आजमगढ़: दलित चिंतक साहित्यकार की पुण्यतिथि पर साहित्य और समाज दर्शन राष्ट्रीय परिसंवाद पर विचार गोष्ठी का आयोजन
आजमगढ़, । प्रख्यात मार्क्सवादी दलित चिंतक और साहित्यकार डा.तुलसीराम की पुण्यतिथि पर आज हरिऔध कला केंद्र में 'डा.तुलसीराम का साहित्य और समाज-दर्शन' विषयक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस परिसंवाद में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं विचारक प्रो.दीपक मलिक ने कहा कि अपने लेखन के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक यथार्थ को तुलसीराम जी ने अभिव्यक्ति दी है। एक नये हिन्दुस्तान की परिकल्पना करते हुए उसमें बुद्ध, मार्क्स और अंबेडकर की आकांक्षाओं का समाज बनाने की रूपरेखा उन्होंने प्रस्तुत की है। वे चाहते थे कि हाशिए का समाज मुख्य धारा में आए उसकी विडम्बनाएँ खत्म हों। प्रो.मलिक ने कहा कि अपने आरम्भिक जीवन में डा.तुलसीराम ने अपार कष्ट,अपमान और वंचनाएँ झेलीं। लेकिन वे संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटे। उनका अथाह ज्ञान न सिर्फ दलित समाज के लिए हितकर था बल्कि वे सभी वर्गों को सही दिशा देने में कामयाब रहे। उन्होंने आत्मकथा लेखन के द्वारा सामाजिक चेतना और परिवर्तन की दिशा सुनिश्चित की। 'मुर्दहिया' जैसी आत्मकथा दलित विमर्श का व्यापक सन्दर्भ ग्रहण करता है। विशिष्ट अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय से आए वरिष्ठ आलोचक प्रो.सूरज बहादुर थापा ने कहा कि हिन्दी लेखन में आत्मकथा का विशेष महत्व नहीं था। लेकिन अस्सी के दशक में विमर्श की शुरुआत जब सहानुभूति बनाम स्वानुभूति से होती है तब सर्वाधिक महत्वपूर्ण लेखन आत्मकथा को ही माना गया। इसमें भी अन्य दलित आत्मकथाओं की तुलना में 'मुर्दहिया' का सबसे बड़ा पाठकीय दायरा है। बाद में जब इसका जब दूसरा संस्करण 'मणिकर्णिका' आया तो उसने इस दायरे को और सघन बनाया। वे बौद्ध दर्शन के साथ वेदांत दर्शन के भी विद्वान थे। भारतीय ज्ञान समाज की सभी धाराओं में उनका दखल था। हमारे समय के व्याख्याकार और सामाजिक यथार्थ के सच्चे निरूपक थे डा.तुलसीराम। अध्यक्षता करते हुए शिक्षक नेता हरिमंदिर पाण्डेय ने कहा कि डा.तुलसीराम ने नया समाज बनाने के लिए पहल की थी। वे बौद्धिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक नायक भी थे। कबीर की विरासत के साथ हाशिए के समाज को शक्ति देने के लिए उन्होंने साहित्य का रास्ता चुना। यह परिसंवाद 'स्मरण डा.तुलसीराम' का आयोजन प्रगतिशील लेखक संघ, इप्टा, इस्कफ, एटक, अ.भा.नौजवान सभा,भारतीय महिला सभा, प्रारंभिक शिक्षक समिति, लोकायन संस्कृति न्यास आदि के संयोजन में किया गया। कार्यक्रम के आरम्भ में स्वागत वक्तव्य डा.राम नारायण राम ने किया। विषय प्रवर्तन एवं संचालन डा.संजय श्रीवास्तव ने किया। अतिथियों का परिचय जितेंद्र हरि पाण्डेय ने और आभार बी.राम पूर्व जिला जज ने किया। आयोजन में विशेष रूप से पी.आर.गौतम, सरिता महेंद्र, जय प्रकाश नारायण, डा.उदयभान यादव, डा.राजेश यादव, बालेदीन यादव, डा.इंदु श्रीवास्तव, डा.जितेंद्र नूर, अशोक यादव, हरिगेन राम, रामाज्ञा यादव, राजनाथ राज, राम अवध यादव सहित बड़ी तादाद में लोग उपस्थित थे।
11 hours ago
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