प्रोजेक्ट ADHUNA CPD 2.0 ने समयपूर्व जन्म (Preterm Birth) देखभाल को व्यापक रूप से सशक्त बनाया।
आशीष कुमार
मुज़फ्फरनगर। भारत में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों की शीर्ष संस्था, फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI), साक्ष्य-आधारित मातृ एवं नवजात देखभाल को आगे बढ़ाने हेतु एक सेमिनार का आयोजन किया गया.
इस सेमिनार मे जनपद की महिला डॉक्टरो समेत आसपास के जनपदों से आईं डॉक्टरो ने भाग लिया और महिला रोगों के उपचार पर चर्चा की.
CPD के प्रथम चरण की सफलता के बाद अब दूसरा चरण प्रारम्भ किया गया है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता को समयपूर्व जन्म (Preterm Birth) की रोकथाम, प्रबंधन एवं बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने हेतु मजबूत बनाना है। इसमें गर्भावस्था पूर्व देखभाल, प्रसवकालीन, प्रसवोत्तर तथा नवजात देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया है।
CPD 2.0 समयपूर्व जन्म से संबंधित देखभाल के लिए “Continuum of Care” दृष्टिकोण को अपनाता है, जिसमें नवीनतम क्लिनिकल गाइडलाइन, व्यावहारिक प्रशिक्षण (Hands-on Drills) तथा प्रभावी संवाद आधारित मॉड्यूल शामिल हैं। यह सत्र डॉक्टरों, नर्सों एवं पैरामेडिकल स्टाफ के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे सीखी गई जानकारी को निजी स्वास्थ्य संस्थानों में तुरंत व्यवहार में ला सकें। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश एवं ओडिशा के निजी स्वास्थ्य संस्थानों में संचालित किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट ADHUNA के अंतर्गत चयनित 29 जिलों में से एक मुज़फ्फरनगर में CPD 2.0 सत्र का आयोजन को किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. भास्कर पाल, अध्यक्ष FOGSI एवं डॉ. जयदीप टैंक, प्रोजेक्ट डायरेक्टर ADHUNA के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन मुज़फ्फरनगर ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी के सहयोग से किया गया, जिसका मार्गदर्शन डॉ. मंजू प्रभाकर (अध्यक्ष, Muzaffarnagar Obst & Gyn Society), डॉ. माया चौधरी (सचिव, Muzaffarnagar Obst & Gyn Society) तथा डॉ. पूर्णिमा गौतम (कोषाध्यक्ष, Muzaffarnagar Obst & Gyn Society) एवं अन्य विशेषज्ञों तथा अधुना जिला समन्वयक फैसल अनवर द्वारा किया गया। जिसमें 46 से अधिक डॉक्टरों एवं 35 स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने भाग लिया।
इस सत्र में समयपूर्व जन्म देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया, जिनमें प्रमुख रूप से:
• गर्भावस्था के दौरान समयपूर्व प्रसव की स्क्रीनिंग एवं जोखिम मूल्यांकन, जिसमें गर्भकाल आयु निर्धारण एवं सर्वाइकल लंबाई जांच शामिल है।
• साक्ष्य-आधारित उपचार जैसे सर्वाइकल सर्क्लाज, एंटिनेटल कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स, एंटीबायोटिक्स, टोकोलाइटिक्स, मैग्नीशियम सल्फेट तथा रेफरल प्लानिंग।
• समयपूर्व प्रसव के दौरान लेबर मैनेजमेंट, जिसमें प्रसव का समय एवं तरीका, भ्रूण निगरानी, प्रसव तैयारी तथा विलंबित नाल क्लैम्पिंग (Delayed Cord Clamping) शामिल हैं।
• प्रसवोत्तर एवं प्यूर्परल देखभाल, जिसमें स्तनपान, मातृ मानसिक स्वास्थ्य तथा संक्रमण की रोकथाम पर विशेष बल दिया गया।
• नवजात देखभाल सत्र में पुनर्जीवन (Resuscitation), तापमान संरक्षण (Thermal Care), फीडिंग ए।
6 hours ago
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