नौरादेही टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत पर कर्मचारियों पर फटकार, कार्रवाई के आदेश

सागर, मध्यप्रदेश। कान्हा टाइगर रिजर्व से जनवरी में नौरादेही शिफ्ट किए गए बाघ की मौत मामले में कर्मचारियों की लापरवाही उजागर हुई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख ने नौरादेही डीएफओ रजनीश कुमार सिंह को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि दोषी कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

प्रतिवेदन के अनुसार, बाघ को कान्हा से लाने के बाद 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही थी। 13 फरवरी को बाघ की लोकेशन लगातार एक ही स्थान पर मिलने के बावजूद मॉनिटरिंग टीम मौके पर नहीं पहुंची। जब टीम 48 घंटे बाद पहुंची, तो बाघ मृत पाया गया। पोस्टमार्टम में बाघ की खोपड़ी पर अन्य बाघ के केनाइन दांत के निशान और हड्डियों में टूटने के लक्षण मिले, जिससे पता चलता है कि बाघ टेरिटोरियल फाइट के दौरान मारा गया।

वन मुख्यालय ने कहा कि स्थानीय कर्मचारियों ने बाघ की लड़ाई और घायल होने की स्थिति को अनसुना किया, जबकि निर्देश थे कि इस दौरान घायल बाघ की तुरंत मॉनिटरिंग और आवश्यक उपचार किया जाए।

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा कि बाघ के लिए महंगा सैटेलाइट रेडियो कॉलर लगाया गया था और पूरी टीम निगरानी में लगी हुई थी। दुर्भाग्य से बाघ दो दिन तक मृत पड़ा रहा, लेकिन क्विक रिस्पांस टीम इसे समय पर नहीं देख पाई। उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख से दोषियों पर सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख ने डीएफओ को आदेश दिया है कि लापरवाह कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और भविष्य में रेडियो कॉलरधारी बाघ और अन्य बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। वन विभाग का लक्ष्य है कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।

मध्यप्रदेश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य अधिकार की मांग: कांग्रेस ने हर परिवार को 15 लाख तक मुफ्त इलाज का रखा प्रस्ताव

भोपाल (मध्य प्रदेश)। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में स्वास्थ्य अधिकार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस ने मांग की है कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की तरह प्रदेश के हर नागरिक को भी निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण इलाज का अधिकार मिलना चाहिए।

वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने सदन में कहा, “स्वास्थ्य सुविधा किसी वर्ग विशेष का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।” उन्होंने सरकार से प्रदेश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू करने की मांग की।

कांग्रेस के प्रस्ताव के अनुसार—

  • प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 15 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज दिया जाए।
  • किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक का विशेष कवरेज सुनिश्चित किया जाए।

डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान में लागू आयुष्मान भारत योजना की पात्रता शर्तों के कारण लगभग 48 प्रतिशत परिवार योजना के दायरे से बाहर हैं। साथ ही, योजना में निर्धारित 5 लाख रुपये की सीमा महंगे और जटिल उपचार के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को बिना आय सीमा आयुष्मान योजना में शामिल किया गया है, तो फिर सभी नागरिकों को सार्वभौमिक निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती?

डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों तथा उनके आश्रितों को सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद भी 100 प्रतिशत निःशुल्क इलाज की सुविधा मिलती है। “यदि प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुविधा मिल सकती है, तो आम जनता को इससे वंचित रखना अन्यायपूर्ण है,” उन्होंने कहा।

  • 19 से 28 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च का अनुमान

कांग्रेस विधायक ने अनुमान जताया कि ऐसी योजना लागू करने पर राज्य सरकार को प्रतिवर्ष 19 से 28 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय वहन करना पड़ सकता है। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया—

  • राष्ट्रीय बीमा कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए,
  • आयुष्मान भारत योजना से समन्वय स्थापित किया जाए,
  • और आवश्यकता पड़ने पर जनहित में ऋण लेकर भी योजना लागू की जाए।

बजट सत्र में तेज हुई बहस

इस प्रस्ताव ने बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए यह कदम जरूरी है, ताकि गरीब से अमीर तक हर नागरिक को उच्च स्तरीय और समान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके।

बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री करेंगे शादी, जानें कैसी दुल्हन है पसंद

छतरपुर, मध्य प्रदेश। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी शादी का ऐलान कर दिया है। उन्होंने मंच से कहा, "मैंने मां को बोल दिया है कि शादी के लिए लड़की ढूँढ लें। अब शादी पक्की होगी।" बाबा बागेश्वर के इस ऐलान के बाद उनके अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उनकी शादी मां की पसंद की लड़की से होगी। उन्होंने कहा, "गुरुजी की आज्ञा मिल गई है, अब तो शादी करनी पड़ेगी। मैंने मां को लड़की तलाशने के लिए कह दिया है।" उनका यह फैसला अनुयायियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और हर कोई जानना चाहता है कि उनकी होने वाली दुल्हन कौन होंगी।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने हाल ही में 305 गरीब बेटियों के विवाह कर उन्हें अपनी बेटी की तरह विदा किया है। बाबा धीरेंद्र शास्त्री का मानना है कि मंदिर केवल श्रद्धा का केंद्र नहीं बल्कि सेवा का केंद्र भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा सपना है कि एक दिन 1100-1100 अनाथ बेटियों का विवाह बागेश्वर धाम की भूमि से हो।"

बाबा ने बुंदेलखंड के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इलाके के लोग मजदूरी पर निर्भर हैं और पलायन के लिए मजबूर हैं। उनका उद्देश्य है कि बुंदेलखंड शिक्षा, स्वास्थ्य और सनातन धर्म में आगे बढ़े। उन्होंने भविष्य में कैंसर हॉस्पिटल बनाने का भी सपना साझा किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बनेगा। बाबा के इस निर्णय और सामाजिक कार्यों ने उनके अनुयायियों में उत्साह और आस्था दोनों बढ़ा दी है।

जिक्र में गुजरा पहला अशरा, रमजान की इबादतों में आई लज्जत

  • मुकम्मल हुआ 10 दिन की तरावीह का दौर
  • बाजार में बढ़ने लगी भीड़

भोपाल। तीन अशरो में बंटे माह ए रमजान के पहले 9 दिन पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही शनिवार को पहले अशरे की इबादत मुकम्मल हो जाएगी। शहर की विभिन्न मस्जिदों में पढ़ाई जा रही 10 दिन की तरावीह का दौर भी पूरा हो गया है। इधर जरूरी खरीदारी के लिए लोगों ने बाजार का रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे बाजारों में भीड़ बढ़ गई है। घरेलू भाषा में इसे जिक्र, फिक्र और घी शकर के तीन भाग कहा जाता था। लेकिन असल में रमजान के तीन अशरे रहमत, बरकत और जहन्नुम से खुलासी के होते हैं। गुरुवार से शुरू हुआ रमजान के पहले अशरे का दौर शनिवार को पूरा हो गया। इसके बाद अब रविवार से दूसरे दौर की इबादत शुरू होंगी। 

  • मुकम्मल हुई 10 दिन की तरावीह 

शहर में इबादतगुजारों की सहूलियत के लिहाज से अलग अलग अवधि की तरावीह पढ़ाई जाती है। मुकम्मल कुरान पढ़ने और सुनने का यह दौर 5 दिन से शुरु होकर 27 दिन की तरावीह तक चलता है। पहले असरे में 5 और 7 दिन अवधि की तरावीह मुकम्मल हो चुकी है। शनिवार शाम को शहर की कई मस्जिदों में 10 दिन की तरावीह पूरी हुई। इस दौरान पुराने शहर की मस्जिद सुल्तान सेठ में भी शनिवार को मुकम्मल तरावीह का आयोजन हुआ। मस्जिद के मुअज्जिन मोहम्मद नईम खान ने बताया कि इस दस दिन की तरावीह में मुहल्ले और शहर के अन्य क्षेत्रों के बाशिंदों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर मस्जिद में रोजा इफ्तार का आयोजन भी किया गया। तरावीह के बाद तबर्रुक भी बांटा गया। बड़ी तादाद में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।

  • तय हुआ फितरा

शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने रमजान में निकाली जाने वाली जकात और फितरे की राशि का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा इसकी अदायगी ईद की नमाज के पहले करना जरूरी है। जान का सदका कहे जाने वाले फितरा के बारे में उन्होंने बताया कि इसके लिए हर शख्स को 1 किलो, 630 ग्राम गेहूं किसी ऐसे व्यक्ति को दान करना है, जो इसके योग्य हो। कोई व्यक्ति गेहूं की इस मात्रा की बजाए नगद राशि 70 रूपये प्रति व्यक्ति भी दे सकता है। शहर काजी साहब ने जकात को लेकर बताया कि यह ऐसे व्यक्ति पर लागू है जिसके पास 612 ग्राम चांदी मौजूद है, जिसकी कीमत 1 लाख, 65 हजार रुपए आंकलित की गई है।

  • बढ़ने लगी बाजार में भीड़

रमजान का पहला अशरा पूरा होने के बाद अब लोगों ने ईद की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सिलाई के कपड़ों, मैचिंग और तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की खरीदारी इस दौरान की जा रही है। इसके चलते इब्राहिमपूरा, चौक बाजार, नदीम रोड, लखेरापुरा, जुमेराती, मंगलवारा, लक्ष्मी टॉकीज, जहांगीराबाद आदि बाजारों की रौनक बढ़ गई है। यहां बाजार देर रात तक सज रहे हैं।

  • दूसरे जुमे पर अकीदत के सजदे

रमजान का दूसरा जुमा अकीदत के साथ शहर में अदा किया गया। इस दौरान जामा मस्जिद, ताजुल मसाजिद, मोती मस्जिद, प्रेस कॉम्प्लेक्स आदि मस्जिदों में अकीदत के सजदे अदा किए गए।

"आसरा" के बुजुर्गों के बीच साहित्यिक प्रस्तुति, आज होगा "सद्गति" का मंचन

  • आयोजन से पहले सराहा जाने लगा प्रयास

भोपाल। संस्कृत‍ि मंत्रालय, भारत सरकार की “सांस्कृतिक समारोह एवं प्रस्तुति अनुदान योजना (CFPGS)” के अंतर्गत प्रख्यात साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “सद्गति” पर आधारित नाटक का मंचन 28 फरवरी को आसरा वृद्धाश्रम, गोलघर के पास, शाहजहांनाबाद, भोपाल में किया जाएगा।

इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन युवा रंगकर्मी अदनान खान द्वारा किया गया है। यह प्रस्तुति सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई है, जिसमें गरीबी, असमानता और मानवीय गरिमा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यक्रम सेवन कलर्स कल्चरल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित किया जा रहा है। संस्था का उद्देश्य साहित्य और रंगमंच के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक सार्थक सांस्कृतिक संवाद स्थापित करना है। वृद्धाश्रम में आयोजित इस विशेष मंचन के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के बीच सांस्कृतिक सरोकारों को साझा करने और सामाजिक चेतना को सशक्त करने का प्रयास किया जाएगा। संस्था ने शहर के रंगकर्मियों, साहित्य प्रेमियों एवं नागरिकों से इस प्रस्तुति में सहभागिता का आग्रह किया है।

स्वास्थ्य हमारा मिशन है और सेवा हमारी परंपरा: डॉ. मनसुख मांडविया

  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने अपने 75वें स्थापना वर्ष समारोह की शुरुआत की

भोपाल। ​कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने देशभर के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए सात दशकों से अधिक की समर्पित सेवा के उपलक्ष्य में अपने '75वें सेवा वर्ष' समारोह की शुरुआत की। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस कार्यक्रम में मुख्य भाषण दिया।

​इस अवसर पर सांसद (लोकसभा) एनके प्रेमचंद्रन, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव वंदना गुरनानी, ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की निदेशक मिचिको मियामोटो और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • विकास और सुधार की यात्रा:

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने संस्थान की यात्रा को राष्ट्र सेवा और सुधार का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि 1952 में लगभग 1.2 लाख लाभार्थियों और एक औषधालय से शुरू हुआ ईएसआईसी (ESIC) आज 166 अस्पतालों, 17 मेडिकल कॉलेजों और लगभग 1,600 औषधालयों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से 15 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की सेवा कर रहा है।

  • स्वास्थ्य ही सेवा है:

डॉ. मांडविया ने जोर देकर कहा कि "स्वास्थ्य ही सेवा है और सेवा ही हमारा संस्कार है।" उन्होंने चिकित्सा पेशेवरों से अनुशासन बनाए रखने और लोगों के भरोसे का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ईएसआईसी के मानकों को एम्स (AIIMS) जैसे प्रमुख संस्थानों के बराबर होना चाहिए।

  • प्रमुख घोषणाएं और पहल:

​निशुल्क स्वास्थ्य जांच: श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए अनिवार्य और मुफ्त स्वास्थ्य जांच का प्रावधान किया गया है।

  • ​स्मारक सिक्का और पुस्तक: निगम की 75 वर्षों की यात्रा के प्रतीक के रूप में एक स्मारक सिक्का और कॉफी टेबल बुक जारी की गई।
  • स्वास्थ्य रथ: लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए 'स्वास्थ्य रथ' पहल की शुरुआत की गई।
  • समझौता ज्ञापन (MoUs): ​ESIC और NHAआयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के साथ ईएसआई योजना के समन्वय के लिए।
  • ​ESIC और NABL: ईएसआईसी स्वास्थ्य सुविधाओं में गुणवत्ता आश्वासन और मान्यता (Accreditation) को बढ़ावा देने के लिए।
  • विशेष सेवा पखवाड़ा:

ईएसआईसी 24 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक देश भर में 'विशेष सेवा पखवाड़ा' मनाएगा। इस दौरान जागरूकता शिविर, स्वच्छता अभियान, योग शिविर और लंबित दावों के त्वरित निपटान के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।

श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि ईएसआईसी न केवल बीमारियों का इलाज कर रहा है, बल्कि गरीबी को रोकने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दे रहा है। 75वां स्थापना दिवस ईएसआईसी की श्रमिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और एक आधुनिक, संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा संस्थान के रूप में इसके विकास को दोहराता है।

मध्य प्रदेश में वैज्ञानिक उत्खननों से प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा मध्य प्रदेश में किए गए पुरातात्विक उत्खननों ने राज्य की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को नई दृष्टि प्रदान की है। उत्खनन वह वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से पुरातत्वविद् भूमि के भीतर दबे प्राचीन बस्तियों एवं संरचनाओं के अवशेषों को खोजकर प्रकाश में लाते हैं। मुख्यतः दो प्रकार के उत्खनन किए जाते हैं; वर्टिकल एक्सकेवेशन, जिसके माध्यम से किसी स्थल का सांस्कृतिक क्रम ज्ञात किया जाता है, तथा हॉरिजॉन्टल एक्सकेवेशन, जिसके द्वारा स्थल की समग्र सांस्कृतिक और राजनीतिक संरचना का अध्ययन किया जाता है।

भारत में संगठित उत्खनन कार्य वर्ष 1861 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना के साथ प्रारंभ हुए, जब अलेक्जेंडर कनिंघम पहले डायरेक्टर जनरल नियुक्त हुए। वर्ष 1902 में सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में वैज्ञानिक पद्धतियों को अधिक व्यवस्थित रूप से अपनाया गया। उनके काल में मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थलों पर व्यापक उत्खनन संपन्न हुए। सर मोर्टायमर व्हीलर के समय (1944-1948) भारतीय पुरातत्व के उत्खनन की प्रविधि में नया मोड आया और अधिक वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन करने के लिए व्हर्टिकल और हॉरिजॉन्टल तकनीक अपनाई गई। 

मध्य प्रदेश में वर्ष 1936 में कसरावद में उत्खनन कार्य प्रारंभ हुए तथा बाद में उज्जैन सहित अन्य स्थलों पर अनुसंधान आगे बढ़ा। स्वतंत्रता के पश्चात 1956 में राज्य के पुनर्गठन के साथ राज्य पुरातत्व विभाग की स्थापना हुई और विधिवत उत्खनन प्रारंभ हुए। डेक्कन कॉलेज, पुणे तथा अन्य विश्वविद्यालयों के सहयोग से अब तक लगभग 55–56 स्थलों पर उत्खनन किए जा चुके हैं। वर्ष 1995 से 2005 के बीच विशेष अभियान के अंतर्गत तीन टीमों द्वारा कुल 35 उत्खनन कार्य संपन्न किए गए।

हाल के प्रमुख उत्खननों में मनोरा (जिला सतना) और उज्जैन विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। वर्ष 2019–20 में उज्जैन के ऋण मुक्तेश्वर टीले पर उत्खनन किया गया, जिसमें छठी शताब्दी ईसा पूर्व तक के अवशेष प्राप्त हुए। 

सर्वेक्षण के दौरान पीजीडब्ल्यू (Painted Grey Ware) के कुछ टुकड़े मिले थे, हालांकि स्तरीय क्रम में यह प्राप्त नहीं हुआ। ब्लैक एंड रेड वेयर तथा अन्य प्रारंभिक अवशेषों ने स्थल की प्राचीनता को प्रमाणित किया।

मनोरा स्थल पर वर्ष 2001 में पुरातत्वविद् एस. एन. रौशल्या द्वारा सर्वेक्षण किया गया, जिसमें मंदिरों और बस्तियों के व्यापक अवशेष मिले। वर्ष 2008 में जबलपुर के पुरातत्वविद् एम. के. माहेश्वरी द्वारा उत्खनन किया गया, जिसमें दो मंदिरों के अवशेष प्राप्त हुए तथा बड़ी संख्या में मूर्तियों का संकलन किया गया। साथ ही 108 मंदिरों के साक्ष्य चिन्हित किए गए। वर्ष 2014 में डॉ. डी. के. माथुर, पुरातत्वीय अधिकार भोपाल द्वारा उत्खनन किया गया, जिसमें दो मंदिरों का कार्य पूर्ण हुआ। वर्ष 2018–19 में डॉ. रमेश यादव के निर्देशन में वाकणकर संस्थान द्वारा पुनः उत्खनन किया गया। इस दौरान बस्ती क्षेत्र से ईंट एवं पत्थर से निर्मित एक राजमहल के अवशेष प्राप्त हुए, जिनमें निम्न स्तर पर कुषाणकालीन ईंटों की पहचान हुई। इससे संकेत मिलता है कि बस्ती का विकास कुषाण काल से आरंभ होकर गुप्त काल में एक समृद्ध नगर के रूप में हुआ।

उत्खनन के दौरान वाकाटक राजवंश से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य भी प्राप्त हुए। प्रयाग प्रशस्ति में उल्लिखित रुद्रसेन का संबंध वाकाटक वंश से जोड़ा गया है और मनोरा को उनकी संभावित राजधानी माना गया है। सतना जिले के बघाट क्षेत्र से प्राप्त स्तंभ लेख में ‘वाकाटक’ शब्द अंकित है। उच्चकल्प वंश के राजा जयनाथ के अभिलेखों में उल्लिखित ग्रामों की पहचान आज भी संभव है, जिससे मनोरा की भौगोलिक चतुर्सीमा निर्धारित की गई।

राज्य पुरातत्व विभाग ग्राम-स्तरीय सर्वेक्षण के आधार पर संभावित स्थलों का चयन कर प्राथमिकता के अनुसार उत्खनन की योजना बनाता है। वर्तमान में ग्वालियर क्षेत्र में उत्खनन अपेक्षाकृत कम हुए हैं तथा भिंड जिले के कुछ स्थलों को भविष्य की कार्ययोजना में शामिल किया गया है। मध्य प्रदेश के इन वैज्ञानिक एवं संगठित उत्खननों ने राज्य की ऐतिहासिक धरोहर को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हुए भारतीय इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण अध्यायों को स्पष्ट किया है।

मुख्यमंत्री की प्रशासनिक सख्ती

- सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए वल्लभ भवन में समय पर उपस्थिति के निर्देश, होगी छापामार कार्रवाई

भोपाल। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव आज भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को गुरुवार सुबह दस बजे से शाम के 6 बजे तक उपस्थित के लिए कहा गया है। इस दौरान वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा 

तीनों कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय, और अनाधिकृत उपस्थिति की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने टीम बनाकर सभी जगह तैनात कर दी गई है और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है।

'दीपक' की रोशनी अब आबकारी के हिस्से,सीएम की छवि चमकाने की जिम्मेदारी 'मनीष' के जादुई हाथों में...

खान आशु 

भोपाल, मध्य प्रदेश। सीएम की छवि चमकाने वाले विभाग जनसंपर्क में अब उनके पहले भी अपना जलवा दिखा चुके IAS मनीष सिंह को सौंपी गई है। नाम के अनुरूप बुद्धिमान, समझदार या विचारशील व्यक्तित्व के धनी मनीष सिंह में जहां काम को जुनून की इंतहा तक उत्साह है, वहीं उनकी प्रशासनिक पकड़ का भी लोहा माना जाता रहा है।

शुक्रवार देर रात हुए प्रशासनिक फेरबदल में IAS मनीष मनीष सिंह को जनसंपर्क संचालनालय का जिम्मा सौंपा गया है। उनकी यहां पहले भी एक पारी बीत चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जनसंपर्क विभाग में सेवाएं दे चुके मनीष सिंह की बेहतर ट्यूनिंग से इस विभाग से जुड़े सभी लोग संतुष्ट रहे हैं। जहां विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों से उनका तालमेल रहा है, वहीं प्रदेश भर के छोटे बड़े अखबार मालिकों को भी उचित प्रतिसाद उनसे मिलता रहा है। विभाग से जुड़े पत्रकारों के लिए भी उनका दोस्ताना व्यवहार यादगार कहा जा सकता है।

यथा नाम, तथा काम

मनीष नाम के मायने खंखालने पर पता चलता है कि इस नाम को ईश्वर के नाम मन+ईश का समावेश माना जाता है। इस नाम के व्यक्ति को मन का स्वामी कहा जाता है। जबकि बुद्धिमत्ता, समझदारी और विचारशीलता इनकी अतिरिक्त योग्यता मानी जाती है। मनीष सिंह ऐसे व्यक्ति कहे जा सकते हैं, जिनको लेकर यथा नाम, तथा काम की संज्ञा दी जा सकती है।

जहां रहे, अलग पहचान 

नगर निगम भोपाल में आयुक्त के रूप में उनकी कार्यशैली शहर को अब तक याद है। स्व. बाबूलाल गौर के मंत्रित्वकाल और उन्हीं की पुत्रवधु कृष्णा गौर के महापौर रहते हुए उन्होंने नगर निगम के नाम एक नई तहरीर लिखी थी। भोपाल से इंदौर एकेवीएन, नगर निगम और इंदौर जिला प्रशासन के साथ पारी खेली और नए आयाम स्थापित किए। बार-बार का शहर स्वच्छता अवार्ड भी इंदौर के नाम करने की शुरुआत भी मनीष सिंह के कार्यकाल से ही शुरु हुआ है। भोपाल मेट्रो से लेकर जनसंपर्क विभाग की कई उपलब्धियां भी मनीष सिंह के नाम से ही जानी जाती हैं। उनका दोबारा जनसंपर्क विभाग में लौटना किसी नए कीर्तिमान से जोड़ा जा रहा है।

लोगों में उत्साह भी, उमंग भी

जनसंपर्क संचालनालय के नए मुखिया को लेकर विभाग से जुड़े लोगों में उत्साह बना हुआ है। विभिन्न विभागों में सेवाओं के दौरान लोगों से सतत और गहरे संबंधों को तलाशा जाने लगा है। मनीष सिंह की नई आमद से लोग उत्साह में इसीलिए हैं कि वे इस अधिकारी से बिना किसी व्यवधान के अपनी समस्या का समाधान मांगने आसानी से पहुंच पाएंगे।

सागर में ऐतिहासिक सिविल लाइन चौराहा अब ‘परशुराम चौराहा’, 35 फीट ऊँची प्रतिमा स्थापना का भूमिपूजन

सागर। शहर के कैंट और नगर निगम क्षेत्र को जोड़ने वाले ऐतिहासिक सिविल लाइन चौराहे का नाम अब बदलकर परशुराम चौराहा कर दिया गया है। अंग्रेजी शासनकाल की पहचान को समाप्त कर भगवान परशुराम के नाम पर चौराहे के नामकरण के साथ ही यहाँ सौंदर्यीकरण और भव्य प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

पूर्व में की गई घोषणा के अनुरूप सागर की महापौर संगीता सुशील तिवारी के नेतृत्व में चौराहे पर विधिवत भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर महापौर ने बताया कि चौराहे पर 35 फीट ऊँची भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसे विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में शामिल करने की योजना है।

महापौर संगीता तिवारी ने कहा कि “भगवान परशुराम शौर्य, तप और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनके नाम से चौराहे की पहचान सागर की सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सशक्त करेगी। किसी भी स्थान का नाम हमारी सोच, पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत होता है। हमारा प्रयास है कि विकास के साथ-साथ अपनी गौरवशाली परंपराओं को भी संजोया जाए।”

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नगर निगम परिषद से प्रतिमा स्थापना की स्वीकृति मिल चुकी है तथा आवश्यकता पड़ने पर सरकारी या निजी भूमि क्रय करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। महापौर ने इसे भगवान परशुराम के नाम पर किसी सार्वजनिक स्थल के नामकरण की ऐतिहासिक पहल बताया।

इस मौके पर विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि सिविल लाइन चौराहे का भगवान परशुराम के नाम पर नामकरण होना सागर के लिए गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा, “महापुरुष राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होते हैं। प्रतिमा स्थापना के लिए सरकारी अथवा निजी भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही सागर की पहाड़ियों पर भगवान शिव और हनुमान की प्रतिमा स्थापना को लेकर भी चर्चा की जाएगी।” विधायक ने प्रतिमा निर्माण हेतु निजी अथवा विधायक निधि से सहयोग देने की घोषणा की।

भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण समाज की यह लंबे समय से मांग थी और इसके पूर्ण होने पर उन्होंने महापौर व सभी जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने चौराहे पर भगवान परशुराम से संबंधित जानकारी वाली नाम-पट्टिका लगाए जाने की मांग भी रखी।

चौराहे के नाम परिवर्तन और भव्य प्रतिमा स्थापना की घोषणा के बाद पूरे शहर में उत्साह का वातावरण है। इसे सागर की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।