महुली पुलिस की सक्रियता से साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को ₹5,000/- की धनराशि कराई गई वापस

रमेश दूबे

संत कबीरनगर।पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे अभियान के क्रम में पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर  संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में जनपद में संचालित साइबर अपराध नियंत्रण अभियान के अंतर्गत साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने हेतु प्रभावी कार्यवाही निरंतर की जा रही है।

इसी क्रम में थाना महुली पुलिस एवं साइबर हेल्प टीम द्वारा त्वरित एवं प्रभावी प्रयास करते हुए साइबर ठगी/गलत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के एक प्रकरण में पीड़ित को ₹5,000/- (पाँच हजार रुपये) की धनराशि वापस कराई गई।

घटना का संक्षिप्त विवरण

वादी सत्यम कांडू पुत्र नंदन प्रसाद निवासी ग्राम नाथनगर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर द्वारा ऑनलाइन धनराशि का लेन-देन करते समय त्रुटिवश ₹5,000/- की राशि गलत खाते में स्थानांतरित हो गई थी। इस संबंध में वादी द्वारा दिनांक 27.04.2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए थाना महुली पुलिस से सहायता की मांग की गई।

शिकायत प्राप्त होने पर थाना महुली पुलिस एवं साइबर टीम द्वारा मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित बैंक एवं तकनीकी माध्यमों से आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ की गई। लगातार समन्वय एवं प्रभावी प्रयासों के परिणामस्वरूप  29.05.2026 को पीड़ित के खाते में ₹5,000/- की धनराशि सफलतापूर्वक वापस कराई गई।

धनराशि वापस प्राप्त होने पर पीड़ित एवं उसके परिजनों द्वारा संतकबीरनगर पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

कार्यवाही करने वाली टीम

-  दुर्गेश पाण्डेय – प्रभारी निरीक्षक, थाना महुली
- श्री अनुज कुमार यादव – साइबर प्रभारी, थाना महुली
- कांस्टेबल अंकित पटेल
- कांस्टेबल सोनू यादव
- कांस्टेबल मनोज यादव
- महिला कांस्टेबल कमलेश कुमारी

जनपद पुलिस की अपील

जनपद पुलिस समस्त नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, फोन कॉल, संदेश अथवा ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, सीवीवी, पासवर्ड, यूपीआई पिन अथवा अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

"सावधानी ही सुरक्षा है।"
अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से क्यों 'इंडो' शब्द हटाया? भारत की रणनीतिक भूमिका पर उठे सवाल

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया गया है। अब इस कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया गया है। 'इंडो' शब्द को वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जोड़ा गया था। इस तरह अमेरिका ने आठ साल पहले लिए गए अपने फैसले को उलट दिया है। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

पेंटागन ने क्या कहा?

पेंटागन के अनुसार यह बदलाव केवल ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। विभाग का कहना है कि इसे पुनः अपनाने से सैनिकों के बीच गौरव और परंपरा की भावना मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नाम परिवर्तन से कमांड की जिम्मेदारियों, क्षेत्राधिकार या सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियां नहीं

पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा

अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। यानी इसके नाम से 'Indo' शब्द हटा दिया है। 2018 में इस क्षेत्र पर हिंदुस्तान के प्रभाव का सम्मान करते हुए अमेरिका ने अपने कमांड का नाम यूएस पैसिफिक कमांड रखा था। उस वक्त मोदी सरकार ने इसे अपनी जीत बताया था और मोदी के विश्वगुरु बनने का ढोल पीटा था। अब जब अमेरिका ने इस क्षेत्र का नाम बदल दिया है, तो सुई टपक सन्नाटा है। मोदी सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा जा रहा है। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कंप्रोमाइज्ड हैं, जो ट्रंप के सामने एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं। इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।'

शशि थरूर ने क्या कहा?

अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?" उन्होंने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इस विभाग ने कहा कि नाम में बदलाव कमांड के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी।

यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है?

अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।

कप्तानगंज में अवैध गांजा कारोबार पर लगाम नहीं, भूमि विवादों से थाने पर फरियादियों की भीड
बूढ़नपुर/आजमगढ़। आजमगढ़ जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में पिछले कई दिनों से अवैध गांजा बिक्री का कारोबार खुलेआम चलने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर धड़ल्ले से गांजा बेचा जा रहा है, लेकिन पुलिस अब तक इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हुई है। इससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।वहीं जून माह में दीवानी न्यायालय में लंबित भूमि विवादों के मामलों को लेकर कई स्थानों पर अवैध कब्जे के प्रयास भी सामने आने की शिकायतें मिल रही हैं। पीड़ित पक्षों का आरोप है कि न्यायालय में वाद लंबित होने के बावजूद कुछ लोग जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि पुलिस समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना परिसर में प्रतिदिन फरियादियों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन उनकी शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई में देरी होने से विवाद और बढ़ रहे हैं। क्षेत्रीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर कठोर कार्रवाई करने तथा भूमि विवादों में निष्पक्ष और त्वरित हस्तक्षेप कर कानून व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति ने बृजभूषण व प्रतीक को दी थी धमकी,पुलिस ने परिजनों को दी सख्त हिदायत
*मोबाइल फोन न देने की चेतावनी

गोंडा।सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह व उनके पिता पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को जान से मारने की धमकी देने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।नगर कोतवाली पुलिस की जांच में सामने आया है कि धमकी देने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है।उसकी पहचान राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले संदीप शर्मा के रूप में हुई है।नगर कोतवाली पुलिस ने राजस्थान पहुँच कर जांच किया तो सामने आया कि धमकी देने वाला संदीप शर्मा मानसिक रूप से विक्षिप्त है और उसका इलाज जयपुर के एसएमएस हाॅस्पिटल मेडिकल कालेज में चल रहा है।वह पहले भी इंटरनेट और गूगल के माध्यम से कई जनप्रतिनिधियों के नंबर निकाल कर धमकी दे चुका है।उसके विरुद्ध कई स्थानों पर मामले भी दर्ज हैं।नगर कोतवाली पुलिस ने अलवर पहुँच कर संदीप शर्मा व उसके परिजनों से मुलाकात किया और पूछताछ के दौरान संदीप शर्मा के मानसिक रूप से विक्षिप्त होने की पुष्टि हुई।पुलिस ने परिजनों को सख्त हिदायत दिया है कि संदीप का समुचित इलाज कराया जाए और उसे मोबाइल फोन न दिया जाए,ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।यह घटना 14 जून 2026 को अपरान्ह लगभग 2.22 बजे हुई थी,जब सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह के निजी मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया था।फोन करने वाले व्यक्ति ने 35 सेकेंड की बातचीत में आक्रामक और धमकी भरे लहजे में कहा था कि तुम्हे और तुम्हारे पिता दोनों को जान से मारकर खत्म करने का इंतजाम हो चुका है, खुद को बचा पाओ तो बचा लो और इसके बाद फोन काट दिया गया था।इस मामले में विधायक प्रतिनिधि अजय सिंह ने 15 जून की रात को मुकदमा दर्ज करवाया था।पुलिस क्षेत्राधिकारी आनंद राय ने बताया कि परिजनों को मोबाइल फोन न देने के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं।नगर कोतवाली पुलिस द्वारा मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।संदीप के परिजनों से भी पुलिस ने मुलाकात किया है।संदीप शर्मा के बीमार होने की पुष्टि स्थानीय लोगों व अस्पताल के लोगों ने किया है।संदीप से भी पुलिस ने पूछताछ किया है और उसे भी चेतावनी दिया है।
ओम प्रकाश राजभर के दावे से सियासी पारा हाई, सपा में टूट की अटकलें तेज,

बलिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब सुभासपा प्रमुख एवं मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा कर दिया। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर है और जल्द ही पार्टी को बड़ी राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

राजभर ने संकेतों में कहा कि सपा के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज हैं। उन्होंने दावा किया कि एक प्रभावशाली नेता के नेतृत्व में असंतुष्ट सांसदों का समूह सक्रिय है और समय आने पर बड़ा फैसला ले सकता है। राजभर ने हाल ही में सपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां एक वर्ग विशेष की उपेक्षा की गई, जिससे पार्टी के अंदर नाराजगी और बढ़ी है।

उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को सोशल मीडिया की राजनीति से बाहर निकलकर अपने सांसदों और नेताओं की नाराजगी दूर करने पर ध्यान देना चाहिए। राजभर के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सपा के अंदरूनी हालात को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले ऐसे बयान प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर सकते हैं।

संवाददाता: किशन जायसवाल, बलिया

एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई कहानी बन गई महाग्रंथ...

आठ एपिसोड की उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ आज होगी स्ट्रीम

भोपाल। डिजिटल दौर में जहां तेज़ रफ्तार मनोरंजन का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं लेखक-निर्देशक अदनान खान एक अलग और संवेदनशील कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ का आधिकारिक ट्रेलर 13 जून को रिलीज़ कर दिया गया है, जिसे दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आठ एपिसोड में प्रस्तुत यह श्रृंखला मुख्य रूप से एक ही कमरे में घटित होने वाली कहानी है, लेकिन अपने संवादों, भावनाओं और साहित्यिक वातावरण के माध्यम से एक विस्तृत भावनात्मक संसार रचती है।

कहानी एक लेखक फ़ारूक़ और उसकी लेखनी की प्रशंसक मरियम के इर्द-गिर्द घूमती है। एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे शब्दों, किताबों और एहसासों की दुनिया में प्रवेश करती है। जहाँ एक ओर फ़ारूक़ अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुँचता है, वहीं मरियम उसके शब्दों में अपने जज़्बातों की परछाईं तलाशने लगती है। दोनों के बीच मौजूद अहमद इस कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार है, जो कई बार दर्शकों की तरह घटनाओं को देखता और समझता है।

सीरीज़ में फ़ारूक़ की भूमिका सदाशिव राव, मरियम की भूमिका आस्था जैन, तथा अहमद की भूमिका अदनान खान निभा रहे हैं। अदनान खान ने ही इस श्रृंखला का लेखन और निर्देशन भी किया है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ को पारंपरिक प्रेम कहानी के बजाय शब्दों, अदब, गलतफ़हमियों और भावनात्मक परतों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। टीम का मानना है कि यह सीरीज़ उन दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आएगी जो साहित्य, ग़ज़ल, शायरी और संवाद प्रधान कथाओं में रुचि रखते हैं।

यह आठ एपिसोड की वर्टिकल सीरीज़ 18 जून 2026 से Instagram तथा Adnan Khan के आधिकारिक Facebook अकाउंट पर स्ट्रीम होना शुरू होगी।

सीरीज़ का आधिकारिक ट्रेलर फिलहाल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और दर्शकों को इसके प्रसारण का इंतज़ार है।

अब हर वीकेंड आसान होगी धार्मिक यात्रा, योगी सरकार का श्रद्धालुओं को बड़ा तोहफा

-  यूपीएसटीडीसी ने पांच धार्मिक टूर पैकेज किए नियमित, मात्र 1000 रुपये में अयोध्या, नैमिषारण्य, चित्रकूट और विंध्याचल धाम के दर्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को बड़ा उपहार देते हुए धार्मिक पर्यटन को और अधिक सुलभ बना दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के तहत पांच प्रमुख वीकेंड धार्मिक टूर पैकेजों को नियमित रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है।
अब श्रद्धालु प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार और रविवार को अपनी सुविधा के अनुसार धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। ‘सुगम दर्शन’ योजना के अंतर्गत लखनऊ से अयोध्या और नैमिषारण्य, जबकि प्रयागराज से अयोध्या, चित्रकूट तथा विंध्याचल धाम के लिए नियमित टूर सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
यूपीएसटीडीसी के अनुसार इन सेवाओं का लाभ इसी सप्ताहांत से मिलना शुरू हो जाएगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बुकिंग प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। श्रद्धालु ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपनी सीट आरक्षित करा सकेंगे।
यात्रा के लिए आरामदायक अर्बेनिया ट्रैवलर वाहनों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेज का किराया मात्र 1000 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रियायतें दी जाएंगी, जबकि समूह बुकिंग पर अतिरिक्त छूट का लाभ भी मिलेगा।
यूपीएसटीडीसी का मानना है कि इस पहल से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और प्रदेश के प्रमुख आस्था स्थलों तक आम लोगों की पहुंच और आसान होगी। इच्छुक श्रद्धालु यूपीएसटीडीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर बुकिंग करा सकते हैं।
झामुमो के बूथ स्तरीय कार्यकर्त्ता सम्मेलन में जुटे हजारों कार्यकर्त्ता

एसआइआर के नाम पर साजिश के तहत वोट जा रहे : बिनोद पांडेय खूंटी. झारखण्ड मुक्ति मोर्चा खूंटी जिला का बूथ स्तरीय कार्यकर्त्ता सम्मेलन बुधवार को नगर भवन खूंटी में जिलाध्यक्ष जुबैर अहमद की अध्यक्षता में आयोजित किया गया. सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह केंद्रीय प्रवक्ता बिनोद कुमार पांडेय उपस्थित थे.

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एसआइआर के नाम पर बेवजह मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से काटा जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभी हाल ही इसी तरह का एसआइआर बिहार में हुआ. पश्चिम बंगाल में भी चुनाव के पूर्व एसआइआर के तहत लाखों मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया. इसका परिणाम सबके सामने है. इस मामले में केंद्र सरकार व चुनाव आयोग की नियत साफ नहीं है.उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने से लोग लोकतान्त्रिक और अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो

जायेंगे. इसके साथ हो लोगों को योजना का लाभ मिलना बंद हो जायेगा. उन्होंने कहा कि सभी बीएलए एसआइआर को गंभीरता से लें. बेवजह किसी मतदाता का नाम सूची से ना हटे यह सुनिश्चित करें. इसके पूर्व स्वागत भाषण करते हुए जिलाध्यक्ष जुबैर अहमद ने कहा कि झामुमो बड़े भाई बिनोद पांडेय जी के संवाद से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिली है. यह ऊर्जा संगठन को मजबूती प्रदान करेगा. विधायकों ने कहा : सम्मेलन में तमाड़ के विधायक विकास मुंडा, तोरपा के विधायक सुदीप गुड़िया एवं खूंटी के विधायक रामसूर्या मुंडा ने भी विचार व्यक्त किया. विधायक विकास मुंडा ने कहा कि एसआइआर को गंभीरता से लेने की जरूरत है.

कार्यकर्त्ता जिस प्रकार चुनाव में सक्रिय रहते हैँ उसी प्रकार एसआइआर को लेकर भी सक्रिय रहें. विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा कि एसआइआर के तहत मतदाता सूची से मतदाताओं का नाम हटाकर लोगों की नागरिकता छीनने की का प्रयास हो रहा है. मतदाता सूची से नाम हटने से लोग अपने अधिकारों से वंचित हो जायेंगे. रामसूर्या मुंडा ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से ना कटे इसके कार्यकर्त्ता काम करें. इसके पूर्व केंद्रीय महासचिव बिनोद कुमार पांडेय का खूंटी पहुंचने के पूर्व कार्यकर्ताओं ने पारम्परिक ढंग से स्वागत किया. कार्यक्रम के पूर्व बिनोद पांडेय ने

जिलाध्यक्ष जुबैर अहमद, विधायक सुदीप गुड़िया एवं रामसूर्या मुंडा तथा झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ खूंटी कचहरी मैदान स्थित भगवान बिरसा मुंडा, तमाड़ रोड स्थित जयपाल सिंह मुंडा, सरदार भगत सिंह तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.सम्मेलन में एसआइआर को लेकर पार्टी की विशेषज्ञ टीम द्वारा ऑडियो विजुअल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया. सम्मेलन का संचालन शंकर सिंह मुंडा ने

किया.सम्मेलन में जिला सचिव सुशील पाहन, महिला मोर्चा अध्यक्ष सुशांति कोनगाड़ी, युवा मोर्चा अध्यक्ष अमृत हेमरोम, वीरेन कंडुलना, देवनाथ माघईया, तनवीर आलम, भोला नाथ लाल, विजय सांगा, मकसूद अंसारी,अमरनाथ मुण्डा स्नेहलता कण्डुलना,उषा धान ,सनिका बोदरा ,मनोज मंडल, तौकीर आलम, शेख फिरोज, प्रकाश मुण्डा,कमलेश महतो, रूबीन तोपनो, मोजीर अंसारी आदि उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के विज़न से बदली तस्वीर: झारखण्ड का आम अब ग्लोबल मंच पर, 2.15 लाख परिवार आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का विज़न और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत के अनूठे संगम ने प्रमाणित कर दिया कि यदि दूरदर्शी सोच और कड़ी मेहनत एक साथ मिल जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।

इसी सोच और कड़ी मेहनत से पलाश ब्रांड के तहत झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने ग्रामीण महिलाओं और किसानों की तकदीर बदल रही है। आज झारखण्ड का आम न केवल देश के बड़े रिटेल चेन बल्कि सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मिठास घोल रहा है। 

बड़े पैमाने पर फलदार पौधारोपण और स्थायी आजीविका

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिरसा हरित ग्राम योजना की शुरुआत कोरोना संक्रमण काल में हुई थी। सखी मंडल की दीदियों के साथ साथ संक्रमण काल में अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों ने भी योजना को अपने आजीविका का साधन बनाया था। इसका असर आज साफ दिख रहा है। राज्य के करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे लहलहा रहे हैं, जिससे लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर स्थायी आजीविका और रोज़गार के अवसर मिले हैं। वर्तमान में लगभग 52,000 एकड़ के बागान पूरी तरह से तुड़ाई के लिए तैयार हैं, जिससे इस सीजन में करीब 50,000 मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है। 

ग्रामीण महिलाओं की मेहनत को मिला 'पलाश' का सम्मान

इस पूरी मुहिम के केंद्र में झारखण्ड की ग्रामीण सखी मंडल की दीदियाँ और महिला किसान हैं। ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति का सम्मान के नारे के साथ ये दीदियाँ आम के कलेक्शन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से लेकर उनकी बिक्री और मार्केटिंग की कमान खुद संभाल रही हैं। जेएसएलपीएस द्वारा किसानों को सक्रिय फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (FPOs) से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें संगठित बाजार और सही मूल्य मिल पा रहा है। 

दुबई और लंदन तक पहुँचा झारखण्ड का आम

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य ने निर्यात के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। सिमडेगा ज़िले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन (यूके) भेजे गए हैं। वहीं, रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई (यूएई) निर्यात किए गए हैं। इस वैश्विक निर्यात पहल में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे ज़िले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आम की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के लिए ICAR-RCER, पलांडू द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और क्वालिटी प्रोटोकॉल प्रदान किया जा रहा है। 

सुव्यवस्थित बाजार और रिटेल लिंकेज

आमों की गुणवत्ता के आधार पर बाजार को तीन श्रेणियों Grade A, B, C में विभाजित कर सुव्यवस्थित किया गया है ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके। ग्रेड-ए प्रीमियम क्वालिटी के इन आमों को APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूके जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है।

साथ ही, घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के आउटलेट्स पर 60 रुपये प्रति किलो की दर से सह-ब्रांडेड पैकेट में बेचा जा रहा है। गुमला के FPOs ने अकेले अपना मार्ट को 2,000 किलो आम की आपूर्ति की है। ग्रेड-बी के तहत संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल चैनलों में बाजार दरों पर भेजा जा रहा है।  ग्रेड-सी के तहत आम जनता तक पहुँच बनाने के लिए इन्हें स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंडों, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाट-बाजारों के माध्यम से बेचा जा रहा है। 

करोड़ों का कारोबार और भविष्य की योजनाएँ

राज्य में सक्रिय लगभग 115 FPOs को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है, जो जिला-वार संग्रह और बिक्री का काम देख रहे हैं। इन काउंटर्स के माध्यम से अब तक झारखण्ड में लगभग 2,24,200 किलोग्राम आमों की बिक्री की जा चुकी है, जिससे ₹60.51 लाख से अधिक का कारोबार हुआ है।

बाजार को और मजबूत करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर फार्मर्स मेला तथा बायर-सेलर मीट आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा, बाजार विस्तार के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे कॉर्पोरेट के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है। 

जीआई क्लब में झारखंड का धमाका: 11 नए उत्पादों को मिला भौगोलिक संकेतक टैग, अब कुल 12 हुई संख्या`

झारखंड सरकार राज्य की अनूठी कला, शिल्प, कृषि उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं को पहचान दिलाने, उन्हें सुरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, जीआई रजिस्ट्री ने हाल ही में राज्य के 11 और महत्वपूर्ण उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया है। 

इन पहलों का मुख्य उद्देश्य झारखंड के पारंपरिक उत्पादों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, बाजार में उनकी पहचान बढ़ाना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करना है। 

ये हैं जीआई क्लब में शामिल

झारखंड के ये उत्पाद हुए जीआई (GI) क्लब में शामिल

हाल ही में जिन उत्पादों को जीआई दर्जा दिया गया है, उनमें कुचाई सिल्क साड़ी और कपड़े, भगैया साड़ी और कपड़े, दुमका चादर बदोनी पुतुल (कठपुतली), झारखंड पंछी परहान पंछी साड़ी और कपड़े, झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड डोकरा क्राफ्ट (धातु शिल्प)  झारखंड के आदिवासी आभूषण (Tribal Jewellery), झारखंड के बांस शिल्प (Bamboo Crafts), केसरिया कलाकंद, झारखंड बेनाम और झारखंड जादुपटुआ पेंटिंग् शामिल हैं।

इन सभी नए जीआई टैगों का आधिकारिक प्रकाशन अगले कुछ दिनों में कर दिया जाएगा। वर्ष 2019 तक झारखंड के पास केवल एक जीआई-टैग उत्पाद (सोहराई और खोवर पेंटिंग) था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जो जीआई परिदृश्य में राज्य की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

झारक्राफ्ट की बड़ी उपलब्धि

उद्योग विभाग, झारखंड सरकार के तहत कार्यरत झारक्राफ्ट और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड वर्ष 2019 से ही जीआई पंजीकरण गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। इसी प्रयास के तहत एक उल्लेखनीय मील का पत्थर तब हासिल हुआ, जब झारक्राफ्ट ने एक साथ तीन उत्पादों झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड के आदिवासी आभूषण और झारखंड के बांस शिल्प  के लिए जीआई पंजीकरण सुरक्षित किया है। ये पंजीकरण झारखंड के कारीगरों और पारंपरिक समुदायों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की दृश्यता, प्रामाणिकता और बाजार क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगे। 

अन्य उत्पाद भी हैं कतार में

झारखंड की यह जीआई यात्रा राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर चुकी है। इसके अतिरिक्त, कई अन्य अनूठे उत्पादों के आवेदन भी जीआई रजिस्ट्री में जमा किए गए हैं, इनमें मांदर, प्यतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, लाह की चूड़ियाँ, देवघर पेड़ा, रागी, रुगड़ा, धुस्का, कुसुमी लाहा, साल के बीज, महुआ का फूल और करंज के बीज शामिल हैं। राज्य में अभी भी कई और स्वदेशी उत्पादों को जीआई ढांचे के तहत लाने और राष्ट्रीय व वैश्विक बाजारों में उन्हें सही पहचान दिलाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

महुली पुलिस की सक्रियता से साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को ₹5,000/- की धनराशि कराई गई वापस

रमेश दूबे

संत कबीरनगर।पुलिस महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे अभियान के क्रम में पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर  संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में जनपद में संचालित साइबर अपराध नियंत्रण अभियान के अंतर्गत साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान करने हेतु प्रभावी कार्यवाही निरंतर की जा रही है।

इसी क्रम में थाना महुली पुलिस एवं साइबर हेल्प टीम द्वारा त्वरित एवं प्रभावी प्रयास करते हुए साइबर ठगी/गलत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के एक प्रकरण में पीड़ित को ₹5,000/- (पाँच हजार रुपये) की धनराशि वापस कराई गई।

घटना का संक्षिप्त विवरण

वादी सत्यम कांडू पुत्र नंदन प्रसाद निवासी ग्राम नाथनगर, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर द्वारा ऑनलाइन धनराशि का लेन-देन करते समय त्रुटिवश ₹5,000/- की राशि गलत खाते में स्थानांतरित हो गई थी। इस संबंध में वादी द्वारा दिनांक 27.04.2026 को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए थाना महुली पुलिस से सहायता की मांग की गई।

शिकायत प्राप्त होने पर थाना महुली पुलिस एवं साइबर टीम द्वारा मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित बैंक एवं तकनीकी माध्यमों से आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ की गई। लगातार समन्वय एवं प्रभावी प्रयासों के परिणामस्वरूप  29.05.2026 को पीड़ित के खाते में ₹5,000/- की धनराशि सफलतापूर्वक वापस कराई गई।

धनराशि वापस प्राप्त होने पर पीड़ित एवं उसके परिजनों द्वारा संतकबीरनगर पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

कार्यवाही करने वाली टीम

-  दुर्गेश पाण्डेय – प्रभारी निरीक्षक, थाना महुली
- श्री अनुज कुमार यादव – साइबर प्रभारी, थाना महुली
- कांस्टेबल अंकित पटेल
- कांस्टेबल सोनू यादव
- कांस्टेबल मनोज यादव
- महिला कांस्टेबल कमलेश कुमारी

जनपद पुलिस की अपील

जनपद पुलिस समस्त नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, फोन कॉल, संदेश अथवा ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन विश्वास न करें। अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, सीवीवी, पासवर्ड, यूपीआई पिन अथवा अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

"सावधानी ही सुरक्षा है।"
अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से क्यों 'इंडो' शब्द हटाया? भारत की रणनीतिक भूमिका पर उठे सवाल

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया गया है। अब इस कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया गया है। 'इंडो' शब्द को वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जोड़ा गया था। इस तरह अमेरिका ने आठ साल पहले लिए गए अपने फैसले को उलट दिया है। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

पेंटागन ने क्या कहा?

पेंटागन के अनुसार यह बदलाव केवल ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। विभाग का कहना है कि इसे पुनः अपनाने से सैनिकों के बीच गौरव और परंपरा की भावना मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नाम परिवर्तन से कमांड की जिम्मेदारियों, क्षेत्राधिकार या सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियां नहीं

पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा

अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। यानी इसके नाम से 'Indo' शब्द हटा दिया है। 2018 में इस क्षेत्र पर हिंदुस्तान के प्रभाव का सम्मान करते हुए अमेरिका ने अपने कमांड का नाम यूएस पैसिफिक कमांड रखा था। उस वक्त मोदी सरकार ने इसे अपनी जीत बताया था और मोदी के विश्वगुरु बनने का ढोल पीटा था। अब जब अमेरिका ने इस क्षेत्र का नाम बदल दिया है, तो सुई टपक सन्नाटा है। मोदी सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा जा रहा है। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कंप्रोमाइज्ड हैं, जो ट्रंप के सामने एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं। इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।'

शशि थरूर ने क्या कहा?

अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?" उन्होंने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इस विभाग ने कहा कि नाम में बदलाव कमांड के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी।

यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है?

अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।

कप्तानगंज में अवैध गांजा कारोबार पर लगाम नहीं, भूमि विवादों से थाने पर फरियादियों की भीड
बूढ़नपुर/आजमगढ़। आजमगढ़ जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में पिछले कई दिनों से अवैध गांजा बिक्री का कारोबार खुलेआम चलने की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर धड़ल्ले से गांजा बेचा जा रहा है, लेकिन पुलिस अब तक इस पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम साबित हुई है। इससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।वहीं जून माह में दीवानी न्यायालय में लंबित भूमि विवादों के मामलों को लेकर कई स्थानों पर अवैध कब्जे के प्रयास भी सामने आने की शिकायतें मिल रही हैं। पीड़ित पक्षों का आरोप है कि न्यायालय में वाद लंबित होने के बावजूद कुछ लोग जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि पुलिस समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना परिसर में प्रतिदिन फरियादियों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन उनकी शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निस्तारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई में देरी होने से विवाद और बढ़ रहे हैं। क्षेत्रीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर कठोर कार्रवाई करने तथा भूमि विवादों में निष्पक्ष और त्वरित हस्तक्षेप कर कानून व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है।
मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति ने बृजभूषण व प्रतीक को दी थी धमकी,पुलिस ने परिजनों को दी सख्त हिदायत
*मोबाइल फोन न देने की चेतावनी

गोंडा।सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह व उनके पिता पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को जान से मारने की धमकी देने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।नगर कोतवाली पुलिस की जांच में सामने आया है कि धमकी देने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त है।उसकी पहचान राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले संदीप शर्मा के रूप में हुई है।नगर कोतवाली पुलिस ने राजस्थान पहुँच कर जांच किया तो सामने आया कि धमकी देने वाला संदीप शर्मा मानसिक रूप से विक्षिप्त है और उसका इलाज जयपुर के एसएमएस हाॅस्पिटल मेडिकल कालेज में चल रहा है।वह पहले भी इंटरनेट और गूगल के माध्यम से कई जनप्रतिनिधियों के नंबर निकाल कर धमकी दे चुका है।उसके विरुद्ध कई स्थानों पर मामले भी दर्ज हैं।नगर कोतवाली पुलिस ने अलवर पहुँच कर संदीप शर्मा व उसके परिजनों से मुलाकात किया और पूछताछ के दौरान संदीप शर्मा के मानसिक रूप से विक्षिप्त होने की पुष्टि हुई।पुलिस ने परिजनों को सख्त हिदायत दिया है कि संदीप का समुचित इलाज कराया जाए और उसे मोबाइल फोन न दिया जाए,ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।यह घटना 14 जून 2026 को अपरान्ह लगभग 2.22 बजे हुई थी,जब सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह के निजी मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया था।फोन करने वाले व्यक्ति ने 35 सेकेंड की बातचीत में आक्रामक और धमकी भरे लहजे में कहा था कि तुम्हे और तुम्हारे पिता दोनों को जान से मारकर खत्म करने का इंतजाम हो चुका है, खुद को बचा पाओ तो बचा लो और इसके बाद फोन काट दिया गया था।इस मामले में विधायक प्रतिनिधि अजय सिंह ने 15 जून की रात को मुकदमा दर्ज करवाया था।पुलिस क्षेत्राधिकारी आनंद राय ने बताया कि परिजनों को मोबाइल फोन न देने के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं।नगर कोतवाली पुलिस द्वारा मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।संदीप के परिजनों से भी पुलिस ने मुलाकात किया है।संदीप शर्मा के बीमार होने की पुष्टि स्थानीय लोगों व अस्पताल के लोगों ने किया है।संदीप से भी पुलिस ने पूछताछ किया है और उसे भी चेतावनी दिया है।
ओम प्रकाश राजभर के दावे से सियासी पारा हाई, सपा में टूट की अटकलें तेज,

बलिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब सुभासपा प्रमुख एवं मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा कर दिया। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष चरम पर है और जल्द ही पार्टी को बड़ी राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

राजभर ने संकेतों में कहा कि सपा के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज हैं। उन्होंने दावा किया कि एक प्रभावशाली नेता के नेतृत्व में असंतुष्ट सांसदों का समूह सक्रिय है और समय आने पर बड़ा फैसला ले सकता है। राजभर ने हाल ही में सपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां एक वर्ग विशेष की उपेक्षा की गई, जिससे पार्टी के अंदर नाराजगी और बढ़ी है।

उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को सोशल मीडिया की राजनीति से बाहर निकलकर अपने सांसदों और नेताओं की नाराजगी दूर करने पर ध्यान देना चाहिए। राजभर के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में सपा के अंदरूनी हालात को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले ऐसे बयान प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर सकते हैं।

संवाददाता: किशन जायसवाल, बलिया

एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई कहानी बन गई महाग्रंथ...

आठ एपिसोड की उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ आज होगी स्ट्रीम

भोपाल। डिजिटल दौर में जहां तेज़ रफ्तार मनोरंजन का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं लेखक-निर्देशक अदनान खान एक अलग और संवेदनशील कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी नई उर्दू-अदबी वर्टिकल सीरीज़ ‘फ़ारूक़ और मरियम’ का आधिकारिक ट्रेलर 13 जून को रिलीज़ कर दिया गया है, जिसे दर्शकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। आठ एपिसोड में प्रस्तुत यह श्रृंखला मुख्य रूप से एक ही कमरे में घटित होने वाली कहानी है, लेकिन अपने संवादों, भावनाओं और साहित्यिक वातावरण के माध्यम से एक विस्तृत भावनात्मक संसार रचती है।

कहानी एक लेखक फ़ारूक़ और उसकी लेखनी की प्रशंसक मरियम के इर्द-गिर्द घूमती है। एक अधूरे मिसरे से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे शब्दों, किताबों और एहसासों की दुनिया में प्रवेश करती है। जहाँ एक ओर फ़ारूक़ अपनी लेखनी के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुँचता है, वहीं मरियम उसके शब्दों में अपने जज़्बातों की परछाईं तलाशने लगती है। दोनों के बीच मौजूद अहमद इस कहानी का एक महत्वपूर्ण किरदार है, जो कई बार दर्शकों की तरह घटनाओं को देखता और समझता है।

सीरीज़ में फ़ारूक़ की भूमिका सदाशिव राव, मरियम की भूमिका आस्था जैन, तथा अहमद की भूमिका अदनान खान निभा रहे हैं। अदनान खान ने ही इस श्रृंखला का लेखन और निर्देशन भी किया है।

‘फ़ारूक़ और मरियम’ को पारंपरिक प्रेम कहानी के बजाय शब्दों, अदब, गलतफ़हमियों और भावनात्मक परतों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। टीम का मानना है कि यह सीरीज़ उन दर्शकों को विशेष रूप से पसंद आएगी जो साहित्य, ग़ज़ल, शायरी और संवाद प्रधान कथाओं में रुचि रखते हैं।

यह आठ एपिसोड की वर्टिकल सीरीज़ 18 जून 2026 से Instagram तथा Adnan Khan के आधिकारिक Facebook अकाउंट पर स्ट्रीम होना शुरू होगी।

सीरीज़ का आधिकारिक ट्रेलर फिलहाल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है और दर्शकों को इसके प्रसारण का इंतज़ार है।

अब हर वीकेंड आसान होगी धार्मिक यात्रा, योगी सरकार का श्रद्धालुओं को बड़ा तोहफा

-  यूपीएसटीडीसी ने पांच धार्मिक टूर पैकेज किए नियमित, मात्र 1000 रुपये में अयोध्या, नैमिषारण्य, चित्रकूट और विंध्याचल धाम के दर्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं को बड़ा उपहार देते हुए धार्मिक पर्यटन को और अधिक सुलभ बना दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के तहत पांच प्रमुख वीकेंड धार्मिक टूर पैकेजों को नियमित रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है।
अब श्रद्धालु प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार और रविवार को अपनी सुविधा के अनुसार धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे। ‘सुगम दर्शन’ योजना के अंतर्गत लखनऊ से अयोध्या और नैमिषारण्य, जबकि प्रयागराज से अयोध्या, चित्रकूट तथा विंध्याचल धाम के लिए नियमित टूर सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
यूपीएसटीडीसी के अनुसार इन सेवाओं का लाभ इसी सप्ताहांत से मिलना शुरू हो जाएगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बुकिंग प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। श्रद्धालु ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपनी सीट आरक्षित करा सकेंगे।
यात्रा के लिए आरामदायक अर्बेनिया ट्रैवलर वाहनों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेज का किराया मात्र 1000 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रियायतें दी जाएंगी, जबकि समूह बुकिंग पर अतिरिक्त छूट का लाभ भी मिलेगा।
यूपीएसटीडीसी का मानना है कि इस पहल से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और प्रदेश के प्रमुख आस्था स्थलों तक आम लोगों की पहुंच और आसान होगी। इच्छुक श्रद्धालु यूपीएसटीडीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर बुकिंग करा सकते हैं।
झामुमो के बूथ स्तरीय कार्यकर्त्ता सम्मेलन में जुटे हजारों कार्यकर्त्ता

एसआइआर के नाम पर साजिश के तहत वोट जा रहे : बिनोद पांडेय खूंटी. झारखण्ड मुक्ति मोर्चा खूंटी जिला का बूथ स्तरीय कार्यकर्त्ता सम्मेलन बुधवार को नगर भवन खूंटी में जिलाध्यक्ष जुबैर अहमद की अध्यक्षता में आयोजित किया गया. सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह केंद्रीय प्रवक्ता बिनोद कुमार पांडेय उपस्थित थे.

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एसआइआर के नाम पर बेवजह मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से काटा जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभी हाल ही इसी तरह का एसआइआर बिहार में हुआ. पश्चिम बंगाल में भी चुनाव के पूर्व एसआइआर के तहत लाखों मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया. इसका परिणाम सबके सामने है. इस मामले में केंद्र सरकार व चुनाव आयोग की नियत साफ नहीं है.उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने से लोग लोकतान्त्रिक और अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो

जायेंगे. इसके साथ हो लोगों को योजना का लाभ मिलना बंद हो जायेगा. उन्होंने कहा कि सभी बीएलए एसआइआर को गंभीरता से लें. बेवजह किसी मतदाता का नाम सूची से ना हटे यह सुनिश्चित करें. इसके पूर्व स्वागत भाषण करते हुए जिलाध्यक्ष जुबैर अहमद ने कहा कि झामुमो बड़े भाई बिनोद पांडेय जी के संवाद से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिली है. यह ऊर्जा संगठन को मजबूती प्रदान करेगा. विधायकों ने कहा : सम्मेलन में तमाड़ के विधायक विकास मुंडा, तोरपा के विधायक सुदीप गुड़िया एवं खूंटी के विधायक रामसूर्या मुंडा ने भी विचार व्यक्त किया. विधायक विकास मुंडा ने कहा कि एसआइआर को गंभीरता से लेने की जरूरत है.

कार्यकर्त्ता जिस प्रकार चुनाव में सक्रिय रहते हैँ उसी प्रकार एसआइआर को लेकर भी सक्रिय रहें. विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा कि एसआइआर के तहत मतदाता सूची से मतदाताओं का नाम हटाकर लोगों की नागरिकता छीनने की का प्रयास हो रहा है. मतदाता सूची से नाम हटने से लोग अपने अधिकारों से वंचित हो जायेंगे. रामसूर्या मुंडा ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से ना कटे इसके कार्यकर्त्ता काम करें. इसके पूर्व केंद्रीय महासचिव बिनोद कुमार पांडेय का खूंटी पहुंचने के पूर्व कार्यकर्ताओं ने पारम्परिक ढंग से स्वागत किया. कार्यक्रम के पूर्व बिनोद पांडेय ने

जिलाध्यक्ष जुबैर अहमद, विधायक सुदीप गुड़िया एवं रामसूर्या मुंडा तथा झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ खूंटी कचहरी मैदान स्थित भगवान बिरसा मुंडा, तमाड़ रोड स्थित जयपाल सिंह मुंडा, सरदार भगत सिंह तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.सम्मेलन में एसआइआर को लेकर पार्टी की विशेषज्ञ टीम द्वारा ऑडियो विजुअल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया. सम्मेलन का संचालन शंकर सिंह मुंडा ने

किया.सम्मेलन में जिला सचिव सुशील पाहन, महिला मोर्चा अध्यक्ष सुशांति कोनगाड़ी, युवा मोर्चा अध्यक्ष अमृत हेमरोम, वीरेन कंडुलना, देवनाथ माघईया, तनवीर आलम, भोला नाथ लाल, विजय सांगा, मकसूद अंसारी,अमरनाथ मुण्डा स्नेहलता कण्डुलना,उषा धान ,सनिका बोदरा ,मनोज मंडल, तौकीर आलम, शेख फिरोज, प्रकाश मुण्डा,कमलेश महतो, रूबीन तोपनो, मोजीर अंसारी आदि उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के विज़न से बदली तस्वीर: झारखण्ड का आम अब ग्लोबल मंच पर, 2.15 लाख परिवार आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का विज़न और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत के अनूठे संगम ने प्रमाणित कर दिया कि यदि दूरदर्शी सोच और कड़ी मेहनत एक साथ मिल जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।

इसी सोच और कड़ी मेहनत से पलाश ब्रांड के तहत झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने ग्रामीण महिलाओं और किसानों की तकदीर बदल रही है। आज झारखण्ड का आम न केवल देश के बड़े रिटेल चेन बल्कि सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मिठास घोल रहा है। 

बड़े पैमाने पर फलदार पौधारोपण और स्थायी आजीविका

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिरसा हरित ग्राम योजना की शुरुआत कोरोना संक्रमण काल में हुई थी। सखी मंडल की दीदियों के साथ साथ संक्रमण काल में अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों ने भी योजना को अपने आजीविका का साधन बनाया था। इसका असर आज साफ दिख रहा है। राज्य के करीब 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे लहलहा रहे हैं, जिससे लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर स्थायी आजीविका और रोज़गार के अवसर मिले हैं। वर्तमान में लगभग 52,000 एकड़ के बागान पूरी तरह से तुड़ाई के लिए तैयार हैं, जिससे इस सीजन में करीब 50,000 मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है। 

ग्रामीण महिलाओं की मेहनत को मिला 'पलाश' का सम्मान

इस पूरी मुहिम के केंद्र में झारखण्ड की ग्रामीण सखी मंडल की दीदियाँ और महिला किसान हैं। ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति का सम्मान के नारे के साथ ये दीदियाँ आम के कलेक्शन, ग्रेडिंग और पैकेजिंग से लेकर उनकी बिक्री और मार्केटिंग की कमान खुद संभाल रही हैं। जेएसएलपीएस द्वारा किसानों को सक्रिय फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (FPOs) से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें संगठित बाजार और सही मूल्य मिल पा रहा है। 

दुबई और लंदन तक पहुँचा झारखण्ड का आम

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य ने निर्यात के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। सिमडेगा ज़िले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन (यूके) भेजे गए हैं। वहीं, रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई (यूएई) निर्यात किए गए हैं। इस वैश्विक निर्यात पहल में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जैसे ज़िले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। आम की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने के लिए ICAR-RCER, पलांडू द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और क्वालिटी प्रोटोकॉल प्रदान किया जा रहा है। 

सुव्यवस्थित बाजार और रिटेल लिंकेज

आमों की गुणवत्ता के आधार पर बाजार को तीन श्रेणियों Grade A, B, C में विभाजित कर सुव्यवस्थित किया गया है ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके। ग्रेड-ए प्रीमियम क्वालिटी के इन आमों को APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूके जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है।

साथ ही, घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के आउटलेट्स पर 60 रुपये प्रति किलो की दर से सह-ब्रांडेड पैकेट में बेचा जा रहा है। गुमला के FPOs ने अकेले अपना मार्ट को 2,000 किलो आम की आपूर्ति की है। ग्रेड-बी के तहत संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल चैनलों में बाजार दरों पर भेजा जा रहा है।  ग्रेड-सी के तहत आम जनता तक पहुँच बनाने के लिए इन्हें स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंडों, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाट-बाजारों के माध्यम से बेचा जा रहा है। 

करोड़ों का कारोबार और भविष्य की योजनाएँ

राज्य में सक्रिय लगभग 115 FPOs को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है, जो जिला-वार संग्रह और बिक्री का काम देख रहे हैं। इन काउंटर्स के माध्यम से अब तक झारखण्ड में लगभग 2,24,200 किलोग्राम आमों की बिक्री की जा चुकी है, जिससे ₹60.51 लाख से अधिक का कारोबार हुआ है।

बाजार को और मजबूत करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर फार्मर्स मेला तथा बायर-सेलर मीट आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा, बाजार विस्तार के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे कॉर्पोरेट के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है। 

जीआई क्लब में झारखंड का धमाका: 11 नए उत्पादों को मिला भौगोलिक संकेतक टैग, अब कुल 12 हुई संख्या`

झारखंड सरकार राज्य की अनूठी कला, शिल्प, कृषि उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं को पहचान दिलाने, उन्हें सुरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, जीआई रजिस्ट्री ने हाल ही में राज्य के 11 और महत्वपूर्ण उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया है। 

इन पहलों का मुख्य उद्देश्य झारखंड के पारंपरिक उत्पादों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, बाजार में उनकी पहचान बढ़ाना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करना है। 

ये हैं जीआई क्लब में शामिल

झारखंड के ये उत्पाद हुए जीआई (GI) क्लब में शामिल

हाल ही में जिन उत्पादों को जीआई दर्जा दिया गया है, उनमें कुचाई सिल्क साड़ी और कपड़े, भगैया साड़ी और कपड़े, दुमका चादर बदोनी पुतुल (कठपुतली), झारखंड पंछी परहान पंछी साड़ी और कपड़े, झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड डोकरा क्राफ्ट (धातु शिल्प)  झारखंड के आदिवासी आभूषण (Tribal Jewellery), झारखंड के बांस शिल्प (Bamboo Crafts), केसरिया कलाकंद, झारखंड बेनाम और झारखंड जादुपटुआ पेंटिंग् शामिल हैं।

इन सभी नए जीआई टैगों का आधिकारिक प्रकाशन अगले कुछ दिनों में कर दिया जाएगा। वर्ष 2019 तक झारखंड के पास केवल एक जीआई-टैग उत्पाद (सोहराई और खोवर पेंटिंग) था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जो जीआई परिदृश्य में राज्य की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

झारक्राफ्ट की बड़ी उपलब्धि

उद्योग विभाग, झारखंड सरकार के तहत कार्यरत झारक्राफ्ट और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड वर्ष 2019 से ही जीआई पंजीकरण गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। इसी प्रयास के तहत एक उल्लेखनीय मील का पत्थर तब हासिल हुआ, जब झारक्राफ्ट ने एक साथ तीन उत्पादों झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड के आदिवासी आभूषण और झारखंड के बांस शिल्प  के लिए जीआई पंजीकरण सुरक्षित किया है। ये पंजीकरण झारखंड के कारीगरों और पारंपरिक समुदायों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की दृश्यता, प्रामाणिकता और बाजार क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगे। 

अन्य उत्पाद भी हैं कतार में

झारखंड की यह जीआई यात्रा राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर चुकी है। इसके अतिरिक्त, कई अन्य अनूठे उत्पादों के आवेदन भी जीआई रजिस्ट्री में जमा किए गए हैं, इनमें मांदर, प्यतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, लाह की चूड़ियाँ, देवघर पेड़ा, रागी, रुगड़ा, धुस्का, कुसुमी लाहा, साल के बीज, महुआ का फूल और करंज के बीज शामिल हैं। राज्य में अभी भी कई और स्वदेशी उत्पादों को जीआई ढांचे के तहत लाने और राष्ट्रीय व वैश्विक बाजारों में उन्हें सही पहचान दिलाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।