नागपुर में दीक्षाभूमि पहुंचे पीएम मोदी ने आंबेडकर को दी श्रद्धांजलि, जानें संविधान निर्माता से यहां का कनेक्शन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नागपुर दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान 8 साल बाद नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय में पीएम मोदी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने स्मृति मंदिर में आरएसएस के संस्थापकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पीएम मोदी बाबासाहब अंबेडकर के नागपुर स्थित दीक्षाभूमि पहुंचे। पीएम मोदी ने दीक्षाभूमि पहुंचकर डॉ बीआर आंबेडकर को भी श्रद्धांजलि दी। यहां डॉ. आंबेडकर ने 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था।
नागपुर की अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी दीक्षाभूमि पहुंचे, जहां अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित और समावेशी भारत का निर्माण ही भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पीएम मोदी के दीक्षाभूमि के दौरे के दौरान महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे
दीक्षाभूमि के विजिटर बुक में पीएम मोदी ने क्या लिखा?
वहीं बाबा साहब अंबेडकर के दीक्षाभूमि पहुंचने पर वहां के विजिटर बुक में पीएम मोदी ने लिखा, 'बाबासाहेब अंबेडकर के पंचतीर्थों में से एक नागपुर स्थित दीक्षाभूमि में आने का सौभाग्य पाकर अभिभूत हूं। इस पवित्र स्थल के वातावरण में बाबासाहेब के सामाजिक समरसता, समानता और न्याय के सिद्धांतों का सहज अनुभव होता है। दीक्षा भूमि हमें गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए समान अधिकार और न्याय की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने की व्यवस्था के साथ आगे बढ़ने की उर्जा प्रदान करता है।
पीएम मोदी ने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि इस अमृत कालखंड में हम बाबासाहब के मूल्यों और शिक्षाओं के साथ देश को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। एक विकसित और समावेशी भारत का निर्माण करना ही बाबासाहब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
दीक्षाभूमि से बाहा साहेब का कनेक्शन?
साल 1956 में 14 अक्तूबर को डॉ. आंबेडकर अपने अनुयायियों के साथ नागपुर की दीक्षाभूमि में बौद्ध धर्म अपना लिया था। ऐसा अनुमान है कि पूरे महाराष्ट्र और बाहरी राज्यों से 6 लाख दलितों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और बौद्ध धर्म अपनाया था। इस दिन को धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
हर साल, राज्य भर और बाहर से दलित धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस मनाने के लिए दीक्षाभूमि में आते हैं। जिस दिन डॉ. आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया उसी दिन दशहरा भी मनाया गया था। इसलिए परंपरा को ध्यान में रखते हुए, अंबेडकरवादी हर साल हर दशहरे पर दीक्षाभूमि पर डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करके उस दिन को मनाने के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं।









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Jan 21 2026, 14:54
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