किसान आंदोलन को रोकने के लिए सीजेआई से लगाई गई गुहार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने लिखी चिठ्ठी

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किसान फिर एक बार एक बड़े जत्थे के साथ दिल्ली कूच कर रहे हैं। पिछली बार मोदी सरकार को किसानों के आगे झुकना पड़ा था और तीन कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था। एक साल के लंबे आंदोलन के बाद कृषि कानूनों को निरस्त करवाने में कामयाब रहे किसान एक बार फिर आंदोलन कर रहे हैं। पंजाब-हरियाणा के साथ ही कई और राज्यों के किसान आज दिल्ली कूच कर रहे हैं। किसानों के आंदोलन से एक बार फिर दिल्ली की रफ्तार थमने वाले है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने भारत के मुख्य न्यायधीश यानी सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को चिठ्ठी लिखकर किसान आंदोलन पर स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया है।

बार एसोसिएशन ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को लिखे पत्र में किसान आंदोलन में गलत उद्देश्यों से शामिल किसानों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। चिट्ठी में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में घुसकर समस्या खड़ी करने और लोगों के आम जनजीवन को प्रभावित करने वाले किसानों पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करे। इसके साथ ही इसमें सीजेआई चंद्रचूड़ से मांग की गई है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण आज जो वकील कोर्ट में पेश ना हो पाए, उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाए।

पत्र में कहा गया है कि किसानों के 2020-21 वाले आंदोलन के दौरान लोगों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इसके साथ ही इसमें दावा किया गया कि पिछले किसान आंदोलन की चलते कई लोगों की मौत भी हो गई थी। ऐसे में आज किसान दिल्ली की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसे आंदोलन में गलत उद्देश्य से शामिल किसानों पर स्वत संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाए।

अपनी मांगों को लेकर अड़े अन्नदाताःआज किसानों का दिल्ली चलो मार्च, किले में तब्दील हुई देश की राजधानी

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किसान एक बार फिर सड़कों पर हैं। सरकार के सामने अपनी मांगों को लेकर अन्नदाता अड़े हुए हैं।पंजाब और हरियाणा के किसानों ने राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शन की पूरी तैयारी कर ली है। किसान संगठन आज दिल्ली कूच करेंगे। वे अपनी मांगों के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।आंदोलन को देखते हुए दिल्ली के सभी बॉर्डर सील कर दिए गए हैं।अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ने एक एडवाइजरी जारी कर यात्रियों से ट्रैफिक जाम को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाने का आग्रह किया है।

किसान नेताओं को मनाने की कोशिश नाकाम

इससे पहले चंडीगढ़ में सोमवार देर रात किसान नेताओं को मनाने की कोशिश नाकाम रही। एमएसपी गारंटी, कर्ज माफी, स्वामीनाथन रिपोर्ट जैसी मांगों पर किसान अड़े हैं। मीटिंग के बाद किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि सरकार सिर्फ समय निकालना चाहती है। किसानों की मांगों पर सीरियस नहीं है। किसान नेता जगजीत सिंह ने कहा कि सरकार कॉरपोरेट घरानों के कर्जे तो माफ कर देती है..लेकिन किसानों की बात नहीं मानती है।वहीं सरकार की ओर से बातचीत करने वाले केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि देश के किसानों के हितों की चिंता सरकार को है।पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान नेताओं ने सोमवार शाम को केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की। बैठक पांच घंटे तक चली। बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, जो खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल शामिल हुए।

दिल्ली में एक महीने तक लगी रहेगी धारा 144

किसीनों के आंदोलन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया है। राष्ट्रीय राजधानी को छावनी में बदल दिया गया है। सोमवार से 30 दिन के लिए पूरी दिल्ली में धारा 144 लगा दी गई है। कुंडली-सिंघु, टीकरी और गाजीपुर समेत सभी सीमाओं की किलेबंदी कर दी गई है।

दिल्ली से लगने वाले सभी बॉर्डर सील

दिल्ली से लगने वाले हरियाणा बॉर्डर समेत सभी बॉर्डर को सील कर दिया गया है। दिल्ली के सिंधू बॉर्डर से लेकर गाजीपुर बॉर्डर तक नाकेबंदी की गई है। सिंधू बॉर्डर पर कंटीले चारों से फेंसिंग के साथ सीमेंट के भारी भरकम ब्लॉक्स लगाए गए हैं। कुरुक्षेत्र बॉर्डर पर पांच लेयर की बैरिकेंडिंग की गई है। टिकरी बॉर्डर पर भी कड़ा पहरा है।

विपक्षी दलों के गठबंधन “इंडिया” को एक और बड़ा झटका, जयंत चौधरी ने एनडीए में शामिल होने का किया एलान

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राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन को बड़ा झटका दिया है।जयंत चौधरी ने आखिरकार सोमवार को एनडीए में शामिल होने का एलान कर दिया है।रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि उन्होंने बहुत सोच-समझकर यह फैसला लिया है। जयंत चौधरी ने कहा कि उन्होंने यह फैसला सभी की भलाई को देखते हुए लिआ है। हालांकि, बहुत कम समय में हमें यह फैसला लेना पड़ा। हम लोगों के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं।

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एनडीए में शामिल होने के लेकर विधायकों की नाराजगी के सवाल पर जयंत चौधरी ने कहा, मैंने अपनी पार्टी के सभी एमएलए और कार्यकर्ताओं से बात करने के बाद यह फैसला लिया। इस फैसले के पीछे कोई बड़ी प्लानिंग नहीं थी। हम लोगों के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि एनडीए में शामिल होने के फैसले के पीछे कोई बड़ी प्लानिंग रही हो या फिर हम तैयार बैठे थे। चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से नवाजा गया तो हम सभी खुश हैं। बहुत बड़ा सम्मान है जो कि केवल हमारे परिवार और दल तक ही सीमित नहीं है. देश के कोने-कोने में रहने वाले हमारे जो किसान भाई है, नौजवान हैं, गरीब लोग हैं उनका भी सम्मान है।

यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जबकि तीन दिन पहले ही शुक्रवार को चौधरी चरण सिंह, जो कि आरएलडी चीफ के दादा हैं, को ‘भारत रत्न’ देने का ऐलान किया गया था।चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का ऐलान के ऐलान के बाद जयंत चौधरी ने ट्वीट करते हुए कहा था, दिल जीत लिया। एनडीए में जाने की बात पर कहा था कि आज किस मुंह से इन्हें इनकार करूं। इसके बाद से ही जयंत चौधरी को एनडीए के साथ हाथ मिलना पक्का माना जा रहा था।

रालोद प्रमुख चौधरी जयंत सिंह के एनडीए में शामिल होने से पश्चिमी यूपी के चुनावी समीकरण भी अब बदल जाएंगे। अब आगामी लोकसभा चुनाव में जाट वोट बैंक भी भाजपा की तरफ आता दिखाई देगा। अब इसके दो बड़े कारण हो गए हैं। पहले भाजपा सरकार ने किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा कर दी और अब रालोद प्रमुख चौधरी जयंत सिंह ने भी एनडीए में शामिल होने का एलान आधिकारिक तौर पर कर दिया है।

क्या बीजेपी में शामिल होंगे अशोक चव्हाण? राज्यसभा भेजे जानें की अटकलें

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लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अब ऐसी अटकलें हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की अटकलों के बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि अभी कुछ तय नहीं किया गया है। एक- दो दिन में अगले कदम के बारे में बता दूंगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार के बाद महाराष्ट्र में भी तो “खेला” नहीं होने वाला?

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बताया जा रहा है कि कांग्रेस से इस्तीफे के बाद अशोक चव्हाण भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं, अशोक चव्हाण ने इससे इन्कार किया है, हालांकि माना जा रहा है कि 15 फरवरी को वह अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम सकते हैं, 15 फरवरी को ही अमित शाह महाराष्ट्र के दौरे पर जा रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के बीजेपी में शामिल होने की संभावना को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम ने गति पकड़ ली है।चर्चा है कि अशोक चव्हाण को बीजेपी आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए टिकट दे सकती है।महाराष्ट्र की 6 राज्यसभा सीटों पर 27 फरवरी को चुनाव होना है। सीटों के लिए लिहाज से अगर बात करें तो बीजेपी के कुल तीन सदस्य संसद के उच्च सदन राज्यसभा भेजे जा सकते हैं।

वहीं, दावा किया जा रहा है कि चव्हाण के साथ तकरीबन 12 विधायक भी पार्टी को बाय-बाय कह सकते हैं।कयास लगाए जा रहे हैं कि अशोक चव्हाण के साथ कांग्रेस के कुछ और विधायक भी जा सकते हैं, लेकिन अशोक चव्हाण ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मैंने अभी तक किसी भी विधायक से बात नहीं की है। न कोई पार्टी ज्वाइन की है और न ही अभी तक कहीं जाने का फैसला लिया है, यह फैसला मेरा है। मेरी किसी को बदनाम करने की आदत नहीं है, मेरे पास अभी दो दिन का वक्त है, मैं ये तय करूंगा कि आखिर मुझे करना क्या है।

“डिप्टी सीएम का पद असंवैधानिक नहीं” उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति पर सवाल उठाने वाली याचिक को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में उपमुख्यमंत्री नियुक्त करने की प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को आज खारिज कर दिया है। अलग-अलग राज्यों में उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी, जिस पर आज कोर्ट ने बड़ी बात कही है।चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने ‘पब्लिक पॉलिटिकल पार्टी’ द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा, यह सिर्फ एक (पद का) नाम है और भले ही आप किसी को उपमुख्यमंत्री कहते हैं, इससे दर्जा नहीं बदलता।उप-मुख्यमंत्री भी मंत्री ही होता है।पद को कोई नाम दे देने से संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं होता है।

दरअसल इस जनहित याचिका में कहा गया था कि संविधान में कोई प्रविधान नहीं होने के बावजूद विभिन्न राज्य सरकारों ने उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की है। याचिकाकर्ता का कहना था कि उपमुख्यमंत्री का पद संविधान में नहीं लिखा है। अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति का राज्य के नागरिकों से कोई लेना-देना नहीं है। न ही कथित उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति होने पर राज्य की जनता का कोई अतिरिक्त कल्याण होता है।

याचिका में यह भी कहा गया था कि उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति से बड़े पैमाने पर जनता में भ्रम पैदा होता है और राजनीतिक दलों द्वारा काल्पनिक पोर्टफोलियो बनाकर गलत और अवैध उदाहरण स्थापित किए जा रहे हैं, क्योंकि उपमुख्यमंत्रियों के बारे में कोई भी स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकते हैं, हालांकि उन्हें मुख्यमंत्रियों के बराबर दिखाया जाता है।

मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, सबसे पहले और सबसे जरूरी बात यह है कि एक उपमुख्यमंत्री राज्य सरकार में मंत्री होता है और इससे संविधान का उल्लंघन नहीं होता।पीठ ने कहा कि उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति कुछ राज्यों में पार्टी या सत्ता में पार्टियों के गठबंधन में वरिष्ठ नेताओं को थोड़ा अधिक महत्व देने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रथा है... यह असंवैधानिक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि उपमुख्यमंत्री का पदनाम उस संवैधानिक स्थिति का उलंघन नहीं करता है कि एक मुख्यमंत्री को विधानसभा के लिए चुना जाना चाहिए। लिहाजा इस याचिका में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।

14 राज्यों में 26 उपमुख्यमंत्री

बता दें कि देशभर के 14 राज्यों में इस समय 26 उपमुख्यमंत्री नियुक्त हैं।सबसे अधिक डिप्टी सीएम आंध्र प्रदेश में हैं। वहां सीएम वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार में उनके पांच डिप्टी हैं।

श्रीलंका और मॉरीशस को पीएम मोदी की सौगात, इन दो देशों में भी चलेगा 'भारत का सिक्का', यूपीआई सेवा लॉन्च

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भारत का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई ग्लोबल होता जा रहा है। भारत की यूपीआई सर्विस सोमवार को श्रीलंका और मॉरीशस में शुरू की गईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ ने ऑनलाइन जुड़कर इसे लॉन्च किया। इससे श्रीलंका और मॉरीशस की यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों के साथ ही भारत की यात्रा करने वाले इन देशों के नागरिकों के लिए यूपीआई की सेवा उपलब्ध होगी। 

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘आज हिंद महासागर क्षेत्र में तीन मित्र देशों के लिए एक विशेष दिन है। आज हम अपने ऐतिहासिक संबंधों को आधुनिक डिजिटल तरीके से जोड़ रहे हैं। यह हमारे लोगों के विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। फिनटेक कनेक्टिविटी के माध्यम से, न केवल क्रॉस- सीमा लेनदेन ही नहीं बल्कि सीमा पार कनेक्शन भी मजबूत होंगे। भारत का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई अब एक नई जिम्मेदारी निभा रहा है – यूनाइटिंग पार्टनर्स विद इंडिया।

उन्होंने आगे कहा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने भारत में बड़ा बदलाव लाया है। हमारे छोटे से छोटे गांव के छोटे से छोटे व्यापारी भी डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। इसमें सुविधा के साथ रफ्तार भी है। 'पड़ोसी पहले' ही भारत की नीति है। हमारी समुद्री दृष्टिकोण एसएजीएआर है, जिसका मतलब क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास है। हमारा लक्ष्य पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास करना है।

मॉरीशस में यूपीआई की शुरुआत पर वहां के प्रधानमंत्री प्रवींद जगन्नाथ ने कहा, इस महत्वपूर्ण मौके पर आप लोगों के साथ जुड़कर बहुत खुशी हुई। रूपे कार्ड को हमारे राष्ट्रीय भुगतान स्विच के साथ सह ब्रांड किया गया है। MoCAS को मॉरीशस में घरेलू कार्ड के तौर पर माना जाएगा। भारत और मॉरीशस सांस्कृतिक, वाणिज्यिक और लोगों से लोगों तक संबंध साझा करते हैं। यह संबंध सदियो से बना हुआ है। आज हम इसे एक नई दिशा की तरफ ले जा रहे हैं।

वहीं, श्रीलंका के राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपके लिए यह दूसरा महत्वपूर्ण पल होगा। मैं आपको राम मंदिर की बधाई देता हूं। यह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। हजारों वर्षों से दोनों देशों के बीच भुगतान हो रहा है, लेकिन उस समय कोई सेंट्रल बैंक नहीं था। हमारे संग्राहलय में कई सिक्के मौजूद हैं, जिसे विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से एकत्रित किया गया है। आज हम टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर रहे हैं। आपके पास श्रीलंका का क्यूआर और एनआईपीएल एक साथ है। जैसे-जैसे भारतीय पर्यटक श्रीलंका जाएंगे, इसका उपयोग हमारे देश के प्रत्येक गांव में किया जाएगा।

फ्रांस में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लॉन्च होने के एक हफ्ते बाद, श्रीलंका और मॉरीशस भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्‍टम को अपनाने वाले देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है। फ‍िलहाल दुनिया के जिन देशों में यूपीआई पेमेंट सिस्टम का इस्‍तेमाल किया जा रहा है, उनमें सिंगापुर, यूएई, नेपाल, भूटान, ओमान, जापान, मलेशिया शामिल हैं।

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर का उमड़ा पाकिस्तान प्रेम, पड़ोसी देश के आतिथ्य से हुए गदगद, विदेशी जमीन पर अपनी ही सरकार को कोसा

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पूर्व भारतीय राजनयिक और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के लोगों की जमकर तारीफ की है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने पाकिस्तान के लोगों को भारत के लिए सबसे बड़ी संपत्ति बताया। यही नहीं, इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तानी जमीन पर अपनी ही देश की सरकार पर निशाना साधा है।डाॅन की रिपोर्ट के अनुसार लाहौर के अलहमरा में फैज फेस्टिवल के दौरान एक सत्र को संबोधित करते हुए मणिशंकर अय्यर ने यह बात कही। 

मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा कि वह कभी किसी ऐसे देश में नहीं गए जहां उनका इतना खुले दिल से स्वागत किया गया हो, जितना पाकिस्तान में हुआ। पाकिस्तान के लोग प्यार मिलने पर प्यार बरसाते हैं।पाकिस्तानी मीडिया डॉन के मुताबिक, अय्यर ने कहा- मेरे अनुभव से, पाकिस्तानी ऐसे लोग हैं जो शायद दूसरे पक्ष पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया करते हैं। यदि हम दोस्ती दिखाते हैं तो पाकिस्तानी उससे ज्यादा दोस्ती दिखाते हैं। यदि हम दुश्मनी दिखाते हैं तो वो ज्यादा दुश्मनी दिखाते हैं।फैज महोत्सव में शामिल होने पहुंचे अय्यर ने कार्यक्रम में 'हिज्र की राख, विसाल के फूल, भारत-पाक मामले' वाले सत्र के दौरान यह टिप्पणी की।

पिछले 10 वर्षों में सद्भावना की जगह कुछ उल्टा हुआ-अय्यर

कार्यक्रम में बोलते हुए अय्यर ने कहा कि जब वह कराची में महावाणिज्य दूत के रूप में थे तो हर कोई उनकी और उनकी पत्नी के देखभाल कर रहा था। इससे जुड़ी कई घटनाओं के बारे में उन्होंने अपनी किताब में जिक्र किया है। अय्यर ने कहा कि सद्भावना की जरूरत थी, लेकिन पहली नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद से पिछले 10 वर्षों में सद्भावना की जगह कुछ उल्टा हुआ।

दो तिहाई भारतीय आपके पाकिस्तानी साथ आने को तैयार-अय्यर

मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अय्यर ने कहा, मैं पाकिस्तान के लोगों से कहना चाहता हूँ कि वे याद रखें कि मोदी को कभी भी एक तिहाई से ज्यादा वोट नहीं मिले हैं। लेकिन हमारी भारत प्रणाली ऐसी है कि एक तिहाई वोट पाकर भी उनके पास दो तिहाई सीटें है। पर दो तिहाई भारतीय आपके पाकिस्तानी साथ आने को तैयार हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक का साहस पर मेज पर बैठकर बात करने का नही-अय्यर

अपने मित्र सतिंदर कुमार लांभा की किताब का हवाला देते हुए अय्यर ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी सरकारों में इस्लामाबाद में तैनात रहे 5 भारतीय उच्चायुक्तों का मानना था कि जैसे भी मतभेद हों पर पाकिस्तान को भारत से जुड़ना चाहिए। लेकिन 10 वर्षों में हमने बातचीत नहीं कर सबसे बड़ी गलती की। उन्होंने कहा, हमारे पास आपके खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का साहस है, लेकिन मेज पर बैठकर बात करने का साहस नहीं है।

प्राण प्रतिष्ठा का विरोध करने पर बेटी को नोटिस मिला था

बता दें हाल ही में मणिशंकर की बेटी सुरन्या अय्यर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विवाद में फंस चुकी हैं। सुरन्या अय्यर ने 20 जनवरी को फेसबुक पोस्ट किया था। इसमें दावा किया था कि वह अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के विरोध में 3 दिन का व्रत कर रही है। उनका यह व्रत मुस्लिम नागरिकों के प्रति प्यार और दुख की अभिव्यक्ति है। इसको लेकर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने मणिशंकर अय्यर और उनकी बेटी सुरन्या अय्यर को दिल्ली के जंगपुरा स्थित घर को खाली करने का नोटिस भेजा था। नोटिस में लिखा गया कि आपको ऐसे अपशब्दों का उपयोग नहीं करना चाहिए जिससे शांति भंग हो सकती है और अन्य निवासियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है।

और कितने झटके झेलेगी कांग्रेस? अब महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण ने छोड़ी पार्टी, स्पीकर को भेजा इस्तीफा

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महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को लगातार झटके लग रहे हैं। एक बार फिर कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही उन्होंने विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया है। चव्हाण ने बुधवार दोपहर महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच बंद दरवाजे में काफी देर तक बातचीत हुई, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को चव्हाण ने महाराष्ट्र के एआईसीसी प्रभारी रमेश चेन्निथला से मुलाकात की थी। इसके बाद से ही उनकी पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। वह पिछले काफी दिनों से पार्टी से नाराज बताए जा रहे थे और खबर है कि वह बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।अशोक चव्हाण के साथ इस वक़्त 2 से 4 कांग्रेस विधायक भी हैं। इन विधायकों के भी बीजेपी में शामिल होने की संभावना है।बीजेपी अशोक चव्हाण को महाराष्ट्र से राज्यसभा भेज सकती है।

अशोक चव्हाण नांदेड से कांग्रेस के विधायक हैं। चव्हाण महाराष्ट्र के बड़े मराठा कांग्रेस नेता हैं और वह मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। बतौर सूबे के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का पहला कार्यकाल दिसंबर, 2008 से नवंबर, 2009 के बीच रहा। वहीं चव्हाण दूसरे कार्यकाल में नवंबर 2009 से लेकर नवंबर 2010 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे।

लोकसभा चुनाव से पहले अशोक चव्हाण जैसे दिग्गज कांग्रेसी का इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका कहा जा रहा है। चव्हाण से पहले मुंबई कांग्रेस के बड़े नेता और गांधी परिवार के करीबी मिलिंद देवड़ा भी इस्तीफा दे चुके हैं। पार्टी हाल ही में हुए बाबा सिद्दीकी के इस्तीफे से भी अब तक उबर ही रही थी तब तक एक और बड़े नेता के इस्तीफे ने पार्टी की महाराष्ट्र में मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

तमिलनाडु के राज्‍यपाल आरएन रवि ने दो मिनट से भी कम समय में खत्म किया अपना अभिभाषण, जानें क्या है वजह?

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तमिलनाडु में राज्यपाल और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) सरकार के बीच विवाद फिर सामने आया है। दरअसल, विधानसभा में राज्यपाल आरएन रवि ने सोमवार को अपना अभिभाषण कुछ ही मिनटों के भीतर समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अभिभाषण की सामग्री को लेकर सरकार से सहमत नहीं हैं।उन्होंने 'राष्ट्रगान’ का कथित तौर पर सम्मान न करने के लिए डीएमके शासन की आलोचना भी की।बता दें कि तमिलनाडु के राज्‍यपाल आरएन रवि और मुख्‍यमंत्री एमके स्‍टालिन के बीच कई बार तनातनी हो चुकी है।

हर साल जब विधान सभा बुलाई जाती है तो राज्यपाल की ओर से अभिभाषण देने की परंपरा रही है। इसमें राज्य सरकार की नीतियां, कार्ययोजनाएं और उपलब्धियां शामिल होती हैं। लेकिन तमिलनाडु में इसके उलट देखा गया।चूंकि यह चालू वर्ष का पहला सत्र था, इसलिए राज्यपाल को संबोधन के लिए आमंत्रित किया गया था। वे सुबह 10 बजे शुरू हुए। सबसे पहले तमिल थाई अभिवादन गाया गया। उसके बाद राज्यपाल आरएन रवि का संबोधन हुआ। इसकी शुरुआत भी तमिल में हुई। नमस्कार अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्रियों और सदन के सदस्यों।राज्यपाल रवि ने कहा, मेरे बार-बार अनुरोध और सलाह के बाद भी राष्ट्रगान के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाया जा रहा है। इसके साथ ही संबोधन की शुरुआत और अंत में इसे बजाने के मेरे अनुरोध को नजरअंदाज भी कर दिया गया है।

उन्होंने कहा, 'इस अभिभाषण में कई ऐसे अंश हैं जिनसे मैं तथ्यात्मक और नैतिक आधार पर सहमत नहीं हूं। मेरा इसे पढ़ना एक संवैधानिक उपहास होगा। इसलिए सभा के सम्मान में, मैं अपना अभिभाषण यहीं समाप्त करता हूं। लोगों की भलाई के लिए इस सदन में सार्थक और स्वस्थ चर्चा की कामना करता हूं।' इसमें उन्‍होंने 1 मिनट 19 सेकेंड का समय लिया। राज्‍यपाल का अभिभाषण तत्‍काल समाप्‍त होने के बाद विधानसभा अध्‍यक्ष एम. अप्‍पावु ने तमिल में भाषण को पूरा पढ़ा।

इस राज्य के गर्वनर ने ऐसा ही किया था

तमिलनाडु के राज्यपाल रवि ने विधानसभा अध्यक्ष एम अप्पावु, मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और विधायकों को तमिल में शुभकामनाएं देने के बाद सरकार के साथ अपनी असहमति व्यक्त करने के कुछ ही मिनटों के भीतर अपना भाषण समाप्त कर दिया। हाल ही में, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी अपना पारंपरिक संबोधन कुछ ही मिनटों में समाप्त कर दिया था और केवल अंतिम पैराग्राफ पढ़ा था।

राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच पहले भी हो चुकी है तनातनी

बता दें कि तमिलनाडु के राज्‍यपाल आरएन रवि और मुख्‍यमंत्री एमके स्‍टालिन के बीच कई बार तनातनी हो चुकी है। वह नौकरी के बदलने नकदी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल में बंद बिजली व आबकारी मंत्री सेंथिल बालाजी को बिना सीएम की सलाह लिए सीधे बर्खास्त करने का आदेश देकर विवादों में आ गए थे। हालांकि, कुछ घंटों में ही राजभवन ने फैसले पर रोक लगाते हुए अटॉर्नी जनरल से सलाह लेने की बात कही थी। स्‍टालिन सरकार और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता इस फैसले के कारण आरएन रवि पर लगातार हमलावर रहे हैं।

फिर क्यों दिल्ली कूच की तैयारी में किसान, जानें किन मांगों के लिए हो रहा आंदोलन?

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अपने एक साल के लंबे आंदोलन के बाद कृषि कानूनों को निरस्त करवाने में कामयाब रहे किसान एक बार फिर आंदोलन के लिए तैयारी हो रहे हैं।किसानों के दो बड़े संगठनों, संयुक्त संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनैतिक) और किसान मज़दूर मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर 13 फरवरी को 'दिल्ली कूच' का नारा दिया है। पंजाब-हरियाणा के साथ ही कई और राज्यों के किसान दिल्ली कूच की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा ने 16 फरवरी को एक दिन का ग्रामीण भारत बंद करने का आह्वान किया है।

किसानों का दिल्ली चलो मार्च काफी हद तक किसान आंदोलन 2020-2021 से मिलता जुलता लग रहा है। पिछली बार की तरह ही अलग-अलग राज्यों से किसान इस आंदोलन में शामिल होने वाले हैं।इस बार किसान अपने साथ ट्रैक्टर-ट्राली और राशन भी लेकर आने वाले हैं।यानी पिछली बार की तरह इस बार किसानों का प्लान लंबे समय तक दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर धरना देने का है।

दो साल पहले दिल्ली के बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों का आंदोलन इतना मुखर था कि नरेंद्र मोदी सरकार को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून -2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तुएं संशोधन अधिनियम 2020 को रद्द करना पड़ा था। ऐसे में किसान अपने पहले आंदोलन से सीख लेते हुए अड़े रहने के मूड में आ रहे हैं।किसान अब अपनी नई मांगों को मानने के लिए दबाव बनाने की तैयारी में हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है किसान किन मांगों को लेकर आंदोलन का मूड बना चुके हैं।

ये हैं किसानों की मांगें

1. किसानों की सबसे खास मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानून बनना है।

2. किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी कर रहे है।

3. आंदोलन में शामिल किसान कृषि ऋण माफ करने की मांग भी कर रहे हैं।

4. किसान लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं

5. भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर निकाला जाए।

6. कृषि वस्तुओं, दूध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाया जाए।

7. किसानों और 58 साल से अधिक आयु के कृषि मजदूरों के लिए पेंशन योजना लागू करके 10 हजार रुपए प्रति माह पेंशन दी जाए।

8. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के लिए सरकार की ओर से स्वयं बीमा प्रीमियम का भुगतान करना, सभी फसलों को योजना का हिस्सा बनाना और नुकसान का आकलन करते समय खेत एकड़ को एक इकाई के रूप में मानकर नुकसान का आकलन करना।

9. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को उसी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को दिए गए निर्देशों को रद्द किया जाना चाहिए।

10. कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।