*सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस की कमेटी करेगी निर्वाचन आयुक्त का चुनाव*

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चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई चीफ की तर्ज पर ही मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जानी चाहिए।कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सीजेआई का पैनल इनकी नियुक्ति करेगा। पहले सिर्फ केंद्र सरकार इनका चयन करती थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के प्रधान न्यायाधीश की समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाएगी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष मौजूद नहीं हैं तो लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को समिति में लिया जाएगा। 5 सदस्यीय बेंच ने कहा कि ये कमेटी नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति मुहर लगाएंगे। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में साफ कहा कि यह प्रोसेस तब तक लागू रहेगी, जब तक संसद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती। 

न्यायमूर्ति के एम जोसेफ, न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने पिछले साल 24 नवंबर को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मत फैसले में चुनाव प्रक्रियाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र लोगों की इच्छा से जुड़ा है। संविधान पीठ ने कहा कि लोकतंत्र नाजुक है और कानून के शासन पर बयानबाजी इसके लिए नुकसानदेह हो सकती है। 

न्यायमूर्ति के एम जोसेफ ने कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखी जानी चाहिए। नहीं तो इसके अच्छे परिणाम नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वोट की ताकत सुप्रीम है, इससे मजबूत से मजबूत पार्टियां भी सत्ता हार सकती हैं। इसलिए इलेक्शन कमीशन का स्वतंत्र होना जरूरी है। यह भी जरुरी है कि यह अपनी ड्यूटी संविधान के प्रावधानों के मुताबिक और कोर्ट के आदेशों के आधार पर निष्पक्ष रूप से कानून के दायरे में रहकर निभाए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली बनाने की मांग

कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली बनाए जाने की मांग की गई थी। साल 2018 में चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता को लेकर कई याचिकाएं दायर हुईं थीं। याचिकाकर्ता अनूप बरांवल ने याचिका दायर कर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसे सिस्टम की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन सब याचिकाओं को क्लब करते हुए इसे 5 जजों की संविधान पीठ को भेज दिया था।बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम जजों की नियुक्ति के लिए होता है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज होते हैं। कॉलेजियम जजों की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को नाम भेजता है। इस पर केंद्र मुहर लगाती है, जिसके बाद जजों की नियुक्ति होती है।

चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए देश में कोई कानून नहीं

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर फिलहाल देश में कोई कानून नहीं है। नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के हाथ में है। चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति की ओर से की जाती है। आमतौर पर देखा गया है कि इस सिफारिश को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल ही जाती है। इसी के चलते चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं। 

चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर विवाद कब से

पिछले साल इस मामले में उस वक्त तूल पकड़ा, जब 19 नवंबर को केंद्र सरकार ने पंजाब कैडर के आईएएस अफसर अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्त किया था। अरुण गोयल की नियुक्त पर इसलिए विवाद हुआ, क्योंकि वो 31 दिसंबर 2022 को रिटायर होने वाले थे। 18 नवंबर को उन्हें वीआरएस दिया गया और अगले ही दिन चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया गया था। इस नियुक्ति पर सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने एक याचिका दायर कर सवाल उठाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त के रूप में अरुण गोयल की नियुक्ति पर दखल दिया था। अदालत ने चुनाव आयुक्त के तौर पर अरुण गोयल की नियुक्ति से संबंधित मूल रिकॉर्ड मांगे थे। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से सवाल किया था कि अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त पद पर कैसे नियुक्ति की गई है। पीठ ने कहा था कि वह सिर्फ तंत्र को समझना चाहती है।

अभिनेता शाहरुख की पत्नी गौरी सहित तुलसियानी कंपनी के प्रबंध निदेशक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा

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लखनऊ। बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान सहित तुलसियानी कंपनी के प्रबंध निदेशक और निदेशक के खिलाफ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुशांत गोल्फ सिटी थाने में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले की शिकायत मुंबई के अंधेरी ईस्ट इलाके में रहने वाले किरीट जसवंत साह ने की। आरोप है कि पीड़ित ने 86 लाख में फ्लैट खरीदा था, पर कंपनी ने तय समय पर फ्लैट नहीं दिया। आरोप है कि गौरी खान इस कंपनी की ब्रांड एंबेस्डर है। किरीट जसवंत साह के अनुसार, शाहरूख खान की पत्नी गौरी खान को लखनऊ स्थित तुसियानी कंपनी का प्रचार-प्रसार करते देखा था।  

बताया गया था कि तुलसियानी कंपनी शहीद पथ स्थित सुशाल गोल्फ सिटी इलाके में गोल्फ व्यू नाम से एक टाउनशिप डवलप कर रही है। संपर्क करने पर उनकी बातचीत कंपनी के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार तुलसियानी और निदेशक महेश तुलसियानी से हुई थी। दोनों ने सौदा 86 लाख में तय किया। किरीट के अनुसार, उन्होंने एचडीएफसी से लोन लेकर 85.46 लाख का भुगतान अगस्त 2015 में किया था। कंपनी ने वादा किया था कि अक्तूबर 2016 में कब्जा दे देगी।  

तय समय पर कब्जा न मिलने पर कंपनी ने बतौर क्षतिपूर्ति 22.70 लाख रुपये दिए और छह माह में कब्जा देने का भरोसा दिया। दावा किया कि ऐसा न होने पर ब्याज सहित रकम लौटा देगी। इस बीच पीड़ित को पता चला कि कंपनी ने उनके फ्लैट को किसी दूसरे के नाम पर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट टू सेल कर बेच दिया है।पीड़ित ने डीसीपी साउथ राहुल राज से शिकायत की। डीसीपी के आदेश पर 25 फरवरी को सुशांत गोल्फ सिटी थाने में अनिल कुमार तुलसियानी, महेश तुलसियानी और गौरी खान के खिलाफ गबन की एफआईआर दर्ज की गई है।

हाथरस कांड में बड़ा फैसला : एक दोषी, तीन बरी

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उत्तर प्रदेश में हाथरस स्थित बूलगढ़ी में हुए गैंगरेप के मामले में गुरुवार को फैसला आया है। बूलगढी प्रकरण में एससी-एसटी कोर्ट के स्पेशल जज त्रिलोकपाल ने फैसला सुनाया है। अपने फैसले में उन्होंने तीन आरोपियों को सामूहिक रेप में दोष मुक्त कर दिया है। जबकि एक आरोपी को दोषी करार दिया गया है। 

हाथरस में 14 सितंबर 2020 को एक दलित लड़की के साथ कुछ युवको ने गैंग रेप किया था। जिसके बाद उस लड़की को खराब हालत में दिल्ली स्थित सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन इस घटना के करीब 15 दिन बात यानी 29 सितंबर को पीड़ित लड़की की मौत हो गई। जिसमें गुरुवार को एससी-एसटी कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में लव-कुश, रामू और रवि नाम के आरोपियों को बरी कर दिया है।हालांकि कोर्ट ने एक आरोपी संदीप को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उन्हें 304 और एससी एसटी एक्ट में दोषी पाया है। कोर्ट के इस फैसले पर पीड़ित परिवार ने एतराज जताया है। वहीं पीड़ित परिवार ने बूलगढ़ी कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही है। 

ढाई साल पहले हुआ था हाथरस कांड

मामला हाथरस के चंदपा क्षेत्र के एक गांव का है। 14 सितंबर 2020 को दलित युवती के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। आरोप गांव के ही चार युवकों पर लगा था। पीड़िता की बेरहमी से जीभ काट दी गई थी। युवती के भाई ने गांव के ही संदीप ठाकुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में युवती के बयान के आधार पर 26 सितंबर को तीन अन्य लवकुश सिंह, रामू सिंह और रवि सिंह को भी आरोपी बनाया गया। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

*त्रिपुरा में भाजपा वापसी को तैयार, 60 में से 33 सीटों पर बढ़त

#tripura_election_result_2023

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त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती जारी है। 4 घंटे से ज्यादा की काउंटिंग पूरी हो चुकी है। तीनों राज्यों की सभी सीटों पर रुझान सामने आ रहे हैं। भाजपा त्रिपुरा में सत्ता में वापसी के लिए तैयार है। 60 सीटों वाली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी बहुमत के निशान को पार कर गई है। भाजपा फिलहाल 33 सीटों पर आगे चल रही है।इसके साथ ही बीजेपी खेमे में जश्न शुरू हो गया है।यहां पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बना रही है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, त्रिपुरा में बीजेपी ने एक सीट पर जीत दर्ज कर ली है और 32 सीटों पर आगे, सीपीआईएम-कांग्रेस गठबंधन 15, टिपरा मोथा 111 सीटों पर आगे है।

Bharatiya Janata Party 1 32 33

Communist Party of India (Marxist) 0 11 11

Indian National Congress 0 4 4

Indigenous People's Front of Tripura 1 0 1

Tipra Motha Party 0 11 11

*त्रिपुरा में भाजपा वापसी को तैयार, 60 में से 33 सीटों पर बढ़त*

#tripura_election_result_2023

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त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय विधानसभा चुनाव की वोटों की गिनती जारी है। 4 घंटे से ज्यादा की काउंटिंग पूरी हो चुकी है। तीनों राज्यों की सभी सीटों पर रुझान सामने आ रहे हैं। भाजपा त्रिपुरा में सत्ता में वापसी के लिए तैयार है। 60 सीटों वाली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी बहुमत के निशान को पार कर गई है। भाजपा फिलहाल 33 सीटों पर आगे चल रही है।इसके साथ ही बीजेपी खेमे में जश्न शुरू हो गया है।यहां पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बना रही है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, त्रिपुरा में बीजेपी ने एक सीट पर जीत दर्ज कर ली है और 32 सीटों पर आगे, सीपीआईएम-कांग्रेस गठबंधन 15, टिपरा मोथा 111 सीटों पर आगे है।

Bharatiya Janata Party 1 32 33

Communist Party of India (Marxist) 0 11 11

Indian National Congress 0 4 4

Indigenous People's Front of Tripura 1 0 1

Tipra Motha Party 0 11 11

अडाणी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बनाई एक्सपर्ट कमेटी, सेबी को 2 महीने में जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश

#supremecourtconstitutesexpertpanel

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आधार पर भारतीय अरबपति गौतम अडानी पर लगाए गए आरोपों की जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अडानी-हिंडनबर्ग केस में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक्सपर्ट कमेटी के गठन का आदेश दिया है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया, यानी सेबी इस मामले में जांच जारी रखेगी और 2 महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

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6 सदस्यों वाली कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच करने के लिए एक 6 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। रिटायर्ड जज एएम सप्रे इस कमेटी के हेड होंगे। उनके साथ इस कमेटी में जस्टिस जेपी देवधर, ओपी भट, एमवी कामथ, नंदन नीलेकणि और सोमशेखर सुंदरेसन शामिल होंगे। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की बेंच ने गुरुवार को यह आदेश दिया।

सेबी को 2 महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को भी जांच करने का निर्देश दिया कि क्या सेबी के नियमों की धारा 19 का उल्लंघन हुआ है? क्या स्टॉक की कीमतों में कोई हेरफेर हुआ है? सेबी को 2 महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कमेटी बनाने से मार्केट रेगुलेटर सेबी की स्वतंत्रता और इसकी जांच प्रोसेस में कोई बाधा नहीं आएगी।

कोर्ट में दायर याचिकाओं में मांग की गई थी अडानी मामले में जांच हो। इसके साथ ही इन याचिकाओं में कहा गया था कि अडानी के शेयर गिरने और निवेशकों को हुए नुकसान के मामले में हिंडनबर्ग के मालिक की जांच हो। सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग में जांच होने की बात भी इन याचिकाओं में कही गई थी।

क्या है मामला?

अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग ने हाल ही में गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी। डनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर मार्केट में हेरफेर और अकाउंट में धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। हिंडनबर्ग रिपोर्ट में कहा गया था कि गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी विदेश में शेल कंपनियों को मैनेज करते हैं। इनके जरिए भारत में अडाणी ग्रुप की लिस्टेड और प्राइवेट कंपनियों में अरबों डॉलर ट्रांसफर किए गए। इसने अडाणी ग्रुप को कानूनों से बचने में मदद की।इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई है। हालांकि, गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी ग्रुप ने आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया था।

पीएम मोदी आज करेंगे 8वें रायसीना संवाद का उद्घाटन, चीफ गेस्ट इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी पहुंचीं भारत

#pmmodiraisinadialogue2023_inauguration

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में 8वें रायसीना संवाद का उद्घाटन करेंगे।रायसीना संवाद में इटली की प्रधानमंत्री जिर्योजियो मिलोनी चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल होंगी। संवाद की चीफ गेस्ट इटली की प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलोनी दिल्ली पहुंच गई हैं। मेलोनी इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। अक्टूबर 2022 में प्राइम मिनिस्टर बनने के बाद वो पहली बार भारत आई हैं।

इस साल 100 से ज्यादा देश होंगे शामिल

रायसीना संवाद का कार्यक्रम 2 से 4 मार्च तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 6:30 बजे करेंगे। इस साल इसकी थीम 'उकसावा, अनिश्चितता, संकट और तूफान में जलता दीया' है। 3 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 100 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। भारत जी-20 समिट की मेजबानी कर रहा है, ऐसे में इस साल रायसीना डायलॉग और ज्यादा अहम हो जाता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की जी-20 में अध्यक्षता के बीच इसका आयोजन उल्लेखनीय है। इसमें 2,500 से अधिक लोग भाग लेंगे। इसके अलावा डिजिटल माध्यम से यह करोड़ों लोगों तक पहुंचेगा। 

क्या है रायसीना संवाद ?

रायसीना संवाद की शुरुआत साल 2016 में हुई। दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों का एक मंच है जहां वैश्विक हालात और चुनौतियों पर एक सार्थक चर्चा के उद्देश्य से रायसीना डायलॉग की शुरुआत की गई। इस मीटिंग का आयोजन भारत का विदेश मंत्रालय और रिसर्च फाउंडेशन करता है। इसमें दुनियाभर के सैकड़ों देशों से आए हुए अधिकारी और नेता भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मुद्दों पर बात करते हैं। इसमें देशों के पॉलिसी मेकर्स से लेकर राजनेता और पत्रकारी भी शामिल होते हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न देशों के विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रियों को शामिल किया जाता है।

पिछले साल 90 देश शामिल हुए

पिछले साल रायसीना डायलॉग 2022 में 90 देशों के 210 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए थे। पिछले साल रायसीना डायलॉग 25 अप्रैल से 27 अप्रैल 2022 हुआ था, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। पिछले साल इसकी थीम 'टेरा नोवा: इम्पैसियनड, इंपेशेंट, एंड इम्पेरिल्ड' थी। वहीं, 2021 में कोरोना के चलते इसे वर्चुअल आयोजित किया गया था।

अब जेएनयू नहीं बनेगा “जंग” का मैदान! छात्रों के लिए धरना-प्रदर्शन पड़ने वाला है भारी, लागू हुए नए नियम

#jnunewrulesrs20000finefor_dharna

अगर आप दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र हैं और वहां होने वाली राजनीति पर सक्रियता से शामिल होते हैं, तो ये खबर आपके लिए ही है। दरअसल, जेएनयू में छात्रों को अब धरना-प्रदर्शन करना महंगा पड़ सकता है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने प्रोटेस्ट करने वाले छात्रों पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का फैसला किया है। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारी छात्रों का एडमिशन रद्द करने की भी तैयारी है।यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस संबंध में नए नियमों की जानकारी दी है।

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10 पेज की एडवाइजरी जारी

जेएनयू के नए नियमों को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 10 पेज की एडवाइजरी जारी की है। जिसे ‘अनुशासन और आचरण के नियम’ का नाम दिया गया है। जिसमें 17 अलग-अलग मामलों में सम्मिलित पाए जाने पर भी कार्रवाई की बात कही गई है। इसमें जुआ, छात्रावास के कमरों पर अनधिकृत कब्जा, अपमानजनक भाषा का उपयोग और जालसाजी जैसे मामले शामिल हैं. नियमों में इस बात का भी उल्लेख है कि शिकायतों की एक प्रति माता-पिता को भेजी जाएगी।  

तीन फरवरी से लागू होंगे नए नियम

ये सभी नियम तीन फरवरी से लागू माने जाएंगे। प्रावधान के मुताबिक इस तरह के मामलों की प्रॉक्टोरियल जांच और बयानों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ये नए नियम विश्वविद्यालय के सभी छात्रों पर लागू होंगे, जिनमें पार्ट टाइम छात्र भी शामिल हैं, चाहे इन नियमों के शुरू होने से पहले या बाद में प्रवेश दिया गया हो। 

बता दें कि ये नियम विश्वविद्यालय में बीबीसी की एक विवादित डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद लागू किए गए हैं। यह मामला काफी दिनों तक मीडिया की सुर्खियां बना था। इसे लेकर कैंपस में झड़प भी हुई ।

*त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी 20 सीटों पर आगे, टिपरा मोथा दे सकती है टक्कर

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त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2023 के लिए डाले गए वोटों की गिनती गुरुवार (2 मार्च) सुबह 8 बजे से जारी है। दोपहर तक यह साफ हो जाएगा कि राज्य में फिर से बीजेपी के सिर सेहरा सजेगा या एकबार फिर से लेफ्ट का राज लौट आएगा। त्रिपुरा में पहली बार चुनाव लड़ रही टिपरा मोथा पार्टी के प्रदर्शन पर भी सभी की निगाहें रहेंगी। कहा जा रहा है कि टिपरा मोथा आदिवासी बाहुल्य इलाकों में अपनी छाप छोड़ सकती है।

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त्रिपुरा की 60 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव की मतणना में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) गठबंधन विपक्षी वाम-कांग्रेस गठबंधन से आगे चल रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा 20 सीटों पर आगे चल रही है, इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) 1 सीट पर आगे है, कांग्रेस 5 सीटों पर आगे चल रही है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) 10 सीटों पर आगे चल रही है। त्रिपुरा में टिपरा मोथा ने बीजेपी को भारी नुकसान पहुंचाया है। पूर्व शाही वंशज प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा द्वारा बनाई गई नयी पार्टी टिपरा मोथा 13 सीट पर आगे है।

Bharatiya Janata Party 0 20 20

Communist Party of India (Marxist) 0 10 10

Independent 0 1 1

Indian National Congress 0 5 5

Indigenous People's Front of Tripura 0 1 1

Tipra Motha Party 0 13 13

Total 0 50 50

नागालैंड में बीजेपी ने एक सीट जीता, 4 पर आगे

#nagaland_election_result

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नागालैंड में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी 14 सीटों पर आगे चल रही है, बीजेपी ने एक सीट जीती है और 4 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस तीन सीट पर आगे चल ही है जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) एक-एक सीट पर आगे चल रही है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 2-2 सीट से आगे चल रही है।

Bharatiya Janata Party 1 4 5

Independent 0 2 2

Janata Dal (United) 0 1 1

Lok Janshakti Party(Ram Vilas) 0 2 2

National People's Party 0 1 1

Nationalist Congress Party 0 3 3

Nationalist Democratic Progressive Party 0 14 14

Republican Party of India (Athawale) 0 3 3