बाबूलाल मरांडी का आरोप: झारखंड में धान खरीद के नाम पर बड़ा घोटाला; फर्जी किसानों के जरिए हो रही लूट"
राँची: झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य में धान खरीद की धीमी प्रक्रिया और कथित भ्रष्टाचार को लेकर हेमंत सरकार को आड़े हाथों लिया है। मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में श्री मरांडी ने कहा कि सरकार "गाँव की सरकार" होने का दावा तो करती है, लेकिन हकीकत में गाँवों की रीढ़ यानी 'किसान' आज सबसे ज्यादा लाचार है।
आँकड़ों के जरिए सरकार को घेरा
मरांडी ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि धान खरीद का लक्ष्य अब तक कोसों दूर है:
पंजीकृत किसान: राज्य में 2,79,000 किसान पंजीकृत हैं, लेकिन मात्र 35,547 किसानों से ही धान खरीदा गया है।
खरीद का लक्ष्य: सरकार ने 60 लाख क्विंटल का लक्ष्य रखा था, लेकिन दो महीने बाद भी केवल 19,80,216 क्विंटल (लगभग एक तिहाई) की ही खरीदारी हो पाई है।
"दलालों और बिचौलियों की भरी जा रही तिजोरी"
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर धान खरीद में देरी कर रही है।
"सीमांत किसान मार्च तक धान घर में नहीं रख सकता, उसे पैसों की तुरंत जरूरत होती है। सरकार उसे ₹1500 में बिचौलियों को धान बेचने पर मजबूर कर रही है। बाद में वही बिचौलिया सरकार को धान बेचेगा और ₹2400 के एमएसपी का लाभ उठाएगा। इस लूट का हिस्सा मुख्यमंत्री की तिजोरी तक जा रहा है।" - बाबूलाल मरांडी
एमएसपी और केंद्र का पैसा
मरांडी ने कहा कि चुनाव में ₹3200 एमएसपी का वादा करने वाली सरकार आज ₹2400 दे रही है। इसमें से भी ₹2300 केंद्र सरकार का अनुदान है और राज्य की भागीदारी मात्र ₹100 है। उन्होंने गुमला जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां फर्जी किसान बनाकर धान खरीद का मामला सदन में भी उठाया गया, लेकिन सरकार मौन साधे बैठी है।
प्रेस वार्ता में उपस्थिति
इस अवसर पर प्रदेश मंत्री सरोज सिंह और मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक भी उपस्थित थे। भाजपा ने मांग की है कि धान खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और वास्तविक किसानों को उनका हक दिया जाए।
















1 hour and 48 min ago
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