पीएम मोदी ने शिंकुन ला सुरंग परियोजना का पहला विस्फोट किया, जानें चीन-पाक के खिलाफ टनल का सामरिक महत्व?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25वें कारगिल विजय दिसव के अवसर पर द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक पर कारगिल युद्ध के नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी वर्चुअल माध्यम से शिंकुन ला सुरंग परियोजना का पहला विस्फोट किया। यह सुंरग लद्दाख को हर मौसम में संपर्क प्रदान करेगी। इस सुरंग परियोजना में 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल भी शामिल है, जिसका निर्माण निमू-पदुम-दारचा रोड पर लगभग 15,800 फुट की ऊंचाई पर किया जाएगा। इससे लेह को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान की जा सकेगी। यह दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग होगी।शिंकुन ला सुरंग न केवल हमारे सशस्त्र बलों और उपकरणों की तेज व कुशल आवाजाही सुनिश्चित करेगी, बल्कि लद्दाख में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देगी।

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सेना को हर मौसम में एलएसी पर देगा एक्सेस

शिंकुन ला टनल सेना के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण है। यह सेना को हर मौसम में एलएसी पर एक्सेस देगा। साथ ही चीन के किसी भी नापाक हरकत को मुंहतोड़ जवाव देने में भारतीय सेना की मदद करेगा। अगर इस टनल का निर्माण होता है तो लद्दाख में सालों भर सुचारु रूप से आवाजाही हो सकेगी और सेना को हथियार गोला बरूद और उनके गाड़ियां आराम से आ जा सकेगी। 

सुरंग पर तोप और मिसाइल का भी असर नहीं होगा

शिंकुन ला टनल रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। इस टनल के निर्माण से लद्दाख जाने के लिए सेना को करीब 100 की दूरी कम तय करनी पड़ेगी।निर्माण के बाद शिंकुन ला चीन की 15590 फीट की ऊंचाई पर बनी सुरंग को पीछे छोड़ देगी और दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग बन जाएगी। बड़ी बात यह है कि इस सुरंग पर तोप और मिसाइल का भी असर नहीं होगा।

लद्दाख में व्यापार, पर्यटन और विकास को मिलेगा बढ़ावा

शिंकुन ला सुरंग न केवल हमारे सशस्त्र बलों और उपकरणों की तेज और कुशल आवाजाही सुनिश्चित करेगी बल्कि लद्दाख में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देगी। यह सुरंग हिमाचल प्रदेश में लाहौल घाटी को लद्दाख में ज़ांस्कर घाटी से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेगी। यह लद्दाख में व्यापार, पर्यटन और विकास को बढ़ावा देगा, नए अवसर लाएगा और लोगों की आजीविका में भी सुधार करेगा।

कारगिल विजय दिवसः जब भारतीय सेना के पराक्रम के सामने पाकिस्तान ने टेके थे घुटने, जानें वीरों की विजय गाथा

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देश आज कारगिल विजय दिवस मना रहा है। हर साल 26 जुलाई को भारत में करगिल विजय दिवस मनाया जाता है। 25 साल पहले आज ही के दिन भारत ने पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त दी थी। करगिल युद्ध, भारतीय सेना की वीरता की दास्तान कहता है। 1999 का कारगिल युद्ध भारतीय सेना के पराक्रम, शौर्य एवं सर्वोच्च बलिदान की उत्कृष्ट मिसाल है। तो पाकिस्तान के लिए यह युद्ध उसकी नापाक सोच, गद्दारी, पीठ में छुरा घोंपने की उसकी पारंपरिक सोच को दर्शाता है।

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भारत के खिलाफ पाक की नापाक साजिश

पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ साजिश रचने का कोई भी मौका नहीं गंवाया है। साल 1999 में भी पाकिस्तान ने भारत में घुसपैठ की कोशिश की। सर्दियों के मौसम में इन इलाकों में तापमान -50 तक चला जाता है। इन इलाकों को खाली कर दिया जाता था। इसी का फायदा उठाकर पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की गई। उस समय तक करीब 23 हजार फीट ऊंचा यह ग्‍लेशियर पूरी तरह से निर्जन था। वहां पर भारतीय सेना की तैनाती भी नहीं थी। पाकिस्‍तान ने इस मौका का फायदा उठाया। इस घुसपैठ में पाकिस्तान की सेना ने भी मदद की। 3 मई 1999 ये वो तारीख है जब हिन्दुस्तान को इस घुसपैठ का पता चला। दरअसल कुछ स्थानीय चरवाहों ने भारतीय सेना के लोगों को इसके बारे में बताया। इसके बाद शुरू हुआ तनाव और संघर्ष 84 दिन चला। 

19 मई को हुई ऑपरेशन विजय की शुरुआत

19 मई वो तारीख थी जिस दिन कारगिल युद्ध की एक तौर पर आधिकारिक शुरुआत हुई। द्रास सेक्टर पर अपने इलाके को कब्जे में लेने के लिए इस ऑपरेशन की शुरुआत हुई। दुश्मन ऊंची चोटियों पर बैठा था। हमारी सेना को खड़ी चढ़ाई चढ़नी थी। उसके लिए दुश्मन के निशाने से बचना मुश्किल था। इसके बाद तोलोलिन पहाड़ी से लेकर टाइगर हिल तक हर पोस्ट पर हमारे शूरवीरों ने न सिर्फ कब्जा किया बल्कि पाकिस्तानी सैनिकों को मार खदेड़ा। 

दुनिया की सबसे ऊंची जगहों में से लड़े गए युद्धों में से एक

कारगिल का युद्ध दुनिया की सबसे ऊंची जगहों में से लड़े गए युद्धों में से एक था। यहां युद्ध लड़ना और पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर पहले से बैठे आतंकियों एवं घुसपैठियों को मार भगाना और चोटियों पर दोबारा काबिज होना आसान काम नहीं था। लेकिन भारतीय जवान हर बार कठिनाई पर भारी पड़े हैं। दुर्गम इलाके की बाधाओं और पर्याप्त सुविधाएं न होने के बावजूद भारतीय सेना दुश्मनों के खिलाफ खूब लड़ी। 

527 से ज्यादा जवानों ने दिया था बलिदान

मई-जुलाई 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में हिन्दुस्तान के 527 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे। इनके अलावा 1300 से ज्यादा जख्मी हो गए थे। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश फौजी 30 साल से कम उम्र के थे। वहीं शहीदों में से अकेले राजस्थान के 52 जवान थे। करीब 2 महीने की जंग के बाद 26 जुलाई 1999 को युद्ध समाप्ति हुई थी।

अब क्या “खेला” करने वालीं है ममता दीदी ? नीति आयोग की बैठक में होंगी शामिल, पीएम से मुलाकात का भी प्लान

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कब कौन सी चाल चल देंगी, ये कहना मुश्किल है। राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन की एक सबसे अहम साझेदार है टीएमसी। लेकिन, यह पार्टी अपनी स्थानीय राजनीतिक मजबूरी की वजह से इंडिया गठबंधन के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रही है। अब तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के 2 दांव ने इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पहला तो नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल होने की घोषणा और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मीटिंग की घोषणा।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी नीति आयोग की बैठक में शामिल हो रही है। गठबंधन के दूसरे मुख्यमंत्री नीति आयोग की इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री भी बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी बैठक में नहीं आ रहे हैं। इस तरह से विपक्ष शासित छह राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में शामिल न होने की घोषणा कर दी है। लेकिन ममता बैठक में शामिल होने जा रही है. बैठक 27 जुलाई को होनी है।

इससे पहले माना जा रहा था कि 27 जुलाई को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में बंगाल की मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगी। बैठक में ममता बैनर्जी क्यों शामिल हो रही हैं ये तो वे और उनकी पार्टी ही बता सकती है। लेकिन ये तो दिख रहा है कि उनके लिए इंडिया गठबंधन की कोई खास अहमियत नहीं है। पश्चिम बंगाल में उन्होंने एकला चलो का राग अलापा था। उनकी पार्टी टीडीपी अकेले ही पश्चिम बंगाल में लड़ी। यही नहीं टीडीपी मुखिया अपने भाषणों में लगातार बीजेपी के साथ कांग्रेस और लेफ्ट को बराबर का दुश्मन भी बताती रही।

पिछले साल ममता ने भी बहिष्कार किया था

यहां ये भी याद रखने वाली बात है कि पिछले साल भी नीति आयोग की बैठक में ममता बैनर्जी नहीं शामिल हुई थीं। 27 मई 2023 को हुई आयोग की बैठक में 11 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए थे। उस समय उन्होंने विपक्षी मुख्यमंत्रियों का साथ दिया था। 

पीएम मोदी के साथ अलग से बैठक प्रस्तावित

यही नहीं ममता का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अलग से भी बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक नीति आयोग की मीटिंग से पहले हो सकती है। बता दें कि गुरुवार से दिल्ली के तीन दिन के दौरे पर रहेंगी। राज्य सचिवालय के अंदरूनी सूत्रों ने बताया, “मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को एक पत्र भेजकर मुलाकात के लिए समय मांगा है।” सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रस्तावित बैठक का मुख्य एजेंडा विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्य सरकार को मिलने वाला लंबित केंद्रीय बकाया होगा।

‘इंडिया’ ब्लॉक ने नेताओं से करेंगी मुलाकात?

वहीं, अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि ममता बनर्जी अपनी यात्रा के दौरान विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक के अन्य दलों के नेताओं से या किसी गैर-भाजपा शासित राज्य के मुख्यमंत्री से मिलेंगी या नहीं। कोलकाता में पत्रकारों ने जब ममता बनर्जी से सवाल पूछा कि क्या दिल्ली दौरे पर वे सोनिया गांधी से भी मुलाकात करेंगी? इस पर बंगाल की सीएम ने कहा कि हर बार सबसे मिलना जरूरी नहीं है। सोनिया गांधी से आखिरी बार जुलाई 2023 में ममता बनर्जी की मुलाकात हुई थी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी अब तक ममता बनर्जी की कोई प्रस्तावित बैठक नहीं है। ममता हाल ही में लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से बुलाई गई इंडिया गठबंधन के दलों की बैठक में भी शामिल नहीं हुई थीं।

अमेरिका ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी, भारत के इन राज्यों में न जाने की दी सलाह

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अमेरिका ने अपने नागरिकों को भारत की यात्रा को लेकर एडवाइजरी जारी की है और खास राज्यों और क्षेत्रों में जाने को लेकर आगाह किया है। उसने अपने नागरिकों से जम्मू-कश्मीर, भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती क्षेत्र, मणिपुर और देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में नहीं जाने को कहा है। इसके पीछे आतंकवाद, नक्सलवाद जैसी वजहों के साथ-साथ रेप के मामलों को भी बताया गया है।

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क्या कहा गया है अमेरिका की ट्रैवल अडवाइजरी में?

अमेरिका ने भारत को लेकर अपने नागरिकों के लिए जारी ट्रैवल अडवाइजरी में कहा है, 'अपराध और आतंकवाद, नक्सलवाद के कारण भारत में अधिक सावधानी बरती जानी चाहिए। कुछ क्षेत्रों में जोखिम बढ़ गया है। कुल मिलाकर भारत को लेवल दो पर रखा गया है। लेकिन देश के कई हिस्सों को लेवल चार पर रखा गया है जैसे जम्मू और कश्मीर, भारत-पाक सीमा, मणिपुर और मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्से।' अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा, 'आतंकवाद और नागरिक अशांति के कारण केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (पूर्वी लद्दाख क्षेत्र और इसकी राजधानी लेह को छोड़कर), सशस्त्र संघर्ष की आशंका के कारण भारत-पाकिस्तान सीमा के 10 किलोमीटर के भीतर, नक्सलवाद, उग्रवाद के कारण मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों तथा हिंसा और अपराध के कारण मणिपुर की यात्रा ना करें।'

एडवाइजरी में कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार भारत में सबसे तेजी से बढ़ते अपराधों में से एक है। यौन उत्पीड़न जैसे हिंसक अपराध पर्यटक स्थलों और अन्य जगहों पर हुए हैं। आतंकवादी कभी भी हमला कर सकते हैं। वे पर्यटक स्थलों, परिवहन केंद्रों, बाजारों, शॉपिंग मॉल और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हैं।

विदेश विभाग का कहना है कि अमेरिकी सरकार के पास ग्रामीण क्षेत्रों में अमेरिकी नागरिकों को आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने की सीमित क्षमता है। ये क्षेत्र पूर्वी महाराष्ट्र और उत्तरी तेलंगाना से लेकर पश्चिमी पश्चिम बंगाल तक फैले हुए हैं। परामर्श में कहा गया है कि अमेरिकी सरकार के कर्मचारियों को इन जगहों की यात्रा करने के लिए खास इजाजत लेनी होगी।

विदेश विभाग ने यात्रा पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत में यात्रा करने वाले अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश राज्यों के साथ-साथ असम, मिजोरम, नगालैंड, मेघालय और त्रिपुरा के राजधानी शहरों के बाहर किसी भी क्षेत्र में जाने से पहले पूर्व अनुमति की आवश्यकता होगी।

दिल्ली में बदल गया है आम आदमी पार्टी का पता, केंद्र ने अलॉट किया नया ऑफिस*
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#aam_admi_party_office_address_change आबकारी नीति मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में होने के बीच आम आदमी पार्टी (आप) के लिए अच्छी खबर आई है।दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी को नया दफ्तर आवंटित कर दिया है। बंगला नंबर 1, रविशंकर शुक्ला लेन, नई दिल्ली अब आम आदमी पार्टी मुख्यालय का नया पता होगा।फिलहाल पार्टी का मुख्यालय 206, राउज़ एवेन्यू, नई दिल्ली में है। आम आदमी पार्टी का दफ्तर अभी जिस जगह पर है, उस जगह पर राउज एवेन्यू कोर्ट का एक्सटेंशन होना है। इसलिए पार्टी को यह दफ्तर खाली करने के लिए कहा गया था। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी की अपील पर केंद्र सरकार को निर्देश दिए गए थे कि सेंट्रल दिल्ली में उनको कार्यालय आवंटित किया जाए। अदालत के निर्देश के मुताबिक, केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी को दफ़्तर आवंटित कर दिया है। आम आदमी पार्टी को 206 राउज एवेन्यू का दफ्तर 2015 में आवंटित किया गया था, 2016 में आम आदमी पार्टी ने वहां अपना दफ्तर बनाया था। इस बीच ये जगह कोर्ट के विस्तार में आ गई थी। आम आदमी पार्टी को दक्षिणी दिल्ली में एक जगह देकर मौजूदा दफ्तर खाली करने के लिए कहा गया था,लेकिन आम आदमी पार्टी का आरोप था कि सभी राष्ट्रीय दलों का दफ्तर सेंट्रल दिल्ली में है और उनको साउथ दिल्ली में दफ्तर दिया जा रहा है। पार्टी की दलील पर कोर्ट ने केंद्र सरकार के L&DO (लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस) डिपार्टमेंट से पूछा था कि आम आदमी पार्टी को सेंट्रल दिल्ली में दफ्तर आवंटित क्यों नहीं किया जा सकता? केंद्र सरकार ने जिस पर कहा था कि फिलहाल कार्यालय के लिए आवंटित करने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कहा था कि आप 25 जुलाई तक आम आदमी पार्टी को दफ्तर के लिए स्थाई जगह आवंटित करने पर फैसला ले, इसी के चलते केंद्र सरकार ने यह जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट को दी। आम आदमी पार्टी का ये नया पता अभी अस्थायी है। मान्यता प्राप्त पार्टी को आफिस के लिए जगह दी जाती है, जिस पर पार्टी खुद दफ्तर बनाती है। जबतक जगह नहीं मिल जाती, दफ्तर नहीं बन जाता तब तक के लिए ये आम आमदी पार्टी का अस्थायी पता है।
राष्ट्रपति भवन के 'अशोक हॉल' और 'दरबार हॉल' के नाम बदले गए, जानें क्या होगा नया नाम

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राष्ट्रपति भवन के प्रतिष्ठित 'दरबार हॉल' और 'अशोक हॉल' का नाम बदल गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल और अशोक हॉल का नाम बदलने का आदेश जारी किया है। अब इन्हें ‘गणतंत्र मंडप’ और ‘अशोक मंडप’ के नाम से जाना जाएगा।

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राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इन्हें जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति भवन के माहौल को भारतीय सांस्कृति मूल्यों और लोकाचार के अनुरूप बनाने के निरंतर प्रयास किए गए। इसी क्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के दो प्रतिष्ठित हॉल 'दरबार हॉल' का नाम बदलकर 'गणतंत्र मंडप' और 'अशोक हॉल' का नाम बदलकर 'अशोक मंडप' किया है। 

बयान में आगे कहा गया, "दरबार हॉल राष्ट्रीय पुरस्कारों की प्रस्तुति जैसे महत्वपूर्ण समारोहों का स्थल है। दरबार शब्द का तात्पर्य भारतीय शासकों और अंग्रेजों की अदालतों और सभाओं से है। भारत के गणतंत्र बनने के बाद इसकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है। गणतंत्र मंडप की अवधारणा प्राचीन काल से भारतीय समाज में गहराई से निहित है, जिस वजह से आयोजन स्थल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप किया गया है।"

इसमें आगे कहा गया, "अशोक शब्द का अर्थ एक ऐसे व्यक्ति से है, जो सभी प्रकार दुखों से मुक्त है। इसके अलावा अशोक का तात्पर्य एकता और शांति-पूर्ण सह-अस्तित्व के प्रतीक सम्राट अशोक से है। बयान में आगे कहा गया, सारनाथ अशोक की राजधानी थी। यह शब्द अशोक वृक्ष को भी संदर्भित करता है, जिसका भारतीय धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ कला और संस्कृति में भी गहरा महत्व है। अशोक हॉल का नाम बदलकर अशोक मंडप करने से भाषा में एकरूपता आती है और अशोक शब्द प्रमुख मूल्यों को बरकरार रखते हुए अंग्रेजीकरण की छाप को भी दूर करता है।"

नाम बदलने पर प्रियंका गांधी का तंज

वहीं राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी किए गए इस आदेश पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तंज कसा है। प्रियंका ने कहा है कि भले ही यहां ‘दरबार’ की कोई अवधारणा नहीं है, लेकिन ‘शहंशाह’ की अवधारणा है। दरअसल कांग्रेस नेता ने इसके जरिए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने की कोशिश की है, इससे पहले भी वो पीएम को शहंशाह बता चुकी हैं।

अपनी ही पार्टी के सांसद पर रिजिजू ने उठाए सवाल, बोले-सदन की गरिमा के खिलाफ

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लोकसभा में भाजपा सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय की टिप्पणी पर गुरुवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी सदस्य इस मामले में सरकार तथा सदस्य से माफी मांगने की मांग कर रहे थे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर कहा कि कोई भी सदस्य अगर ऐसी टिप्पणी करता है, जो सदन की गरिमा के खिलाफ है, तो स्पीकर के पास उस पर उचित ऐक्शन लेने का अधिकार है। 

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लोकसभा में बुधवार को बीजेपी सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय की टिप्पणी पर आज भी सदन में जमकर हंगामा हुआ।पूरा विपक्ष बीजेपी सांसद और सरकार से माफी की मांग कर रहा था। इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू ने हालात संभालने की कोशिश की। उन्होंने कहा सदन में बोलते हुए कहा कि बीजेपी के सांसद ने भाषा का गलत इस्तेमाल किया है। हम लोग सब इस महान सदन के सदस्य हैं, कोई भी सदस्य ऐसी टिप्पणी करते हैं जिससे सदन की गरिमा को चोट पहुंचती है, ये सबके लिए अत्यंत दुखद घटना है। चाहे सत्ता पक्ष या विपक्ष का हो कोई भी सदस्य इस तरह की टिप्पणी करता है जिससे सदन की गरिमा को चोट पहुंचती है तो आप समय-समय में कार्रवाई करते हैं। उसको आप सदन की कार्रवाई से बाहर निकालते हैं बाकी अध्यक्ष के पास अधिकार है।

इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदस्यों को सदन की गरिमा को बढ़ाने वाली चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे शब्द सदन की कार्यवाही से हटा तो दिए जाते हैं, लेकिन सदस्यों को भी इसका ख्लाल रखा चाहिए कि वे ऐसे बयान न दें। उन्होंने कहा कि वह संबंधित सदस्य को चेतावनी दे चुके हैं। बिरला ने इसके साथ ही डायमंड हार्बर से तृणमूल के सांसद अभिषेक बनर्जी का नाम लिए बगैर कहा कि उनका एक और अनुरोध है कि कभी आसन से बहस और चुनौती देने का काम न करें। जितना सदन और आसन की गरिमा रहेगी, उतनी गरिमा आपकी भी बढ़ेगी। दरअसल, बुधवार को सदन में बनर्जी स्पीकर से उलझते दिखाई दिए थे।

अभिजीत गंगोपाध्याय ने क्या कहा था

पश्चिम बंगाल के तामलुक से भारतीय जनता पार्टी के सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय सदन में बजट पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए आर्थिक विषयों पर अपनी बात रख रहे थे। इस दौरान कुछ विपक्षी सदस्यों ने टीका-टिप्पणी की तो गंगोपाध्याय ने कहा कि ‘विद्वान सदस्यों को इस विषय के बारे में जानकारी नहीं है और उन्हें सीखना चाहिए।' इसी दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने ‘गोडसे' को लेकर कोई टिप्पणी की जिस पर पलटवार करते हुए गंगोपाध्याय ने उनके लिए एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया जिसका विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया। तब कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गंगोपाध्याय कहते सुने गए, ‘न आप गांधी को जानते हैं, ना ही गोडसे को जानते हैं।

*अनिल देशमुख का देवेंद्र फडणवीस पर बड़ा आरोप, बोले-मुझ पर एमवीए नेताओं को फंसाने का दबाव डाला

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महाराष्ट्र का सियासी पारा आए दिन चढ़ जाता है। अब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सूबे के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। देशमुख ने कहा कि तीन साल पहले 2021 में फडणवीस ने उन पर दबाव बनाया था। वह चाहते थे कि देशमुख महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के नेताओं के खिलाफ झूठे हलफनामे दायर करें। उनका मकसद एमवीए सरकार को गिराना था। देशमुख का कहना है कि उनके पास देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ पेन ड्राइव में कई सबूत हैं। अगर फडणवीस उन्हें चैलेंज करेंगे तो वह सबूतों का खुलासा कर देंगे।

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एनसीपी (शरद पवार) के वरिष्ठ नेता देशमुख ने कहा कि मुझे ईडी और सीबीआई जांच से मुक्ति दिलाने का वादा किया गया था। यह ऑफर फडणवीस के एक आदमी ने दिया था। मैंने खुद फडणवीस से फोन पर बात की थी। सही समय पर मैं सारी जानकारी सामने लाऊंगा। उन्होंने कहा कि फडणवीस का सहयोगी मुझसे कई बार मिला। उसने हमारे बीच फोन पर बातचीत करवाई। एक बार फडणवीस ने मुझसे कहा कि वह समीक्षा के लिए दस्तावेज भेज रहे हैं। मुझे बताया गया कि अगर अजीत पवार पर आरोप लगाना संभव नहीं है, तो मुझे ठाकरे और अनिल परब (शिवसेना) के खिलाफ बोलना चाहिए।

देवेंद्र फडणवीस ने आरोपों को किया खारिज

देशमुख के इन आरोपों पर देवेंद्र फडणवीस ने खारिज किया है। उन्होंने कहा, 'फूट से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने मुझे उनके बारे में कुछ ऑडियो टेप दिए हैं, जिसमें वह शरद पवार, उद्धव ठाकरे और सचिन वाजे के बारे में बात कर रहे हैं। यदि मुझ पर झूठे आरोप लगाए जाते हैं तो मेरे पास इस सबूत को सार्वजनिक करने के सिवा कोई विकल्प नहीं होगा।’ भाजपा नेता ने कहा था कि देशमुख उस मामले में बरी नहीं हुए हैं, जिसमें उनपर पुलिस अधिकारियों को 100 करोड़ रुपये जुटाने का निर्देश देने का आरोप है, वह बस जमानत पर बाहर हैं।

फडणवीस की चेतावनी पर देशमुख का पलटवार

भाजपा नेता फडणवीस की चेतावनी के बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता देशमुख ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, कल मैंने देवेंद्र फडणवीस के ऊपर आरोप लगाए थे कि तीन साल पहले देवेंद्र फडणवीस ने मुझ पर केंद्र शासन के जरिए दबाव डाला था और मुझसे उस समय उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, अजित पवार के खिलाफ झूठा आरोप लगाने के लिए कहा था। जो आरोप मैंने देवेंद्र फडणवीस पर लगाए थे कि उन्होंने मुझे झूठे आरोप में फंसाया, उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग मेरे पास है। अगर कोई मुझे चुनौती देता है तो मैं उसका खुलासा करूंगा। उन्होंने आगे कहा, कल देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि उनके पास मेरी कुछ वीडियो क्लिप हैं, जिसमें मैंने शरद पवार और उद्धव ठाकरे के बारे में बोला है। मेरा उनसे आह्वान है कि उनके पास जो भी मेरा वीडियो है, उसे जगजाहिर करना चाहिए।'

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

अनिल देशमुख के आरोपों पर महाराष्ट्र कांग्रेस चीफ नाना पटोले ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा,'जो अनिल देशमुख कह रहे हैं वो सच ही होगा। मोदी सरकार आने के बाद एजेंसियों का गलत उपयोग किया गया है। जो इनके साथ होते हैं, वहां एजेंसी कुछ नहीं करती हैं।फडणवीस के पास अगर कोई सबूत है तो उन्हें जारी करना चाहिए।

क्या जाएगी कंगना रनौत की सांसदी? याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

#himachal_high_court_issues_notice_to_kangana_ranaut

बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। दरअसल, कंगना की सांसदी के खिलाफ हिमाचल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसके बाद हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया है।हाई कोर्ट ने कंगना से 21 अगस्त तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में किन्नौर के एक निवासी द्वारा याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत को नोटिस जारी किया है। याचिका में मंडी से सांसद कंगना के निर्वाचन को रद्द करने का अनुरोध करते हुए दलील दी गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए उसके नामांकन पत्र को कथित रूप से गलत तरीके से खारिज कर दिया गया था। नोटिस जारी करते हुए न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल ने रनौत को 21 अगस्त तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता लायक राम नेगी ने कंगना के खिलाफ याचिका दायर की है। इसमें उसने कोर्ट से कंगना के चुनाव को रद्द करने की मांग की है। नायक फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के पूर्व कर्मचारी हैं। उन्होंने समय से पहले वीआरएस मिल गई थी। नेगी का कहना है कि वह चुनाव लड़ना चाहता था लेकिन उसके नामांकन पत्र को मंडी के चुनाव अधिकारी ने गलत तरीके से खारिज कर दिया गया था। नेगी की दलील है कि अगर उनका नामांकन पत्र स्वीकार कर लिया जाता तो वो जीत जाते। याचिका में लायक राम नेगी ने कोर्ट से अपील की है कि कंगना के चुनाव को रद्द कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने मंडी सीट पर दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।

कंगना ने लोकसभा चुनाव में हिमाचल के मंडी से जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को 74,755 वोट से हराया था। तीसरे नंबर पर बहुजन समाजवादी पार्टी के डॉ प्रकाश चंद्र भारद्वाज रहे थे। भारद्वाज को 4393 वोट मिले थे।

लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों का बजट के विरोध में प्रदर्शन, स्पीकर ने दी मर्यादा में रहने की नसीहत*
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संसद के मानसून सत्र में पेश हुए बजट के बाद बजट पर चर्चा का दूसरा दिन है। इसे लेकर सरकार पहले ही विपक्ष से सार्थक चर्चा की अपील कर चुका है। हालांकि, हालात उस तरह से बनते नहीं दिख रहे हैं। आज संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हो गई है। चौथे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने बजट 2024-25 को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बजट में भेदभाव को लेकर लोकसभा में विपक्षी सांसदों के हंगामे पर स्पीकर ने कहा कि सदन में मर्यादा में रहें, संसदीय परंपराओं का पालन करें। सदन की गरिमा बनाए रखें। आसन को चुनौती देने का काम नहीं करें।लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों को समझाते हुए कहा कि सांसद आसन से बहस या उसको चुनौती देने का काम कतई न करें। इससे सांसदों का भी सम्मान बढ़ेगा। इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया, "ये मॉनसून सत्र है और एक तरीके से ये बजट सत्र ही है। इस सत्र में जो बजट पेश किया गया, कल बजट पर चर्चा का पहला दिन था। देश देखना चाहता है कि बजट पर अच्छी चर्चा हो सार्थक चर्चा हो लेकिन कल विपक्ष के कुछ नेताओं ने जिस तरीके से बजट पर बात की जैसा भाषण दिया वो बजट सत्र की गरिमा को गिरा कर इन्होंने सदन का अपमान किया है। कल विपक्ष ने बजट पर कुछ नहीं कहा केवल राजनीति की है। दो चीजें विपक्ष ने कल की हैं, उन्होंने देश के जनादेश का अपमान किया है। विपक्ष के लोगों ने बजट के अच्छे प्रावधान का जिक्र ना करते हुए केवल गाली देने का काम किया है।