अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर मैदान में उतरे सचिन पायलट, कांग्रेस ने कहा- अनशन पार्टी विरोधी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान की पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट आज पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक्शन ना होने के बाद अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ जयपुर में अनशन पर बैठने जा रहे हैं। पायलट इस बार गहलोत के साथ आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी रणनीति बना ली है और इसी रणनीति पर वह आगे बढ़ रहे हैं। 

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कांग्रेस ने अनशन को बताया पार्टी विरोधी

पिछली सरकार के भ्रष्टाचार पर अपनी राज्य सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ राजस्थान के नेता सचिन पायलट के अनशन से कुछ घंटे पहले कांग्रेस के राज्य प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने उनके आंदोलन को पार्टी विरोधी गतिविधि बताया। राजस्थान के एआईसीसी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बयान जारी करके कहा कि सचिन पायलट का दिन भर का उपवास पार्टी हितों के खिलाफ है और पार्टी विरोधी गतिविधि है। अगर उनकी अपनी सरकार से कोई समस्या है तो मीडिया और जनता के बजाय पार्टी मंचों पर चर्चा की जा सकती है। रंधावा ने कहा कि मैं पिछले 5 महीनों से एआईसीसी प्रभारी हूं और पायलट जी ने मुझसे इस मुद्दे पर कभी चर्चा नहीं की। मैं उनके साथ संपर्क में हूं और मैं अभी भी शांत बातचीत की अपील करता हूं क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी के लिए एसेट हैं।

पायलट मूल्यवान नेता- रंधावा

रंधावा ने कहा कि वह बीते पांच महीनों से राज्य के प्रभारी हैं और पायलट ने इस तरह के मुद्दों पर उनसे कोई चर्चा नहीं की। रंधावा ने कहा, 'मैं उनसे संपर्क में हूं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह कांग्रेस के मूल्यवान नेता हैं। मैं उनसे बातचीत की अपील करता हूं। 

गहलोत और वसुंधरा राजे के बीच साठगांठ के आरोप

इससे पहले रविवार को उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे की साठगांठ के आरोप लगाए थे। पायलट ने कहा था कि सीएम रहते हुए गहलोत ने राजे सरकार के घोटालों पर कोई भी कार्रवाई नहीं की।

पायलट के बगावती तेवर से कांग्रेस को हो सकता है नुकसान

बता दें कि राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। विस चुनावों से ठीक पहले पायलट का यह बगावती तेवर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है। दो दिग्गजों की आपसी कलह लगातार आलाकमान के सामने सिरदर्द बनी हुई है। पिछले 3 सालों में लगातार इस खींचतान में उतार-चढ़ाव देखे गए लेकिन आलाकमान इस लड़ाई को सुलझाने में पूरी तरह से नाकाम दिखाई दिया। हालांकि, अब राजस्थान विधानसभा चुनावों के मुहाने पर खड़ा है, ऐसे में दोनों की यह लड़ाई कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव में हार की कगार पर धकेल।

नितिन गडकरी ने लिया जोजिला सुरंग का जायज़ा, बोले- 2-3 गुना बढ़ जाएगा पर्यटन, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

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केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कश्मीर के सोनमर्ग में ज़ोजिला सुरंग के लिए चल रहे काम का जायजा लिया। इस दौरान गडकरी ने सुरंग को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह परियोजना एक सपने को पूरा करने जैसी है जो कश्मीर घाटी को कन्याकुमारी से जोड़ती है। इस सुरंग के बनने से जम्मू-कश्मीर में पर्यटन 2-3 गुना बढ़ जाएगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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जोजिला सुरंग उस क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी

गडकरी ने 11,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर काम का निरीक्षण करने के बाद संवाददाताओं से कहा, यह भारत की एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण सुरंग है। सुरंग की लंबाई एशिया में सबसे अधिक मानी जाती है। सर्दियों के दौरान श्रीनगर-लद्दाख राजमार्ग के बंद होने से केंद्र शासित प्रदेश में नागरिक आबादी और सेना दोनों के जीवन पर बुरा असर पड़ता है।जोजिला सुरंग उस क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी, जो जून 2020 से सेना और चीनी सेना के बीच लंबे समय से गतिरोध का सामना कर रहा है।

इस साल अक्टूबर में होगा उद्घाटन

नितिन गडकरी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से 19 टनलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 2680 करोड़ रुपये की लागत से 6.5 किमी लंबाई के जेड-मोड़ टनल एवं एप्रोच रोड का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह 2-लेन टनल कश्मीर के गांदरबल जिले में गगनगीर और सोनमर्ग के बीच पहाड़ी थजीवास ग्लेशियर के नीचे बन रही है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि जेड-मोड़ सुरंग जो गगनगीर को सोनमर्ग से जोड़ती है और मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में रिसॉर्ट को सभी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करती है। इसका उद्घाटन इस साल अक्टूबर में किया जाएगा। 

जोजिला टनल का 28% काम पूरा हुआ

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि जोजिला टनल परियोजना के अंतर्गत 13,153 मीटर की एक मुख्य जोजिला टनल के साथ 810 मीटर कुल लंबाई की 4 पुलिया, 4,821 मीटर कुल लंबाई की 4 नीलग्रार टनल, 2,350 मीटर कुल लंबाई के 8 कट और कवर और 500 मीटर, 391 मीटर और 220 मीटर कुल लंबाई के 3 वर्टिकल वेंटिलेशन शाफ्ट प्रस्तावित है। अब तक जोजिला टनल का 28% काम पूरा हुआ है।

अमित शाह की चीन को दो टूक, कहा-सुई की नोंक जितनी जमीन भी कोई नहीं ले सकता

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अरुणाचल प्रदेश दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चीन को करारा जवाब दिया है। अमित शाह ने चीन को टारगेट करते हुए कहा है कि कोई भी हमारी सीमा पर आंख उठा कर नहीं देख सकता है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि वह जमाना अब चला गया है जो भारत की जमीन पर कोई भी अतिक्रमण कर सकता था। अमित शाह ने अरुणाचल प्रदेश में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास किबिथू इलाके में 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' और विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने चीन को दो टूक जवाब दिया।

अमित शाह ने कहा- अरुणाचल प्रदेश की एक बहुत खास और अच्छी बात है, जब आप यहां के लोगों से मिलोगे तो वे नमस्ते नहीं करते हैं। यहां के लोग जय हिंद बोलते हैं। यहां कोई भी अतिक्रमण नहीं कर सकता, इसकी वजह यहां के लोगों की देशभक्ति है। शाह ने 1962 की जंग में शहीद हुए किबिथू के जवानों को याद करते हुए कहा- संख्या कम होने के बाद भी हमारे जवान बहादुरी से लड़े। 1965 में टाइम मैगजीन ने भी इस लड़ाई में भारतीय सेना के शौर्य की तारीफ की थी। भारत में सूर्य की पहली किरण इस भूमि पर पड़ती है। भगवान परशुराम ने इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा था। यह भारत माता के मुकुट का एक उज्ज्वल गहना है।

हम पर बुरी नजर डालने की ताकत किसी में नहीं-शाह

अमित शाह ने कहा कि पूरा देश आज अपने घरों में चैन की नींद सो सकता है, क्योंकि हमारे आईटीबीपी के जवान और सेना हमारी सीमाओं पर दिन-रात काम कर रहे हैं। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि हम पर बुरी नजर डालने की ताकत किसी में नहीं है। सैनिकों के पराक्रम से हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। ऐसे में हमारी सीमा में अतिक्रमण की तो कोई बात ही नहीं है। देश की सुई की नोंक जितनी जमीन भी कोई नहीं ले सकता।

‘लुक ईस्ट’ नीति के कारण पूर्वोत्तर देश के विकास में योगदान दे रहा-शाह

केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा, 2014 से पहले पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को अशांत क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, लेकिन पिछले 9 वर्षों में, पीएम मोदी की ‘लुक ईस्ट’ नीति के कारण, पूर्वोत्तर को अब एक ऐसा क्षेत्र माना जाता है, जो देश के विकास में योगदान देता है।

बता दें कि चीन ने हाल ही में इस जगह पर अपने नक्शे में 11 जगहों के नाम बदले थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच फिर से तनाव की स्थिति बन रही है। ऐसे में गृहमंत्री का अरुणाचल दौरा चीन के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

ट्विटर ने ‘बीबीसी” को बताया सरकारी पैसे से चलने वाली मीडिया, मस्क ने पूछा- आखिर बीबीसी का मतलब क्या होता है

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एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद सोशल मीडिया साइट आए दिन सुर्खियों में रहता है।कुछ दिन पहले ट्विटर की डिस्प्ले पिक्चर से लोगो बदल दिया गया था।अब सोशल मीड‍िया प्‍लेटफार्म ट्विटर ने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (बीबीसी) को “सरकार द्वारा वित्त पोषित मीडिया” के रूप में लेबल करके नया व‍िवाद खड़ा कर द‍िया है।

ट्विटर ने बीबीसी के वेरिफाइड अकाउंट पर गोल्डन टिक के साथ 'गवर्मेंट फंडेड मीडिया' का टैग लगाया है। ट्विटर पर देख सकते हैं कि बीबीसी के अकॉउंट के साथ नीचे में ‘गवर्नमेंट फंडेड मीडिया’ लिखा आ रहा है। बीबीसी के अलावा ट्विटर ने यह ठप्पा पीबीएस, एनपीआर और वॉयस ऑफ अमेरिका पर भी लगाया है।

ट्विटर के इस कारनामे पर बीबीसी ने आपत्ति जताई है।बीबीसी ने सीएनएन को दिए एक बयान में यह भी कहा है क‍ि हम इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए ट्विटर से बात कर रहे हैं। बीबीसी स्वतंत्र है और हमेशा से रहा है। हम ब्रिटिश जनता द्वारा लाइसेंस शुल्क के माध्यम से वित्त पोषित हैं। बीबीसी मुख्य रूप से यूके की जनता द्वारा लाइसेंस शुल्क के माध्यम से वित्त पोषित है, जो गैर-बीबीसी चैनल या लाइव सेवाओं को देखने के लिए भी आवश्यक है। यह वाणिज्यिक संचालन से आय का पूरक है।

बता दें कि ट्विटर एकाउंट के 2.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं। जिस पर बीबीसी टेलीविजन कार्यक्रम, रेडियो शो, पॉडकास्ट, ब्रेकिंग, न्यूज स्टोरी आदि की अपडेट को शेयर करता है।सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, बीबीसी न्यूज (वर्ल्ड) और बीबीसी ब्रेकिंग न्यूज सहित बीबीसी के अन्य अकाउंट्स को यह लेबल नहीं दिया गया है। ट्विटर ने बीबीसी को गवर्मेंट फंडेड मीडिया का लेबल देने का कोई कारण नहीं बताया है।

यूपी निकाय चुनाव का एलान : दो चरणों में वोटिंग, 13 मई को बन जाएंगी शहरी संसद, यहां डिटेल में जानिये प्रदेश का पूरा चुनाव कार्यक्रम

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 उत्तर प्रदेश में बहुप्रतिक्षित निकाय चुनाव का एलान हो गया है। राज्य निर्माचन आयोग ने रविवार शाम को चुनाव की तिथियों का एलान कर दिया है। चुनाव का एलान होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। यूपी में दो चरणों में चार और ग्यारह मई को चुनाव कराए जाने हैं और 13 मई तो गिनती शुरू हो जाएगी। आयोग ने पहले ही साफ कर दिया है नगर निगम में चुनाव ईवीएम से तथा बाकी चुनाव मतपत्रों से होने हैं।

मुरादाबाद में पहले चरण में चुनाव

रविवार शाम को पत्रकार वार्ता में निर्वाचन आयोग ने एलान किया है कि प्रदेश में नामांकन प्रक्रिया 11 अप्रैल से शुरू हो जाएगी। नामांकन की जांच समेत नामांकन की प्रकिया 25 अप्रैल तक मुकम्मल हो जाएगी और चार तथा ग्यारह मई को मतदान किया जाएगा। मतों की गिनती 13 मई को होगी। पहले चरण में सहारनपुर मंडल, मुरादाबाद मंडल, आागरा मंडल, झांसी मंडल, प्रयागराज मंडल, लखनऊ मंडल, देवीपाटन मंडल, गोरखपुर मंडल व वाराणसी मंडल में मतदान होगा। दूसरे चरण में मेरठ, बरेली, अलीगढ़, कानपुर, चित्रकूट, अयोध्या, बस्ती, आाजमगढ़ व मीरजापुर मंडल में मतदान होगा। पहले चरण में चार मई को शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, झांसी, जालौन, ललितपुर, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, उन्नाव, हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुरखीरी, गोण्डा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोरखपुर देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर, गाजीपुर, वाराणसी, चंदौली व जौनपुर में मतदान होगा। दूसरे चरण में 11 मई को मेरठ, हापुड़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, बागपत, बुलंदशहर, बदायूं, शाहजहांपुर, बरेली, पीलीभीत, हाथरस, कासगंज, एटा, अलीगढ़, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फरुर्खाबाद, इटावा, कन्नौज औरैया, हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा, बांदा, अयोध्या, सुलतानपुर, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, अममेठी, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, सोनभद्र, भदोही व मीरजापुर में मतदान होना हैै।

नगर निगमों में ईवीएम से होगा चुनाव

उत्तर प्रदेश में 14,684 पदों पर चुनाव होना है जिसमें 17 महापौर, 1420 पार्षद के चुनाव ईवीएम होने हैं। इसके अलावाा नगर पालिका परिषद के 199 अध्यक्ष तथा 5327 सदस्यों तथा नगर पंचायत के 544 अध्यक्ष तथा 7178 सदस्यों का निर्वाचन मतपत्रों से।किया जाएगा। प्रदेश के 760 नगरीय निकाय में 14684 पदों पर चुनाव होना है। मुरादाबाद मंडल के रामपुर, सम्भल, बिजनौर, अमरोहा में चुनाव चार मई को होगा और गिनती 13 मई को होनी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल लगाने की हिदायत की गई है।

चारधाम यात्रा 2023 को बनाया जा रहा सुगम : बदरीनाथ-केदारनाथ में भक्‍तों के लिए बनेगी टेंट कॉलोनी, केदारनाथ में 10 हजार बेड की व्यवस्था

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 उत्तराखंड की सरकार इस बार चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों के रहने की सुविधा को देखते हुए टेंट कॉलोनी के निर्माण की योजना बना रही है। विशेष रूप से केदारनाथ धाम में टेंट कॉलोनी बनाकर पांच हजार बेड की व्यवस्था की जा रही है।

 सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक के बीच निजी व सरकारी भूमि पर पांच हजार क्षमता की टेंंट कॉलोनी का निर्माण किया जाएगा। इसी प्रकार बदरीनाथ में शुरुआती चरण में कार्मिकों के रहने के लिए टेंट कॉलोनी का निर्माण किया जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर यहां यात्रियों के लिए भी टेंट कॉलोनी बनाई जाएगी।

प्रदेश में चारधाम यात्रा में गत वर्ष रिकार्ड संख्या में यात्री आए थे। इस दौरान यात्रियों को चारधाम यात्रा मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसे देखते हुए इस वर्ष सरकार ने चारधाम यात्रा में यात्री सुविधाओं को बढ़ाने का निर्णय लिया है।

यात्रियों के रहने की सुविधाओं पर फोकस

फोकस इस बार यात्रियों के रहने की सुविधाओं पर किया जा रहा है। केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार केदारघाटी घोड़ापड़ाव से लेकर केदारनाथ धाम तक 10 हजार बेड क्षमता की अलग-अलग टेंट कॉलोनी बनाई जाएंगी।

इसके लिए प्रशासन ने स्थानीय लोगों को अपनी निजी भूमि में टेंट कॉलोनी बनाने के लिए भी अनुमति दी है। इसके साथ ही गढ़वाल मंडल विकास निगम व अन्य संस्थाओं से भी टेंट कॉलोनी बनाने को कहा गया है। वहीं, केदारनाथ धाम में भी पांच हजार बेड क्षमता की टेंट कॉलोनी बनाई जाएगी। उद्देश्य यह कि यात्रियों को यहां ठहरने में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

प्लास्टिक बोतल व रैपर वापसी को जारी किए जाएंगे बारकोड

चारधाम यात्रा में इस बार यात्रा प्रशासन ने सफाई व्यवस्था का खास ध्यान रखा है। इसके लिए गुप्तकाशी से लेकर केदारनाथ धाम तक जगह-जगह दुकानों में प्लास्टिक की बोतलें व रैपर वापस लिए जाएंगे। हर बोतल व रैपर पर एक क्यू आर कोड लगाया जाएगा। इन्हें दुकानों पर वापस करने में 10 रुपये प्रति बार कोड दिए जाएंगे। यात्रा प्रशासन का लक्ष्य 10 लाख बोतलों व रैपर को वापस लेने का है। यह व्यवस्था अन्य धामों में भी लागू की जाएगी।

प्लास्टिक में प्रसाद की पैकिंग नहीं

चारों धामों को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए इस बार प्रसाद की प्लास्टिक फ्री पैकिंग की जाएगी। यात्रा प्रशासन ने प्रसाद बनाने वाले सभी स्वयं सहायता समूहों को इस बार प्लास्टिक में प्रसाद न पैक करने का अनुरोध किया है।

दुकानों पर रेट लिस्ट लगाना होगा 

चारधाम यात्रा में इस बार नकली खाद्य पदार्थ और मनमानी कीमतों पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए यात्रा मार्ग पर पडऩे वाले सभी होटल व ढाबों को रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य होगा। वे तय मूल्य से अधिक पर सामान नहीं बचेंगे। इस पर नजर रखने के लिए एसडीएम व तहसीलदार के नेतृत्व में टीमें बनाई जाएंगी। ये टीमें नकली खाद्य पदार्थों पर नजर रखने के साथ ही मनमाने रेट पर लगाम कसेंगी और यात्रियों की शिकायतों का निस्तारण करेंगी।

यात्रा मार्ग पर जगह-जगह शौचालय

यात्री सुविधाओं के मद्देनजर इस बार यात्रा मार्ग पर जगह-जगह शौचालय बनाए जाएंगे। इनमें मोबाइल शौचालय तो रहेंगे ही, साथ ही विभिन्न मार्गों पर 20-20 सीट वाले 10 बड़े शौचालय भी बनाए जा रहे हैं। इनमें स्नानकक्ष भी बनाए जाएंगे। केदारनाथ धाम व हेमकुंड साहिब में भी शौचालय बनाए जा रहे हैं।

चारधाम यात्रा में यात्री सुविधाओं और साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यात्रा मार्ग पर टेंट कॉलोनी बनाने के साथ ही प्लास्टिक की बोतलों को वापस लेने की व्यवस्था की जा रही है। जगह-जगह शौचालय भी बनाए जा रहे हैं। यात्रा मार्ग पर पडऩे वाले सभी जिलों को इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

बच्चे को होठों पर चूमने के विवाद पर दलाई लामा ने मांगी माफ़ी, कहा-अक्सर मजाकिया अंदाज में लोगों से मिलते हैं

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बच्चे को होठों पर चूमने के मामले में आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा विवादों में फंसते दिख रहे हैं। तिब्बत के 14वें आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का एक बच्चे को होठों से चूमते वीडियो वायरल हो रहा है। जिसके बाद बढ़े विवाद के बीच उन्हें बयान जारी कर माफी मांगी है। वीडियो में तिब्बती आध्यात्मिक नेता कथित रूप से बच्चे से अपनी जीभ चूसने के लिए कह रहे हैं। इससे विवाद पैदा हो गया है।

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एक बच्चे के होठों को चूमने और फिर उसे अपनी जीभ चूसने के लिए कहने वाले एक वीडियो ने दलाई लामा को मुश्किलों में डाल दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दलाई लामा को सम्मान देने के लिए जब एक बच्चा झुका था, तब उन्होंने उसे उसके होंठ पर किस किया और फिर अपनी जीभ बाहर निकालकर उसे चूसने को कहा था।दो मिनट पांच सेकेंड के वीडियो में दलाई लामा ने बच्चे को ऐसे अच्छे इंसानों को देखने के लिए कहा जो शांति और खुशी पैदा करते हैं और उन लोगों का अनुसरण नहीं करने को कहा जो दूसरों की हत्या करते हैं।

यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने कहा कि एक अध्यात्मिक गुरु का ये व्यवहार घिनौना है। विवादद बढ़ने के बाद दलाई लामा की तरफ जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘एक वीडियो क्लिप प्रसारित किया जा रहा है, जो हाल ही की एक मुलाकात को दिखाता है। जब एक युवा लड़के ने परम पावन दलाई लामा से पूछा कि क्या वह उन्हें गले लगा सकता है। दलाई लामा अपने शब्दों से पहुंची ठेस के लिए लड़के, उसके परिवार के साथ-साथ दुनिया भर में उसके दोस्तों से माफी मांगना चाहते हैं। दलाई लामा मासूम और चंचल तरीके से अक्सर उन लोगों को चिढ़ाते हैं, जिनसे वे मिलते हैं। यहां तक कि सार्वजनिक रूप से और कैमरों के सामने भी चिढ़ाते हैं। उन्हें घटना पर खेद है।

इससे पहले दलाई लामा ने 2019 में ये कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि अगर उनकी उत्तराधिकारी एक महिला होती है तो उन्हें अधिक आकर्षक होना चाहिए। बाद में उन्होंने अपने इस बयान के लिए माफी मांगी थी।

अमृतपाल का करीबी पपलप्रीत गिरफ्तार, होशियारपुर में पुलिस ने दबोचा

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वारिस पंजाब दे के चीफ खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के सबसे करीबी साथी पपलप्रीत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसे होशियारपुर से पकड़ा गया।पपलप्रीत 18 मार्च को अमृतपाल के साथ ही फरार हुआ था। जालंधर से फरारी के बाद से लगातार पप्पलप्रीत अमृतपाल के साथ था। इसके बाद होशियारपुर में दोनों ने अलग अलग रास्ते ले लिए थे। बताया जा रहा है कि स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस ने बड़ा ऑपरेशन चलाकर पप्पलप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया है। एएनआई के मुताबिक, पपलप्रीत को पंजाब के होशियारपुर से पंजाब पुलिस और इसकी काउंटर इंटेलीजेंस यूनिट ने पकड़ा।

अमृतपाल के पुलिस के शिकंजे से भागने के पीछे पपलप्रीत का हाथ माना जाता है। अमृतपाल सिंह अपने कुछ करीबी सहयोगियों के साथ 18 मार्च को जालंधर जिले में पुलिस की पकड़ से बच निकला था। पपलप्रीत और अमृतपाल फरारी के बाद हर बार साथ नजर आए। इनकी पटियाला, कुरुक्षेत्र और दिल्ली में एक साथ होने की सीसीटीवी फुटेज सामने आई थी। इसके अलावा दोनों की एनर्जी ड्रिंक पीते की भी सेल्फी वायरल हुई थी।

पप्पलप्रीत जो अमृतपाल का राइट हैंड के तौर पर देखा जा रहा था उसकी गिरफ्तारी के बाद अब अमृतपाल की गिरफ्तारी की भी उम्मीद पैदा हो गई है। हालांकि, अमृतपाल सिंह आखिर कहां है यह किसी को पता नहीं। सीसीटीवी के आधार पर कभी उसे पंजाब के पटियाला, कभी उत्तराखंड, कभी यूपी के लखीमपुर, कभी हरियाणा के कुरुक्षेत्र तो कभी दिल्ली में देखे जाने का दावा किया जाता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने ने अग्निपथ योजना को माना वैध, स्कीम के खिलाफ अपीलों को किया खारिज

#supremecourtgavegreensignaltoagneepath_scheme

भारत सरकार की पायलट प्रोजेक्ट अग्निपथ योजना की वैधता को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने अग्निपथ की वैधता को सही ठहराने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।कोर्ट ने कहा कि केंद्र की योजना मनमानी नहीं है।कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक हित अन्य विचारों से ज्यादा जरूरी है।

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दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले 27 फरवरी को कहा था कि अग्निपथ योजना राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के प्रशंसनीय उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय हित में तैयार किए गए थे।दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई थीं।गोपाल कृष्ण और वकील एमएल शर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, हम हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। हाई कोर्ट ने इसके सभी पहलुओं पर विचार किया था। इसके साथ शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

वायुसेना में भर्ती से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

वहीं अग्निपथ योजना के लागू होने से पहले भारतीय वायुसेना में भर्ती से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर 17 अप्रैल को सुनवाई करेगा। बता दें कि अग्निपथ योजना आने के बाद भारतीय वायु सेना में भर्ती की पुरानी योजना को निरस्त कर दिया गया। इससे भर्ती में शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की नियुक्ति खटाई में पड़ गई। अब सर्वोच्च अदालत इस मामले पर सुनवाई करेगी।

क्या है अग्निपथ योजना

अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में हुई। इस योजना के तहत हर साल साढ़े सत्रह साल से 21 साल के बीच के करीब 45-50 हजार युवाओं को सेना में भर्ती किया जाएगा। इनमें से अधिकतर चार साल की सेवा के बाद सर्विस से बाहर हो जाएंगे और सिर्फ 25 प्रतिशत को ही अगले 15 साल के लिए सेवा जारी रखने के लिए चुना जाएगा। सरकार की अग्निपथ योजना का देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध भी हुआ था। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अग्निपथ योजना को देशहित में माना और कहा कि इससे हमारे सुरक्षा बल ज्यादा बेहतर बनेंगे।

राजस्थान कांग्रेस में फिर रार! सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच फिर द्वंद्व शुरू

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राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है। इस बार भी सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ अपना मोर्चा खोला है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (sachin pilot) और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच अदावत रविवार को अब नए रूप में सामने आई है। पायलट मंगलवार को गहलोत सरकार के खिलाफ जयपुर में अनशन पर बैठने वाले हैं। 

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पूर्व डिप्टी सीएम ने अपनी ही सरकार के खिलाफ 11 अप्रैल को अनशन करने का ऐलान कर दिया है। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक्शन नहीं होने का तर्क देकर अनशन की घोषणा कर दी। राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भाजपा राज में हुए करप्शन के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के मुद्दे पर अनशन की घोषणा करके सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पायलट का कहना है कि वसुंधरा राजे सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने का हमने वादा किया था लेकिन मौजूदा सरकार ने अपने इस वादे को पूरा नहीं किया है।

कांग्रेस नेतृत्व ने पायलट के आरोपों को खारिज किया

सचिन पायलट की ओर से अशोक गहलोत सरकार पर किए हमले के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का बयान भी सामने आया है। रंधावा ने पायलट के इस बगवाती कदम को 'उचिन नहीं' करार दिया है। उन्होंने पायलट के आरोपों को खारिज करते हुए यह भी कहा कि उन्होंने उनके सामने कभी भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि पायलट को सार्वजनिक तौर पर इस तरह बात रखने से पहले उनके समक्ष इस मुद्दे को उठाना चाहिए था। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दिनों में पायलट के साथ उनकी 20 से अधिक बैठकें हुए हैं। लेकिन उन्होंने एकबार भी इसका जिक्र नहीं किया। बता दें कि रंधावा को पिछले साल दिसंबर में प्रभारी बनकर राजस्थान आए थे।

गहलोत-सचिन का विवाद है पुराना

पायलट और गहलोत के बीच विवाद नया नहीं है। साल 2018 में सरकार बनने के बाद दोनों नेताओं के बीच सियासी लड़ाई एवं विवाद कई बार देखने को मिला है। राज्य में गहलोत और पायलट के अपने-अपने गुट हैं जो मौका मिलते ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने एवं हमला बोलने में देरी नहीं करते। 2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर दोनों गुट में खींचतान नजर आई और इसके बाद सीएम पद को लेकर भी दोनों में गतिरोध दिखा। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन और गहलोत के बेटे की हार के बाद पायलट और गहलोत में तल्खी और बढ़ गई। दोनों नेता एक-दूसरे के खिलाफ ज्यादा हमलावर हुए और जुबानी जंग तेज हुई। जुलाई 2020 में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच का मनमुटाव बगावत तक पहुंच गया था। लेकिन गहलोत ने जहां अपनी जादूगरी से सियासी तिकड़ साधते हुए कांग्रेस की सरकार बचा ली थी। वहीं कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट को मनाने में सफल रहा। राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच गुटबाजी एवं जुबानी हमले देखने को मिले। राहुल गांधी की यात्रा जब राजस्थान प्रवेश की तो दोनों नेताओं के बीच पोस्टर वार शुरू हो गया। अब विधानसभा चुनाव से पहले पायलट फिर बगावत पर उतर आए हैं। ऐसे में पार्टी फिर से दोनों के बीच समझाइश कराने में जुट गई है।