काशी से शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री योगी ने लॉन्च की शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा लाभ

वाराणसी/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ की शुरुआत करते हुए प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं उनके आश्रितों को कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने इसी अवसर पर 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति छात्र 1,200 रुपये की धनराशि भी हस्तांतरित की। यह राशि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी की खरीद के लिए दी गई है।
कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत 10 लाख शिक्षकों एवं संविदा कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुरक्षा पैकेज में ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर, स्थायी दिव्यांगता कवर, एयर एक्सीडेंट कवर, बच्चों की शिक्षा सहायता तथा पुत्रियों के विवाह के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान शामिल हैं।
इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाता, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग थी, जिसे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने पूरा किया है।
संदीप सिंह ने बताया कि 2017 में प्रदेश में स्कूल ड्रॉपआउट दर लगभग 15 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में घटकर 3 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का कार्य किया है। साथ ही सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को इंटरमीडिएट (12वीं) तक उच्चीकृत किया जा चुका है और जिन विकासखंडों में ऐसे विद्यालय नहीं हैं, वहां नए विद्यालय स्थापित किए जाएंगे।कार्यक्रम के दौरान ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय योजना’ के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं प्रधानाध्यापकों को स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को डीबीटी से भेजेंगे 1200 रूपये
—पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर से मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शुभांरभ करेंगे

लखनऊ /वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों व उनके परिजनों को कैशलेस चिकित्सा योजना की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में आयोजित कार्यक्रम में कुछ ही देर में प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर, स्टेशनरी आदि के लिए प्रति विद्यार्थी 1200 रुपये डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजेंगे।

इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री संदीप सिंह तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) की मंत्री गुलाब देवी भी मौजूद रहेगी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 10 लाख शिक्षकों व संविदा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इससे पात्र कार्मिकों को अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ व हरित विद्यालयों के 12 प्रधानाचार्यों को सम्मानित भी करेंगे।

बताते चले 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' के लागू होते ही प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। इस बड़ी योजना में नियमित शिक्षकों के साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के पात्र कार्मिकों को भी शामिल किया गया है।

बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक हेमंत राव के अनुसार, मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा सुविधा से वाराणसी मंडल के 7,417 बेसिक विद्यालयों में कार्यरत कुल 66,205 पात्र कर्मी सीधे लाभांवित होंगे।——शिक्षा, जन-कल्याण और विकास के नए संकल्पों को नई गति मिलेगी

उधर,पंडित दीनदयाल उपाध्याय हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया के अधिकृत अकाउंट पर लिखा कि

आज, बाबा श्री विश्वनाथ जी की पवित्र नगरी काशी और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट से शिक्षा, जन-कल्याण और विकास के नए संकल्पों को नई गति मिलेगी।

वाराणसी में, 12 लाख शिक्षकों/गैर-शिक्षण कर्मचारियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने वाली 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' की शुरुआत,डीबीटी के ज़रिए 1.10 करोड़ छात्रों के अभिभावकों के खातों में प्रति छात्र 1,200 रूपये का ट्रांसफर, 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर और राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए स्वच्छ और हरित स्कूलों के प्रधानाचार्यों/हेडमास्टरों को सम्मानित करने का कार्यक्रम होगा।
यूपी में साइबर अपराधियों पर डीजीपी का बड़ा प्रहार: 7 दिवसीय 'ऑपरेशन साइ-वज्र' का ऐलान, 530 करोड़ रुपये की साइबर ठगी रोकी गई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। डीजीपी ने प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर 7 दिवसीय विशेष अभियान "ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)" चलाने के निर्देश दिए। अभियान का उद्देश्य साइबर अपराधियों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई, साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक और पीड़ितों को जल्द राहत दिलाना है।

बैठक में पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम बी.के. सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक पवन कुमार, सभी कमिश्नरेट और जनपदों के वरिष्ठ अधिकारी, साइबर सेल, साइबर थानों के प्रभारी तथा साइबर मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

साइबर अपराध नियंत्रण बना डीजीपी की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल

बैठक में डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप साइबर अपराध नियंत्रण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कार्यभार संभालने के बाद निर्धारित 10 प्रमुख प्राथमिकताओं में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण को प्रमुख स्थान दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर पुलिसिंग, तकनीकी क्षमता, साइबर इंटेलिजेंस और पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था को मजबूत करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाई है।

15 महीनों में बड़ी कार्रवाई

बैठक के दौरान 1 अप्रैल 2025 से 30 जून 2026 तक की उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इस अवधि में प्रदेश पुलिस ने:

2,94,024 संदिग्ध मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए।
1,81,405 मोबाइल उपकरण (IMEI) ब्लॉक किए।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में 530 करोड़ रुपये की धनराशि पर Lien/Hold लगाकर उसे साइबर अपराधियों तक पहुंचने से रोका।

डीजीपी ने इन उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों को और अधिक तेज, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जाए।

शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर

डीजीपी ने निर्देश दिए कि साइबर अपराध पीड़ितों की शिकायतों का पंजीकरण पूरी पारदर्शिता और तेजी से किया जाए। तकनीकी कारणों से लंबित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि ठगी की गई धनराशि अपराधियों के खातों तक पहुंचने से पहले सुरक्षित की जा सके।

उन्होंने सभी जिलों और कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक निर्देश भी दिए।

संदिग्ध मोबाइल, बैंक खातों और तकनीक पर रहेगा फोकस

बैठक में निर्देश दिए गए कि साइबर अपराध में प्रयुक्त संदिग्ध मोबाइल नंबर, मोबाइल उपकरण, बैंक खाते और अन्य तकनीकी संसाधनों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाए। साइबर इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई को और मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया।

पीड़ितों को पैसा लौटाने के लिए MRM व्यवस्था

बैठक में भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विकसित Money Restoration Module (MRM) की विस्तार से जानकारी दी गई।

इस मॉड्यूल के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ित अपनी होल्ड की गई धनराशि वापस पाने के लिए ऑनलाइन अनुरोध कर सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद बैंक नियमानुसार धनराशि वापस करता है। 50 हजार रुपये तक की राशि की बहाली के लिए एफआईआर या कोर्ट आदेश आवश्यक नहीं है, जबकि इससे अधिक राशि के मामलों में एफआईआर अनिवार्य होगी।

निर्दोष लोगों के बैंक खाते खोलने के लिए GRM

बैठक में Grievance Redressal Module (GRM) की भी समीक्षा की गई। यदि जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति का बैंक खाता होल्ड या फ्रीज हो जाता है तो वह बैंक के माध्यम से GRM पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है। जांच के बाद उचित पाए जाने पर खाते से प्रतिबंध हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

डीजीपी ने MRM और GRM दोनों व्यवस्थाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें।

महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों पर विशेष फोकस

डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वित्तीय साइबर अपराधों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया जाए। ऐसे मामलों में साइबर इंटेलिजेंस के आधार पर संगठित गिरोहों के खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रशिक्षण और जनजागरूकता अभियान होंगे तेज

बैठक में साइबर पुलिसकर्मियों के नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता बढ़ाने, नई साइबर अपराध प्रवृत्तियों के अनुरूप क्षमता विकास और आम नागरिकों के लिए व्यापक साइबर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।

7 दिन चलेगा 'ऑपरेशन साइ-वज्र'

बैठक के अंत में डीजीपी राजीव कृष्ण ने प्रदेशभर में 7 दिवसीय विशेष अभियान 'ऑपरेशन साइ-वज्र (Cy-Vajra)' चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान साइबर अपराधियों के खिलाफ समन्वित, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख कार्रवाई की जाएगी, जिससे साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो और नागरिकों का पुलिस पर विश्वास और मजबूत हो सके।
बारिश से पहले पूरी करें पंपिंग स्टेशन और नालों की सफाई, लापरवाही पर होगी कार्रवाई: ए.के. शर्मा

- जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और संक्रमण रोकने के लिए नगर निकायों को युद्धस्तर पर तैयार रहने के निर्देश

लखनऊ। प्रदेश में मानसून के मद्देनजर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने सभी नगर निकायों को बारिश से पहले पंपिंग स्टेशन, सीवर और नालों की सफाई सहित सभी तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि वर्षा ऋतु में जलभराव, सीवर ओवरफ्लो या सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लखनऊ के संगम सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की वर्षा पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में जलभराव, सीवर व्यवस्था, नालों की सफाई, कचरा निस्तारण और स्वच्छता अभियान की प्रगति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
ए.के. शर्मा ने कहा कि वर्षा के दौरान आमजन को जलभराव, गंदगी या सीवर बैक फ्लो जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सभी नगर निकाय युद्धस्तर पर कार्य करें और प्रत्येक शिकायत का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ब्लीचिंग पाउडर, एंटी-लार्वा दवाओं और अन्य आवश्यक रसायनों का नियमित छिड़काव किया जाए, ताकि संक्रमण और महामारी की आशंका को रोका जा सके।
नगर विकास मंत्री ने पंपिंग स्टेशनों और पंपिंग सेटों के रखरखाव पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिया कि सभी मशीनों की समय रहते मरम्मत कर उनकी ड्रिल के माध्यम से जांच कर ली जाए। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान मशीनों के खराब होने या रखरखाव का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी उपकरण हर समय पूरी तरह क्रियाशील स्थिति में रहने चाहिए।
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद और आगरा सहित कई नगर निगमों तथा मुजफ्फरनगर, मऊ और पीलीभीत समेत विभिन्न नगर निकायों के अधिकारियों से वर्षा पूर्व तैयारियों की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कहीं भी सीवर ओवरफ्लो, नालियों की सफाई में लापरवाही, जलभराव या स्वच्छता व्यवस्था में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नगर आयुक्तों को स्वयं नियमित मॉनिटरिंग करने और सभी व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए।
बैठक में नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव गुरुप्रसाद, निदेशक अनुज कुमार झा, विशेष सचिव सत्य प्रकाश पटेल, मिशन निदेशक ऋतु सुहास सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी नगर आयुक्त एवं संबंधित अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
20 नवंबर तक पूरी हों पर्यटन विकास की सभी परियोजनाएं, गुणवत्ता से समझौता नहीं: जयवीर सिंह
* प्रदेशभर में पर्यटन परियोजनाओं पर तेजी से काम, अधिकांश कार्यों की निविदा प्रक्रिया पूरी, कई निर्माण शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत पर्यटन विकास परियोजनाओं के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए सभी कार्यदायी संस्थाओं को 20 नवंबर 2026 तक परियोजनाएं गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास को गति देने के लिए प्रदेशभर में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि एक करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर आम जनता को समर्पित किया जाएगा। सभी कार्यदायी संस्थाओं को पहले ही 20 मई 2026 तक निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, जिनका अधिकांश संस्थाओं ने पालन किया है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को स्वीकृत 305 परियोजनाओं में सभी की निविदाएं प्रकाशित की जा चुकी हैं। इनमें से 247 परियोजनाओं के कार्यादेश जारी हो चुके हैं, जबकि 58 परियोजनाएं अभी निविदा प्रक्रिया में हैं।
यूपीपीसीएल को आवंटित 65 परियोजनाओं में 61 पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, एक परियोजना पूरी भी हो चुकी है और शेष पर निविदा प्रक्रिया जारी है। वहीं, अलग से सौंपे गए 24 कार्यों में 20 पर काम शुरू हो चुका है तथा चार परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं।
सी एंड डीएस को आवंटित 126 नई परियोजनाओं में से 113 पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि 13 परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं।
आवास विकास परिषद को सौंपी गई 75 परियोजनाओं में 41 पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि 32 परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है।
इसी प्रकार राजकीय निर्माण निगम को आवंटित 32 परियोजनाओं में दो पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 30 परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया चल रही है।
जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पर्यटन विकास की परियोजनाओं का उद्देश्य ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना है। इससे न केवल प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन विभाग समयबद्ध तरीके से योजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और 20 नवंबर 2026 तक सभी परियोजनाएं पूर्ण कर जनता को समर्पित की जाएं।
राम मंदिर चंदा मामले की CBI जांच की मांग को लेकर जेपीआई का लखनऊ में प्रदर्शन
-  शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने ट्रस्ट भंग करने, नार्को टेस्ट और दोषियों की गिरफ्तारी की उठाई मांग; मांगें न मानी गईं तो अयोध्या कूच की चेतावनी

लखनऊ। जनसत्ता पार्टी ऑफ इंडिया (जेपीआई) एवं राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच (एनवाईआरएम) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को  राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर श्रीराम मंदिर चंदा मामले को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष **शशांक शेखर सिंह पुष्कर** के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में केंद्र सरकार से मामले की सीबीआई जांच कराने तथा अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन भी दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने आरोप लगाया कि श्रीराम मंदिर से जुड़ा यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की **सीबीआई अथवा जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति)** से जांच कराई जाए। साथ ही ट्रस्ट के सभी सदस्यों का नार्को टेस्ट कराने, ट्रस्ट को भंग कर सनातन बोर्ड के गठन तथा चंपत राय, अनिल मिश्रा सहित आरोपित व्यक्तियों की गिरफ्तारी की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो पार्टी प्रदेशभर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या कूच करेगी।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस मामले से जनभावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर जनता का विश्वास कायम किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "सीबीआई जांच कराओ", "चंदा चोरों को गिरफ्तार करो" और "ट्रस्ट भंग कर सनातन बोर्ड का गठन करो" जैसे नारे लगाए।
इस अवसर पर एडवोकेट जेपी सिंह, अशोक पटेल, अजमत उल्ला खां, ममता कश्यप, रबिंदु शुक्ला, राजेश मिश्रा, अरविंद राज, नितेश कुमार, इलियास मंसूरी, अंश सिंह चौहान, विनोद सिंह, अभिषेक पाल सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
12 जुलाई तक हर हाल में पूरा करें 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

* वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने पर जोर, मंदिरों में प्रसाद के साथ पौधे वितरित करने का दिया सुझाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत 12 जुलाई तक 35 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से जनसहभागिता के माध्यम से अभियान को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
लखनऊ के संगम सभागार में आयोजित नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि वृक्षारोपण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर आम जनता का अभियान बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि अभियान के वास्तविक उद्देश्य पूरे हो सकें।
बैठक में वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए अभियान को भव्य रूप दें। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), औद्योगिक संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया जाए।
बैठक के दौरान ए.के. शर्मा ने एक अभिनव सुझाव देते हुए कहा कि जिस प्रकार मंदिरों में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है, उसी प्रकार पर्यावरण विभाग मंदिरों को पौधे उपलब्ध कराए, ताकि श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ एक पौधा भी दिया जा सके। उनका कहना था कि श्रद्धा से प्राप्त पौधे का लोग घर ले जाकर रोपण और संरक्षण करेंगे, जिससे वृक्षारोपण अभियान स्वतः जनआंदोलन का स्वरूप ले लेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रमुख चौराहों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर "यहाँ निःशुल्क पौधे उपलब्ध हैं" जैसे सूचना बोर्ड लगाकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए जाएं, ताकि नागरिक आसानी से पौधे लेकर अपने घरों, संस्थानों और मोहल्लों में उनका रोपण कर सकें।
मंत्री ने पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए कि फलदार, औषधीय, छायादार और अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे लोगों में पौधरोपण के प्रति स्वाभाविक रुचि और उत्साह बढ़े।
बैठक में शहरों में अधिक से अधिक **ग्रीन कैनोपी** विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि घने वृक्षों की छाया वाले सार्वजनिक स्थलों का विकास होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण भी उपलब्ध होगा।
ए.के. शर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सरकार, समाज और सभी विभाग मिलकर जनभागीदारी के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे, तो उत्तर प्रदेश हरित एवं स्वच्छ प्रदेश बनने की दिशा में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।
12 जुलाई तक हर हाल में पूरा करें 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

* वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने पर जोर, मंदिरों में प्रसाद के साथ पौधे वितरित करने का दिया सुझाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत 12 जुलाई तक 35 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से जनसहभागिता के माध्यम से अभियान को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
लखनऊ के संगम सभागार में आयोजित नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि वृक्षारोपण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर आम जनता का अभियान बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि अभियान के वास्तविक उद्देश्य पूरे हो सकें।
बैठक में वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए अभियान को भव्य रूप दें। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), औद्योगिक संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया जाए।
बैठक के दौरान ए.के. शर्मा ने एक अभिनव सुझाव देते हुए कहा कि जिस प्रकार मंदिरों में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है, उसी प्रकार पर्यावरण विभाग मंदिरों को पौधे उपलब्ध कराए, ताकि श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ एक पौधा भी दिया जा सके। उनका कहना था कि श्रद्धा से प्राप्त पौधे का लोग घर ले जाकर रोपण और संरक्षण करेंगे, जिससे वृक्षारोपण अभियान स्वतः जनआंदोलन का स्वरूप ले लेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रमुख चौराहों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर "यहाँ निःशुल्क पौधे उपलब्ध हैं" जैसे सूचना बोर्ड लगाकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए जाएं, ताकि नागरिक आसानी से पौधे लेकर अपने घरों, संस्थानों और मोहल्लों में उनका रोपण कर सकें।
मंत्री ने पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए कि फलदार, औषधीय, छायादार और अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे लोगों में पौधरोपण के प्रति स्वाभाविक रुचि और उत्साह बढ़े।
बैठक में शहरों में अधिक से अधिक **ग्रीन कैनोपी** विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि घने वृक्षों की छाया वाले सार्वजनिक स्थलों का विकास होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण भी उपलब्ध होगा।
ए.के. शर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सरकार, समाज और सभी विभाग मिलकर जनभागीदारी के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे, तो उत्तर प्रदेश हरित एवं स्वच्छ प्रदेश बनने की दिशा में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।
नेक्स्ट जेन आइकॉनिक मिस* , *मिस्टर एवं मिसेज इंडिया 2026' के ग्रैंड फिनाले का हुआ भव्य ऐलान
लखनऊ साम रेनेसांस द्वारा आयोजित नेक्स्ट जेन आइकॉनिक मिस मिस्टर एवं मिसेज इंडिया 2026  के आगामी ग्रैंड फिनाले को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में प्रतियोगिता की रूपरेखा, विशेष आकर्षणों एवं प्रतिभागियों को मिलने वाले अवसरों की जानकारी साझा की गई। संस्थापक एवं आयोजक सौम्या साहू ने बताया कि यह प्रतियोगिता केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास*व्यक्तित्व, प्रतिभा नेतृत्व क्षमता और ग्रूमिंग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य उभरती प्रतिभाओं को स्वयं को निखारने और *मॉडलिंग* एवं फैशन इंडस्ट्री में नई पहचान बनाने का अवसर प्रदान करना है।उन्होंने बताया कि 22 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले *ग्रैंड फिनाले में प्रसिद्ध  भारतीय अभिनेत्री  तेजस्वी प्रकाश वयंगंकर  मुख्य सेलिब्रिटी गेस्ट* के रूप में शामिल होकर विजेता प्रतिभागियों को क्राउन पहनाकर सम्मानित करेंगी। वहीं सिद्धार्थ धांधा सेलिब्रिटी फिनाले ज्यूरी के रूप में प्रतियोगिता का मूल्यांकन करेंगे। इस वर्ष प्रतियोगिता के लिए पुणे लखनऊ और जयपुर सहित विभिन्न शहरों में ऑडिशन आयोजित किए गए, जबकि ऑनलाइन ऑडिशन के माध्यम से भी देशभर के प्रतिभागियों को अवसर प्रदान किया गया।संजय सिंह ने कहा कि यह प्रतियोगिता युवाओं के लिए केवल एक पेजेंट नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और करियर निर्माण का सशक्त माध्यम है। यह मंच प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ फैशन, मॉडलिंग एवं मीडिया जगत में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। प्रियंका रघुवंशी ने कहा कि नेक्स्ट जेन आइकॉनिक मिस मिस्टर एवं मिसेज इंडिया 2026 प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को निखारने का एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है। यह प्रतियोगिता युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने और नए अवसर हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इशिता रस्तोगी ने कहा कि ग्रैंड फिनाले को भव्य और यादगार बनाने के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में रैंप वॉक टैलेंट शोकेस डिज़ाइनर कलेक्शन और कई विशेष आकर्षण देखने को मिलेंगे, जो प्रतिभागियों एवं दर्शकों के लिए यादगार अनुभव साबित होंगे।आयोजकों ने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक पेजेंट नहीं, बल्कि सपनों को नई उड़ान देने का मंच है। उनका विश्वास है कि यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं आने वाले समय में फैशन और ग्लैमर इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान स्थापित करेंगी।
मुख्यमंत्री ने प्रतापगढ़ में किया 384 करोड़ की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास

बोले - हिन्दू आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले वक्फ की लूट पर कभी नहीं बोले

प्रतापगढ़़। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कथित दान चोरी प्रकरण को लेकर विपक्ष पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का मुंह वक्फ की जमीन में हुए हजारों करोड़ के घोटाले पर क्यों नहीं खुलता। ये लोग एक घटना को पकड़ कर हिन्दू आस्था को अपमानित करने का कार्य कर रहे हैं। जबकि उस पूरे प्रकरण के एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हो रही है।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मंगलवार को यहां 384 करोड़ की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को युवाओं को रोजगार मिलना अच्छा नहीं लगता है। क्योंकि यह नौजवान जब कार्य करेंगे तो जातिवादी राजनीति समाप्त होगी। विपक्ष फिर से जाति के आधार पर समाज के ताने-बाने को बांटना चाहता है। छिन्न-भिन्न करना चाहता। हमें इससे ऊपर उठना होगा।

उन्होंने कहा कि यह लोग किस-किस प्रकार के मुद्दे को लेकर आते हैं। कोई मुद्दा नया नहीं होता है। जाति के नाम पर विभाजन या फिर आस्था पर प्रहार इनका मुद्दा होता है। आपने देखा होगा कि पिछले कुछ दिनों से उनके द्वारा भारत की सनातन आस्था पर प्रहार करने की कितनी साजिश हो रही है। किस प्रकार की बयानबाजी की जा रही है। याद करिए जब कांग्रेस कहती थी कि राम हुए ही नहीं। कांग्रेस कहती थी कि कृष्णा हुए ही नहीं। अयोध्या में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी बाबरी ढांचे का समर्थन करके उसके लिए घड़ियाल आंसू बहा रही थीं। आज वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गिरगिट की तरह कैसे रंग बदली है, आप लोग सब देख रहे होंगे।

योगी ने कहा कि अब वह (सपा और कांग्रेस) कह रहे हैं कि अयोध्या में आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है। आस्था के साथ कौन खिलवाड़ हो रहा है। बताओ पहले, तुम्हारी आस्था अयोध्या पर कब से हो गई। जनसमूह की ओर इशारा करते हुए बोले कि इनके पूर्वजों ने अयोध्या के लिए लड़ाई लड़ी है। यह बोल सकते हैं, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बोलने का कोई अधिकार नहीं है। कांग्रेस और सपा ने तो राम के अस्तित्व को ही मानने से इनकार कर दिया था और आज वह कौन आस्था की बात कर रही हैं। वे धार्मिक हिंदू विरासत से जुड़े धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार का पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल पर खर्च कर देते थे। वह लोग कौन सी आस्था की बात कर रहे हैं। यही प्रश्न आप लोगों को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से करना चाहिए। उनसे पूछना चाहिए कि जब तुम्हारी सरकार थी तो रामभक्तों पर गोली चलवाते थे, जय श्री राम बोलने पर लाठी डंडा चलाते थे, कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक बोलती थी कि राम हुए ही नहीं, यह कांग्रेस कहां थी। देश की सबसे बड़ी, सबसे प्राचीन पार्टी उस समय इस प्रकार बात करती थी।

योगी ने कहा कि आज आप राम जी की पैड़ी में जाइए वहां पर लोग स्नान कर रहे हैं। कितनी सुंदरता है। आज की अयोध्या दुनिया को आकर्षित करती है। यही विपक्ष की पीड़ा है। इनके न चाहते हुए भी इतने लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं। उनको इसकी चिंता है। कभी-कभी मुझे संदेह होता है। संदेह इस बात का होता है कि यह लोग एक घटना को किस तरह बढ़ाकर हिंदुओं को अपमानित करके आस्था पर प्रहार करने का काम कर रहे हैं। मैं सपा और कांग्रेस के लोगों से पूछना चाहता हूं कि अयोध्या में जिस कथित चोरी पर तुम हिंदू आस्था पर खिलवाड़ कर रहे हो, एक भी बार बताओ वक्फ के नाम पर हुए घोटाले पर सवाल उठाए। हजारों हैकटेयर लैंड प्रदेश के अंदर और देश के अंदर बेची गई है। एक भी बार इस पर यह लोग नहीं बोले। यह जमीन गरीब की थी। कमजोर तबके के लोगों की थी। यह जमीन गरीबों के नाम पर पट्टा की जा सकती है। वहां पर कन्वेंशन सेंटर बनाया जा सकता था।

योगी ने कहा कि अयोध्या के बारे में तो उन्होंने पिछले दिनों ही कहा था कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी दूध का दूध पानी का पानी कर देगी। समिति की जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट ने कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। जिनके खिलाफ साक्ष्य थे, उसके आधार पर कार्रवाई हो रही है।