माननीया राज्यपाल जी ने प्रो. राजेन्द्र सिंह रज्जू भय्या विश्वविद्यालय में 25 नव निर्मित शैक्षणिक सुविधाओं का लोकार्पण किया
माननीय राज्यपाल जी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर दिया विशेष जोर
प्रयोगशालाओं के प्रभावी उपयोग से व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाने के निर्देश
सेमीकंडक्टर एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहल से तकनीकी सशक्तिकरण को गति
माननीय राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय में आधुनिक प्रयोगशालाएं, स्मार्ट कक्षाएं एवं अवसंरचना की सराहना की
तकनीक के साथ नैतिक मूल्यों का संतुलन आवश्यक-माननीय राज्यपाल
विद्यार्थियों का जीवन स्वयं एक प्रयोगशाला है जहां नित्य नूतन विचारों का व्यवहार होना चाहिए
आत्मनिर्भरता विकल्प नहीं आज की आवश्यकता, भारत बन रहा परिवर्तन का नेतृत्वकर्ता-माननीय राज्यपाल
विश्वनाथ प्रताप सिंह
प्रयागराज। प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज परिसर में 25 नव निर्मित शैक्षणिक सुविधाओं का बटन दबाकर लोकार्पण किया। सर्वप्रथम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कुलाधिपति महोदया को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्रम प्रदान कर अभिनंदन किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में माननीय राज्यपाल जी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए निर्मित शैक्षणिक सुविधाएं उत्कृष्ट एवं उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से प्रयोगशालाओं के प्रभावी एवं नियमित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इनके माध्यम से विद्यार्थी अधिक व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे शिक्षा अधिक पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बन सके। उन्होंने अभिभावकों से भी आह्वान किया कि वे समय-समय पर विश्वविद्यालय आकर यह अवलोकन करें कि उनके बच्चे क्या सीख रहे हैं और किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में उन्होंने वर्तमान विश्व परिस्थितियों एवं संघर्षों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि किसी भी राष्ट्र का विकास उसकी दूरदर्शिता पर निर्भर करता है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल जी ने कहा कि वे स्वयं को केवल अपने परिवार की अपेक्षाओं तक सीमित न समझें, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के सपनों का प्रतिनिधि मानते हुए अपने लक्ष्य निर्धारित करें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे यह विचार करें कि वे राष्ट्र निर्माण में क्या योगदान दे सकते हैं, क्योंकि प्रत्येक युवा की सकारात्मक सोच एवं प्रयास ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज का भारत अवसरों से परिपूर्ण है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी के पास अपने सपनों को साकार करने की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे केवल रोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार, शोध एवं सृजनात्मक कार्यों के माध्यम से देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आज का भारत एक आकांक्षी भारत है, जहां हर व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
माननीय राज्यपाल जी ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक, नवाचार एवं डिजिटल क्रांति का युग है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है। तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे केवल तकनीकी रूप से दक्ष न बनें, बल्कि नैतिक रूप से भी सशक्त बनें तथा अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए करें।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का वर्तमान दशक चुनौतियों एवं संभावनाओं का संगम है, जहां वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने कठिन परिस्थितियों को अवसर में परिवर्तित करने की क्षमता प्रदर्शित की है तथा तकनीकी क्षेत्र में तीव्र गति से प्रगति करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
माननीय राज्यपाल जी ने देश में सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत के तकनीकी आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्थापित हो रहे सेमीकंडक्टर संयंत्र देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं।
उन्होंने बताया कि जनभवन, उत्तर प्रदेश की पहल पर डॉ० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एवं सीमेंस कंपनी के मध्य हुए समझौते के तहत सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन एवं सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जा रही है। इसके अंतर्गत लगभग 200 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो आगे चलकर हजारों विद्यार्थियों को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस प्रकार की पहलें युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उन्होंने कहा कि आज का भारत केवल परिवर्तन का साक्षी नहीं, बल्कि परिवर्तन का नेतृत्वकर्ता बन चुका है। ऊर्जा, तकनीक एवं नवाचार के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे समय के साथ चलने के साथ-साथ समय को दिशा देने का संकल्प लें, ताकि वे स्वयं के साथ-साथ राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के दौरान माननीय राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय परिसर स्थित देवालय का भी दर्शन किया। इसके पश्चात उन्होंने फार्मेसी विभाग, विज्ञान विभाग एवं कृषि विभाग के नव-निर्मित एवं उद्घाटित प्रयोगशालाओं, स्मार्ट कक्षाओं एवं अन्य शैक्षिक अवसंरचनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने इन सुविधाओं की गुणवत्ता, आधुनिकता एवं उपयोगिता की प्रशंसा करते हुए इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही विश्वविद्यालय के लोकार्पित मुख्य पूर्वी द्वार का भी भ्रमण किया।
कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में राज्यपाल जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि माननीय कुलाधिपति महोदया ज्ञान, प्रेरणा और शक्ति का स्त्रोत है जिनके कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लोकार्पण के माध्यम से आधुनिक युग के मार्गदर्शन की दिशा और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि मूल्य एवं विचारों का भी संवाहक है। विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षिक योजनाओं, नवीन पाठ्यक्रमों तथा अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नव स्थापित प्रयोगशालाओं में विद्यार्थी केवल शोध कार्य ही नहीं करेंगे, बल्कि तर्क, विश्लेषण एवं नवाचार की क्षमता भी विकसित करेंगे। यहाँ से निकलने वाले शोध समाज एवं राष्ट्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
नव निर्मित सुविधाओं के अन्तर्गत सम्मेलन कक्ष, संगोष्ठी सभागार, बायोकेमेस्ट्री प्रयोगशाला, यंत्र कक्ष, प्लांट एंड जेनेटिक ब्रीडिंग प्रयोगशाला, पूर्वी मुख्य द्वार, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, फार्मास्यूटिकल प्रयोगशाला, फर्माकोलाजी प्रयोगशाला, नवनिर्मित देवालय, एस्पेक्टिक रूम, वनस्पति विज्ञान प्रयोगशाला, भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला, फार्माकोग्नासी प्रयोगशाला, रसायन प्रयोगशाला, हॉर्टिकल्चर प्रयोगशाला, डाटा सेंटर, कंप्यूटर लैब, जीव विज्ञान प्रयोगशाला, स्मार्ट कक्ष, रसायन विज्ञान प्रयोगशाला, फार्मास्यूटिकल रसायन प्रयोगशाला, एग्रोनॉमी प्रयोगशाला इत्यादि हैं, जिनका कुलाधिपति महोदया ने संयुक्त रुप से लोकार्पण किया।
कुलसचिव डॉ. विनीता यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर वित्त अधिकारी श्रीमती आस्था तिवारी, कुलानुशासक प्रो. राजकुमार गुप्त, अधिष्ठाता विद्यार्थी कल्याण प्रो.आशुतोष कुमार सिंह, अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. विवेक कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गीतांजलि श्रीवास्तव ने किया।


2 hours and 49 min ago
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