शादी-तिलकोत्सव में गहराया गैस सिलेंडर संकट
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*घंटों इंतजार के बाद ही उपभोक्ताओं को मिल रहा है गैस सिलेंडर,कोयला - लकड़ी के दामों में भी हुई बढ़ोतरी*
नितेश श्रीवास्तव
भदोही। शादी का सीजन शुरूआत होते ही गैस सिलेंडर का संकट गहराने लगा है। गैस सिलेंडर किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ता अब लकड़ी और कोयले की खरीद करने लगे हैं। जिन घरों में शादी पड़ी है या तिलकोत्सव है, उनके सामने ईंधन की विकट समस्या खड़ी हो गई है। लकड़ी और कोलया से भोजन बनाने की बुकिंग में हलवाई श्रमिक खर्च बढ़ा दे रहे हैं। अमेरिका-इजराइल युद्ध में बिराम तो लगा लेकिन तनाव और ईंधन का किल्लत बना हुआ है। लगन में मर्यादा कैसे संभले यह चिंता हर वर्ग को सताए जा रही है। गैस सिलेंडर बुकिंग कराने के लिए उपभोक्ता शादी का कार्ड लेकर पूर्ति कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।सिंहपुर नहरा के पास स्थित एक स्थान पर बुकिंग कराने वाले उपभोक्ताओं को बुलाया गया। वाहन आने तक उपभोक्ता तीखी धूप के बीच घंटों इंतजार करने को विवश हुए। गैस सिलेंडर को लेकर दौड़ रहे उपभोक्ता गर्मी और तीखी धूप से हतास हो जा रहे हैं। जिलापूर्ति अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि गैस सिलेंडर बुकिंग के बाद उपभोक्ताओं को निर्धारित समय सीमा के अंदर मिल जा रहा है। कामर्शियल गैस तो अब भी अभाव बना हुआ है। जिन घरों में शादी हुई है उनका प्राथमिकता के आधार पर बुकिंग किया जा रहा है। तहसील स्तर कार्यालय पर भी आनलाइन बुकिंग की जा रही है। जबकि देखा जा रहा है कि हाथ में शादी का कार्ड और पैसा लिए उपभोक्ता दर-दर भटकने को विवश हो रहे हैं। प्रशासन स्तर से गैस सिलेंडर कालाबाजारी रोकने के लिए जांच सख्त कर दी है। लेकिन विभागीय स्तर से संज्ञान न लिया जाना गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। विभागीय अधिकारी हैं कि प्राथमिकता से सिलेंडर मुहैया कराने का दावा कर रहे हैं। गुरुवार को सिंहपुर नहरा के पास घंटों उपभोक्ता गैस सिलेंडर लेने के लिए खड़े रहे। शादियों के सीजन की शुरुआत से पहले ही शहर में रसोई गैस की किल्लत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 15 अप्रैल से मांगलिक कार्यों का दौर शुरू हो गया लेकिन गैस सिलेंडर की कमी शादी वाले परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। हालात यह हैं कि परिजन शादी के कार्ड लेकर पूर्ति कार्यालय और गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने को विवश हैं। गैस सिलेंडर का अभाव हर तबके की चिंता बढ़ा दी है। लकड़ी और कोयला पर भोजन बनाने को लेकर हलवाई मजदूरी बढ़ा दिए हैं। जो बुकिंग दस से बीस हजार में हो जाता था वह सीधे 35 से 40 हजार तक पहुंच गया है। लकड़ी के ईंधन पर भोजनहोटल-ढाबा संचालकों की फिर बढ़ी दिक्कतज्ञानपुर। लगन शुरू होते ही होटल-ढाबा संचालकों की दिक्कत फिर बढ़ गई है। अब जिन घरों में शादी या तिलकोत्सव है उन्हें कार्ड के आधार पर प्राथमिकता से गैस सिलेंडर मुहैया कराया जा रहा है। ऐसे में होटल-ढाबा संचालकों के सामने फिर ईंधन की दिक्कत खड़ी हो गई। कोयला और लकड़ी पर इन दिनों नाय, नाश्ता और भोजन तैयार किया जा रहा है। व्यापारियों की माने तो बीच में सिलेंडर मिल जाता था। लेकिन लगन शुरू होते ही फिर संकट गहराने लगा है। ऐसे में होटल और ढाबों पर व्यंजन की मात्रा घट गई है।बिन काम वापस लौट रहे हैं कारीगरज्ञानपुर। अमेरिका-इजराइल युद्ध ने हर वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। दुकानों और होटल-ढाबों पर व्यंजन कम होने से कारीगरों को वापस लौटना पड़ रहा है। जिन दुकान पर युद्ध से पूर्व चार से छह कारीगर काम करते थे वहां मात्रा एक या दो रह गए हैं। बिन में सिलेंडर मिलना शुरू हुआ था तो आधे कारीगर आ गए थे। लेकिन लगन शुरू होते ही फिर दुकानों पर ईंधन की समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि यहीं कारीगर अब शादी औ तिलकोत्सव में काम कर अपने आर्थिक स्थिति में सुधार कर रहे हैं।



नितेश श्रीवास्तव
3 hours ago
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