जूनोटिक रोगों से मुकाबले को यूपी तैयार, पशु चिकित्सकों के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण शुरू
- 75 जिलों में तैयार होंगे 150 मास्टर ट्रेनर्स, रोगों की निगरानी, रिपोर्टिंग और नियंत्रण व्यवस्था होगी और मजबूत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जूनोटिक (पशुजन्य) एवं अन्य प्राथमिकता वाले पशु रोगों की रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण के लिए पशुपालन विभाग ने राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (Training of Trainers-TOT) कार्यक्रम की शुरुआत की है। 9 और 10 जुलाई तक होटल गोल्डन ट्यूलिप, लखनऊ में आयोजित इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग झपाइगो (Jhpiego) द्वारा GHS-RISE परियोजना के अंतर्गत प्रदान किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पशुपालन विभाग के विशेष सचिव देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने किया। उन्होंने कहा कि जूनोटिक रोगों की समय पर पहचान, निगरानी और रिपोर्टिंग को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। संभावित एवं संदिग्ध मामलों की शीघ्र सूचना मिलने से रोगों के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के तहत तैयार किए जा रहे मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जनपदों में अन्य पशु चिकित्सकों एवं पैरा-वेटरिनरी कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे राज्यभर में रोगों की निगरानी, रिपोर्टिंग और नियंत्रण प्रणाली और अधिक प्रभावी बनेगी।
पहले चरण के इस प्रशिक्षण में प्रदेश के 36 जिलों से दो-दो सरकारी पशु चिकित्सक भाग ले रहे हैं। वहीं, 16 और 17 जुलाई को शेष 39 जिलों के पशु चिकित्सकों के लिए दूसरा राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। दोनों चरणों के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए कुल 150 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे।
प्रशिक्षण का उद्देश्य सरकारी पशु चिकित्सकों की तकनीकी दक्षता बढ़ाना है, ताकि वे जूनोटिक एवं अन्य प्राथमिकता वाले पशु रोगों की शीघ्र पहचान, प्रारंभिक निदान, निगरानी, रिपोर्टिंग, रोकथाम और नियंत्रण की प्रक्रिया को वैज्ञानिक एवं प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
दो दिवसीय प्रशिक्षण में आईवीआरआई, बरेली, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थानों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसमें हाई पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लुएंजा (HPAI), लेप्टोस्पायरोसिस, जापानी इंसेफेलाइटिस, बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस, रेबीज, क्रीमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF), एन्थ्रेक्स, स्क्रब टाइफस, ग्लैंडर्स, लम्पी स्किन डिजीज, ब्रुसेलोसिस, साल्मोनेलोसिस तथा डर्मेटोफाइटोसिस जैसे महत्वपूर्ण रोगों पर विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान रोगों के कारण, लक्षण, संदिग्ध एवं पुष्ट मामलों की पहचान, रोकथाम एवं नियंत्रण, रोग निगरानी एवं रिपोर्टिंग प्रणाली, प्रयोगशाला जांच, जैव सुरक्षा (बायोसेफ्टी) तथा नमूनों के सुरक्षित संग्रह, पैकेजिंग और परिवहन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक डॉ. संगीता तिवारी, संयुक्त निदेशक (रोग नियंत्रण) डॉ. विवेकानन्द गंगवार, झपाइगो के स्टेट लीड डॉ. संजय त्रिपाठी, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ तथा प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सरकारी पशु चिकित्सक उपस्थित रहे।
पशुपालन विभाग के अनुसार यह पहल 'वन हेल्थ (One Health)' दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए राज्य में पशु एवं मानव स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी तथा भविष्य में जूनोटिक रोगों के प्रकोप की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
4 hours ago
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