मुख्यमंत्री अभ्युदय निःशुल्क  कोचिंग हेतु  प्रवेश परीक्षा का आयोजन हुआ
सुल्तानपुर। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत जनपद सुल्तानपुर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु निःशुल्क प्रवेश परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुई। प्रवेश परीक्षा में विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 328 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। यूपीएससी  72,एसएससी 68,नीट एवं जेईई 62,पीसीएस (जे) 126 में अभ्यर्थी शामिल हुए ।
परीक्षा के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा परीक्षा कक्षों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। परीक्षा में प्रतिभाग करने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए शुद्ध पेयजल एवं जलपान की समुचित व्यवस्था भी की गई, जिससे उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। परीक्षा के सफल आयोजन में डॉ. अवधेश दुबे, डॉ जितेन्द्र यादव,  असिस्टेंट प्रो विपिन सिंह एवं  डा अम्बरीश सिंह सहित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के समस्त फैकल्टी सदस्यों एवं सहयोगी कार्मिकों ने पूर्ण समर्पण एवं शत-प्रतिशत सहयोग प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के नवीन शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ दिनांक 1 जुलाई  से किया जाएगा। इस अवसर पर चयनित अभ्यर्थियों के लिए मोटिवेशनल कोट्स का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों को योजना की जानकारी, अध्ययन की रूपरेखा, मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायक सत्रों के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु प्रेरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के माध्यम से जनपद के प्रतिभाशाली एवं आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण तैयारी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को अपने लक्ष्य प्राप्त करने का अवसर मिल सके।
जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में 'जलसा शुहदा-ए-इस्लाम' की नवीं महफ़िल का शानदार आयोजन
सुल्तानपुर,आज जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर (1448 हिजरी) में 'जलसा शुहदा-ए-इस्लाम' की नवीं महफ़िल निहायत अक़ीदत व एहतेराम के साथ मुनअक़िद (आयोजित) की गई। नमाज़-ए-इशा के बाद इस रूहानी जलसे का आग़ाज़ हुआ, जिसने सामेईन (श्रोताओं) के दिलों को ईमान की ताज़गी और रूहानियत से भर दिया।
जलसे का आग़ाज़ और इब्तिदाई तक़रीबात:
  निज़ामत: जलसे की बाग़डोर दुनिया-ए-निज़ामत के शहसवार आली जनाब मुजाहिद हुसैन हबीबी साहब ने संभाली। उनकी बेहतरीन तमहीदी गुफ़्तगू (प्रस्तावना) के बाद महफ़िल का बाक़ायदा आग़ाज़ हुआ।
  तिलावत-ए-क़ुरआन: जामिया की जामा मस्जिद के मुअज़्ज़िन जनाब हाफ़िज़ मोहम्मद शमशीर साहब ने अपने मख़सूस और दिलकश अंदाज़ में क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत फ़रमाई।
  नात शरीफ़: जामिया के उस्ताज़-ए-हिफ़्ज़ जनाब क़ारी मोहम्मद जमाल साहब (सीतापुरी) ने नात-उन-नबी ﷺ पेश कर के मजमे को मख़मूर व मसहूर कर दिया।
  सीरत पर तक़रीर: जामिया के तालिबे इल्म (अरबी चहारुम) और मौलाना अब्दुल वहीद साहब क़ासमी के फ़र्ज़ंद मोहम्मद अहन्फ़ ने हज़रत मुआविया (रज़ि.) की सीरत पर निहायत लाजवाब अंदाज़ में तक़रीर पेश की।
  मनक़बत: जामिया इस्लामिया के अबना-ए-क़दीम (पूर्व छात्र) मौलाना मोहम्मद नदीम साक़िबी ने मनक़बत के अश्आर पेश कर के सामेईन के कुलूब (दिलों) को ताज़गी बख़्शी।
मेहमान-ए-ख़ुसूसी का ख़िताब (मुख्य भाषण):
इस मुक़द्दस महफ़िल में मुक़र्रिर-ए-ख़ुसूसी (मुख्य वक्ता) के तौर पर मदरसा शाही मुरादाबाद के उस्ताज़-ए-फ़िक़्ह व अदब, हज़रत मौलाना तौहीद अहमद साहब क़ासमी तशरीफ़ लाए। उन्होंने अपने बयान में हज़रत अली (कर्रम अल्लाहु वजहहू) के सिलसिला-ए-नसब (दादिहाली व नानिहाली) का ज़िक्र करते हुए हदीस की रौशनी में उनके फ़ज़ायल व मनाक़िब को मुदल्लल (प्रमाणित) अंदाज़ में बयान किया।
मुफ़्ती साहब ने अपनी तक़रीर में अहम तारीख़ी हक़ायक़ पेश किए:
  ख़ुलाफ़ा-ए-राशदीन से अक़ीदत: हज़रत अली (रज़ि.) को हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़, हज़रत उमर फ़ारूक़ और हज़रत उस्मान गनी (रज़ि.) से बेपनाह अक़ीदत व मोहब्बत थी और इन तीनों हज़रात को भी उनसे असीम लगाव था। यही वजह थी कि सिद्दीक़-ए-अकबर ने अपने दौर-ए-ख़िलाफ़त में हज़रत अली को 'दारुल क़ज़ा' (न्याय विभाग) के मंसब पर फ़ाइज़ किया, जहाँ वह हज़रत उस्मान के दौर तक अमीर बने रहे।
  ख़िलाफ़त-ए-सिद्दीक़ी की ताईद: नबी-ए-करीम ﷺ के पर्दा फ़रमाने के बाद हज़रत अली ने बिला किसी तरद्दुद (हिचकिचाहट) के हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ के हाथ पर बैअत की। जब हज़रत उसामा ने उनसे इस बारे में पूछा, तो हज़रत अली ने फ़रमाया: "ऐ उसामा! एक दीन का सुतून (स्तंभ) है और वह नमाज़ है, और एक दुनिया का सुतून है और वह ख़िलाफ़त है। जब हमारे हबीब ﷺ ने अबू बक्र को दीन के सुतून के लिए आगे बढ़ाया, तो अली भी उसी रास्ते पर है।" नबी-ए-अकरम की वफ़ात से पहले 17 नमाज़ें हज़रत सिद्दीक़-ए-अकबर ने पढ़ाई थीं।
  ख़िलाफ़त-ए-फ़ारूक़ी और उस्मानी की हिमायत: हज़रत अली ही वह शख़्सियत थे जिन्होंने सबसे पहले हज़रत उमर की ख़िलाफ़त का मशवरा दिया था। मुफ़्ती साहब ने वाज़ेह किया कि अगर हज़रत अली को इन हज़रात से अदावत (दुश्मनी) होती, तो वह अपने बच्चों का नाम अबू बक्र और उमर हरगिज़ न रखते। इसी तरह, हज़रत उस्मान गनी (रज़ि.) की शहादत के वक़्त बलवाइयों की शरअंगेज़ी के दौरान, हज़रत अली ने ख़ुद अपने बेटों (हज़रत हसन और हुसैन) के साथ हज़रत उस्मान के घर पर पहरा दिया था।
हज़रत मुफ़्ती साहब ने वाज़ेह किया कि इन दलीलों से यह भली-भांति साबित होता है कि हज़रत अली को इन तीनों सहाबा की ख़िलाफ़त से कोई रंज या शिकवा नहीं था। जो लोग ख़ुद को हज़रत अली का मोहतक़िद (अनुयायी) बताते हैं और दीगर ख़ुलाफ़ा को ग़ासिब कहते हैं, यह सरासर बोहतान (आरोप) और इत्तेहाम है, जिसका हदीस की रू से कोई लेना-देना नहीं। ख़ुलाफ़ा-ए-अरबा (चारों ख़लीफ़ाओं) के दरमियान ख़िलाफ़त की तरतीब पर ज़र्रा बराबर भी कोई एतराज़ नहीं था।

सदारती ख़िताब और इज़हार-ए-तशक्कुर:
इस पुरनूर जलसे की सदारत जामिया के नाज़िम-ए-आला( सदर) जनाब मौलाना मोहम्मद उस्मान साहब क़ासमी ने फ़रमाई। उन्होंने तमाम सामेईन का समिम-ए-क़ल्ब (तहे दिल) से शुक्रिया अदा किया और गुज़ारिश की कि शुहदा-ए-इस्लाम की आख़िरी नशिस्त (दसवीं मुहर्रम-उल-हराम) में भी अवाम कसीर तादाद (भारी संख्या) में शिरकत कर के सवाब-ए-दारैन हासिल करें।
पचमढ़ी में ज्योति सिंह ने रचा इतिहास,बनीं सुलतानपुर की पहली लीडर ट्रेनर गाइड
*ज्योति सिंह ने राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी से प्रशिक्षण प्राप्त कर रचा इतिहास*

*राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी से पहली लीडर ट्रेनर गाइड  बनीं ज्योति सिंह,सुलतानपुर गौरवान्वित*

सुलतानपुर।जनपद सुलतानपुर के लिए गौरव का क्षण तब आया जब भारत स्काउट एवं गाइड उत्तर प्रदेश की जिला ट्रेनिंग कमिश्नर (गाइड) ज्योति सिंह ने मध्य प्रदेश स्थित राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र पचमढ़ी में आयोजित उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लीडर ट्रेनर गाइड की प्रतिष्ठित उपाधि प्राप्त की। इस उपलब्धि के साथ ही ज्योति सिंह सुलतानपुर की पहली लीडर ट्रेनर गाइड बन गई हैं,जिससे जिले के स्काउट- गाइड आंदोलन को नई पहचान मिली है।

ज्योति सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता पर जिला मुख्य आयुक्त एवं जिला विद्यालय निरीक्षक सूर्य प्रकाश सिंह,सह जिला विद्यालय निरीक्षक जटाशंकर यादव ,जिला कमिश्नर स्काउट डॉ. दिनेश प्रताप सिंह एवं सचिव डॉ गुलाब सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे जनपद के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्काउट-गाइड गतिविधियों को नई दिशा प्रदान करेगी।

जिला ट्रेनिंग कमिश्नर स्काउट धर्मेंद्र प्रताप सिंह,जिला संगठन कमिश्नर गौरव सिंह एवं जिला संगठन आयुक्त (गाइड) कांती सिंह ने भी ज्योति सिंह को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

जिला प्रशिक्षण टीम एवं स्काउट-गाइड परिवार के सदस्यों ने कहा कि उनकी सफलता युवाओं और गाइड्स के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी तथा प्रशिक्षण गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाएगी।आपको बता दें उत्तर प्रदेश से ज्योति सिंह समेत चार महिलाओं ने लीडर ट्रेनर गाइड का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया हैं।

ज्योति सिंह की इस उपलब्धि से जनपद के स्काउट-गाइड कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और इसे जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
गोराबारिक टप्पेबाजी मामले में तीन अज्ञात महिलाएं व ई-रिक्शा चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज
सुल्तानपुर, 25 जून। नगर कोतवाली क्षेत्र में टप्पेबाजी की शिकार हुई महिला की तहरीर पर पुलिस ने तीन अज्ञात महिलाओं एवं एक ई-रिक्शा चालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गभड़िया मोहल्ला निवासी राहील अनवर बेगम 22 जून को अपनी बीमार माता का हालचाल जानने के लिए मोडर्न अस्पताल जा रही थीं। महुरिया मोड़ के पास ई-रिक्शे में पहले से बैठी तीन अज्ञात महिलाओं ने बातचीत के दौरान उन्हें अपने झांसे में ले लिया। आरोप है कि महिलाओं ने बहला-फुसलाकर उनके पास मौजूद दो सोने की चेन और लगभग तीन हजार रुपये नकद निकलवा लिए।

जब पीड़िता रिक्शे से उतरीं तो उन्हें अपने साथ हुई टप्पेबाजी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने नगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर संख्या 347/2026 दर्ज कर ली है।

मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(2) के तहत दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक पंकज कुमार को सौंपी गई है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

पीड़िता ने बताया कि घटना के समय उनकी माता की तबीयत अत्यंत खराब थी और उसी सिलसिले में वह अस्पताल जा रही थीं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सार्वजनिक स्थानों एवं यात्रा के दौरान अजनबियों की बातों में न आएं तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

नगर कोतवाली पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जलसा शोहदा-ए-इस्लाम 1448 हिजरी के आठवें इजलास में औलाद-ए-नबी और अज़वाज-ए-मुतहरात पर रोशनी

सुल्तानपुर, 24 जून 2026। जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में जारी "जलसा शोहदा-ए-इस्लाम 1448 हिजरी" के आठवें इजलास का आयोजन हज़रत मौलाना मोहम्मद उस्मान क़ासमी साहब, नाज़िम जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर की सदारत में नमाज़-ए-ईशा के बाद किया गया। कार्यक्रम का आग़ाज़ मोहम्मद फहद (मुतअल्लिम जामिया इस्लामिया) की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ, जबकि नात व मनक़बत के अशआर मोहम्मद अजमल (दर्जा अरबी सोम), मोहम्मद अनस ढीमा (दर्जा अरबी अव्वल) और बाद-अज़ाँ मौलाना तारिक़ हाशिम नदवी ने पेश किए।

इजलास के ख़ुसूसी मुकर्रिर मौलाना मोहम्मद कौसर नदवी साहब ने "औलाद-उन-नबी व अज़वाज-उन-नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम" के उन्वान पर ख़िताब करते हुए कहा कि आम तौर पर यह समझा जाता है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की केवल एक ही साहबज़ादी थीं, जबकि हक़ीक़त यह है कि आपकी चार साहबज़ादियाँ—हज़रत ज़ैनब, हज़रत रुकय्या, हज़रत उम्मे कुलसूम और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हुन्ना—थीं। इसी तरह आपके तीन साहबज़ादे हज़रत क़ासिम, हज़रत अब्दुल्लाह (तय्यब व ताहिर) और हज़रत इब्राहीम रज़ियल्लाहु अन्हुम थे। उन्होंने इन तमाम औलाद-ए-मुबारका की उम्र, सीरत और ख़ुसूसियात पर इजमाली रोशनी डाली।

अपने बयान के दूसरे हिस्से में मौलाना ने अज़वाज-ए-मुतह्हरात का तज़किरा करते हुए बताया कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कुल 11 अज़वाज थीं, जिन्हें उम्महात-उल-मोमिनीन कहा जाता है। उन्होंने तमाम अज़वाज-ए-मुतह्हरात की सीरत, फ़ज़ाइल और उम्मत के लिए उनकी ख़िदमात का मुख़्तसर मगर जामेअ तआरुफ़ पेश किया।

मौलाना कौसर नदवी ने उन एतराज़ात का भी जवाब दिया जो नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निकाहों के संबंध में उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निकाहात दीनी, शरई, समाजी और सियासी मसालिह के तहत हुए, जिनका मक़सद उम्मत की रहनुमाई और इस्लामी समाज की तामीर था।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मुसलमानों के लिए यह ज़रूरी है कि वे औलाद-ए-नबी और अज़वाज-ए-मुतह्हरात के बारे में सही मालूमात हासिल करें, क्योंकि ये सभी अहल-ए-बैत का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अहल-ए-बैत का तसव्वुर केवल हज़रत फ़ातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हा तक महदूद नहीं है, बल्कि इसमें औलाद-ए-नबी और अज़वाज-ए-मुतह्हरात भी शामिल हैं।

इजलास का इख़्तिताम मौलाना मोहम्मद कौसर नदवी साहब की दुआ पर हुआ। अंत में हज़रत नाज़िम साहब ने तमाम मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए लोगों से अपील की कि वे जलसे के बाक़ी बचे दोनों इजलासों में अपने दोस्तों और अहबाब के साथ शिरकत करें।

इस इल्मी व रूहानी इजलास के पैग़ाम को अवाम तक पहुँचाने के लिए जदीद मीडिया और इंटरनेट का प्रभावी उपयोग किया गया, जिससे कार्यक्रम की जानकारी दूर-दराज़ क्षेत्रों तक भी पहुँची।
नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा शासन से धनावंटन कराकर सड़क व नाली निर्माण कार्य का पालिकाध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल ने भूमि पूजन कर शुभारम्भ क

सुल्तानपुर ।आदर्श नगर वार्ड स्थित पल्टू का पुरवा तिराहे से एम0एस0बी0 स्कूल को जाने वाला मार्ग, जो कि गत कई वर्षों से अत्यन्त जर्जर अवस्था में था, नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा शासन से धनावंटन कराकर सड़क व नाली निर्माण कार्य का पालिकाध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल ने भूमि पूजन कर शुभारम्भ किया।

इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष ने बताया कि काफी समय से स्थानीय सभासद व लोगों द्वारा इस जर्जर सड़क के पुनर्निर्माण व नाली इत्यादि सुविधाओं की मॉग की जा रही थी, जिसकी पहल कर पालिका द्वारा प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, पं0 दीन दयाल उपाध्याय नगर विकास योजना के तहत लगभग 45.00 लाख की लागत से इस 317मी0 लम्बी सी0सी0सड़क व नाली के कार्य का शुभारम्भ किया गया है। नगर पालिका द्वारा इसी प्रकार से आगे भी विभिन्न मार्गों नाला-नालियों का निर्माण सहित चौराहों के सौन्दर्यीकरण आदि नगर क्षेत्र के विकास कार्य कराये जाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, हम ‘‘स्वच्छ सुन्दर सुलतानपुर’’ बनाते हुए समग्र विकास का कार्य कर रहे हैं, जिसके लिए पालिका पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध होने के साथ ही विकास के पथ पर अग्रसर है। पालिकाध्यक्ष ने इस अवसर पर स्थानीय लोगों से अपील किया कि पर्यावरण एवं आने वाले समय को देखते हुए पूरे मोहल्ले में उचित स्थान देखकर अधिक से अधिक वृक्ष लगायें तथा अपने आस-पास स्वच्छता का विशेष ध्यान दें। भूमि पूजन कार्यक्रम का संयोजन स्थानीय सभासद विजय कुमार जायसवाल ने किया। इस अवसर पर सभासद मंगरू प्रसाद प्रजापति एवं स्थानीय गायत्री विजय मिश्रा, श्रीराम शुक्ला, जमुना प्रसाद तिवारी, हृदय नारायण रावत, दिलीप गुप्ता, नरेंन्द्र श्रीवास्तव, बाल चंद सोनी, मनोज मौर्या, परमानंद सिंह, छंगा, त्रिवेणी प्रसाद, रौनक त्रिपाठी, हजारी सोनी, राम टहल सहित भारी संख्या में स्थानीय जनमानस व गणमान्य बन्धु उपस्थित रहे।
समरस फाउंडेशन ने किया पूर्व अधीक्षक रामचंद्र पांडे का सम्मान
सुल्तानपुर। मुंबई की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन द्वारा आज बृहन्मुंबई महानगरपालिका शिक्षण विभाग के पूर्व अधीक्षक रामचंद्र पांडे का सुल्तानपुर जनपद के बेदूपारा गांव स्थित उनके घर पर सम्मान किया गया। संस्था के महासचिव तथा वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे और संस्था के सचिव एडवोकेट भारत पांडे ने संस्था की तरफ से उनका सम्मान किया तथा संस्था के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह की तरफ से शुभकामनाएं दी। 2010 में सेवानिवृत होने के बाद श्री पांडे लगातार शैक्षणिक तथा सामाजिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।  गांव में भी उन्होंने सुंदर घर बनाने के साथ साथ आसपास आम के बगीचे लगा रखे हैं, जिनमें तैयार फलों का भी आज आनंद लिया गया। रामचंद्र पांडे ने कहा कि सेवानिवृत होने के बाद गांव में रहने का आनंद ही कुछ और है। यहां शुद्ध जल ,शुद्ध हवा और शुद्ध भोजन मिलने से शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा प्राप्त होती है।
जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में 'जलसा,शुहदा-ए-इस्लाम' की सातवीं नशिस्त सम्पन्न,
"सहाबा-ए-कराम नबी और उम्मत के दरमियान एक मज़बूत वास्ता हैं,दीन की हिफ़ाज़त के लिए उनकी अज़मत को समझना ज़रूरी है"-मुफ्ती मुहम्मद सालेह सहारनपुरी।

सुल्तानपुर, जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में जारी दस रोज़ा 'जलसा शुहदा-ए-इस्लाम' की सातवीं नशिस्त इल्मी, रूहानी और फ़िक्री माहौल में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम की सदारत जामिया के नाज़िम-ए-आला मौलाना मुहम्मद उस्मान क़ासमी ने की, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों से आए उलमा-ए-कराम ने शिरकत की।
नशिस्त के मेहमान-ए-ख़ुसूसी एवं जामिया मज़ाहिर उलूम सहारनपुर के अमीन-ए-आम मुफ्ती मुहम्मद सालेह सहारनपुरी ने अपने ख़िताब में सहाबा-ए-कराम की अज़मत और उम्मत के साथ उनके गहरे ताल्लुक़ पर तफ़्सीली रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि सहाबा-ए-कराम नबी-ए-अकरम ﷺ और उम्मत के दरमियान वह मज़बूत कड़ी हैं जिनके ज़रिये क़ुरआन, सुन्नत और दीन की तमाम तालीमात हम तक पहुँची हैं। उन्होंने कहा कि सहाबा की अदालत और अमानत पर शक करना दरअसल दीन की बुनियादों पर सवाल उठाने के बराबर है।
मुशाजरात-ए-सहाबा के मौज़ू पर वज़ाहत करते हुए उन्होंने कहा कि सहाबा-ए-कराम के दरमियान जो इख़्तिलाफ़ात हुए, वे किसी नफ़्सानी ख़्वाहिश का नतीजा नहीं थे बल्कि इज्तिहादी मसाइल में राय के फ़र्क़ की बुनियाद पर थे। उन्होंने हज़रत तल्हा (रज़ि.) की मिसाल पेश करते हुए कहा कि जिन हस्तियों को दुनिया में ही जन्नत की बशारत दी गई हो, उनके बारे में बदगुमानी की कोई गुंजाइश नहीं रहती। उन्होंने कहा कि जंगे सिफ़्फ़ीन के सिलसिले में अहले सुन्नत का मौक़िफ़ यही है कि हज़रत अली (रज़ि.) का इज्तिहाद ज़्यादा दुरुस्त था, लेकिन हज़रत मुआविया (रज़ि.) को गुनहगार नहीं कहा जा सकता।
इसी नशिस्त को ख़िताब करते हुए मुफ्ती अब्दुर रशीद ने कहा कि सहाबा-ए-कराम हिदायत के चमकते सितारे और रोशनी के मीनारे हैं। वे इल्म, अमल, तज़किया और इख़्लास की बुलंद मिसाल थे तथा उनकी फ़ज़ीलत और मक़बूलियत की गवाही स्वयं अल्लाह तआला ने क़ुरआन में दी है।
कार्यक्रम का आग़ाज़ जामिया के उस्ताज़-ए-हिफ्ज़ मौलाना इफ़हामुल्लाह की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ। इसके बाद दर्जा अरबी चहारुम के छात्र मुहम्मद अहनफ़ तथा क़ारी मुहम्मद नदीम फ़ैज़ी ने नात व मनक़बत पेश कर महफ़िल को रूहानी रंग में रंग दिया। वहीं दर्जा फ़ारसी के छात्र मुहम्मद यासिर इलाहाबादी ने मदह-ए-सहाबा के विषय पर प्रभावशाली तक़रीर प्रस्तुत की।
नशिस्त का समापन दुआ के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने इस प्रकार के इल्मी और इस्लाही कार्यक्रमों को समाज में दीन की सही समझ और उम्मत की राहनुमाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
डीएम व एसपी द्वारा संयुक्त रूप से कोचिंग सेंटर का किया गया औचक निरीक्षण

जिलाधिकारी ने सभी कोचिंग संस्थानों को सुरक्षा मानकों के दृष्टिगत समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिये निर्देश


सुलतानपुर।शासन द्वारा दिये गये निर्देश के क्रम में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह व पुलिस अधीक्षक चारू निगम द्वारा संयुक्त रूप से कोहिनूर इण्डिया कोचिंग सेंटर, निकट मेहमान होटल, सिविल लाइन सुलतानपुर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अध्ययनरत छात्र/छात्राओं हेतु उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैस- बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, विद्युत, अग्निशमन उपकरण, प्रवेश व निकास हेतु पर्याप्त जगह का होना, रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, विद्युत व अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र आदि के सम्बन्ध में जायजा लिया गया।
  
जिलाधिकारी द्वारा निरीक्षण के दौरान मानक के अनुरूप अपनाई जाने वाली सभी सावधानियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने कोचिंग सेन्टर का रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। संचालक द्वारा प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया, जिसकी वैधता जून, 2027 तक विधिमान्य है। इसी प्रकार उन्होंने  अग्निशमन यंत्र का मौके पर डिमॉन्सट्रेशन भी कराया गया, जो सही पाया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संस्थान प्रबन्धक को निर्देशित किया कि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाय तथा शासन द्वारा निर्धारित सभी मानको का अनुपालन सुनिश्चित किया जाय।
  
जिलाधिकारी ने जनपद के सभी 196 कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किये जाने हेतु अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। उन्होंने निर्देशित किया कि तीन दिन का अभियान चलाकर सभी सुरक्षा मानकों जैसे- अग्निशमन यंत्र, एनओसी, वाल पैनलिंग, आपातकालीन द्वार, विद्युत ओवरलोड आदि पैरामीटर्स पर सभी अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें तथा जिन कोचिंग संस्थानों में मानक के अनुरूप व्यवस्थाएं नहीं पायी जाती हैं, उन्हें नोटिस दिया जाय, जिससे सुरक्षा मानको का प्रबन्ध कराया जा सके।           
          
पुलिस अधीक्षक द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत आपाकालीन निकास द्वार, सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता, अग्निशमन उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता तथा एनओसी आदि के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गयी। उन्होंने सीएफओ से अग्निशमन एनओसी आदि उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कोचिंग संचालक को निर्देशित किया कि सभी सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाय।
सुलतानपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की होगी व्यापक जांच, मानक पूरे न करने वालों पर होगी कार्रवाई
सुलतानपुर, 23 जून। राजस्थान के कोटा और  लखनऊ एव अन्य स्थानों पर कोचिंग संस्थानों में हुई दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए सुलतानपुर प्रशासन ने जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच शुरू कर दी है। इसी क्रम में मंगलवार को जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से सिविल लाइन स्थित मेहमान होटल के निकट संचालित कोहिनूर इंडिया कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया तथा वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में लगभग 196 कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इन सभी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) मानकों, भवन की संरचना, आपातकालीन निकास व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा उपायों की गहन जांच कराई जा रही है। इसके लिए प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग जांच टीमें गठित की गई हैं, जो स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी कोचिंग संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि जिन कोचिंग संस्थानों में एयर कंडीशनर (एसी) एवं अन्य विद्युत उपकरण संचालित हो रहे हैं, वहां विद्युत कनेक्शन की स्वीकृत क्षमता (लोड) की जांच की जाए। यदि कहीं आवश्यकता से अधिक विद्युत भार का उपयोग किया जा रहा है तो उसे चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कई भवन स्वामी एवं संचालक भवनों के अंदर सजावट के नाम पर लकड़ी अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्री की पैनलिंग करा लेते हैं, जो आग लगने की स्थिति में बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे स्थानों पर आग तेजी से फैलती है और बचाव कार्य में भी कठिनाइयां आती हैं। इसलिए इन बिंदुओं की भी विशेष रूप से जांच की जाएगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन कोचिंग संस्थानों में कोई कमी पाई जाएगी, उन्हें निर्धारित समयावधि में कमियों को दूर करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बावजूद यदि संचालक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन की इस पहल को विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिले भर में चल रहे निरीक्षण अभियान से कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सकेगा !!