियमावली 2025 के गठन को स्वीकृति देकर अनुसूचित क्षेत्रों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है।

प्रमुख निर्णय और उनके प्रभाव:

1. नियुक्ति और रोजगार में तेजी: सरकार ने JSSC की मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर की परीक्षा संचालन नियमावलियों में आवश्यक संशोधन किए हैं, जिससे लंबित नियुक्तियों में तेजी आएगी। साथ ही, सीधी नियुक्ति हेतु नई आयु सीमा का निर्धारण और परिवहन विभाग में 21 मोटरयान निरीक्षकों (MVI) के पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।

2. कस्तूरबा विद्यालयों का कायाकल्प: राज्य के 21 कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास निर्माण के लिए ₹51.16 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, आकांक्षा कार्यक्रम के शिक्षकों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है।

3. सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर: दुमका और जमशेदपुर (बहरागोड़ा) में सड़कों के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के लिए लगभग ₹73 करोड़ के प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। वहीं, सरकारी आवासों और कार्यालयों के पुनर्विकास के लिए NBCC के साथ MoU को हरी झंडी मिली है।

4. लापरवाह डॉक्टरों पर कार्रवाई: कर्तव्य से अनधिकृत रूप से गायब रहने के कारण साहेबगंज की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ० मिनी सिन्हा और ओरमांझी की दंत चिकित्सक डॉ० रीमा को सेवा से बर्खास्त करने का कड़ा फैसला लिया गया है।

5. किसानों और पशुपालकों के लिए पहल: राँची के काँके स्थित राजकीय बेकन फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने के लिए हैदराबाद के राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान के साथ समझौता किया गया है। साथ ही बागवानी विकास के लिए बेंगलुरु के संस्थान से परामर्शी सेवा लेने पर सहमति बनी है।

हाईकोर्ट के फैसले से JSSC-CGL अभ्यर्थियों में खुशी की लहर!


CBI जांच की मांग वाली याचिका खारिज; रिजल्ट जारी करने का निर्देश मिलते ही रांची में जश्न

रांची, 4 दिसंबर 2025।

झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) के कथित पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर देने के बाद राज्यभर के हजारों अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। बुधवार को फैसला आने के कुछ ही घंटों के भीतर, राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जमा हो गए और जमकर जश्न मनाया।

जश्न और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया

खुशी का इजहार: अभ्यर्थियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर खुशी जाहिर की और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर अपनी खुशी बांटी।

राहत की सांस: अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से रिजल्ट जारी होने का इंतजार कर रहे थे, जिससे उनकी तैयारी और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे थे। हाईकोर्ट द्वारा रिजल्ट जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली है।

नई शुरुआत: कई अभ्यर्थियों ने इस फैसले को अपने 'करियर की नई शुरुआत' बताते हुए सरकार और आयोग से जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने की अपील की।

न्यायालय का फैसला

हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर शामिल थे, ने 3 नवंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मुख्य निर्णय: अदालत ने बुधवार को सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया और आयोग को परिणाम जारी करने का निर्देश दिया।

रोक: हालांकि, कोर्ट ने उन दस अभ्यर्थियों के रिजल्ट पर रोक लगा दी है, जिन्होंने कथित तौर पर नेपाल में रहकर परीक्षा की तैयारी की थी।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता समीर रंजन ने बहस की थी। उन्होंने सुनवाई के दौरान दावा किया था कि 22 सितंबर 2024 को आयोजित परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र लीक हुआ था। उनकी दलीलों में व्हाट्सएप चैट, संदिग्धों के बयान, नेपाल कनेक्शन और कथित भुगतान के सबूतों का हवाला दिया गया था।

अल्बर्ट एक्का चौक पर जुटे अभ्यर्थियों ने कहा कि हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से लंबे समय से अटकी भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है और हजारों युवाओं में नई उम्मीद जगी है।

सर्प संरक्षणकर्मी शिव खनाल सम्मानित