किसान कल्याण वर्ष 2026: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की पहली कृषि कैबिनेट

 कृषि विकास और सिंचाई योजनाओं के लिए 27 हजार 500 करोड़ रूपये स्वीकृत

 मंत्रि-परिषद ने किसान कल्याण के लिए दी 25 हजार 678 करोड़ रूपये की योजनाओं को स्वीकृति

 बड़वानी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2068 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति

 किसान कल्याण वर्ष में हर अंचल में होगी कृषि कैबिनेट

*भगोरिया पर्व पर जनजातीय वर्ग के सम्मान और कल्याण का दिया सशक्त संदेश

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में सोमवार को हुई पहली कृषि कैबिनेट में कृषि, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी और सहकारिता से संबंधित 27 हजार 500 करोड़ रूपये की विभिन्न योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। किसान कल्याण वर्ष में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट में किसानों और विभिन्न उत्पादक गतिविधियों में लगे लोगों के लिए 25 हजार 678 करोड़ रूपये की योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कृषि कैबिनेट में नर्मदा नियत्रंण मण्डल की बैठक में बड़वानी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के लिए 2,068 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति भी प्रदान की गई है। इन योजनाओं में स्वीकृत की गई राशि अगले 5 वर्षों में व्यय की जायेगी। जनजातीय अंचल में मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों ने जनजातीय परंपरागत वस्त्रों को धारण कर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अभ्युदय मध्यप्रदेश में जनजातीय वर्ग के सम्मान और कल्याण का सशक्त संदेश दिया।

 मध्य प्रदेश एकीकृत मत्स्यद्योग नीति-2026 की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्यद्योग नीति-2026 को स्वीकृति दी। इसमें अगले 3 वर्षों तक रुपये 3 हजार करोड़ का निवेश एवं लगभग 20 हजार रोजगार (10 हजार प्रत्यक्ष एवं 10 हजार अप्रत्यक्ष) सृजित होंगे। इस नीति में 18 करोड़ 50 लाख रूपये के बजट प्रावधान की स्वीकृति दी गई। इसमें केज कल्चर को आधुनिक स्वरुप में बढ़ावा देते हुए लगभग एक लाख केज स्थापित किये जायेंगे। इस नीति में मछली पालन संबंधी गतिविधि के साथ ईको-टूरिज्म एवं ग्रीन एनर्जी को शामिल करते हुये बहुउद्देशीय आजीविका मॉडल के रुप में कार्य होगा।

 पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए 610 करोड़ 51 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने पशु चिकित्सालय एवं अन्य भवनों के अधोसंरचनात्मक विकास के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अगले 5 वर्षों तक पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल कें लिए 610 करोड़ 51 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की। यह कार्य वर्ष 2026 से 2031 तक निरंतर जारी रहेंगे।

 मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति 

मंत्रि-परिषद द्वारा मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना को आगामी 2 वर्ष, वर्ष 2026-27 और वर्ष 2027-28 की निरंतरता के लिए 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। योजना में मत्स्य बीज संवर्धन, मत्स्य पालकों का प्रशिक्षण, ब्याज अनुदान एवं रोजगार के अवसर प्रदान किये जाते हैं।

 राष्ट्रीय उ‌द्यानिकी मिशन को आगामी 5 वर्षों की निरंतरता के लिए 1150 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय उ‌द्यानिकी मिशन को आगामी 5 वर्षों तक निरंतर रखने के लिए 1150 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी। इस योजना में कृषि क्षेत्र में दक्षता की वृद्धि, विभिन्न कृषि घटकों के प्रभाव वृद्धि, दोहराव से बचाव संबंधी कार्य किये जायेंगे।

 सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के लिए 1,375 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना को आगामी 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2020-31 तक) की निरंतरता के लिए 1,375 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस योजना में केन्द्र एवं राज्य सरकार की भागीदारी से, मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करणीय उ‌द्योगों के उन्नयन तथा नवीन खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जायेगी।

पौधशाला उ‌द्यान के लिए 1 हजार 739 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने उद्यानिकी के क्षेत्र में पौधशाला उ‌द्यान में रोपणियों में पौध तैयार करने और उच्च गुणवत्ता की पौध एवं बीज, रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाने के लिए अगले वर्ष 2031 (आगामी 5 वर्ष) तक के लिए 1739 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।

 किसान कल्याण एवं कृषि विकास की 20 परियोजनाओं के लिए 3 हजार 502 करोड़ रुपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास की 500 करोड़ से कम वित्तीय आकार की 20 परियोजनाओं को आगामी 5 वर्षों तक अर्थात 31 मार्च, 2031 तक के लिए निरंतर जारी रखने जाने की स्वीकृति दी है। इसके लिए 3 हजार 502 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्रदान की गई है।

"सहकारी बैंकों के अंश पूंजी सहायता" योजना के लिए 1 हजार 975 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा सहकारिता विभाग की "सहकारी बैंकों के अंश पूंजी सहायता" योजना को अगले 5 वर्षों 31 मार्च, 2031 तक संचालित करने के लिए 1 हजार 975 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। लोकवित्त से वित्त पोषित कार्यक्रम को ऋण प्रदाय करना सहकारिता विभाग द्वारा जिला बैंकों के माध्यम से, कालातीत ऋणों की पूर्ति किये जाने के लिए कृषकों को फसल ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाती है।

कृषकों को अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान योजना के लिए 3 हजार 909 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने कृषकों को अल्पकालीन ऋण पर ब्याज अनुदान योजना को 31 मार्च, 2031 तक की निरंतरता के लिए 3 हजार 909 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। सहकारिता विभाग द्वारा प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से कृषकों को अल्पकालीन फसल ऋण राशि रुपये 3 लाख तक शून्य प्रतिशत दर पर उपलब्ध कराया जाता है। किसानों को प्राप्त हो रही सुविधा एवं सहायता प्राप्त होती रहेगी।

 सहकारी संस्थाओं के कुशल संचालन के लिए 1, 073 करोड़ रूपये की स्वीकृति 

मंत्रि-परिषद ने सहकारिता विभाग के अधीन सहकारी संस्थाओं को आवश्यक सहयोग जैसे अंशपूंजी, ऋण तथा अनुदान आदि सुलभ कराने एवं विभागीय गतिविधियों को सुचारु रखने के लिए 12 प्रचलित योजनाओं को भी 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालित रखने की स्वीकृति प्रदान की है। इन 12 योजनाओं की निरंतरता के लिए 1073 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।

 सहकारिता की विभिन्न योजनाओं के लिए 1,229 करोड़ रूपये की स्वीकृति 

मंत्रि-परिषद द्वारा कृषि क्षेत्र में सहकारिता विभाग के अधीन चल रहीं विभिन्न योजनाओं के अगले 5 वर्षों तक सुचारु संचालन एवं मानीटरिंग के लिए विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत एक हजार 229 करोड़ स्वीकृत किये गये।

पशुधन विकास के लिए 656 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना अंतर्गत सोर्टेड सेक्स्ड सीमन उत्पादन परियोजना को 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालित करने के लिए 656 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस योजना में चिन्हित नस्ल के मादा गौ-भैंस वंशीय पशुधन बढ़ाये जाने के उद्देश्य से पशु पालकों को आवश्यक तकनीकी सहयोग दिया जाता है। इस योजना से पशु पालकों को निरंतर लाभ प्राप्त होता रहेगा।

पशु स्वास्थ्य रक्षा तथा पशु संवर्धन एवं संरक्षण के लिए 1723 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने पशु स्वास्थ्य रक्षा तथा पशु संवर्धन एवं संरक्षण के लिए संचालित की जा रही 14 योजनाओं को अगले 5 वर्षों तक निरंतर रखने के लिए 1723 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस योजना में पशुधन एवं कुक्कुट उत्पाद में वृद्धि करना तथा कमजोर वर्ग के हितग्राहियों को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक लाभ दिया जाता है।

पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र की 11 योजनाओं के लिए 6 हजार 518 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने पशुपालन एवं डेयरी के क्षेत्र में पशु प्रजनन, मुर्गी पालन, भेड़ बकरी प्रक्षेत्र, रोग उन्मूलन, पशुओं के टीकाकरण, गहन पशु विकास परियोजना आदि 11 योजनाओं को अगले 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 6 हजार 518 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।

 बड़वानी जिले की 2 सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के लिए 2067.97 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा नियत्रंण मण्डल की बैठक में बड़वानी जिले में अल्प वर्षा क्षेत्र तहसील वरला के 33 ग्रामों में तथा तहसील पानसेमल के 53 ग्रामों में भूजल स्तर बढ़ाने के लिए 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2 हजार 68 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

वरला, उद्वहन माईक्रो सिंचाई उद्वहन परियोजना में नर्मदा नदी से 51.42 एम.सी.एम. जल उद्वहन करते हुए वरला तहसील के 33 गाँवों की 15 हजार 500 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जा सकेगी। इस परियोजना की लागत 860.53 करोड़ रुपये है ।

पानसेमल माईक्रो सिंचाई उद्वहन परियोजना में तहसील पानसेमल के 53 ग्रामों की 22 हजार 500 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जा सकेगी। इसके तहत नर्मदा नदी से 74.65 एम.सी.एम. जल उद्वहन किया जायेगा। इस परियोजना की लागत एक हजार 207.44 करोड़ रूपये है।

किसान कल्याण वर्ष की यह पहली कैबिनेट है। भविष्य में प्रदेश के विभिन्न स्थानों में कृषि कैबिनेट का आयोजन कर किसान कल्याण की दिशा में अनेक निर्णय लिए जाएंगे।

कैबिनेट बैठक से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव, बड़वानी के एसपी बदले

IPS पदम् विलोचन शुक्ला को कमान

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने बड़वानी में आयोजित होने वाली 2 मार्च 2026 की कैबिनेट बैठक से ठीक पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए जिले के पुलिस नेतृत्व में बदलाव किया है। सरकार ने 1 मार्च 2026 को आदेश जारी कर 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी पद्म विलोचन शुक्ला को बड़वानी का नया पुलिस अधीक्षक (SP) नियुक्त किया है। 

यह नियुक्ति ऐसे समय पर की गई है, जब 2 मार्च को बड़वानी में महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक प्रस्तावित है। बैठक को देखते हुए जिले में कानून-व्यवस्था की दृष्टि से इसे अहम निर्णय माना जा रहा है। सरकार ने पूर्व एसपी जगदीश डाबर के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त पद पर स्थायी नियुक्ति करते हुए यह जिम्मेदारी पद्म विलोचन शुक्ला को सौंपी है। 

गौरतलब है कि जगदीश डाबर के रिटायर होने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) धीरज बब्बर को अस्थायी रूप से जिले का प्रभार सौंपा गया था। अब स्थायी एसपी की नियुक्ति के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। 

पद्म विलोचन शुक्ला 2016 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं और विभिन्न जिलों में अपने कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था प्रबंधन और प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने जाते रहे हैं। बड़वानी जैसे संवेदनशील और आदिवासी बहुल जिले में उनकी नियुक्ति को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब राज्य कैबिनेट की बैठक जिले में आयोजित होनी है। सरकार के इस निर्णय को आगामी कार्यक्रमों और प्रशासनिक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया कदम माना जा रहा है।

सद्गति' के मंचन ने उठाया मानवीय गरिमा का सवाल

भोपाल। आसरा वृद्धाश्रम का शांत माहौल मानो किसी मौन पीड़ा का साक्षी बन गया था। भूख से तपता श्रमजीवी पिता जब मंच पर प्रवेश करता है, तो दर्शक सिर्फ एक पात्र को नहीं, बल्कि उस समाज को देखते हैं, जिसमें असमानता और संवेदनहीनता आज भी जीवित है। 

सेवन कलर्स कल्चरल एंड वेलफेयर सोसायटी की प्रस्तुति मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी 'सद्गति' उसी मौन को आवाज देती नजर आई। युवा रंगकर्मी अदनान खान के निर्देशन में मंचित यह नाटक एक ऐसे समाज का दर्पण था, जिसमें एक गरीब पिता अपनी बेटी के भविष्य के लिए सब कुछ सहता है। कहानी का नायक एक गरीब, श्रमजीवी और कई दिनों से भूखा व्यक्ति अपनी बेटी की सगाई के शुभमुहूर्त की आशा में पंडित के घर पहुंचता है। मगर मुहूर्त निकालने के बदले उससे कठोर श्रम कराया जाता है। 

भूख, थकान और शारीरिक दुर्बलता उसे धीरे-धीरे तोड़ देती है। अंततः वह वहीं गिरकर प्राण त्याग देता है, उसी आंगन में जिसमें वह अपनी बेटी के कल्याण की उम्मीद लेकर आया था। अंतिम दृश्य दर्शकों को यह सोचने पर विवश करता है कि क्या मनुष्य की पहचान अमीरी-गरीबी से तय होगी।

नौरादेही टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत पर कर्मचारियों पर फटकार, कार्रवाई के आदेश

सागर, मध्यप्रदेश। कान्हा टाइगर रिजर्व से जनवरी में नौरादेही शिफ्ट किए गए बाघ की मौत मामले में कर्मचारियों की लापरवाही उजागर हुई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख ने नौरादेही डीएफओ रजनीश कुमार सिंह को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि दोषी कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

प्रतिवेदन के अनुसार, बाघ को कान्हा से लाने के बाद 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही थी। 13 फरवरी को बाघ की लोकेशन लगातार एक ही स्थान पर मिलने के बावजूद मॉनिटरिंग टीम मौके पर नहीं पहुंची। जब टीम 48 घंटे बाद पहुंची, तो बाघ मृत पाया गया। पोस्टमार्टम में बाघ की खोपड़ी पर अन्य बाघ के केनाइन दांत के निशान और हड्डियों में टूटने के लक्षण मिले, जिससे पता चलता है कि बाघ टेरिटोरियल फाइट के दौरान मारा गया।

वन मुख्यालय ने कहा कि स्थानीय कर्मचारियों ने बाघ की लड़ाई और घायल होने की स्थिति को अनसुना किया, जबकि निर्देश थे कि इस दौरान घायल बाघ की तुरंत मॉनिटरिंग और आवश्यक उपचार किया जाए।

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा कि बाघ के लिए महंगा सैटेलाइट रेडियो कॉलर लगाया गया था और पूरी टीम निगरानी में लगी हुई थी। दुर्भाग्य से बाघ दो दिन तक मृत पड़ा रहा, लेकिन क्विक रिस्पांस टीम इसे समय पर नहीं देख पाई। उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख से दोषियों पर सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख ने डीएफओ को आदेश दिया है कि लापरवाह कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और भविष्य में रेडियो कॉलरधारी बाघ और अन्य बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। वन विभाग का लक्ष्य है कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।

मध्यप्रदेश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य अधिकार की मांग: कांग्रेस ने हर परिवार को 15 लाख तक मुफ्त इलाज का रखा प्रस्ताव

भोपाल (मध्य प्रदेश)। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में स्वास्थ्य अधिकार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस ने मांग की है कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तरह प्रदेश के हर नागरिक को भी निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण इलाज का अधिकार मिलना चाहिए।

वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने सदन में कहा, “स्वास्थ्य सुविधा किसी वर्ग विशेष का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।” उन्होंने सरकार से प्रदेश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू करने की मांग की।

कांग्रेस के प्रस्ताव के अनुसार—

  • प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 15 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज दिया जाए।
  • किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक का विशेष कवरेज सुनिश्चित किया जाए।

डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान में लागू आयुष्मान भारत योजना की पात्रता शर्तों के कारण लगभग 48 प्रतिशत परिवार योजना के दायरे से बाहर हैं। साथ ही, योजना में निर्धारित 5 लाख रुपये की सीमा महंगे और जटिल उपचार के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को बिना आय सीमा आयुष्मान योजना में शामिल किया गया है, तो फिर सभी नागरिकों को सार्वभौमिक निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती?

डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों तथा उनके आश्रितों को सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद भी 100 प्रतिशत निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलती है। “यदि प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुविधा मिल सकती है, तो आम जनता को इससे वंचित रखना अन्यायपूर्ण है,” उन्होंने कहा।

  • 19 से 28 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान

कांग्रेस विधायक ने अनुमान जताया कि ऐसी योजना लागू करने पर राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 19 से 28 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय वहन करना पड़ सकता है। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया—

  • राष्ट्रीय बीमा कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए,
  • आयुष्मान भारत योजना से समन्वय स्थापित किया जाए,
  • और आवश्यकता पड़ने पर जनहित में ऋण लेकर भी योजना लागू की जाए।

बजट सत्र में तेज हुई बहस

इस प्रस्ताव ने बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए यह कदम जरूरी है, ताकि गरीब से अमीर तक हर नागरिक को उच्च स्तरीय और समान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके।

बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री करेंगे शादी, जानें कैसी दुल्हन है पसंद

छतरपुर, मध्य प्रदेश। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी शादी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने मंच से कहा, "मैंने मां को बोल दिया है कि शादी के लिए लड़की ढूँढ लें। अब शादी पक्की होगी।" बाबा बागेश्वर के इस ऐलान के बाद उनके अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उनकी शादी मां की पसंद की लड़की से होगी। उन्होंने कहा, "गुरुजी की आज्ञा मिल गई है, अब तो शादी करनी पड़ेगी। मैंने मां को लड़की तलाशने के लिए कह दिया है।" उनका यह फैसला अनुयायियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और हर कोई जानना चाहता है कि उनकी होने वाली दुल्हन कौन होंगी।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने हाल ही में 305 गरीब बेटियों के विवाह कर उन्हें अपनी बेटी की तरह विदा किया है। बाबा धीरेंद्र शास्त्री का मानना है कि मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं बल्कि सेवा का केंद्र भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा सपना है कि एक दिन 1100-1100 अनाथ बेटियों का विवाह बागेश्वर धाम की भूमि से हो।"

बाबा ने बुंदेलखंड के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इलाके के लोग मजदूरी पर निर्भर हैं और पलायन के लिए मजबूर हैं। उनका उद्देश्य है कि बुंदेलखंड शिक्षा, स्वास्थ्य और सनातन धर्म में आगे बढ़े। उन्होंने भविष्य में कैंसर हॉस्पिटल बनाने का भी सपना साझा किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बनेगा। बाबा के इस निर्णय और सामाजिक कार्यों ने उनके अनुयायियों में उत्साह और आस्था दोनों बढ़ा दी है।

जिक्र में गुजरा पहला अशरा, रमजान की इबादतों में आई लज्जत

  • मुकम्मल हुआ 10 दिन की तरावीह का दौर
  • बाजार में बढ़ने लगी भीड़

भोपाल। तीन अशरो में बंटे माह ए रमजान के पहले 9 दिन पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही शनिवार को पहले अशरे की इबादत मुकम्मल हो जाएगी। शहर की विभिन्न मस्जिदों में पढ़ाई जा रही 10 दिन की तरावीह का दौर भी पूरा हो गया है। इधर जरूरी खरीदारी के लिए लोगों ने बाजार का रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे बाजारों में भीड़ बढ़ गई है। घरेलू भाषा में इसे जिक्र, फिक्र और घी शकर के तीन भाग कहा जाता था। लेकिन असल में रमजान के तीन अशरे रहमत, बरकत और जहन्नुम से खुलासी के होते हैं। गुरुवार से शुरू हुआ रमजान के पहले अशरे का दौर शनिवार को पूरा हो गया। इसके बाद अब रविवार से दूसरे दौर की इबादत शुरू होंगी। 

  • मुकम्मल हुई 10 दिन की तरावीह 

शहर में इबादतगुजारों की सहूलियत के लिहाज से अलग अलग अवधि की तरावीह पढ़ाई जाती है। मुकम्मल कुरान पढ़ने और सुनने का यह दौर 5 दिन से शुरु होकर 27 दिन की तरावीह तक चलता है। पहले असरे में 5 और 7 दिन अवधि की तरावीह मुकम्मल हो चुकी है। शनिवार शाम को शहर की कई मस्जिदों में 10 दिन की तरावीह पूरी हुई। इस दौरान पुराने शहर की मस्जिद सुल्तान सेठ में भी शनिवार को मुकम्मल तरावीह का आयोजन हुआ। मस्जिद के मुअज्जिन मोहम्मद नईम खान ने बताया कि इस दस दिन की तरावीह में मुहल्ले और शहर के अन्य क्षेत्रों के बाशिंदों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर मस्जिद में रोजा इफ्तार का आयोजन भी किया गया। तरावीह के बाद तबर्रुक भी बांटा गया। बड़ी तादाद में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।

  • तय हुआ फितरा

शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने रमजान में निकाली जाने वाली जकात और फितरे की राशि का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा इसकी अदायगी ईद की नमाज के पहले करना जरूरी है। जान का सदका कहे जाने वाले फितरा के बारे में उन्होंने बताया कि इसके लिए हर शख्स को 1 किलो, 630 ग्राम गेहूं किसी ऐसे व्यक्ति को दान करना है, जो इसके योग्य हो। कोई व्यक्ति गेहूं की इस मात्रा की बजाए नगद राशि 70 रूपये प्रति व्यक्ति भी दे सकता है। शहर काजी साहब ने जकात को लेकर बताया कि यह ऐसे व्यक्ति पर लागू है जिसके पास 612 ग्राम चांदी मौजूद है, जिसकी कीमत 1 लाख, 65 हजार रुपए आंकलित की गई है।

  • बढ़ने लगी बाजार में भीड़

रमजान का पहला अशरा पूरा होने के बाद अब लोगों ने ईद की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सिलाई के कपड़ों, मैचिंग और तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की खरीदारी इस दौरान की जा रही है। इसके चलते इब्राहिमपूरा, चौक बाजार, नदीम रोड, लखेरापुरा, जुमेराती, मंगलवारा, लक्ष्मी टॉकीज, जहांगीराबाद आदि बाजारों की रौनक बढ़ गई है। यहां बाजार देर रात तक सज रहे हैं।

  • दूसरे जुमे पर अकीदत के सजदे

रमजान का दूसरा जुमा अकीदत के साथ शहर में अदा किया गया। इस दौरान जामा मस्जिद, ताजुल मसाजिद, मोती मस्जिद, प्रेस कॉम्प्लेक्स आदि मस्जिदों में अकीदत के सजदे अदा किए गए।

"आसरा" के बुजुर्गों के बीच साहित्यिक प्रस्तुति, आज होगा "सद्गति" का मंचन

  • आयोजन से पहले सराहा जाने लगा प्रयास

भोपाल। संस्कृत‍ि मंत्रालय, भारत सरकार की “सांस्कृतिक समारोह एवं प्रस्तुति अनुदान योजना (CFPGS)” के अंतर्गत प्रख्यात साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “सद्गति” पर आधारित नाटक का मंचन 28 फरवरी को आसरा वृद्धाश्रम, गोलघर के पास, शाहजहांनाबाद, भोपाल में किया जाएगा।

इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन युवा रंगकर्मी अदनान खान द्वारा किया गया है। यह प्रस्तुति सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, जिसमें गरीबी, असमानता और मानवीय गरिमा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम सेवन कलर्स कल्चरल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित किया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य साहित्य और रंगमंच के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक सार्थक सांस्कृतिक संवाद स्थापित करना है। वृद्धाश्रम में आयोजित इस विशेष मंचन के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के बीच सांस्कृतिक सरोकारों को साझा करने और सामाजिक चेतना को सशक्त करने का प्रयास किया जाएगा। संस्था ने शहर के रंगकर्मियों, साहित्य प्रेमियों एवं नागरिकों से इस प्रस्तुति में सहभागिता का आग्रह किया है।

स्वास्थ्य हमारा मिशन है और सेवा हमारी परंपरा: डॉ. मनसुख मांडविया

  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने अपने 75वें स्थापना वर्ष समारोह की शुरुआत की

भोपाल। ​कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने देशभर के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए सात दशकों से अधिक की समर्पित सेवा के उपलक्ष्य में अपने '75वें सेवा वर्ष' समारोह की शुरुआत की। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस कार्यक्रम में मुख्य भाषण दिया।

​इस अवसर पर सांसद (लोकसभा) एनके प्रेमचंद्रन, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव वंदना गुरनानी, ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की निदेशक मिचिको मियामोटो और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • विकास और सुधार की यात्रा:

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने संस्थान की यात्रा को राष्ट्र सेवा और सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि 1952 में लगभग 1.2 लाख लाभार्थियों और एक औषधालय से शुरू हुआ ईएसआईसी (ESIC) आज 166 अस्पतालों, 17 मेडिकल कॉलेजों और लगभग 1,600 औषधालयों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से 15 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की सेवा कर रहा है।

  • स्वास्थ्य ही सेवा है:

डॉ. मांडविया ने जोर देकर कहा कि "स्वास्थ्य ही सेवा है और सेवा ही हमारा संस्कार है।" उन्होंने चिकित्सा पेशेवरों से अनुशासन बनाए रखने और लोगों के भरोसे का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ईएसआईसी के मानकों को एम्स (AIIMS) जैसे प्रमुख संस्थानों के बराबर होना चाहिए।

  • प्रमुख घोषणाएं और पहल:

​निशुल्क स्वास्थ्य जांच: श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए अनिवार्य और मुफ्त स्वास्थ्य जांच का प्रावधान किया गया है।

  • ​स्मारक सिक्का और पुस्तक: निगम की 75 वर्षों की यात्रा के प्रतीक के रूप में एक स्मारक सिक्का और कॉफी टेबल बुक जारी की गई।
  • स्वास्थ्य रथ: लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 'स्वास्थ्य रथ' पहल की शुरुआत की गई।
  • समझौता ज्ञापन (MoUs): ​ESIC और NHAआयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के साथ ईएसआई योजना के समन्वय के लिए।
  • ​ESIC और NABL: ईएसआईसी स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्ता आश्वासन और मान्यता (Accreditation) को बढ़ावा देने के लिए।
  • विशेष सेवा पखवाड़ा:

ईएसआईसी 24 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक देश भर में 'विशेष सेवा पखवाड़ा' मनाएगा। इस दौरान जागरूकता शिविर, स्वच्छता अभियान, योग शिविर और लंबित दावों के त्वरित निपटान के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।

श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि ईएसआईसी न केवल बीमारियों का इलाज कर रहा है, बल्कि गरीबी को रोकने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दे रहा है। 75वां स्थापना दिवस ईएसआईसी की श्रमिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और एक आधुनिक, संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा संस्थान के रूप में इसके विकास को दोहराता है।

मध्य प्रदेश में वैज्ञानिक उत्खननों से प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा मध्य प्रदेश में किए गए पुरातात्विक उत्खननों ने राज्य की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को नई दृष्टि प्रदान की है। उत्खनन वह वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से पुरातत्वविद् भूमि के भीतर दबे प्राचीन बस्तियों एवं संरचनाओं के अवशेषों को खोजकर प्रकाश में लाते हैं। मुख्यतः दो प्रकार के उत्खनन किए जाते हैं; वर्टिकल एक्सकेवेशन, जिसके माध्यम से किसी स्थल का सांस्कृतिक क्रम ज्ञात किया जाता है, तथा हॉरिजॉन्टल एक्सकेवेशन, जिसके द्वारा स्थल की समग्र सांस्कृतिक और राजनीतिक संरचना का अध्ययन किया जाता है।

भारत में संगठित उत्खनन कार्य वर्ष 1861 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना के साथ प्रारंभ हुए, जब अलेक्जेंडर कनिंघम पहले डायरेक्टर जनरल नियुक्त हुए। वर्ष 1902 में सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में वैज्ञानिक पद्धतियों को अधिक व्यवस्थित रूप से अपनाया गया। उनके काल में मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थलों पर व्यापक उत्खनन संपन्न हुए। सर मोर्टायमर व्हीलर के समय (1944-1948) भारतीय पुरातत्व के उत्खनन की प्रविधि में नया मोड आया और अधिक वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन करने के लिए व्हर्टिकल और हॉरिजॉन्टल तकनीक अपनाई गई। 

मध्य प्रदेश में वर्ष 1936 में कसरावद में उत्खनन कार्य प्रारंभ हुए तथा बाद में उज्जैन सहित अन्य स्थलों पर अनुसंधान आगे बढ़ा। स्वतंत्रता के पश्चात 1956 में राज्य के पुनर्गठन के साथ राज्य पुरातत्व विभाग की स्थापना हुई और विधिवत उत्खनन प्रारंभ हुए। डेक्कन कॉलेज, पुणे तथा अन्य विश्वविद्यालयों के सहयोग से अब तक लगभग 55–56 स्थलों पर उत्खनन किए जा चुके हैं। वर्ष 1995 से 2005 के बीच विशेष अभियान के अंतर्गत तीन टीमों द्वारा कुल 35 उत्खनन कार्य संपन्न किए गए।

हाल के प्रमुख उत्खननों में मनोरा (जिला सतना) और उज्जैन विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। वर्ष 2019–20 में उज्जैन के ऋण मुक्तेश्वर टीले पर उत्खनन किया गया, जिसमें छठी शताब्दी ईसा पूर्व तक के अवशेष प्राप्त हुए। 

सर्वेक्षण के दौरान पीजीडब्ल्यू (Painted Grey Ware) के कुछ टुकड़े मिले थे, हालांकि स्तरीय क्रम में यह प्राप्त नहीं हुआ। ब्लैक एंड रेड वेयर तथा अन्य प्रारंभिक अवशेषों ने स्थल की प्राचीनता को प्रमाणित किया।

मनोरा स्थल पर वर्ष 2001 में पुरातत्वविद् एस. एन. रौशल्या द्वारा सर्वेक्षण किया गया, जिसमें मंदिरों और बस्तियों के व्यापक अवशेष मिले। वर्ष 2008 में जबलपुर के पुरातत्वविद् एम. के. माहेश्वरी द्वारा उत्खनन किया गया, जिसमें दो मंदिरों के अवशेष प्राप्त हुए तथा बड़ी संख्या में मूर्तियों का संकलन किया गया। साथ ही 108 मंदिरों के साक्ष्य चिन्हित किए गए। वर्ष 2014 में डॉ. डी. के. माथुर, पुरातत्वीय अधिकार भोपाल द्वारा उत्खनन किया गया, जिसमें दो मंदिरों का कार्य पूर्ण हुआ। वर्ष 2018–19 में डॉ. रमेश यादव के निर्देशन में वाकणकर संस्थान द्वारा पुनः उत्खनन किया गया। इस दौरान बस्ती क्षेत्र से ईंट एवं पत्थर से निर्मित एक राजमहल के अवशेष प्राप्त हुए, जिनमें निम्न स्तर पर कुषाणकालीन ईंटों की पहचान हुई। इससे संकेत मिलता है कि बस्ती का विकास कुषाण काल से आरंभ होकर गुप्त काल में एक समृद्ध नगर के रूप में हुआ।

उत्खनन के दौरान वाकाटक राजवंश से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य भी प्राप्त हुए। प्रयाग प्रशस्ति में उल्लिखित रुद्रसेन का संबंध वाकाटक वंश से जोड़ा गया है और मनोरा को उनकी संभावित राजधानी माना गया है। सतना जिले के बघाट क्षेत्र से प्राप्त स्तंभ लेख में ‘वाकाटक’ शब्द अंकित है। उच्चकल्प वंश के राजा जयनाथ के अभिलेखों में उल्लिखित ग्रामों की पहचान आज भी संभव है, जिससे मनोरा की भौगोलिक चतुर्सीमा निर्धारित की गई।

राज्य पुरातत्व विभाग ग्राम-स्तरीय सर्वेक्षण के आधार पर संभावित स्थलों का चयन कर प्राथमिकता के अनुसार उत्खनन की योजना बनाता है। वर्तमान में ग्वालियर क्षेत्र में उत्खनन अपेक्षाकृत कम हुए हैं तथा भिंड जिले के कुछ स्थलों को भविष्य की कार्ययोजना में शामिल किया गया है। मध्य प्रदेश के इन वैज्ञानिक एवं संगठित उत्खननों ने राज्य की ऐतिहासिक धरोहर को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हुए भारतीय इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण अध्यायों को स्पष्ट किया है।