20 नवंबर तक पूरी हों पर्यटन विकास की सभी परियोजनाएं, गुणवत्ता से समझौता नहीं: जयवीर सिंह
* प्रदेशभर में पर्यटन परियोजनाओं पर तेजी से काम, अधिकांश कार्यों की निविदा प्रक्रिया पूरी, कई निर्माण शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत पर्यटन विकास परियोजनाओं के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए सभी कार्यदायी संस्थाओं को 20 नवंबर 2026 तक परियोजनाएं गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास को गति देने के लिए प्रदेशभर में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि एक करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर आम जनता को समर्पित किया जाएगा। सभी कार्यदायी संस्थाओं को पहले ही 20 मई 2026 तक निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए थे, जिनका अधिकांश संस्थाओं ने पालन किया है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को स्वीकृत 305 परियोजनाओं में सभी की निविदाएं प्रकाशित की जा चुकी हैं। इनमें से 247 परियोजनाओं के कार्यादेश जारी हो चुके हैं, जबकि 58 परियोजनाएं अभी निविदा प्रक्रिया में हैं।
यूपीपीसीएल को आवंटित 65 परियोजनाओं में 61 पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, एक परियोजना पूरी भी हो चुकी है और शेष पर निविदा प्रक्रिया जारी है। वहीं, अलग से सौंपे गए 24 कार्यों में 20 पर काम शुरू हो चुका है तथा चार परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं।
सी एंड डीएस को आवंटित 126 नई परियोजनाओं में से 113 पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि 13 परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं।
आवास विकास परिषद को सौंपी गई 75 परियोजनाओं में 41 पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि 32 परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है।
इसी प्रकार राजकीय निर्माण निगम को आवंटित 32 परियोजनाओं में दो पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 30 परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया चल रही है।
जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पर्यटन विकास की परियोजनाओं का उद्देश्य ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना है। इससे न केवल प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन विभाग समयबद्ध तरीके से योजनाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और 20 नवंबर 2026 तक सभी परियोजनाएं पूर्ण कर जनता को समर्पित की जाएं।
राम मंदिर चंदा मामले की CBI जांच की मांग को लेकर जेपीआई का लखनऊ में प्रदर्शन
-  शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने ट्रस्ट भंग करने, नार्को टेस्ट और दोषियों की गिरफ्तारी की उठाई मांग; मांगें न मानी गईं तो अयोध्या कूच की चेतावनी

लखनऊ। जनसत्ता पार्टी ऑफ इंडिया (जेपीआई) एवं राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच (एनवाईआरएम) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को  राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर श्रीराम मंदिर चंदा मामले को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष **शशांक शेखर सिंह पुष्कर** के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में केंद्र सरकार से मामले की सीबीआई जांच कराने तथा अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन भी दिया गया।
प्रदर्शन के दौरान शशांक शेखर सिंह पुष्कर ने आरोप लगाया कि श्रीराम मंदिर से जुड़ा यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की **सीबीआई अथवा जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति)** से जांच कराई जाए। साथ ही ट्रस्ट के सभी सदस्यों का नार्को टेस्ट कराने, ट्रस्ट को भंग कर सनातन बोर्ड के गठन तथा चंपत राय, अनिल मिश्रा सहित आरोपित व्यक्तियों की गिरफ्तारी की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो पार्टी प्रदेशभर के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ अयोध्या कूच करेगी।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस मामले से जनभावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर जनता का विश्वास कायम किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने "सीबीआई जांच कराओ", "चंदा चोरों को गिरफ्तार करो" और "ट्रस्ट भंग कर सनातन बोर्ड का गठन करो" जैसे नारे लगाए।
इस अवसर पर एडवोकेट जेपी सिंह, अशोक पटेल, अजमत उल्ला खां, ममता कश्यप, रबिंदु शुक्ला, राजेश मिश्रा, अरविंद राज, नितेश कुमार, इलियास मंसूरी, अंश सिंह चौहान, विनोद सिंह, अभिषेक पाल सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
12 जुलाई तक हर हाल में पूरा करें 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

* वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने पर जोर, मंदिरों में प्रसाद के साथ पौधे वितरित करने का दिया सुझाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत 12 जुलाई तक 35 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से जनसहभागिता के माध्यम से अभियान को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
लखनऊ के संगम सभागार में आयोजित नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि वृक्षारोपण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर आम जनता का अभियान बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि अभियान के वास्तविक उद्देश्य पूरे हो सकें।
बैठक में वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए अभियान को भव्य रूप दें। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), औद्योगिक संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया जाए।
बैठक के दौरान ए.के. शर्मा ने एक अभिनव सुझाव देते हुए कहा कि जिस प्रकार मंदिरों में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है, उसी प्रकार पर्यावरण विभाग मंदिरों को पौधे उपलब्ध कराए, ताकि श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ एक पौधा भी दिया जा सके। उनका कहना था कि श्रद्धा से प्राप्त पौधे का लोग घर ले जाकर रोपण और संरक्षण करेंगे, जिससे वृक्षारोपण अभियान स्वतः जनआंदोलन का स्वरूप ले लेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रमुख चौराहों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर "यहाँ निःशुल्क पौधे उपलब्ध हैं" जैसे सूचना बोर्ड लगाकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए जाएं, ताकि नागरिक आसानी से पौधे लेकर अपने घरों, संस्थानों और मोहल्लों में उनका रोपण कर सकें।
मंत्री ने पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए कि फलदार, औषधीय, छायादार और अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे लोगों में पौधरोपण के प्रति स्वाभाविक रुचि और उत्साह बढ़े।
बैठक में शहरों में अधिक से अधिक **ग्रीन कैनोपी** विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि घने वृक्षों की छाया वाले सार्वजनिक स्थलों का विकास होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण भी उपलब्ध होगा।
ए.के. शर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सरकार, समाज और सभी विभाग मिलकर जनभागीदारी के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे, तो उत्तर प्रदेश हरित एवं स्वच्छ प्रदेश बनने की दिशा में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।
12 जुलाई तक हर हाल में पूरा करें 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

* वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने पर जोर, मंदिरों में प्रसाद के साथ पौधे वितरित करने का दिया सुझाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत 12 जुलाई तक 35 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से जनसहभागिता के माध्यम से अभियान को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
लखनऊ के संगम सभागार में आयोजित नगर विकास एवं ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि वृक्षारोपण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर आम जनता का अभियान बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि अभियान के वास्तविक उद्देश्य पूरे हो सकें।
बैठक में वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए अभियान को भव्य रूप दें। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), औद्योगिक संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर पौधरोपण कराया जाए।
बैठक के दौरान ए.के. शर्मा ने एक अभिनव सुझाव देते हुए कहा कि जिस प्रकार मंदिरों में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है, उसी प्रकार पर्यावरण विभाग मंदिरों को पौधे उपलब्ध कराए, ताकि श्रद्धालुओं को प्रसाद के साथ एक पौधा भी दिया जा सके। उनका कहना था कि श्रद्धा से प्राप्त पौधे का लोग घर ले जाकर रोपण और संरक्षण करेंगे, जिससे वृक्षारोपण अभियान स्वतः जनआंदोलन का स्वरूप ले लेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रमुख चौराहों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर "यहाँ निःशुल्क पौधे उपलब्ध हैं" जैसे सूचना बोर्ड लगाकर विभिन्न प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए जाएं, ताकि नागरिक आसानी से पौधे लेकर अपने घरों, संस्थानों और मोहल्लों में उनका रोपण कर सकें।
मंत्री ने पर्यावरण विभाग को निर्देश दिए कि फलदार, औषधीय, छायादार और अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे लोगों में पौधरोपण के प्रति स्वाभाविक रुचि और उत्साह बढ़े।
बैठक में शहरों में अधिक से अधिक **ग्रीन कैनोपी** विकसित करने पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि घने वृक्षों की छाया वाले सार्वजनिक स्थलों का विकास होने से पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण भी उपलब्ध होगा।
ए.के. शर्मा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सरकार, समाज और सभी विभाग मिलकर जनभागीदारी के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे, तो उत्तर प्रदेश हरित एवं स्वच्छ प्रदेश बनने की दिशा में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।
नेक्स्ट जेन आइकॉनिक मिस* , *मिस्टर एवं मिसेज इंडिया 2026' के ग्रैंड फिनाले का हुआ भव्य ऐलान
लखनऊ साम रेनेसांस द्वारा आयोजित नेक्स्ट जेन आइकॉनिक मिस मिस्टर एवं मिसेज इंडिया 2026  के आगामी ग्रैंड फिनाले को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में प्रतियोगिता की रूपरेखा, विशेष आकर्षणों एवं प्रतिभागियों को मिलने वाले अवसरों की जानकारी साझा की गई। संस्थापक एवं आयोजक सौम्या साहू ने बताया कि यह प्रतियोगिता केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास*व्यक्तित्व, प्रतिभा नेतृत्व क्षमता और ग्रूमिंग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य उभरती प्रतिभाओं को स्वयं को निखारने और *मॉडलिंग* एवं फैशन इंडस्ट्री में नई पहचान बनाने का अवसर प्रदान करना है।उन्होंने बताया कि 22 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले *ग्रैंड फिनाले में प्रसिद्ध  भारतीय अभिनेत्री  तेजस्वी प्रकाश वयंगंकर  मुख्य सेलिब्रिटी गेस्ट* के रूप में शामिल होकर विजेता प्रतिभागियों को क्राउन पहनाकर सम्मानित करेंगी। वहीं सिद्धार्थ धांधा सेलिब्रिटी फिनाले ज्यूरी के रूप में प्रतियोगिता का मूल्यांकन करेंगे। इस वर्ष प्रतियोगिता के लिए पुणे लखनऊ और जयपुर सहित विभिन्न शहरों में ऑडिशन आयोजित किए गए, जबकि ऑनलाइन ऑडिशन के माध्यम से भी देशभर के प्रतिभागियों को अवसर प्रदान किया गया।संजय सिंह ने कहा कि यह प्रतियोगिता युवाओं के लिए केवल एक पेजेंट नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और करियर निर्माण का सशक्त माध्यम है। यह मंच प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ फैशन, मॉडलिंग एवं मीडिया जगत में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। प्रियंका रघुवंशी ने कहा कि नेक्स्ट जेन आइकॉनिक मिस मिस्टर एवं मिसेज इंडिया 2026 प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को निखारने का एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करता है। यह प्रतियोगिता युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने और नए अवसर हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इशिता रस्तोगी ने कहा कि ग्रैंड फिनाले को भव्य और यादगार बनाने के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में रैंप वॉक टैलेंट शोकेस डिज़ाइनर कलेक्शन और कई विशेष आकर्षण देखने को मिलेंगे, जो प्रतिभागियों एवं दर्शकों के लिए यादगार अनुभव साबित होंगे।आयोजकों ने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक पेजेंट नहीं, बल्कि सपनों को नई उड़ान देने का मंच है। उनका विश्वास है कि यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं आने वाले समय में फैशन और ग्लैमर इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान स्थापित करेंगी।
मुख्यमंत्री ने प्रतापगढ़ में किया 384 करोड़ की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास

बोले - हिन्दू आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले वक्फ की लूट पर कभी नहीं बोले

प्रतापगढ़़। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में कथित दान चोरी प्रकरण को लेकर विपक्ष पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का मुंह वक्फ की जमीन में हुए हजारों करोड़ के घोटाले पर क्यों नहीं खुलता। ये लोग एक घटना को पकड़ कर हिन्दू आस्था को अपमानित करने का कार्य कर रहे हैं। जबकि उस पूरे प्रकरण के एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हो रही है।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मंगलवार को यहां 384 करोड़ की 111 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को युवाओं को रोजगार मिलना अच्छा नहीं लगता है। क्योंकि यह नौजवान जब कार्य करेंगे तो जातिवादी राजनीति समाप्त होगी। विपक्ष फिर से जाति के आधार पर समाज के ताने-बाने को बांटना चाहता है। छिन्न-भिन्न करना चाहता। हमें इससे ऊपर उठना होगा।

उन्होंने कहा कि यह लोग किस-किस प्रकार के मुद्दे को लेकर आते हैं। कोई मुद्दा नया नहीं होता है। जाति के नाम पर विभाजन या फिर आस्था पर प्रहार इनका मुद्दा होता है। आपने देखा होगा कि पिछले कुछ दिनों से उनके द्वारा भारत की सनातन आस्था पर प्रहार करने की कितनी साजिश हो रही है। किस प्रकार की बयानबाजी की जा रही है। याद करिए जब कांग्रेस कहती थी कि राम हुए ही नहीं। कांग्रेस कहती थी कि कृष्णा हुए ही नहीं। अयोध्या में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी बाबरी ढांचे का समर्थन करके उसके लिए घड़ियाल आंसू बहा रही थीं। आज वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गिरगिट की तरह कैसे रंग बदली है, आप लोग सब देख रहे होंगे।

योगी ने कहा कि अब वह (सपा और कांग्रेस) कह रहे हैं कि अयोध्या में आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है। आस्था के साथ कौन खिलवाड़ हो रहा है। बताओ पहले, तुम्हारी आस्था अयोध्या पर कब से हो गई। जनसमूह की ओर इशारा करते हुए बोले कि इनके पूर्वजों ने अयोध्या के लिए लड़ाई लड़ी है। यह बोल सकते हैं, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बोलने का कोई अधिकार नहीं है। कांग्रेस और सपा ने तो राम के अस्तित्व को ही मानने से इनकार कर दिया था और आज वह कौन आस्था की बात कर रही हैं। वे धार्मिक हिंदू विरासत से जुड़े धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार का पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल पर खर्च कर देते थे। वह लोग कौन सी आस्था की बात कर रहे हैं। यही प्रश्न आप लोगों को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से करना चाहिए। उनसे पूछना चाहिए कि जब तुम्हारी सरकार थी तो रामभक्तों पर गोली चलवाते थे, जय श्री राम बोलने पर लाठी डंडा चलाते थे, कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक बोलती थी कि राम हुए ही नहीं, यह कांग्रेस कहां थी। देश की सबसे बड़ी, सबसे प्राचीन पार्टी उस समय इस प्रकार बात करती थी।

योगी ने कहा कि आज आप राम जी की पैड़ी में जाइए वहां पर लोग स्नान कर रहे हैं। कितनी सुंदरता है। आज की अयोध्या दुनिया को आकर्षित करती है। यही विपक्ष की पीड़ा है। इनके न चाहते हुए भी इतने लोग अयोध्या पहुंच रहे हैं। उनको इसकी चिंता है। कभी-कभी मुझे संदेह होता है। संदेह इस बात का होता है कि यह लोग एक घटना को किस तरह बढ़ाकर हिंदुओं को अपमानित करके आस्था पर प्रहार करने का काम कर रहे हैं। मैं सपा और कांग्रेस के लोगों से पूछना चाहता हूं कि अयोध्या में जिस कथित चोरी पर तुम हिंदू आस्था पर खिलवाड़ कर रहे हो, एक भी बार बताओ वक्फ के नाम पर हुए घोटाले पर सवाल उठाए। हजारों हैकटेयर लैंड प्रदेश के अंदर और देश के अंदर बेची गई है। एक भी बार इस पर यह लोग नहीं बोले। यह जमीन गरीब की थी। कमजोर तबके के लोगों की थी। यह जमीन गरीबों के नाम पर पट्टा की जा सकती है। वहां पर कन्वेंशन सेंटर बनाया जा सकता था।

योगी ने कहा कि अयोध्या के बारे में तो उन्होंने पिछले दिनों ही कहा था कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी दूध का दूध पानी का पानी कर देगी। समिति की जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट ने कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। जिनके खिलाफ साक्ष्य थे, उसके आधार पर कार्रवाई हो रही है।
यूपी को देश का अग्रणी स्किल स्टेट बनाएगी योगी सरकार
-  आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों की होगी नियमित मॉनिटरिंग, रोजगारपरक शॉर्ट टर्म कोर्स पर रहेगा विशेष फोकस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी कौशलयुक्त (स्किल) राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ योगी सरकार युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी तथा रोजगारपरक शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की आवश्यकताओं और रोजगारोन्मुखी कौशल से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने विभागीय अधिकारियों को सभी योजनाओं का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलें।
सरकार युवाओं के लिए अधिक से अधिक शॉर्ट टर्म एवं रोजगारपरक कौशल पाठ्यक्रम शुरू करेगी। इन पाठ्यक्रमों में सॉफ्ट स्किल, डिजिटल लर्निंग, संवाद कौशल, इंटरव्यू की तैयारी, रिज्यूमे लेखन और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण के साथ युवाओं की रोजगार क्षमता भी बढ़ सके।
रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से विभाग उद्योगों के साथ समन्वय और मजबूत करेगा। स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिससे प्रशिक्षित युवाओं को सीधे रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। साथ ही, आईटीआई एवं कौशल विकास संस्थानों में आयोजित रोजगार मेलों की जानकारी अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रदेश के अटल आवासीय विद्यालयों में आधुनिक कौशल आधारित प्रशिक्षण पहले से संचालित है, जबकि अगले माह से आश्रम पद्धति विद्यालयों में भी स्किलिंग कोर्स शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार हासिल करने वाले युवाओं की सफलता की कहानियों का सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिल सके। सरकार प्रशिक्षण संस्थानों में रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, सीएनसी, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 जैसी आधुनिक तकनीकों से संबंधित पाठ्यक्रमों को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे प्रदेश के युवाओं को भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप दक्ष बनाया जा सके।
बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्लेसमेंट, उद्योगों के साथ समन्वय, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण भागीदारों, निर्माण कार्यों और भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, हर प्रशिक्षित युवा को रोजगार या स्वरोजगार का अवसर मिले और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार हो।
यूपी एसटीएफ ने एक लाख के इनामी डकैत आसिफ उर्फ विक्की को मुठभेड़ में मार गिराया, कई राज्यों में हत्या-डकैती के मामलों में था वांछित
लखनऊ /अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नोएडा यूनिट ने मंगलवार तड़के अंबेडकरनगर जिले के बेवाना थाना क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान एक लाख रुपये के इनामी कुख्यात बदमाश आसिफ उर्फ विक्की छैमार को मार गिराया। मुठभेड़ में गोली लगने के बाद उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके कब्जे से पिस्टल, देशी बंदूक, कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई है।

एसटीएफ के अनुसार, मारा गया बदमाश आसिफ उर्फ विक्की अली पुत्र बाबू उर्फ मजहर, कानपुर नगर के बिल्हौर थाना क्षेत्र के मकरनपुर गांव का निवासी था। वह पिछले करीब आठ वर्षों से पुलिस की गिरफ्त से फरार चल रहा था। उस पर हत्या, डकैती और डकैती के दौरान हत्या जैसे गंभीर अपराधों के 21 से अधिक मुकदमे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में दर्ज थे। कुछ पुलिस अभिलेखों में उसके विरुद्ध मामलों की संख्या 25 से अधिक भी दर्ज है।

तड़के चार बजे हुई मुठभेड़

एसटीएफ को आसिफ की मौजूदगी की सूचना मिलने पर बेवाना थाना क्षेत्र के जगदीशपुर मुस्लिमपुर के पास घेराबंदी की गई। खुद को घिरता देख आसिफ ने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ ने भी गोली चलाई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मौके से हथियार और कारतूस बरामद

पुलिस ने घटनास्थल से 32 बोर की पिस्टल, 12 बोर की पौनिया (देशी बंदूक), भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। बरामद हथियारों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।

घरों में बंधक बनाकर डालता था डकैती

एसटीएफ के मुताबिक, आसिफ अपने गिरोह के साथ रात में घरों में घुसकर परिवार के लोगों को बंधक बनाता था। विरोध करने पर वह और उसके साथी बेरहमी से हमला कर हत्या तक कर देते थे। यही वजह थी कि वह प्रदेश के सबसे वांछित डकैतों में शामिल था और उसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

कई सनसनीखेज मामलों में था वांछित

पुलिस के अनुसार, आसिफ कई चर्चित वारदातों में फरार चल रहा था। इनमें प्रमुख घटनाएं शामिल हैं—

19 अक्टूबर 2013: सुल्तानपुर के कोतवाली देहात क्षेत्र में साथियों के साथ घर में घुसकर हत्या के बाद डकैती।
वर्ष 2014: जौनपुर के शाहगंज थाना क्षेत्र में परिवार को बंधक बनाकर लाखों रुपये की लूट। विरोध करने पर परिवार के पांच लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसमें स्वाति और सुमन की इलाज के दौरान मौत हो गई।
15 अगस्त 2015: कौशांबी के कोखराज थाना क्षेत्र में डकैती के दौरान अवनि कुमार टैगोर के माता-पिता की हत्या।
19 अगस्त 2015: मुजफ्फरनगर के छपार थाना क्षेत्र में एक ही रात कई घरों में डकैती। एक घर में महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
13 जनवरी 2021: कानपुर देहात के रसूलाबाद थाना क्षेत्र में तासीम की हत्या।
लंबे समय से कर रही थी तलाश

एसटीएफ के अनुसार, जौनपुर, सुल्तानपुर, कौशांबी और मुजफ्फरनगर की चर्चित डकैती और हत्या की घटनाओं के बाद से आसिफ लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न जनपदों की पुलिस और एसटीएफ लगातार प्रयास कर रही थी। आखिरकार मंगलवार सुबह हुई मुठभेड़ में उसका अंत हो गया।

एसटीएफ का कहना है कि आसिफ के अन्य साथियों और उसके आपराधिक नेटवर्क के संबंध में भी जांच जारी है तथा उनसे जुड़े अन्य आरोपितों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी, यूपी कैडर के सुजीत पांडेय बने राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के
लखनऊ । केंद्र सरकार ने देश के पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए तीन वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet-ACC) ने गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए हरियाणा कैडर के आलोक कुमार मित्तल को पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) का महानिदेशक (DG), आंध्र प्रदेश कैडर के अमित गर्ग को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का निदेशक तथा उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुजीत पांडेय को सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) का निदेशक नियुक्त किया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने सोमवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए। गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर नियुक्ति समिति की स्वीकृति के बाद इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा।

आलोक कुमार मित्तल होंगे BPR&D के नए महानिदेशक

1993 बैच के हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार मित्तल, जो वर्तमान में अपने कैडर में कार्यरत हैं, उन्हें लेवल-16 वेतनमान में पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) का महानिदेशक नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से 30 जून 2029 (सेवानिवृत्ति की तिथि) तक अथवा अगले आदेश तक रहेगा।

BPR&D देश में पुलिस सुधार, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, प्रशिक्षण और पुलिसिंग से जुड़ी नीतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली केंद्रीय संस्था है।

अमित गर्ग बने NCRB के नए प्रमुख

1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अमित गर्ग, जो अभी तक सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) के निदेशक थे, उन्हें राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का निदेशक नियुक्त किया गया है।

केंद्र सरकार ने उनके कार्यकाल के लिए NCRB निदेशक के पद को व्यक्तिगत आधार पर अस्थायी रूप से महानिदेशक (DG) स्तर यानी लेवल-16 तक अपग्रेड किया है। उनका कार्यकाल 31 अक्टूबर 2027 तक अथवा अगले आदेश तक रहेगा। वे इस पद पर मध्य प्रदेश कैडर के 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक रंजन का स्थान लेंगे।

NCRB देशभर में अपराध संबंधी आंकड़ों का संकलन, विश्लेषण, अपराध रिकॉर्ड प्रबंधन, सीसीटीएनएस और राष्ट्रीय स्तर की पुलिस सूचना प्रणालियों के संचालन की प्रमुख एजेंसी है।

यूपी कैडर के सुजीत पांडेय को मिली अहम जिम्मेदारी

1994 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुजीत पांडेय को देश की सबसे प्रतिष्ठित पुलिस प्रशिक्षण संस्था सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA), हैदराबाद का निदेशक नियुक्त किया गया है।

वे अमित गर्ग का स्थान लेंगे और 31 जुलाई 2028 (सेवानिवृत्ति तक) या अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे।

SVPNPA भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के प्रशिक्षण की सर्वोच्च संस्था है, जहां देशभर के नए आईपीएस अधिकारियों को आधारभूत प्रशिक्षण के साथ वरिष्ठ अधिकारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे में सुजीत पांडेय की नियुक्ति को पुलिस नेतृत्व और प्रशिक्षण व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

DoPT ने जारी किए आदेश

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तीनों अधिकारियों की नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। इन नियुक्तियों के साथ केंद्र सरकार ने पुलिस अनुसंधान, अपराध रिकॉर्ड प्रबंधन और आईपीएस प्रशिक्षण जैसी तीन महत्वपूर्ण संस्थाओं में नए नेतृत्व की जिम्मेदारी तय कर दी है।
याेगी कैबिनेट ने दी उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत 2 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और 02 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं।

50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना

डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डेटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डेटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

त्रिस्तरीय पंचायती संस्थाओं के लिए वित्तीय प्रस्ताव स्वीकृत

कैबिनेट बैठक में पंचायती राज्य संस्थाओं की वित्तीय आवश्यकताओं से संबंधित प्रस्ताव पर भी सहमति दी गई। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत तीनों स्तर की पंचायतों के लिए 14,988.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसकी 10 प्रतिशत धनराशि यानी लगभग 1,498 करोड़ रुपये प्रशासनिक, परिचालन एवं रख-रखाव पर खर्च होंगे। इसी राशि में से 495.89 करोड़ रुपये पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय व बैठक भत्तों पर व्यय किए जाएंगे।

यह राज्य वित्त आयोग की वर्तमान किस्त (14,988.50 करोड़ रुपये) का लगभग 1.05 प्रतिशत है और शासनादेश 12 दिसंबर 2024 के अनुरूप ही है। यह धनराशि निदेशक, पंचायती राज के निर्देश पर नियमानुसार व आवश्यकतानुसार खर्च की जाएगी।

रायबरेली में होगी उद्यान महाविद्यालय की स्थापना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में जनपद रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि विभाग की 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह महाविद्यालय चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश में कृषि एवं उद्यान शिक्षा के विस्तार को नई गति मिलेगी।

उद्यान महाविद्यालय की स्थापना के लिए जिलाधिकारी रायबरेली द्वारा ग्राम पड़ेरा, परगना एवं तहसील सदर स्थित उपलब्ध भूमि चिन्हित की गई थी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उपलब्ध 44.888 हेक्टेयर भूमि में से 22 हेक्टेयर भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इससे रायबरेली सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्यानिकी शिक्षा, अनुसंधान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के विकास को नई मजबूती मिलेगी।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ तथा निजी क्षेत्र का सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिक एवं विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुशीनगर की स्थापना की जा रही है।

उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अंतर्गत रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना पर लगभग 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। महाविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में औद्यानिक शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।