जंग जारी रही, तो गंभीर दुष्परिणाम तय', मिडिल ईस्ट जंग पर राज्यसभा में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री मोदी ने आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर राज्यसभा में जानकारी दी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालात भारत के लिए भी चिंताजनक हैं और व्यापार के रास्ते प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि हमें सावधान, सतर्क और तैयार रहना है।

भारत के लिए भी चिंताजनक स्थिति-पीएम मोदी

पीएम मोदी पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह एक चिंताजनक स्थिति है। व्यापारिक रास्ते प्रभावित हुए हैं इसलिए सप्लाई प्रभावित हुई है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, और उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।

3,75,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौटे- पीएम मोदी

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'संकट की इस स्थिति में दुनिया भर में भारतीयों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे जरूरी है। अब तक 3,75,000 से ज़्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौट आए हैं। अकेले ईरान से 1000 से ज्यादा भारतीय लौटे हैं, इनमें से 700 से ज़्यादा मेडिकल स्टूडेंट हैं। संकट की इस घड़ी में, हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। सभी देशों ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। हालांकि, यह दुख की बात है कि हमलों में कुछ भारतीयों की मौत हो गई और कुछ दूसरे घायल हो गए। प्रभावित परिवारों को हर जरूरी मदद दी जा रही है।'

जंग जारी रही तो होंगे गंभीर दुष्परिणाम- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने संवाद का रास्ता सुझाया है। युद्ध से जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, अगर यह जंग जारी रही तो गंभीर दुष्परिणाम होंगे। हम रणनीति के साथ काम कर रहे हैं कि भारत पर इसके कम से कम दुष्परिणाम हों। पश्चिम एशिया में जंग की वजह से जितना नुकसान हो चुका है, उससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा।

राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, यह राज्यों का सदन है और यह संकट आने वाले समय में हमारी बड़ी परीक्षा लेने वाला है। राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम होने वाली है। पीएम गरीब कल्याण योजना का लाभ गरीबों को समय पर मिलता रहे, यह प्रयास करना होगा। राज्यों को प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा। कालाबाजारी, जमाखोरी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई सुनिश्चित करना राज्यों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे-पीएम मोदी

संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे। ये टीम इंडिया की भी बड़ी परीक्षा है। कोविड काल में हमने नया मॉडल सामने रखा था। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना होगा। सभी राज्य सरकारों और केंद्र के प्रयासों से देश इस गंभीर संकट का प्रभावी तरीके से सामना कर पाएगा।

धर्म परिवर्तन पर खत्म हो जाएगा अनुसूचित जाति का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के लोगों को ही प्राप्त है। यदि कोई व्यक्ति इन तीन धर्मों में से किसी से दूसरे धर्म जैसे ईसाई या इस्लाम में परिवर्तित हो जाता है, तो वह अपना अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः खो देता है।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक ईसाई पादरी की तरफ से दर्ज एससी/एसटी एक्ट की FIR को रद्द किया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर कोई व्यक्ति उदाहरण के लिए ईसाई धर्म अपना लेता है और ईसाई धर्म के अनुसार जीवन जी रहा है तो उसे अनुसूचित जाति का व्यक्ति नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने संविधान के अनुसूचित जाति आदेश, 1950 का हवाला दिया है। बेंच ने कहा है कि इस आदेश के खंड 3 के मुताबिक हिंदू, सिख, बौद्ध के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने वाला व्यक्ति जन्म के आधार पर मिलने वाला एससी का दर्जा तुरंत खो देता है। कोई भी संवैधानिक लाभ, आरक्षण या कानूनी सुरक्षा उस व्यक्ति को नहीं दी जा सकती जो अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उसके पास तहसीलदार की तरफ से जारी प्रमाण पत्र है। इसके मुताबिक वह अनुसूचित जाति 'माडिगा' का सदस्य है। कोर्ट ने कहा कि यह जाति प्रमाण पत्र पहले ही रद्द हो जाना चाहिए था। इस सर्टिफिकेट के आधार पर वह SC/ST एक्ट के तहत सुरक्षा नहीं मांग सकता।

क्या है मामला?

आंध्र प्रदेश के पित्तलवानीपालेम के रहने वाले चिंथदा आनंद ने खुद को अनुसूचित जाति वर्ग का बताते हुए एक एफआईआर दर्ज करवाई। उनका आरोप था कि कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया। SC/ST एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर के खिलाफ आरोपी पक्ष हाई कोर्ट पहुंचा। वहां उसने दलील दी कि शिकायतकर्ता ईसाई धर्म अपना चुका है। 10 साल से ज्यादा समय से वह एक पादरी के तौर पर काम कर रहा है। इसलिए, वह अनुसूचित जाति का हिस्सा नहीं रह गया है। 30 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार किया और पादरी की तरफ से दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।

खामेनेई की मौत से 48 घंटे पहले ट्रंप-नेतन्याहू के बीच हुई बात, फिर मिला हमले का ग्रीन सिग्नल

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अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान पर हमले से महज 48 घंटे से भी कम समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों को अंतिम मंजूरी दी थी। इस ऐतिहासिक फोन कॉल में नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का यह सबसे अच्छा मौका हो सकता है।

ट्रंप ने पहले ही ऑपरेशन को मंजूरी दी थी

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू और ट्रंप दोनों के पास खुफिया रिपोर्ट थी कि खामेनेई अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ तेहरान में अपने कंपाउंड में बैठक करने वाले थे। यह ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ (खामेनेई की हत्या) का सुनहरा अवसर था। कॉल के दौरान नई खुफिया जानकारी आई कि बैठक शनिवार सुबह कर दी गई है। ट्रंप ने उस समय तक सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे रखी थी, लेकिन समय और अमेरिकी भूमिका पर फैसला बाकी था।

नेतन्याहू ने ट्रंप से क्या कहा?

नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका और इजराइल को खामेनेई को मारने और 2024 में ट्रंप की हत्या की साजिश का बदला लेने का इससे बेहतर मौका कभी नहीं मिलेगा। नेतन्याहू ने इसे रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों रूप में जरूरी बताया और ट्रंप को इसे सही ठहराने के लिए प्रेरित किया।

तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंकने की सलाह

नेतन्याहू ने ट्रंप से अपील की कि वे इतिहास रच सकते हैं। उनका तर्क था कि इस हमले से प्रोत्साहित होकर ईरान के लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और 1979 से चली आ रही एक रह की तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंक सकते हैं, जो वैश्विक आतंकवाद और अस्थिरता का बड़ा स्रोत रही है।

28 फरवरी को हुआ था पहला हमला

बता दें कि ईरान पर पहला हमला 28 फरवरी को हुआ। इसके बाद ट्रंप ने घोषणा की कि खामेनेई मारे गए। व्हाइट हाउस ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद था ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और उत्पादन क्षमता को खत्म करना, ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से यह खारिज किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध के लिए दबाव डाला। उन्होंने इसे फेक न्यूज कहा और कहा कि कोई भी ट्रंप को नहीं बताता कि क्या करना है। ट्रंप ने भी कहा कि ईरान पर हमला करने का अंतिम फैसला उनका खुद का था।

मिडिल ईस्ट संकट पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी, कहा-सरकार के पास ऊर्जा के पर्याप्त भंडार

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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में भारत की स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है।लोकसभा में प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई सुचारू बनी रहेगी। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि जनता को इन जरूरी ईंधनों की कोई कमी न हो।

पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही विपरित असर-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है। बीते 2-3 हफ्तों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने और हरदीप पुरी ने इस विषय पर संसद को जरूरी जानकारी दी है। अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है। इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है।

भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक भी हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में ये युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।

गैस सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी-पीएम मोदी

लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है, लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया है कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरे देश में बिना किसी रुकावट के जारी रहे। गैस की सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की ऊर्जा आयात की विविधता काफी बढ़ी है। पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, आज यह संख्या बढ़कर 41 देशों हो गई है। सरकार अलग-अलग सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में है और जहां से भी संभव हो, वहां से तेल, गैस और फर्टिलाइजर का आयात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) 53 लाख टन से अधिक है और इसे बढ़ाकर 65 लाख टन करने का काम तेजी से चल रहा है। तेल कंपनियों के अपने रिजर्व अलग से हैं. हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौटे

पीएम मोदी ने बताया कि भारत के करीब 1 करोड़ लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। वहां समुद्री जहाजों पर बहुत से भारतीय काम करते हैं। जब से ये युद्ध शुरू हुआ है, तब से भारतीय लोगों को मदद दी जा रही है। मैंने भी दो राष्ट्राध्यक्षों से इसके बारे में बात की है। दुर्भाग्य से इस युद्ध की वजह से कुछ लोगों की मौत है और कुछ लोग घायल हैं। विदेशों में हमारे जितने भी मिशन हैं। वह हमारे नागरिकों की मदद कर रहे हैं। विदेश में फंसें हमारे लोगों की मदद के लिए भारत में 24 घंटे हेल्पलाइन जारी की गई है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से 1000 से अधिक छात्र लौटे हैं। इसमें से अधिकतक मेडिकल के छात्र हैं।

पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार की नजर, पीएम मोदी आज लोकसभा में देंगे भाषण

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-यूएस जंग के बीच भारत की चिंता भी बढ़ती जा रही है। इसी अहम मुद्दे पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में बयान दे सकते हैं। जहां वह मौजूदा हालात, भारत की ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक बाजार पर असर और क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार का रुख साफ करे सकते हैं।

इन मुद्दों पर बोल सकते हैं पीएम मोदी

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधन में मौजूदा वैश्विक हालात, भारत की स्ट्रैटेजी और अपनी सरकार के रुख को स्पष्ट कर सकते हैं। इससे पहले भी सरकार ने इशारा किया था कि मिडिल संकट को लेकर सतर्क है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। बीते रविवार को पीएम मोदी के साथ मंत्रियों की हुई हाई लेवल बैठक में इस बात पर चर्चा की गई।

जंग से पैदा हुए हालात की समीक्षा

ईरान की इजरायल और अमेरिका के खिलाफ जारी जंग से पैदा हुए हालात पर पीएम मोदी ने रविवार शाम सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के साथ उच्च स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की समीक्षा करने और प्रस्तावित राहत उपायों पर चर्चा की गई। इस दौरान कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और अब तक उठाए गए और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों की तरफ किए जा रहे उपायों पर एक खास प्रेजेंटेशन दिया।

जंग के प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा

कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश के समग्र वृहद-आर्थिक परिदृश्य और आगे उठाए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। विषय में लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई। यह भी तय किया गया कि सभी पावर प्लांट में कोयले के स्टॉक की पर्याप्त सप्लाई से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

पश्चिम बंगाल में ओवैसी की एंट्री, ममता की बढ़ाएंगे मुश्किल, इस पार्टी से मिलाया हाथ

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पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर एक ऐसी चाल चली गई है, जिसने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के साथ मिलकर बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

औवैसी ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया

ओवैसी ने ईद के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 30 फीसदी है लेकिन धर्मनिरपेक्ष होकर उनसे वोट तो लेते हैं लेकिन उन्हें उनका हक और भागीदारी नहीं देते हैं। ओवैसी ने लोगों से लगा कि दुआ करें कि मजलिस और मजबूत हो। 

25 मार्च को कोलकाता में होगा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा हमारा नुमायेंदे मुल्क के कोने कोने में कामयाब होकर गरीब की आवाज उठाएं। ममता बनर्जी बंगाल में हैं, 30 फीसदी मुस्लिम की आबादी है, लेकिन 5 लाख के करीब बैकवर्ड क्लास सर्टिफिकेट को कैंसिल कर दिया गया। बहुत सी नाइंसाफियों की कहानियां भी हैं, मालदा में पंचायत इलेक्शन में मजलिस को 60 हजार वोट मिले थे, हम इस कहानी को आगे बढ़ाएंगे। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे।

हुमायूं कबीर की पार्टी 182 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार

हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इस गठबंधन में AIMIM भी साझेदार है। ओवैसी की पार्टी लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इधर, कबीर की पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। हुमायूं ने भगवानगोला, नौदा, राजीनगर और मुर्शिदाबाद की सीट पर अपने प्रत्याशी के नामों का ऐलान कर दिया है।

ममता के “M” फैक्टर में सेंधमारी

ओवैसी का यह दांव सिर्फ एक चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बंगाल के उस ‘मुस्लिम वोटबैंक’ के किले में सेंधमारी की कोशिश है, जिसे ममता बनर्जी की अजेय सत्ता की सबसे बड़ी रीढ़ माना जाता है। पश्चिम बंगाल में लगभग 27 से 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 100 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां अल्पसंख्यक मतदाता सीधे तौर पर हार-जीत का फैसला करते हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में यह आबादी बहुसंख्यक की भूमिका में है। 

बीजेपी के लिए खुशी की खबर

पिछले कई चुनावों से यह वोटबैंक एकमुश्त होकर टीएमसी के पक्ष में मतदान करता आ रहा है, जिसने बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद ममता बनर्जी को सत्ता के शिखर पर बनाए रखा है। लेकिन अब ओवैसी और हुमायूं कबीर के एक साथ आने से इस वोटबैंक में बिखराव का सीधा खतरा पैदा हो गया है। अगर यह गठबंधन इन इलाकों में 10 से 15 हजार वोट भी काट ले जाता है, तो दर्जनों सीटों पर टीएमसी के उम्मीदवार औंधे मुंह गिर सकते हैं। इसल‍िए ओवैसी का यह बयान बीजेपी को भी खुश करने वाला है।

मौसम का यू-टर्न! 15 राज्यों में आंधी-तूफान की चेतावनी, IMD ने जारी किया अलर्ट

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मार्च का महीना आमतौर पर हल्के और सुहाने मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदली नजर आ रही है। महीने की शुरुआत में तेज गर्मी का अहसास हुआ, वहीं अब अचानक मौसम ने करवट ले ली है। देश के कई हिस्सों में काले बादल, तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि ने हालात बदल दिए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आने वाले दिनों के लिए कई राज्यों में बारिश, आंधी, बिजली और तेज हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है।

पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर

मौसम विभाग (IMD) ने अगले 4 से 5 दिनों को बेहद अहम बताते हुए 15 राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, यह बदलाव किसी सामान्य बारिश का नतीजा नहीं है। इसके पीछे एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन का संयुक्त असर है। इसी कारण उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक एक साथ मौसम बिगड़ा हुआ है। वातावरण में नमी बढ़ने से बादल तेजी से बन रहे हैं और अचानक मौसम बदल रहा है। कई इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि कुछ जगहों पर यह रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा

दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर बादलों से घिर गया। नोएडा समेत दिल्ली-एनसीआर कई इलाकों में बूंदाबांदी हो रही है। जिससे सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। सुबह सुबह मौसम सुहावना हो गया है। दिल्ली एनसीआर में आज भी बारिश होने का पूर्वानुमान भारत मौसम विभाग की ओर से जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, 23 मार्च को बादल छाए रहेंगे और दोपहर बाद गरज-चमक के साथ हल्की बारिश के आसार है। सोमवार को दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में मौसम बदल जाएगा। ऐसे में उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलेंगी, जिनकी गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रह सकती है। यही नहीं, दिन आसमान बादलों से घिरा रहेगा। सुबह से दोपहर के बीच गरज चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है। बदलते मौसम के चलते लोगों को दिन में गर्मी और शाम के समय हल्की ठंडक का एहसास हो सकता है।

बिहार में चेतावनी

बिहार में 24 मार्च से 28 मार्च के बीच बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई है। जिन जिलों में अलर्ट है, उनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सिवान, गोपालगंज, सारण, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, औरंगाबाद, गया और नवादा शामिल है। राजधानी पटना में आज (सोमवार) को अधिकतम तापमान 29°C और न्यूनतम तापमान 20°C रहने वाला है।

उत्तर प्रदेश में अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मौसम का असर सबसे ज्यादा व्यापक है। कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई है। 60 किमी प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल सकती हैं। पूर्वांचल और तराई इलाकों जैसे गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, मऊ, बलिया और बस्ती में बिजली गिरने और भारी बारिश का खतरा है। लखनऊ, कानपुर, आगरा और मेरठ जैसे शहरों में भी मौसम अस्थिर बना रहेगा।

पहाड़ी राज्यों में खतरा

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मौसम ज्यादा गंभीर बना हुआ है। तेज बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और भूस्खलन और हिमस्खलन का खतरा है। शिमला, कुल्लू, कांगड़ा और चमोली जैसे क्षेत्रों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की बात करें तो मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश के साथ तेज हवाओं के चलने की संभावना है। इसके असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर झमाधम बारिश हो सकती है। पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी मौसम ज्यादा सक्रिय रहने वाला है। यहां तेज बारिश के साथ 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है।

“LPG सप्लाई में 20% बढ़ोतरी: केंद्र का बड़ा फैसला, होटल-ढाबों और उद्योगों को प्राथमिकता”
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एलपीजी (LPG) गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्यों को एलपीजी आवंटन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने के निर्देश जारी किए हैं, जो 23 मार्च से लागू होंगे।
इस निर्णय के तहत कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई में भी 20 फीसदी की वृद्धि की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई सप्लाई का लाभ विशेष रूप से रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालकों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा, ताकि खाद्य सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए।
इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और डेयरी उद्योग को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है, जिससे उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिल सके।
केंद्र सरकार ने राज्यों को यह भी निर्देश दिए हैं कि एलपीजी गैस सप्लाई का किसी प्रकार से दुरुपयोग न हो और इसका सही तरीके से वितरण सुनिश्चित किया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि आवश्यक सेवाओं और उद्योगों को निर्बाध गैस आपूर्ति मिलती रहे, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।
ईरान पर हमले के लिए भारत ने अमेरिका को दिया अपना बेस! विदेश मंत्रालय ने बताई वायरल दावे की सच्चाई

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस झूठे दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य मदद मांगी है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका को भारत की जमीन से ईरान पर हमले के लिए अनुमति दी गई है।

भारत के पश्चिमी हिस्से के सैन्य इस्तेमाल का दावा

सोशल मीडिया के एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए उसकी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। यह दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से फैल रहा था। इसमें कहा गया था कि अमेरिका, LEMOA समझौते के तहत भारत के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए करना चाहता है और कोंकण तट के पास अपनी सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है।

विदेश मंत्रीलय ने कहा-खबरें पूरी तरह फर्जी

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी देश को अपनी धरती का उपयोग किसी तीसरे देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी है। इस तरह की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है LEMOA समझौता

बता दें कि Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) एक समझौता है, जो 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे ईंधन भरना, मरम्मत कराना या आराम करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश दूसरे देश की जमीन से सीधे हमला कर सकता है। हर बार अलग से अनुमति लेनी होती है और वह भी सीमित कामों के लिए होती है।

कौन थें फरसे वाले बाबा? जिनकी मौत के बाद मथुरा में मचा बवाल, सीएम योगी ने दिखाया सख्त रूख

#violenceondelhihighwayafterbabachandrashekharsdeath 

मथुरा के कोसीकलां इलाके में गौरक्षक फरसा वाले बाबा की मौत के बाद भारी बवाल शुरू हो गया है। आरोप है कि गौ-तस्करों ने बाबा चंद्रशेखर की बाइक को टक्कर मारकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। शुक्रवार रात गोतस्‍करों ने गोरक्षक फरसे वाले बाबा की बाइक को कंटेनर से कुचल दिया। बाबा की मौत के बाद गोरक्षक और हिंदू संगठनों के लोग आक्रोशित हो गए हैं। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-आगरा हाईवे पर शुक्रवार देर रात यह दर्दनाक घटना हुई। शनिवार तड़के सुबह करीब 4 बजे ‘फरसा वाले बाबा’ गौ-तस्करों का पीछा कर रहे थे। वे बाइक पर थे और गायों से भरे एक ट्रक या कंटेनर का पीछा कर रहे थे। आरोप है कि तस्करों ने जानबूझकर गाड़ी तेज करके बाबा को कुचल दिया। इस क्रूर हमले में बाबा की मौके पर ही मौत हो गई।

प्रदर्शनकारियों ने की पत्‍थरों की बरसात

फरसे वाले बाबा पूरे ब्रज में इतने मशहूर थे कि उनकी मौत की खबर पाकर लोग सड़कों पर उतर आए। घटना के बाद लोगों ने आगरा दिल्‍ली हाइवे जाम कर दिया। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुंची तो उन्‍होंने पथराव शुरू कर‍ दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां दागीं। इसके बाद भीड़ में अफरातफरी मच गई। भीड़ ने पुलिस और प्रशासन के कई अफसरों के वाहनों को क्षतिग्रस्‍त कर दिया। एसपीआरए, सीओ छाता, गोविंद नगर, शेरगढ़ और एडीएम प्रशासन समेत कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई है। 

तीन घंटे बाद खुलवाया जा सका जाम

पुलिस और प्रशासन की कड़ी मेहनत के बाद करीब तीन घंटे बाद दिल्‍ली आगरा हाइवे पर जाम खोला जा सकता। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। लोगों ने पुलिस और प्रशासन के कई अफसरों के वाहन क्षतिग्रस्‍त कर दिए जिससे दहशत फैल गई।

आरोपियों को बख्‍शा नहीं जाएगा- सीएम योगी आदित्‍यनाथ

फरसे वाले बाबा की मौत के फैली हिंसा पर मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने सख्‍त रुख दिखाया है। उन्‍होंने पूरे मामले के जांच के आदेश दिए हैं। योगी ने कहा कि जिम्‍मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो। आरोपी कोई भी हो, बख्‍शा नहीं जाएगा।

कौन थें फरसा वाले बाबा?

फरसा वाले बाबा का असली नाम चंद्रशेखर था। वह अपने साथ कुल्हाड़ी जैसा शस्त्र फरसा रखते थे। इसी खास अंदाज की वजह से उन्हें 'फरसा वाले बाबा' के नाम से जाना जाता था। वो मुख्य रूप से मथुरा के कोसीकलां और आसपास के इलाकों में अवैध गौ तस्करी को रोकने के लिए सक्रिय रहते थे। बाबा कुछ हिंदूवादी संगठनों से भी जुड़े हुए थे। बाबा ने गोरक्षकों की टीम बना रखी थी। बाबा के समर्थकों ने मांग की है कि उन्हें गौ पुत्र शहीद का दर्जा दिया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।