जमशेदपुर: अजीत महतो की कस्टोडियल डेथ मामले में NHRC की चौखट पर पहुँचा परिवार, स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग।
जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर अंतर्गत मानगो (गोकुल नगर बस्ती) के निवासी श्री अजीत महतो की पुलिस अभिरक्षा में हुई संदिग्ध मृत्यु का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुँच गया है। आयोग को भेजे गए पत्र में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस प्रकरण की स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग की गई है।
मामला और आरोप विदित हो कि दिनांक 30 दिसंबर 2025 को अजीत महतो की पुलिस हिरासत में मृत्यु हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद दो दिनों तक उन्हें अजीत से मिलने नहीं दिया गया। इसी अंतराल में अजीत की गर्भवती पत्नी ने एक कन्या को जन्म दिया, लेकिन पिता अपनी संतान का चेहरा देखने से पहले ही दुनिया छोड़ गया। परिजनों ने आशंका जताई है कि अजीत की मृत्यु पुलिसिया यातना के कारण हुई है।
पारदर्शिता पर सवाल शिकायत में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है कि बिना किसी निष्पक्ष जांच के, पुलिस ने महज एक अप्राकृतिक मृत्यु (UD Case) दर्ज की और आनन-फानन में परिजनों को ₹2,00,000 की राशि थमाकर सादे कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। इस प्रक्रिया के वैधानिक आधार पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
आयोग से मुख्य मांगें:
न्यायिक जांच: पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए।
विधिक कार्रवाई: दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो।
पुनर्वास: परिवार के एकमात्र आजीविका अर्जक की मृत्यु के बाद पीड़ित परिवार को न्यायोचित मुआवजा, पुनर्वास और सुरक्षा दी जाए।







Jan 05 2026, 20:48
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