पॉलीटेक्निक -2026: 2 जून से शुरू होगी प्रवेश परीक्षा, जल्द जारी होंगे एडमिट कार्ड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (UPJEE-P) 2026 को लेकर संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद ने अहम सूचना जारी की है। परीक्षा का आयोजन 02 जून से 09 जून 2026 के बीच प्रदेशभर के 175 परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) माध्यम से किया जाएगा।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा प्रतिदिन तीन पालियों में आयोजित होगी। पहली पाली सुबह 08:00 बजे से 10:30 बजे, दूसरी पाली 12:00 बजे से 02:30 बजे तथा तीसरी पाली सायं 04:00 बजे से 06:30 बजे तक चलेगी। परीक्षा के निष्पक्ष एवं सुचारु संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिषद ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन मॉक टेस्ट लिंक भी उपलब्ध कराया है। इसके माध्यम से छात्र वास्तविक परीक्षा जैसा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। अभ्यर्थी अपनी ई-मेल आईडी से पंजीकरण कर कई बार मॉक टेस्ट का अभ्यास कर सकेंगे।

परीक्षा के एडमिट कार्ड जल्द ही जारी किए जाएंगे, जिन्हें अभ्यर्थी परिषद की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे।

**आधिकारिक पोर्टल:** [jeecup.admissions.nic.in](https://jeecup.admissions.nic.in?utm_source=chatgpt.com)

परिषद ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा से जुड़ी नवीनतम सूचनाओं और दिशा-निर्देशों के लिए नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें।

गौरतलब है कि इस वर्ष UPJEE (पॉलीटेक्निक)-2026 के लिए करीब
4.25 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जिससे प्रतियोगिता का स्तर काफी अहम माना जा रहा है।
लखनऊ में कल UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 86 केंद्रों पर 37 हजार से अधिक अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

लखनऊ। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सर्विसेज प्रिलिमिनरी परीक्षा का आयोजन रविवार को राजधानी लखनऊ में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच कराया जाएगा। परीक्षा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बनाए गए **86 परीक्षा केंद्रों** पर आयोजित होगी।

जानकारी के अनुसार, राजधानी में कुल **37,686 परीक्षार्थी** परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी।

पहली पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक होगी, जबकि दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित की जाएगी।

परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग ने व्यापक तैयारियां की हैं। सुबह 6:30 बजे से सभी परीक्षा केंद्रों पर पुलिस बल तैनात रहेगा। प्रत्येक केंद्र पर तीन पुरुष और दो महिला पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत 125 सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी, 164 हेड कांस्टेबल/एलसी, 141 अन्य पुलिसकर्मी, सेक्टर मजिस्ट्रेट और सशस्त्र पुलिस बल सहित कुल करीब 490 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। परीक्षा के दौरान ट्रैफिक इंस्पेक्टर भ्रमणशील रहेंगे तथा परीक्षा केंद्रों के आसपास डायल-112 की गाड़ियां भी तैनात की जाएंगी।

इसके अलावा, जोनल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी और भ्रमण करेंगे ताकि परीक्षा व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

राजधानी के गोमतीनगर, गाजीपुर, विकासनगर, चौक, वजीरगंज, ठाकुरगंज, बाजारखाला, तालकटोरा, कैसरबाग, अमीनाबाद, नाका, काकोरी, अलीगंज, बीकेटी, गोसाईंगंज, मोहनलालगंज, कृष्णानगर, सरोजनीनगर, हजरतगंज, हुसैनगंज, गौतमपल्ली, आलमबाग, आशियाना, मानकनगर, महानगर और मड़ियांव समेत कई थाना क्षेत्रों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

प्रशासन ने अभ्यर्थियों से समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
व्यापार बंधु बैठक में व्यापारियों की समस्याओं पर डीएम गंभीर, कई मांगों पर बनी सहमति

नवनियुक्त जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी का अयोध्या धाम उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने किया स्वागत 

अयोध्या। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित व्यापार बंधु की बैठक में नवनियुक्त जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी का अयोध्या धाम उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने स्वागत किया। इस दौरान व्यापार मंडल की ओर से अयोध्या शहर एवं व्यापारियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।

बैठक में व्यापारियों ने प्रमुख रूप से श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए, जिनमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जिलाधिकारी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए सहमति जताई।

व्यापार मंडल की ओर से रखी गई प्रमुख मांगों में लता चौक से श्रीराम हॉस्पिटल तक दोनों फुटपाथों पर स्थायी कैनोपी लगाए जाने की मांग शामिल रही, ताकि दर्शनार्थियों को धूप, बारिश और अन्य मौसमीय परेशानियों से राहत मिल सके।

इसके अलावा हनुमानगढ़ी तिराहा एवं सिंगार हॉट बैरियर क्षेत्र में हाईमास्ट लाइट लगाने की मांग भी उठाई गई, जिससे श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को बेहतर प्रकाश व्यवस्था मिल सके।

बैठक में व्यापारियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि रामपथ चौड़ीकरण के दौरान व्यापार करने वाले कई व्यापारियों का विकास प्राधिकरण द्वारा गलत तरीके से चालान किया गया, जिसे निरस्त करने की मांग की गई। इस पर जिलाधिकारी ने मामले पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।

व्यापार मंडल अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि प्रशासन द्वारा व्यापारियों और श्रद्धालुओं की समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल स्वागतयोग्य है और उम्मीद है कि जल्द ही इन मांगों पर प्रभावी कार्रवाई होगी।

कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई : मंत्री मनोज पांडेय
* खाद्य एवं रसद व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के निर्देश, तेल-गैस आपूर्ति सुचारु रखने पर भी जोर
लखनऊ। कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार  पांडेय ने खाद्य एवं रसद विभाग तथा नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कालाबाजारी, घटतौली, जमाखोरी, अवैध वसूली और गरीबों के अधिकारों में बाधा डालने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), खाद्यान्न वितरण और उपभोक्ता हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गरीबों के राशन में हेराफेरी, तौल में चोरी और सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने तक की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों की अनदेखी, भ्रष्टाचार, संरक्षण देने या लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय होगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता जनता को पारदर्शी, ईमानदार और जवाबदेह व्यवस्था उपलब्ध कराना है। गरीब, किसान, मजदूर और पात्र लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। खाद्य एवं रसद व्यवस्था को मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसके साथ ही मंत्री ने ऑयल एजेंसियों को निर्देश दिए कि तेल और गैस की खपत को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सभी आउटलेट्स और गैस एजेंसियों पर समय से सुनिश्चित की जाए, ताकि बैकलॉग की स्थिति न बने और उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई : मंत्री मनोज पांडेय
* खाद्य एवं रसद व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के निर्देश, तेल-गैस आपूर्ति सुचारु रखने पर भी जोर
लखनऊ। कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार  पांडेय ने खाद्य एवं रसद विभाग तथा नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कालाबाजारी, घटतौली, जमाखोरी, अवैध वसूली और गरीबों के अधिकारों में बाधा डालने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), खाद्यान्न वितरण और उपभोक्ता हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गरीबों के राशन में हेराफेरी, तौल में चोरी और सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने तक की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों की अनदेखी, भ्रष्टाचार, संरक्षण देने या लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय होगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता जनता को पारदर्शी, ईमानदार और जवाबदेह व्यवस्था उपलब्ध कराना है। गरीब, किसान, मजदूर और पात्र लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। खाद्य एवं रसद व्यवस्था को मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसके साथ ही मंत्री ने ऑयल एजेंसियों को निर्देश दिए कि तेल और गैस की खपत को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सभी आउटलेट्स और गैस एजेंसियों पर समय से सुनिश्चित की जाए, ताकि बैकलॉग की स्थिति न बने और उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उत्तर प्रदेश में 9 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले, कई को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गईं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं और कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस क्रम में अपर पुलिस महानिदेशक यातायात और सड़क सुरक्षा ए. सतीश गणेश को वर्तमान जिम्मेदारी के साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक अपराध उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भी दी गई है।

जय नरायन सिंह को पुलिस महानिदेशक ईओडब्ल्यू यूपी, लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे पुलिस महानिदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक यूपी पॉवर कॉरपोरेशन के पद पर कार्यरत थे।

ध्रुव कांत ठाकुर को पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड यूपी के साथ ही पुलिस महानिदेशक नागरिक सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं विनोद कुमार सिंह को पुलिस महानिदेशक, सीआईडी यूपी के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम यूपी, लखनऊ और पुलिस महानिदेशक यूपी 112 लखनऊ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

आलोक सिंह को पुलिस महानिदेशक, पीएसी मुख्यालय, यूपी लखनऊ के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक विशेष सुरक्षा बल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अनुपम कुलश्रेष्ठ को अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन नियुक्त किया गया है।

डॉ. आर. के. स्वर्णकार को अपर पुलिस महानिदेशक यूपी पॉवर कारपोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा गीता सिंह को पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण निदेशालय और एस. के. भगत को अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस निर्णय के माध्यम से सरकार ने पुलिस विभाग में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण सुनिश्चित किया है।
उत्तर प्रदेश में 9 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले, कई को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गईं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं और कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस क्रम में अपर पुलिस महानिदेशक यातायात और सड़क सुरक्षा ए. सतीश गणेश को वर्तमान जिम्मेदारी के साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक अपराध उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भी दी गई है।

जय नरायन सिंह को पुलिस महानिदेशक ईओडब्ल्यू यूपी, लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले वे पुलिस महानिदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक यूपी पॉवर कॉरपोरेशन के पद पर कार्यरत थे।

ध्रुव कांत ठाकुर को पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड यूपी के साथ ही पुलिस महानिदेशक नागरिक सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं विनोद कुमार सिंह को पुलिस महानिदेशक, सीआईडी यूपी के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम यूपी, लखनऊ और पुलिस महानिदेशक यूपी 112 लखनऊ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

आलोक सिंह को पुलिस महानिदेशक, पीएसी मुख्यालय, यूपी लखनऊ के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक विशेष सुरक्षा बल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अनुपम कुलश्रेष्ठ को अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन नियुक्त किया गया है।

डॉ. आर. के. स्वर्णकार को अपर पुलिस महानिदेशक यूपी पॉवर कारपोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा गीता सिंह को पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण निदेशालय और एस. के. भगत को अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस निर्णय के माध्यम से सरकार ने पुलिस विभाग में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण और जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण सुनिश्चित किया है।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
*
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण बनी गरीबों के लिए सहारा, लाखों परिवारों को मिली पक्की छत
* योगी सरकार की योजना से जरूरतमंदों को मिला सम्मानजनक जीवन, 4.47 लाख आवास निर्माण पूर्ण
*
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रदेश के गरीब, आवासहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व एवं निर्देशन में संचालित यह योजना समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को पक्की छत उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा प्रदान कर रही है।
फरवरी 2018 से संचालित मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पूर्णतः राज्य सहायतित योजना है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा, कालाजार, जेई/एईएस और कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों सहित वनटांगिया, मुसहर, नट, चेरो, सहरिया, कोल, थारू, पछइया लोहार, गढ़इया लोहार और बैगा जैसी जनजातियों के पात्र परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता सूची से वंचित गरीब परिवारों को भी इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल पर योजना की प्राथमिकता सूची में दिव्यांगजन, 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की निराश्रित विधवा महिलाएं तथा प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिली है।
योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को आवास निर्माण के लिए 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा शौचालय निर्माण हेतु स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 12 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 मानव दिवस का रोजगार देने का प्रावधान भी किया गया है।
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी के अनुसार वर्ष 2018-19 से अब तक योजना के तहत 4.72 लाख आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष 4.47 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण कराया जा चुका है, जबकि शेष आवास निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.30 लाख दिव्यांगजन, 72 हजार निराश्रित विधवा महिलाएं तथा 93 हजार दैवीय आपदाओं से प्रभावित परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निवास करने वाली सभी जनजातियों को योजना की प्राथमिकता सूची में शामिल कर आवास आवंटन की प्रक्रिया तेज की गई है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह योजना गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का नया अध्याय लिख रही है।
यूपी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ड्रेस कोड होगा अनिवार्य
* योगी सरकार का बड़ा फैसला, समानता और अनुशासन को बढ़ावा देने की पहल
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने घोषणा की है कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल  के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ड्रेस कोड अनिवार्य किया जाएगा।
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रत्येक शिक्षण संस्थान में यथासंभव एक समान ड्रेस कोड लागू किया जाएगा, जिससे छात्र-छात्राओं के बीच समानता, अनुशासन और सामाजिक समरसता की भावना को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि छात्र वर्ग एक समरूप वर्ग होता है, जहां किसी भी प्रकार का ऊंच-नीच या भेदभाव नहीं दिखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार पहनावे के कारण सामाजिक और आर्थिक असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिससे कुछ छात्रों में हीन भावना और कुछ में श्रेष्ठता का भाव पैदा हो जाता है। ड्रेस कोड लागू होने से इस तरह की परिस्थितियों पर प्रभावी नियंत्रण होगा और सभी विद्यार्थियों को समान माहौल में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक, अनुशासित और संस्कारित वातावरण तैयार करना भी है। ड्रेस कोड व्यवस्था से छात्रों का ध्यान पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास पर अधिक केंद्रित रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को आधुनिक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में एकरूपता के साथ बेहतर शैक्षणिक संस्कृति विकसित होगी, जो विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी।