सनातन सुरक्षा सेना के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष बने डॉक्टर नितिन गुप्ता
मुंबई।  सनातन और सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पित संगठन 'सनातन सुरक्षा सेना ' ने महाराष्ट्र में अपने संगठन का विस्तार करते हुए डॉ नितिन गुप्ता को मुंबई / महाराष्ट्र का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह घोषणा संगठन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा आधिकारिक तौर पर की गई। डॉक्टर नितिन गुप्ता की यह नियुक्ति सनातन सुरक्षा सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत श्री शुभम गोस्वामी जी महाराज, राष्ट्रीय महामंत्री विकास सिंह ठाकुर और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर्यन वर्मा की विशेष संस्तुति (अनुशंसा) के आधार पर की गई है। शीर्ष नेतृत्व ने डॉक्टर गुप्ता के नेतृत्व कौशल और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा को देखते हुए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
डॉक्टर नितिन गुप्ता लंबे समय से समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए सक्रिय रहे हैं। पूर्व में उनके द्वारा किए गए कई महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों के कारण जनता के बीच उनकी एक मजबूत पकड़ है। इसके साथ ही, उन्हें एक प्रखर हिंदूवादी नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बड़े नेताओं में गिना जाता है।
इस नई जिम्मेदारी के मिलने पर डॉक्टर नितिन गुप्ता ने राष्ट्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे संगठन की उम्मीदों पर खरा उतरने और महाराष्ट्र में सनातन संस्कृति व सामाजिक सुरक्षा के कार्यों को और अधिक मजबूती देने का काम करेंगे। उनकी इस नियुक्ति पर भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सनातन सुरक्षा सेवा के सदस्यों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा द्वारा ‘स्टार्टअप फ्रंटियर 1.0’ कार्यशाला का उद्घाटन
मुंबई। ज्ञान को नवोन्मेषी समाधानों में, चुनौतियों को अवसरों में तथा विचारों को उद्योगों में रूपांतरित करने की क्षमता ही आज की आर्थिक प्रगति की वास्तविक शक्ति है। इसलिए विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान न रहकर नवाचार, बौद्धिक संपदा, स्टार्टअप्स तथा सामाजिक परिवर्तन के केंद्रों के रूप में विकसित हों, ऐसा प्रतिपादन मा. राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्माजी ने किया।यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग के अंतर्गत रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय तथा आई स्पार्क फाउंडेशन द्वारा आयोजित दिवसीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी ‘स्टार्टअप फ्रंटियर 1.0’ का उद्घाटन राज्यपाल के करकमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर, एचपी इंडिया की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक इप्सिता दासगुप्ता, कौशल विकास आयुक्त डॉ. अमित सैनी, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, राज्यपाल सचिवालय के सहसचिव एस. राममूर्ति, महाराष्ट्र राज्य नवाचार सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. श्रीकांत पाटील, व्यवसाय एवं प्रशिक्षण संचालनालय के संचालक सतीश सूर्यवंशी, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वैभव नारवडे तथा उद्योग जगत के गणमान्य व्यक्तियों, निवेशकों, मार्गदर्शकों, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर मा. राज्यपाल के करकमलों द्वारा मेडिकल लैब तथा एचपी क्रिएटिव गैरेज लैब का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का संदेश पढ़कर सुनाया। महाराष्ट्र के विद्यार्थियों के लिए उद्योग-संबंधित कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करने के उद्देश्य से रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय एवं आईआईटी मद्रास के बीच गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अंतर्गत ऑनलाइन शिक्षा, प्रमाणपत्र, इंटर्नशिप तथा मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। 'वर्टिव' कंपनी के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि से एक निःशुल्क कौशल विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। इसके अंतर्गत महाराष्ट्र के 1,500 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा मैकेनिकल शाखाओं के वर्ष 2026 में उत्तीर्ण तथा वर्ष 2027 में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण के अंतर्गत डेटा सेंटर ऑपरेशंस एवं इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट, क्रिटिकल पावर एवं कूलिंग सिस्टम्स, भौतिक सुरक्षा प्रणाली, ऑपरेशंस एवं मेंटेनेंस पद्धतियां तथा उद्योग मानकों से संबंधित पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से डेटा सेंटर तथा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तीव्र गति से विकसित हो रहे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप प्रदर्शनी में कृषि, शिक्षा, फिनटेक, डीपटेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) तथा अन्य उभरते क्षेत्रों के स्टार्टअप्स द्वारा विकसित नवोन्मेषी उत्पादों एवं प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप मार्गदर्शन विषयों पर परिचर्चाओं का भी आयोजन किया गया।
मोदी के बाद ,देश की जनता लौह पुरुष अमित शाह को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है
– श्रीनिवासानन्द महाराज

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे नाम रहे जो सिर्फ पद नहीं. युग का प्रतीक बन गए। वर्तमान गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का नाम उसी मुकाम पर पहुंच गया है। संगठन से लेकर सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर उनके निर्णयों ने भारत को आंतरिक रूप से मजबूत और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वासी बनाया है। यही कारण है कि 2024 के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

गृहमंत्री के रूप में सराहनीय कार्य

1. अनुच्छेद 370 की समाप्ति-कश्मीर का एकीकरण

5 अगस्त 2019 को अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A हटाने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। दशकों से चली आ रही "अलगाव की दीवार एक झटके में गिर गई। परिणामः कश्मीर अब पूरी तरह भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ निवेश बढ़ा, पत्थरबाजी रुकी, और पर्यटन 10 गुना बढ़ गया। एक राष्ट्र, एक संविधान

का सपना पूरा हुआ।

2. CAA - शरणार्थियों को नागरिकता, मानवता की जीत

नागरिकता संशोधन कानून 2019 के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता का रास्ता मिला। अमित शाह ने संसद में तर्क दिया कि ये कानून 'किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, देने के लिए है। ये फैसला सांस्कृतिक और मानवीय संवेदना का प्रतीक बना।

3. नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

"बाएं हाथ का आतंक" माने जाने वाले नक्सलवाद को अमित शाह ने जड़ से हिलाया। उनकी 'समर्पण और विकास नीति के तहत 2024 तक नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 90 से घटकर 38 रह गईी CRPF, BSF को आधुनिक हथियार और ड्रोन दिए गए। लाल गलियारा अब धीरे-धीरे विकास के गलियारे में बदल रहा है।

4. तीन तलाक कानून - मुस्लिम महिलाओं को न्याय

'तलाक-तलाक-तलाक" कहकर महिलाओं को छोड़ देने की कुप्रथा पर अमित शाह ने कानून बनवाया। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 से लाखों महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सम्मान मिला। से फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम था।

5. आंतरिक सुरक्षा का नया मॉडल

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बल को ड्रोन, बॉडीकैम, फॉरेंसिक लैब से लैस किया।

सीमा सुरक्षा: पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग, लेजर वॉल लगाई। घुसपैठ 60% घटी।

NIA को ताकत : NIA को आतंक, फंडिंग, साइबर क्राइम के केस लेने का अधिकार मिला। अब देश में आतंकी हमले नगण्य हो गए हैं।

6. सहकारिता मंत्रालय गाँव की अर्थव्यवस्था को बल

अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। उनके नेतृत्व में 2 लाख नई PACS, डिजिटल सहकारी बैंक और "सहकार से समृद्धि का मॉडल बना। गाँव का किसान अब सीधे मंडी से जुड़ रहा है।

निष्कर्ष: पीएम पद के लिए क्यों उपयुक्त?

अमित शाह में 3 गुण हैं जो प्रधानमंत्री पद के लिए जरुरी हैं

1. निर्णय क्षमताः 370 हो या CAA, फैसला तुरंत और पक्का।

2. संगठन कौशल : भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय उन्हीं को।

3. राष्ट्र प्रथम की सोच: हर नीति का केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा और एकता।

गृहमंत्री रहते हुए उन्होंने साबित किया कि वो देश की आंतरिक रीढ़ हैं। ऐसे नेता ही भारत को 2047 तक विकसित भारत' बना सकते हैं। आज देश जिस मजबूती और दूरदर्शिता की तलाश में है, वो अमित शाह में दिखती है। इसीलिए वो प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं।
ऐश्वर्य त्रिपाठी हृदयांगन साहित्यिक संस्था के उपाध्यक्ष मनोनीत
मुंबई। साहित्यिक, सामाजिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था हृदयांगन कोर कमेटी ने संस्था का विस्तार करते हुए हृदयांगन संस्था समूह के प्रति जागरूक एवं समर्पित भाव देखते हुए एवं कुछ सदस्यों की संस्तुति के आधार पर युवा साहित्यकार ऐश्वर्य त्रिपाठी को उपाध्यक्ष मनोनीत किया।राष्ट्रीय मिडिया सचिव विनय शर्मा दीप ने बताया कि आजीवन सदस्य ऐश्वर्य को तत्काल प्रभाव से उपाध्यक्ष नामित किया गया।उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने ऐश्वर्य त्रिपाठी के उज्जवल भविष्य की कामना किया।डा० विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू
राष्ट्रीय अध्यक्ष हृदयांगन संस्था समूह एवं संयोजिका हृदयांगन विथिका तथा संस्थापक अध्यक्ष एवं महासचिव विधु भूषण त्रिवेदी ने बताया कि नवनियुक्त उपाध्यक्ष ऐश्वर्य त्रिपाठी ने MBA (HR) हैं जो मूल रूप से कानपुर नगर तथा वर्तमान में बेंगलुरु के रिलायंस में HR Manager के पद पर कार्यरत हैं।परिवार में पिता सी पी त्रिपाठी अधिवक्ता,माता धारा त्रिपाठी रिटायर्ड प्रधानाध्यापिका,पत्नी स्वर्णिमा गृहिणी एवं बिटिया अद्रिती हैं।कविताएं लिखने का क्रम विद्यालय के समय से प्रारंभ हुआ तथा साहित्य और संगीत प्रेम के पीछे नाना स्व. कोमल एवं नानी स्व.विंध्यवासिनी त्रिवेदी की साहित्यिक पृष्ठभूमि,माता धारा त्रिपाठी एवं मौसी अनुपम शुक्ला का संगीतमय सानिध्य रहा।हृदयांगन से सन् 2021 से जुड़े तथा उसी वर्ष गुरु पूर्णिमा के अवसर पर तथा हिंदी दिवस के ऑनलाइन कवि सम्मेलन में संस्थापक अध्यक्ष से सम्मान प्राप्त हुआ।बेंगलुरु में रहते हुए Open Mics के माध्यम से काव्य पाठ में सक्रिय रहे। राष्ट्रीय-सामाजिक विषयों तथा मानवीय संवेदनाओं पर कविताएं लिखने का शौक है तथा लेखन शैली अधिकांशतः छंद मुक्त कविताओं की है।
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जगाया अखंड भारत का संकल्प  : आचार्य पवन त्रिपाठी
मुंबई। भारतीय जनता युवा मोर्चा, मुंबई के तत्वावधान में आज सांताक्रुज (पूर्व) स्थित 'पब्लिक हाई स्कूल एंड जूनियर कॉलेज' में एक भव्य 'विद्यार्थी सम्मेलन' का सफल आयोजन भाजपा मुंबई अध्यक्ष विधायक अमित साटम  के मार्गदर्शन और भाजयुमो मुंबई अध्यक्ष दीपक सिंह के नेतृत्व में किया गया। यह विशेष अधिवेशन राष्ट्रभक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जयंती के गौरवमयी अवसर पर आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन के दौरान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के राष्ट्र निर्माण और जनहित में किए गए योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुसार दीप प्रज्वलन और 'सरस्वती वंदना' के साथ अत्यंत गरिमामय माहौल में हुआ। इस अवसर पर भाजपा मुंबई महामंत्री आचार्य पवन त्रिपाठी, मुंबई के कोने-कोने से भारी संख्या में आए युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सम्मेलन को संबोधित करते हुए  भाजपा मुंबई महामंत्री आचार्य पवन त्रिपाठी एवं भाजयुमो मुंबई के अध्यक्ष दीपक सिंह ने युवाओं का मार्गदर्शन किया और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के कार्यों के बारे में एवं आधुनिक युग में डिजिटल शिक्षा की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व वक्ता आचार्य पवन त्रिपाठी ने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आत्मा थे। उन्होंने ही देश को 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे' का सिंहनाद देकर अखंड भारत का संकल्प जगाया था। आज कश्मीर से धारा 370 का हटना और देश का पूरी तरह एकीकृत होना, डॉ. मुखर्जी के उसी ऐतिहासिक संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है। इस भव्य विद्यार्थी सम्मेलन के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रीय भावना से जोड़ना एक सराहनीय कार्य है। डॉ. मुखर्जी का जीवन और भाजयुमो मुंबई का यह प्रयास हर युवा को यही सीख देता है कि राष्ट्रहित से ऊपर कुछ भी नहीं है।" इस अवसर पर भाजयुमो मुंबई अध्यक्ष दीपक सिंह ने कहा कि आज का भारत तकनीक और डिजिटल क्रांति के दम पर वैश्विक पटल पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। डॉ. मुखर्जी के कारण ही कश्मीर से परमिट राज खत्म हुआ और अब हमारे गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर से धारा 370 को समाप्त किया ल, जिससे आज सभी भारतीय कश्मीर की धरती पर आसानी से आ जा सकते हैं। आज के इस विद्यार्थी सम्मेलन के माध्यम से हमारा उद्देश्य युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना और उनमें राष्ट्रवाद की भावना को और अधिक सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक अखंड भारत और सशक्त युवा पीढ़ी का जो सपना देखा था, उसे साकार करने के लिए युवा मोर्चा पूरी तरह प्रतिबद्ध है। छात्रों और कार्यकर्ताओं का यह अपार उत्साह देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब मिलकर एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान देंगे। सम्मेलन में डिजिटल शिक्षा के बढ़ते अवसरों, नई शिक्षा नीति और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकारी योजनाओं पर भी विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का  समापन हुआ।
'लोककलाओं के उन्नयन के लिए सम्मानित हुए शिवपूजन शुक्ल' 
गोण्डा।  अवधी संस्कृति एवं लोककलाओं के विकास में योगदान के लिए ‘वाग्धारा नवरत्न सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया है। मुंबई में शनिवार को उन्हें यह सम्मान तेलंगाना के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल के हाथों प्रदान किया गया।

शिवपूजन शुक्ल  तरबगंज तहसील के  जमथा गांव के निवासी है। उन्होंने आकाशवाणी दूरदर्शन से  अवधी लोकगीत एवं भजन गायक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। वह अवधी ग्राम्य गीत एवं प्रायः लुप्त होते जा रहे पारंपरिक संस्कार गीतों व लोकनाट्य नौटंकी का प्रशिक्षण देने के लिए निःशुल्क कार्यशालाएं भी चलाते हैं। महाकुंभ प्रयागराज, सीतापुर, लखनऊ सहित अनेक शहरों में कार्यशालाएं आयोजित कर चुके हैं। जिनमें बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है।  अवधी लोकगीतों के प्रचार-प्रसार के लिए वह मारीशस, इंडोनेशिया, जकार्ता, बाली और नेपाल आदि देशों की यात्राएं कर चुके हैं। उन्हें ‘चरनवाँ कै धूर’ पुस्तक के लिए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से मलिक मोहम्मद जायसी सम्मान प्राप्त हो चुका है।
जवाहर नवोदय विद्यालय मनकापुर में कक्षा-6 प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू
*गोण्डा 09 जून 2026*  -  पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मनकापुर, गोण्डा में शैक्षिक सत्र 2027-28 के लिए कक्षा-6 में प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण 07 जुलाई  से प्रारम्भ हो गया है। इच्छुक एवं पात्र छात्र-छात्राएं 31 जुलाई  तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

प्रभारी प्राचार्य लालता प्रसाद शर्मा ने बताया कि आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से वेबसाइट https://cbseitms.rcil.gov.in/nvs पर स्वीकार किए जाएंगे। जनपद गोण्डा के निवासी तथा किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में शैक्षिक सत्र 2026-27 के दौरान कक्षा-5 में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं आवेदन के पात्र हैं।

उन्होंने बताया कि अभ्यर्थी का जन्म 01 मई 2015 से 31 जुलाई 2017 (दोनों तिथियां सम्मिलित) के बीच होना अनिवार्य है। पात्र अभिभावकों एवं छात्र-छात्राओं से समय रहते ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की गई है, ताकि अंतिम तिथि के निकट होने वाली तकनीकी असुविधाओं से बचा जा सके।
मुंबई की 15 वर्षीय लेखिका वृत्ति अविचल ने आठ पुस्तकें लिखकर बनाया रिकॉर्ड
मुंबई।  जिस उम्र में अधिकांश किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई और सामान्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में 15 वर्षीय वृत्ति अविचल ने लेखन, सार्वजनिक वक्तृत्व, कला और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। पहली किताब 13 की उम्र में लिखी । मुंबई की इस प्रतिभाशाली किशोरी ने एक ही दिन में अपनी आठ अंग्रेज़ी पुस्तकों का प्रकाशन कर इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। वृत्ति अविचल की प्रकाशित पुस्तकों में Divided by Design, Light After Shadows, The Darkest Chapter, The Valley that Broke Hearts, Village to Verdict, Arabella’s Journey from Shadows to Sunshine, The Yellow Line और The Living Symphony शामिल हैं। इन पुस्तकों में समानता, न्याय, शांति, संघर्ष से उबरने की क्षमता, भारतीय संस्कृति और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। लेखन के साथ-साथ वृत्ति अविचल एक प्रभावशाली सार्वजनिक वक्ता (पब्लिक स्पीकर) के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने TEDx Youth Palm Road के मंच से अपने विचार साझा किए। इसके अलावा उन्होंने 10वें रेडियो चिको स्विट्जरलैंड वर्ल्ड पीस वीक के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। उन्हें कॉमनवेल्थ एसे प्रतियोगिता में रजत पदक (सिल्वर मेडल) से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त कला, वाद-विवाद, निबंध लेखन, पॉडकास्टिंग और मोनो एक्टिंग जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए हैं।
साहित्य और शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वृत्ति अविचल अपनी पुस्तकों का दान मुंबई और पुणे के विभिन्न विद्यालयों के पुस्तकालयों में भी कर चुकी हैं। साहित्य और रचनात्मकता को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानने वाली वृत्ति अविचल आगे भी लेखन, सार्वजनिक वक्तृत्व और कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य करती रहना चाहती हैं।
साहित्य और शिक्षा से इतर खेलों में भी उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियां रही हैं। वह राज्य स्तरीय थ्रोबॉल खिलाड़ी हैं और वर्ष 2024 में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। कम उम्र में हासिल की गई उनकी ये उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि रचनात्मकता, समर्पण और सामाजिक सरोकार के माध्यम से युवा पीढ़ी भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।
भारी बारिश के दौरान उत्तर भारतीय मोर्चा ने किया छतरी वितरण
भायंदर। पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण जहां मीरा-भायंदर शहर का जनजीवन बुरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह जलजमाव की स्थिति बनी हुई है, इस दौरान बारिश से प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद के साथ-साथ भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के मीरा-भायंदर जिलाध्यक्ष संतोष दीक्षित के नेतृत्व में इंद्रलोक, रामदेव पार्क, लक्ष्मी पार्क की कई हाउसिंग सोसायटियों के सुरक्षा रक्षकों तथा अन्य जरूरतमंदों के बीच छतरी का वितरण किया गया। इस दौरान उत्तर भारतीय मोर्चा के पदाधिकारी राज पाठक, राम अवतार राय, आशीष द्विवेदी, संग्राम सिंह, चंद्रकांत दुबे, राजेश शुक्ला आदि उपस्थित रहे। संतोष दीक्षित ने कहा कि मीरा-भायंदर के विधायक नरेंद्र मेहता, महापौर डिंपल विनोद मेहता, भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप जैन, उपमहापौर ध्रुवकिशोर पाटिल, मनपा स्थायी समिति के सभापति हसमुख गहलोत के मार्गदर्शन में उत्तर भारतीय मोर्चा की समूची टीम अतिवृष्टि के इस संकट भरे दौर में समूचे शहर में लोगों को हरसंभव मदद पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर जुटी हुई है।
राष्ट्रवाद और छात्र आंदोलन को नई दिशा देते एबीवीपी के 78 वर्ष
  – रवि रमेशचंद्र शुक्ल, एसोसिएट प्रोफेसर, जेएनयू

छात्र शक्ति, राष्ट्र शक्ति" केवल एक नारा नहीं, बल्कि विद्यार्थी परिषद के संपूर्ण आंदोलन का मूल दर्शन है, जो छात्रों को 'कल के नहीं, बल्कि आज के नागरिक' के रूप में स्थापित करता है। भारत के इतिहास में युवा और विशेषकर छात्र आंदोलनों का एक विशिष्ट और गौरवशाली स्थान रहा है। यह परंपरा आधुनिक युग की देन नहीं है, बल्कि इसके सूत्र सुदूर अतीत में तक्षशिला विश्वविद्यालय के उन विद्यार्थियों से जुड़ते हैं, जिन्होंने नंद वंश के कुशासन के विरुद्ध और सिकंदर के आक्रमण से राष्ट्र की रक्षा के लिए एक एकीकृत छात्र आंदोलन का सूत्रपात किया था। उस ऐतिहासिक आंदोलन के मूल में सांस्कृतिक-आध्यात्मिक राष्ट्रवाद की चेतना, राष्ट्र की एकता और सुशासन की स्थापना सर्वोपरि थी। इतिहास गवाह है कि छात्र सदैव परिवर्तन और युगांतरकारी क्रांतियों के उत्प्रेरक रहे हैं। यद्यपि छात्र आंदोलनों का नेतृत्व कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों से होता है, किंतु उनके सरोकार केवल अकादमिक परिसरों तक सीमित नहीं होते। विद्यार्थी समाज के सजग प्रहरी, नीति-निर्माता और जिम्मेदार नागरिक होते हैं; इसलिए राष्ट्र का हर सामाजिक, सांस्कृतिक या विधिक निर्णय उन्हें सीधे प्रभावित करता है। स्वतंत्रता के पश्चात देश के छात्र परिदृश्य पर एक बड़ा वैचारिक शून्य और असंतोष देखा गया। तत्कालीन समय में कम्युनिस्ट और कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन सक्रिय थे, किंतु उनके नेताओं और सदस्यों की अत्यधिक राजनीतिक महत्वाकांक्षा तथा दलीय राजनीति में सीधे संलिप्तता ने सामान्य छात्रों को निराश किया। ऐसे में एक ऐसे छात्र संगठन की आवश्यकता तीव्रता से महसूस की गई, जो दलीय राजनीति से सर्वथा मुक्त हो और जिसका ध्येय केवल सत्ता-लोलुपता न होकर राष्ट्रीय पुनर्निर्माण, सेवा और राष्ट्रभक्ति हो। इसी वैचारिक मंथन के परिणामस्वरूप 5 जून 1948 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नींव पड़ी, जिसकी औपचारिक घोषणा 'पाञ्चजन्य' पत्रिका के माध्यम से देश के युवाओं के समक्ष की गई। 9 जुलाई 1949 को इसे आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया। अंबाला में इसके पहले अधिवेशन के साथ प्रोफेसर ओम प्रकाश बहल इसके प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री केशव देव वर्मा प्रथम राष्ट्रीय महासचिव बने। विद्यार्थी परिषद की सांगठनिक यात्रा और वैचारिक विस्तार में वर्ष 1967 एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब प्राध्यापक यशवंतराव केलकर इसके अध्यक्ष बने। अपनी दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता से उन्होंने परिषद की कार्यपद्धति का खाका खींचा, जिसके कारण उन्हें संगठन का 'मुख्य वास्तुकार' (चीफ आर्किटेक्ट) माना जाता है। उन्होंने छात्र-शिक्षक समन्वय और नि:स्वार्थ राष्ट्रसेवा को संगठन के मूल में रखा। वर्तमान में एबीवीपी देश ही नहीं, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा और दीर्घकालिक सक्रिय छात्र आंदोलन बन चुका है। संगठन का वैचारिक ढांचा तीन स्तंभों पर टिका है: 'ज्ञान, शील और एकता'। यह त्रयी केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के भीतर चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना का संचार करती है। परिषद की कार्यपद्धति को तीन मुख्य आयामों में विभाजित किया जा सकता है: रचनात्मक (रचनात्मक कार्य): सामाजिक सेवा, साक्षरता अभियान और सामुदायिक परियोजनाएं। आंदोलनात्मक (सकारात्मक संघर्ष): अकादमिक विसंगतियों और राष्ट्रीय मुद्दों के विरुद्ध लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण विरोध। प्रतिनिधित्वपरक (प्रतिनिधित्व): छात्र संघों और विधिक निकायों के माध्यम से विद्यार्थियों की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाना। यह संगठन संवेदनशीलता (छात्रों की स्थानीय समस्याओं का समाधान), स्पष्टता (धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित वैचारिक रुख) और दृष्टि (भारत को पुन: 'विश्व गुरु' के रूप में स्थापित करने का संकल्प) के त्रिकोण पर काम करता है। इसके अतिरिक्त, 'वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन ऑफ स्टूडेंट्स एंड यूथ' (WOSY) के माध्यम से पिछले 77 वर्षों में इसने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय की सांस्कृतिक व राजनीतिक चेतना को प्रभावित किया है।
एबीवीपी ने वैश्विक छात्र राजनीति की दो सबसे बड़ी भ्रांतियों को तोड़ा है। पहली भ्रांति यह थी कि छात्रों को केवल 'भविष्य का नागरिक' मानकर नीति-निर्धारण से दूर रखा जाता था। दूसरी भ्रांति यह कि छात्र आंदोलनों को नकारात्मक और उपद्रवी (न्यूसेंस पावर) समझा जाता था। परिषद ने नारा दिया कि छात्र आज के नागरिक हैं और छात्र शक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। किंतु यह सदैव दलीय राजनीति से पूर्णतः अलिप्त रहा है। दलीय राजनीति से ऊपर उठने का अर्थ यह कतई नहीं है कि संगठन सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं के प्रति तटस्थ है। संगठन का मानना है कि पूर्णतः सामाजिक गतिविधियां भी राजनीति से अछूती नहीं रह सकतीं, क्योंकि देश के नागरिक होने के नाते छात्र सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के प्रति जवाबदेह हैं। किंतु, एबीवीपी किसी भी राजनीतिक दल की कठपुतली या विंग (प्रकोष्ठ) नहीं है। सत्ता की राजनीति या दलीय हित किसी सामाजिक संगठन का केंद्र बिंदु नहीं हो सकते। आपातकाल का संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के गीतों और सांस्कृतिक चेतना का एक बड़ा हिस्सा वास्तव में राष्ट्रीय पहचान की खोज तथा औपनिवेशिक दासता से दमित भारतीय संस्कृति को पुनः गौरव दिलाने का एक अनवरत प्रयास है। इतिहास गवाह है कि औपनिवेशिक काल के दौरान भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण और औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध संघर्ष, दोनों ही जनमानस द्वारा अपनी खोई हुई राष्ट्रीय पहचान को खोजने की सामूहिक अभिव्यक्ति थे। परिषद के गीत अपने समय की सामाजिक चुनौतियों से गहराई से जुड़े रहे हैं, जिसके कारण यह संगठन केवल एक छात्र संघ न रहकर समय के साथ एक व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन में परिवर्तित हो गया। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 'आपातकाल' (1975-77) का दौर सबसे अंधकारमय अध्याय माना जाता है। उस दमनकारी कालखंड में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने दो मोर्चों पर एक साथ ऐतिहासिक संघर्ष किया: पहला, अपने कार्यकर्ताओं और पूर्णकालिक संगठन मंत्रियों के मनोबल को जीवित रखना; और दूसरा, देश में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए जनमत को लामबद्ध करना। संगठन इस राष्ट्रव्यापी संघर्ष में 'लोक संघर्ष समिति' के एक अत्यंत सक्रिय अंग के रूप में उभरा। इस दौरान अरुण जेटली जैसे परिषद के कई शीर्ष कार्यकर्ताओं को महीनों जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े, वहीं अनगिनत कार्यकर्ताओं ने भूमिगत (अंडरग्राउंड) रहकर दमनकारी नीतियों के खिलाफ अलख जगाए रखी। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और तानाशाही के विरुद्ध संघर्ष, दोनों ही भारत की 'चिति' (सामूहिक चेतना) को जीवंत रखने के प्रयास थे। वर्ष 1977 में जब इस कठोर और क्रूर तानाशाही युग का अंत हुआ, तब देश के युवाओं ने स्वतंत्रता की खुली हवा में सांस ली। आपातकाल के बाद के इस दौर में लोकतंत्र के प्रति एक नई उम्मीद जगी और अधिकारों तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता पुनर्जीवित हुई। युवा एक बार फिर सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के अपने मूल मिशन में जुट गए। यद्यपि आपातकाल के बाद का राजनीतिक दौर (1977) कुछ हद तक राजनीतिक अस्थिरता से प्रभावित रहा, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा सामाजिक सुधारों और हाशिए के वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयास उनकी सरकार के आंतरिक राजनीतिक अंतर्विरोधों के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो सके। इस अस्थिर माहौल के बीच भी विद्यार्थी परिषद ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। संगठन ने समाज में समता (समानता) और बंधुत्व को बढ़ावा देने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त की। साथ ही, कार्यकर्ताओं को सचेत किया कि वे तात्कालिक या अल्पकालिक लाभ के प्रलोभनों में न आएं, क्योंकि ऐसे लाभों का कोई स्थायी मूल्य नहीं होता। राष्ट्र निर्माण की इस महायात्रा में युवाओं को 'समानता, न्याय और बंधुत्व' के संवैधानिक व शाश्वत आदर्शों के लिए बिना थके निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि एक सुदृढ़ और समृद्ध भारत का स्वप्न साकार हो सके।
अंततः, विद्यार्थी परिषद की दो अनूठी संरचनात्मक विशेषताएं इसे अन्य संगठनों से भिन्न और स्थायी बनाती हैं। पहली है इसकी 'संगठन मंत्री' (पूर्णकालिक विस्तारक) प्रणाली, जो दलीय छात्र राजनीति के क्षणिक नेतृत्व चक्र के विपरीत संगठन को दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिरता प्रदान करती है। दूसरी विशेषता है 'गुरु-शिष्य' (शिक्षक-छात्र) समन्वय, जो शैक्षणिक परिवार की अवधारणा को जीवंत करता है। शिक्षा व्यवस्था में 'समरसता, समता और अमानता' (सौहार्द, समानता और समत्व) के मूल्यों को समाहित करते हुए यह आंदोलन आज भी राष्ट्र के पुनर्निर्माण और युवाओं के समग्र सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
संघ परिवार के अन्य सभी संगठनों की तरह, एबीवीपी (ABVP) के समर्पित कार्यकर्ताओं का दल हमेशा सभी राहत गतिविधियों में सबसे आगे रहता है, और किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय तुरंत अपनी सेवाएं देता है। तेजस्वी सूर्या के शब्दों में 'चाहे 1977 में आंध्र प्रदेश में आए चक्रवात के दौरान राहत कार्य में भागीदारी हो, एबीवीपी के कार्यकर्ता सबसे पहले पहुंचने वालों में से होते हैं, जो पीड़ितों की मदद करते हुए दिखाई देते हैं।' शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के लिए 78 वर्ष से अनवरत संघर्ष करने वाला यह विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। आज परिषद के बिना छात्र जीवन लगभग असंभव हो गया है।