यारा तेरी यारी को... 46 बरस की दोस्ती जिंदा, आज भी जनार्दन ईद में, तो इरफान होते हैं दिवाली में शामिल
- पंकज, राजेश, अशफाक और कमल बरसों भी जुड़े हैं एक डोर से
- गुड़ी पड़वा हो या रमजान एक दूसरे की मिठाई से नहीं गुरेज
खान आशु
भोपाल। साल 1980... धार जिला मुख्यालय का आनंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय। पंकज ग्वालियर से तो जनार्दन, इरफान, राजेश, अशफाक और कमल किसी मुहल्ले के स्कूल से आकर यहां जमा हुए थे। सहपाठी दोस्त बने। दोस्ती गहराती रही, यहां तक कि कॉलेज तक भी साथ नहीं छूटा और स्नातक और स्नातकोत्तर पढ़ाई भी साथ ही चलती रही। इस बीच कई होली, कई रमजान, अनेक दिवाली और दर्जनों ईद के त्यौहार साथ मनाने का क्रम जारी रहा। जारी रहने का यह सिलसिला अब दशकों बाद भी बना हुआ है। इरफान की मास्टरी, राजेश की महिला एवं बाल विकास विभाग की सरकारी नौकरी, अशफाक की पत्रकारिता या पंकज का इंश्योरेंस वर्क या जनार्दन का मेडिकल काम कभी बाधा नहीं बना। बस फर्क इतना हुआ कि भौतिक मुलाकातों में कमी आ गई और उसकी जगह सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने ले ली, जिसकी डोर ने आज भी इन यारों की यारी को सरसब्ज रखा हुआ है।
स्कूल कॉलेज से हाथ छुड़ाते वक्त तय नहीं था कि कौन किस रास्ते आगे बढ़ेगा। लेकिन जहां राजेश ने सरकारी नौकरी के साथ खुद को धार की परिधि में ही बांध लिया था, वहीं इरफान भी चंद कदम दूर मांडू जाकर ठहर गए। पंकज और जनार्दन ने इंदौर को ठिकाना बनाया तो दोनों के घर भी संयोग से एक ही कालोनी में आ लगे। अशफाक अखबारों की दुनिया के साथ बहते हुए भोपाल तक आकर रुका, जबकि कमल पटेल ने अपनी पैतृक नगरी धार का दामन छोड़ पाने का मोह नहीं पाला।
- पंकज की पारिवारिक दस्तक
पंकज गुप्ता सब दोस्तों में ऐसा शख्स थे, जिनके घर पहला टीवी आया था, हमारा नियम से चित्रहार, साप्ताहिक या फिल्म देखने जाने का सिलसिला चलता रहा। यह क्रम ऐसा था कि दिन याद रखकर पंकज के पिताश्री घर आते तो हम लोगों के लिए भी खानपान के सामान साथ लेकर आते। जब बहन सपना दुल्हन बनी तो हम लोगों ने दिल्ली तक पहुंचकर शादी में शिरकत की और बहन को विदा किया।

- मंडली का पहला दूल्हा राजेश
राजेश वाणी इस मंडली का पहला व्यक्ति था, जिसने सबसे पहले सात फेरे लिए थे। इरफान, पंकज के साथ अच्छे दोस्तों की तरह जोबट तक पहुंचे और देर रात होने वाले फेरों के लिए जागरण भी किया। हालांकि शादी के बाद जब भी हम लोग इंदौर जाकर पंकज के यहां ठहरते, पंकज ने राजेश के पास सोने से इनकार कर दिया था। वजह क्या थी, यह वही जानते हैं।

- इरफान ने घुमाया आधा भारत
सरकारी मास्टर बनने से पहले इरफान पठान एक रोलिंग मिल में पर्चेस मैनेजर हुआ करते थे। जमाना कैश पेमेंट का था, डिजिटल लेनदेन उस समय नहीं होता था। कैश साथ होने की अपनी रिस्क और बनिए का दिमाग अपनी जगह। फैक्ट्री मालिक विष्णु सेठ ने मशवरा दिया कि अशफाक को भी साथ ले जाया करे इरफान। अच्छी जगह रुकने और अच्छा खाना खाने के साथ उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान का कोना कोना नापने का मौका दिया। इस दौरान हम कई बार अजमेर घूमते तो अनेक बार पावागढ़ के दर्शन से भी नहीं चूकते।

- इस कड़ी का एक और एंगल
पंकज, इरफान, जनार्दन, राजेश, अशफाक की इस मंडली का एक और हिस्सा हुआ करते थे, नाम था श्रीचंद मलानी। कारोबार के पक्के और व्यवहार के सच्चे इस मित्र के साथ बरसों की हजारों यादें अब भी बंधी हुई हैं। बस यह है कि आज भौतिक रूप से वह हमारे साथ नहीं हैं।
- अब सोशल मीडिया पर जीवित संपर्क
काम की व्यस्तता ने सभी लोगों को भौतिक रूप से दूर जरूर कर दिया है, लेकिन वास्तविकता यह है आज भी दिल से सब एक दूसरे से उतने ही जुड़े हैं। वही अपनापन, वही मिलने की शिद्दत, वही एक दूसरे के लिए फिक्र। इरफान के बेटे की शादी हो या जनार्दन की सालगिरह, अशफाक के घर वालिद के दुनिया से रुखसत होने का गम, या राजेश या कमल के घर कोई मांगलिक कार्य, आज भी सभी उसी सम्मान और व्यवहार के साथ याद किए जाते हैं। इनकी 46 बरस की दोस्ती को जिंदा रखने के लिए एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया गया है स्कूल फ्रेंड्स, जो इस कड़ी को मजबूती देता रहता है। इसमें कुछ स्कूली दौर के साथी देवेंद्र काशिव भी मौजूद हैं और जितेंद्र आहूजा भी। इस ग्रुप से हटकर इस जमाने में साथ रहीं डॉ कुसुम बौरासी और नसीम खान भी गाहे बगाहे मुलाकातों में शामिल हैं।




जौनपुर । बयालसी पीजी कॉलेज, जलालपुर, जौनपुर में आज प्राचार्य प्रो. अलकेश्वरी सिंह के संरक्षण में राष्ट्रीय सेवा योजना के द्विवर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष शिविर का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला युवा अधिकारी (मेरा युवा भारत), जौनपुर, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के श्री राम गोपाल सिंह चौहान उपस्थित रहे। इसके साथ ही ग्राम पंचायत बीबनमऊ के प्रधान ज्ञान दास मौर्य, ग्राम प्रधान महिमापुर श्रवण कुमार गुप्ता, महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार गुप्ता, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. मिथिलेश कुमार, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आशुतोष पाण्डेय तथा सोमारू राम सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा संस्थापक की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा माँ सरस्वती, स्वामी विवेकानंद एवं महात्मा गांधी के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित करके किया गया। मुख्य अतिथि राम गोपाल सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना और “मेरा युवा भारत” दोनों ही कार्यक्रम युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित हैं। इनका उद्देश्य देश के युवाओं को सशक्त बनाना, उनके कौशल का विकास करना तथा उनके व्यक्तित्व को निखारना है, ताकि वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से युवाओं में सामुदायिक सेवा की भावना जागृत होती है तथा अनुशासन, सहयोग और एकता का विकास होता है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया तथा पर्यावरण एवं जल संरक्षण के महत्व पर भी अपने विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार एवं डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. राकेश कुमार गुप्ता की मांग पर ग्राम पंचायत बीबनमऊ के प्रधान ज्ञान दास मौर्य तथा ग्राम प्रधान महिमापुर श्रवण कुमार गुप्ता ने महाविद्यालय को छात्र-छात्राओं के बैठने हेतु चार-चार सीमेंट कुर्सियाँ देने का वादा किया।कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आशुतोष पाण्डेय ने सभी अतिथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के महत्व एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी सोमारू राम द्वारा किया गया। इस अवसर पर सभी स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाएँ, साथ ही अजय कुमार सिंह, प्रमय कुमार सिंह, रामजीत कश्यप, बफाती अली सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।


संजीव सिंह बलिया। दुबहड़ ब्लॉक के सवरूबाँध कंपोजिट विद्यालय में लंबे समय से समर्पित सेवा दे रहीं शिक्षामित्र शाहिदा खातून का आज अचानक हृदयाघात से निधन हो गया। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक गुलाब शेख की पत्नी शाहिदा खातून का असमय चले जाना स्थानीय शिक्षा जगत और समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है।वर्षों से प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में निष्ठा से कार्यरत शाहिदा खातून एसआईआर में बीएलओ के पद पर भी अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रही थीं। उनकी मेहनत और लगन ने कई पीढ़ियों को पढ़ा-लिखाकर नई दिशा प्रदान की। आज सुबह मऊ में इलाज कराते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद वे बच न सकीं।इस दुखद घटना से परिवार, सहकर्मी और ग्रामीण क्षेत्र शोकाकुल है। शिक्षा मित्र समुदाय संगठन से राजेश साहनी, अखिलेश पांडेय, संजीव सिंह, भरत यादव, सरल यादव, दिलीप प्रसाद, पंकज सिंह, राकेश पांडेय, अमृत सिंह, लालजी वर्मा, मोहम्मद वसीम, डिम्पल सिंह, मंजूर हुसैन समेत कई स्थानीय लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने कहा कि उनका जाना शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ा आघात है। शाहिदा खातून का समर्पण हमें सिखाता है कि शिक्षा सेवा में निष्ठा ही असली धरोहर है। उनके योगदान को याद रखते हुए हम सब मिलकर शिक्षा को मजबूत बनाएं। ईश्वर उनकी पुण्यात्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति दें।
प्रो रणवीर नंदन पटना। हिंदू नव वर्ष के प्रथम दिन बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद की ओर से धार्मिक कैलेंडर लॉन्च किया गया। इस कैलेंडर में हिंदी तिथि ग्रह नक्षत्र रितु के अलावा किस मौसम में क्या खाना उचित होगा इसकी चर्चा है। इस मौके पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष पूर्व विधान पार्षद प्रोफेसर रणबीर नंदन ने कहा कि इस कैलेंडर के माध्यम से न्यास पर्षद सनातनियों को जीवन जीने की पद्धति की ओर ले जा रहा है। उन्होंने कहा हिंदू नव वर्ष सिर्फ मानव जाति के लिए नहीं बल्कि पृथ्वी जड़ चेतन पशु पक्षियों और पेड़ पौधों के लिए भी है। इस बसंत ऋतु में ही नव वर्ष की शुरुआत होती है और इसी समय पर में नए पट्टे लगते हैं साथ ही इसी दिन पृथ्वी का भी प्रादुर्भाव हुआ था। प्रोफेसर नंदन ने कहा की इस कैलेंडर को प्रदेश के सभी 4:30 हजार मत मंदिरों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध कराया जाएगा ।साथ ही इस कैलेंडर के माध्यम से उनकी अपील है कि इस विषय पर विश्वविद्यालय में भी शोध हो और नए-नए आयाम सामने आए। प्रो नंदन ने कहा कि धार्मिक न्यास पर्षद की वर्तमान समिति के गठन के बाद समाज को एकजुट करने के लिए कई कार्यक्रम किए गए जिसमें सनातन समागम का आयोजन हुआ जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए थे। इसके अलावा सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार पर कार्यक्रम आयोजित हुआ और स्वामी विवेकानंद, संत रविदास ,अटल जी के जयंती पर भी कार्यक्रम कर लोगों तक इन महापुरुषों का संदेश पहुंचाया गया। प्रो नंदन ने कहा कि उनका प्रयास है कि धार्मिक न्यास पर्षद कार्यक्रमों के साथ-साथ मठ मंदिरों का कैसे विकास हो और इन मठ मंदिरों का समाज से कैसे जुड़ाव बढ़े इसके लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए न्यास परिषद में विचार आया था कि धार्मिक कैलेंडर बनाया जाएगा जिसमें सनातन धर्म के पर्व त्यौहार को समाहित कर इसी के अनुसार काम होगा। इस मौके पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि सनातन धर्म में मानव ही नहीं बल्कि जीव जंतु जड़ चेतन की मंगल कामना करता है। समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद में काम हो रहा है। मौके पर बिहार राज धार्मिक न्यास पर्षद के सदस्य हेमराज राम ने कहा कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद सनातन संस्कृति को एकजुट करने के लिए काम कर रहा है। इस मौके पर बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य आनंद कुमार ने कहा की धार्मिक न्यास पर्षद की ओर से मठ मंदिरों के विवाद को सुलझाने के अलावा मठ मंदिरों को सामाजिक कार्यों से भी जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम में बिहार राज धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य विश्व मोहन दास ने कहा कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की पहल पर ही अब प्रदेश के मंदिरों में सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहा है। कार्यक्रम में पटन देवी मंदिर महंत विजय गिरी ने कहा कि चैत्र नवरात्र के पहले दिन इस तरह के अद्वितीय कैलेंडर की लांचिंग हम सनातनियों के लिए सौभाग्य की बात है।
*आए दिन पैसे को लेकर करते थे विवाद

सिद्धेश्वर पाण्डेय




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भोपाल। रमजान महीने का 29वा रोजा रखने के बाद गुरुवार शाम को आसमान में चांद देखने के लिए शहर मोती मस्जिद में जमा हुआ। साफ आकाश के बीच भी चांद ने अपनी आमद देकर ईदुल फितर की खुशियों का ऐलान नहीं किया। रूआते हिलाल कमेटी ने आसपास के बड़े शहरों और छोटे गांवों से भी इसकी तस्दीक की, लेकिन कहीं से भी ऐसी कोई खबर नहीं आई। जिसके बाद काजी ए शहर सैयद मुश्ताक अली नदवी ने शनिवार को ईद का त्यौहार मनाए जाने का ऐलान कर दिया।
मोती मस्जिद में जमा हुए उलेमाओं और लोगों ने इस बात की तस्दीक कर दी कि गुरुवार को ईद का चांद दिखाई नहीं दिया है। जिसके बाद जहां गुरुवार को नमाज ए ईशा के बाद तरावीह की आखिरी नमाज अदा की गई। शुक्रवार को जुमा की नमाज अदा की जाएगी, जिसे जुमातुल विदा के रूप में मनाया जाएगा। यह जुमा इसलिए भी खास हो गया है कि इस रमजान महीने में पड़ने वाला यह पांचवा जुमा होगा।
नहीं थे इमकानात
रमजान महीने की शुरुआत 29वें चांद के साथ हुई थी, सऊदी अरब में भी बुधवार को चांद दिखाई नहीं दिया था। आमतौर पर सऊदी में ईद का त्यौहार भारत से एक दिन पहले मनाया जाता है। इन हालात को देखकर यह अंदाज लगाया जा रहा था कि भारत के आसमान पर भी ईद की खुशियों का पैगाम गुरुवार की बजाए शुक्रवार को ही नमूदार होगा। अब यहां शनिवार को चांद दिखाई नहीं देने पर भी ईद मना की जाएगी, कारण यह भी है कि शुक्रवार को महीने के 30 रोजे पूरे हो जाएंगे।
हुआ बाजारों का रुख
ईद की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शहर का रुख बाजारों की तरफ बढ़ गया। शहर के चौक बाजार, नदीम रोड, लखेरापुरा, जुमेराती, लक्ष्मी टॉकीज, बुधवारा, इतवारा, छावनी, जहांगीराबाद आदि बाजारों में पैर न रखने जैसे हालात बन गए। बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस की यातायात विंग ने शहर में कई जगह बेरीकेटिंग भी कर दी, जिससे वाहनों की भीड़ से पैदल ग्राहकों को दिक्कत न हो।
अब क्षेत्रीय बाजारों का जोर
शहर के परम्परागत बाजारों के अलावा शहर में कई जगह नए बाजार भी आकार लेने लगे हैं। टीला जमालपुरा, सिंधी कॉलोनी चौराहा, निजामुद्दीन कालोनी, जहांगीराबाद और बाग के छोटे स्थाई बाजारों के अलावा शहर में कई जगह अस्थाई ईद बाजार भी इन दिनों सजे हुए हैं।
यह होगा नमाज का वक्त
ईदगाह– सुबह 7:30 बजे
जामा मस्जिद–सुबह 7:45 बजे
ताज-उल-मसाजिद – सुबह 8:00 बजे
मोती मस्जिद – सुबह 8:15 बजे
मस्जिद रब्बानी, एमपी नगर – सुबह 9:00 बजे
मसाजिद कमेटी भोपाल ने ईद की नमाज को लेकर शहर के नाम कुछ ताकीद की हैं। कमेटी के प्रभारी सचिव सैयद उवैस अली द्वारा जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि ईदगाह से पहले किसी भी मस्जिद में नमाज ए ईद अदा नहीं की जाए।
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