प्रेक्षागृह में विभिन्न महिला संगठनों के तत्वावधान में एक विशाल 'जन आक्रोश सम्मेलन' का आयोजन किया गया।
जन आक्रोश सम्मेलन' में गरजीं महिलाएं; महिला सशक्तिकरण में विपक्ष के अड़ंगों की घोर निंदा
रितेश मिश्रा
हरदोई:प्रेक्षागृह में आज विभिन्न महिला संगठनों के तत्वावधान में एक विशाल 'जन आक्रोश सम्मेलन' का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज देश शक्ति स्वरूपा माँ पीताम्बरा के प्राकट्य उत्सव की भक्ति में लीन है। मान्यता है कि माता की आराधना करने से शत्रुओं का दमन होता है और जीवन की समस्त मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। पर इस आध्यात्मिक उल्लास के बीच नारी शक्ति को अपना हक लेने के लिए 'जन आक्रोश सम्मेलन' के जरिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। यह नारी शक्ति के सम्मान पर एक गहरी चोट है। महिलाओं का संघर्ष विपक्ष की उस संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है, जो धर्म और जाति के नाम पर वोटबैंक की राजनीति के लिए महिलाओं के गौरव को ताक पर रख देती है।
मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि आज की नारी माँ पीताम्बरा से यही प्रार्थना करती है कि वह ऐसी महिला-विरोधी सोच का अंत करें और विपक्ष को सद्बुद्धि दें। समय की मांग है कि राजनीतिक द्वेष छोड़कर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को पूर्ण समर्थन दिया जाए। देश की आधी आबादी को वास्तविक रूप से सशक्त और सक्षम बनाने के लिए इस संशोधन बिल का पारित होना अनिवार्य है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पारित होना भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, लेकिन संशोधन बिल के माध्यम से महिलाओं को हक दिलाने की बात हुई तो कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और राजद जैसे दलों ने इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन न करके यह सिद्ध कर दिया है कि वे महिला सशक्तिकरण के प्रबल विरोधी हैं।
कहा, "33 प्रतिशत आरक्षण देश की आधी आबादी का संवैधानिक हक है। विपक्षी दल इसे धर्म, जाति और कोटे के भीतर कोटे जैसे तर्कों में उलझाकर केवल अपनी तुष्टीकरण की राजनीति को पोषण दे रहे हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लिए महिला हित कभी प्राथमिकता नहीं रहे; वे केवल वोट बैंक की राजनीति के पोषक हैं।"
विकसित भारत के संकल्प में महिलाओं की सहभागिता पर
सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न संगठनों की महिलाओं ने एक स्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि मोदी-योगी सरकार ने महिलाओं को केवल 'लाभार्थी' नहीं बल्कि 'राष्ट्र निर्माता' के रूप में स्थापित किया है। उज्ज्वला योजना, पीएम आवास और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया है। 'विकसित भारत' का संकल्प तभी पूरा होगा जब नारी शक्ति सशक्त होगी, और वर्तमान सरकार इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
महिलाओ ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में महिला सशक्तिकरण केवल 'फोटो इवेंट' और कागजी नारों तक सीमित था। परिवारवाद की राजनीति के कारण महिलाओं के वास्तविक अधिकारों का गला घोंटा गया। विपक्षी नेताओं ने हमेशा अपने परिवार के हितों को देश की आधी आबादी के हितों से ऊपर रखा।
*प्रमुख मांगें और संकल्प*
सम्मेलन के अंत में निंदा प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें विपक्षी दलों से अपनी संकीर्ण मानसिकता त्यागकर नारी शक्ति के उत्थान में सहभागी बनने की अपील की गई। महिला संगठनों ने संकल्प लिया कि वे घर-घर जाकर विपक्ष की इन 'कु-नीतियों' का पर्दाफाश करेंगी। सम्मेलन में जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी का स्वागत किया। मंच संचालन नीतू ने किया।
*विरोध में निकाला मार्च*
राज्यमंत्री रजनी तिवारी की अगुवाई में महिलाओं ने प्रेक्षागृह से आंबेडकर पार्क तक विरोध मार्च निकाला। आंबेडकर पार्क में बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण को समाज की प्रगति का मुख्य पैमाना माना, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें उस समानता के अधिकार से वंचित रखा। महिला आरक्षण अब समय की मांग है और भारत की मातृ शक्ति अपना हक लेकर रहेगी।
सम्मेलन में उपस्थित रही अलका, शशि, कुमुदिनी, महिमा श्रीवास्तव,अनुपमा सिंह, रीना गुप्ता किरण अग्रवाल, सोनी, अदिति कुशवाहा, सुमन, चंद्रप्रभा, श्वेता, अनीता गुप्ता, सुमन सिंह, कृति अग्रवाल, निधि, शोभना, दीपा बिस्वास,
1 hour and 27 min ago
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