लीगल कॉन्क्लेव 2026 में न्याय व्यवस्था सुधार पर मंथन
* 6 करोड़ लंबित मामलों के समाधान को मध्यस्थता और एआई बताया अहम उपाय

* न्यायमूर्ति मनमोहन बोले— स्वस्थ बहस से मजबूत होगी न्याय प्रणाली, तकनीक सहायक बने, विकल्प नहीं

नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ, विधि शिक्षा में सुधार और न्याय को अधिक सुलभ व किफायती बनाने के मुद्दों पर शनिवार को आयोजित लीगल कॉन्क्लेव एंड अवॉर्ड्स 2026 में व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में कानूनी विशेषज्ञों ने मध्यस्थता, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को न्यायिक सुधार का प्रभावी माध्यम बताया।
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (सिल्फ) ने सोसाइटी ऑफ लीगल प्रोफेशनल्स (एसएलपी) के सहयोग से नई दिल्ली में “सभी के लिए किफायती और सुलभ न्याय” विषय पर इस कॉन्क्लेव का आयोजन किया। मुख्य अतिथि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय प्रणाली की कमियों की ओर ध्यान दिलाने का उद्देश्य निंदा नहीं, बल्कि सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना से ही न्याय व्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने तकनीक को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि उसका उपयोग उसे वरदान या अभिशाप बना सकता है, इसलिए तकनीक को केवल सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने लंबित मामलों की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि कानूनी समुदाय को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या आर्बिट्रेशन, जिसे कभी समाधान माना गया था, अब स्वयं चुनौती बन रहा है। हालांकि, उन्होंने वैवाहिक मामलों में मध्यस्थता की सफलता को सराहनीय बताया।
कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन शर्मा ने कहा कि देश में 6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता और तकनीक सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक दस्तावेजीकरण व प्रक्रियाओं को तेज कर सकती है, जिससे लाखों मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में न्याय प्रणाली की गति महत्वपूर्ण है और तकनीक इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
सिल्फ के अध्यक्ष डॉ. ललित भसीन ने विधि शिक्षा में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लॉ स्कूलों को छात्रों को तकनीक के सही उपयोग और उसके दुरुपयोग से बचाव के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में आर्बिट्रेशन व्यवस्था अपेक्षित स्तर तक विकसित नहीं हो सकी है, जिसके कारण कॉर्पोरेट विवाद अक्सर सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में ले जाए जाते हैं।
डॉ. भसीन ने भारत की पारंपरिक पंचायत आधारित सहमति न्याय प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय केवल कानून तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समन्वय और सहमति से भी जुड़ा है। कॉन्क्लेव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई लॉ फर्मों का सफल नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो विधि क्षेत्र में नारी शक्ति का प्रेरक उदाहरण हैं। यह कॉन्क्लेव न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण विमर्श का मंच साबित हुआ।
नई दिल्ली में आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन के निर्माण कार्यों का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण
नई दिल्ली। राजधानी में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का कार्य तेज़ी से जारी है। इसी क्रम में रेखा गुप्ता ने मेट्रो फेज-4 के तहत आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम के अधिकारियों के साथ परियोजना की प्रगति, निर्माण गुणवत्ता और यात्री सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता, सुरक्षा और तय समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि मेट्रो दिल्ली की जीवनरेखा है और प्रतिदिन लाखों लोग इसका उपयोग करते हैं। ऐसे में हर स्तर पर पारदर्शिता और कार्य में तेजी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और आवश्यकताओं को देखते हुए आधुनिक और मजबूत कनेक्टिविटी तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है, जो विकसित दिल्ली की दिशा में अहम कदम है।
गौरतलब है कि मेट्रो फेज-4 के तहत तीन नए कॉरिडोर—लाजपत नगर-साकेत, इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ और रिठाला-कुंडली—के लिए 3,386.18 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है। करीब 14,630.80 करोड़ रुपये की लागत से अगले चार वर्षों में 47.22 किलोमीटर लंबा नेटवर्क तैयार होगा, जिससे उत्तर, मध्य और दक्षिणी दिल्ली को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, महिला आरक्षण के मुद्दे पर रख सकते हैं बात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। पीएम का ये संबोधन ऐसे समय हो रहा है, जब एक दिन पहले ही लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिर गया। दो तिहाई बहुमत न मिलने की वजह से केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में पास नहीं करवा पाई है। पिछले 12 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब मोदी सरकार का कोई बिल वोटिंग के बाद संसद में गिर गया है।

महिला आरक्षण बिल पर होगी बात?

महिला आरक्षण बिल पर बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री के संबोधन के विषय को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वह महिला आरक्षण बिल और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी बात रख सकते हैं।

कैबिनेट कमेटी की बैठक में दिखे निराश

वहीं, ये बी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संसद भवन में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में महिला आरक्षण बिल के गिरने पर गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को इस फैसले पर ‘जिंदगी भर पछताना पड़ेगा’ और उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष अपनी इस स्थिति को छिपाने के लिए बहाने ढूंढ रहा है। ऐसे में आज पूरी संभावना है कि पीएम मोदी रात 8:30 बजे देश के नाम संबोधन देंगे जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोल सकते हैं।

सभी सांसदों से की थी पीएम मोदी ने अपील

इससे पहले पीएम मोदी ने कल महिला रिजर्वेशन बिल पर सभा सांसदों से अपील करते हुए कहा था कि मैं सभी सांसदों से कहूंगा कि आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए। देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित मत करिए। ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी. देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा

पहले भी कई बार देश को कर चुके हैं संबोधित

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 सितंबर 2025 को शाम 5 बजे देश को संबोधित किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि नवरात्र के पहले दिन से ‘नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स’ की शुरुआत होगी और ‘जीएसटी बचत महोत्सव’ की भी शुरुआत की जाएगी। उन्होंने बताया था कि इस पहल से आम लोगों की बचत बढ़ेगी और रोजमर्रा की चीजें पहले से ज्यादा सस्ती और आसानी से उपलब्ध होंगी। वहीं, 12 मई की रात 8 बजे दिए गए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी देशवासियों के साथ साझा की थी।

लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश को हमने हरा दिया : प्रियंका गांधी
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि संसद में शुक्रवार को लोकतंत्र की एक बड़ी जीत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नीत केंद्र सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश कर रही थी, जिसे पूरे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया।
शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद में हुई यह घटना संविधान, देश और विपक्षी एकता की जीत है। महिला आरक्षण बिल पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे तुरंत लागू करने के पक्ष में है। उनका कहना था कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू किया जाना चाहिए और महिलाओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार जो प्रस्ताव लाई, वह वास्तविक महिला आरक्षण बिल नहीं था, बल्कि परिसीमन (Delimitation) से जुड़ा हुआ था। विपक्ष इस बात से सहमत नहीं हो सकता कि परिसीमन बिना जातिगत जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाए।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन था। उन्होंने कहा कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीति की जा रही है और सरकार की पूरी रणनीति का उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। उनके अनुसार, इसके लिए महिलाओं के मुद्दे का इस्तेमाल किया गया।
महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

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महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

लोकसभा में ज्यादा वोट पाकर भी क्यों फेल हो गया महिला आरक्षण बिला, जानें अब आगे क्या?

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महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। मतदान के समय सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे। ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। जिसके कारण अधिक वोट मिलने के बाद भी बिल फेल हो गया।

पिछले 12 सालों में पहली बार गिरा कोई संशोधन विधेयक

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। देश की आधी आबादी को उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए शुक्रवार शाम लोकसभा में वोटिंग हुई। सरकार ने इस बिल को पारित कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन यह बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े और कहानी यहीं पर समाप्त हो गई।

विपक्ष ने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया गया है। रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।

बाकी दो विधेयकों पर क्यों नहीं हुई वोटिंग

सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

बिल में क्या था प्रस्ताव?

संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था। साथ ही 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था, ताकि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

विपक्ष क्यों है नाराज?

इस पूरे मामले में एक और बड़ा मुद्दा परिसीमन यानी डिलीमिटेशन को लेकर भी सामने आया। सरकार चाहती थी कि लोकसभा की सीटों का पुनर्निर्धारण करके महिला आरक्षण को लागू किया जाए, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध किया। विपक्ष का तर्क था कि परिसीमन के जरिए कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे तुरंत लागू करना उचित नहीं होगा। इसी मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो गया और बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।

धर्मांतरण नहीं, देश के खिलाफ सुनियोजित खेल’, टीसीएस मामले में साजिश की “बू”

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इन दिनों देश में धर्मांतरण का मुद्दा सुर्खियों में है। देश की प्रतिष्ठित आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 'कॉर्पोरेट एथिक्स' और 'वर्कप्लेस कल्चर' को तार-तार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के नासिक स्थित टीसीएस के दफ्तर में सामने आए इस मामले में पूरे देश में हलचल मचा दी है।

एक गहरी साजिश की ओर इशारा

टीसीएस की एक पूर्व कर्मचारी ने कंपनी के भीतर चल रहे धर्मांतरण के सिंडिकेट और यौन उत्पीड़न के 'नेक्सस' का कच्चा चिट्ठा खोला है। इस 'खुलासे' ने न केवल कंपनी के इंटरनल सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पेशेवर दुनिया के भीतर सक्रिय एक गहरी साजिश की ओर भी इशारा किया है।

मामले में अब तक मामले में 9 एफआईआर दर्ज

26 मार्च को सामने आए इस पूरे मामले में आरोप है कि टीसीएस नासिक के कुछ कर्मचारियों ने 18 से 25 साल की महिला सहकर्मियों को निशाना बनाया। उन पर यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और जबरन धर्म परिवर्तन कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। अब तक इस मामले में 9 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इस केस में पुलिस ने अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें 7 पुरुष और 1 महिला शामिल है। पुलिस को करीब 78 संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट मिले हैं। कुछ वित्तीय लेनदेन के संकेत भी सामने आए हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा 'आतंकवादी कृत्य'

इस बीच धर्मांतरण और योन उत्पीड़ने का मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह जबरन या धोखे से किए जा रहे धर्मांतरण को गंभीर राष्ट्रीय समस्या के तौर पर देखे। याचिकाकर्ता के अनुसार इस तरह का काम 'आतंकवादी कृत्य' और 'भारत के खिलाफ (अप्रत्यक्ष) युद्ध' की श्रेणी में आता है।

सामाजिक ताने-बाने को तबाह करने की कोशिश

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय ने डाली है। उन्होंने इस घटना को एक व्यापक पैटर्न के तौर पर देखने की मांग की है, जो कि सिर्फ नासिक टीसीएस तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ता की दलील है कि संगठित धर्मांतरण निजी बुरे कर्मों से कहीं ज्यादा खतरनाक है और यह सामाजिक ताने-बाने को तबाह कर सकता है।

एक महिला ने लगाए कई गंभीर आरोप

इस मामले में दर्ज पहली एफआईआर में एक महिला ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत दर्ज कराने वाली महिला 2023 से टीसीएस के नासिक ऑफिस में एसोसिएट के तौर पर काम कर रही है। एफआईआर के मुताबिक़, "उसकी मुलाकात 2022 में एक अभियुक्त से हुई थी। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे और दोस्त थे। अभियुक्त ने महिला को अपनी कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। इसी दौरान जुलाई 2022 में अभियुक्त ने महिला से शारीरिक संबंध की मांग की और ज़बरदस्ती भी की। महिला के विरोध करने पर उसने शादी की इच्छा जताई।महिला ने कहा कि वह सोचकर बताएगी।"

एफ़आईआर के मुताबिक, बाद में अभियुक्त महिला को अक्सर कॉलेज के बाद मिलने के लिए बुलाने लगा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने महिला को इसी कंपनी में इंटरव्यू देने को कहा, जहां वह एसोसिएट पद पर सिलेक्ट हो गई। टीसीएस में ही महिला की मुलाक़ात अभियुक्त के एक पुरुष और एक महिला परिचित से हुई। ये चारों अक्सर साथ रहते, कैंटीन जाते और साथ टहलते थे। इसी दौरान अभियुक्त और उसके दोनों साथी महिला से उसके धर्म को लेकर कथित तौर पर कई अपमानजनक बातें भी कही जाती थीं।

एफ़आईआर में आरोप लगाया गया है कि अगस्त 2024 में अभियुक्त महिला को एक रिज़ॉर्ट ले गया और जबरन शारीरिक संबंध बनाए। आरोप है कि इसके बाद कंपनी में काम करने वाला उसका दोस्त महिला के घर गया और परिवार को रिश्ते की बात बताने की धमकी देकर उससे भी शारीरिक संबंध बनाने की मांग की। बाद में ऑफ़िस में भी महिला के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप है। एफआईआर के मुताबिक़, दोनों दोस्त महिला पर लगातार दबाव बनाते रहे कि उसे धर्म परिवर्तन कर लेना चाहिए। महिला के मुताबिक, इस दौरान अभियुक्त उससे नजदीकियां बढ़ाने की भी कोशिश करते रहे।

हरिवंश फिर बने राज्यसभा के उपसभापति, पीएम मोदी ने दी बधाई

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राज्यसभा सांसद हरिवंश लगातार तीसरी बार संसद के उच्च सदन में उपसभापति चुन लिए गए हैं। शुक्रवार को उन्हें निर्विरोध राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है। इसके साथ हरिवंश नारायण सिंह ने इतिहास दर्ज कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी मनोनीत सांसद को उपसभापति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि हाल ही में हरिवंश को हाल ही में द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था।

पीएम मोदी ने ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि मैं हरिवंश जी को बधाई देता हूं। राज्य सभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना अपने आप में इस सदन का आपके प्रति गहरा विश्वास है। सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है उसको एक प्रकार से सदन ने आज मुहर लगा दी है। ये एक सहज कार्यशैली का सम्मान है। हम सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति हो और प्रभावित होते देखा है। ये अपने आप में इस सदन का जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का सदन को जो लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसपर एक प्रकार से सदन ने आज एक मुहर लगा दी है

निर्विरोध चुने गए राज्यसभा के उपाध्यक्ष

राज्यसभा के मनोनीत सांसद हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुने गए हैं। राज्यसभा के उपाध्यक्ष के रूप में वह निर्विरोध चुने गए हालांकि, विपक्षी खेमे से किसी उम्मीदवार को न उतारे जाने के बाद उनका निर्विरोध चुना जाना तय था, जिसकी औपचारिक रूप से आज शुक्रवार को घोषणा की गई।

महिला आरक्षण अधिनियम 2023 हुआ लागू, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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देश की संसद में देर रात तक महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर जोरदार बहस हुई। आज शाम चार बजे महिला आरक्षण पर वोटिंग भी होनी है। इस बीच महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम-2023 गुरुवार से लागू हो गया। इस संबंध में केंद्रीय कानून मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया। कानून को लागू करने के संबंध में एक अधिकारी ने ’’तकनीकी खामियों’’ का हवाला दिया, लेकिन इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।

अभी नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

अधिकारी ने आगे कहा कि अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जा सकता है। इसके मुताबिक अधिनियम लागू होने के बावजूद वर्तमान लोकसभा में महिलाओं को इसका लाभ तुरंत नहीं मिल सकेगा।

अधिसूचना में क्या?

अधिसूचना में लिखा है: "संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा उक्त अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने की तिथि 16 अप्रैल, 2026 नियुक्त करती है।"

आज लोकसभा में 6 घंटे तक होगी बहस, फिर वोटिंग

इधर, लोकसभा में गुरुवार को पेश किए गए तीन अहम बिलों पर आज भी चर्चा जारी रहेगी और शाम को इन पर मतदान कराया जाएगा। लोकसभा कार्यसूची के अनुसार, गुरुवार को इन बिलों पर 12 घंटे से अधिक लंबी बहस हुई थी, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे। आज यानी शुक्रवार को करीब 6 घंटे अतिरिक्त चर्चा के लिए निर्धारित किए गए हैं। वोटिंग से पहले गृहमंत्री अमित शाह सदन में विस्तृत जवाब देंगे, जिसके बाद इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर निर्णय लिया जाएगा।

2023 में पारित हुआ था विधेयक

सितंबर 2023 में, संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है, जो विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस बिल को राजनीतिक रंग न दें, महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी

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संसद का विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार ने ये विशेष सत्र बुलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर लोकसभा में चर्चा में शामिल हुए। महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। ये 21वीं सदी का सबसे अहम बिल है।

राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने बिल पर लोकसभा में अपनी बात रखते हुए कहा, राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती हैं। मैं समझता हूं संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। आवश्यकता यही थी कि 25 से 30 साल पहले जब ये विचार सामने आया। जरूरत महसूस हुई तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते।

देश की दशा-दिशा तय करने वाला बिल- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि, हमारा सौभाग्य है कि हमें देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने का सौभाग्य मिल रहा है। हम सभी सांसद इस अवसर को जाने न दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन वयवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। इस मंथन से जो अमृत निकलेगा वो देश की राजनीति की भी दशा दिशा तय करेगा।

पीएम मोदी ने कहा- इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं

पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में विपक्ष को आइना दिखाया। उन्होंने कहा, 'हमारे देश में जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया है उसका हाल बुरा हुआ है। 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि किसी ने विरोध नहीं किया। आज भी मैं कहता हूं कि हम साथ जाते हैं तो इतिहास गवाह है कि ये किसी एक के पक्ष में नहीं जाएगा, ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा। हम सब उसके हकदार रहेंगे। इसलिए जिन को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के परिणामों को देख लें। इसी में फायदा है जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाओगे। इसलिए इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

विरोध करने वालों को देश की महिलाएं माफ नहीं करेंगी-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की महिलाएं अब मुखर हो रही हैं। वे समाज की भावनाओं और समस्याओं को गहराई से समझती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि महिलाएं सशक्त, महत्वाकांक्षी और निर्णय लेने में सक्षम हैं, इसलिए वे शासन और कानून निर्माण में भागीदारी चाहती हैं। उन्होंने साफ कहा कि जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी। पीएम मोदी ने विपक्ष से कहा कि देश की बहनों पर भरोसा करें और उन्हें आगे आने का अवसर दें। प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।

हमें क्रेडिट नहीं चाहिए- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने सदन में कहा कि यहां कुछ लोगों को लगता है कि इसमें मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। पीएम ने कहा क‍ि अगर इसका विरोध करेंगे तो राजनीतिक लाभ मुझे होगा। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें इसका क्रेडिट नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कानून बन जाए तो कल के कल अखबार में सबकी फोटो के साथ बधाई संदेश छपवाने को तैयार हूं। जिसका भी फोटो छपवााना हो, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको देर रहा हूं।