भरी अदालत में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली महिला को पड़ा भारी, चलेगा अवमानना का केस, कोर्ट ने जारी की नोटिस, पढ़िए,

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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक जज और कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के चलते महिला के खिलाफ आपराधिक अवमानना का केस शुरू किया है। महिला ऑस्ट्रेलिया में रहती है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुई। इस दौरान कोर्ट और जज के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना महिला को इस कदर भारी पड़ गया कि कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना का मामला शुरू कर दिया है। 

दरअसल मामला 10 जनवरी का है जब ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली अनिता कुमारी गुप्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुईं। सुनवाई के दौरान जज नीला बसंल ने मामले में आगे की तारीख देकर अगला मामला उठाया तो अनिता ने जज के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर दिया। 

उसने कहा, आइटम नंबर 10 से पहले अइटम नंबर 11 कैसे उठाया जा सकता है। ये क्या कर रही है। कोर्ट में क्या * चल रहा है। महिला के मुंह से अपशब्द सुनते ही कोर्ट ने महिला को कारण बताओ नोटिस थमा दिया और 16 अप्रैल को अदालत के समक्ष पेश होने का आदेश दिया। इसी के साथ कोर्ट ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को यह भी आदेश दिया कि अगर अनिता गुप्ता सुनवाई के लिए तय तारीख से पहले भारत आती हैं तो उनका पासपोर्ट/वीजा जब्त कर लिया जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि गुप्ता को इस कोर्ट के निर्देश के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि अनित गुप्ता ने अभद्र टिप्पणी तब की, जब पक्षों की ओर दलील पेश करने वाले वकील अंतिम बहस के लिए दी गई तारीख पर सहमत हुए थे। कोर्ट ने आदेश में कहा, कोर्ट की गरिमा को कम करने वाली ऐसी अपमानजनक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना ​​का मामला उठाया गया है। इसके अनुसार अनिता कुमारी गुप्ता, जो वर्तमान में सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में रह रही हैं, को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है कि क्यों न उन्हें अदालत की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 के तहत दंडित किया जाए।

कोई जाए न जाए, मैं आशीर्वाद लेने जरूर जाऊंगा..', राम मंदिर पर बोले AAP सांसद हरभजन सिंह

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 पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने शनिवार को कहा कि वह 22 जनवरी को अयोध्या में राम लला के 'प्राण प्रतिष्ठा' समारोह में भाग लेंगे, इसके बावजूद कि अधिकांश विपक्षी दलों ने राम मंदिर उद्घाटन पर अपना रुख अपनाया है। 

उन्होंने कहा कि, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन जाना चाहता है या नहीं; चाहे कांग्रेस जाना चाहती हो या नहीं या अन्य (पार्टियाँ) जाना चाहती हों या नहीं, मैं निश्चित रूप से जाऊंगा। एक व्यक्ति के रूप में यह मेरा रुख है जो भगवान में विश्वास करते हैं। अगर किसी को मेरे (राम मंदिर) जाने से कोई समस्या है, तो वे जो चाहें कर सकते हैं।' उनकी यह टिप्पणी विपक्षी दलों द्वारा 22 जनवरी को राम मंदिर उद्घाटन का बहिष्कार करने के बीच आई है, जिसमें कहा गया है कि भाजपा इस आयोजन का राजनीतिकरण कर रही है और इस बात से इनकार कर रही है कि वे 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अभियान हथियार के रूप में मंदिर उद्घाटन का उपयोग करने के लिए पार्टी के एजेंडे को बढ़ावा नहीं देंगे।

हरभजन सिंह ने कहा कि, "यह हमारा सौभाग्य है कि इस समय यह मंदिर बन रहा है, इसलिए हम सभी को जाना चाहिए और आशीर्वाद लेना चाहिए...मैं निश्चित रूप से (भगवान से) आशीर्वाद लेने (राम मंदिर उद्घाटन) में जा रहा हूं।" हरभजन सिंह की टिप्पणी भी उनकी पार्टी सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह 22 जनवरी के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, जबकि उन्होंने बताया था कि उन्हें अभी तक 'प्राण प्रतिष्ठा' के लिए "औपचारिक निमंत्रण" नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि वह 22 जनवरी के बाद अपनी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के साथ मंदिर जाएंगे।

केजरीवाल ने कहा कि, "उन्होंने मुझे एक पत्र भेजा था, और जब हमने उन्हें बुलाया, तो उन्होंने कहा कि एक टीम मुझे औपचारिक रूप से आमंत्रित करने आएगी। लेकिन कोई नहीं आया। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। केजरीवाल ने बुधवार (17 जनवरी) को कहा कि बहुत सारे वीआईपी और वीवीआईपी, ''कार्यक्रम में आएंगे और सुरक्षा कारणों से केवल एक व्यक्ति को अनुमति दी जाएगी।'' हालाँकि, AAP प्रमुख ने राम मंदिर उद्घाटन के समानांतर कोई राजनीतिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया और कहा कि मंदिर "भावनाओं... भावना और भक्ति" का मामला है। अरविंद केजरीवाल ने संवाददाताओं से कहा, "हर किसी की अपने धर्म के अनुसार अपनी आस्था होती है...इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।"

इससे पहले, आप नेता और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने चार शंकराचार्यों का समर्थन किया था, जिन्होंने कहा था कि वे राम मंदिर उद्घाटन में शामिल नहीं होंगे, उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठा अनुष्ठान "शास्त्रों के खिलाफ" थे। "सभी चार शंकराचार्य कह रहे हैं कि मंदिर अधूरा है। इसलिए, ऐसे समय में 'प्राण प्रतिष्ठा' (प्रतिष्ठा) वेदों और सनातन धर्म के अनुरूप नहीं है। मुझे लगता है कि उनके शब्दों का सम्मान किया जाना चाहिए। यह तथ्य कि वे समारोह में शामिल नहीं हो रहे हैं, दुखद है।''

'प्राण प्रतिष्ठा' के निमंत्रण पर केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी पर सवाल उठाने के बाद यह सौरभ भारद्वाज का भाजपा पर दूसरा हमला था। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि राम मंदिर देश के सभी नागरिकों का है, और भाजपा यह तय करने वाली "कोई नहीं" है कि उद्घाटन समारोह में किसे शामिल होना चाहिए और किसे नहीं। उस समय उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता से 22 जनवरी के कार्यक्रम में शामिल न होने और उसके बाद अयोध्या में मंदिर का दौरा करने के अनुरोध के बाद आई थी।

उत्तर भारत के अधिकांश राज्य शीतलहर की चपेट में, अभी राहत के आसार नहीं

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उत्तर भारत में सर्दी का सितम जारी है।उत्तर भारत के अधिकांश राज्य शीतलहर की चपेट में हैं। कहीं गलन तो कहीं कोहरे ने लोगों को परेशान कर रखा है।दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश और बिहार के अधिकतर जगहों पर तापमान 7 से 10 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम यूपी और राजस्थान में तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री नीचे है।मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के लिए 23 जनवरी तक ठंड व कोहरे को लेकर रेड व ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान पूर्वी भारत में न्यूनतम तापमान 2-10 डिग्री के बीच सिमटा रहेगा।

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इन इलाकों में हो सकती है बारिश

स्काईमेट वेदर रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों और तमिलनाडु के साउथ कोस्ट पर हल्की से मीडियम बारिश संभव है।लक्षद्वीप, साउथ केरल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की बारिश होने की संभावना है। वहीं, पंजाब, हरियाणा और वेस्टर्न उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में सुबह और रात के वक्त घना कोहरा छा सकता है। वहीं, उत्तराखंड और नॉर्थ राजस्थान में भी एक या दो जगहों पर घने से बहुत घना कोहरा रह सकता है।

इन जगहों पर कोल्ड डे से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति

इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और नॉर्थ-ईस्ट भारत के कुछ इलाकों में सुबह के वक्त घना कोहरा होने की संभावना है। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, बिहार, पश्चिमी यूपी और पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में कोल्ड डे से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति हो सकती है। सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल, सिक्किम के कुछ इलाकों, ईस्ट राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश में एक या दो जगहों पर ठंडे दिन की जैसी स्थिति रह सकती है।

उत्तर भारत में ठिठुरन के लिए पश्चिमी विक्षोभ जिम्मेदार

उत्तर भारत में भीषण सर्दी और घने कोहरे का सबसे बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ (डब्ल्यूडी) का सक्रिय न होना है। इसके अलावा अल नीनो और जेट स्ट्रीम भी जिम्मेदार है। इन तीन कारकों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मुख्य रूप से जिम्मेदार माना है। आमतौर पर दिसंबर से जनवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित करते हैं, लेकिन इस साल सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ की ऐसी कोई भी गतिविधि देखने को नहीं मिली है। इसी का नतीजा था कि दिसंबर 2023 से अब तक पश्चिमी हिमालय के क्षेत्रों में बहुत कम बारिश या हिमपात देखा गया। यह क्षेत्र में सामान्य से करीब 80 फीसदी कम रहा। इसी तरह जनवरी के दौरान 17 तारीख तक क्षेत्र में बारिश करीब न के बराबर रही।

उत्तर भारत में अभी सर्दी और कोहरे के कहर से राहत नहीं

मौसम विभाग ने जो ताजा अपडेट जारी किया है उसके मुताबिक उत्तर भारत में अभी सर्दी और कोहरे के कहर से राहत नहीं मिलेगी। आईएमडी के अनुसार 21 जनवरी तक उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में गंभीर शीतलहर का खतरा बना रहेगा। इसी दौरान पंजाब और हरियाणा में भीषण शीत लहर का कहर जारी रहेगा। हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में शीत लहर की स्थिति बनी रहेगी। 20 और 21 जनवरी को उत्तरी राजस्थान, पश्चिमी यूपी में शीतलहर चल सकती है। साथ ही हिमाचल और उत्तराखंड में पाला पड़ने की भी आशंका जताई गई है। इसी तरह पंजाब,हरियाणा, उत्तराखंड समेत समूचे उत्तर और मध्य भारत में घना कोहरा छाया रहेगा। जनवरी के अंत तक भीषण सर्दी, शीत लहर और घने कोहरे का प्रकोप जारी रह सकता है।

भारतीय महिला हॉकी टीम का टूटा सपना, पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी

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भारतीय हॉकी फैंस के लिए बुरी खबर है। भारतीय महिला हॉकी टीम इस साल होने वाले पेरिस ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाएगी। भारतीय महिला हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए क्वालिफाई करने से चूक गई है। क्वालिफर्स मुकाबले में जापान के हाथों 0-1 से मिली हार के बाद भारत ने प्वाइंट्स टेबल में 4 नंबर पर फिनिश किया। 2020 टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम नंबर 4 पर फिनिश करने में कामयाब रही थी और उसने फैंस को इस गेम के साथ दोबारा जुड़ने की नई उम्मीद दी थी। लेकिन 3 साल बाद निराशा भरी खबर आ है।

जापान के खिलाफ खेला गए मुकाबले में नंबर तीन के लिए क्वालिफाई करने की लड़ाई थी, जिसमें टीम इंडिया असफल रही। भारत ने मुकाबला गंवाकर नंबर चार पर खत्म किया। प्लेऑप के मुकाबले में भारत की महिला टीम ने अच्छा खेल दिखाया, लेकिन अंत में उन्हें 0-1 से हार की निराशा झेलनी पड़ी। मैच में जापान ने शानदार डिफेंसिव खेल दिखाया और जीत अपने खाते में डाली।

रांची में खेले गए मुकाबले में जापान ने 9वें मिनट में ही बढ़त हासिल कर ली थी, जब उरता काना ने पेनाल्टी कॉर्नर के ज़रिए गोल कर दिया था। इसके बाद मुकाबले का पहला क्वार्टर खत्म हुआ और भारत 0-1 से पीछे रही। लेकिन दूसरे क्वार्टर में हालात बदले और भारत की लालरेम्सैमी ने पेनाल्टी कॉर्नर जीता, लेकिन जापान की गोलकीपर ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम को मुकाबले में 1-0 से आगे रखा। 

इसके बाद मुकाबले में हाफ टाइम हुआ और भारत 0-1 से पीछे ही रही। फिर तीसरे क्वार्टर के खेल में भी हालात वैसे ही रहे। जापान 1-0 की बढ़त के साथ मुकाबले में आगे रही। अब भारत के पास आखिरी 15 मिनट यानी चौथे क्वार्टर में कम से कम एक गोल करके मैच ड्रॉ करने और जापान को रोकते हुए दो गोल दागकर मुकाबला जीतने का मौका था, जिसमें वो पूरी तरह नाकाम रहे। भारत ने जापान को तो रोककर रखा, लेकिन खुद भी गोल नहीं कर सके।

अयोध्या से आई रामलला की पहली संपूर्ण तस्वीर, चेहरे पर दिखी मोहक मुस्कान

#ram_mandir_inauguration_ramlala_full_photo 

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रामलला के चेहरे वाली एक संपूर्ण तस्वीर सामने आई है। इसमें रामलला की पूरी छवि स्पष्ट नजर आ रही है। यह तस्वीर मूर्ति के निर्माण के दौरान की है। हालांकि बृहस्पतिवार को जब रामलला को गर्भगृह में स्थापित किया गया उस वक्त उनकी प्रतिमा पर कपड़े की पट्टी लिपटी हुई थी और उनका चेहरा ढंका हुआ था। 22 जनवरी को होनेवाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान उनके चेहरे की पट्टी हटाई जाएगी।

रामलला की मूर्ति देखने में अद्भुत है। चेहरे पर मुस्कान भगवान राम की विनम्रता और मधुरता के बारे में बताती है। रामलला का स्वरूप साक्षात राम भगवान की तरह ही प्रतीत होता है। पहली नजर में रामलला की ये मूर्ति देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देती है। आस्था और आध्यात्म की झलक इस मूर्ति से झलकती है। जो पहली ही नजर में राम भक्तों को आकर्षित करती है।

अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है। कल यानी गुरुवार को राम मंदिर की प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित कर दिया है। प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े पुजारी अरुण दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान राम की मूर्ति को दोपहर में वैदिक मंत्रोचार के बीच गर्भ गृह में रखा गया। इस दौरान प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य यजमान अनिल मिश्रा वहां मौजूद रहे। मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित करने में करीब 4 घंटे का वक्त लगा। मूर्ति को गर्भगृह में रखे जाने से पहले अनुष्ठानों को भी पूरा किया गया। इनमें अनाज, फल, घी और जल से उनका स्नान भी शामिल रहा। 

हालांकि, गर्भगृह में रखी गई मूर्ति अभी ढकी हुई है जिसको प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन खोला जाएगा। जिस मूर्ति को स्थापित किया गया है उसकी लंबाई 51 इंच है।राम मंदिर में 16 जनवरी को रामलला के लिए अनुष्ठान शुरू हुआ था। राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार अनुष्ठान 21 जनवरी तक जारी रहेंगे और रामलला की मूर्ति की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के लिए जरूरी हर अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे. 121 ‘आचार्य’ अनुष्ठान का संचालन कर रहे हैं। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 22 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर एक बजे समाप्त होगा। दरअसल, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित हजारों लोग शामिल होंगे

क्या है बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी? ईरान में जिनके ठिकानों पर पाकिस्तान ने किया हमला

#whatisbalochlibrationarmy 

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पाकिस्तान की एयरफोर्स ने बुधवार देर रात ईरान में बलूच लिबरेशन आर्मी के ठिकानों पर हवाई हमले किए।पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में कई आतंकियों को मार गिराया। हालांकि, ईरान ने कहा कि पाकिस्तान की एयरस्ट्राक में 4 बच्चे और 3 महिलाओं सहित 9 लोगों की मौत हुई है। इनमें से कोई भी ईरान का नागरिक नहीं था।मंगलवार रात पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद पाकिस्तान ने ये कार्रवाई की। ईरान ने मंगलवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ये कहते हुए हमले किए थे कि उसके निशाने पर जैश अल-अद्ल नामक संगठन के ठिकाने थे. ईरान का कहना था कि ये संगठन पाकिस्तान की सरजमीं से ईरान में चरमपंथी घटनाओं को अंजाम दे रहा है।

वहीं, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने बी साफ़तौर पर कहा है कि उसके संगठन की मौजूदगी ईरान में नहीं है। बीएलए के प्रवक्ता आज़ाद बलोच की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ईरान के क़ब्ज़े वाले बलूचिस्तान में बीएलए की मौजूदगी नहीं है. पाकिस्तान ने आम नागरिकों पर हमला किया है। आज़ाद बलोच ने कहा, पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके कब्ज़ाधारी बलों ने ईरान के कब्ज़े वाले बलूचिस्तान (पश्चिमी बलूचिस्तान) में बीएलए और अन्य स्वतंत्रता समर्थक संगठनों को निशाना बनाया है।बीएलए पाकिस्तान के दावों को ख़ारिज करती है।

बलूचिस्तान के लोगों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के व़क्त उन्हें ज़बरदस्ती पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया, जबकि वो ख़ुद को एक आज़ाद मुल्क़ के तौर पर देखना चाहते थे। ऐसा नहीं हो सका इसलिए इस प्रांत के लोगों का पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना के साथ संघर्ष चलता रहा और वो आज भी बरकरार है। बलूचिस्तान में कई अलगाववादी समूह हैं लेकिन सबसे बड़ा और सबसे असरदार संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी है। इसका नेतृत्व पहले बलाच मर्री करते थे जो अफगानिस्तान में 2007 में मारे गए थे इसके बाद बीएलए ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया। अब इस संगठन का नेता बशीर जेब बलोच कर रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले राज्य बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाली इस आर्मी ने सरकार और सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष तो लंबे समय से छेड़ रखा है। इनके पास हजारों लड़ाके हैं और बड़ी संख्या में हथियार भी।

 

क्या चाहती है बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ?

बलूचिस्तान के लोग 1944 से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। 1947 में बलूचिस्तान को जबरन पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। तभी से बलूच लोगों का पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना से संघर्ष चल रहा है। पाकिस्तान की सरकार और वहां की आर्मी इस विरोध को बेदर्दी से कुचलती रही। इसी के प्रतिरोध में 70 के दशक में बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी का गठन हुआ। जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार के खिलाफ बलूच लोगों ने सशस्त्र विद्रोह कर दिया। लेकिन इसके बाद सैन्य तानाशाह जियाउल हक के पाकिस्तान पर कब्जे बाद बलूच लोगों का विद्रोह काफी हद तक शांत हो गया।

बलूचिस्तान में क्या है विवाद का मसला

बलूचिस्तान आकार के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन बंजर पहाड़ी इलाका होने की वजह से आबादी के हिसाब से देश का सबसे छोटा राज्य है। बलूचिस्तान की सीमा उत्तर में अफगानिस्तान से और पश्चिम में ईरान से सटी हुई है। इसकी एक लंबी तटरेखा भी है जो अरब सागर से सटी हुई है। पाकिस्तान के कब्जे वाला बलूचिस्तान प्राकृतिक तौर पर काफी संपन्न इलाका है। यहां की धरती खनिज संपदा से भरी पड़ी है। पाकिस्तान यहां की खनिज संपदा का दोहन करके पैसे बना रहा है लेकिन बलूचिस्तान के विकास की तरफ कभी ध्यान नहीं देता. यहां के लोग अब भी बेहद गरीबी में जी रहे हैं। जबकि यहां तेल, गैस, तांबे और सोने जैसे कुदरती संपदा की भरमार है। बलूच लोग सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से पाकिस्तान के बाकी हिस्सों से काफी अलग हैं। वो खुद को पंजाबियों के हाथों शोषित मानते हैं. पाकिस्तान की आर्मी वहां के लोगों को अपना निशाना बनाती रहती है। जिसका बलूच विरोध करते हैं।

बिलकिस बानो के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 21 जनवरी तक करना होगा सरेंडर

बिलकिस बानो के 11 दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दोषियों ने आत्मसमर्पण करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी। बता दें कि दोषियों द्वारा आत्मसमर्पण करने का समय 21 जनवरी को समाप्त हो रहा है।जस्टिस बीवी नगरत्ना की पीठ ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा की सुप्रीम कोर्ट की ओर से दो सप्ताह में आत्मसमर्पण करने के पिछले आदेश का अनुपालन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सभी याचिकाएं निराधार हैं और बेतुके आधारों पर हम सरेंडर करने की तारीख नहीं बढ़ा सकते।

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न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि दोषियों ने जो कारण बताए हैं, उनमें कोई दम नहीं है। पीठ ने आगे कहा, 'हमने सभी के तर्कों को सुना। आवेदकों द्वारा आत्मसमर्पण को स्थगित करने और वापस जेल में रिपोर्ट करने के लिए दिए गए कारणों में कोई दम नहीं है। इसलिए अर्जियां खारिज की जाती हैं।'बिलकिस बानो के 11 दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने खुद के स्वास्थ्य के साथ-साथ बूढ़े मां-बाप सहित कई पारिवारिक जिम्मेदारियों हवाला दिया था

बिलकिस बानो मामले के पांच दोषियों ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय से आत्मसमर्पण करने के लिए और समय मांगा था। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में गुजरात सरकार द्वारा सजा में दी गई छूट को रद्द कर दिया था। गौरतलब है, साल 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। 

गुजरात सरकार ने इस हाईप्रोफाइल मामले के ग्यारह दोषियों को सजा में छूट दी थी। लेकिन, शीर्ष अदालत ने आठ जनवरी को इसे रद्द कर दिया था। इसके अलावा, अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसकी एक आरोपी के साथ 'मिलिभगत' थी। दोषियों को 2022 के स्वतंत्रता दिवस पर समय से पहले रिहा किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने दो हफ्ते के भीतर दोषियों को फिर से जेल में डालने का आदेश दिया था।  

केसरभाई वोहानिया, गोविंद जसवन्त नाई, मितेश भट्ट, प्रदीप मोरधिया, राधेश्याम शाह, राजूभाई सोनी, रमेश चांदना और शैलेश भट्ट शामिल हैं। अपनी याचिका में नौ दोषियों ने छह सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, जबकि एक ने चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था।

जर्मन सिंगर ने गाया ‘राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी’, लाखों भारतीय हुए फैन, पीएम मोदी ने भी की तारीफ

#german_singer_sang_ram_aayenge_to_angana_sajaungi

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अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा और राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होने वाला है। इसको लेकर अयोध्या में जोर शोर से तैयारियां चल रही हैं। वहीं, पूरा देश इस उत्सव के लिए उत्साहित है।सोशल मीडिया पर इन दिनों राम आगमन की धूम है। सोशल मीडिया भी इन दिनों राममय हो गया है। हर तरफ रामभजन की धुन सुनाई दे रही है। इसी बीच जर्मनी की मशहूर सिंगर कैसेंड्रा माई स्पिटमैन का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। कैसेंड्रा माई स्पिटमैन ने राम भजन गाकर इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसके बाद तो देखते ही देखते इस वीडियो ने सुर्खियां बटोर लीं।

वीडियो में सिंगर 'राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी' गाती नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया यूजर्स उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके गाने पर प्रतिक्रिया भी दी है। एक यूजर ने लिखा कि ‘इनमें भी राम बसते हैं।’ वहीं, दूसरे यूजर ने लिखा, 'जय श्री राम', एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘भगवान राम आप पर अपनी कृपा बनाए रहें।

पीएम मोदी भी कर चुके तारीफ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी जर्मन सिंगर कैसेंड्रा मे स्पिटमैन की अपने मन की बात कार्यक्रम में तारीफ कर चुके हैं। सितंबर 2023 में उन्होंने अपने कार्यक्रम में 21 साल की जर्मन सिंगर कैसेंड्रा का जिक्र किया था। वे आंखों से देख नहीं सकतीं। कैसेंड्रा ने पिछले दिनों 'जगत जाना पालम' और 'शिव पंचाक्षर स्त्रोतम' का गायन किया था। इसका जिक्र करते ही पीएम मोदी ने कैसेंड्रा ने की तारीफ की थी। पीएम मोदी ने कैसेंड्रा द्वारा गाए गए इन गानों को अपने कार्यक्रम में जगह दी थी। उन्होंने कहा था, इतनी सुरीली आवाज… और हर शब्द भावनाओं को दर्शाता है। हम ईश्वर के प्रति उनके लगाव को भी महसूस कर सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आवाज जर्मनी की एक बेटी की है।

अयोध्या विवाद आजादी के बादः केंद्र से लेकर राज्यों तक की राजनीति दशा और दिशा कैसी बदल

#ayodhya_dispute_after_independence

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गुलाम भारत में शुरू हुआ अयोध्या विवाद आजादी के बाद भी जस का तस बना रहा।या यूं कह लें समय के साथ और गंभीर होता गया। हालांकि अब देश आजाद हो चुका था, सरकार अपनी थी कानून अपना था, तो लोगों ने उम्मीद जताई कि अब तो बस समाधान होने ही वाला है। हालांकि, अयोध्या में असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। 

भगवान राम की मूर्ति मस्जिद में मिलने के बाद हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री जी. बी. पंत से मामले में फौरन कार्रवाई करने को कहा। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया, लेकिन जिला मैजिस्ट्रेट के. के. नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई।जिसके बाद उसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया गया।

ताला उस ढांचे पर लगा था, जिसे विवाददित माना गया, लेकिन लोगों की भावनाओं पर नहीं। लोगों में मन में अपने अराध्य की पूजा करने की इच्छा बढ़ती ही जा रही थी। इसके बाद 16 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद नामक शख्स ने फैजाबाद के सिविल जज के सामने अर्जी दाखिल कर यहां पूजा की इजाजत मांगी। उस वक्त के सिविल जज एन. एन. चंदा ने इजाजत दे दी। मुसलमानों ने इस फैसले के खिलाफ अर्जी दायर की। विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने एक कमिटी गठित की। यू. सी. पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज के. एम. पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया। इसके विरोध में बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति का गठन किया गया।

मैदान में विश्व हिंदू परिषद के आ जाने से ये जनता की भावनाओं से जुड़ा ये मामला सियासी रंग लेने लगा। विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में 1984 में हिंदुओं ने भगवान राम के जन्मस्थल को मुक्त करने और वहां राम मंदिर बनाने के लिए एक समिति का गठन किया। ठीक उसी समय गोरखनाथ धाम के महंथ अवैद्यनाथ ने राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति बनाई. अवैद्यनाथ ने अपने शिष्यों और लोगों से कहा था कि उसी पार्टी को वोट देना जो हिंदुओं के पवित्र स्थानों को मुक्त कराए। 

ये वो समय था बीजेपी अब अयोध्या मसले पर खुलकर सामने आ चुकी थी...और लोगों को समर्थन भी इस पार्टी को मिलने लगा था। अयोध्या मामले की कमान संभाली बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने। 25 सितंबर 1990 को बीजेपी की रथयात्रा निकली। बिहार में लोगों के समर्थन से लालू प्रसाद यादव की सरकार घबरा गई, और आडवाणी की रथ को बिहार में रोक दिया गया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए पहली बार कारसेवा हुई थी और गोलिकांड भी। 30 अक्टूबर 1990 का वो दिन जब कारसेवकों ने मस्जिद पर चढ़कर झंडा फहराया था। उस वक्त यूपी में मुलायम सिंह की सरकार थी, मुलायम सिंह ने मस्जिद पर झंडा फहराए जाने के बाद गोली चलाने का आदेश दिया। उस वक्त पुलिस की गोलीबारी में पांच कारसेवकों की मौत हो गई थी। 1990 में हुए इस गोलीकाड़ के बाद 1991 में सपा के हाथ से यूपी की सत्ता फिसल गई और बीजेपी ने पहली बार सरकार बनाई।

अयोध्या के आंदोलन के इतिहास का सबसे काला दिन 6 दिसंबर 1992 जब बाबरी मस्जिद ढा दी गई थी। जिसके बाद पूरा देश दंगे की आग में दहकने लगा। ये विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया। पूरी अयोध्या नगरी धूल धूल हो गई थी। मानो कोई आंधी आई हो। मौजूद कार सेवकों के साथ लोगों की बड़ी संख्या विवादित स्थल के अंदर घुस गई और ढांचे को ढा दिया। इसके बाद ही पूरे देश में चारों ओर सांप्रदायिक दंगे होने लगे. इसमें करीब 2000 लोगों के मारे गए।

6 दिसंबर की घटना के बाद देश की राजनीति दशा और दिशा बदल दी। देश में सामाजिक और राजनीतिक फिजा में कई बड़े बदलाव हुए। इस दौरान केंद्र से लेकर राज्यों तक कई सरकारें बदलीं, नेतृत्व बदला और राजनीतिक परिदृश्य भी बदले।

फारुक अब्दुल्ला को सता रहा “इंडिया”गठबंधन टूटने का डर, जानें क्या है वजह

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आने वाले समय में देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं लोकसभा चुनाव की भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। हालांकि, विपक्षी गठबंधन “इंडिया” में सीट शेयरिंग पर अब तक फैसला नहीं हो सका है। इसी बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का बड़ा बयान सामने आया है।अब्दुल्ला ने कहा कि अगर सीट बंटवारे पर जल्द सहमति नहीं बनी तो इंडिया ब्लॉक के लिए खतरा है। 

देश को बचाना है, तो हमें मतभेदों को भूलना होगा-अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के साथ उनके यूट्यूब चैनल पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि सीट शेयरिंग पर गठबंधन में शामिल दलों के बीच सहमति नहीं बन पाती है तो अलासंय में शामिल कुछ पार्टियां अलग गठबंधन बना सकती हैं।जब गठबंधन में सीट-बंटवारे की व्यवस्था पर स्पष्टता की कमी के बारे में सवाल पूछा गया तो अब्दुल्ला ने कहा कि अगर हमें देश को बचाना है, तो हमें मतभेदों को भूलना होगा और देश के बारे में सोचना होगा। उन्होंने कहा कि अगर सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप नहीं दिया गया तो गठबंधन के लिए यह बात एक बड़ा खतरा बन सकती है। इसे समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। यह संभव है कि कुछ दल अलग गठबंधन बनाने के लिए एक साथ आ सकते हैं, जो मुझे सबसे बड़ा खतरा लगता है। अभी भी समय है। हमें इस बारे में जल्द से जल्द सोचना होगा।

पार्टियों को सिर्फ वहीं सीटें मांगनी चाहिए जहां उनका दबदबा-अब्दुल्ला

अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टियों को सिर्फ वहीं सीटें मांगनी चाहिए जहां उनका दबदबा है और जहां वे प्रभावी नहीं हैं वहां सीटें मांगना गलत है। उन्होंने कहा कि खतरे में पड़ा गणतंत्र ही नहीं आने वाली पीढ़ी भी हमें माफ नहीं करेगी। हमारे सामने यह बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, अगर हम अपने अहंकार को छोड़कर एक साथ मिलकर यह नहीं सोचते कि इस देश को कैसे बचाया जाए, तो मुझे लगता है कि यह हमारी ओर से सबसे बड़ी गलती होगी। अब्दुल्ला ने कहा कि पिछली बार तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी वाम दलों के साथ सीटें साझा करने के लिए तैयार नहीं थीं लेकिन इस बार उन्होंने पेशकश की है कि वाम दल वहां से चुनाव लड़ सकते हैं जहां से वह जीत सकते हैं। लोग उनके खिलाफ बयान जारी कर मतभेद बढ़ा रहे हैं।