चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद भी बीजेपी पर बरसा पैसा, प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने अकेले दिए 2180 करोड़
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15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक बताते हुए बंद करने का आदेश दिया था। अदालत का साफ कहना था कि लोकतंत्र में चंदे की गोपनीयता नहीं, बल्कि पारदर्शिता जरूरी है। हालांकि, इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद भी बारतीय जनता पार्टी पर पैसों की बरसात हो रही है।
कुल चंदे का 83 फीसदी बीजेपी के पास
इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद पहले वित्त वर्ष यानी 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्ट ने राजनीतिक पार्टियों को करोड़ों रुपए दान दिए। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कुल 4,276 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसमें से 83.6% यानी सबसे बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिला। यह पिछले साल के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा है।
कांग्रेस को मिले 299 करोड़ रुपए
कांग्रेस को इस रास्ते से 7.3% चंदा मिला, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 3.6% मिला। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को 299 करोड़ रुपए चंदा मिला। अन्य सभी पार्टियों के हिस्से में बाकी बचे 400 करोड़ रुपए आए।
किन ट्रस्टों से कितना मिला बीजेपी को?
2024-25 में बीजेपी को इलेक्टोरल ट्रस्ट से कुल 3,577.5 करोड़ रुपये मिले। इसमें से सबसे ज्यादा पैसा 'प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट' से आया, जो 2,180.7 करोड़ रुपये था। 'प्रोग्रेसिव ईटी' से 757.6 करोड़ रुपये, 'ए बी जनरल ईटी' से 460 करोड़ रुपये, 'न्यू डेमोक्रेटिक ईटी' से 150 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा 'हार्मनी ईटी' से 30.1 करोड़ रुपये, 'ट्रायम्फ ईटी' से 21 करोड़ रुपये, 'जयभारत ईटी' से 5 करोड़ रुपये, 'समाज ईटी' से 3 करोड़ रुपये, 'जन कल्याण ईटी' से 9.5 लाख रुपये और 'एन्जिगार्टिक ईटी' से 7.75 लाख रुपये मिले।
क्या है इलेक्टोरल ट्रस्ट
दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार चुनावी चंदे के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम लेकर आई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 में असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। अब कॉर्पोरेट कंपनियां चेक, DD या UPI के जरिए पार्टियों को डोनेशन दे सकती हैं। इसके साथ ही इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए भी चंदा दे सकती हैं। इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कोई कंपनी या फिर व्यक्ति एक ट्रस्ट को डोनेशन दे सकता है, जो आगे पार्टियों को डोनेट करता है





Dec 22 2025, 14:57
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