उच्च अधिकारियों के आदेश को चुनौती, पीड़ित परेशान
रितेश मिश्रा
हरदोई। धन्य है बिलग्राम तहसील! जहाँ साहब के आदेश की बत्ती बना देते हैं बाबू और कानूनगो
उत्तर प्रदेश सरकार दिन-रात ढोल पीट रही है कि 'जनसुनवाई' में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, जीरो टॉलरेंस की नीति चलेगी। लेकिन हरदोई की बिलग्राम तहसील के राजस्व कर्मियों ने कसम खा रखी है—“तुम आदेश पे आदेश दागो साहब, हम उसे रद्दी की टोकरी में न डाल दें तो कहना!” यहाँ साहब की कलम चलती है और बाबू-कानूनगो उसे हवा में उड़ा देते हैं। सरकार के निर्देशों का ऐसा सरेआम और शानदार मखौल शायद ही कहीं और देखने को मिले।
चक्कर काटने का 'सिल्वर जुबली' मना रहा पीड़ित
मामला ग्राम श्यामपुर (परगना मल्लावां) का है। शिकायतकर्ता दिवाकर मिश्रा नाम के एक सीधे-साधे इंसान को शायद यह मुगालता हो गया था कि कोर्ट और अफसरों के आदेश से उसकी जमीन की मेड़बंदी हो जाएगी। न्यायालय उपजिलाधिकारी बिलग्राम ने पूरे एक साल पहले—28 मई 2025 को आदेश दिया था कि दो हफ्ते में पैमाइश करके रिपोर्ट लगाओ. दो हफ्ता तो छोड़िए, यहाँ महीनों बीत गए पर मजाल है कि किसी कानूनगो या लेखपाल के कान पर एक छोटी सी जूं भी रेंग जाए!
साहब का आदेश, कर्मियों का स्वाइप-लेफ्ट
जब नीचे वालों ने भाव नहीं दिया, तो पीड़ित फिर बड़े साहबों की चौखट पर गया। 22 नवंबर 2025 को एसडीएम साहब ने दोबारा कहा. फिर बात नहीं बनी तो 17 मार्च 2026 को जिला अधिकारी (डीएम) हरदोई ने अपने लाल पेन से कड़क निर्देश जारी किए. लेकिन बिलग्राम तहसील के कारिंदों का एटीट्यूड देखिए—साहब बड़े होंगे अपने दफ्तर में, फील्ड पर तो मर्जी हमारी ही चलेगी! बहानेबाजी की ऐसी-ऐसी मिसालें पेश की गईं कि पीड़ित का आधा जीवन दफ्तरों की धूल फांकने में ही कट गया.
72 घंटे का अल्टीमेटम और दबंगों का 'रिटर्न गिफ्ट'
हद तो तब हो गई जब मई 2026 में नायब तहसीलदार साहब को 72 घंटे के अंदर निस्तारण का अल्टीमेटम मिला. दबाव में टीम मौके पर गई, नाप-जोख हुई, मेड़ भी बन गई. पीड़ित ने राहत की सांस ली ही थी कि तहसील प्रशासन की ढिलाई और 'दबंग-प्रेम' खुलकर सामने आ गया। राजस्व टीम के पैर पीछे हटते ही रामलखन त्रिपाठी, उमाकान्त शुक्ला और उनके अज्ञात सहयोगियों ने सरकारी नाप से बनी मेड़ को उखाड़ फेंका और खेत जोत डाला.
मतलब, भूमाफिया सीधे-सीधे कह रहे हैं कि जब तहसील प्रशासन ही डीएम-एसडीएम को कुछ नहीं समझता, तो हम क्यों समझें?
पोर्टल पर 'लंबित' है न्याय, साहब हैं चैन की नींद में
डिजिटल इंडिया के इस दौर में पीड़ित ने आईजीआरएस और जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतों की लाइन लगा दी है। शिकायत संख्या 40015526022085, 20015526022250 और 20015526024152 जैसी तमाम अर्जियां आज भी सिस्टम में 'लंबित' यानी कोमा में पड़ी हुई हैं.
जब सरकारी राजस्व टीम द्वारा बनाई गई मेड़ सुरक्षित नहीं है और भूमाफियाओं को तहसील के बाबू-कानूनगो का परोक्ष 'आशीर्वाद' प्राप्त है, तो ऐसे में जिला अधिकारी महोदय का लाल पेन सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रहा है। अब देखना यह है कि इस 'कागजी राज' और दबंगों के हौसलों पर जिला अधिकारी हरदोई कोई कड़ा हंटर चलाते हैं या बिलग्राम तहसील में आदेशों की ऐसी ही धज्जियां उड़ाते रहेंगे।।
14 sec ago
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