कर्नाटक के मंत्री अश्वथ नारायण के बयान पर सिद्धारमैया का पलटवार, कहा- भड़काते क्यों हैं, खुद ही एक बंदूक उठा लो

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कर्नाटक के मंत्री डॉ. सी.एन.अश्वत्थ नारायण को बयान पर सियासत गर्म है। मंत्री अश्वथनारायण के 'खत्म करो' वाले बयान को लेकर कांग्रेस नेता सिद्दारमैया ने पलटवार किया है। 'सिद्धारमैया ने मंत्री पर ‘जान से मारने की धमकी’ देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह लोगों को उन्हें जान से मारने के लिए उकसा रहे हैं।उन्होंने सीएम बसवराज बोम्मई से मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें मंत्रिमंडल से तुरंत बाहर करने की मांग की।

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भड़काते क्यों हैं, इसके बजाय, एक बंदूक ले लो और मेरे पास आओ- सिद्धारमैया

सिद्धारमैया ने ट्वीट करते हुए लिखा, आप (मंत्री अश्वथ नारायण) भड़काते क्यों हैं। इसके बजाय, एक बंदूक ले लो और मेरे पास आओ। सिद्धारमैया ने कहा कि मंत्री अश्वथ नारायण ने लोगों को मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की तरह मुझे खत्म करने का आह्वान किया था। मैं उनकी हत्या के आह्वान से हैरान नहीं हूं। हम इनके नेताओं से प्यार, सहानुभूति, और दोस्ती की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। वह पार्टी जो महात्मा गांधी की हत्या करने वाले का सम्मान करती है।

अश्वथ नारायण को कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग

सिद्धारमैया ने कहा कि इन्होंने ही महात्मा गांधी की हत्या की थी। मंत्री अश्वथनारायण ने वही कहा जो आरएसएस ने उन्हें कहने का निर्देश दिया था। मैं मांग करता हूं कि राज्यपाल को कैबिनेट से मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए। मैं शिकायत दर्ज नहीं करूंगा, पुलिस को खुद मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए।

क्या कहा था अश्वथ नारायण ने?

बता दें कि कर्नाटक में मंत्री अश्वथनारायण ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा था, टीपू के वंशज सिद्दारमैया आएंगे…. लेकिन आप टीपू को चाहते हैं या सावरकर को? हमें टीपू सूल्तान को कहां भेज देना चाहिए? उरी गौड़ा और नांजे गौड़ा ने क्या किया? ठीक उसी तरह से उन्हें (सिद्दारमैया) को भी वहां भेज देना चाहिए। 

कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष ने भी दिया विवादित बयान

टीपू सुल्तान को लेकर कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष ने भी विवादित बयान दिए हैं। राज्य में पार्टी अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने उन लोगों को ‘जान से मारने’ की अपील की जो टीपू के समर्थक हैं। कोप्पल जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए बीजेपी अध्यक्ष कतील ने कहा कि ‘हम भगवान राम, भगवान हनुमान के भक्त हैं। हम उन्हीं की पूजा करते हैं, और हम टीपू के वंशज नहीं हैं। टीपू के वंशजों को वापस घर भेजना होगा। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा था कि, जो लोग टीपू के कट्टर अनुयायी हैं, उन्हें इस धरती पर जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है।

यज्ञ में कलश यात्रा के दौरान बिदकी हाथी, तीन को उतारा मौत के घाट, भगदड़ में कई घायल

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गोरखपुर । उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के चिलुआताल थाना अर्न्तगत मजनू चौकी क्षेत्र के ग्राम सभा मोहम्मदपुर माफी में आयोजित यज्ञ के कलश यात्रा में बिदके हाथी ने दो महिलाओं एवं एक बच्चे को मौत के घाट उतार दिया। जिससे भगदड़ मच गयी।

 भगदड़ के दौरान कई लोग चोटिल हो गये। सूचना पर पहुंची पुलिस मृतकों के शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया। घटना पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

क्षेत्र के मुहम्मदपुर माफी में आयोजित 16 फरवरी से 24 फरवरी तक चलने वाले श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के कलश यात्रा के दौरान बिदके हाथी ने दो महिलाओं को सूड में लपेट पटक कर पाँव से दबाकर मौत के घाट उतार दिया।

 जिससे कलश यात्रा में भगदड मच गयी ।जिसमें कई लोग आशिंक रूप से घायल हो गये। मरने वालो में कांती देवी 55 वर्ष पत्नी शकर उपाध्याय व कौशिल्या देवी 43 वर्ष पत्नी दिलीप मद्धेशिया निवासी मोहम्मदपुर माफी तथा कृष्णा 4 वर्ष पुत्र राजू निवासी सरैया थाना गीडा के रूप में हुई।

घटना के बाद दोनों हाथी के महावतो ने अपने अपने हाथियों को नदी पार कर दूसरी तरफ लेकर चले गये। घटना की सूचना पर थाना प्रभारी जयंत कुमार सिंह एवं सीओ कैम्पियरगंज श्यामदेव दल बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति नियंत्रण में कर वैधानिक कार्यवाही शुरु कर दी है। 

दोनों हाथियां नदी उस पार सहजनवा थाना क्षेत्र के ताल में पहुंच गयी हैं। जिसकी एसडीएम सहजनवा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम चौकसी कर रही है।

दिल्ली मेयर चुनाव से पहले आप को झटका, बीजेपी ने जीता हज कमेटी का चुनाव, कौसर जहां चुनी गईं अध्यक्ष

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दिल्ली में मेयर के चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। दरअसल आम आदमी पार्टी के हाथ से दिल्ली हज कमेटी का नियंत्रण निकल गया है।दिल्ली हज कमेटी अध्यक्ष के लिए आज चुनाव हुआ। जिसमें भाजपा की कौसर जहां ने जीत हासिल कर अध्यक्ष पद हासिल किया है।कौसर जहां इस पद पर निर्वाचित होने वाली दूसरी महिला हैं।

दिल्ली सचिवालय में हुए चुनाव में बीजेपी की कौसर जहां को समिति के सदस्यों की तरफ से डाले गए पांच में से तीन वोट मिले। समिति में छह सदस्यों में आप और बीजेपी के दो-दो, मुस्लिम धर्मशास्त्र विशेषज्ञ मोहम्मद साद और कांग्रेस पार्षद नाजिया दानिश शामिल हैं। समिति के सदस्यों में बीजेपी सांसद गौतम गंभीर भी शामिल हैं।बता दें कि दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसी साल 6 जनवरी को तत्काल प्रभाव से तीन वर्ष के लिए राज्य हज समिति का गठन किया था।

कौसर जहां ने की मोदी सरकार की तारीफ

दिल्ली हज कमेटी का अध्यक्ष चुने जाने पर कौसर जहां ने कहा, एलजी की ओर से अध्यक्ष पद और समिति के गठन के लिए नियुक्ति प्रक्रिया को कराया गया है। सभी नियमों को ध्यान में रखकर चुनाव कराया गया। उन्होंने आगे कहा, मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। तीन तलाक पर प्रतिबंध के बाद महिलाएं सुरक्षित महसूस कर रही हैं। हज पर जाने वालों की परेशानी कम करने पर काम करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

उपराज्यपाल पर बरसे आप नेता

इधर आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि क‌ई जगह खबर देखी कि आम आदमी पार्टी को झटका, भाजपा कार्यकर्ता हज कमेटी का चुनाव जीत ग‌ई। हमने तो कभी हज कमेटी के चुनाव का भी नहीं सुना था, ये सिर्फ 6 सदस्यों के बीच चुनाव होता है। चुनी हुई सरकार सदस्यों को भेजती थी, उसमें से आपसी सहमति से अध्यक्ष चुना जाता था।लेकिन उपराज्‍यपाल ने बेईमानी करके खुद सदस्यों के नाम भेज दिये।

भारत में पहली बार बीबीसी पर नहीं लगा है बैन, जानें कांग्रेस काल की कहानी

#bbc_has_been_banned_twice_in_india 

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ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) द्वारा 2002 के गुजरात दंगों पर एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज रिलीज की गयी। जिसका नाम 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' है। इस सीरीज को भारत सरकार द्वारा बैन कर दिया गया। इसी बीच दिल्ली एवं मुंबई स्थित बीबीसी के दफ्तरों में आय कर विभाग पहुंची, और पिछले तीन दिन से यहां सर्वे का काम जारी है। पहले ही बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को बैन किए जाने पर बवाल मचा हुआ था। अब विपक्ष इस पूरे सर्वे को इसी डॉक्यूमेंट्री से जोड़ रहा है।

कांग्रेस की सरकार भारत में बीबीसी पर पहले भी कर चुकी है बैन

ऐसा नहीं है कि पहली बार किसी डॉक्यूमेंट्री को देश में बैन किया गया है। ना ही ऐसा पहली बार हुआ है कि बीबीसी का कामकाज सरकार के निशाने एवं जांच के घेरे में आया हो। आज़ादी के बाद से अब तक भारत में बीबीसी पर दो बार प्रतिबंध लग चुका है और ये दोनों प्रतिबंध कांग्रेस की सरकारों में लगे थे

जब पहली बार भारत में बैन हुई थी बीबीसी

बीबीसी को पहली बार बैन का सामना अगस्त 1970 में करना पड़ा था। तब उसे अपना प्रसारण थोड़े समय के लिए रोकना भी पड़ा। भारत में उसने दो डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण किया था। बीबीसी ने फ्रांसीसी निर्देशक लुइस मैले की डॉक्यूमेंट्री सीरीज बनाई थी। जिसमें भारत की छवि को गलत तरीके से पेश किया था। इस कार्रवाई करते हुए इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली स्थित बीबीसी के कार्यालय को दो साल तक के लिए बैन कर दिया था। उस समय की इंदिरा गांधी सरकार का मानना था कि इन दोनों डॉक्यूमेंट्री में भारत की 'नकारात्मक तस्वीर' पेश की गई। उस समय के कलकत्ता के कामगार वर्ग के ऊपर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री में गरीबी को ज्यादा प्रमुखता से दिखाया गया था। इससे इंदिरा गांधी सरकार खुश नहीं थी।

1975 में भी लगा था बैन

आज बीबीसी के दफ्तरों में आयकर विभाग के सर्वे को कांग्रेस देश में अघोषित आपातकाल बता रही है। मगर एक वक्त था जब कांग्रेस के राज में ही देश में आपातकाल लगा था। 1975 में इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल घोषित किया था तो उस समय दिल्ली में बीबीसी के प्रतिनिधि मार्क टुली थे। टुली से कहा गया कि अगले 15 दिनों में वह दिल्ली छोड़ दें। इसके बाद आपातकाल के समय 1975 में भी इंदिरा सरकार ने बीबीसी पर बैन लगाते हुए उसे निष्कासित किया।

देवेंद्र फडणवीस ने फिर दोहराई अपनी बात, कहा-बीजेपी-एनसीपी गठबंधन को थी शरद पवार की मंजूरी

#devendra_fadnavis_claim_sharad_pawar_supports_bjp_in_2019 

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बीजेपी-एनसीपी गठबंधन को लेकर दिए अपने बयान पर कायम हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था एनसीपी के नेता अजित पवार के साथ रातोंरात जो सरकार बनाई थी, उसे एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मंजूरी मिली हुई थी। एक बार फिर फडणवीस ने अपनी बात दोहराई है और कहा है कि उनका बयान 100 फीसद सच है और वह झूठ नहीं बोल रहे।

बता दें कि महाराष्ट्र में 2019 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी के अजीत पवार ने मिलकर सरकार बनाई थी। इस गठबंधन को लेकर देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया है कि इस तरह से सरकार बनाने के लिए अजीत पवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार का समर्थन मिला था लेकिन बाद में हमारे साथ विश्वासघात किया गया।

चर्चा के 80 घंटे बाद उनकी रणनीति बदल गई-फडणवीस

एक इंटरव्यू में देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एनसीपी की तरफ से हमारे पास सरकार बनाने का प्रस्ताव आया था। प्रस्ताव में कहा गया कि एनसीपी को महाराष्ट्र में एक स्थिर सरकार चाहिए और उनकी भाजपा के साथ मिलकर स्थिर सरकार बनानी की मंशा थी। फडणवीस ने कहा कि प्रस्ताव के बाद हम आगे बढ़े और बातचीत करने का फैसला किया। देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि 2019 में हमने सरकार बनाने खातिर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से भी चर्चा की थी। हालांकि इस चर्चा के बाद भी हमारे साथ विश्वासघात हुआ। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम फडणवीस ने कहा चर्चा के 80 घंटे बाद उनकी रणनीति बदल गई और अजीत पवार ने सरकार छोड़ने का फैसला किया।

फडणवीस ने कहा कि मेरे साथ सबसे पहले उद्धव ठाकरे ने विश्वासघात किया और फिर पवार ने किया। फडणवीस ने कहा कि मैं पूरी ईमानदारी से कहना चाहता हूं कि अजित पवार ने मेरे साथ ईमानदारी से शपथ ली लेकिन बाद में एनसीपी की रणनीति बदल गई।

महाराष्ट्र में हुआ वो सियायत नाटक

बता दें कि तीन साल पहले अक्टूबर में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 105 सीट पर जीत हासिल की थी. बीजेपी के साथ गठबंधन में रही शिवसेना ने 56 सीट पर जीत हासिल की थी। गठबंधन के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीट होने के बावजूद, दोनों सहयोगी दलों के बीच मुख्यमंत्री का पद किसे मिलेगा, इसको लेकर विवाद हो गया, जिसके परिणामस्वरूप शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिये बातचीत शुरू की।

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनने से पहले 23 नवंबर की सुबह एक नाटकीय घटनाक्रम हुआ, जिसमें तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अचानक देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी थी। हालांकि शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को समर्थन देने का एलान कर दिया। आखिरकार बीजेपी को पीछे हटना पड़ा और महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की सरकार बन गई।

एप वाले एजेंट ग्राहकों को नहीं कर सकेंगे परेशान, आरबीआई ने जारी किया निर्देश, शीर्ष बैंक ने दिए 18 सवालों के जवाब


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एप के जरिये कर्ज देने वाली कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की मिल रही शिकायतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) के प्रारूप में नियम जारी कर दिया है। इसके 18 सवालों के जवाब जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया कि अगर कोई ग्राहक लोन चुकाने में डिफॉल्ट करता है तो ग्राहकों को एजेंट के बारे में जरूरी जानकारी एसएमएस या ईमेल के जरिये पहले से देनी होगी।

साथ ही अब ग्राहक को लोन देते वक्त ही कंपनी को एजेंट के बारे में जरूरी जानकारी देनी होगी। आरबीआई के इस दिशा-निर्देश का मतलब एजेंटों के जरिये ग्राहकों को परेशान करना अब आसान नहीं होगा। आरबीआई ने कहा है कि ग्राहक को यह जानकारी रिकवरी एजेंट के उससे संपर्क में आने से पहले देना जरूरी होगा। नए नियम के तहत सभी तरह के कर्ज वितरण और पुनर्भुगतान, लोन लेने वाले ग्राहक के बैंक अकाउंट और बैंक या एनबीएफसी के बीच होनी जरूरी होगा। इस लेन-देन में सेवा प्रदाता या किसी तीसरी पार्टी का कोई दूसरा अकाउंट शामिल नहीं होगा।

क्रेडिट कार्ड वाले ग्राहकों के लिए पहले से नियम तय

आरबीआई ने यह भी कहा है कि क्रेडिट कार्ड के जरिए किस्त चुकाने वाले ग्राहक इस नियम के दायरे में नहीं आएंगे। उसके लिए पहले से ही अलग नियम और शर्तें तय हैं। कर्ज देने वाले (एलएसपी ) के रूप में भी काम करने वाले पेमेंट एग्रीगेटर्स का इस्तेमाल कर्ज को चुकाने के लिए किया जा सकेगा।

त्रिपुरा विस चुनावः दोपहर 1 बजे तक 51.35 फीसदी मतदान

#tripura_elections_2023 

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त्रिपुरा में 60 विधानसभा सीटों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है। सभी सीटों पर शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग हो रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, त्रिपुरा में दोपहर एक बजे तक कुल 51.35 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है। 

कहां-कितने लोगों ने डाला वोट

जिला      वोटिंग प्रतिशत

धलाई       54.17%

गोमती      49.69%

खोवाई       49.67%

नॉर्थ त्रिपुरा      47.57%

सिपाहीजिला    48.95%

साउथ त्रिपुरा    53.67%

ऊनाकोटी      50.64%

वेस्ट त्रिपुरा      51.33%

पूर्व सीएम का बीजेपी पर आरोप

इधर वोटिंग के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ने बड़ा आरोप लगाया है। सीपीआई(एम) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने कहा कि कहीं-कहीं भाजपा की ओर से असामाजिक तत्व मतदान के बीच परेशानी खड़ी कर रहे हैं और लोगों को वोट डालने से रोक रहे हैं, लेकिन जनता वोट डालने की पूरी कोशिश कर रही है।

आरएसएस की पत्रिका पांच्यजन्य का गंभीर आरोप, कहा- भारत विरोधी तत्व सुप्रीम कोर्ट का औजार की तरह कर रही इस्तेमाल

#rss_panchjanya_criticize_supreme_court 

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इन दिनों देश में बीबीसी का मुद्दा छाया हुआ है। बीबीसी सुर्खियों में उस वक्त आया, जब साल 2002 के गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री मोदी की कथित भूमिका को लेकर एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की गई।जिसे केंद्र सरकार ने प्रोपेगेंडा बताते हुए भारत में दिखाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने भारत में बीबीसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अनुरोध वाली इस याचिका को खारिज कर दिया था। अब इस फैसले के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस ने सुप्रीम कोर्ट को ही ‘कटघरे’ में खड़ा कर दिया है।

दरअसल, आरएसएस से जुड़ी पत्रिका पांच्यजन्य ने अपने संपादकीय में सुप्रीम कोर्ट पर बड़ा आरोप लगाया गया है।पांच्यजन्य ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट को भारत विरोधी तत्व अपने औजार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।पत्रिका के एक एडिटोरियल में कहा गया है कि, सर्वोच्च न्यायालय भारत का है, जो भारत के करदाताओं की राशि से चलता है; उसका काम उस भारतीय विधान और विधियों के अनुरूप काम करना है जो भारत के हैं, भारत के लिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय नामक सुविधा का सृजन और उसका रखरखाव हमने अपने देश के हितों के लिए किया है। लेकिन वह भारत विरोधियों के अपना मार्ग साफ करने के प्रयासों में एक औजार की तरह प्रयुक्त हो रहा है।

संपादकीय में आगे गया है कि मानवाधिकार के नाम पर आतंकवादियों को बचाने की कोशिशों, पर्यावरण के नाम पर भारत के विकास में बाधा डालने के बाद अब यह कोशिश की जा रही है कि देश विरोधी ताकतों को देश के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने का अधिकार भी मिलना चाहिए। आगे लिका है कि, भारत में धर्मांतरण करके राष्ट्र को कमजोर करते रहने का अधिकार भी होना चाहिए। और इतना ही नहीं, इस अधिकार के प्रयोग के लिए भारत के ही कानूनों का लाभ भी उन्हें मिलना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते विवादित डॉक्यूमेंट्री के मद्देनजर भारत में बीबीसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अनुरोध वाली याचिका को खारिज कर दिया था। सोशल मीडिया मंचों पर डॉक्यूमेंट्री की पहुंच को रोकने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक और जत्थे पर अप्रैल में सुनवाई होगी। इस संबंध में कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा था। डॉक्यूमेंट्री को बैन किए जाने के खिलाफ कोर्ट में कई याचिकाएं दायर है। याचिकाकर्ताओं में वरिष्ठ पत्रकार एन राम, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा शामिल हैं।

पीएम मोदी ने दिल्ली में आदि महोत्सव का किया उद्घाटन, कहा- जो खुद को दूर समझता था उसे अब मुख्यधारा में लाया जा रहा

#pm_modi_national_tribal_festival_aadi_mahotsav_inauguration 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजधानी दिल्ली में आदि महोत्सव का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी नेता बिरसा मुंडा को श्रद्दांजलि दी। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि जैसे भारत की अनेकता और भव्यता आज एक साथ खड़ी हो गई हैं। यह भारत के उस अनंत आकाश की तरह है, जिसमें उसकी विविधताएं इंद्रधनुष की तरह उभर कर सामने आ जाती हैं। भारत अपने सांस्कृतिक प्रकाश से विश्व का मार्ग दर्शन करता है। 

पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान बजट का जिक्र करते हुए कहा, इस बार पारंपरिक कारीगरों के लिए पीएम-विश्वकर्मा योजना शुरू करने की घोषणा भी की गई है। पीएम-विश्वकर्मा के तहत आपको आर्थिक सहायता दी जाएगी, स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। अपने प्रॉडक्ट की मार्केटिंग के लिए सपोर्ट किया जाएगा। 

अब सरकार दिल्ली से उनसे मिलने जाती है जिसे दूर समझा जाता था-पीएम मोदी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर चल रहा है। अब सरकार दिल्ली से उससे मिलने जाती है जिसे दूर समझा जाता था। जो खुद को दूर समझता था उसे अब मुख्यधारा में लाया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, सरकार उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जिनसे लंबे समय से संपर्क नहीं हो पाया है। मैंने देश के कोने कोने में आदिवासी समाज और परिवार के साथ अनेक सप्ताह बिताए हैं। मैंने आपकी परंपराओं को करीब से देखा भी है, उनसे सीखा भी है और उनको जिया भी है। आदिवासियों की जीवनशैली ने मुझे देश की विरासत और परंपराओं के बारे में बहुत कुछ सिखाया है। आपके बीच आकर मुझमें अपनों से जुड़ने का भाव आता है।

एक हजार जनजातीय शिल्पकार लेंगे हिस्सा

'आदि महोत्सव' जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ लिमिटेड (ट्राइफेड) की वार्षिक पहल है। इस वर्ष इसका आयोजन 16 से 27 फरवरी तक दिल्ली के मेजर ध्यान चंद राष्ट्रीय स्टेडियम में किया जा रहा है। कार्यक्रम में 200 स्टॉल के माध्यम से देशभर के जनजातीय समुदायों की समृद्ध और विविधतापूर्ण धरोहर को प्रदर्शित किया जाएगा। महोत्सव में लगभग एक हजार जनजातीय शिल्पकार हिस्सा लेंगे।

बीबीसी पर आयकर सर्वे को लेकर पाक पत्रकार ने किया सवाल, अमेरिका ने यूं किया नजरअंदाज

#america_bypasses_pak_journalist_question_on_bbc_income_tax_survey_in_india 

बीबीसी पर आयकर विभाग की कार्रवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी है। बीबीसी के दिल्ली और मुंबई के ऑफिस पर आईटी की टीम सर्वे कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये सर्वे टैक्स चोरी के आरोप में किया जा रहा है। इधर बीबीसी के दफ्तर पर आईटी सर्वे को लेकर राजनीति जोरों पर हो रही है। भारत में बीबीसी के ऑफिस में हो रही कार्रवाई पर कई देशों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। इस बीच एक पाकिस्तानी पत्रकार ने मुद्दा बनाना चाहा। अमेरिकी विदेश विभाग से भारत में बीबीसी के इनकम टैक्स सर्वे पर सवाल दागा। हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने सवाल को नजरअंदाज कर दिया। 

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जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के मीडिया संस्थान एआरवाई के वॉशिंगटन में रिपोर्टर जहांजेब अली ने अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत में बीबीसी पर सर्वे का मुद्दा उठा दिया। पाकिस्तानी पत्रकार ने पूछा कि, बीबीसी के दिल्ली और मुंबई दफ्तरों पर इनकम टैक्स सर्वे हो रहा है, अमेरिकी सरकार क्या इस मुद्दे को लेकर चिंतित है या फिर इस पर कुछ प्रतिक्रिया देना चाहती है?

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइज ने इस सवाल के जवाब में कहा 'वे इस पर नजर रखे हुए हैं।' इससे ज्यादा कुछ जवाब नहीं दिया। तब पाकिस्तानी पत्रकार अली ने दोबारा इस पर सवाल किया, लेकिन नेड प्राइज ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा 'बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री जो 2002 के दंगों पर बनाई गई है, इस पर अमेरिकी विदेश विभाग ने कोई कमेंट तक नहीं किया।हालांकि, नेड प्राइस ने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और लोगों के लोगों से संबंध हैं। साथ ही दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्य भी साझा करते हैं।