डिजिटल संचार के क्षेत्र में सूचना विभाग की प्रभावी पहल
* विभाग के आधिकारिक यूट्यूब चैनल ’’सूचना प्रवाह’’ का हुआ शुभारंभ

*  सरकार की योजनाओं की जानकारी सहजता पहुंचेगी आमजन तक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा डिजिटल संचार को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विभाग के आधिकारिक यूट्यूब चौनल “सूचना प्रवाह” का शुभारंभ आज लोक भवन, लखनऊ में किया गया।
चैनल का शुभारंभ सूचना निदेशक विशाल सिंह एवं अपर सूचना निदेशक अरविंद कुमार मिश्र द्वारा किया गया। इस अवसर पर निर्माता फिल्म अभय कुमार श्रीवास्तव, फिल्म निर्माण प्रबंधक संदीप पांडेय सहित सूचना विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
’सूचना प्रवाह’ उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का आधिकारिक डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं, महत्वपूर्ण निर्णयों, उपलब्धियों, जनहितकारी कार्यक्रमों तथा शासन की विभिन्न पहलों से संबंधित प्रमाणिक, तथ्यपरक एवं त्वरित जानकारी आमजन तक पहुँचाई जाएगी। इसके साथ ही विभाग द्वारा निर्मित वृत्तचित्र, विशेष रिपोर्ट, प्रेरणादायी वीडियो, सरकारी अभियानों तथा महत्वपूर्ण आयोजनों का भी नियमित प्रसारण इस मंच पर किया जाएगा।
इस अवसर पर सूचना निदेशक विशाल सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया जनसंचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में “सूचना प्रवाह” यूट्यूब चैनल सरकार और जनता के बीच संवाद का एक सशक्त सेतु सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से नागरिकों को सरकार की योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यों की विश्वसनीय और प्रमाणिक जानकारी सरल, सहज एवं आकर्षक स्वरूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
अपर निदेशक अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि विभाग समय के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए जनसंचार के नए आयाम स्थापित कर रहा है। “सूचना प्रवाह” के माध्यम से प्रदेश की विकास यात्रा, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा शासन की उपलब्धियों को अधिक व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाया जाएगा, जिससे नागरिकों को सरकारी योजनाओं की सही एवं समयबद्ध जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
यह यूट्यूब चैनल प्रदेश सरकार की उपलब्धियों और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के प्रसार का एक प्रभावी मंच बनेगा तथा आमजन और शासन के बीच संवाद को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
“12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के” अभियान के तहत लखनऊ में बाल श्रम उन्मूलन कार्यशाला आयोजित
लखनऊ। केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे “12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के” अभियान के अन्तर्गत 05 जून से 21 जून 2026 तक प्रदेश में समेकित जन-कल्याण एवं जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आज बाल मजदूरी को समाप्त करने के उद्देश्य से समुदाय व हितधारकों की सहभागिता हेतु लखनऊ में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
होटल बेबीयन इन, इन्दिरा नगर, लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा बाल श्रमिकों के अभिभावकों को बाल श्रम के दुष्प्रभावों एवं बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा के अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया। वक्ताओं ने बाल मजदूरी की रोकथाम के लिए समुदाय की सक्रिय भूमिका पर बल दिया।
अभियान के तहत जनपद में हरदोईया गोसाईगंज, लखनऊ में श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्रीमती शक्ति राय द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण कैम्प का आयोजन किया गया। शिविर में रक्तचाप, शुगर, एनीमिया आदि की जांच कर परामर्श दिया गया।
चारबाग क्षेत्र के निर्माण स्थल पर श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम कुमार एवं इम्तेयाज अहमद अंसारी द्वारा उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया गया। पात्र श्रमिकों को बोर्ड की योजनाओं–चिकित्सा सहायता, शिक्षा सहायता, विवाह सहायता आदि के लाभों से अवगत कराते हुए अधिकाधिक पंजीकरण कराए जाने हेतु कैम्प लगाया गया।
बिलिंकिट स्टोर, आलमबाग में श्रम प्रवर्तन अधिकारी सन्तोष कुमार एवं श्रीमती पल्लवी सिंह द्वारा असंगठित क्षेत्र एवं गिग/प्लेटफार्म वर्कर्स के पंजीकरण हेतु विशेष शिविर लगाया गया। शिविर में ई-श्रम पोर्टल, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM) तथा लघु व्यापारी मानधन योजना (NPS-Trader) के अन्तर्गत पंजीकरण कराते हुए श्रमिकों को वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभ समझाए गए।
अपर श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र, श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि “12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के” अभियान का मुख्य उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम पंक्ति तक पहुंचाना है। बाल श्रम मुक्त समाज व असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है।
अब हर वीकेंड आसान होगी धार्मिक यात्रा, योगी सरकार का श्रद्धालुओं को बड़ा तोहफा

-  यूपीएसटीडीसी ने पांच धार्मिक टूर पैकेज किए नियमित, मात्र 1000 रुपये में अयोध्या, नैमिषारण्य, चित्रकूट और विंध्याचल धाम के दर्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को बड़ा उपहार देते हुए धार्मिक पर्यटन को और अधिक सुलभ बना दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के तहत पांच प्रमुख वीकेंड धार्मिक टूर पैकेजों को नियमित रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है।
अब श्रद्धालु प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार और रविवार को अपनी सुविधा के अनुसार धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। ‘सुगम दर्शन’ योजना के अंतर्गत लखनऊ से अयोध्या और नैमिषारण्य, जबकि प्रयागराज से अयोध्या, चित्रकूट तथा विंध्याचल धाम के लिए नियमित टूर सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
यूपीएसटीडीसी के अनुसार इन सेवाओं का लाभ इसी सप्ताहांत से मिलना शुरू हो जाएगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बुकिंग प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। श्रद्धालु ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपनी सीट आरक्षित करा सकेंगे।
यात्रा के लिए आरामदायक अर्बेनिया ट्रैवलर वाहनों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेज का किराया मात्र 1000 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रियायतें दी जाएंगी, जबकि समूह बुकिंग पर अतिरिक्त छूट का लाभ भी मिलेगा।
यूपीएसटीडीसी का मानना है कि इस पहल से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और प्रदेश के प्रमुख आस्था स्थलों तक आम लोगों की पहुंच और आसान होगी। इच्छुक श्रद्धालु यूपीएसटीडीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर बुकिंग करा सकते हैं।
वाराणसी में बनेगा संत रविदास संग्रहालय, केंद्र से 24.63 करोड़ रुपये मंजूर

-  बिरजू महाराज कथक संस्थान लखनऊ के विकास हेतु 40.96 करोड़ की परियोजना को भी मिली स्वीकृति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने वाराणसी में संत रविदास संग्रहालय की स्थापना के लिए 24.63 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत प्रथम चरण में 5.50 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। परियोजना को फरवरी 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की म्यूजियम ग्रांट योजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है। संग्रहालय के निर्माण से संत रविदास के जीवन, दर्शन और सामाजिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि राजधानी लखनऊ स्थित बिरजू महाराज कथक संस्थान के आधुनिकीकरण एवं विकास के लिए भी 40.96 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा 8.87 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए संस्थान के विकास कार्यों हेतु 12 करोड़ रुपये की मांग केंद्र सरकार से की थी। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से संबंधित सभी सांस्कृतिक परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है तथा समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराने के लिए आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

-  सांस्कृतिक धरोहरों को मिलेगा नया आयाम
संत रविदास संग्रहालय और बिरजू महाराज कथक संस्थान की विकास परियोजनाएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ कला, संस्कृति और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में भी नए अवसर सृजित होंगे।
योगी आदित्यनाथ से मिले मुकेश कुमार मासूम, मुख्यमंत्री ने किया उनकी पुस्तक की पांडुलिपि का अवलोकन
लखनऊ। लेखक, गीतकार एवं समाजसेवी मुकेश कुमार मासूम ने आज उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में प्रदेश के लोकप्रिय, दूरदर्शी एवं यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आत्मीय मुलाकात की। इस विशेष अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सम्मानित सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ. लाल जी निर्मल तथा प्रख्यात समाजसेवी अमरनाथ प्रजापति भी उपस्थित रहे।
इस गरिमामयी भेंट के दौरान लेखक, गीतकार एवं समाजसेवी मुकेश कुमार मासूम ने अपनी लिखित पुस्तक की पांडुलिपि "योगी आदित्यनाथ : राजनीति और अध्यात्म के आकाश पर चमकता सितारा" मुख्यमंत्री को सादर भेंट की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अत्यंत आत्मीयता एवं स्नेह के साथ पुस्तक की पांडुलिपि का अवलोकन किया तथा प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे शीघ्र प्रकाशित कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने बहुमूल्य समय में से पर्याप्त समय प्रदान कर न केवल पुस्तक के विषय में चर्चा की, बल्कि कुशल-क्षेम भी जानी। उनका यह स्नेहपूर्ण व्यवहार सदैव स्मरणीय रहेगा। योगी आदित्यनाथ  केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण ऐसे नेतृत्वकर्ता हैं, जिन्होंने अपने कर्म, संकल्प और समर्पण से करोड़ों लोगों के हृदय में विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी सरलता, विनम्रता, कार्यकुशलता और जनसामान्य के प्रति आत्मीयता उन्हें एक असाधारण जननेता के रूप में स्थापित करती है।
इस प्रेरणादायी एवं ऐतिहासिक मुलाकात के लिए मैं हृदय की गहराइयों से मुख्यमंत्री  के निजी सचिव पंत साहब का विशेष आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग एवं मार्गदर्शन से यह अवसर संभव हो सका। साथ ही विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री आदरणीय डॉ. लाल जी निर्मल जी का भी मैं विशेष रूप से कृतज्ञ हूँ, जिनके स्नेह, सहयोग एवं मार्गदर्शन ने सदैव मेरा उत्साहवर्धन किया है।
मोहर्रम पर सख्त निर्देश: शक्ति प्रदर्शन नहीं, मातम का अवसर; नीट अभ्यर्थियों को बस किराये में 50% छूट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी मोहर्रम को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोहर्रम मातम और श्रद्धा का पर्व है, शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं। इसलिए जुलूसों में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन, नई परंपराओं की शुरुआत, उग्र गतिविधियों तथा कानफोड़ू डीजे और ढोल-ताशों के अनियंत्रित उपयोग को किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी।

मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आगामी त्योहारों, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

शांति समितियों से संवाद बढ़ाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मोहर्रम के आयोजन से पहले शांति समिति की बैठकें आयोजित की जाएं और धर्मगुरुओं, ताजिया समितियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लगातार संवाद बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह, भड़काऊ गतिविधि या विवाद की आशंका को पहले ही समाप्त करने के लिए प्रशासन सक्रिय भूमिका निभाए।उन्होंने कहा कि सभी जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए तथा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन और नई परंपरा पर रोक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि मोहर्रम के जुलूसों में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार सभी धर्मों और समुदायों की आस्था का सम्मान करती है, लेकिन किसी भी जिले में नई परंपरा शुरू करने की अनुमति नहीं होगी। पूर्व से चली आ रही परंपराओं और निर्धारित मार्गों के अनुसार ही आयोजन किए जाएं।

डीजे और ध्वनि प्रदूषण पर रहेगा नियंत्रण

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मोहर्रम के दौरान कानफोड़ू डीजे, अत्यधिक ध्वनि वाले साउंड सिस्टम और ढोल-ताशों के अनियंत्रित उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। ध्वनि प्रदूषण से संबंधित सभी मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के नाम पर नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।

ताजियों की ऊंचाई को लेकर विशेष सतर्कता

मुख्यमंत्री ने सुरक्षा कारणों से ताजियों की ऊंचाई को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप रखी जाए तथा 10 से 12 फीट से अधिक ऊंची ताजियों को अनुमति न दी जाए।उन्होंने कहा कि कई बार ऊंची ताजियां विद्युत लाइनों और अन्य अवरोधों के कारण दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। इसलिए संबंधित विभाग पहले से समन्वय स्थापित कर सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें।

शरारती तत्वों और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर

मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान अफवाह, भ्रामक सूचना या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट प्रसारित करने वालों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।उन्होंने कहा कि प्रदेश में शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नीट परीक्षा में शामिल होंगे साढ़े तीन लाख से अधिक अभ्यर्थी

बैठक में मुख्यमंत्री ने 21 जून को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 59 जनपदों में आयोजित होने वाली इस परीक्षा में लगभग साढ़े तीन लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे।उन्होंने कहा कि परीक्षा का निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी जिलों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र सक्रिय रखा जाए।

नीट अभ्यर्थियों को रोडवेज बसों में 50 प्रतिशत किराया छूट

परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि नीट परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में प्रवेश पत्र दिखाने पर किराये में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।सरकार के इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए ठहरने की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि दूसरे जनपदों में परीक्षा देने पहुंचने वाले ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की जाए जिनके पास ठहरने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर अस्थायी आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

परीक्षा की शुचिता बनाए रखने पर जोर

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश व्यवस्था और अन्य सभी प्रबंध पूरी पारदर्शिता के साथ किए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र, परीक्षा प्रक्रिया या परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाए ताकि विद्यार्थियों का विश्वास बना रहे।

कानून-व्यवस्था और परीक्षा दोनों पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य मोहर्रम, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और नीट जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसहयोग, संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ कार्य करते हुए प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में नए खुलासों से बढ़ी जांच की रफ्तार

-  कथित सोना बरामदगी, संदिग्ध यात्राएं और करोड़ों की संपत्तियां जांच के घेरे में; एसआईटी ने अयोध्या पहुंचकर शुरू की गहन पड़ताल

अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कथित महाघोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच का मोर्चा संभाल लिया। एसआईटी ने अपने पहले ही दिन करीब छह घंटे तक मंदिर परिसर और उससे जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर पड़ताल की तथा ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की।
जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक गिरफ्तार किए गए पांच प्रमुख संदिग्धों से लगभग दो करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी वाहन और तीन आईफोन बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी बीच दो नए पहलुओं ने जांच को और अधिक संवेदनशील बना दिया है—पहला कथित "सोना बरामदगी" और दूसरा संदिग्ध यात्रा नेटवर्क।
जांच के केंद्र में आए प्रमुख नामों में ट्रस्ट से जुड़े बताए जा रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार उनके पैतृक आवास पर हाल ही में की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया। हालांकि बरामद सोने की मात्रा और मूल्य को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन जांच एजेंसियां इसकी वास्तविक कीमत और स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं।
सूत्रों का दावा है कि कभी साधारण जीवन जीने वाले टिन्नू यादव के नाम या उनसे जुड़े लोगों के माध्यम से अयोध्या और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों का नेटवर्क खड़ा किया गया। जांच एजेंसियां इन संपत्तियों के दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि 13 जून को स्वर्गद्वार क्षेत्र स्थित उनके पैतृक घर पर सुरक्षा और जांच से जुड़े अधिकारियों की संयुक्त टीम ने छापा मारा था। इसके अलावा अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक छात्रावास परिसर को भी जांच एजेंसियों ने अपने रडार पर लिया है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में वहां भी विस्तृत फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है।
इसी क्रम में सोमेश आनंद नामक व्यक्ति की गतिविधियां भी जांच एजेंसियों के संज्ञान में आई हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में उसने देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत की कई यात्राएं कीं। सुरक्षा एजेंसियां उसके यात्रा रिकॉर्ड, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही हैं।
सूत्रों का दावा है कि सोमेश आनंद अक्सर भारी सामान के साथ ट्रेन से यात्रा करता था और वापसी में हवाई मार्ग का उपयोग करता था। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन उसकी गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए गहन पड़ताल जारी है।
जांच की आंच अब केडी तिवारी तक भी पहुंच गई है, जिनके पास मंदिर में प्राप्त होने वाले आभूषणों की कस्टडी और अभिलेखीकरण से जुड़ी जिम्मेदारियां होने की बात कही जा रही है। उनके आवास पर भी हाल में जांच टीम द्वारा छानबीन की गई। सूत्रों के अनुसार हाल में खरीदी गई लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की एक भूमि भी जांच के दायरे में है।
हालांकि केडी तिवारी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी जिम्मेदारी केवल आभूषणों को तौलकर रसीद जारी करने और उन्हें आगे संबंधित अधिकारियों को सौंपने तक सीमित थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद की प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं था।
इस बीच जांच के दौरान मंदिर परिसर से जुड़ा एक पुराना मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। सूत्रों के अनुसार लगभग दो वर्ष पूर्व सावन झूला मेले के दौरान उपयोग किए जाने वाले चार स्वर्ण मुकुट कुछ समय के लिए गायब पाए गए थे। बाद में ये मुकुट मंदिर परिसर के भीतर ही बरामद किए गए थे। हालांकि उस समय इस मामले को सार्वजनिक स्तर पर अधिक तूल नहीं दिया गया था, लेकिन वर्तमान जांच में इस प्रकरण से जुड़े दस्तावेज और परिस्थितियां भी खंगाली जा रही हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि दानपात्रों में जमा होने वाले आभूषणों और कीमती धातुओं के अभिलेखीकरण में कोई खामी रही है, तो उसी का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हो सकती हैं। इसी बिंदु को वर्तमान जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
एसआईटी अब वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों, संपत्तियों और कथित संदिग्ध नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में कई और लोगों से पूछताछ तथा नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेशभर की निगाहें टिकी हैं और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
उप्र राजकीय निर्माण निगम को आवंटित 08 जनपदों की 33 परियोजनाओं पर निर्माण कार्य प्रारम्भ
-  आस्था के साथ विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता : जयवीर सिंह

लखनऊ। पर्यटन विभाग द्वारा 31 मार्च, 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं पर शासनादेश जारी करते हुए अवस्थापना विकास की परियोजनाओं पर कार्रवाई शुरू करा दी गई है। कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि सभी कार्य निर्धारित तिथि तक गुणवत्ता के साथ पूरा करायें। राज्य सरकार की प्राथमिकता आस्था के साथ विकास और पर्यटन सेक्टर में निवेश आकर्षित कर टेम्पल इकॉनॉमी को विस्तार देना है। इसी दृष्टिकोण से लगभग सभी जनपदों में ऐतिहासिक धार्मिक एवं पुरातात्विक महत्व के आस्था स्थलों को नये सिरे से सौन्दर्यीकरण करा कर श्रद्धालुओं को अवस्थापना सुविधा सुलभ कराने का कार्य किया जा रहा है।
यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि जारी कर दी गई है। साथ ही कार्यदायी संस्थाआंे द्वारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को 08 जनपदों की 33 परियोजनाएं जिनकी अनुमानित लागत 7917.93 लाख रुपये आवंटित किया गया है। इन परियोजनाओं में लखनऊ-सीतापुर 01-01, मिर्जापुर 07, भदोही 04, सोनभद्र 02, हमीरपुर 02, महोबा 03 तथा बांदा व चित्रकूट की 06-06 परियोजनाएं शामिल हैं।
जयवीर सिंह ने बताया कि लखनऊ स्थित मोहनलाल गंज में हुलासखेड़ा का पर्यटन विकास के लिए 1199.7 लाख रुपये, सीतापुर के नैमिषारण्य धाम में बेदारण्यम की स्थापना कार्य के लिए 149.35 लाख रुपये, मिर्जापुर की 07 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 104.53 लाख रुपये, 79.64 लाख रुपये, 194.67 लाख रुपये, 197.99 लाख रुपये, 83.69 लाख रुपये, 88.87 लाख रुपये तथा 215.92 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार भदोही जनपद की 04 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 103.57 लाख रुपये, 147.29 लाख रुपये, 145.97 लाख रुपये, 99.97 लाख रुपये, 125.58 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार सोनभद्र जनपद की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 125.59 लाख रुपये तथा 116.24 लाख रुपये की धनराशि अनुमोदित की गई है।
श्री सिंह ने आगे बताया कि महोबा जनपद के विभिन्न मन्दिरों के लिए क्रमशः 108.87 लाख रुपये, 45.58 लाख रुपये तथा 71.77 लाख रुपये तीन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत किये गये। इसी प्रकार हमीरपुर की 02 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 70 लाख तथा 69.81 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। जनपद बांदा की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 53.82 लाख, 138.89 लाख एवं 114.27 लाख, 130.2 लाख, 338 लाख तथा 283.57 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। इसी प्रकार जनपद चित्रकूट की 06 परियोजनाओं के लिए क्रमशः 181.79 लाख, 229.24 लाख, 525.77 लाख, 171.94 लाख, 166.24 लाख तथा 905.08 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने बताया कि लगभग सभी परियोजनाओं पर कार्य प्रारम्भ कराने के लिए निविदा की कार्यवाही प्रगति पर है। इसके अलावा कार्य तकनीकी स्वीकृति जारी कराने हेतु विस्तृत आगणन आदि का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पर्यटन सेक्टर की लोकप्रियता एवं निवेश की असीमित संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार आस्था के साथ विकास के अंतर्गत सभी स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं सुलभ करा रही है।
उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 का परिणाम घोषित, वन्दना सिंह बनीं प्रदेश टॉपर
- उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सफल अभ्यर्थियों को दी बधाई, राष्ट्र निर्माण में योगदान का किया आह्वान


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री  योगेन्द्र उपाध्याय के कर-कमलों से मंगलवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पुस्तकालय भवन में उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 का परिणाम घोषित किया गया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री  रजनी तिवारी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडे, आरएमएल विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा  एम.के. अग्रवाल  उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश संयुक्त बी.एड. प्रवेश परीक्षा-2026 के टॉपर्स से उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, राज्यमंत्री रजनी तिवारी, कुलपतिगण तथा प्रमुख सचिव एवं सचिव द्वारा वीडियो कॉल पर वार्ता कर शुभकामनाएं दी और उनकी भविष्य की योजनाओं को जाना।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि परीक्षा में उत्तीर्ण होकर अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य की दिशा तय की है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के त्याग और गुरुओं के मार्गदर्शन से ही यह मुकाम हासिल हुआ है। 'गुरु देवो भव, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' की भावना के साथ हमें राष्ट्र के प्रति समर्पित रहना चाहिए। देशभक्ति केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। समाज ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण से पालन करना ही सच्ची देशभक्ति है।
उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने टेक्नोलॉजी और एआई को जोड़कर अभेद्य सिस्टम से परीक्षा कराई। यह उदाहरण प्रस्तुत करता है कि परीक्षाएं कैसे शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता के साथ कराई जाएं। योगी सरकार के आने के बाद लखनऊ, बरेली और अब झांसी विश्वविद्यालय ने बी.एड. परीक्षाएं कराकर शिक्षा के स्तर को सुधारा है। पहले नकल को बढ़ावा देने की बात होती थी, लेकिन अब टेक्नोलॉजी से जुड़कर परीक्षाएं नकलविहीन हो रही हैं।
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज बी.एड. करने वाले छात्रों के लिए हर्ष का दिन है। उन्होंने सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आपका ज्ञान, अनुभव और समर्पण आपको अलग पहचान दिलाएगा। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और उसकी टीम को परीक्षा के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
जिस दिन वोटर जाति धर्म और प्रचार के शोर से ऊपर उठकर कर अपने असली मुद्दों पर वोट देगा उस दिन सत्ता के सिंहासन हिल जाएंगे : सूरज प्रसाद चौबे

लखनऊ । आज स्थित यह है कि राजनीतिक दल समाज को एक जुट करने के बजाय विभिन्न जातीय समूहों को वोट बैंक के रूप में देखने लगे हैं परिणाम स्वरूप , व्यक्ति की योग्यता,क्षमता और राष्ट्रीय योगदान दे अधिक उसकी जातीय पहचान को महत्व दिया जा रहा है। यह प्रवृति सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता दोनों के लिए चुनौती है यह बाएं राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद सिंह ने सवर्ण चिंतन विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कही जिसका संचालन समाज सेवी सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष पंकज शुक्ला ने किया था राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि हम मानते है कि किसी भी समुदाय का सम्मान उसकी प्रशासनिक श्रेणी से नहीं है,बल्कि उसके इतिहार, संस्कृत,परिश्रम और राष्ट निर्माण में योगदान से निर्धारित होनी चाहिए चाहिए।

किसी भी वर्ग को स्थाई रूप से श्रेष्ठ पिछड़ा उत्पीड़क या पीड़ित घोषित करना समाज के दीर्घकालीन हित में नहीं है समय आ गया है कि भारत जाति आधारित राजनीतिक ध्रुवीकरण से ऊपर उठकर समान अवसर,समान सम्मान और समान उत्तरदायित्व के सिद्धांत पर आगे बड़े, राष्ट्रीय विकल्प मोर्चा का उद्देश्य लक्ष्य किसी वर्ग का विरोध नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का निर्माण है जो प्रत्येक नागरिक को उसकी योग्यता और परिश्रम के आधार पर आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करे तथा समाज में समरसता न्याय और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करें। भारती जनता पार्टी द्वारा बटुक पूजन को लेकर तीखा हमला करते हुए कहा कि एक तरफ बटुक पूजन कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सवर्ण बच्चे को जन्म जाती शोषण करता अपराधी बना दे रहे हैं चाहे जो भी हो जात यूजीसी रेगुलेशन को वापस करा कर ही मानूँगा सवर्ण समाज अभी  कुंभ करड़ की नीद सो रहा है राजनीतिक दलों का दरी बिछाने और कुर्सी टेंट लगाने मे व्यस्त है आप सभी लोगों से कहना चाहूंगा कि राजनीतिक विकल्प मोर्चा आगामी चुनाव में उत्तर प्रदेश की 403 विधान सभा शीट पर अपना प्रत्यासी उतारेगा।