बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने मोहम्मद यूनुस पर लगाया गंभीर आरोप, तारिक राज में बड़ा खुलासा

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया। राष्ट्रपति को न सिर्फ अहम चर्चाओं से दूर रखा बल्कि उन्हें हटाने तक की साजिश रच देश को अस्थिर करने का प्रयास किया।

यूनुस पर संविधान पालन नहीं करने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने देश में सरकार बदलते ही एक ऐसा खुलासा किया है। कालेर कंठो के साथ इंटरव्यू में बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस ने 18 महीने की अपनी अंतरिम सरकार में संविधान का पालन नहीं किया। यूनुस ने अपना पद संभालते हुए न तो संस्थागत समन्वय बनाए रखा और न ही उन्हें महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों की जानकारी दी।

यूनुस ने विदेश यात्राओं की नहीं दी जानकारी

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि संविधान कहता है कि विदेश यात्रा की जानकारी राष्ट्रपति को देनी चाहिए और दौरे के बाद भी राष्ट्रपति को बताया जाना चाहिए। यूनुस के 14-15 विदेशी दौरों के बारे में मुझे कभी नहीं बताया गया। इसमें अमेरिका से हुआ व्यापार समझौता भी शामिल है। बांग्लादेशी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी विदेश यात्राओं को बिना पूछे रद्द कर दिया गया। कोसोवो और कतर से मिले निमंत्रणों को उनके नाम से यह कहकर ठुकरा दिया गया कि राष्ट्रपति राज्य कार्यों में बहुत व्यस्त हैं।

सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश का आरोप

शहाबुद्दीन ने तंज करते हुए कहा कि क्या हमारे संविधान में राष्ट्रपति इतने व्यस्त रहते हैं कि उनसे पूछा भी न जाए? राष्ट्रपति का आरोप है कि देश और विदेश में उनकी सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश की गई। उन्हें विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया, जबकि परंपरा के अनुसार इन कार्यक्रमों की अध्यक्षता राष्ट्रपति करते हैं।

पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने कहा कि यूनुस का पूरा ध्यान उनको पद से हटाने पर रहा, वो अपने कार्यकाल में सिर्फ मेरे खिलाफ साजिशें रचते रहें। यूनुस ने ना सिर्फ मेरे खिलाफ राजनीतिक स्तर पर साजिशें रचीं बल्कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अंतरिम सरकार ने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर मुझे असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश भी रची।

बांग्लादेश में नई सरकार बनते ही स्पाइसजेट पर लगा 'बैन', जानें पूरा मामला

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बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने भारतीय एयरलाइन स्पाइसजेट को अपने एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) के उपयोग से रोक दिया है। बांग्लादेश ने कथित बकाया भुगतान न चुकाने के कारण बजट एयरलाइन स्पाइसजेट को अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग से रोक दिया है। एयरस्पेस उपलब्ध न होने के चलते कोलकाता से गुवाहाटी और इम्फाल जाने वाली कुछ उड़ानों को अब लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है। इससे उड़ान के समय और ऑपरेशनल लागत पर असर पड़ सकता है।

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स्पाइसजेट ने क्या कहा?

स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘ये उद्योग से जुड़े सामान्य मुद्दे हैं और हम इनका शीघ्र समाधान निकालने के लिए रचनात्मक रूप से काम कर रहे हैं। हमारी उड़ान सेवाएं अप्रभावित हैं और हम नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी निर्धारित सेवाएं जारी रखे हुए हैं।’ हालांकि, विशिष्ट विवरणों का खुलासा नहीं किया गया।

वैकल्पिक और लंबे रूट का सहारा

बता दें कि यात्रियों पर फिलहाल इसका सीधा असर नहीं पड़ा है। हालांकि एयरस्पेस बंद होने से कुछ उड़ानों को वैकल्पिक रूट से जाना पड़ रहा है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार स्पाइसजेट की कुछ उड़ानें बांग्लादेशी एयरस्पेस से बचते हुए वैकल्पिक और लंबा मार्ग अपना रही हैं।

स्पाइसजेट के शेयर में गिरावट

इस बीच बीएसई में दोपहर के कारोबार के दौरान स्पाइसजेट के शेयर में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने हाल ही में दिसंबर 2025 तिमाही में 269.27 करोड़ रुपये का घाटा भी दर्ज किया था, जिसका कारण बढ़ती लागत और एकमुश्त खर्च बताए गए हैं।

तारिक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, 25 लोगों के मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 60 वर्षीय रहमान को बंगभवन के बजाय जातीय संसद के दक्षिण प्लाजा में पद की शपथ दिलाई, जो एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा से हटकर था।

तारिक के साथ नई सरकार के मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलाई गई। इनमें डॉ खलीलुर रहमान (विदेश मंत्री), सलाहुद्दीन अहमद (गृहमंत्री), डॉ अमीर खसरू महमूद (वित्त और प्लानिंग मंत्री), शमा ओबैद (विदेश राज्य मंत्री) पद संभालेंगे।

25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने ली शपथ

तारिक रहमान के अलावा 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी मंत्रिमंडल में 50 सदस्य हैं, जिनमें 25 मंत्री, 24 राज्य मंत्री और तीन टेक्नोक्रेट शामिल हैं। इन 25 मंत्रियों में से 17 नए चेहरे हैं, और सभी राज्य मंत्री पहली बार इस पद पर आसीन हुए हैं। प्रधानमंत्री रहमान भी पहली बार मंत्रिमंडल के सदस्य बने हैं।

मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

• सलाहुद्दीन अहमद - गृह मंत्रालय

• अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय

• खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय

• खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय

• मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय

• इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय

• AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण

• अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

• मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय

• निताई रॉय चौधरी - सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय

• मोहम्मद असदुज्जमां - कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय

• काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय

• अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार

• ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद

• उद्दीन चौधरी एनी - जल संसाधन मंत्रालय

• एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय

• अमीन उर राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय

• अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय

• असदुल हबीब दुलु - आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय

• ज़कारिया ताहिर - आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय

• दीपेन दीवान - चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय

• सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल - स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय

• फकीर महबूब अनम - डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय

• शेख रबीउल आलम - सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय

• मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय

शपथ ग्रहण में भारत से कौन पहुंचा?

इस शपथ ग्रहण में दुनिया के अलग-अलग देशों के न्यौता भेजा गया। भारत से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल होने के लिए ढाका पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत हुआ। इनके अलावा मलेशिया के पीएम, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की और श्रीलंका के प्रतिनिधि समारोह में मौजूद रहे। साथ ही चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को भी समारोह का आमंत्रण भेजा गया।

पीएम मोदी को बांग्लादेश से तारिक रहमान के शपथ-समारोह का न्योता, पिघलने लगी रिश्तों पर जमी बर्फ?

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बांग्लादेश के चुनाव में बीएनपी की जीत के बाद ढाका-दिल्ली के रिश्तों में जमी बर्फ कुछ हद तक पिघलती दिखी है। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चीफ तारिक रहमान को बधाई दी और भारत के समर्थन का वादा किया। तारिक रहमान और उनकी पार्टी की ओर से इस संदेश का गर्मजोशी के साथ जवाब दिया गया। अब ढाका से नरेंद्र मोदी को शपथ ग्रहण का न्योता भी भेजा गया है।

17 फरवरी को शपथ लेंगे तारीक रहमान

बीएनपी के चेयरमैन तारीक रहमान 17 फरवरी को देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह परंपरा से अलग इस बार राष्ट्रपति भवन की जगह ढाका के नेशनल पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स के साउथ प्लाजा में होगा। ढाका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई क्षेत्रीय नेताओं को इस समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा है। हालांकि, अभी तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पीएम मोदी के ढाका जाने की संभावना कम

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाका जाने की संभावना कम है क्योंकि वह 17 फरवरी को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करने वाले हैं। मैक्रों, अगले हफ्ते एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं।

भारत की ओर से कोई सीनियर नेता हो सकता है शामिल

जानकारी के मुताबिक, तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय पक्ष की तरफ से कोई सीनियर नेता, शायद उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन या विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हो सकते हैं।

जल्दबाजी नहीं चाहती भारत सरकार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत बांग्लादेश के साथ रिश्तों को रीसेट करना चाहता है, लेकिन जल्दबाजी में समझौता नहीं करना चाहता। खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी इस कार्यक्रम में बुलाए जाने की उम्मीद है

बांग्लादेश चुनाव में तीन हिंदू उम्मीदवारों को मिली जीत, 20 साल में सिमटा अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व

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बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) ने प्रचंड जीत हासिल की है। 299 सीटों पर हुए चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP को 211 सीटों पर जीत मिली हैं। वहीं, मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें हासिल हुई हैं। खास बात है कि इस बार के चुनाव में केवल तीन हिंदू उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। ये तीनों की बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीते हैं।

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किन उम्मीदवारों ने हासिल की जीत

गायेश्वर चंद्र रॉय- बांग्लादेश चुनाव में जीत हासिल करने वाले हिंदू उम्मीदवारों में सबसे प्रमुख नाम गायेश्वर चंद्र रॉय का है। बीएनपी के वरिष्ठ नेता रॉय ने ढाका-3 निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है। वे पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं और पूर्व में राज्य मंत्री रहे हैं। रॉय ने 99163 वोट हासिल करके जमात-ए-इस्लामी उम्मीदवार मोहम्मद शाहीनुर इस्लाम को मात दे दी।

निताई रॉय चौधरी- बीएनपी के उपाध्यक्ष निताई रॉय चौधरी ने मागुरा-2 सीट से जीत दर्ज की। उन्हें 1 लाख 47 हजार 896 वोट मिले, जो जमात-ए-इस्लामी के मुस्तर्शीद बिल्लाह से अधिक थे, जिन्हें 1 लाख 17 हजार 018 वोट मिले। चौधरी को बीएनपी के अंदर एक बेहद प्रभावशाली अल्पसंख्यक चेहरा माना जाता है। उनकी जीत अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन को और पुष्ट करती है।

दीपेन दीवान- बीएनपी के ही टिकट पर जीतने वाले तीसरे हिंदू उम्मीदवार एडवोकेट दीपेन दीवान है। उन्होंने रंगमती संसदीय सीट से जीत हासिल की है। दीवान को 31 हजार 222 वोट मिले है। उनका मुकाबला इंडिपेंडेंट उम्मीदवार पहल चकमा से था, जिन्हें 21 हजार 544 वोट मिले।

तीन हिंदू और एक आदिवासी उम्मीदवार ने दर्ज की जीत

इस पूरे चुनाव में केवल चार अल्पसंख्यक तीन हिंदू और एक आदिवासी उम्मीदवार ही जीतकर संसद में अपनी जगह बनाने में सफल रहे। यह आंकड़ा बांग्लादेश में अल्पसंख्यक भागीदारी के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि हिंदू आबादी देश की कुल जनसंख्या का लगभग 8% है। पिछले 20 वर्षों में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व आम तौर पर 14 से 20 सीटों तक रहता था, लेकिन इस बार यह संख्या बेहद कम रहा।

79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार में केवल चार जीते

चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें बीएनपी के चार विजयी हुए। इसके अलावा, जमात-ए-इस्लामी का हिंदू उम्मीदवार हार गया। यह परिणाम न केवल अल्पसंख्यकों की राजनीतिक भागीदारी पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि देश की बदलती राजनीतिक तस्वीर को भी उजागर करते हैं।

300 सीट वाली संसद में 3 हिंदू सांसद

300 सीटों वाली संसद में इस बार सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए हैं। यह आंकड़ा तब आया है जब हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा देखी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के लंबे कार्यकाल के दौरान संसद में हिंदू सांसदों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही थी।

2009-2014 में थे 16 हिंदू सांसद

2009-2014 की संसद में 16 हिंदू सांसद थे। 2014-2019 में यह संख्या बढ़कर 17 (और आरक्षित सीटों के साथ 20 तक) पहुंची। 2019-2024 में करीब 14 अल्पसंख्यक सांसद थे। यानी पहले जहां 14 से 20 के बीच हिंदू सांसद होते थे, अब संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है।

बांग्लादेश में बीएनपी की जीत, भारत के लिए तारिक रहमान के सत्ता में आने क्या हैं मायने?

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बांग्लादेश में तारिक रहमान की अगुवाई में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार बनने का रास्ता साफ हो चुका है। बांग्लादेश में सबसे ज्यादा वर्षों तक सत्ता में रही अवामी लीग के बगैर हुए चुनावों में शेख हसीना की पार्टी के दोनों कट्टर विरोधी दलों (बीएनपी गठबंधन और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन)ने जातीय संसद पर करीब-करीब पूरा कब्जा कर लिया है।

बीएनपी गठबंधन ने तो दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा का आंकड़ा पाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने पर बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार जब भी रही है, तब भारत के साथ संबंधों में गर्मजोशी नहीं रही है। ऐसे में यह सवाल बहुत ही स्वाभाविक हो जाता है कि बीएनपी सरकार का रुख़ पड़ोसी देश भारत को लेकर क्या होगा?

हसीने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध सबसे निचले स्तर पर

शेख़ हसीना के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद 18 महीनों तक बांग्लादेश ग़ैर-निर्वाचित अंतरिम सरकार के अधीन रहा। इस अंतरिम सरकार के साथ भारत के संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। हसीना का भारत आना और वहीं से उनके सार्वजनिक वक्तव्यों ने तनाव को और बढ़ाया।वहीं, हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में बढ़ती भारत-विरोधी बयानबाज़ी और हिंसा ने भी चिंता बढ़ाई है। अब सवाल ये है कि क्या पड़ोसी देश में नई सरकार गठन के बाद भारत के साथ रिश्तों को सुधारने पर जोर देगी?

भारत के साथ सहज रिश्ते कायम करने की कोशिश नहीं

पिछली बार जब बांग्लादेश में तारिक रहमान की मां खालिदा जिया की सरकार थी तो खासकर 2001 से 2006 के बीच उन्होंने भारत के साथ सहज रिश्ते कायम करने की कोशिश नहीं की। इस दौरान बीएनपी पर उल्फा को संरक्षण देने के भी आरोप लगे। उल्फा को बीएनपी सरकार ने हथियारों की तस्करी की खुली छूट दी। 2004 में चटगांव से हथियारों की जब्ती इसका कुख्यात उदाहरण है। परंतु जब 2009 में शेख हसीना की अवामी लीग सत्ता में पूरे दम के साथ बैठी तो उसने भारत-विरोधी अलगाववादी संगठनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ज्यादातर उग्रवादी या तो वहां से भाग खड़े हुए या उन्हें पकड़ कर भारत के हवाले कर दिया गया।

मुहम्मद यूनुस ने बनाया भारत विरोधी माहौल

इस वक्त बांग्लादेश एक नाजुक मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। देश में कट्टरपंथी ताकतें खुलकर सक्रिय हो गई हैं और अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत के खिलाफ माहौल बनाया गया। शेख हसीना के दौर में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी थी, लेकिन उनके सत्ता से हटने के बाद यूनुस के नेतृत्व में नीति में अचानक बदलाव देखने को मिला। जिस भारत की मदद से बांग्लादेश आजाद हुआ था, उससे दूरी बढ़ाते हुए अब पाकिस्तान के साथ रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

भारत के साथ कैसे संबंध चाहेंगे तारीक?

तारिक रहमान पिछले साल दिसंबर में ही अपने खुद के निर्वासन वाला जीवन छोड़कर लंदन से ढाका लौटे। आने के बाद से जितने भी भाषण दिए हैं, उससे यह लग रहा है कि वे खुद को बांग्लादेशकी जमीन के साथ फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे अपने पहले भाषणों से ही आंतरिक सौहार्द का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। तारिक रहमान के लिए यह भी माना जाने लगा था कि वह भारत के साथ अच्छे संबंधों की वकालत करते थे। क्योंकि उन्हें लगता था कि दोनों देशों में दोस्ती ही उनके मुल्क की अर्थव्यस्था मजूबत कर सकती है।

बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी गठबंधन को प्रचंड जीत, पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई

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बांग्लादेश में गुरूवार को 13वें संसदीय चुनाव के लिए 299 सीटों पर मतदान कराए गए। आज नतीजे घोषित किए जा रहे हैं। जारी परिणामों में बीएनपी को पूर्ण बहुमत मिला है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के करीब डेढ़ साल बाद पहली बार आम चुनाव कराए गए हैं। मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच है। अवामी लीग चुनाव से बाहर है।

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बीएनपी का दोहरा शतक

बांग्लादेश के आम चुनाव में बीएनपी ने बड़ी बढ़त बनाते हुए दोहरा शतक पार कर लिया है। जमुना टीवी के अनुसार बीएनपी को अब तक 211 सीटें मिली हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन करीब 70 सीटों पर है। यह बीएनपी की निर्णायक जीत मानी जा रही है।

तारिक रहमान ने की जश्न न मनाने की अपील

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान ने बांग्लादेश चुनाव में जीत का दावा किया है। इसके साथ ही रहमान ने अपनी मां खालिदा जिया के सम्मान में पार्टी कार्यकर्ताओं से जीत का जश्न न मनाने की अपील की है। खालिदा जिया का चुनाव से पहले निधन हो गया था। विजय जुलूस और जश्न की जगह पार्टी ने शुक्रवार की नमाज के बाद खालिदा जिया के लिए दुआ करने की अपील की है।

पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी जीत की बधाई

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की जीत के लिए तारिक रहमान को बधाई दी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, 'मैं बांग्लादेश में संसदीय चुनावों में BNP को बड़ी जीत दिलाने के लिए तारिक रहमान को दिल से बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश के लोगों का आपके नेतृत्व पर भरोसा दिखाती है।'

पीएम मोदी ने कहा- साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं

पीएम मोदी ने आगे लिखा, 'भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं।'

बांग्लादेश से संबंधों में और तल्खी, भारत ने राजनयिकों के परिवार को वापस बुलाया

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भारत ने बांग्लादेश में खराब होती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने वहां तैनात भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया है।कूटनीतिक तनातनी के बीच भारत ने सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश को नॉन फैमिली श्रेणी में डाल कर वहां विभिन्न मिशनों में तैनात राजनयिकों के परिवार के सदस्यों को वापस बुला लिया है।

भारत ने अगले महीने बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव के दौरान संभावित हिंसा के मद्देनजर यह फैसला किया है।राजनयिकों के परिवार के सभी सदस्य 15 जनवरी तक भारत वापस लौट चुके हैं। माना जा रहा है कि आम चुनाव के नतीजे आने के बाद भारत बांग्लादेश की स्थिति की समीक्षा कर अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा। बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। इसी दिन जनमत संग्रह भी होना तय है।

इन देशों पर 'नॉन फैमिली' लागू

अब तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने 'नॉन फैमिली' की यह श्रेणी सिर्फ़ कुछ ही देशों पर लागू की थी, जिनमें इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान शामिल हैं। इस ताजा फैसले के बाद अब बांग्लादेश को भी इस सूची में शामिल कर लिया गया है।

शेख हसीना के बाद बिगड़े संबंध

बांग्लादेश को नॉन फैमिली श्रेणी में अचानक या हड़बड़ी में शामिल नहीं किया गया है। दरअसल, शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद से दोनों देशों में तल्खी बढ़ी है। भारत पहले ही बांग्लादेश के लिए वीजा सेवा बंद कर चुका है। हिंदुओं की लगातार हत्या के कारण भी तनातनी बढ़ी है।

राजनयिकों की सुरक्षा चिंता बढ़ी

बता दें हाल के वक्त में भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक असहजता भी देखने को मिली है। बीते दिनों छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले । बांग्लादेश में भारतीय मिशन और राजनयिकों की सुरक्षा भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इस मसले पर भारत ने दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब भी किया था।

बांग्लादेश ने आईपीएल का प्रसारण किया बैन, मुस्तफिजुर को लीग से बाहर किए जाने पर फैसला

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2026) के मैच अब बांग्लादेश में नहीं दिखाई जाएंगे। बांग्लादेश सरकार ने आईपीएल के मैचों के टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। अपने क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश की सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। पड़ोसी देश के सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार (5 जनवरी) को इसे लेकर सभी स्थानीय टीवी चैनलों को एक पत्र भेजा है, जिसमें आईपीएल के टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी दी गई है।

बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इसमें लिखा गया कि बीसीसीआई ने 26 मार्च से शुरू हो रही इंडियन प्रीमियर लीग (आपीएल) में बांग्लादेश के क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स टीम से बाहर करने का निर्णय लिया है। बयान में कहा गया कि इस निर्णय के पीछे कोई ठोस या तार्किक कारण नहीं था। यह फैसला बांग्लादेश की जनता के लिए अपमानजनक, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। ऐसे में अगले निर्देश तक आईपीएल के सभी मैच के प्रचार, प्रसारण और पुन: प्रसारण को बंद रखने के निर्देश दिए जाते हैं।

मुस्ताफिजुर रहमान केस के बाद बढ़ा विवाद

आईपीएल 2026 के लिए हुए मिनी ऑक्शन में मुस्ताफिजुर रहमान को कोलकाता नाइटराइडर्स ने खरीदा था। मगर इसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर बीसीसीआई ने हस्तक्षेप करते हुए केकेआर फ्रेंचाइजी को मुस्ताफिजुर को रीलिज करने का आदेश दिया था। बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस फैसले को किसी भी तरह से अतार्किक ठहराया।

बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेलने की दी है धमकी

इससे पहले बांग्लादेश में मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से हटाए जाने की बांग्लादेश सरकार ने आलोचना की थी। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी इस फैसले का विरोध किया था। साथ ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेलने के लिए भारत में टीम नहीं भेजने का भी ऐलान कर दिया था। बीसीबी ने भारत में अपनी टीम की सुरक्षा को खतरा बताया था और इसके लिए मुस्तफिजुर रहमान को हटाए जाने के कारणों को आधार बनाया था। बीसीबी ने अपनी टीम के मैच भारत से श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग करते हुए आईसीसी को भी पत्र लिखा है।

बीजेपी नेता संगीत सिंह सोम को बांग्लादेशी नंबर से मिली धमकी, बम से उड़ाने की चेतावनी

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यूपी बीजेपी के फायरब्रांड नेता और मेरठ की सरधना से पूर्व विधायक संगीत सिंह सोम को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। यह धमकी बांग्लादेश से किए गए कॉल और मैसेज के जरिए दी गई है।

धमकी भरे फोन कॉल, मैसेज और वीडियो कॉल मिलने के बाद पूर्व विधायक के निजी सचिव शेखर ने सरधना थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

सभी संदिग्ध नंबर पुलिस को सौंपे

भाजपा नेता संगीत सोम ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 8 बजे उन्हें धमकी भरे मैसेज और वीडियो कॉल प्राप्त हुए। कॉल करने वालों ने पूर्व विधायक को परिवार सहित बम से उड़ाकर जान से मारने के साथ-साथ कुछ प्रमुख न्यूज चैनलों को भी बम से उड़ाने की धमकी भी दी। उन्होंने सभी संदिग्ध नंबर पुलिस को जांच के लिए सौंप दिए हैं।

धमकी देने वाले नंबर बांग्लादेश के

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमकी देने वाले नंबर बांग्लादेश के हैं। साइबर सेल और अन्य तकनीकी एजेंसियों की मदद से पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि धमकी देने वालों की पहचान की जा सके।

बांग्लादेश में हिंदुओं के शोषण पर बीजेपी नेता का कड़ा रूख

बता दें कि कि संगीत सोम ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था और IPL टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख खान और बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को लेकर तीखी टिप्पीणी की थी। सोम ने कहा था कि जब पड़ोसी देशों में भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है, तब ऐसे खिलाड़ियों पर करोड़ों खर्च करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा था कि वे ऐसे मुद्दों पर आगे भी खुलकर बोलते रहेंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी धमकियाँ क्यों न मिलें।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने मोहम्मद यूनुस पर लगाया गंभीर आरोप, तारिक राज में बड़ा खुलासा

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया। राष्ट्रपति को न सिर्फ अहम चर्चाओं से दूर रखा बल्कि उन्हें हटाने तक की साजिश रच देश को अस्थिर करने का प्रयास किया।

यूनुस पर संविधान पालन नहीं करने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने देश में सरकार बदलते ही एक ऐसा खुलासा किया है। कालेर कंठो के साथ इंटरव्यू में बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस ने 18 महीने की अपनी अंतरिम सरकार में संविधान का पालन नहीं किया। यूनुस ने अपना पद संभालते हुए न तो संस्थागत समन्वय बनाए रखा और न ही उन्हें महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों की जानकारी दी।

यूनुस ने विदेश यात्राओं की नहीं दी जानकारी

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि संविधान कहता है कि विदेश यात्रा की जानकारी राष्ट्रपति को देनी चाहिए और दौरे के बाद भी राष्ट्रपति को बताया जाना चाहिए। यूनुस के 14-15 विदेशी दौरों के बारे में मुझे कभी नहीं बताया गया। इसमें अमेरिका से हुआ व्यापार समझौता भी शामिल है। बांग्लादेशी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी विदेश यात्राओं को बिना पूछे रद्द कर दिया गया। कोसोवो और कतर से मिले निमंत्रणों को उनके नाम से यह कहकर ठुकरा दिया गया कि राष्ट्रपति राज्य कार्यों में बहुत व्यस्त हैं।

सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश का आरोप

शहाबुद्दीन ने तंज करते हुए कहा कि क्या हमारे संविधान में राष्ट्रपति इतने व्यस्त रहते हैं कि उनसे पूछा भी न जाए? राष्ट्रपति का आरोप है कि देश और विदेश में उनकी सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश की गई। उन्हें विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया, जबकि परंपरा के अनुसार इन कार्यक्रमों की अध्यक्षता राष्ट्रपति करते हैं।

पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने कहा कि यूनुस का पूरा ध्यान उनको पद से हटाने पर रहा, वो अपने कार्यकाल में सिर्फ मेरे खिलाफ साजिशें रचते रहें। यूनुस ने ना सिर्फ मेरे खिलाफ राजनीतिक स्तर पर साजिशें रचीं बल्कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अंतरिम सरकार ने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर मुझे असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश भी रची।

बांग्लादेश में नई सरकार बनते ही स्पाइसजेट पर लगा 'बैन', जानें पूरा मामला

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बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने भारतीय एयरलाइन स्पाइसजेट को अपने एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) के उपयोग से रोक दिया है। बांग्लादेश ने कथित बकाया भुगतान न चुकाने के कारण बजट एयरलाइन स्पाइसजेट को अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग से रोक दिया है। एयरस्पेस उपलब्ध न होने के चलते कोलकाता से गुवाहाटी और इम्फाल जाने वाली कुछ उड़ानों को अब लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है। इससे उड़ान के समय और ऑपरेशनल लागत पर असर पड़ सकता है।

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स्पाइसजेट ने क्या कहा?

स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘ये उद्योग से जुड़े सामान्य मुद्दे हैं और हम इनका शीघ्र समाधान निकालने के लिए रचनात्मक रूप से काम कर रहे हैं। हमारी उड़ान सेवाएं अप्रभावित हैं और हम नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी निर्धारित सेवाएं जारी रखे हुए हैं।’ हालांकि, विशिष्ट विवरणों का खुलासा नहीं किया गया।

वैकल्पिक और लंबे रूट का सहारा

बता दें कि यात्रियों पर फिलहाल इसका सीधा असर नहीं पड़ा है। हालांकि एयरस्पेस बंद होने से कुछ उड़ानों को वैकल्पिक रूट से जाना पड़ रहा है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार स्पाइसजेट की कुछ उड़ानें बांग्लादेशी एयरस्पेस से बचते हुए वैकल्पिक और लंबा मार्ग अपना रही हैं।

स्पाइसजेट के शेयर में गिरावट

इस बीच बीएसई में दोपहर के कारोबार के दौरान स्पाइसजेट के शेयर में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने हाल ही में दिसंबर 2025 तिमाही में 269.27 करोड़ रुपये का घाटा भी दर्ज किया था, जिसका कारण बढ़ती लागत और एकमुश्त खर्च बताए गए हैं।

तारिक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, 25 लोगों के मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 60 वर्षीय रहमान को बंगभवन के बजाय जातीय संसद के दक्षिण प्लाजा में पद की शपथ दिलाई, जो एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा से हटकर था।

तारिक के साथ नई सरकार के मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलाई गई। इनमें डॉ खलीलुर रहमान (विदेश मंत्री), सलाहुद्दीन अहमद (गृहमंत्री), डॉ अमीर खसरू महमूद (वित्त और प्लानिंग मंत्री), शमा ओबैद (विदेश राज्य मंत्री) पद संभालेंगे।

25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने ली शपथ

तारिक रहमान के अलावा 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी मंत्रिमंडल में 50 सदस्य हैं, जिनमें 25 मंत्री, 24 राज्य मंत्री और तीन टेक्नोक्रेट शामिल हैं। इन 25 मंत्रियों में से 17 नए चेहरे हैं, और सभी राज्य मंत्री पहली बार इस पद पर आसीन हुए हैं। प्रधानमंत्री रहमान भी पहली बार मंत्रिमंडल के सदस्य बने हैं।

मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

• सलाहुद्दीन अहमद - गृह मंत्रालय

• अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय

• खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय

• खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय

• मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय

• इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय

• AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण

• अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

• मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय

• निताई रॉय चौधरी - सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय

• मोहम्मद असदुज्जमां - कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय

• काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय

• अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार

• ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद

• उद्दीन चौधरी एनी - जल संसाधन मंत्रालय

• एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय

• अमीन उर राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय

• अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय

• असदुल हबीब दुलु - आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय

• ज़कारिया ताहिर - आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय

• दीपेन दीवान - चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय

• सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल - स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय

• फकीर महबूब अनम - डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय

• शेख रबीउल आलम - सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय

• मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय

शपथ ग्रहण में भारत से कौन पहुंचा?

इस शपथ ग्रहण में दुनिया के अलग-अलग देशों के न्यौता भेजा गया। भारत से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल होने के लिए ढाका पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत हुआ। इनके अलावा मलेशिया के पीएम, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की और श्रीलंका के प्रतिनिधि समारोह में मौजूद रहे। साथ ही चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को भी समारोह का आमंत्रण भेजा गया।

पीएम मोदी को बांग्लादेश से तारिक रहमान के शपथ-समारोह का न्योता, पिघलने लगी रिश्तों पर जमी बर्फ?

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बांग्लादेश के चुनाव में बीएनपी की जीत के बाद ढाका-दिल्ली के रिश्तों में जमी बर्फ कुछ हद तक पिघलती दिखी है। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चीफ तारिक रहमान को बधाई दी और भारत के समर्थन का वादा किया। तारिक रहमान और उनकी पार्टी की ओर से इस संदेश का गर्मजोशी के साथ जवाब दिया गया। अब ढाका से नरेंद्र मोदी को शपथ ग्रहण का न्योता भी भेजा गया है।

17 फरवरी को शपथ लेंगे तारीक रहमान

बीएनपी के चेयरमैन तारीक रहमान 17 फरवरी को देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह परंपरा से अलग इस बार राष्ट्रपति भवन की जगह ढाका के नेशनल पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स के साउथ प्लाजा में होगा। ढाका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई क्षेत्रीय नेताओं को इस समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा है। हालांकि, अभी तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पीएम मोदी के ढाका जाने की संभावना कम

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाका जाने की संभावना कम है क्योंकि वह 17 फरवरी को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करने वाले हैं। मैक्रों, अगले हफ्ते एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं।

भारत की ओर से कोई सीनियर नेता हो सकता है शामिल

जानकारी के मुताबिक, तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय पक्ष की तरफ से कोई सीनियर नेता, शायद उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन या विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हो सकते हैं।

जल्दबाजी नहीं चाहती भारत सरकार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत बांग्लादेश के साथ रिश्तों को रीसेट करना चाहता है, लेकिन जल्दबाजी में समझौता नहीं करना चाहता। खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी इस कार्यक्रम में बुलाए जाने की उम्मीद है

बांग्लादेश चुनाव में तीन हिंदू उम्मीदवारों को मिली जीत, 20 साल में सिमटा अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व

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बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) ने प्रचंड जीत हासिल की है। 299 सीटों पर हुए चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP को 211 सीटों पर जीत मिली हैं। वहीं, मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें हासिल हुई हैं। खास बात है कि इस बार के चुनाव में केवल तीन हिंदू उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। ये तीनों की बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीते हैं।

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किन उम्मीदवारों ने हासिल की जीत

गायेश्वर चंद्र रॉय- बांग्लादेश चुनाव में जीत हासिल करने वाले हिंदू उम्मीदवारों में सबसे प्रमुख नाम गायेश्वर चंद्र रॉय का है। बीएनपी के वरिष्ठ नेता रॉय ने ढाका-3 निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है। वे पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं और पूर्व में राज्य मंत्री रहे हैं। रॉय ने 99163 वोट हासिल करके जमात-ए-इस्लामी उम्मीदवार मोहम्मद शाहीनुर इस्लाम को मात दे दी।

निताई रॉय चौधरी- बीएनपी के उपाध्यक्ष निताई रॉय चौधरी ने मागुरा-2 सीट से जीत दर्ज की। उन्हें 1 लाख 47 हजार 896 वोट मिले, जो जमात-ए-इस्लामी के मुस्तर्शीद बिल्लाह से अधिक थे, जिन्हें 1 लाख 17 हजार 018 वोट मिले। चौधरी को बीएनपी के अंदर एक बेहद प्रभावशाली अल्पसंख्यक चेहरा माना जाता है। उनकी जीत अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन को और पुष्ट करती है।

दीपेन दीवान- बीएनपी के ही टिकट पर जीतने वाले तीसरे हिंदू उम्मीदवार एडवोकेट दीपेन दीवान है। उन्होंने रंगमती संसदीय सीट से जीत हासिल की है। दीवान को 31 हजार 222 वोट मिले है। उनका मुकाबला इंडिपेंडेंट उम्मीदवार पहल चकमा से था, जिन्हें 21 हजार 544 वोट मिले।

तीन हिंदू और एक आदिवासी उम्मीदवार ने दर्ज की जीत

इस पूरे चुनाव में केवल चार अल्पसंख्यक तीन हिंदू और एक आदिवासी उम्मीदवार ही जीतकर संसद में अपनी जगह बनाने में सफल रहे। यह आंकड़ा बांग्लादेश में अल्पसंख्यक भागीदारी के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि हिंदू आबादी देश की कुल जनसंख्या का लगभग 8% है। पिछले 20 वर्षों में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व आम तौर पर 14 से 20 सीटों तक रहता था, लेकिन इस बार यह संख्या बेहद कम रहा।

79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार में केवल चार जीते

चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें बीएनपी के चार विजयी हुए। इसके अलावा, जमात-ए-इस्लामी का हिंदू उम्मीदवार हार गया। यह परिणाम न केवल अल्पसंख्यकों की राजनीतिक भागीदारी पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि देश की बदलती राजनीतिक तस्वीर को भी उजागर करते हैं।

300 सीट वाली संसद में 3 हिंदू सांसद

300 सीटों वाली संसद में इस बार सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए हैं। यह आंकड़ा तब आया है जब हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा देखी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के लंबे कार्यकाल के दौरान संसद में हिंदू सांसदों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही थी।

2009-2014 में थे 16 हिंदू सांसद

2009-2014 की संसद में 16 हिंदू सांसद थे। 2014-2019 में यह संख्या बढ़कर 17 (और आरक्षित सीटों के साथ 20 तक) पहुंची। 2019-2024 में करीब 14 अल्पसंख्यक सांसद थे। यानी पहले जहां 14 से 20 के बीच हिंदू सांसद होते थे, अब संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है।

बांग्लादेश में बीएनपी की जीत, भारत के लिए तारिक रहमान के सत्ता में आने क्या हैं मायने?

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बांग्लादेश में तारिक रहमान की अगुवाई में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार बनने का रास्ता साफ हो चुका है। बांग्लादेश में सबसे ज्यादा वर्षों तक सत्ता में रही अवामी लीग के बगैर हुए चुनावों में शेख हसीना की पार्टी के दोनों कट्टर विरोधी दलों (बीएनपी गठबंधन और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन)ने जातीय संसद पर करीब-करीब पूरा कब्जा कर लिया है।

बीएनपी गठबंधन ने तो दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा का आंकड़ा पाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने पर बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार जब भी रही है, तब भारत के साथ संबंधों में गर्मजोशी नहीं रही है। ऐसे में यह सवाल बहुत ही स्वाभाविक हो जाता है कि बीएनपी सरकार का रुख़ पड़ोसी देश भारत को लेकर क्या होगा?

हसीने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध सबसे निचले स्तर पर

शेख़ हसीना के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद 18 महीनों तक बांग्लादेश ग़ैर-निर्वाचित अंतरिम सरकार के अधीन रहा। इस अंतरिम सरकार के साथ भारत के संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। हसीना का भारत आना और वहीं से उनके सार्वजनिक वक्तव्यों ने तनाव को और बढ़ाया।वहीं, हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में बढ़ती भारत-विरोधी बयानबाज़ी और हिंसा ने भी चिंता बढ़ाई है। अब सवाल ये है कि क्या पड़ोसी देश में नई सरकार गठन के बाद भारत के साथ रिश्तों को सुधारने पर जोर देगी?

भारत के साथ सहज रिश्ते कायम करने की कोशिश नहीं

पिछली बार जब बांग्लादेश में तारिक रहमान की मां खालिदा जिया की सरकार थी तो खासकर 2001 से 2006 के बीच उन्होंने भारत के साथ सहज रिश्ते कायम करने की कोशिश नहीं की। इस दौरान बीएनपी पर उल्फा को संरक्षण देने के भी आरोप लगे। उल्फा को बीएनपी सरकार ने हथियारों की तस्करी की खुली छूट दी। 2004 में चटगांव से हथियारों की जब्ती इसका कुख्यात उदाहरण है। परंतु जब 2009 में शेख हसीना की अवामी लीग सत्ता में पूरे दम के साथ बैठी तो उसने भारत-विरोधी अलगाववादी संगठनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ज्यादातर उग्रवादी या तो वहां से भाग खड़े हुए या उन्हें पकड़ कर भारत के हवाले कर दिया गया।

मुहम्मद यूनुस ने बनाया भारत विरोधी माहौल

इस वक्त बांग्लादेश एक नाजुक मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। देश में कट्टरपंथी ताकतें खुलकर सक्रिय हो गई हैं और अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत के खिलाफ माहौल बनाया गया। शेख हसीना के दौर में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी थी, लेकिन उनके सत्ता से हटने के बाद यूनुस के नेतृत्व में नीति में अचानक बदलाव देखने को मिला। जिस भारत की मदद से बांग्लादेश आजाद हुआ था, उससे दूरी बढ़ाते हुए अब पाकिस्तान के साथ रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

भारत के साथ कैसे संबंध चाहेंगे तारीक?

तारिक रहमान पिछले साल दिसंबर में ही अपने खुद के निर्वासन वाला जीवन छोड़कर लंदन से ढाका लौटे। आने के बाद से जितने भी भाषण दिए हैं, उससे यह लग रहा है कि वे खुद को बांग्लादेशकी जमीन के साथ फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वे अपने पहले भाषणों से ही आंतरिक सौहार्द का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। तारिक रहमान के लिए यह भी माना जाने लगा था कि वह भारत के साथ अच्छे संबंधों की वकालत करते थे। क्योंकि उन्हें लगता था कि दोनों देशों में दोस्ती ही उनके मुल्क की अर्थव्यस्था मजूबत कर सकती है।

बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी गठबंधन को प्रचंड जीत, पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी बधाई

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बांग्लादेश में गुरूवार को 13वें संसदीय चुनाव के लिए 299 सीटों पर मतदान कराए गए। आज नतीजे घोषित किए जा रहे हैं। जारी परिणामों में बीएनपी को पूर्ण बहुमत मिला है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के करीब डेढ़ साल बाद पहली बार आम चुनाव कराए गए हैं। मुख्य मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच है। अवामी लीग चुनाव से बाहर है।

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बीएनपी का दोहरा शतक

बांग्लादेश के आम चुनाव में बीएनपी ने बड़ी बढ़त बनाते हुए दोहरा शतक पार कर लिया है। जमुना टीवी के अनुसार बीएनपी को अब तक 211 सीटें मिली हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन करीब 70 सीटों पर है। यह बीएनपी की निर्णायक जीत मानी जा रही है।

तारिक रहमान ने की जश्न न मनाने की अपील

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान ने बांग्लादेश चुनाव में जीत का दावा किया है। इसके साथ ही रहमान ने अपनी मां खालिदा जिया के सम्मान में पार्टी कार्यकर्ताओं से जीत का जश्न न मनाने की अपील की है। खालिदा जिया का चुनाव से पहले निधन हो गया था। विजय जुलूस और जश्न की जगह पार्टी ने शुक्रवार की नमाज के बाद खालिदा जिया के लिए दुआ करने की अपील की है।

पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी जीत की बधाई

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश चुनाव में बीएनपी की जीत के लिए तारिक रहमान को बधाई दी है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, 'मैं बांग्लादेश में संसदीय चुनावों में BNP को बड़ी जीत दिलाने के लिए तारिक रहमान को दिल से बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश के लोगों का आपके नेतृत्व पर भरोसा दिखाती है।'

पीएम मोदी ने कहा- साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं

पीएम मोदी ने आगे लिखा, 'भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं।'

बांग्लादेश से संबंधों में और तल्खी, भारत ने राजनयिकों के परिवार को वापस बुलाया

#indiarecalledthefamilymembersofitsmissionofficialsfrombangladesh

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भारत ने बांग्लादेश में खराब होती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने वहां तैनात भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया है।कूटनीतिक तनातनी के बीच भारत ने सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश को नॉन फैमिली श्रेणी में डाल कर वहां विभिन्न मिशनों में तैनात राजनयिकों के परिवार के सदस्यों को वापस बुला लिया है।

भारत ने अगले महीने बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव के दौरान संभावित हिंसा के मद्देनजर यह फैसला किया है।राजनयिकों के परिवार के सभी सदस्य 15 जनवरी तक भारत वापस लौट चुके हैं। माना जा रहा है कि आम चुनाव के नतीजे आने के बाद भारत बांग्लादेश की स्थिति की समीक्षा कर अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा। बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। इसी दिन जनमत संग्रह भी होना तय है।

इन देशों पर 'नॉन फैमिली' लागू

अब तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने 'नॉन फैमिली' की यह श्रेणी सिर्फ़ कुछ ही देशों पर लागू की थी, जिनमें इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान शामिल हैं। इस ताजा फैसले के बाद अब बांग्लादेश को भी इस सूची में शामिल कर लिया गया है।

शेख हसीना के बाद बिगड़े संबंध

बांग्लादेश को नॉन फैमिली श्रेणी में अचानक या हड़बड़ी में शामिल नहीं किया गया है। दरअसल, शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद से दोनों देशों में तल्खी बढ़ी है। भारत पहले ही बांग्लादेश के लिए वीजा सेवा बंद कर चुका है। हिंदुओं की लगातार हत्या के कारण भी तनातनी बढ़ी है।

राजनयिकों की सुरक्षा चिंता बढ़ी

बता दें हाल के वक्त में भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक असहजता भी देखने को मिली है। बीते दिनों छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले । बांग्लादेश में भारतीय मिशन और राजनयिकों की सुरक्षा भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इस मसले पर भारत ने दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब भी किया था।

बांग्लादेश ने आईपीएल का प्रसारण किया बैन, मुस्तफिजुर को लीग से बाहर किए जाने पर फैसला

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2026) के मैच अब बांग्लादेश में नहीं दिखाई जाएंगे। बांग्लादेश सरकार ने आईपीएल के मैचों के टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। अपने क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश की सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। पड़ोसी देश के सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार (5 जनवरी) को इसे लेकर सभी स्थानीय टीवी चैनलों को एक पत्र भेजा है, जिसमें आईपीएल के टेलीकास्ट पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी दी गई है।

बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इसमें लिखा गया कि बीसीसीआई ने 26 मार्च से शुरू हो रही इंडियन प्रीमियर लीग (आपीएल) में बांग्लादेश के क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स टीम से बाहर करने का निर्णय लिया है। बयान में कहा गया कि इस निर्णय के पीछे कोई ठोस या तार्किक कारण नहीं था। यह फैसला बांग्लादेश की जनता के लिए अपमानजनक, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। ऐसे में अगले निर्देश तक आईपीएल के सभी मैच के प्रचार, प्रसारण और पुन: प्रसारण को बंद रखने के निर्देश दिए जाते हैं।

मुस्ताफिजुर रहमान केस के बाद बढ़ा विवाद

आईपीएल 2026 के लिए हुए मिनी ऑक्शन में मुस्ताफिजुर रहमान को कोलकाता नाइटराइडर्स ने खरीदा था। मगर इसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर बीसीसीआई ने हस्तक्षेप करते हुए केकेआर फ्रेंचाइजी को मुस्ताफिजुर को रीलिज करने का आदेश दिया था। बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस फैसले को किसी भी तरह से अतार्किक ठहराया।

बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप में नहीं खेलने की दी है धमकी

इससे पहले बांग्लादेश में मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से हटाए जाने की बांग्लादेश सरकार ने आलोचना की थी। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी इस फैसले का विरोध किया था। साथ ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेलने के लिए भारत में टीम नहीं भेजने का भी ऐलान कर दिया था। बीसीबी ने भारत में अपनी टीम की सुरक्षा को खतरा बताया था और इसके लिए मुस्तफिजुर रहमान को हटाए जाने के कारणों को आधार बनाया था। बीसीबी ने अपनी टीम के मैच भारत से श्रीलंका शिफ्ट करने की मांग करते हुए आईसीसी को भी पत्र लिखा है।

बीजेपी नेता संगीत सिंह सोम को बांग्लादेशी नंबर से मिली धमकी, बम से उड़ाने की चेतावनी

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यूपी बीजेपी के फायरब्रांड नेता और मेरठ की सरधना से पूर्व विधायक संगीत सिंह सोम को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। यह धमकी बांग्लादेश से किए गए कॉल और मैसेज के जरिए दी गई है।

धमकी भरे फोन कॉल, मैसेज और वीडियो कॉल मिलने के बाद पूर्व विधायक के निजी सचिव शेखर ने सरधना थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

सभी संदिग्ध नंबर पुलिस को सौंपे

भाजपा नेता संगीत सोम ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 8 बजे उन्हें धमकी भरे मैसेज और वीडियो कॉल प्राप्त हुए। कॉल करने वालों ने पूर्व विधायक को परिवार सहित बम से उड़ाकर जान से मारने के साथ-साथ कुछ प्रमुख न्यूज चैनलों को भी बम से उड़ाने की धमकी भी दी। उन्होंने सभी संदिग्ध नंबर पुलिस को जांच के लिए सौंप दिए हैं।

धमकी देने वाले नंबर बांग्लादेश के

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धमकी देने वाले नंबर बांग्लादेश के हैं। साइबर सेल और अन्य तकनीकी एजेंसियों की मदद से पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है, ताकि धमकी देने वालों की पहचान की जा सके।

बांग्लादेश में हिंदुओं के शोषण पर बीजेपी नेता का कड़ा रूख

बता दें कि कि संगीत सोम ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था और IPL टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख खान और बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को लेकर तीखी टिप्पीणी की थी। सोम ने कहा था कि जब पड़ोसी देशों में भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है, तब ऐसे खिलाड़ियों पर करोड़ों खर्च करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा था कि वे ऐसे मुद्दों पर आगे भी खुलकर बोलते रहेंगे, चाहे इसके लिए कितनी भी धमकियाँ क्यों न मिलें।