बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को लगा झटका, जमानत खारिज

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बांग्लादेश हिंसा मामले में गिरफ्तार हिंदू नेता चिन्मय कृष्णदास की जमानत अर्जी को चट्टोग्राम की अदालत ने खारिज कर दिया है। डेली स्टार की खबर के अनुसार इस्कॉन के पूर्व नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की जमानत याचिका को बांग्लादेश की चट्टोग्राम अदालत में सुनवाई के लिए लगाया गया था। मगर कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। मतलब साफ है कि चिन्मय दास को अभी और समय जेल में ही बिताना होगा। इससे पहले 11 दिसंबर को एक बांग्लादेश की एक अदालत ने दास की प्रारंभिक जमानत याचिका को प्रक्रिया में खामी के कारण खारिज कर दिया था।

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चिन्मय दास की तरफ से बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के 11 वकीलों ने पैरवी की> चिन्मय दास के मामले में आज एक सकारात्मक घटनाक्रम ये रहा कि चिन्मय दास के वकीलों को अपना पक्ष रखने का मौका मिला। पिछली दो सुनवाई में चिन्मय दास के वकीलों को कोर्ट में पेश नहीं होने दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी संत चिन्मय दास को राहत नहीं मिली।

उच्च न्यायालय में अपील करने की योजना

चिन्मय के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने मीडिया को बताया कि वे जमानत के लिए उच्च न्यायालय में अपील करने की योजना बना रहे हैं। सभी को उम्मीद थी कि नए साल में चिन्मय प्रभु को आजादी मिल जाएगी, लेकिन 42 दिन बाद भी उनकी जमानत आज सुनवाई में खारिज कर दी गई।

क्या हैं चिन्मय दास पर आरोप

पूर्व में इस्कॉन से जुड़े रहे दास के खिलाफ बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा ध्वज फहराने का आरोप है। इस मामले में उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद उनको ढाका के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया और कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद जेल भेज दिया गया। दास की गिरफ्तारी के बाद चटगांव में उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान हिंसा में चटगांव में एक वकील की मौत भी हो गई थी। ये मामला काफी ज्यादा चर्चा में रहा था।

यह पूरा मामला 25 अक्टूबर को चटगांव में बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भगवा ध्वज फहराने के आरोप से शुरू हुआ। मामला दर्ज होने के बाद चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद स्थिति तब बिगड़ी, जब 27 नवंबर को चटगांव कोर्ट से दास की जमानत खारिज होने के बाद उनके समर्थकों का प्रदर्शन हिंसक हो गया और इसमें एक वकील की मौत हो गई।

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के होटल के बाहर टेस्ला के साइबरट्रक में धमाका, एक की मौत, जानें क्या बोले एलन मस्क

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अमेरिका के न्यू ओर्लियंस में हुए आतंकी हमले के बाद अब ट्रंप के होटल के बाहर विस्फोट हुआ है। लास वेगास में ट्रंप इंटरनेशनल होटल के बाहर एक इलेक्ट्रिक वाहन में विस्फोट से एक व्यक्ति की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। ट्रंप इंटरनेशनल होटल के बाहर टेस्ला साइबरट्रक में विस्फोट हुआ है। ट्रंप के होटल के बाहर धमाके की यह घटना बुधवार को हुई है। पुलिस इस विस्फोट के कारणों की जांच कर रही है। ये घटना उसी दिन हुई है, जब अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स में एक ट्रक ने भीड़ को रौंदते हुए 15 लोगों को मार डाला है।

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नविनिर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि होटल में आग की घटना के बाद सभी मेहमानों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया था। उन्होंने लास वेगास फायर डिपार्टमेंट और स्थानीय पुलिस की त्वरित कार्रवाई के लिए उनका धन्यवाद व्यक्त किया। वहीं, टेस्ला प्रमुख और ट्रंप के करीबी एलन मस्क ने भी धमाके पर अपना बयान दिया है।

टेस्ला प्रमुख एलन मस्क ने 2 जनवरी को बताया कि लास वेगास में ट्रम्प इंटरनेशनल होटल के बाहर हुए साइबरट्रक धमाके का वाहन से कोई लेना-देना नहीं है। मस्क के मुताबिक, यह धमाका ट्रक के पिछले हिस्से में रखे गए ‘बम’ या ‘पटाखों’ के कारण हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हमने पुष्टि की है कि यह धमाका बहुत बड़े पटाखों या बम के कारण हुआ था। घटना के समय वाहन की सभी तकनीकी जानकारियां सामान्य थी।”

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लास वेगास के इस धमाके को जांच एजेंसी और पुलिस आतंकी हमले की तरह से भी देख रही हैं। जांच अधिकारी न्यू ऑरलियन्स में ट्रक से भीड़ को रौंदने और लास वेगास में धमाके की घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर रहे हैं। हालांकि अभी किसी नतीजे पर जांच नहीं पहुंची हैं।

लास वेगास के शेरिफ केविन मैकमहिल ने बताया कि इलेक्ट्रिक गाड़ी होटल के शीशे के गेट पर रुकी, जिसके बाद इसमें बड़ा विस्फोट हुआ और आग लग गई। मैकमहिल ने बताया कि साइबरट्रक के अंदर एक व्यक्ति को मृत पाया गया। इसके अलावा सात लोगों को चोटें आईं। हालांकि किसी को गंभीर चोट नहीं लगी है। उन्होंने बताया कि घटना के बाद होटल को खाली करा लिया गया है। मैकमहिल ने कहा कि अभी तक लास वेगास में हुए विस्फोट का इस्लामिक स्टेट समूह से संबंध का संकेत नहीं मिला है।

यह घटना न्यू ऑरलियन्स में न्यू ईयर के दिन एक अन्य हादसे के तुरंत बाद हुई, जहां एक व्यक्ति ने ट्रक भीड़ में घुसा दिया था। उसकी वहज से 15 लोगों की मौत हुई। लास वेगास के मामले ने और भी ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि यह ट्रम्प इंटरनेशनल होटल के पास हुई और धमाके के कारण साइबरट्रक से जुड़ा होने की आशंका जताई जा रही थी।

अमेरिका के न्‍यू ऑर्ल‍ियन्‍स हमले में 15 लोगों की जान लेने वाला आर्मी का पूर्व सैनिक, ISIS से जुड़े तार

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अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में नए साल का जश्न मना रहे लोगों की भीड़ पर आतंकी हमला हुआ। अधिकारियों ने बताया कि नरसंहार पर आमादा हमलावर ने भीड़ की ओर अपना वाहन मोड़ दिया और लोगों को रौंदते हुए निकल गया। रॉटर्स के मुताबिक अब तक 15 लोगों की मौत हो गई है और 35 घायल हैं। इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकी की पहचान कर ली गई है। इस आतंकी साजिश को लेकर अमेरिका की फेडरल जांच एजेंसी (एफबीआई) ने कई बड़े खुलासे किए हैं।

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संदिग्ध का नाम शम्सुद दीन जब्बार

न्यू ऑर्लियंस पुलिस ने अब हमलावर के बारे में कई जानकारी जारी की हैं। हमलावर की पहचान की पहचान 42 साल के शम्सुद दीन जब्बार के रूप में हुई है और वह अमेरिका में ही जन्मा है। हैरान करनी वाली बात ये है कि शम्सुद दीन जब्बार ने अमेरिका सेना में भी काम किया है। जांच एजेंसिया हमले के दूसरे पहलुओं की जांच कर रही हैं। एफबीआई को हमलावर का आईएसआईएस से भी लिंक मिला हैं, जिसके बाद अमेरिका में बढ़ती आईएसआईएस की पकड़ पर चिंता बढ़ गई है।

कैसे दिया हमले को अंजाम?

शम्सुद दीन जब्बार एक पिकअप ट्रक पर सवार होकर न्यू ऑर्लियंस के बॉर्बन स्ट्रीट पहुंचा। जहां उसने रास्ते में चल रही भीड़ पर ट्रक चढ़ा दिया, फिर गोलीबारी शुरू कर दी और पुलिस के साथ गोलीबारी में मारा गया। पुलिस के अनुसार, यह घटना स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 3:15 बजे फ्रेंच क्वार्टर के मध्य में घटी, जहां नए साल का जश्न मना रहे लोगों की भीड़ थी।

चश्मदीदों के मुताबिक जब्बार एक सफेद फोर्ड एफ-150 इलेक्ट्रिक पिकअप में आया और पैदल चलने वालों के एक ग्रुप में घुसा दिया, भीड़ को रौंदने के बाद वह बार निकला और पुलिस के साथ गोलीबारी में मारा गया। हमलावर के ट्रक से एक काले कलर का झंडा भी मिला है, जिसको आईएसआईएस का झंडा माना जा रहा है।

एफबीआई ने कहा हमले के पीछे अकेले जब्बार नहीं

न्यू ओर्लियंस हमले के बाद एफबीआई ने मामले की जांच की कमान अपने हाथ में संभाल ले ली है। हमले पर एफबीआई ने भी अपना बयान जारी किया है। एफबीआई एजेंट एलेथिया डंकन ने कहा कि हम यह नहीं मानते कि बॉर्बन स्ट्रीट हमले के लिए अकेले जब्बार पूरी तरह जिम्मेदार था। हम उसके ज्ञात सहयोगियों समेत अन्य सभी सुराग पर आक्रामकता से काम कर रहे हैं। इसलिए हमें जनता की मदद की जरूरत है। हम पूछ रहे हैं कि क्या पिछले 72 घंटों में किसी ने जब्बार से कोई बातचीत की है, तो हमसे संपर्क करे। जिस किसी के पास इससे जुड़ी कोई जानकारी, वीडियो या तस्वीरें हैं, उसे एफबीआई से साझा करें।

जो बाइडेन ने जताया दुख

अमेरिका के न्यू ओर्लियंस पर नये साल के मौके पर हुए आतंकी हमले पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस हमले में मारे गए लोगों पर गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा, "...जो लोग न्यू ओर्लियंस के आतंकी हमले में मारे गए हैं और जो घायल हुए हैं, उन सभी लोगों के लिए आज शोक मना रहे परिवारों से मैं कहना चाहता हूं कि मैं भी उनके इस दुख में शामिल हूं। बाइडेन ने कहा कि पूरा राष्ट्र आपके साथ दुखी है। जो लोग घायल हुए हैं उम्मीद है कि वह भी आने वाले हफ्तों में ठीक हो जाएंगे। तो भी हम आपके साथ खड़े रहेंगे। बाइडेन ने कहा कि एफबीआई यह पता लगाने के लिए जांच कर रही है कि क्या हुआ, क्यों हुआ और क्या सार्वजनिक सुरक्षा को और कोई खतरा बना हुआ है।

मुंबई को दहलाने वाले तहव्वुर राणा को भारत लाया जाएगा! अमेरिकी कोर्ट ने दिया प्रत्यर्पण का आदेश

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26/11 के मुंबई हमलों में कथित भूमिका के लिए, तहव्वुर राणा को भारत लाया जा सकता है। अमेरिका की एक अदालत ने राणा के प्रत्यर्पण का आदेश दिया है। यह भारत के लिए एक बड़ी जीत है। अगस्त 2024 में अमेरिकी कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत उसे भारत भेजने को मंजूरी दे दी थी। अब राणा को जल्द भारत लाने की मुहिम तेज हो गई है।

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अमेरिका की कोर्ट ने मुंबई हमले में शामिल तहव्वुर राणा को भारत को प्रत्यर्पण नहीं करने वाली याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि भारत ने राणा के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किए हैं। मुंबई पुलिस ने 26/11 हमले के मामले में राणा का नाम आरोपपत्र में शामिल किया था। उस पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य होने का आरोप है। आरोप पत्र में कहा गया कि तहव्वुर राणा ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली की मदद की, जिसने हमले के लिए मुंबई में ठिकानों की रेकी की थी।

कोर्ट ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि में नॉन बिस आइडम है। यह तब लागू होता है जब आरोपी को पहले ही उसी अपराध के लिए दोषी ठहराया जा चुका हो या बरी कर दिया गया हो। भारत में राणा के खिलाफ लगाए गए आरोप अमेरिकी अदालतों में लगाए गए आरोपों से अलग हैं, इसलिए इडेम अपवाद में गैर-बीआईएस लागू नहीं होता है।

अदालती सुनवाई के दौरान, अमेरिकी सरकार के वकीलों ने तर्क दिया कि राणा को पता था कि उसका बचपन का दोस्त डेविड हेडली लश्कर-ए-तैयबा में शामिल है। हेडली एक पाकिस्तानी-अमेरिकी है। राणा ने हेडली की मदद की और उसे अपनी गतिविधियों के लिए सुरक्षा प्रदान की। इस तरह, राणा आतंकवादी संगठन और उसके सहयोगियों का समर्थन कर रहा था। राणा को हेडली की बैठकों, चर्चा की गई बातों और हमलों की योजना के बारे में पता था। उसे कुछ लक्ष्यों के बारे में भी पता था। अमेरिकी सरकार ने कहा कि राणा साजिश का हिस्सा था। उसने एक आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने का काम किया था।

राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई बिजनेसमैन है। भारतीय जांच एजेंसी 2008 में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए 26/11 के हमलों में उसकी भूमिका की जांच कर रही है। राणा को अमेरिका में भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध पर गिरफ्तार किया गया था।

क्या साथ आएंगे शरद पवार-अजित पवार, क्यों जागीं उम्मीदें?

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महाराष्ट्र की सियासत में चाचा भतीजे की जोड़ी खूब चर्चा में रहती है। एक बार फिर पवार फैमिली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। महाराष्ट्र की राजनीति में वैसे भी असंभावनाओं से भरी रही है। इस बीच शरद पवार और अजित पवार में सुलह की भी संभावना जताई जा रही है। अब सवाल है कि क्या शरद पवार और अजित पवार क्या साथ आएंगे?

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अजित पवार की मां की क्या है आशा

दरअसल, एनसीपी चीफ और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मां आशताबाई की इच्छा तो कुछ ऐसी ही है. अजित पवार की मां आशताबाई ने अपने बेटे अजित और अपने देवर शरद पवार के फिर से एक होने की इच्छा जताई है। उन्होंने नए साल के मौके पर बुधवार को विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पंढरपुर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैंने कामना की है कि पवार परिवार के भीतर मतभेद जल्द से जल्द खत्म हो जाएं। मुझे उम्मीद है कि पांडुरंग मेरी प्रार्थना जरूर सुनेंगे।’

अजित पवार की मां की की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब 2023 में एनसीपी और परिवार में विभाजन के बाद चाचा और भतीजे के बीच सुलह की अटकलें लगातार लगाई जा रही हैं।

प्रफुल्ल पटेल ने क्या कहा

इसके साथ ही एनसीपी अजित गुट के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने एनसीपी एसपी प्रमुख शरद पवार को अपना देवता बताया है। उनके इस कथन ने महाराष्ट्र की सियासी हलचल तेज कर दी है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एनसीपी अजित गुट के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "शरद पवार हमारे देवता हैं। हम उनका बहुत सम्मान करते हैं। अगर पवार परिवार एक साथ आता है, तो हमें बेहद खुशी होगी। मैं खुद को पवार परिवार का सदस्य मानता हूं।"

कई लोग चाहते हैं एक साथ आएं चाचा- भतीजे

प्रफुल्ल पटेल के अलावा एनसीपी विधायक नरहरि झिरवाल ने भी यही बात दोहराते हुए कहा, "शरद पवार साहब को छोड़कर जाना अजीब लगा। कई लोग ऐसा ही महसूस करते हैं। अब मैं उनके पास जाऊंगा और उनसे (अजीत पवार से) एक साथ आने का आग्रह करूंगा। शरद पवार समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के लिए लगातार काम कर रहे हैं।"

क्यों अहम है दोनों का साथ आना?

महाराष्ट्र की सियासत में पवार फैमिली का दबदबा रहा है। हालांकि, जब से एनसीपी में टूट हुई है, तब से शरद पवार की चमक फिकी ही पड़ी है। अजित पवार और शरद पवार के बीच सुलह की अपील महाराष्ट्र की सियासत में पवार फैमिली के प्रभाव को दर्शाती है। एक ओर जहां शरद इंडिया गठबंधन में एक बड़े नेता बने हुए हैं, वहीं अजित पवार के भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदल कर रख दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या शरद पवार और अजित पवार साथ आते हैं या नहीं।

शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को चुनाव आयोग से बड़ी राहत, लड़ सकेगी चुनाव

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बांग्‍लादेश में बीते अगस्त माह में तख्तापलट हो गया। इसके बाद देश में मोहम्‍मद यूनुस की अंतरिम सरकार आई। शेख हसीना के पतन के बाद बांग्लादेश की जनता के साथ-साथ पूरी दुनिया को बांग्लादेश के नई सरकार के लिए होने वाले चुनावों का इंतजार है। शेख हसीना के देश छोड़न के बाद ये कहा जा रहा है कि उनका राजनीतिक करियर खत्म हो गया है।मोहम्मद यूनुस के एक सलाहकार ने यह भी कह दिया था कि वो हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोकने की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच शेख हसीना को चुनाव आयोग से बड़ी राहत मिली है। बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने कहा, ‘अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कोई कानूनी बाधा नहीं है।

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बांग्‍लादेश छोड़न के बाद शेख हसीना पर एक-एक कर हसीना पर 100 से ज्‍यादा मुकदमे ठोक दिए गए। यही नहीं, मोहम्‍मद यूनुस के एक सलाहाकार ने यह कह दिया कि वो हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोकने की तैयारी कर रहे हैं। एक के बाद एक याचिकाएं भी बांग्‍लादेश की कोर्ट में लगा दी गई ताकि कानूनी रूप से अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोका जा सके। हालांकि, अब शेख हसीना को बांग्‍लादेश के चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि आवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कोई कानूनी बाधा नहीं है।

इससे पहले खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की तरफ से भी कहा गया था कि वो चाहते हैं कि अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से रोक नहीं लगाई जाए। हालांकि वो शेख हसीना और उनकी पार्टी के बड़े नेताओं पर एक्‍शन में पक्ष में जरूर हैं। बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने आवामी लीग की भागीदारी के बारे में चिंताओं पर बात करते हुए चटगांव में कहा, “यह मुख्य रूप से एक राजनीतिक मामला है। कुछ व्यक्तियों ने आवामी लीग को भाग लेने से रोकने के लिए अदालती आदेश की मांग करते हुए मुकदमे दायर किए हैं। अगर अदालत ऐसा कोई फैसला सुनाती है, तो हम उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे। अन्यथा, यह एक राजनीतिक निर्णय है।’

बता दें कि बांग्लादेश के अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस 2025 के अंत में या 2026 की पहली छमाही में संसदीय चुनाव कराने की योजना बना रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक चुनावों के रोडमैप की जानकारी देते हुए, यूनुस ने कहा कि चुनावों की समयसीमा चुनाव सुधार आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करती है, लेकिन 2025 के अंत तक चुनाव कराना संभव हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में पाकिस्तान का दो साल का कार्यकाल शुरू

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के कई सदस्य बुधवार (1 जनवरी) से बदलने जा रहे हैं। इसमें कुछ गैर-स्थायी सदस्यों की एंट्री हो रही है, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। आज यानी कि 1 जनवरी 2025 से पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अस्थायी सदस्य के रूप में अपना दो साल का कार्यकाल शुरू किया। जून में अस्थायी सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद, पाकिस्तान सुरक्षा परिषद में एशिया-प्रशांत देशों के लिए दो सीटों में से एक पर जापान की जगह ली है और दो साल तक यह सीट पर रहेगा।

इस दौरान राजदूत मुनीर अकरम ने कहा किकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल दुनिया के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने में ‘सक्रिय और रचनात्मक’ भूमिका निभाएगा।अकरम ने सरकारी समाचार एजेंसी एपीपी (एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान) से कहा कि सुरक्षा परिषद में हमारी उपस्थिति महसूस की जाएगी. पाकिस्तान 2025-26 में सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रहेगा.

अकरम ने कहा कि हम ऐसे समय में परिषद के सदस्य बन रहे हैं, जब वैश्विक राजनीति उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका और अन्य जगहों पर युद्ध चल रहे हैं और हथियारों की होड़ तेजी से बढ़ रही है. पाकिस्तान ने जापान का स्थान लिया है, जो वर्तमान में सुरक्षा परिषद में एशियाई सीट पर है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापित करने और बनाए रखने के लिए एक प्राथमिक साधन है.

जून में मिली थी अस्थायी सदस्यता

पाकिस्तान को आठवीं बार 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता मिली है। जून में पाकिस्तान को बहुमत से अस्थायी सदस्य चुना गया था। 193 सदस्यीय महासभा में पाकिस्तान को 182 वोट मिले थे, जो आवश्यक 124 वोटों से कहीं अधिक थे।

पाकिस्तान इससे पहले 2012-13, 2003-04, 1993-94, 1983-84, 1976-77, 1968-69 और 1952-53 में सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है।

आगरा के एक व्यक्ति ने होटल में मां और 4 बहनों की हत्या, आरोपी ने वीडियो में बताई वजह

लखनऊ में बुधवार को एक भयावह घटना हुई, जिसमें 24 वर्षीय अरशद नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर एक होटल में अपनी मां और चार बहनों की हत्या कर दी। अपराध के बाद रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में, अरशद ने दावा किया कि उसने अपने परिवार को “बचाने” के लिए ऐसा किया, उसने आरोप लगाया कि आगरा में उनकी संपत्ति पर पड़ोसियों की नज़र थी, जिन्होंने हैदराबाद में उसकी बहनों को बेचने की भी योजना बनाई थी।

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हमारे पड़ोसी हमारी संपत्ति पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे थे और हैदराबाद में मेरी बहनों को बेचने की योजना बना रहे थे। मैं ऐसा नहीं होने दे सकता था,” अरशद ने वीडियो में कथित तौर पर कहा, जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जा रहा है। मूल रूप से आगरा का रहने वाला यह परिवार 30 दिसंबर से होटल में रह रहा था, और कथित तौर पर नए साल का जश्न मनाने के लिए उत्तर प्रदेश की राजधानी गया था। उस दुर्भाग्यपूर्ण रात को, अरशद ने कथित तौर पर अपने परिवार को नशीले पदार्थों से युक्त भोजन और शराब परोसी। कुछ घंटों बाद, उसने कथित तौर पर उन्हें मार डाला - कुछ को गला घोंटकर, जबकि अन्य को ब्लेड से। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों में उसकी मां अस्मा और उसकी बहनें शामिल हैं, जिनकी उम्र क्रमशः 9, 16, 18 और 19 साल है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रवीना त्यागी ने कहा, "आज, होटल शरण जीत के एक कमरे में पांच लोगों के शव मिले। स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और आगरा निवासी लगभग 24 वर्षीय अरशद नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया।" प्रारंभिक पूछताछ में ही उसने बताया कि पारिवारिक विवाद के चलते उसने अपनी चार बहनों और मां की हत्या कर दी। आगे की पूछताछ की जा रही है", मिडियाकर्मियों से बात करते हुए, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध और मुख्यालय) बबलू कुमार ने कहा, "पांच लोगों के शव मिले हैं - चार लड़कियां और उनकी मां। होटल के कर्मचारियों ने कहा कि वे 30 दिसंबर को यहां आए थे, और उनके भाई और पिता भी वहां थे। मामले की आगे की जांच की जा रही है।"

उन्होंने कहा, "बरामद किए गए शवों में से कुछ पर चोटों के निशान हैं - एक की कलाई पर, दूसरे की गर्दन पर। इन निशानों, गवाहों के बयानों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर, हम मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।" अरशद ने वीडियो रिकॉर्ड किया अपनी मां और बहनों की हत्या करने के बाद, अरशद ने अपराध का वीडियो बनाया और इसे ऑनलाइन साझा किया। वीडियो में, अरशद अपनी मां और बहनों के बेजान शवों को दिखाता है और बताता है कि उसने उन्हें कैसे मारा।

रिपोर्ट के अनुसार, अरशद अपने परिवार को अजमेर घुमाने ले गया और फिर लखनऊ लौटकर होटल में ठहरने लगा। उस रात देर से उसने कथित तौर पर अपनी मां का दुपट्टे से गला घोंट दिया और उसे चुप कराने के लिए उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। फिर उसने अपनी बहनों के साथ भी यही तरीका अपनाया, उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और ब्लेड से उनकी कलाई काट दी। अरशद ने दावा किया कि आगरा में उसके समुदाय के लोगों द्वारा लगातार दबाव और उत्पीड़न के कारण उसने यह जघन्य कृत्य किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके पिता बदर ने हत्या में उसकी मदद की। हत्याओं को अंजाम देने के बाद, अरशद ने कथित तौर पर अपने पिता को रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया और फिर पुलिस स्टेशन जाकर अपना अपराध कबूल कर लिया। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए ब्लेड और दुपट्टे सहित हत्या के हथियार बरामद किए। इस बीच, अरशद के पिता फरार हैं। पुलिस उनके ठिकाने का पता लगाने और उन्हें न्याय के कठघरे में लाने के लिए रेलवे स्टेशन से सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच कर रही है।

मनमोहन सिंह का स्मारक बनाने की प्रक्रिया शुरू, केंद्र सरकार ने परिवार को दिए ये विकल्प

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर को निधन हुआ था। अब उनके स्मारक को लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक को लेकर उनके परिवार को कुछ विकल्प दिए हैं। इन विकल्पों में राष्ट्रीय स्मृति स्थल समेत कुछ अन्य स्थानों का नाम शामिल है, जहां उनका स्मारक बनाए जाने की संभावना है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, परिवार की ओर से स्मारक की जगह चुनने के बाद, ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। यह ट्रस्ट स्मारक निर्माण की योजना और उसके बाद की सभी गतिविधियों की देखरेख करेगा। परिवार की तरफ से अभी तक किसी खास जगह को लेकर फैसला नहीं लिया गया है। स्मारक की जमीन के लिए ट्रस्ट आवेदन करेगा। जमीन आवंटन के बाद सीपीडब्ल्यूडी के साथ एमओयू पर दस्तखत होंगे। इसके बाद ही स्मारक बनाने का काम शुरू हो सकेगा।

इन जगहों पर बनाया जा सकता है स्मारक

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था। इसके बाद उनके स्मारक को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार ने मांग की थी। सूत्रों के अनुसार, मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए राजघाट, राष्ट्रीय स्मृति स्थल या किसान घाट के पास एक से डेढ़ एकड़ जमीन दी जा सकती है।

शहरी विकास मंत्रालय ने किया दौरा

शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने स्मारक के लिए राजघाट और उसके आसपास के इलाके का दौरा किया है। यह भी संभावना है कि डॉ मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए नेहरू-गांधी परिवार के नेताओं की समाधि के पास जगह दी जाए। यहां पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी की समाधि है।

बता दें कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्मारक को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है। बीते दिनोंकांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अंत्येष्टि और स्मारक के लिए स्थान नहीं ढूंढ पाना भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री का जानबूझकर किया गया अपमान है। इस पर बीजेपी की ओर से जवाब भी दिया गया था। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि कोई अपमान नहीं किया गया।

ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के 26वें स्थापना दिवस पर शायरी के माध्यम से जताया अपना प्यार और समर्पण!

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में तमाम कार्यक्रमों के जरिए अपना 26वां स्थापना दिवस मना रही है. पार्टी की स्थापना एक जनवरी 1998 को हुई थी. इस बीच ममता बनर्जी ने एक शायरी ट्वीट करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई है. उन्होंने कहा, ‘रोशनी चांद से होती है सितारों से नहीं, मोहब्बत तृणमूल कांग्रेस से होती है, और किसी से नहीं.’

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सीएम ममता बनर्जी ने आगे लिखा, ‘तृणमूल कांग्रेस के स्थापना दिवस पर मैं अपने परिवार के हर सदस्य का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं. पिछले दो दशकों में हर विरोध, हर जीत और यहां तक कि हर चुनौती ने हमारे मूल विश्वास की पुष्टि की है. ये विश्वास है- राजनीति सत्ता के बारे में नहीं बल्कि सेवा के बारे में है. जब हम इस मील के पत्थर का जश्न मना रहे हैं, तो मैं हर तृणमूल सिपाही से लोगों के लिए लड़ने की अपनी प्रतिज्ञा को नवीनीकृत करने का आग्रह करती हूं और याद रखें कि हमारी पार्टी की आत्मा मां, माटी, मानुष के लोकाचार में निहित है.

वहीं, उन्होंने नए साल की शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘जैसे-जैसे हम 2025 में कदम रख रहे हैं, मेरा दिल हमें मिले प्यार, साथ मिलकर सामना की गई चुनौतियों और इस दौरान सीखे गए अमूल्य सबक के लिए आभार से भर गया है. आइए यह नया साल हमें उद्देश्य की नई भावना, नकारात्मकता को दूर करने की बुद्धि और सामूहिक प्रगति की दिशा में काम करने के दृढ़ संकल्प से भर दे. आइए हम न्याय के लिए दृढ़ता से खड़े होने और कम भाग्यशाली लोगों के उत्थान के लिए अपना हाथ बढ़ाने का संकल्प लें. आपको और आपके प्रियजनों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.’

2008 से टीएमसी ने दिखाई अपनी पावर

तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1998 में हुई थी. उस समय युवा कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने महसूस किया था कि कांग्रेस बंगाल से सीपीएम को हटाने के लिए कोई आंदोलन नहीं करेगी. तृणमूल कांग्रेस ने सीपीएम के खिलाफ लगातार आंदोलन चलाया. 2008 में पार्टी ने पंचायत चुनाव में दो जिला परिषदों यानी दक्षिण 24-परगना और पूर्वी मिदनापुर पर जीत हासिल की. ​​2009 में पार्टी ने लोकसभा चुनाव में 42 में से 18 सीटें जीतीं. 2010 में उसने कोलकाता नगर निगम चुनाव जीता और आखिरकार 2011 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की और बंगाल में सीपीएम के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के शासन को समाप्त कर दिया. तब से सीपीएम बंगाल की राजनीति में कोई सेंध लगाने में विफल रही है. 2021 के विधानसभा चुनाव में वह एक भी सीट जीतने में विफल रही.