सेमरी बाजार स्थित रामनाथपुर खपड़ाडीह में गौरैया आओ मेरे देश में और रैदहाताल के संरक्षण गोष्ठि का आयोजन *
सुल्तानपुर,कटका क्लब सामाजिक संस्था के द्वारा सेमरी बाजार स्थित रामनाथपुर खपड़ाडीह में गौरैया आओ मेरे देश में और रैदहाताल के संरक्षण गोष्ठि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व मनोज कुमार विश्वकर्मा ने किया। इस मौके पर कटका क्लब अध्यक्ष डॉ सौरभ मिश्र विनम्र ने बताया कि गौरैया हमारी प्राकृतिक मित्र है और पर्यावरण में सहायक है। गौरैया प्राकृतिक सहचरी है। कभी वह नीम के पेड़ के नीचे फुदकती और चावल या अनाज के दाने को चुगती है। कभी घर की दीवार पर लगे आईने पर अपनी हमशक्ल पर चोंच मारती दिख जाती है। एक वक्त था जब बबूल के पेड़ पर सैकड़ों की संख्या में घोंसले लटके होते थे, लेकिन वक्त के साथ गौरैया एक कहानी बन गई। हालांकि पर्यावरण के प्रति जागरुकता के चलते हाल के सालों में यह दिखाई देने लगी है। गौरैया इंसान की सच्ची दोस्त भी है और पर्यावरण संरक्षण में उसकी खासी भूमिका भी है। इसके वापसी के लिए हम सभी को आगे आना होगा। वहीं मनोज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि रैदहा ताल प्राकृतिक धरोहर है। यहां कमल खिलता है और सारस जैसे दुर्लभ पक्षियों का बसेरा होता है। लेकिन रैदहा ताल के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा। पशु पक्षियों के रहने पर संकट खड़ा हो रहा है। इस मौके पर मोनू यादव, अमित यादव, अर्पित उपाध्याय, दुर्गा प्रसाद तिवारी, विपिन मिश्र, राजेश यादव, आरिफ खान, आदित्य पांडेय, शुभम, दीपक प्रजापति, देव कुमार, ओम प्रकाश, मोनू उपाध्याय, अम्बिका पांडेय, शिवांक यादव, गंगा राम निषाद दर्जनों ग्रामीण युवा उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा*
सुलतानपुर,जनपद में व्यापारियों के हितों के लिए सदैव संघर्षरत रहने वाला एकमात्र संगठन अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश मंत्री हिमांशु मालवीय व क्षेत्रीय प्रभारी अवध क्षेत्र अमर बहादुर सिंह के दिशा निर्देशन एंव जिला प्रभारी प्रवींद्र भालोटिया की अध्यक्षता में जिला कोर कमेटी की बैठक में जिला अध्यक्ष के रूप में पुनः विजय प्रधान को जिले की कमान सौंपते हुए जिला महामंत्री तेजिंदर सिंह को मनोनीत किया गया। वहीं वरिष्ठ जिला महामंत्री का दायित्व पहले की तरह ही अम्बरीश मिश्रा ही उठाएंगें, एडवोकेट आशीष तिवारी जिला कोषाध्यक्ष का दायित्व लेंगे। इसी के साथ ही मुख्य संरक्षक के रूप में विजय मिश्रा, जिला संगठन महामंत्री का दायित्व अमरचंद साहू को दिया गया, विक्रांत दुबे धर्मेंद्र सिंह बबलू, संतोष सिंह राज, को संगठन मंत्री का दायित्व मिला, विनय सिंह, आशुतोष झा, रमेश कसौधन, परितोष कसौधन, अंकुर तिवारी को जिला उपाध्यक्ष का दायित्व मिला, सुनील सिंह, चंद्रदेव मिश्रा, दिनेश कसौधन, दिनेश गिरी, दीपक मोदनवाल, राकेश कौशल, जिला मंत्री का दायित्व निभाएंगे, नारायण राय, अवधेश अग्रहरि,सर्वेश सिंह, सुधा सिंह, को मीडिया प्रभारी बनाया गया विधिक सलाहकार के लिए राहुल श्रीवास्तव( इनकम टैक्स) कुलदीप श्रीवास्तव( सेल टैक्स) सुरेंद्रनाथ दुबे (सिविल ) सत्य प्रकाश पांडे (फौजदारी) उत्कर्ष शुक्ला (सिविल) का दायित्व निभाएंगे।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
मुख्यमंत्री की प्रशासनिक सख्ती

- सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए वल्लभ भवन में समय पर उपस्थिति के निर्देश, होगी छापामार कार्रवाई

भोपाल। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव आज भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को गुरुवार सुबह दस बजे से शाम के 6 बजे तक उपस्थित के लिए कहा गया है। इस दौरान वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा 

तीनों कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय, और अनाधिकृत उपस्थिति की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने टीम बनाकर सभी जगह तैनात कर दी गई है और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है।

माफी काफी नहीं है', एनसीईआरटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त बरकरार, सीजेआई ने लगाई फटकार

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एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सोशल साइंस के ज्यूडिशियरी से जुड़े चैप्टर पर विवाद बढ़ गया है। किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अंश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने पूछा- इसके पीछे कौन?

सीजेआई की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ वाले चैप्टर को हटाने का फैसला किया है। उसने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी गलती मानी है और इसके लिए माफी मांगी है।सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा है कि बस माफी मांगना या चैप्टर हटाना काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी से कहा है कि वे बताए इसके पीछे कौन हैं, पूरी बात सामने आने तक सुनवाई जारी रहेगी।

एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा

सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी ने कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। किताब से विवादित अंश को भी हटा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए? चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऑनलाइन प्रतियों को भी तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

क्या है मामला?

दरअसल, NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की। किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया। बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।

चैप्टर में क्या?

किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं। चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है। चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं। गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पुस्तक में जोड़े गए इस हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मम्मी आई लव यू…’ ब्रेकअप के बाद हैदराबाद में 21 साल की यूट्यूबर ने दी जान : Bonu Komali suicide case

Bonu Komali suicide case: हैदराबाद से एक दुखद खबर सामने आई है। 21 साल की युवा यूट्यूबर बोनू कोमाली ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मौत से कुछ घंटे पहले ही उसने कुवैत में काम कर रही अपनी मां को एक मैसेज भेजा – “आई लव यू मम्मी सो मच”।

मां को भेजा आखिरी मैसेज

सोमवार तड़के करीब 1:34 बजे कोमाली ने अपनी मां बी. सत्य वरलक्ष्मी को मैसेज किया। उसने लिखा – “आई लव यू मम्मी सो मच, छोटे भाई का अच्छे से ख्याल रखना।”

मां ने तुरंत कॉल किया, लेकिन फोन स्विच ऑफ आ रहा था। कई बार कोशिश के बाद उन्होंने कोमाली की दोस्त मनसा को इसकी जानकारी दी।

दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची पुलिस

दोपहर करीब 3 बजे दोस्त फ्लैट पर पहुंची, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों की मदद से पुलिस को बुलाया गया। दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर कोमाली छत के पंखे से लटकी मिली। मौके पर ही उसकी मौत हो चुकी थी।

कोमाली मूल रूप से Visakhapatnam की रहने वाली थी। वह पिछले 11 महीनों से हैदराबाद में अकेले रहकर बीएससी की पढ़ाई कर रही थी। साथ ही यूट्यूब पर लाइफस्टाइल और पर्सनल वीडियो बनाती थी।

ब्रेकअप बना वजह?

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कोमाली पिछले तीन साल से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर और साथी यूट्यूबर के साथ रिलेशनशिप में थी। हाल ही में दोनों का ब्रेकअप हुआ था, जिससे वह काफी परेशान थी। बताया जा रहा है कि छह महीने पहले भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन तब परिवार ने बचा लिया था।

जांच जारी

पुलिस ने संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए Osmania General Hospital भेजा गया है। फोन रिकॉर्ड, मैसेज और करीबियों के बयान के आधार पर जांच की जा रही है।

लोग बातें बनाना बंद करें!’ हेमा का फूटा गुस्सा, दिया करारा जवाब

बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ Hema Malini ने अपने परिवार को लेकर फैल रही अफवाहों पर साफ और करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि लोग बेवजह बातें न बनाएं, उनका परिवार एकजुट है और सब एक-दूसरे से प्यार करते हैं।

हाल ही में Dharmendra को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कहा जा रहा था कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के बीच दूरियां हैं। इन खबरों पर हेमा ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ कहा कि परिवार में कोई दरार नहीं है।

“पापा के लिए सब एक हैं”

एक इंटरव्यू में हेमा ने बताया कि चाहे उनकी बेटियां Esha Deol और Ahana Deol हों या धर्मेंद्र की पहली पत्नी Prakash Kaur से हुए बच्चे Sunny Deol, Bobby Deol, Vijeta Deol और Ajeita Deol — सभी अपने “धरम जी” से बेहद प्यार करते हैं।

उन्होंने कहा, “पापा हैं ना, पापा के लिए सब करेंगे। सभी बच्चे एक-दूसरे को पसंद करते हैं।”

“जहां धरम जी हैं, वहां नकारात्मकता नहीं”

हेमा ने यह भी कहा कि जब धर्मेंद्र साथ हों तो नकारात्मकता की कोई जगह ही नहीं होती। उन्होंने बताया कि धरम जी ने बच्चों को प्यार और अच्छे संस्कार दिए हैं, इसलिए परिवार में कोई कड़वाहट नहीं है।

हाल ही में ईशा और अहाना को सनी देओल की फिल्म Border 2 की स्पेशल स्क्रीनिंग में देखा गया था, जिससे दोनों परिवारों के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों को और हवा मिली थी।

निजी जिंदगी पर दो टूक

हेमा खुद ‘बॉर्डर 2’ की स्क्रीनिंग में शामिल नहीं हो पाईं। इस पर उन्होंने कहा, “मुझे बुलाया गया था, लेकिन मैं जा नहीं पाई। हम अपने निजी पलों का दिखावा नहीं करते। ये हमारे परिवार की बातें हैं, दुनिया को क्यों दिखाएं? लोगों को समझना चाहिए कि हम सब साथ हैं और हर स्थिति को मिलकर संभाल लेंगे।”

धर्मेंद्र की पारिवारिक कहानी

धर्मेंद्र की पहली शादी 1954 में प्रकाश कौर से हुई थी। उनके चार बच्चे हैं – सनी, बॉबी, विजेता और अजीता। बाद में फिल्मों में काम करते हुए धर्मेंद्र और हेमा मालिनी करीब आए और 1980 में दोनों ने शादी कर ली। इस शादी से उनकी दो बेटियां हैं – ईशा और अहाना।

नैनीताल से लौट रहे परिवार की कार बनी आग का गोला, महिला सिपाही और 2 साल के बेटे की जिंदा जलकर मौत
नैनीताल/रामपुर। नैनीताल से घूमकर लौट रहा एक खुशहाल परिवार कुछ ही पलों में मातम में बदल गया। तेज रफ्तार डंपर की टक्कर के बाद कार में भीषण आग लग गई, जिससे महिला सिपाही और उनके दो साल के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, मिलक क्षेत्र के बेहटरा गांव निवासी दान सिंह अपनी पत्नी लता सिंह, दो वर्षीय बेटे लड्डू और बरेली के जमालपुर निवासी चाचा रवि ठाकुर के साथ नैनीताल घूमने गए थे। लता सिंह कौशांबी जिला में महिला सिपाही के पद पर तैनात थीं और इन दिनों छुट्टी पर गांव आई हुई थीं।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात परिवार स्विफ्ट कार से वापस लौट रहा था। काशीपुर गांव के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने कार को साइड से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में तुरंत आग लग गई और वह देखते ही देखते आग का गोला बन गई।
हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई। कार सवार तीन लोग किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन दो साल का मासूम कार के अंदर ही फंस गया। बेटे को बचाने के प्रयास में मां लता सिंह दोबारा जलती कार की ओर दौड़ीं और आग की चपेट में आ गईं। मां-बेटे की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलस गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। पुलिस ने डंपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ग्राम सभा हरहटा की बदहाल नाली – आखिर जिम्मेदार कौन?
बलरामपुर । ग्राम सभा हरहटा, थाना गौरा चौराहा, तहसील तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर में नाली की स्थिति अत्यंत दयनीय है। नाली पूरी तरह जाम है और गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। चारों तरफ कीचड़ और गंदगी फैली हुई है।सबसे गंभीर बात यह है कि इसी रास्ते से छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए गुजरते हैं। गंदगी, जलभराव और बदबू के बीच बच्चों को निकलना पड़ रहा है। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
क्या यही स्वच्छता अभियान है?
क्या गांव की जनता और बच्चों की सुरक्षा किसी की जिम्मेदारी नहीं है?
हम प्रशासन से मांग करते हैं कि:
तत्काल नाली की सफाई कराई जाए
जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए
मौके पर निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाए
हरहटा की जनता अब चुप नहीं रहेगी।
बच्चों के भविष्य और गांव की स्वच्छता के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“जिस बेटे के लिए जिए… उसी ने ले ली जान”
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हत्याकांड में आरोपी उनका बेटा अक्षत प्रताप सिंह (21) है, जिसकी बेरुखी और वारदात के बाद का व्यवहार हर किसी को हैरान कर रहा है।

हत्या के बाद सामान्य बनने की कोशिश

पुलिस के अनुसार पिता की गोली मारकर हत्या करने के बाद भी अक्षत के चेहरे पर जरा भी पछतावा नहीं था। उसने घर का माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश की। बाजार से पनीर और मिठाई खरीदकर लाया। चाची को पनीर दिया, खाना बनवाया और परिवार के साथ बैठकर सामान्य ढंग से भोजन किया। यहां तक कि मिठाई भी बांटी, ताकि किसी को शक न हो कि घर के भीतर इतनी खौफनाक वारदात हो चुकी है।

बहन को दी जान से मारने की धमकी

घटना के समय कक्षा 11 की छात्रा कृति भी कमरे में मौजूद थी। पिता की हत्या के बाद अक्षत ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे भी मार देगा। डर के साये में जी रही कृति 20 फरवरी को परीक्षा देने स्कूल भी गई, लेकिन उसने किसी से कुछ साझा नहीं किया। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मानवेंद्र अपनी बेटी से बेहद प्रेम करते थे और बच्चों की खातिर उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी।

शव के टुकड़े कर फेंके अंग

मामले के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ। गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया। पहले कार से गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने से असफल रहा। फिर आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए। दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया। इससे पहले कि वह धड़ को भी ठिकाने लगा पाता, पुलिस को सुराग मिल गया।

गुमशुदगी से खुला राज

21 फरवरी को आशियाना थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज हुई। जांच के दौरान जब पुलिस ने अक्षत से सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

अंतिम संस्कार में नहीं मिला अधिकार

मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार वीआईपी रोड स्थित बैकुंठ धाम में किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे कृत सिंह ने दी। परिवार में कोहराम मचा रहा। मां बार-बार बेसुध हो रही थीं। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

जेल में अजीब व्यवहार

जिला कारागार भेजे जाने के बाद अक्षत बार-बार कहता रहा, “पापा ने मुझे मारा तो मैंने उन्हें मार दिया… मैं गिर जाऊंगा।” उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज और काउंसिलिंग जारी है।

पुलिस का बयान

डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिता द्वारा पढ़ाई का दबाव बनाए जाने से आरोपी नाराज था।
आशियाना पुलिस ने बहन कृति से भी पूछताछ की, लेकिन उसकी किसी भी प्रकार की भूमिका सामने नहीं आई है।

यह हत्याकांड न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है—एक पिता, जिसने बच्चों की खातिर अपना जीवन समर्पित किया, उसी बेटे के हाथों मौत का शिकार हो गया।
सेमरी बाजार स्थित रामनाथपुर खपड़ाडीह में गौरैया आओ मेरे देश में और रैदहाताल के संरक्षण गोष्ठि का आयोजन *
सुल्तानपुर,कटका क्लब सामाजिक संस्था के द्वारा सेमरी बाजार स्थित रामनाथपुर खपड़ाडीह में गौरैया आओ मेरे देश में और रैदहाताल के संरक्षण गोष्ठि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व मनोज कुमार विश्वकर्मा ने किया। इस मौके पर कटका क्लब अध्यक्ष डॉ सौरभ मिश्र विनम्र ने बताया कि गौरैया हमारी प्राकृतिक मित्र है और पर्यावरण में सहायक है। गौरैया प्राकृतिक सहचरी है। कभी वह नीम के पेड़ के नीचे फुदकती और चावल या अनाज के दाने को चुगती है। कभी घर की दीवार पर लगे आईने पर अपनी हमशक्ल पर चोंच मारती दिख जाती है। एक वक्त था जब बबूल के पेड़ पर सैकड़ों की संख्या में घोंसले लटके होते थे, लेकिन वक्त के साथ गौरैया एक कहानी बन गई। हालांकि पर्यावरण के प्रति जागरुकता के चलते हाल के सालों में यह दिखाई देने लगी है। गौरैया इंसान की सच्ची दोस्त भी है और पर्यावरण संरक्षण में उसकी खासी भूमिका भी है। इसके वापसी के लिए हम सभी को आगे आना होगा। वहीं मनोज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि रैदहा ताल प्राकृतिक धरोहर है। यहां कमल खिलता है और सारस जैसे दुर्लभ पक्षियों का बसेरा होता है। लेकिन रैदहा ताल के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा। पशु पक्षियों के रहने पर संकट खड़ा हो रहा है। इस मौके पर मोनू यादव, अमित यादव, अर्पित उपाध्याय, दुर्गा प्रसाद तिवारी, विपिन मिश्र, राजेश यादव, आरिफ खान, आदित्य पांडेय, शुभम, दीपक प्रजापति, देव कुमार, ओम प्रकाश, मोनू उपाध्याय, अम्बिका पांडेय, शिवांक यादव, गंगा राम निषाद दर्जनों ग्रामीण युवा उपस्थित रहे।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा*
सुलतानपुर,जनपद में व्यापारियों के हितों के लिए सदैव संघर्षरत रहने वाला एकमात्र संगठन अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश मंत्री हिमांशु मालवीय व क्षेत्रीय प्रभारी अवध क्षेत्र अमर बहादुर सिंह के दिशा निर्देशन एंव जिला प्रभारी प्रवींद्र भालोटिया की अध्यक्षता में जिला कोर कमेटी की बैठक में जिला अध्यक्ष के रूप में पुनः विजय प्रधान को जिले की कमान सौंपते हुए जिला महामंत्री तेजिंदर सिंह को मनोनीत किया गया। वहीं वरिष्ठ जिला महामंत्री का दायित्व पहले की तरह ही अम्बरीश मिश्रा ही उठाएंगें, एडवोकेट आशीष तिवारी जिला कोषाध्यक्ष का दायित्व लेंगे। इसी के साथ ही मुख्य संरक्षक के रूप में विजय मिश्रा, जिला संगठन महामंत्री का दायित्व अमरचंद साहू को दिया गया, विक्रांत दुबे धर्मेंद्र सिंह बबलू, संतोष सिंह राज, को संगठन मंत्री का दायित्व मिला, विनय सिंह, आशुतोष झा, रमेश कसौधन, परितोष कसौधन, अंकुर तिवारी को जिला उपाध्यक्ष का दायित्व मिला, सुनील सिंह, चंद्रदेव मिश्रा, दिनेश कसौधन, दिनेश गिरी, दीपक मोदनवाल, राकेश कौशल, जिला मंत्री का दायित्व निभाएंगे, नारायण राय, अवधेश अग्रहरि,सर्वेश सिंह, सुधा सिंह, को मीडिया प्रभारी बनाया गया विधिक सलाहकार के लिए राहुल श्रीवास्तव( इनकम टैक्स) कुलदीप श्रीवास्तव( सेल टैक्स) सुरेंद्रनाथ दुबे (सिविल ) सत्य प्रकाश पांडे (फौजदारी) उत्कर्ष शुक्ला (सिविल) का दायित्व निभाएंगे।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
मुख्यमंत्री की प्रशासनिक सख्ती

- सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए वल्लभ भवन में समय पर उपस्थिति के निर्देश, होगी छापामार कार्रवाई

भोपाल। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव आज भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को गुरुवार सुबह दस बजे से शाम के 6 बजे तक उपस्थित के लिए कहा गया है। इस दौरान वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा 

तीनों कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय, और अनाधिकृत उपस्थिति की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने टीम बनाकर सभी जगह तैनात कर दी गई है और वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है।

माफी काफी नहीं है', एनसीईआरटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त बरकरार, सीजेआई ने लगाई फटकार

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एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सोशल साइंस के ज्यूडिशियरी से जुड़े चैप्टर पर विवाद बढ़ गया है। किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अंश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने पूछा- इसके पीछे कौन?

सीजेआई की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ वाले चैप्टर को हटाने का फैसला किया है। उसने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी गलती मानी है और इसके लिए माफी मांगी है।सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा है कि बस माफी मांगना या चैप्टर हटाना काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी से कहा है कि वे बताए इसके पीछे कौन हैं, पूरी बात सामने आने तक सुनवाई जारी रहेगी।

एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा

सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी ने कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। किताब से विवादित अंश को भी हटा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए? चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऑनलाइन प्रतियों को भी तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

क्या है मामला?

दरअसल, NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की। किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया। बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।

चैप्टर में क्या?

किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं। चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है। चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं। गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पुस्तक में जोड़े गए इस हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मम्मी आई लव यू…’ ब्रेकअप के बाद हैदराबाद में 21 साल की यूट्यूबर ने दी जान : Bonu Komali suicide case

Bonu Komali suicide case: हैदराबाद से एक दुखद खबर सामने आई है। 21 साल की युवा यूट्यूबर बोनू कोमाली ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मौत से कुछ घंटे पहले ही उसने कुवैत में काम कर रही अपनी मां को एक मैसेज भेजा – “आई लव यू मम्मी सो मच”।

मां को भेजा आखिरी मैसेज

सोमवार तड़के करीब 1:34 बजे कोमाली ने अपनी मां बी. सत्य वरलक्ष्मी को मैसेज किया। उसने लिखा – “आई लव यू मम्मी सो मच, छोटे भाई का अच्छे से ख्याल रखना।”

मां ने तुरंत कॉल किया, लेकिन फोन स्विच ऑफ आ रहा था। कई बार कोशिश के बाद उन्होंने कोमाली की दोस्त मनसा को इसकी जानकारी दी।

दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंची पुलिस

दोपहर करीब 3 बजे दोस्त फ्लैट पर पहुंची, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों की मदद से पुलिस को बुलाया गया। दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर कोमाली छत के पंखे से लटकी मिली। मौके पर ही उसकी मौत हो चुकी थी।

कोमाली मूल रूप से Visakhapatnam की रहने वाली थी। वह पिछले 11 महीनों से हैदराबाद में अकेले रहकर बीएससी की पढ़ाई कर रही थी। साथ ही यूट्यूब पर लाइफस्टाइल और पर्सनल वीडियो बनाती थी।

ब्रेकअप बना वजह?

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कोमाली पिछले तीन साल से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर और साथी यूट्यूबर के साथ रिलेशनशिप में थी। हाल ही में दोनों का ब्रेकअप हुआ था, जिससे वह काफी परेशान थी। बताया जा रहा है कि छह महीने पहले भी उसने आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन तब परिवार ने बचा लिया था।

जांच जारी

पुलिस ने संदिग्ध मौत का मामला दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए Osmania General Hospital भेजा गया है। फोन रिकॉर्ड, मैसेज और करीबियों के बयान के आधार पर जांच की जा रही है।

लोग बातें बनाना बंद करें!’ हेमा का फूटा गुस्सा, दिया करारा जवाब

बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ Hema Malini ने अपने परिवार को लेकर फैल रही अफवाहों पर साफ और करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि लोग बेवजह बातें न बनाएं, उनका परिवार एकजुट है और सब एक-दूसरे से प्यार करते हैं।

हाल ही में Dharmendra को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कहा जा रहा था कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के बीच दूरियां हैं। इन खबरों पर हेमा ने चुप्पी तोड़ते हुए साफ कहा कि परिवार में कोई दरार नहीं है।

“पापा के लिए सब एक हैं”

एक इंटरव्यू में हेमा ने बताया कि चाहे उनकी बेटियां Esha Deol और Ahana Deol हों या धर्मेंद्र की पहली पत्नी Prakash Kaur से हुए बच्चे Sunny Deol, Bobby Deol, Vijeta Deol और Ajeita Deol — सभी अपने “धरम जी” से बेहद प्यार करते हैं।

उन्होंने कहा, “पापा हैं ना, पापा के लिए सब करेंगे। सभी बच्चे एक-दूसरे को पसंद करते हैं।”

“जहां धरम जी हैं, वहां नकारात्मकता नहीं”

हेमा ने यह भी कहा कि जब धर्मेंद्र साथ हों तो नकारात्मकता की कोई जगह ही नहीं होती। उन्होंने बताया कि धरम जी ने बच्चों को प्यार और अच्छे संस्कार दिए हैं, इसलिए परिवार में कोई कड़वाहट नहीं है।

हाल ही में ईशा और अहाना को सनी देओल की फिल्म Border 2 की स्पेशल स्क्रीनिंग में देखा गया था, जिससे दोनों परिवारों के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों को और हवा मिली थी।

निजी जिंदगी पर दो टूक

हेमा खुद ‘बॉर्डर 2’ की स्क्रीनिंग में शामिल नहीं हो पाईं। इस पर उन्होंने कहा, “मुझे बुलाया गया था, लेकिन मैं जा नहीं पाई। हम अपने निजी पलों का दिखावा नहीं करते। ये हमारे परिवार की बातें हैं, दुनिया को क्यों दिखाएं? लोगों को समझना चाहिए कि हम सब साथ हैं और हर स्थिति को मिलकर संभाल लेंगे।”

धर्मेंद्र की पारिवारिक कहानी

धर्मेंद्र की पहली शादी 1954 में प्रकाश कौर से हुई थी। उनके चार बच्चे हैं – सनी, बॉबी, विजेता और अजीता। बाद में फिल्मों में काम करते हुए धर्मेंद्र और हेमा मालिनी करीब आए और 1980 में दोनों ने शादी कर ली। इस शादी से उनकी दो बेटियां हैं – ईशा और अहाना।

नैनीताल से लौट रहे परिवार की कार बनी आग का गोला, महिला सिपाही और 2 साल के बेटे की जिंदा जलकर मौत
नैनीताल/रामपुर। नैनीताल से घूमकर लौट रहा एक खुशहाल परिवार कुछ ही पलों में मातम में बदल गया। तेज रफ्तार डंपर की टक्कर के बाद कार में भीषण आग लग गई, जिससे महिला सिपाही और उनके दो साल के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, मिलक क्षेत्र के बेहटरा गांव निवासी दान सिंह अपनी पत्नी लता सिंह, दो वर्षीय बेटे लड्डू और बरेली के जमालपुर निवासी चाचा रवि ठाकुर के साथ नैनीताल घूमने गए थे। लता सिंह कौशांबी जिला में महिला सिपाही के पद पर तैनात थीं और इन दिनों छुट्टी पर गांव आई हुई थीं।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात परिवार स्विफ्ट कार से वापस लौट रहा था। काशीपुर गांव के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने कार को साइड से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में तुरंत आग लग गई और वह देखते ही देखते आग का गोला बन गई।
हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई। कार सवार तीन लोग किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन दो साल का मासूम कार के अंदर ही फंस गया। बेटे को बचाने के प्रयास में मां लता सिंह दोबारा जलती कार की ओर दौड़ीं और आग की चपेट में आ गईं। मां-बेटे की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलस गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। पुलिस ने डंपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ग्राम सभा हरहटा की बदहाल नाली – आखिर जिम्मेदार कौन?
बलरामपुर । ग्राम सभा हरहटा, थाना गौरा चौराहा, तहसील तुलसीपुर, जनपद बलरामपुर में नाली की स्थिति अत्यंत दयनीय है। नाली पूरी तरह जाम है और गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। चारों तरफ कीचड़ और गंदगी फैली हुई है।सबसे गंभीर बात यह है कि इसी रास्ते से छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए गुजरते हैं। गंदगी, जलभराव और बदबू के बीच बच्चों को निकलना पड़ रहा है। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
क्या यही स्वच्छता अभियान है?
क्या गांव की जनता और बच्चों की सुरक्षा किसी की जिम्मेदारी नहीं है?
हम प्रशासन से मांग करते हैं कि:
तत्काल नाली की सफाई कराई जाए
जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए
मौके पर निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाए
हरहटा की जनता अब चुप नहीं रहेगी।
बच्चों के भविष्य और गांव की स्वच्छता के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“जिस बेटे के लिए जिए… उसी ने ले ली जान”
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हत्याकांड में आरोपी उनका बेटा अक्षत प्रताप सिंह (21) है, जिसकी बेरुखी और वारदात के बाद का व्यवहार हर किसी को हैरान कर रहा है।

हत्या के बाद सामान्य बनने की कोशिश

पुलिस के अनुसार पिता की गोली मारकर हत्या करने के बाद भी अक्षत के चेहरे पर जरा भी पछतावा नहीं था। उसने घर का माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश की। बाजार से पनीर और मिठाई खरीदकर लाया। चाची को पनीर दिया, खाना बनवाया और परिवार के साथ बैठकर सामान्य ढंग से भोजन किया। यहां तक कि मिठाई भी बांटी, ताकि किसी को शक न हो कि घर के भीतर इतनी खौफनाक वारदात हो चुकी है।

बहन को दी जान से मारने की धमकी

घटना के समय कक्षा 11 की छात्रा कृति भी कमरे में मौजूद थी। पिता की हत्या के बाद अक्षत ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे भी मार देगा। डर के साये में जी रही कृति 20 फरवरी को परीक्षा देने स्कूल भी गई, लेकिन उसने किसी से कुछ साझा नहीं किया। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मानवेंद्र अपनी बेटी से बेहद प्रेम करते थे और बच्चों की खातिर उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी।

शव के टुकड़े कर फेंके अंग

मामले के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ। गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया। पहले कार से गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने से असफल रहा। फिर आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए। दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया। इससे पहले कि वह धड़ को भी ठिकाने लगा पाता, पुलिस को सुराग मिल गया।

गुमशुदगी से खुला राज

21 फरवरी को आशियाना थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज हुई। जांच के दौरान जब पुलिस ने अक्षत से सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

अंतिम संस्कार में नहीं मिला अधिकार

मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार वीआईपी रोड स्थित बैकुंठ धाम में किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे कृत सिंह ने दी। परिवार में कोहराम मचा रहा। मां बार-बार बेसुध हो रही थीं। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

जेल में अजीब व्यवहार

जिला कारागार भेजे जाने के बाद अक्षत बार-बार कहता रहा, “पापा ने मुझे मारा तो मैंने उन्हें मार दिया… मैं गिर जाऊंगा।” उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज और काउंसिलिंग जारी है।

पुलिस का बयान

डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिता द्वारा पढ़ाई का दबाव बनाए जाने से आरोपी नाराज था।
आशियाना पुलिस ने बहन कृति से भी पूछताछ की, लेकिन उसकी किसी भी प्रकार की भूमिका सामने नहीं आई है।

यह हत्याकांड न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है—एक पिता, जिसने बच्चों की खातिर अपना जीवन समर्पित किया, उसी बेटे के हाथों मौत का शिकार हो गया।