श्रमिकों के कल्याण और औद्योगिक शांति के लिए प्रदेशभर में चल रहा जागरूकता अभियान

* औद्योगिक क्षेत्र ऐशबाग में श्रमिक-सेवायोजक संवाद, महिला सुरक्षा एवं श्रम कानूनों पर कार्यशाला आयोजित


लखनऊ। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित “12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के” अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 5 जून से 21 जून 2026 तक व्यापक जनकल्याण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को अपर श्रमायुक्त, लखनऊ कल्पना श्रीवास्तव के निर्देशन में ऐशबाग औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक-सेवायोजक संवाद कार्यक्रम, औद्योगिक संबंध संहिता-2020 पर कार्यशाला तथा कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में श्रम प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा औद्योगिक शांति एवं सौहार्द बनाए रखने, विवाद निस्तारण तंत्र को प्रभावी बनाने तथा सामाजिक संवाद एवं सामूहिक सौदेबाजी के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
अपर श्रमायुक्त, लखनऊ की अध्यक्षता में मोहिबुल्लापुर, सीतापुर रोड स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सुविधा केंद्र (लेबर अड्डा) का निरीक्षण किया गया। इस दौरान लेबर अड्डा इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में एकत्र श्रमिकों को श्रमिक पंजीयन एवं उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा सुभाष मार्ग, लखनऊ में असंगठित क्षेत्र के गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जेप्टो, जोमैटो, ब्लिंकिट एवं स्विगी) के पंजीकरण हेतु विशेष शिविर आयोजित किया गया। शिविर में श्रमिकों को राज्य एवं केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए अधिकाधिक पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं ब्लॉक-बक्शी का तालाब क्षेत्र में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा पात्र श्रमिकों के पंजीकरण एवं आवेदन के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निरंतर जारी रहेंगे।
यूपी पंचायत चुनाव: अंतिम मतदाता सूची जारी, 40 लाख से अधिक नए मतदाता जुड़े
* प्रत्येक मतदाता को 9 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित

* पुनरीक्षण में 1.41 करोड़ नाम सूची से हटाए गए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों के तहत अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। जिला स्तर पर प्रकाशित इस सूची में प्रत्येक मतदाता को 9 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या (यूनीक आईडी) प्रदान की गई है।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में संशोधन किए गए हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, लगभग 1.41 करोड़ मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों से सूची से हटाए गए हैं, जबकि 40.19 लाख नए मतदाताओं को शामिल किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद तकनीकी कारणों से इसे ऑनलाइन डाउनलोड करने में कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं। संबंधित विभाग द्वारा समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मतदाता आसानी से अपनी जानकारी प्राप्त कर सकें। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे सूची में अपना नाम एवं विवरण अवश्य जांच लें और किसी भी त्रुटि की स्थिति में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें।
समर इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत 128 विधि छात्रों ने किया डीएलएसए और एलएडीसीएस का शैक्षणिक भ्रमण

* विधिक सेवा संस्थाओं की कार्यप्रणाली एवं न्याय तक समान पहुंच की अवधारणा से हुए परिचित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (यूपीएसएलएसए) द्वारा आयोजित समर इंटर्नशिप कार्यक्रम-2026 के अंतर्गत विभिन्न विधि महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के 128 विधि छात्र-छात्राओं ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), लखनऊ तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (एलएडीसीएस), लखनऊ का शैक्षणिक भ्रमण किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य भावी विधि पेशेवरों को न्याय व्यवस्था की व्यावहारिक कार्यप्रणाली, निःशुल्क विधिक सहायता तंत्र तथा विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका से परिचित कराना था।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को डीएलएसए की कार्यप्रणाली, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, प्री-लिटिगेशन मेडिएशन, पीड़ित प्रतिकर योजना एवं विभिन्न विधिक जागरूकता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें एलएडीसीएस की संरचना, उद्देश्य तथा आर्थिक रूप से कमजोर अभियुक्तों को उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता व्यवस्था के बारे में भी अवगत कराया गया।
इस अवसर पर शालीन मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए न्याय तक समान पहुंच के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा संस्थाएं समाज के कमजोर, वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संवैधानिक मूल्यों तथा न्याय व्यवस्था में विधिक सेवा प्राधिकरणों की भूमिका से भी अवगत कराया।
मुख्य विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता अरुण मिश्रा ने इंटर्न्स को एलएडीसीएस की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर एवं असहाय अभियुक्तों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। उन्होंने आपराधिक मामलों में अभियुक्तों के संवैधानिक अधिकारों, निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार तथा न्यायिक प्रक्रिया में विधिक सहायता के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की।
वहीं, अभिषेक गुप्ता ने कहा कि समर इंटर्नशिप जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से परे व्यावहारिक विधिक ज्ञान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि विधिक शिक्षा का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, न्याय के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव विकसित करना भी है।
उन्होंने इंटर्न्स को निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं, लोक अदालतों की उपयोगिता तथा डीएलएसए द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विधिक सेवा संस्थाओं की कार्यप्रणाली को निकट से समझा तथा न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
NRHM घोटाले के कथित मास्टरमाइंड पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव गिरफ्तार
* आय से अधिक संपत्ति मामले में यूपी सतर्कता अधिष्ठान की कार्रवाई, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चल रहा है मुकदमा

लखनऊ। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले में उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान ने पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मुकेश श्रीवास्तव पर अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
सतर्कता अधिष्ठान द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2012 से 2017 तक विधायक रहने के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और संपत्ति अर्जन को लेकर जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि NRHM घोटाले में मुकेश श्रीवास्तव की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। उनके खिलाफ पहले से ही तीन अन्य मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद सतर्कता अधिष्ठान आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटा है।
मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को दे रही नई मजबूती
* उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने किया निर्माणाधीन राज्य उच्च शिक्षा परिषद भवन का निरीक्षण, उच्च शिक्षा निदेशालय के कैंप कार्यालय का लोकार्पण

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लगातार सशक्त किया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को आशियाना, लखनऊ स्थित निर्माणाधीन उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद भवन का निरीक्षण प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एम. पी. अग्रवाल के साथ किया। इसके साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा निदेशालय के नवनिर्मित कैंप कार्यालय का  लोकार्पण कर उसे विभागीय कार्यों के लिए समर्पित किया।
निरीक्षण के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्माणाधीन भवन के विभिन्न भागों का अवलोकन करते हुए निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता तथा निर्धारित समय-सीमा की समीक्षा की। उन्होंने कार्यदायी संस्था एवं विभागीय अधिकारियों को  निर्देश दिए कि भवन निर्माण में  गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल एक प्रशासनिक परिसर नहीं, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारशिला सिद्ध होगा।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधारों को लागू कर रही है। नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। राज्य उच्च शिक्षा परिषद भवन के पूर्ण होने से नीति निर्माण, शैक्षणिक योजना, अनुसंधान प्रोत्साहन तथा संस्थागत समन्वय की गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
निरीक्षण के उपरांत उच्च शिक्षा मंत्री ने उच्च शिक्षा निदेशालय के नवनिर्मित कैंप कार्यालय का फीता काटकर एवं पट्टिका का अनावरण कर लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि नए कैंप कार्यालय के प्रारंभ होने से विभागीय कार्यों के संचालन में सुगमता आएगी तथा शासन, निदेशालय, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षा, अनुश्रवण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनेगी।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल शिक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से आधुनिक अवसंरचना, डिजिटल प्रशासन तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण के निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है।
लोकार्पण के पश्चात अधिकारियों ने मंत्री को कैंप कार्यालय की व्यवस्थाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों द्वारा मंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया तथा उन्हें अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अमृत त्रिपाठी,  उच्च शिक्षा बी. एल. शर्मा सहित उच्च शिक्षा विभाग, राज्य उच्च शिक्षा परिषद एवं निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने मंत्री को भवन निर्माण की वर्तमान स्थिति, आगामी कार्ययोजना तथा विभागीय गतिविधियों के संबंध में विस्तृत जानकारी भी दिया।
भूटान को वाराणसी में बौद्ध मंदिर व गेस्ट हाउस निर्माण के लिए मिलेगी 2 एकड़ भूमि


*  लीज पर होगा भूमि आवंटन, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की मौजूदगी में हुआ समझौता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी में बौद्ध मंदिर एवं गेस्ट हाउस निर्माण के लिए रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान को दो एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में बुधवार को पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह तथा अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात की उपस्थिति में पर्यटन विभाग और भूटान सरकार के बीच लीज डीड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए।
वाराणसी के अजईपुर, परगना कोलअसला, तहसील पिंडरा स्थित दो एकड़ जमीन भूटान सरकार को लीज पर दी जाएगी। भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। समझौते पर भूटान सरकार की ओर से रॉयल भूटानी दूतावास, नई दिल्ली की उप-मिशन प्रमुख ताशी पेल्डन तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष सचिव मृदुल चौधरी ने हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही दोनों पक्षों के अधिकारियों ने अभिलेखों का आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और भूटान के ऐतिहासिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को यह समझौता नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सारनाथ पहले से ही बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है और बौद्ध मंदिर व गेस्ट हाउस के निर्माण से देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बौद्ध परिपथ के अंतर्गत आने वाले प्रमुख स्थलों, जैसे संकिसा और कुशीनगर में आधुनिक पर्यटन एवं आधारभूत सुविधाओं का विकास कर रही है। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि होगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को वर्ष 2017 के बाद हुए सभी एमओयू की समीक्षा करने तथा ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।भूटान सरकार की प्रतिनिधि ताशी पेल्डन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और भूटान के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में महानिदेशक पर्यटन वेदपति मिश्रा, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह सहित पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पीएम मोदी का जीवन राष्ट्रसेवा, संकल्प और नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण : केशव प्रसाद मौर्य

* प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने विश्व मंच पर बनाई नई पहचान, ‘विकसित भारत-2047’ का संकल्प होगा साकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जीवन करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष की आयु में भी प्रधानमंत्री मोदी अद्भुत ऊर्जा, कार्यक्षमता और समर्पण के साथ राष्ट्रसेवा में निरंतर जुटे हुए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में 75 वर्ष की आयु को ‘हीरक जयंती’ का महत्वपूर्ण और सम्मानजनक पड़ाव माना जाता है। ऐसे अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट समर्पण और सक्रिय नेतृत्व पूरे देश के लिए प्रेरणा का विषय है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का जीवन संघर्ष, परिश्रम, त्याग और राष्ट्रसेवा की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान और प्रतिष्ठा दिलाई है। आज भारत आत्मविश्वास, सामर्थ्य और नेतृत्व क्षमता के साथ विश्व समुदाय में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं ने करोड़ों गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। इन योजनाओं ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रखी है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, ऊर्जा सुरक्षा और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, जो विश्व शांति, सहयोग और मानव कल्याण की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया ‘युद्ध नहीं, बुद्ध’ का संदेश भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का प्रतीक है।
श्री मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश की निरंतर सेवा करते हुए लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर कार्य करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। उनका नेतृत्व आज देश की प्रगति, सुशासन, आत्मविश्वास और वैश्विक सम्मान का पर्याय बन चुका है। विभिन्न देशों द्वारा उन्हें दिए गए सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के प्रमाण हैं।
उन्होंने कहा कि ‘तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें’ की भावना को आत्मसात कर प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रसेवा में समर्पित हैं। उनका ‘विकसित भारत-2047’ का संकल्प निश्चित रूप से साकार होगा और भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध, शक्तिशाली तथा विश्वगुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अंत में उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर राष्ट्रसेवा के लिए हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी।
पीजीआई युवती लापता मामला: धर्मांतरण और सीरिया ले जाने के दावों पर पुलिस का स्पष्टीकरण, जांच जारी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से एक युवती के लापता होने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण और युवती को सीरिया ले जाने के आरोपों को लेकर पुलिस ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहनता से की जा रही है तथा अब तक की जांच में धर्मांतरण और सीरिया ले जाने संबंधी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार थाना पीजीआई में प्राप्त तहरीर के आधार पर 22 मई 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 280/2026, धारा 87 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मुकदमा युवती के लापता होने के संबंध में पंजीकृत किया गया है।

पुलिस ने बताया कि युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा जोन दक्षिणी की सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस टीमें लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर युवती और आरोपी की तलाश में जुटी हैं।

मामले को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि युवती का धर्मांतरण कराया गया है और उसे सीरिया ले जाया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई मूल तहरीर में धर्मांतरण संबंधी किसी भी आरोप का उल्लेख नहीं किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण संबंधी दावों की भी जांच की जा रही है, लेकिन अब तक की विवेचना में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह युवती को सीरिया ले जाने की बात भी जांच में सही नहीं पाई गई है।

जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि लापता युवती हिंदू धर्म से संबंधित है, जबकि नामजद आरोपी मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है। साथ ही यह तथ्य भी सामने आया है कि दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच पूर्व से बातचीत होती थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाकर तथ्यों का सत्यापन कर रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जांच अभी जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी तथ्य जांच के दौरान सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी है। इसके लिए पुलिस और सर्विलांस टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं तथा मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
मानवता की मिसाल बनी महिगवां पुलिस, भटके हुए युवक को सकुशल परिजनों से मिलाया
लखनऊ। पुलिस की संवेदनशीलता और जनसेवा का एक सराहनीय उदाहरण महिगवां थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां रात्रि गश्त के दौरान भटके हुए एक मंदबुद्धि युवक को पुलिस ने सुरक्षित संरक्षण में लेकर उसके परिजनों से मिलाया। पुलिस की तत्परता और मानवीय व्यवहार के चलते चिंतित परिवार को बड़ी राहत मिली।

जानकारी के अनुसार 8/9 जून 2026 की रात थाना महिगवां पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त और भ्रमण पर थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की नजर एक युवक पर पड़ी, जो संदिग्ध अवस्था में इधर-उधर भटकता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने उसे रोककर पूछताछ की तो उसने अपना नाम आशीष शर्मा पुत्र वीरपाल शर्मा, निवासी वेली सिटी, इज्जतनगर, जनपद बरेली बताया।

पूछताछ के दौरान युवक का व्यवहार सामान्य नहीं लगा और वह अपने परिजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ था। बातचीत में उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा देने के लिए 7 जून को लखनऊ आया था, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण घर वापस नहीं जा सका।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिगवां पुलिस ने युवक को अपने संरक्षण में लिया और उसे भोजन एवं जलपान उपलब्ध कराया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से थाने लाया गया, जहां उससे शांतिपूर्वक और विस्तार से पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान युवक ने अपने मामा कृष्ण पाल शर्मा का नाम और एक मोबाइल नंबर बताया। पुलिस ने तत्काल उस नंबर पर संपर्क किया। बातचीत के दौरान युवक के पिता वीरपाल शर्मा ने पुष्टि की कि आशीष उनका पुत्र है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने लखनऊ गया था और वापस घर नहीं लौटा था। परिवार पिछले कई दिनों से उसकी तलाश कर रहा था और काफी चिंतित था।

महिगवां पुलिस ने युवक के पिता को जानकारी दी कि उनका बेटा पूरी तरह सुरक्षित है और थाना महिगवां में मौजूद है। सूचना मिलते ही परिजन थाने पहुंचे। आवश्यक कानूनी और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने आशीष शर्मा को सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया।

अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने महिगवां पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया।

इस सराहनीय कार्यवाही में थाना महिगवां के थानाध्यक्ष राधे श्याम मौर्य, उपनिरीक्षक सतीश सिंह, उपनिरीक्षक अमित सिंह, कांस्टेबल लाल बहादुर और अरविंद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

महिगवां पुलिस की यह पहल न केवल कानून-व्यवस्था के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि पुलिस समाज में जरूरतमंद लोगों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बनकर खड़ी है। मानवता और जनसेवा का यह उदाहरण लोगों के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि को और मजबूत करता है।
यूपी में डॉक्टरों का बड़ा संकट: 18,500 पदों में 7,500 खाली, विशेषज्ञों की भर्ती के लिए बनेगा नया बोर्ड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही हैं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। प्रदेश में स्वीकृत लगभग 18,500 पदों के सापेक्ष केवल 11 हजार डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि करीब 7,500 पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर भर्ती प्रक्रिया चला रही है और अब इसके लिए एक नया भर्ती बोर्ड गठित करने की तैयारी भी कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस समस्या से निपटने के लिए करीब 2,500 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है।

रिवर्स बिडिंग से हो रही विशेषज्ञों की नियुक्ति

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए रिवर्स बिडिंग व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पांच लाख रुपये प्रतिमाह तक के मानदेय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। पिछले वर्ष इस प्रक्रिया के जरिए करीब 170 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। इन्हें चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में तैनात किया गया है।

इसके अलावा जनवरी 2026 में संविदा के आधार पर 710 डॉक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू भी आयोजित किए गए थे। सरकार ने डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्ति की आयु भी 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है।

विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड का गठन

डॉक्टरों की कमी और लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। यह बोर्ड एमडी-एमएस डिग्रीधारी विशेषज्ञ चिकित्सकों (लेवल-2) की सीधी भर्ती करेगा। साथ ही एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों (लेवल-1) की पदोन्नति प्रक्रिया को भी तेज करेगा।

सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन से भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और रिक्त पदों को जल्द भरा जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में टिक नहीं पा रहे विशेषज्ञ डॉक्टर

स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कई विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ समय बाद नौकरी छोड़ देते हैं। हर वर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 200 से 250 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाती है, लेकिन इनमें से करीब 25 प्रतिशत डॉक्टर कार्यभार ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही अनुपस्थित हो जाते हैं।

लंबे समय तक ड्यूटी पर न लौटने पर विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद जब डॉक्टर वापस नहीं आते तो उनकी सेवाएं समाप्त कर पद को पुनः रिक्त घोषित कर दिया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से नौकरी छोड़ने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें सरकारी आवास, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। वहीं निजी अस्पतालों में बेहतर शहरी सुविधाओं के साथ आकर्षक वेतन मिलने से कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

अगले दो वर्षों में रिक्त पद भरने का दावा

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि प्रदेश में कई स्तरों पर डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। नए मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक भी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो वर्षों में अधिकांश रिक्त पद भर लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है तथा इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर भर्ती और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे