गोरखपुर, कन्नौज और कानपुर डेयरी प्लांट का संचालन निर्धारित समय सीमा में शुरू किया जाए: धर्मपाल सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जनपद गोरखपुर, कन्नौज एवं कानपुर में स्थापित किए जा रहे दुग्ध संयंत्रों का संचालन निर्धारित समयसीमा में हर हाल में प्रारंभ किया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि कन्नौज डेयरी प्लांट का संचालन 30 अप्रैल 2026 तक, गोरखपुर डेयरी प्लांट का 05 मई तक तथा कानपुर डेयरी प्लांट का संचालन 20 मई 2026 तक प्रत्येक दशा में प्रारंभ कर दिया जाए। प्रदेश में प्लांट संचालन के लिए अमोनिया गैस अथवा अन्य आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं है, इसलिए सभी संयंत्रों का संचालन पूरी क्षमता के साथ सुचारु रूप से सुनिश्चित किया जाए। अतः किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में एनडीडीबी द्वारा स्थापित किए जा रहे कानपुर, गोरखपुर और कन्नौज दुग्ध संयंत्रों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को  सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इन दुग्ध संयंत्रों के शीघ्र संचालन से प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मंत्री ने दुग्ध विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराया जाए। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक एवं बेहतर प्रबंधन के माध्यम से उत्तर प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाया जाए।
बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम, दुग्ध आयुक्त श्रीमती के. धनलक्ष्मी, डॉ. राम सागर, पीसीडीएफ के समन्वय राम चरण, संजय भारती सहित एनडीडीबी एवं दुग्ध विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ही सरकार का लक्ष्य: ए.के. शर्मा

लखनऊ/ मऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के मर्यादपुर में आयोजित निषाद राज जयंती कार्यक्रम में प्रतिभाग कर निषाद समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समाज के समग्र विकास और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संबोधन में मंत्री श्री शर्मा ने निषाद समाज की भूमिका और योगदान का उल्लेख करते हुए रामचरितमानस के प्रसिद्ध केवट प्रसंग को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और निषादराज गुह्य की मित्रता भारतीय संस्कृति में सच्ची निष्ठा, भक्ति और आत्मीयता का अद्वितीय उदाहरण है। वनवास के कठिन समय में निषादराज द्वारा भगवान राम की सहायता, विशेष रूप से गंगा नदी पार कराने की घटना, यह दर्शाती है कि सच्चे संबंध जाति और वर्ग से ऊपर होते हैं। यह प्रसंग समाज को आपसी विश्वास, सहयोग और समानता का संदेश देता है।
मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि आज के समय में इस प्रकार के प्रेरक प्रसंगों से सीख लेकर समाज में आपसी सौहार्द और एकजुटता को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर वंचित और पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि सभी को समान अवसर और सम्मान मिल सके।उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ कार्य कर रही है, जिसके अंतर्गत शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने निषाद समाज के युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से अपने भविष्य को सशक्त बनाएं और देश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इस अवसर पर रुद्रपुर, देवरिया के विधायक जयप्रकाश निषाद भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में निषाद समाज की एकता, संघर्ष और प्रगति पर प्रकाश डालते हुए समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठित प्रयासों पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कृषि में वैल्यू एडिशन और तकनीक के समन्वय से बढ़ेगी किसानों की आय : केशव प्रसाद मौर्य
* एमिटी विवि में डिप्टी सीएम ने किया अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लखनऊ स्थित एमिटी विश्वविद्यालय में ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) विषय पर
“पैथोजेन्स, प्लांट हेल्थ एंड फूड सिक्योरिटी: क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एंड लैंडस्केप कंजर्वेशन” विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मे बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उप मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत करते हुए उन्हें अंगवस्त्र, पगड़ी (साफा) पहनाकर तथा एक पौधा सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने “Pathogens, Plant Health and Food Security” नामक पुस्तक का विमोचन किया तथा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वरिष्ठ वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने इस उत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, नवाचार और आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और प्रभावी विपणन से जुड़ा एक व्यापक विषय है, जिस पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश देश की सबसे उपजाऊ भूमि वाला प्रदेश है, जहां उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद फसलों के भंडारण की कमी, कोल्ड चेन की अपर्याप्त व्यवस्था तथा वैल्यू एडिशन के अभाव के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार अधिक उत्पादन होने पर भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जो शोध और नीति निर्माण का महत्वपूर्ण विषय है।
उप मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऐसी तकनीकों का विकास करें, जिससे प्राकृतिक आपदाओं जैसे वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि अब समय क्वांटिटी के साथ क्वालिटी पर ध्यान देने का है, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।प्रदेश में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों के बारे में बताते हुए श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश में चाहे सड़क मार्ग हो, चाहे रेल मार्ग या फिर हवाई मार्ग, इन सबके निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में गरीब, किसान, युवा एवं मातृशक्ति के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और सरकार का लक्ष्य उन्हें “लखपति दीदी” से आगे “करोड़पति दीदी” बनाना है।
श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार की ‘एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP)’ योजना ने स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है तथा अब “एक जनपद, एक व्यंजन” के माध्यम से खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन बढ़ाकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार किसानों और किसानी के सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के सम्मेलन खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन एमिटी फूड एंड एग्रीकल्चर फाउंडेशन (ए.एफ.ए.एफ), एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर और इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी (आईएसएमपीपी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विश्वस्तरीय चर्चा और विचार-मंथन के लिए  प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एक मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं।
डॉ. अशोक के. चौहान ने वर्चुवल रूप से जुड़ते हुये मुख्य अतिथि सहित सभी का स्वागत करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से जुड़े होने के नाते वे कृषि और किसानों की परेशानियों से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में विश्वभर के वरिष्ठ और स्थापित वैज्ञानिकों को एक साथ देखकर विश्वास मजबूत होता है कि भारत न केवल कृषि में बल्कि हर क्षेत्र में सुपर पावर बनकर रहेगा और एमिटी विश्वविद्यालय इसमें अपना हर प्रकार का सहयोग देगा।
डॉ. असीम चौहान ने अपने वर्चुवल सम्बोधन मे ग्रामीण विकास में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, मूल्य संवर्धन और ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग के महत्व को रेखांकित  किया और कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और बदलते मौसम का सामना करने के उपायों पर  हमे और काम करना होगा।
प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ ने डॉ. अशोक के. चौहान एवं डॉ. असीम चौहान के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए जलवायु परिवर्तन, उभरती पादप बीमारियों तथा खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव जैसे वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सम्मेलन को ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोग एवं नवाचार के लिए एक सशक्त मंच बताया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने जलवायु-लचीली कृषि प्राप्त करने में पादप स्वास्थ्य, रोगजनकों के प्रबंधन एवं खाद्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. सी. डी. मयी ने कृषि को किसान, रोगजनक कीटाणुओं और पर्यावरण के एक जटिल संबंध के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संतुलित एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई तथा रासायनिक उपयोग पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति सावधान किया।
डॉ. एस. एस. चाहल ने कृषि परिदृश्य में हो रहे परिवर्तनों पर चर्चा करते हुए आक्रामक प्रजातियों, उभरते रोगजनकों और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान में जीनोमिक्स एवं पारिस्थितिक दृष्टिकोण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. (डॉ.) पोखर रावल ने इंडियन सोसाइटी ऑफ माइकोलॉजी एंड प्लांट पैथोलॉजी की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए इसकी बढ़ती सदस्यता और वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उन्होंने इसकी शोध पत्रिका के वेब ऑफ साइंस में सूचीबद्ध होने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक शोध को सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. ललित महात्मा ने अपने विचारोत्तेजक संबोधन में लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए शैक्षणिक जीवन में मूल्यों, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर दिया। उन्होंने बीजों के माध्यम से वायरस संचरण के प्रयोगात्मक प्रमाण प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक समुदाय से पारंपरिक धारणाओं की पुनर्समीक्षा करने का आह्वान किया।
डॉ. डी. आर. सिंह ने भारत की कृषि विविधता, विशेषकर बिहार के मखाना, आम और लीची जैसे उत्पादों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने खाद्य पर्याप्तता से पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कीटनाशकों के अवशेष और माइकोटॉक्सिन प्रदूषण के खतरों को उजागर किया।
सम्मेलन के दौरान वैज्ञानिक उत्कृष्टता का उत्सव भी मनाया गया, जिसमें विशिष्ट वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विशेष उपलब्धि पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए गए।
प्रति कुलपति एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर प्रोफेसर (डॉ.) अनिल वशिष्ठ, एमेरिटस प्रेसिडेंट आईएसएमपीपी डॉ. एस. एस. चाहल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ‘कॉटन मैन’ के नाम से विख्यात, प्रेसिडेंट साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, नई दिल्ली, डॉ. सी. डी. मयी, सचिव आईएसएमपीपी प्रो. (डॉ.) पोखर रावल, अध्यक्ष आईएसएमपीपी डॉ. ललित महात्मा, कुलपति बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी डॉ. डी. आर. सिंह और सम्मेलन की आयोजन सचिव एवं निदेशक, एएफएएफ, एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ परिसर, प्रो. (डॉ.) शालिनी सिंह विसेन ने  सम्मेलन मे औपचारिकरुप सै भाग लिया। इस अवसर पर फाउंडर प्रेसिडेंट, एमिटी एजुकेशन ग्रुप, रितनंद बलवेद एजुकेशन फाउंडेशन, डॉ. अशोक के. चौहान, और चेयरमैन एमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ कैंपस डॉ. असीम चौहान ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
यूपी बिजली विभाग में बड़े स्तर पर रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी, पद खत्म होने और छंटनी का खतरा

लखनऊ। प्रदेश के बिजली विभाग में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। Uttar Pradesh Power Corporation Limited (यूपीपीसीएल) द्वारा विद्युत वितरण क्षेत्र के बाद अब ट्रांसमिशन सेक्टर में भी व्यापक रिस्ट्रक्चरिंग की तैयारी की जा रही है।

Vidyut Karmchari Sanyukt Sangharsh Samiti ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर पद समाप्त किए जाएंगे, जिससे नियमित और संविदा कर्मचारियों की छंटनी की आशंका है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ट्रांसमिशन क्षेत्र में रिस्ट्रक्चरिंग लागू करने के संकेत दिए हैं। पहले चरण में सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े करीब 150 पद समाप्त किए जाने की योजना है।

इसके अलावा कई मंडलों और खंडों के विलय की भी तैयारी है। प्रस्ताव के तहत गोरखपुर और प्रयागराज मंडल को मिलाकर वाराणसी मंडल, जबकि मुरादाबाद और ग्रेटर नोएडा को मिलाकर मेरठ मंडल बनाए जाने की योजना है। अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के मर्जर प्रस्तावित हैं।

प्रस्तावित ढांचे में अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर के पदों में बड़ी कटौती की बात सामने आई है। कुल मिलाकर पहले चरण में ही डेढ़ सौ से अधिक पद समाप्त किए जा सकते हैं।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रक्रिया निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि आगे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और अन्य विभागों में भी बड़े स्तर पर पद समाप्त किए जा सकते हैं, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों पर असर पड़ेगा।

कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि इस फैसले से बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है, खासकर गर्मियों के दौरान जब मांग अधिक होती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

इसी क्रम में 12 अप्रैल को Lucknow में संघर्ष समिति की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
लखनऊ में नामी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा सवाल, आदेशों के बावजूद अभिभावकों से वसूली जारी

लखनऊ।  प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों की फीस और अन्य मदों में वसूली को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राजधानी लखनऊ के कई नामी स्कूलों पर अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
Yogi Adityanath ने पहले ही निर्देश दिए हैं कि स्कूल किताबें, कॉपी, यूनिफॉर्म, डायरी या अन्य सामग्री के नाम पर अनावश्यक वसूली न करें और री-एडमिशन फीस भी न ली जाए। इसके बावजूद कई प्रतिष्ठित स्कूल इन निर्देशों की अनदेखी करते नजर आ रहे हैं।
अभिभावकों के अनुसार, City Montessori School, Lucknow Public School, Delhi Public School, La Martiniere College, St. Mary's Convent Inter College, Cathedral Senior Secondary School, Spring Dale College, Amity International School, New Public School और Scholars' Home School जैसे संस्थानों में किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री के नाम पर तय दुकानों से खरीदारी का दबाव बनाया जाता है। इससे अभिभावकों को महंगे दामों पर सामान खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।
सूत्रों का कहना है कि हर साल अलग-अलग शीर्षकों के नाम पर फीस बढ़ा दी जाती है, जबकि कई मामलों में शुल्क का स्पष्ट विवरण भी नहीं दिया जाता। इससे खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ स्कूल अपनी छवि बेहतर दिखाने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करते हैं और कई बार वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती।
वहीं प्रशासन की ओर से सख्ती के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव नजर आता है। अभिभावकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा, जिससे स्कूलों की मनमानी जारी है।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सभी प्राइवेट स्कूलों की फीस संरचना की जांच हो, तय दुकानों से खरीद की बाध्यता खत्म की जाए, अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई हो और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल यह मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक सख्ती पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
गेहूं खरीद तेज करने के निर्देश, 2585 रु. प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर जोर

* राज्य क्रय एजेंसियों संग समीक्षा बैठक सम्पन्न, किसानों को बेहतर सुविधाएं और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश
लखनऊ। खाद्य तथा रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री सतीश चन्द्र शर्मा की अध्यक्षता में गेहूं खरीद की प्रगति एवं इसे बढ़ाने के उपायों को लेकर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में अवगत कराया गया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। प्रदेश में प्रस्तावित 6500 क्रय केंद्रों के सापेक्ष अब तक 5439 केंद्रों को मंजूरी दी जा चुकी है। वर्तमान में 51 जनपदों के 464 क्रय केंद्रों पर 2085 किसानों से 13,388 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है।
भारत सरकार द्वारा 10 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि प्रदेश में इस वर्ष 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक आवक की संभावना जताई गई है। गेहूं खरीद के लिए पर्याप्त मात्रा में बोरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें नए पीपी और जूट के बोरे शामिल हैं। साथ ही उचित दर विक्रेताओं से भी उपयोगी बोरे खरीदने की अनुमति प्रदान की गई है।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत 62.30 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई, जिसके सापेक्ष 37.70 लाख मीट्रिक टन चावल केंद्रीय पूल में भेजा जा चुका है। हालांकि, भंडारण की कमी के चलते शेष चावल के परिवहन में देरी हो रही है।

* मंत्री के निर्देश:
मंत्री श्री शर्मा ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिए कि क्रय केंद्रों को शीघ्र चालू कर हर जनपद में गेहूं खरीद शुरू की जाए। केंद्रों पर बैनर, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य में वृद्धि की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और अधिक से अधिक किसानों का ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाए। साथ ही गेहूं के सुरक्षित भंडारण और शेष सीएमआर के शीघ्र निस्तारण के भी निर्देश दिए गए।
उप्र कैबिनेट ने 22 प्रस्तावों को दी मंजूरी, शिक्षा मित्रों व अनुदेशकों को इसी माह से मिलेगा बढ़ा मानदेय
चार जिलाें के 12 हजार से अधिक विस्थापित परिवाराें काे नागरिकता पात्रता के संबंध में प्रस्ताव पारित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षा मित्र और अनुदेशकों के मानदेय में 10-10 हजार रुपये की मासिक बढ़ोतरी करने की मंजूरी दे दी है। यह बढ़ा हुआ मानदेय इसी माह अप्रैल से दिया जाएगा।सरकार ने पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर के 12 हजार से अधिक विभाजन समय से विस्थापित परिवाराें काे भारतीय नागरिकता के लिए पात्रता के सम्बंध में प्रस्ताव सहित कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी अनुमोदित कर दिया है।

मंगलवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। कैबिनेट बैठक के बाद राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह और वन मंत्री अरुण सक्सेना ने लोकभवन के मीडिया सेंटर में कैबिनेट निर्णयाें की जानकारी पत्रकारों को दी। मंत्री खन्ना ने बताया कि उप्र सरकार 25 लाख स्मार्ट टैबलेट खरीदेगी। इसके लिए कैबिनेट से मंजूरी मिल गयी है। यह टैबलेट उप्र में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को नि:शुल्क वितरित किए जाएंगे। इनमें ज्यादातर अंतिम वर्ष के विद्यार्थी होंगे। इससे पहले 60 लाख स्मार्ट फोन एवं टैबलेट खरीदे जा चुके हैं। उन्हाेंने बताया कि औद्योगिक विकास विभाग के आठ प्रस्ताव कैबिनेट में आए। सभी प्रस्तावों को अनुमोदन मिल गया है। सभी आठ प्रस्ताव निवेश से जुड़े हैं। इसमें बुंदेलखण्ड में 100 एकड़ में सोलर प्लांट स्थापित किए जाने, प्रयागराज में 231 करोड़ के निवेश से वाटर प्लांट स्थापित किए जाने, सोलर सेल निर्माण इकाई स्थापित करने संबंधी अन्य प्रस्तावों को मंजूरी शामिल है।

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर में भारत पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए परिवारों को भारतीय नागरिकता के लिए पात्रता के सम्बंध में एक प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इनकी संख्या लखीमपुर खीरी में 2350 परिवार,पीलीभीत में 4 हजार परिवार,बिजनौर में 18 ग्रामों में 3856 परिवार और रामपुर में 16 ग्रामों में 2174 परिवाराे काे लाभ मिलेगा।



पत्रकार वार्ता में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि परिवहन विभाग के तीन प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। पीपीपी मॉडल पर 49 नए बस अड्डों के सम्बंध में प्रस्ताव शामिल है। पहले फेज में पीपीपी मॉडल पर 23 बस अड्डों की एल.वाई जारी हो गई थी। आज 49 बस अड्डों की स्वीकृति मिली है। कुल मिलाकर 52 जनपदों को इससे आच्छादित किया जा रहा है। परिवहन मंत्री ने बताया कि यह पीपीपी मॉडल के बस अड्डे हवाई अड्डे की तर्ज़ पर होंगे। सुविधाओं को एयरपोर्ट की तर्ज़ पर दिया जाएगा। जनपद हाथरस में सिकन्दराराऊ कस्बे में कृषि विभाग के दो हेक्टेयर भूमि को बस अड्डा के लिए निःशुल्क प्राप्ति पर स्वीकृति मिली है। इसी प्रकार जनपद बुलंदशहर के डिबाई में सिंचाई विभाग की जमीन बस अड्डे के लिए दिए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदन मिला है। जनपद बलरामपुर के तुलसीपुर में पीडब्ल्यूडी की भूमि को बस अड्डा निर्माण के लिए दिए जाने को स्वीकृति दी गयी।

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग के दो प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। सभी अंशकालिक अनुदेशकों और शिक्षामित्रों का मानदेय आठ-आठ हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से बढ़ाया गया है। शिक्षामित्रों का मानदेय अब 18 हजार होगा। उन्हाेंने बताया कि उप्र में एक लाख 42 हजार 929 शिक्षा मित्र कार्य कर रहे हैं। एक लाख 29 हजार 332 शिक्षा मित्रों का मानदेय केंद्र का अंश बढ़ाया गया है। 30 हजार के आस-पास शिक्षा मित्रों का अतिरिक्त व्यय भार भी राज्य सरकार वहन करेगी। यह बढ़ाेतरी 1 अप्रैल से ही लागू हाेगी। प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों का भी बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल से लागू होगा। प्रदेश के 13 हजार 769 विद्यालयों में अधिकतम 24 हजार 716 अनुदेशक कार्यरत हैं। अनुदेशकों को पहले नौ हजार रुपये प्रति माह मिल रहा था। अब उन्हें 17 हजार रुपये प्रति माह मिलेगा।
लाल निशान मिटाने वालों दुकानदाराें पर सख्ती, बुलडोजर चलाकर कोहाड़ापीर में अवैध दुकानें ध्वस्त

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के जनपद बरेली के कोहाड़ापीर इलाके में मंगलवार को नगर निगम का बुलडोजर अवैध अतिक्रमण पर चला और पेट्रोल पंप के सामने बनी कई अवैध दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई शुरू होते ही इलाके में अफरातफरी मच गई और दुकानदारों में हड़कंप मच गया।

नगर निगम ने पहले से ही सड़क किनारे बने अवैध निर्माणों को चिह्नित कर उन पर लाल निशान लगाए थे। आरोप है कि कुछ दुकानदारों ने इन निशानों को मिटा दिया था। इसे गंभीर मानते हुए निगम अधिकारियों ने सबसे पहले उन्हीं दुकानों पर कार्रवाई की। दो बुलडोजरों की मदद से कुछ ही देर में कई अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए गए।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सरकारी निशान मिटाना या उनसे छेड़छाड़ करना गंभीर मामला है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने साफ किया कि अतिक्रमण हटाने का अभियान अब लगातार जारी रहेगा। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम के दूसरे चरण के तहत की जा रही है। योजना के अंतर्गत कोहाड़ापीर से कुदेशिया मार्ग और धर्मकांटा से कोहाड़ापीर तक सड़क चौड़ीकरण होना है। इसके लिए करीब 50 से 55 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं।

मंगलवार को मजार के पास बनी अवैध दुकानों को हटाकर अभियान की शुरुआत की गई। कार्रवाई के दौरान किसी तरह का विरोध न हो, इसके लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त मौजूदगी में ध्वस्तीकरण शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया गया। नगर निगम के एक्सईएन राजीव कुमार राठी ने बताया कि सड़क चौड़ी होने से ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी और जाम की समस्या में काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान तेज किया जाएगा।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की महत्वपूर्ण बैठक लखनऊ में संपन्न
लखनऊ। प्रदेश के विधायक निवास ए ब्लॉक दारूसफा में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा परशुराम सेना एवं महिला ब्राह्मण सभा के द्वारा सभी राष्ट्रीय महानगर पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं तथा सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व राज्य मंत्री डॉ. के सी पाण्डेय के नेतृत्व में संपन्न हुई जहां सर्वप्रथम भगवान श्री परशुराम के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव पर सार्वजनिक अवकाश घोषित हो एवं यूजीसी काला कानून वापस हो इस पर सभी ने अपने विचार रखें वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा की यूजीसी कानून अगर शासन द्वारा वापस नहीं लिया गया तो हम सभी लाम बंद होकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे वहीं शहीद मंगल पांडे की प्रतिमा विधानसभा के सामने लगाई जाए जिसकी मांग भी लोगों के समक्ष साझा किया एवं कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि 2027 में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है जहां पर अगर इसी तरह ब्राह्मण नाराज रहे तो स्थिति का परिवर्तन होना तय है जिस तरह से सामान्य वर्ग के लोग ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य एक मत होकर भारतीय जनता पार्टी का समर्थन किया लेकिन उनके साथ लगातार विश्वास घात हो रहा है जो अब बर्दाश्त नहीं होगा वही भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर शासन से मांग की गई की सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए क्योंकि पूरे देश में भगवान के जन्मदिन पर शोभायात्रा निकाली जाती है जनपद जौनपुर के जिला अध्यक्ष डॉ अतुल कुमार दुबे ने भी अपने विचार रखें कहां संस्कृत और संस्कृति की रक्षा कीजिए कर्मकांडी ब्राह्मण को मानदेय दिया जाए सनातन को जीवित रखने में ब्राह्मणों ने अपना सब कुछ कुर्बान किया वहीं जनपद जौनपुर का नाम जमदग्नि पुरम किया जाए तथा शासन प्रशासन द्वारा लगातार पत्र के माध्यम से जिला अध्यक्ष जौनपुर द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग लगातार उठाई जा रही है लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई जहां उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की तथा जिले की टीम में महराजगंज ब्लॉक टीम का बखान करते हुए चर्चा की वही संगठन की महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष वंदना चतुर्वेदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 17.8 प्रतिशत ब्राह्मण अब अपना अधिकार विधानसभा चुनाव 2027 में जरूर दिखाएंगे अगर उनकी अनदेखी शासन करती रही तो इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा वही यूजीसी एक्ट का घोर विरोध किया। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. के सी पाण्डेय, श्याम नारायण चौबे, प्रदेश अध्यक्ष हरिनाथ बाबू, अनूप पांडे, शिव शंकर दुबे महासचिव, डॉ. एस के शुक्ला, बंदना चतुर्वेदी, जिला अध्यक्ष जौनपुर डॉ. अतुल कुमार दुबे एवं जौनपुर से राजेश पाण्डेय तथा सैकड़ो की संख्या में पदाधिकारी एवं सदस्य गण उपस्थित रहे।
वाराणसी शहर में 30.745 किलो अवैध गांजा के साथ ओडिशा के दो तस्कर गिरफ्तार
लखनऊ /वाराणसी। उत्तर प्रदेश के जनपद वाराणसी में थाना सिगरा पुलिस टीम में मुखबिर की सूचना पर अन्तर्राज्यीय गिरोह के ओडिशा निवासी तस्करों सन्तोष कुमार बेहरा और रोहित साहू को अमूल डेयरी एन.ई.आर. पार्क के पास से 30.745 किलो अवैध गाँजा (अनुमानित कीमत करीब 15 लाख रूपया) के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस टीम ने घटना में प्रयुक्त चार पहिया वाहन और मोबाइल फोन भी बरामद किया।

सिगरा थाना के प्रभारी निरीक्षक विवेक कुमार शुक्ला ने कहा कि सिगरा पुलिस द्वारा "ऑपरेशन चक्रव्यूह" के तहत चेकिंग संदिग्ध व्यक्ति वाहन व अवैध नशीले पदार्थ की रोकथाम हेतु चलाये जा रहे अभियान में मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुयी कि एक चार पहिया वाहन पिकअप कैंट ओवर ब्रिज से उतर कर महमूरगंज की तरफ जाएगी, जिसमें मादक पदार्थ की संभावना है। यदि जल्दी किया जाए तो पकड़े जा सकते है। इस सूचना पर विश्वास करते हुए पुलिस टीम अपने मुखबिर के साथ अमूल डेयरी के पास एनईआर पार्किंग के पास पहुंच कर आने-जाने वाले वाहनों की तलाशी करने लगे। तभी कैण्ट की तरफ से तेजी से आती हुई एक सफेद बोलेरो पिकअप दिखायी दी, संदेह के आधार पर हम पुलिस वाले उक्त वाहन को रोकने का इशारा किया तो थोड़ा आगे करीब 35-40 कदम पर उक्त वाहन रूका। मौके पर गाड़ी की तलाशी ली गयी तो दो सफेद बोरी में अवैध गाँजे के कुल 30 पैकेट बरामद हुए। अवैध मादक पदार्थ के साथ सन्तोष कुमार निवासी जिला अनुगुल, ओडिशा और रोहित साहू निवासी जिला-अनुगुल, ओडिशा को कारण गिरफ्तारी बताते हुए गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में थाना सिगरा में धारा- 8, 20, 29 एनडीपीएस एक्ट में अभियोग पंजीकृत किया गया।