हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने नूंह में भड़की हिंसा को बताया प्री-प्लांड, एनसीपीसीआर ने की पत्थरबाजी के लिए बच्चों के इस्तेमाल की जांच कराने क

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हरियाणा के नूंह में सोमवार को भड़की हिंसा अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। नूंह समेत हिंसा के अलग-अलग मामलों में 40 एफआईआर दर्ज हुई है। वहीं अब तक 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।वहीं सिर्फ नूंह में ही 26 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। हिंसा का केंद्र रहे नूंह, पलवल, पटौदी और सोहना में इंटरनेट बंद है। वहीं फरीदाबाद, गुरुग्राम समेत हरियाणा के सात जिलों में धारा 144 लगाई गई है।नूंह में हुई हिंसा का असर मंगलवार को फरीदाबाद और गुड़गांव में भी रहा। उधर, नूंह में आज भी कर्फ्यू रहेगा।

नूंह में आगामी आदेशों तक शिक्षण संस्थान बंद

नूंह में भड़की हिंसा की आग गुरुग्राम जिले में तेजी से फैल चुकी है। पहले सोहना फिर सेक्टर 57 की निर्माणाधीन मस्जिद और इसके बाद बादशाहपुर के नजदीक हाईवे पर उपद्रवियों ने बवाल काटा। इस बीच उपद्रवियों की बदलती जगहों पर पुलिस दौड़ती रही।दो समुदायों की लड़ाई में पुलिस और प्रशासन के अनुसार संवेदनशील इलाके से इतर 24 घंटे में कई अलग इलाकों पर घटना हुई। नूंह में आगामी आदेशों तक शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने 10 ड्यूटी मजिस्ट्रेट और 6 स्पेशल ड्यूटी मजिस्ट्रेट क्षेत्र भर में लगाए हैं।

हरियाणा के सीएम ने साजिश करार दिया

नूंह में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को हरियाणा के मुख्यमंत्री ने साजिश करार दिया है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। सीएम खट्टर ने कहा कि इस हिंसा में जो लोग भी शामिल हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

इसकी पहले से प्लानिंग की गई थी-अनिल विज

इधर, नूंह में हुई हिंसा को लेकर प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि इलाके में भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। सभी जगह अलर्ट जारी किया गया है. उन्होंने घटना को लेकर गृह सचिव अजय भल्ला से भी बात की है। विज ने कहा कि नूंह हिंसा के दौरान जिस तरह से हथियार लहराए गए गोलियां चलाई गई। उसे देखकर यहीं लगता है कि ये सब अचानक नहीं हुआ बल्कि इसकी पहले से प्लानिंग की गई थी। इस पूरी घटना के पीछे किसी ना किसी ने इंजीनियरिंग की है, कोई ना कोई मास्टरमाइंड जरूर है जो देश और प्रदेश की शांति भंग करने में लगे हैं।

पत्थरबाजी में बच्चों के इस्तेमाल पर जांच की मांग

वहीं, नूंह में हिंसा के दौरान पत्थरबाजी के लिए बच्चों को कथित रूप से इस्तेमाल किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई हैं। पीटीआई के मुताबिक, इसे लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने जांच की मांग की है। हरियाणा प्रशासन को लिखे एक पत्र में एनसीपीसीआर ने सोमवार को हुई हिंसा में बच्चों के कथित शोषण के संबंध में प्रशासन को तुरंत ध्यान देने और कार्रवाई करने की मांग की है। आयोग ने पत्र में कहा,''आयोग आपके कार्यालय से मामले पर गौर करने और घटना की जांच कराने का अनुरोध करता है। इसके अलावा इस गैरकानूनी प्रदर्शन में जिन बच्चों का प्रयोग किया गया उनकी पहचान की जानी चाहिए और अगर उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने की जरूरत है तो उन्हें बाल सुधार समिति के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।'

सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने पर एफआईआर

वहीं, इस मामले में सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने के मामले में भी गुड़गांव पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। सेक्टर-53 थाने में यह एफआईआर मंगलवार दोपहर बाद दिनेश भारती नामक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की गई है। सेक्टर-53 थाने के ही एक एएसआई के बयान पर यह एफआईआर दर्ज हुई है। एएसआई का कहना है कि धारा 144 लगने के बाद वह टीम के साथ वजीराबाद मंडी चौक के पास मौजूद रहे। आसपास के कुछ लोगों ने टीम को बताया कि दिनेश भारती नामक व्यक्ति सेक्टर-52 आरडी सिटी के पास गोशाला चलाता है। उसने वट्सऐप पर एक विडियो बनाकर वायरल कर दिया। जिसमें सांप्रदायिक दंगे भड़काने की बातें कही गई हैं।

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज से सुनवाई, सोमवार और शुक्रवार छोड़ रोज बैठेगी पीठ

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जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज से सुनवाई करेगी।सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच धारा 370 के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बुधवार से रोजाना सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत अब इन्हीं 23 रिट याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। केंद्र ने पांच मई 2019 को पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा निरस्त कर दिया था। साथ ही इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में विभाजित कर दिया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ पांच सदस्यीय बेंच की अध्यक्षता करेंगे। बेंच में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआई गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत शामिल होंगे।सोमवार और शुक्रवार छोड़कर रोजाना मामले की सुनवाई की जाएगी।

केंद्र ने दाखिल किया था हलफनामा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने का बचाव किया था। केंद्र ने सोमवार को शीर्ष अदालत से से कहा था कि यह कदम उठाये जाने के बाद जम्मू कश्मीर के पूरे क्षेत्र में ‘अभूतपूर्व’ शांति, प्रगति और समृद्धि देखने को मिली है। केंद्र ने कहा था कि कि आतंकवादियों की तरफ से सड़कों पर की जाने वाली हिंसा और अलगाववादी नेटवर्क अब ‘अतीत की बात’ हो चुकी है। हलफनामें में क्षेत्र की विशिष्ट सुरक्षा स्थिति का संदर्भ देते हुए केंद्र ने कहा था कि आतंकवादी-अलगाववादी एजेंडा से जुड़ी सुनियोजित पथराव की घटनाएं वर्ष 2018 में 1,767 थीं, जो घटकर 2023 में आज की तारीख में शून्य हो गई हैं। इसके साथ ही सुरक्षाकर्मियों के हताहत होने के मामलों में 2018 की तुलना में 2022 में 65.9 प्रतिशत की कमी का भी जिक्र किया गया था।

केन्द्र के हलफनामे का कोर्ट में दलील के तौर पर इस्तेमाल नहीं होगा

हालांकि, केंद्र की ओर से दाखिल हलफनामे का कोर्ट में दलील के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।पीठ ने कहा था कि पांच अगस्त 2019 की अधिसूचना के बाद पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर की स्थिति के संबंध में केंद्र की ओर से सोमवार को दाखिल हलफनामे का पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा संवैधानिक मुद्दे पर की जा रही सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था और दो केंद्र शासित प्रदेशों 1. जम्मू और कश्मीर, 2. लद्दाख में विभाजित कर दिया था। केंद्र के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसे 2019 में संविधान पीठ के पास भेज दिया गया था।

दिल्ली सेवा विधेयक पर सरकार को मिला बीजद का साथ, विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का करेगी विरोध

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दिल्ली सेवा बिल को मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया।बीजू जनता दल (बीजद) दिल्ली सेवा अध्यादेश संबंधी विधेयक का समर्थन करेगा और सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करेगा।बीजद) के राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी दिल्ली सेवा अध्यादेश संबंधी विधेयक का समर्थन करेगी और सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करेगी। बीजू जनता दल (बीजेडी) ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में अपने सांसदों को तीन-लाइन व्हिप जारी किया है।

वाईएसआर कांग्रेस के बाद बीजद ऐसी दूसरी पार्टी है जिसने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पर केंद्र को समर्थन देने की घोषणा की है।ओडिशा के सत्ताधारी दल के फैसले से नरेन्द्र मोदी सरकार को राज्यसभा में बहुमत प्राप्त करने की दिशा में मदद मिलेगी। राज्यभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत गठबंधन को बहुमत प्राप्त नहीं है।

लोकसभा में बीजेपी के पास बहुमत है, जहां उसके 301 सांसद हैं। अगर बीजेपी के सहयोगी दलों के गठबंधन एनडीए की बात करें, तो सांसदों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। एनडीए के सांसदों की संख्या 333 है, जो बहुमत के आंकड़े से बहुत ज्यादा है। दूसरी ओर विपक्ष के पास सिर्फ 142 सांसद हैं, जिसमें से अकेले 50 सांसद तो कांग्रेस से ही हैं। इस तरह लोकसभा में बीजेपी के पास बहुमत है।

अब बात करते हैं, राज्यसभा की। राज्यसभा में बीजेपी के सांसदों की संख्या 93 है, जबकि सहयोगी दलों के सांसदों की संख्या को जोड़ लिया जाए, तो ये आंकड़ा 105 पर पहुंच जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि बीजेपी को पांच मनोनीत और दो निर्दलीय सांसदों का साथ भी मिलना तय माना जा रहा है। इस तरह राज्यसभा में बीजेपी के पास कुल सांसदों की संख्या 112 तक पहुंच जाएगी।हालांकि, भले ही ये संख्या ज्यादा लगती है, मगर अभी भी बहुमत के आंकड़े से बीजेपी 8 सांसद दूर है।बीजेपी को दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा से पास करवाने के लिए बीएसपी, जेडीएस और टीडीपी के एक-एक सांसदों की भी जरूरत होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, बीजेपी राज्यसभा में बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस के भरोसे है।

2,000 रुपए के 88% नोट बैंकों में लौटे, अब चलन में 42 हजार करोड़ मूल्य के नोट

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देश में 88 प्रतिशत 2000 के नोट बैकों में वापस आ चुके हैं।आरबीआई ने ये जानकारी दी है।भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि 31 जुलाई 2023 तक 3.14 लाख करोड़ रुपये के 2000 रुपये के नोट बैंकों में वापस आ गए हैं। अब महज 42 हजार करोड़ रुपये मूल्य के नोट ही बाजार में चलन में है।

आरबीआई के मुताबिक 19 मई 2023 तक कुल 3.56 लाख करोड़ रुपये के 2,000 रुपये के नोट्स सर्कुलेशन में थे। 31 जुलाई 2023 तक 3.14 लाख करोड़ रुपये के 2000 रुपये के नोट बैंकों में वापस आ चुका है। अब 42000 करोड़ रुपये के नोट केवल सर्कुलेशन में बचा हुआ है। बता दें कि 30 सितंबर 2023 2,000 के नोट जमा करने या एक्सचेंज करने की आखिरी तारीख है।

आरबीआई ने जब इन नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की थी, तब 3.56 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में मौजूद थे। गत 31 मार्च को इन नोटों का मूल्य 3.62 लाख करोड़ रुपये था। आरबीआई ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में लौटकर आने वाले 2,000 रुपये के नोट में से करीब 87 फीसदी नोट बैंकों में जमा के रूप में आए हैं जबकि 13 फीसदी नोट अन्य मूल्यों के नोट से बदले गए हैं।

बता दें, आरबीआई ने 19 मई को 2,000 रुपये मूल्य के नोट को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी। इसके लिए उपभोक्ताओं को 30 सितंबर तक ये नोट बैंकों में जमा करने या वहां पर बदलने की सुविधा दी गई है।केंद्रीय बैंक ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए अपने पास मौजूद 2,000 रुपये मूल्य के नोट सितंबर तक बैंकों में जाकर जमा कर दें या उन्हें दूसरे नोट से बदल लें।

मणिपुर मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा-प्राथमिकी दर्ज करने में काफी देरी हुई, राज्य पुलिस ने कानून-व्यवस्था से नियंत्रण खो दिया

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मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को फिर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस दौरान स्थानीय पुलिस पर सवाल खड़े किए और कहा कि एफआईआर को दर्ज करने में काफी देरी हुई है।हालात राज्य की पुलिस के नियंत्रण के बाहर हैं।कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार (7 अगस्त) के लिए तय की और मणिपुर के डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर सवालों के जवाब देने को कहा है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है संवैधानिक मशीनरी का पूरी तरह ‘ब्रेकडाउन’ हो चुका है। वहां कोई कानून व्यवस्था नहीं बची है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य में 2 महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाए जाने संबंधी वीडियो को ‘बेहद परेशान’ करने वाला बताते हुए कहा कि घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने में काफी देरी हुई।

सुनवाई शुरू होने पर मणिपुर सरकार ने पीठ को बताया कि उसने मई में जातीय हिंसा भड़कने के बाद 6,523 प्राथमिकियां दर्ज कीं। इनमें 11 एफआईआर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा-यौन उत्पीड़न को लेकर हैं। हिंसा के दौरान जो भी शव बरामद हुए हैं, उन सभी का पोस्टमॉर्टम हुआ है। केंद्र और मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में राज्य पुलिस ने ‘जीरो’ प्राथमिकी दर्ज की थी। मेहता ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि मणिपुर पुलिस ने वीडियो मामले में एक नाबालिग समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर पुलिस से नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना की जांच बहुत सुस्त है और राज्य में कानून एवं व्यवस्था और संवैधानिक तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है। यह साफ है कि पुलिस ने राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर से नियंत्रण खो दिया है और अगर कानून एवं व्यवस्था तंत्र लोगों की रक्षा नहीं कर सकता तो नागरिकों का क्या होगा? इसने कहा कि राज्य पुलिस जांच करने में अक्षम है, उसने स्थिति से नियंत्रण खो दिया है।

हीरो मोटोकॉर्प चेयरमैन पवन मुंजाल के घर ईडी की छापेमारी, जानें क्या है पूरा मामला

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हीरो मोटोकॉर्प के कार्यकारी अध्यक्ष पवन मुंजाल और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के अनुसार दिल्ली और पड़ोसी गुरुग्राम में स्थित परिसरों की तलाशी ली गई।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत हीरो मोटोकॉर्प के कार्यकारी अध्यक्ष पवन मुंजाल और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ छापेमारी की है। यह जांच राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की एक शिकायत के चलते हो रही है। यह शिकायत कथित रूप से मुंजाल के करीबी व्यक्ति के खिलाफ है। इस व्यक्ति की अघोषित विदेशी मुद्रा ले जाने के आरोप में जांच की गई थी।

ईडी की छापेमारी की खबर के बाद करीब 1.30 बजे हीरो मोटोकॉर्प के शेयरों में करीब 4 फीसदी की गिरावट देखी गई और यह 3,083 रुपये पर कारोबार कर रहा था। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू ऑटोमोबाइल प्रमुख हीरो मोटोकॉर्प सरकार के रडार पर है।कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने कंपनी के खिलाफ जांच शुरू की है। यह जांच हीरो मोटोकॉर्प के कुछ ट्रांजेक्‍शन में आयकर विभाग की ओर से की गई पूर्व जांच के बाद शुरू की गई है।

हीरो मोटोकॉर्प 2001 में एक कैलेंडर वर्ष में यूनिट वॉल्यूम बिक्री के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी दोपहिया निर्माता बन गई, और पिछले लगातार 20 वर्षों से इस खिताब को बनाए रखा है। कंपनी की एशिया, अफ्रीका और दक्षिण और मध्य अमेरिका के 40 देशों में उपस्थिति है।

”अपनों” की आपत्ति के बावजूद शरद पवार ने पीएम मोदी के साथ साझा किया मंच, क्या “INDIA”को देने वाले हैं झटका

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज पुणे में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। इस कार्यक्रम में शरद पवार भी थे। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ही पीएम मोदी को तिलक पुरुस्कार से सम्मानित किया। एनसीपी में टूट के बाद पहली बार पीएम मोदी और शरद पवार एक मंच पर दिखाई दिए। इस दौरान दोनों नेताओं ने एक दूसरे से गर्मजोशी के साथ मुलाकात की।बता दें कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने नए विपक्षी गठबंधन INDIA की मांग को ठुकराते हुए न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मंच साझा किया बल्कि उनके सम्मान पाने के भी साक्षी बने।

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विपक्षी दलों के मना करने के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए

दरअसल, नये बने विपक्षी गठबंधन इंडिया के लोगों ने पीएम मोदी के साथ तिलक पुरस्कार मिलने के कार्यक्रम में शरद पवार को पेश होने से रोका था। विपक्षी दलों के इस सुझाव को मानने से पवार ने इंकार कर दिया। इंडिया के सदस्यों कहना था कि ऐसे वक्त में जब बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर एक मोर्चा बनाया जा रहा है तो पवार का इस कार्यक्रम में शामिल होना विपक्ष के लिए अच्छा नहीं होगा। पवार ने उन सांसदों से मुलाकात नहीं की थी जो उनको इस समारोह में शामिल नहीं होने के लिए मनाना चाहते थे। 

विपक्षी दलों के नेताओं ने नहीं की मुलाकात

पवार दिल्ली में थे तब प्रतिनिधिमंडल में शामिल अलग-अलग विपक्षी दलों के नेताओं ने उनसे मुलाकात करने का समय मांगा। उनसे मुलाकात करना तो दूर, पवार दिल्ली में रुके ही नहीं और सीधे पुणे चले आए जहां पीएम के साथ उनका कार्यक्रम था।

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा-पवार कार्यक्रम से दूर रह सकते थे

पुणे के इस कार्यक्रम को लेकर महाविकास अघाड़ी में हड़कंप मचा हुआ है। कांग्रेस और शिवसेना उद्धव खुलकर शरद पवार को कार्यक्रम में ना जाने की नसीहत दे रहे थे लेकिन शरद पवार ने उनकी बातों को तवज्जो नहीं दिया।इस पर शिवसेना (यूबीटी) ने मंगलवार को कहा कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस कार्यक्रम से दूर रह सकते थे। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा था कि अगर इस समय शरद पवार प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा करते हैं तो इससे लोगों तक विपक्षी गठबंधन को लेकर क्या मैसेज जाएगा, इससे पवार को भी अवगत होना चाहिए। उन्होंने आगे यह भी कहा था कि यहां पवार के रुख को लेकर भ्रम हो सकता है, उन्हें स्थिति साफ करनी होगी लेकिन हम साथ हैं। एमवीए मजबूत है और INDIA गठबंधन और भी ज्यादा मजबूत है।

'सामना' के जरिए भी शिवसेना (यूबीटी) ने दी सलाह

शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय में दावा किया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और फिर पार्टी में विभाजन कराया और महाराष्ट्र की राजनीति को खराब कर दिया। कुछ लोगों के मन में शरद पवार को लेकर संदेह हैं और अच्छा मौका था ऐसे संदेह को जवाब देने का वह इस कार्यक्रम से दूर रह सकते थे लेकिन उन्होंने पीएम मोदी का स्वागत किया जो कुछ लोगों को पसंद नहीं आया।

लोकसभा में दिल्ली सर्विस बिल पेश, कांग्रेस ने किया विरोध,कहा-संविधान को कमजोर कर रही सरकार

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अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग से जुड़ा दिल्ली सेवा बिल केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में पेश किया। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने गृहमंत्री अमित शाह की ओर से सदन में बिल पेश किया।इस पर चर्चा कल होगी।बिल के खिलाफ लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष की तरफ से लगातार नारेबाजी हुई। इसके बाद लोकसभा को स्थगित कर दिया गया।

अमित शाह ने बताया क्यों पेश किया बिल

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान से संसद को अधिकार दिया है। संसद को दिल्ली के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत संसद दिल्ली के लिए कोई भी कानून बना सकता है। संसद के नियमों के आधार भी कोई आधार नहीं बनता है इसलिए इस बिल को संसद में पेश करने की अनुमति दी जाए।

यह बिल संघीय ढांचे पर चोट-अधीर रंजन

कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि दिल्ली सर्विस बिल विधायक संविधान के खिलाफ है। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने की कोशिश कर रही है। दिल्ली सरकार के कार्यों में केंद्र सरकार हस्तक्षेप करना चाहती है। वो इस फैसले को निष्क्रिय करने का प्रयास कर रहे हैं। यह बिल संघीय ढांचे पर चोट है। ये उसकी कब्रगाह बनेगा। ये बिल संविधान का उल्लंघन है।

अविश्वास प्रस्ताव पर 8 से होगी चर्चा, पीएम मोदी 10 अगस्त को देंगे जवाब

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मणिपुर मुद्दे पर संसद में हंगामा जारी है। इस बीच केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बड़ी अपडेट है। लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय हो गई है। अविश्वास प्रस्ताव पर 3 दिन चर्चा होगी, जो 8 से शुरू होकर 10 अगस्त तक चलेगी।आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अगस्त को जवाब देंगे।

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दरअसल, विपक्ष मणिपुर मुद्दे पर संसद में चर्चा और प्रधानमंत्री के बयान की मांग कर रहा है। इसी के लिए विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया ताकि अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार के मुखिया होने के नाते प्रधानमंत्री संसद में जवाब दें।

बता दें कि 26 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियमों के तहत आवश्यक 50 से अधिक सांसदों की गिनती के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि बहस का समय वह तय करेंगे और सदन को बतायेंगे. स्पीकर ने कहा था कि उन्हें सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए गोगोई से नोटिस मिला है।

लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित हुए पीएम मोदी, मंच पर एक तरफ दिखे अजित तो दूसरी तरफ शरद पवार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र नोदी को पुणे में लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पवार मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। शरद पवार चूंकि इस कार्यक्रम के चीफ गेस्ट थे, इसलिए पीएम मोदी को सम्मानित करने की जिम्मेदारी भी उन्होंने ही उठाई। इस दौरान एक ही मंच पर शरद पवार और अजीत पवार मौजूद रहे। इस समारोह में राज्यपाल और सीएम एकनाथ शिंदे भी शामिल हुए। पीएम मोदी ने इसे अविस्मरणीय क्षण बताया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने पुरस्कार के साथ मिलने वाली राशि को नमामि गंगे परियोजना में दान देने की घोषणा की।

लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए काफी अहम और भावुक करने वाला है। पुणे की भूमि आदर की भूमि है, मैंने यहां के मंदिर का आशीर्वाद लिया। पीएम मोदी ने कहा कि आज जो सम्मान मिला है, यह मेरे लिए काफी खास है। जब भी कोई अवॉर्ड मिलता है तो उसके साथ हमारी जिम्मेदारी भी जुड़ जाती है। पीएम मोदी बोले कि जिनके नाम में गंगाधर है, उनके अवॉर्ड की जो ईनाम राशि मुझे दी गई है मैं वो नमामि गंगे प्रोजेक्ट में दे रहा हूं। लोकमान्य तिलक जी ने स्वतंत्रता आंदोलन की पूरी दिशा बदल दी थी, जब अंग्रेज कहते थे कि भारतवासी देश चलाने के लायक नहीं है, तब उन्होंने स्वराज का नारा दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि लोकमान्य गंगाधर तिलक में युवाओं को पहचानने की कला थी, उन्होंने ही वीर सावरकर को पहचाना। तिलक चाहते थे कि वीर सावरकर विदेश जाकर पढ़ाई करें और वापस आकर देश की सेवा करें। वीर सावरकर के लिए तिलक जी ने सिफारिश की थी, उन्होंने राष्ट्र निर्माण को बढ़ावा दिया।पीएम मोदी ने कहा कि आज अगर हम विदेशी आक्रांताओं के नाम पर बनी सड़क का नाम बदलते हैं, तो कुछ लोगों को मिर्ची लग जाती है लेकिन आजादी से पहले सरदार साहब ने लोकमान्य गंगाधर तिलक की मूर्ति लगाने के लिए अंग्रेजों को चुनौती दे दी थी।

बता दें कि आज 1 अगस्त को लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि होती है। इस मौके पर तिलक स्मारक मंदिर ट्रस्ट की ओर से लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। ये सम्मान इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया।