शहीदों की स्मृति में बनेगे स्मारक और द्वार, यूपी सरकार की नई परियोजना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आजादी के बाद विभिन्न युद्धों में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए शहीद स्मारक एवं द्वार निर्माण की नई कार्ययोजना प्रस्तावित की है। संस्कृति विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत कई जनपदों में स्मारकों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि कुछ स्थानों के लिए धनराशि भी अवमुक्त कर दी गई है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि आगरा में वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए बहादुर सिंह की स्मृति में शहीद स्मारक बनाया जाएगा। वहीं, मथुरा में कारगिल युद्ध 1999 के शहीद श्याम सुंदर बेनीवाल की स्मृति में स्मारक निर्माण प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि अयोध्या जनपद के ग्राम भदौली खुर्द, विकास खंड पूरा बाजार में अमर शहीद जगदम्बा पाण्डेय द्वार एवं स्मारक निर्माण के लिए 19.13 लाख रुपये की धनराशि प्रस्तावित की गई है। इसी प्रकार बुलन्दशहर के ग्राम मांमऊ, विकासखंड शिकारपुर में 1965 भारत-पाक युद्ध के शहीद प्रहलाद सिंह की स्मृति में 17.32 लाख रुपये की लागत से स्मारक का निर्माण कराया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि इन स्मारकों का उद्देश्य देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि देना है। इससे युवा पीढ़ी को शहीदों के शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा मिलेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि गाजीपुर के जखनिया विधानसभा क्षेत्र स्थित ग्रामसभा धामपुर में वीर अब्दुल हमीद की स्मृति में स्मारक निर्माण एवं सौंदर्यीकरण परियोजना के लिए वर्ष 2026-27 में 1 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रावधान किया गया है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है।
इसके अतिरिक्त जालौन जनपद में शहीद श्याम सिंह सेंगर के स्मारक स्थल के निर्माण हेतु भी 1 करोड़ रुपये की धनराशि प्रस्तावित की गई है और कार्यदायी संस्था द्वारा निविदा प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
गोमतीनगर स्टेशन पर सिर कटी लाश से सनसनी, 6 रेलवे स्टेशन बने जांच की अहम कड़ी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमती नगर रेलवे स्टेशन पर छपरा से आई एक्सप्रेस ट्रेन के S1 कोच में टीन के बक्से से एक युवती की सिर कटी लाश मिलने के बाद सनसनी फैल गई। शव के हाथ-पैर अलग-अलग पॉलीथिन में पैक मिले, जबकि युवती का सिर अब तक बरामद नहीं हो सका है।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और कोच को खाली कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि युवती की हत्या कहीं और की गई और पहचान छिपाने के मकसद से शव को ट्रेन में रख दिया गया।
पुलिस जांच अब उन छह रेलवे स्टेशनों पर केंद्रित हो गई है, जहां ट्रेन रात के दौरान रुकी थी।  थावे जंक्शन, कप्तानगंज, गोरखपुर और गोंडा जंक्शन समेत कई स्टेशनों के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संदिग्ध बक्सा ट्रेन में कब और किसने रखा।
जांच एजेंसियां प्रेम प्रसंग, ऑनर किलिंग, पारिवारिक विवाद और आपराधिक रंजिश समेत कई पहलुओं पर जांच कर रही हैं। पुलिस को शक है कि आरोपी शव की पहचान मिटाकर जांच को भटकाना चाहते थे।
फिलहाल युवती की पहचान पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रेलवे पुलिस आसपास के जिलों से गुमशुदगी की जानकारी भी जुटा रही है।
योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: पंचायत चुनाव, मेट्रो और वेटनरी छात्रों को राहत
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 12 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन सबसे चर्चित फैसला रहा। इसके साथ ही लखनऊ मेट्रो विस्तार, आगरा मेट्रो परियोजना, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वेटनरी छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।
पंचायत चुनाव के लिए बनेगा ओबीसी आयोग
कैबिनेट ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण तय करने के लिए पांच सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे और इसका कार्यकाल छह महीने होगा। आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होगी। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट नवंबर 2026 तक आ सकती है, जिसके चलते पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना जताई जा रही है।
वेटनरी छात्रों का बढ़ा इंटर्नशिप भत्ता
सरकार ने बीवीएससी एंड एएच के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए इंटर्नशिप भत्ता 8 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया है। प्रदेश में वर्तमान में 10 हजार से अधिक वेटनरी छात्र अध्ययनरत हैं। इस फैसले से छात्रों को आर्थिक मदद मिलेगी।
लखनऊ और आगरा मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट ने लखनऊ मेट्रो के चारबाग से बसंतकुंज कॉरिडोर के एमओयू को मंजूरी दी। वहीं आगरा मेट्रो रेल परियोजना के कॉरिडोर-2 के तहत आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक स्टेशन और वायाडक्ट निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरण प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई।
स्वास्थ्य और बिजली परियोजनाओं को बढ़ावा
प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के विस्तार के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग को जमीन देने का फैसला लिया गया। वहीं लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के नए परिसर में 1010 बेड का मल्टी स्पेशियलिटी इमरजेंसी अस्पताल, टीचिंग ब्लॉक और नया ओपीडी ब्लॉक बनाया जाएगा, जिस पर करीब 855 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसके अलावा मिर्जापुर में 2800 करोड़ रुपये की लागत से बड़ा बिजली उपकेंद्र और नई बिजली लाइनें बनाई जाएंगी, जिससे क्षेत्र में बिजली व्यवस्था मजबूत होगी और उद्योगों को फायदा मिलेगा।
जनविश्वास का माध्यम बना जनता दर्शन, डिप्टी सीएम ने सुनीं सैकड़ों लोगों की समस्याएं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को 7-कालिदास मार्ग स्थित अपने कैंप कार्यालय में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए।
जनता दर्शन में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग, दिव्यांगजन और युवा पहुंचे। लोगों ने भूमि विवाद, अवैध कब्जा, चिकित्सा सहायता, पेंशन, आवास, सड़क, बिजली-पानी, पुलिस कार्रवाई, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी समस्याएं उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी आवश्यकतानुसार मौके पर जाकर निरीक्षण करें और पीड़ितों को समयबद्ध राहत उपलब्ध कराएं।
श्री मौर्य ने कहा कि जनता दर्शन सरकार और आमजन के बीच सीधे संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है, जिससे लोगों की वास्तविक समस्याओं की जानकारी मिलती है और उनके समाधान में तेजी आती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी फरियादी निराश नहीं लौटेगा तथा हर समस्या का हरसंभव समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसा समाधान हो जिससे पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह संतुष्ट हो और उसे बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए गए।
भूमि विवाद और अवैध कब्जों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भेजकर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भू-माफियाओं और दबंगों के खिलाफ आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जनहित और सुशासन के संकल्प के साथ कार्य कर रही है तथा हर पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार हर जरूरतमंद को न्याय दिलाने और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जनता दर्शन में बहराइच, प्रयागराज, गाजीपुर, सीतापुर, बरेली, बुलंदशहर, एटा, झांसी, सुल्तानपुर, महोबा, उन्नाव, आजमगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, जालौन, अलीगढ़ और प्रतापगढ़ समेत दो दर्जन से अधिक जिलों से आए सैकड़ों लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं।
बाढ़ राहत अभियान को मजबूत करने में जुटी एसडीआरएफ
लखनऊ । राजधानी स्थित 35वीं वाहिनी पीएसी परिसर में बाढ़ पूर्व तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से एसडीआरएफ कर्मियों के लिए विशेष “गोताखोरी प्रशिक्षण शिविर” आयोजित किया गया। प्रशिक्षण शिविर में जल आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का अभ्यास कराया गया।
शिविर के दौरान स्कूबा डाइविंग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने एसडीआरएफ जवानों को स्कूबा डाइविंग, जल में खोज एवं बचाव कार्य और आपदा के दौरान त्वरित राहत अभियान चलाने का प्रशिक्षण दिया।
इस दौरान डॉ. रामकृष्ण स्वर्णकार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहुंचकर गतिविधियों का निरीक्षण किया और प्रशिक्षकों व एसडीआरएफ कर्मियों का उत्साहवर्धन किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ बाढ़ राहत और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा भी की।
कार्यक्रम में डॉ. प्रीतिंदर सिंह, अमित कुमार, शोभनाथ यादव समेत कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
राजधानी में अवैध वकील चैंबरों पर चला बुलडोजर, विरोध में हंगामा, पुलिस ने लाठी फटकार कर खदेड़ा
लखनऊ । राजधानी में रविवार सुबह हाईकोर्ट के आदेश के बाद अवैध वकील चैंबरों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन देखने को मिला। नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने स्वास्थ्य भवन और कचहरी क्षेत्र के आसपास बने अवैध चैंबरों को ध्वस्त करना शुरू किया, जिसके बाद मौके पर भारी हंगामा खड़ा हो गया।

कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में वकील सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कई जगह पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तीखी बहस भी हुई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठियां फटकार दीं, जिससे अफरा-तफरी मच गई।

हंगामे के बीच एक वकील ने खुद को अपने चैंबर में बंद कर लिया और कार्रवाई का विरोध करते हुए आत्महत्या की कोशिश की। वकील का आरोप था कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और सीधे चैंबर तोड़े जा रहे हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया।

जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य भवन, चकबस्त चौराहा, सदर तहसील, निबंधन कार्यालय और जिला सत्र न्यायालय के आसपास बने करीब 240 अवैध चैंबर हटाने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने पहले नोटिस चस्पा कर अधिवक्ताओं को स्वयं अतिक्रमण हटाने का समय दिया था, लेकिन तय अवधि बीतने के बाद भी कब्जे नहीं हटाए गए।

प्रशासन को विरोध की आशंका पहले से थी, इसलिए मौके पर भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई थी। बुलडोजर कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार सड़क, फुटपाथ और नाले-नालियों पर कब्जा कर बनाए गए चैंबर और दुकानें लंबे समय से यातायात और आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए थे। इससे पहले भी पिछले वर्ष अक्टूबर में प्रशासन ने कई अवैध चैंबर हटाए थे, लेकिन बाद में फिर कब्जे कर निर्माण कर लिया गया था।
लखनऊ पीजीआई की कैंटीन में ‘जंक फूड कल्चर’ पर उठे सवाल
* मरीजों और तीमारदारों के बीच मैगी व प्रोसेस्ड फूड की भरमार, हेल्दी फूड व्यवस्था की मांग तेज
लखनऊ। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के (पीजीआई) की कैंटीन में खुलेआम बिक रहे मैगी और अन्य प्रोसेस्ड फूड को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल परिसर स्थित एक कॉफी कॉर्नर में वेज, चीज, बटर, तंदूरी और डबल मसाला मैगी समेत कई वैरायटी का मेन्यू सामने आने के बाद तीमारदारों और स्वास्थ्य जागरूक लोगों ने नाराजगी जताई है।
लोगों का कहना है कि जहां डॉक्टर मरीजों को संतुलित और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह देते हैं, वहीं अस्पताल परिसर में जंक फूड और इंस्टेंट फूड को बढ़ावा दिया जाना विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को लेकर कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अत्यधिक प्रोसेस्ड और हाई-सोडियम वाले खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके बावजूद अस्पताल कैंटीनों में हेल्दी विकल्पों की तुलना में इंस्टेंट फूड की अधिक उपलब्धता चिंता का विषय मानी जा रही है।
तीमारदारों का कहना है कि पीजीआई जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में सस्ती पौष्टिक थाली, ताजे फल, सलाद और हेल्दी स्नैक्स जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अस्पताल प्रशासन से कैंटीन नीति की समीक्षा करने और “हेल्दी फूड सिस्टम” लागू करने की मांग की है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।
लखनऊ पीजीआई की कैंटीन में ‘जंक फूड कल्चर’ पर उठे सवाल

मरीजों और तीमारदारों के बीच मैगी व प्रोसेस्ड फूड की भरमार, हेल्दी फूड व्यवस्था की मांग तेज

लखनऊ। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के (पीजीआई) की कैंटीन में खुलेआम बिक रहे मैगी और अन्य प्रोसेस्ड फूड को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल परिसर स्थित एक कॉफी कॉर्नर में वेज, चीज, बटर, तंदूरी और डबल मसाला मैगी समेत कई वैरायटी का मेन्यू सामने आने के बाद तीमारदारों और स्वास्थ्य जागरूक लोगों ने नाराजगी जताई है।

लोगों का कहना है कि जहां डॉक्टर मरीजों को संतुलित और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह देते हैं, वहीं अस्पताल परिसर में जंक फूड और इंस्टेंट फूड को बढ़ावा दिया जाना विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को लेकर कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अत्यधिक प्रोसेस्ड और हाई-सोडियम वाले खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके बावजूद अस्पताल कैंटीनों में हेल्दी विकल्पों की तुलना में इंस्टेंट फूड की अधिक उपलब्धता चिंता का विषय मानी जा रही है।

तीमारदारों का कहना है कि पीजीआई जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में सस्ती पौष्टिक थाली, ताजे फल, सलाद और हेल्दी स्नैक्स जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अस्पताल प्रशासन से कैंटीन नीति की समीक्षा करने और “हेल्दी फूड सिस्टम” लागू करने की मांग की है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।

ब्राह्मण समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : सूरज प्रसाद चौबे राष्ट्रीय अध्यक्ष

लखनऊ । सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे के अगुआई में स्वर्ण जयंती चौराहे पर सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी का पुतला दहन किया गया।  जिसमें सवर्ण आर्मी एभारत के जिला अध्यक्ष पंकज कुमार शुक्ला,संतोष पांडेय रामानन्द पांडेय , प्रवेष पाठक ,अंकित शुक्ला आशुतोष सिंह शुभम चौबे शिवम पांडेय अनुराग पांडेय आकाश पाण्डेय, संजय मिश्रा आदि उपस्थित रहे उसके बाद सदर कोतवाली जाकर  निरीक्षक राम स्वरूप वर्मा को तहरीर दिया गया।  जिनके द्वारा कहा गया कि उच्च अधिकारियों से वार्ता करके विधिक कार्यवाही किया जाएगा, स्वर्ण जयंती चौराहे पर लोगो को संबोधित करते हुए सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने कहा कि इस समय देश दो वर्गों में बट चुका है एक आरक्षित वर्ग जो देश में सुरक्षित है ।

उस वर्ग के लिए विशेष कानून आरक्षण आयोग योजनाएं फीस माफ वजीफा कोचिंग बजट आदि उपलब्ध है यहां तक कि वे कोई अपराध भी करे भी करे तोड़ फोड़ भी करे हिन्दू देवी देवताओं ग्रंथों सवर्ण पर कोई भी अत्याचार भी करे तो खबर तक नहीं बनती , ब्राह्मण समाज के लिए जिस तरह से अपमानित किया जा रहा है जिस शब्दों का प्रयोग  सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा किया गया है उसकी कटु निंदा करते हैं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मांग करते हैं कि तत्काल सपा से बर्खास्त करे,अब सवर्ण समाज किसी भी तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा उसका मुंह तोड़ जवाब देना हम जानते हैं समय रहते हुए अगर कार्यवाही नहीं किया गया तो सवर्ण समाज सड़क पर आ जायेगा उन्होंने ने कहा कि ब्राह्मण सर्वोपरि था सर्वोपरि है,सर्वोपरि रहेगा ब्राह्मण समाज का अपमान सवर्ण आर्मी भारत किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगा जो जिस भाषा में बोलेगा उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा ,ब्राह्मण समाज की रक्षा करना उनका दायित्व है ,ब्राह्मण केवल एक जाति नहीं बल्कि ज्ञान ,न्याय ,धर्म , संस्कार त्याग और राष्ट्रीय हित की परम्परा का नाम है।
पंचायत चुनाव में EVM का लोकदल ने किया विरोध
* “जनता वोट देगी या मशीन फैसला करेगी?” — सुनील सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से कराने की तैयारी को लेकर लोकदल ने कड़ा विरोध जताया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा EVM से पंचायत चुनाव कराने के लिए निविदा आमंत्रित किए जाने पर लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने इसे लोकतंत्र के लिए “खतरे की घंटी” बताया।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक चुनाव मशीनों के भरोसे कराने की योजना बनाई जा रही है, जबकि देशभर में EVM की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
सुनील सिंह ने सवाल उठाया कि यदि EVM पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष हैं, तो हर चुनाव के बाद विवाद और संदेह क्यों पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव लोकतंत्र की सबसे निचली और महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन सरकार यहां भी जनता के भरोसे की जगह मशीनों पर निर्भरता थोपना चाहती है। लोकदल अध्यक्ष ने कहा,“सरकार बैलेट पेपर से डरती क्यों है?”
उन्होंने आगे कहा कि अब प्रदेश की जनता यह सवाल पूछ रही है कि —
“जनता वोट देगी या मशीन फैसला करेगी?”
लोकदल ने पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग करते हुए कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए जनता का विश्वास सर्वोपरि होना चाहिए।