पासपोर्ट, आधार, वोटर आईडी नहीं, तो क्या है भारतीय नागरिकता का सबूत? जानें क्या है पूरा मामला

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विदेश मंत्रालय के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर यह बात कही कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है नागरिकता का सबूत नहीं। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर एक ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर पासपोर्ट भी सबूत नहीं है, तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सबसे स्ट्रांग डॉक्यूमेंट कौन-सा है?

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का सबूत?

मंत्रालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण तो है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम और निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक मकसद नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेशों में उनकी पहचान व राष्ट्रीयता को स्थापित करना है। हालांकि यह विदेश में आपकी पहचान बताता है, लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज

विदेश मंत्रालय स्पष्ट करता है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक काम किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने की अनुमति देना और विदेश में उसकी पहचान स्थापित करना है, न कि भारत के अंदर उसकी नागरिकता साबित करना। इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर या धोखे से भारत का पासपोर्ट हासिल कर लेता है, जैसे- पाकिस्तान का कोई खुफिया जासूस भारत का पासपोर्ट ले लेता है, लेकिन बाद में भारत में ही रहते हुए उसकी नागरिकता पर विवाद पैदा हो जाता है तो वह व्यक्ति पासपोर्ट दिखाकर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेगा। उसे अलग-अलग दस्तावेजों और मूल परिवार की जानकारी देकर ही नागरिकता साबित करनी होगी। चूंकि, किसी पाकिस्तानी व्यक्ति के परिवार का भारत में ब्योरा मिलना या उसकी शिक्षा की जानकारी भारत में मिलना मुश्किल है, ऐसी स्थिति में विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को रद्द कर सकता है। इसलिए सिर्फ पासपोर्ट का होना नागरिकता की गारंटी नहीं है।

नागरिकता का सबसे पुख्ता प्रमाण

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई और लोग पूछने लगे कि अगर पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का सबूत नहीं हैं तो फिर असली सबूत क्या है। कानूनी रूप से नागरिकता का सबसे निर्णायक प्रमाण गृह मंत्रालय की तरफ से जारी किया गया पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र होता है। हालांकि, ये प्रमाणपत्र आमतौर पर सिर्फ उन लोगों को जारी किए जाते हैं, जिन्होंने विदेशी मूल का होने के बाद कानूनी प्रक्रिया से भारत की नागरिकता ली हो। अधिकतर भारतीय, जो जन्म से नागरिक हैं के पास यह प्रमाणपत्र नहीं होता है।

नागरिकता के लिए फिर कौन सा कागज चाहिए

2019 के दिसंबर में केंद्र सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि नागरिकता के सबूत के तौर पर कौन से दस्तावेज मान्य होंगे, इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। CAA-NRC को लेकर संदेह दूर करने के मकसद से जारी इस प्रेस रिलीज में कुछ हद तक अनिश्चितता जताते हुए कहा गया कि ऐसे दस्तावेज में 'वोटर कार्ड, पासपोर्ट, आधार, लाइसेंस, इंश्योरेंस के कागजात, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र, जमीन या घर से जुड़े दस्तावेज या सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी इसी तरह के अन्य दस्तावेज' शामिल हो सकते हैं।

वेनेजुएला भूकंप में अब तक 32 लोगों की मौत, 700 से ज्यादा घायल, भारत करेगा हर संभव मदद

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वेनेजुएला में एक के बाद एक दो बड़े भूकंप आए। पहला सैन फेलिप शहर से 24 किलोमीटर ईस्टर्न नॉर्थईस्ट में भारतीय समानुसार सुबह 3 बजकर 34 मिनट पर 7.2 तीव्रता का आया। वहीं दूसरा युमारे कस्बे से 23 किलोमीटर साउथ ईस्ट में भारतीय समयानुसार तड़के सुबह 3 बजकर 35 मिनट पर 7.5 तीव्रता का आया। इन दो शक्तिशाली भूकंपों में अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 लोग घायल हुए हैं।

अब तक 32 मौतें, 700 से ज्यादा घायल

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कहा है कि अब तक 32 लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव कार्य में लगी एजेंसियों के मुताबिक 700 से अधिक लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है तथा मृतकों और घायलों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। सरकार के मुताबिक सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। कई इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है और आपातकालीन एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेजी से चला रही हैं।

पीएम मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस त्रासदी से हुई तबाही से वह बेहद दुखी हैं। उन्होंने भारत की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां के लोगों, खासकर अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. पीएम मोदी ने कहा कि भारत घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता है और इस मुश्किल समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

ट्रंप ने बोले- हम मदद को तैयार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में आए दो बड़े भूकंपों पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के महान लोगों पर आए ये दोनों भूकंप बहुत बड़े स्तर के थे। और इसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। अमेरिका मदद के लिए पूरी तरह तैयार और इच्छुक है। मैंने अपनी सरकार की सभी एजेंसियों को तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। ट्रंप ने वेनेजुएला के लोगों को अपना नया और अच्छा दोस्त बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ा रहेगा और हर संभव सहायता पहुंचाएगा। शुरुआती खबरें अच्छी नहीं हैं!!!

शहबाज शरीफ की विदाई पक्की...’, पाकिस्तानी के पूर्व मंत्री के दावे से बढ़ी हलचल

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की विदाई तय है। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने ये दावा किया है। उन्होंने कहा है यह साल प्रधानमंत्री के रूप में शाहबाज शरीफ का आखिरी साल होने जा रहा है। उन्होंने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब शहबाज शरीफ ईरान को लेकर कूटनीतिक सफलताओं का जश्न मना रहे हैं।

शहबाज नहीं जनरल मुनीर ले रहे अहम फैसले

एक पॉडकास्ट में पूर्व पाकिस्तानी मंत्री ने दावा किया है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के तौर पर शहबाज शरीफ का ये आखिरी साल होगा। उन्होंने कहा कि शाहबाज शरीफ देश में कोई फैसले नहीं ले रहे हैं। देश में सभी अहम फैसले जनरल मुनीर ले रहे हैं।

मिफ्ताह इस्माइल के दावे के पीछे का तर्क

मिफ्ताह इस्माइल ने पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी की एक्स पर एक पोस्ट का हवाला दिया और कहा कि नकवी ने ईरान समझौते के लिए फील्ड मार्शल को बधाई दी और प्रधानमंत्री का नाम तक उनकी पोस्ट में नहीं था। उन्होंने इसे संकेत बताया कि कैबिनेट में बैठे लोग भी अब मान रहे हैं कि शहबाज शरीफ की विदाई पक्की है। उन्होंने इसके पीछे ये तर्क भी दिया कि पिछले चार साल में पाकिस्तान इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। गरीबी और बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है और विकास 4 फीसदी भी नहीं हुआ।

शहबाज से अहम फैसला लेने का अधिकार छीन लिया

इस्माइल ने इसके आगे बताया कि पाकिस्तानी राजनीति में इस वक्त स्थिति ही अलग है। इस समय सारे अहम फैसले पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व से लिए जा रहे हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि कुछ घरेलू फैसले शहबाज शरीफ खुद से कर रहे हैं लेकिन कोई भी अहम फैसला लेने का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। शहबाज शरीफ पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के सामने सरेंडर कर चुके हैं, यही वजह है कि वो टिके हुए भी हैं। हालांकि वे ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रहने वाले हैं।

UN में भारत ने फिर पाकिस्‍तान को लताड़ा, कश्मीर के जिक्र पर सीखा दिया सबक

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक मामला है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक की टिप्पणी को बताया गैर जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित एरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारतीय राजदूत ने हरीश पर्वतनेनी कहा, "यह हैरानी की बात है कि सह अध्यक्ष होने के बावजूद पाकिस्तान ने एरिया फॉर्मूला बैठक का राजनीतिक करण किया और भारत के जम्मू-कश्मीर इलाके पर गैर जरूरी टिप्पणियां कीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।"

यूएन को भी दिखाया आईना

भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।

नीट रीएग्जाम से पहले NTA की बड़ी लापरवाही, नागपुर के छात्र को अबू धाबी में मिला परीक्षा सेंटर

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देशभर में 21 जून को नीट का रीएग्जाम होना है। 22 लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा के लिए अपने-अपने सेंटरों पर जाने को तैयार हैं। इस बीच परीक्षा से पहले नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नागपुर के अब्दुल्ला मोहम्मद का परीक्षा केंद्र अबू धाबी में आवंटित कर दिया गया है।

21 जून को होने वाले नीट रेग्जाम से पहले नए एडमिट कार्ड जारी किए गए हैं। इसमें नागपुर के एक छात्र को दुबई के अबूधाबी में परीक्षा सेंटर मिला है। ऐसे में छात्र परेशान है कि पिछली बार देश में दिया एग्जाम अब विदेश में कैसे। उसके पास तो वहां जाने के लिए पासपोर्ट भी नहीं।

मूल परीक्षा नागपुर में फिर रीएग्जाम अबूधाबी में कैसे?

छात्र अब्दुल्ला के पिता डॉ. मोहम्मद तालिब ने सवाल उठाया है कि जिस छात्र ने NEET की 3 मई को हुई मूल परीक्षा नागपुर में दी थी, उसे रविवार (21 जून) को होने वाली पुनर्परीक्षा का केंद्र अबूधाबी कैसे दिया जा सकता है? पिता ने छात्र के साल बर्बाद होने का भी सवाल उठाया है।

अबू धाबी का सेंटर कैसे मिला?

परिवार का कहना है कि आवेदन भरते समय छात्र ने पहली पसंद नागपुर, दूसरी वर्धा और तीसरी भंडारा चुना था। इसके बावजूद विदेश में परीक्षा केंद्र आवंटित होना समझ से परे है। एडमिट कार्ड देखने के बाद परिवार पूरी तरह हैरान रह गया।

एनटीए ने क्या कहा?

परेशान परिवार ने तुरंत एनटीए हेल्पलाइन से संपर्क कर अपनी परेशानी बताई। पता चला कि ये गलती से हुआ है, इसे ठीक कर दिया जाएगा। एनटीए एक्स पर एक पोस्ट जारी कर कहा है कि छात्र की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। जरूरी जांच-पड़ताल के बाद कुछ ही घंटों में उम्मीदवार को नागपुर में एक सेंटर अलॉट कर दिया जाएगा।

अब एक ही शिवसेना बची...’, अमित शाह का उद्धव ठाकरे पर बड़ा तंज

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केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिवसेना के दो गुटों में चल रही कलह के बीच तीखा तंज कसा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ही उद्धव खेमे पर तंज कसा और कहा कि अब एक ही शिवसेना है, कोई गुट नहीं बचा है। शनिवार को उन्होंने कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला बोला।

अब केवल एक ही 'शिवसेना'-अमित शाह

अमित शाह ने वहां महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर परिसर में विकास कार्यों की शुरुआत की। इसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'पहले एकनाथ शिंदे के नाम के आगे 'शिंदे गुट' लगाना पड़ता था, लेकिन अब केवल एक ही 'शिवसेना' रह गई है, अब कोई अन्य गुट बाकी नहीं रहा है।' अमित शाह ने एकनाथ शिंदे का परिचय देते हुए यह टिप्पणी की। जब शाह ने यह कहा तो मंच पर एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। 

12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की-अमित शाह

अमित शाह ने कोल्हापुर में कहा कि कहा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा कि मोदी के नेतृत्व में 12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की, विकास किया और अपनी संस्कृति को संजोकर रखा। उन्होंने महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार की तारीफ की। शाह ने कहा कि हमारे लिए पश्चिम बंगाल को बहुत मुश्किल लक्ष्य बताय जा रहा था लेकिन अंतिम चुनाव में वहां भी बीजेपी की सरकार बनी है। 

शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच कलह

बता दें कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच फिर से कलह मची हुई है। उद्धव सेना के 6 सांसदों के बारे में चर्चा है कि वे किसी भी दिन एकनाथ शिदे गुट का दामन थाम सकते हैं। इन सभी को संभालने के लिए दिल्ली में उद्धव सेना की एक मीटिंग भी हुई थी, लेकिन ये लोग नहीं पहुंचे थे। ऐसे में साफ है कि सभी 6 सांसद बागी होने को तैयार हैं। इस बीच शुक्रवार को दोनों गुटों ने शिवसेना की स्थापना के 60 सालों पर अलग-अलग आयोजन किए। कुछ जगहों पर तनाव की स्थिति भी दोनों गुटों के बीच देखी गई।

उद्धव ठाकरे की शिवसेना में दरार, संसदीय दल की बैठक से सांसद नदारद, 9 में से 6 ने दिया धोखा

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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) एक बार फिर गहरे संकट में है। उद्धव ठाकरे को कुछ ही वर्षों के अंदर दूसरा जोरदार झटका लगने के आसार काफी बढ़ गए हैं। उद्धव ने पार्टी में बगावत की खबरों के बीच शिवसेना-यूबीटी के लोकसभा सांसदों की गुरुवार को नई दिल्‍ली में बैठक बुलाई थी। इसमें सभी 9 सांसदों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया था। पार्टी हाईकमान के आदेशों के बावजूद 9 में से सिर्फ 3 सांसद ही बैठक में शामिल हुए।

गैरहाजिर सांसदों से होगा जवाब तलब

बगावत और कुछ सांसदों के पार्टी बैठक से गैरहाजिर रहने के बीच पार्टी ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। पार्टी नेता अनिल देसाई ने कहा कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों को नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा में पार्टी के नेता अरविंद सावंत गैरहाजिर सांसदों से जवाब तलब करेंगे। अनिल देसाई ने कहा कि पार्टी की बैठक की सूचना सभी सांसदों को पहले से दी गई थी और विधिवत व्हिप भी जारी किया गया था। इसके बावजूद कुछ सांसद बैठक में नहीं पहुंचे, जिसे पार्टी विरोधी गतिविधि माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित सांसदों से पूछा जाएगा कि नोटिस और व्हिप जारी होने के बावजूद वे बैठक में क्यों नहीं आए।

सदस्यता रद्द करने पर होगा विचार-संजय राउत

बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसद नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे हैं। इन सभी के पार्टी से अलग गुट बनाने की चर्चा है। बैठक में तीन लोकसभा सांसद- अरविंद सावंत, राजभाऊ वाजे और अनिल देसाई शामिल हुए। संजय राउत खुद राज्यसभा सदस्य के तौर पर इस बैठक में मौजूद थे। राउत ने साफ तौर पर कहा कि जो सांसद इस बैठक में नहीं आए, उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है। पार्टी ने अब इन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने कहा पार्टी उनकी सदस्यता रद्द करने पर भी विचार करेंगी।

शिवसेना में टूट का इतिहास

महाराष्ट्र की राजनीति में खुद को बाघ के रूप में पेश करने वाली शिवसेना में टूट का इतिहास बनता जा रहा है। शिवसेना के स्थापना काल के बाद पार्टी में पहली बार 1991 में छगन भुजबल ने 17 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ी थी। भुजबल ने बालासाहेब ठाकरे की कार्यशैली और पार्टी में अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए बगावत की थी। तब भुजबल ने कांग्रेस का दामन थामा था जो शिवसेना के इतिहास का पहला बड़ा राजनीतिक विद्रोह था। लेकिन, 2003 में उद्धव ठाकरे के शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी चार बार टूटी। 2005 में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने उद्धव को पार्टी का उत्तराधिकारी बनाने का विरोध किया और पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

असली झटका जून 2022 में लगा

दूसरा विद्रोह 2006 में हुआ था जब चचेरे भाई राज ठाकरे ने अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की स्थापना की थी। असली झटका जून 2022 में लगा, जब एकनाथ शिंदे ने 40 विधायकों के साथ बगावत की थी। इस विद्रोह से उद्धव का सीएम पद, पार्टी का नाम और चुनाव निशान भी छिन गया। इस टूट के बाद ही उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा चुनाव में 9 और विधानसभा चुनाव में 20 सीटों तक ही सिमट कर रह गई।

अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से क्यों 'इंडो' शब्द हटाया? भारत की रणनीतिक भूमिका पर उठे सवाल

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया गया है। अब इस कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया गया है। 'इंडो' शब्द को वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जोड़ा गया था। इस तरह अमेरिका ने आठ साल पहले लिए गए अपने फैसले को उलट दिया है। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

पेंटागन ने क्या कहा?

पेंटागन के अनुसार यह बदलाव केवल ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। विभाग का कहना है कि इसे पुनः अपनाने से सैनिकों के बीच गौरव और परंपरा की भावना मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नाम परिवर्तन से कमांड की जिम्मेदारियों, क्षेत्राधिकार या सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियां नहीं

पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा

अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। यानी इसके नाम से 'Indo' शब्द हटा दिया है। 2018 में इस क्षेत्र पर हिंदुस्तान के प्रभाव का सम्मान करते हुए अमेरिका ने अपने कमांड का नाम यूएस पैसिफिक कमांड रखा था। उस वक्त मोदी सरकार ने इसे अपनी जीत बताया था और मोदी के विश्वगुरु बनने का ढोल पीटा था। अब जब अमेरिका ने इस क्षेत्र का नाम बदल दिया है, तो सुई टपक सन्नाटा है। मोदी सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा जा रहा है। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कंप्रोमाइज्ड हैं, जो ट्रंप के सामने एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं। इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।'

शशि थरूर ने क्या कहा?

अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?" उन्होंने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इस विभाग ने कहा कि नाम में बदलाव कमांड के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी।

यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है?

अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।

अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन

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आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के लिए समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए है। समझौते के वक्त ईरान और अमेरिका आमने-सामने नहीं थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अलग-अलग जगहों से दोनों देशों के बीच 3 महीने से अधिक समय से जारी जंग को खत्म करने के लिए एमओयू पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरानी राष्ट्रपति यहां से 5000 किमी दूर तेहरान में बैठकर डील साइन कर रहे थे।

खुल जाएगा होर्मुज

फिलहाल बताया जा रहा है कि इस समझौते का ज्यादातर हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा। इसमें जंग को खत्म करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए तेल और प्राकृतिक गैस पहुंचाए जाते हैं और इसके बंद होने से ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।

तेहरान को यूरेनियम के भंडार कम करना होगा

दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत तेहरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा और अमेरिका की ओर से लगाए गए बैन को हटा लिया जाएगा। इस करार के तहत ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल जाएगी।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर

इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

MEDIN EXPO Chennai 2026 में LABOLIT को मिला सम्मान, उमा साइंटिफ़िक ने बढ़ाया भारतीय लैब उपकरण उद्योग का गौरव
चेन्नई । देश की अग्रणी पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण निर्माता कंपनी LABOLIT, जो UMA SCIENTIFIC द्वारा संचालित है, को MEDIN EXPO Chennai 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नवाचारपूर्ण प्रयोगशाला समाधानों के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक एवं पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण उद्योग के लिए भी गर्व का विषय है।
प्रदर्शनी के दौरान LABOLIT के स्टॉल पर बड़ी संख्या में देश ही नहीं अपितु विदेश के   पैथालॉजी प्रयोगशाला विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं व्यवसायिक आगंतुकों ने पहुंचकर कंपनी के उत्पादों और तकनीकी नवाचारों की सराहना की। कंपनी ने अपने उन्नत Micropipettes, Multichannel Micropipettes, Bottle Top Dispensers सहित विभिन्न प्रयोगशाला उपकरणों का प्रदर्शन किया, जिन्हें आगंतुकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। कंपनी प्रबंधन ने इस सम्मान को अपने ग्राहकों, व्यापारिक सहयोगियों और शुभचिंतकों के विश्वास एवं सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि LABOLIT का उद्देश्य भारतीय पैथालॉजी प्रयोगशालाओं को विश्वस्तरीय गुणवत्ता के उपकरण उपलब्ध कराना है, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और परीक्षण कार्यों को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
LABOLIT – Pulse of World Sciences के संकल्प के साथ कंपनी लगातार नवाचार, गुणवत्ता और ग्राहक संतुष्टि के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रही है। MEDIN EXPO Chennai 2026 में प्राप्त यह सम्मान कंपनी की बढ़ती प्रतिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली का प्रमाण है। कंपनी के संस्थापक एवं निदेशक शुभम पांडेय ने इस अवसर पर कहा,
“यह सम्मान केवल LABOLIT का नहीं, बल्कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नवाचार और गुणवत्ता के प्रति हमारे संकल्प का सम्मान है। हमारा लक्ष्य ‘Made in India’ उत्पादों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। हम ऐसे वैज्ञानिक उपकरण विकसित कर रहे हैं जो गुणवत्ता, सटीकता और विश्वसनीयता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें। आने वाले वर्षों में LABOLIT को वैश्विक प्रयोगशाला उपकरण उद्योग के अग्रणी ब्रांडों में शामिल करना हमारा संकल्प है।”
इस अवसर पर LABOLIT एवं UMA SCIENTIFIC की पूरी टीम को उद्योग जगत एवं शुभचिंतकों द्वारा बधाइयाँ दी गईं ।