स्वर्ग से भी बड़ा होता है मां का स्थान : पंडित धर्मराज तिवारी

जौनपुर। मां प्रत्यक्ष ईश्वर होती है, जो न सिर्फ हमें पैदा करती है अपितु हमारा पालन पोषण करती है और हमारी बुराइयों को नष्ट करने का काम करती है। यही कारण है कि मां का स्थान स्वर्ग से बड़ा माना गया है। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित घनश्यामपुर में प्रमोद कुमार तिवारी के यहां आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास से बोलते हुए प्रख्यात पंडित धर्मराज तिवारी ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि माँ का महत्व हमारे जीवन में सांसों की तरह है; वह पहली गुरु, निस्वार्थ प्रेम की मूरत और भावनात्मक सहारा होती हैं। वे निस्वार्थ भाव से पालन-पोषण, शिक्षा और संस्कार देती हैं, जो हमें जीवन की चुनौतियों से लड़ने और एक बेहतर इंसान बनने के लिए सक्षम बनाते हैं।

माँ के बिना जीवन अधूरा और स्नेहविहीन होता है। 5 मार्च से प्रारंभ कथा का समापन 11 मार्च को होगा। 12 मार्च को हवन महाप्रसाद का आयोजन किया गया है। कथा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। मुख्य यजमान के रूप में प्रमोद कुमार तिवारी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती तारा देवी प्रतिदिन पूजा अर्चना और आरती कर रहे हैं। परिवार की तरफ से अशोक कुमार तिवारी और अजय कुमार तिवारी आए हुए लोगों का स्वागत सम्मान कर रहे हैं। आज की कथा में उपस्थित प्रमुख लोगों में कमला प्रसाद तिवारी बड़े बाबू, डॉ ओमप्रकाश तिवारी, रामकृष्ण दुबे, पूर्व प्रधान रामजियावन तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, पूर्व प्रधानाचार्य रमेश सिंह, प्रधानाचार्य डॉ विनोद मिश्र ,वीरेंद्र सिंह, रामसागर सिंह,राजेंद्र तिवारी, गोरखनाथ गुप्ता, सुरेश चंद तिवारी, पारसनाथ गुप्ता, शिवपूजन बरनवाल, हरिओम बरनवाल, अच्छेलाल मिश्र, शंभू नाथ मिश्र, दुर्गेश श्रीवास्तव आदि का समावेश रहा।
कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, सिद्धरमैया सरकार की बड़ी घोषणा

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कर्नाटक में सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। कर्नाटक में बच्चे अब फेसबुक-इंस्टाग्राम नहीं चला पाएंगे। यह घोषणा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण के दौरान की।

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सोशल मीडिया बैन का क्या मकसद

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने आज 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा, बच्चों पर बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के बुरे असर को रोकने के मकसद से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बैन का मकसद मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों पर पड़ने वाले बुरे असर को रोकना है।

सिद्धारमैया ने कुलपतियों से मांगी थी राय

पिछले महीने सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में आयोजित कुलपति सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा की थी और कुलपतियों से राय मांगी थी। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने मोबाइल की लत, ऑनलाइन गेमिंग, बच्चों की शिक्षा और शारीरिक फिटनेस पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

आंध्र प्रदेश में भी बैन की तैयारी

ऑनलाइन लत, दुरुपयोग और डिजिटल हानि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ा कदम उठाए हैं। राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने कहा था कि सोशल मीडिया पर भरोसा “टूट रहा है” और “बच्चे निरंतर उपयोग में फिसलते जा रहे हैं”, इसलिए सरकार कानूनी विकल्पों का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। लोकेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने मेटा, गूगल, एक्स और शेयर चैट जैसी प्रमुख कंपनियों को आमंत्रित किया है, ताकि वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा कर प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सके।

अमेरिका ने भारत को दी रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट, भड़का विपक्ष

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अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए '30 दिन की छूट दी है। अमेरिका ने ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से पैदा हो रहे ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत को एक वैकल्पिक रास्ते का ऑफर दिया है। अमेरिका ने कहा है कि भारत फिलहाल 30 दिनों तक रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है।

सिर्फ 30 दिनों की अस्थायी छूट

मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। यह दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का रास्ता है। भारत अपनी 88 प्रतिशत से ज्यादा तेल जरूरत आयात करता है और इसमें से आधा से ज्यादा खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में सप्लाई में रुकावट से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और भारत को महंगा पड़ सकता है। इस बीच अमेरिका ने रूस के समुद्र में फंसे तेल के जहाजों को भारत भेजने की इजाजत दे दी है। यह सिर्फ 30 दिनों की अस्थायी छूट है।

यूएस ने बताई 30 दिनों की अस्थाई छूट की वजह

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ''वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए अमेरिकी ट्रेज़री विभाग (वित्त मंत्रालय) भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली 30 दिनों की अस्थाई छूट जारी कर रहा है। यह जानबूझकर बहुत कम अवधि के लिए दिया गया है, इसलिए इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उन तेल सौदों की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल से जुड़े हैं।''

राहुल गांधी ने विदेश नीति पर उठाया सवाल

इस अमेरिकी घोषणा पर कांग्रेस तिलमिला गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "हमारी विदेश नीति हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और हमारे मूल्यों के आधार पर तय होना चाहिए। ये सत्य और अहिंसा पर आधारित होनी चाहिए।" उन्होंने कहा, "आज जो हम देख रहे हैं, वह कोई नीति नहीं है। यह एक समझौता कर चुके व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।"

कांग्रेस बोली-भारतीय संप्रभुता पर हमला

वहीं, दूसरे कांग्रसी नेताओं ने इस छूट को न सिर्फ भारतीय संप्रभुता पर हमला कहा, बल्कि इसे ब्लैकमेलिंग बताया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट करके लिखा है, ''ट्रंप का नया खेल, दिल्ली दोस्त को कहा, पुतिन से ले सकते हो तेल, कबतक चलेगा ये अमेरिकी ब्लैकमेल।'' कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने तो इसे देश की संप्रभुता तक से जोड़ा। उन्होंने लिखा, 30 दिन की छूट जारी करना, दबाव की पाखंडी भाषा, नव-साम्राज्यवादी अहंकार से भरा है....क्या हम बनाना रिपब्लिक हैं, जो हमें अपने लिए तेल खरीदने के लिए अमेरिकी अनुमति की जरूरत है? वैसे ज्यादा बोलने वाली सरकार की चुप्पी कुछ अधिक है। क्या इसे नहीं पता कि संप्रभुता का मतलब क्या है?''

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त 25 फ़ीसदी का टैरिफ लगा दिया था। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 फ़ीसदी हो गया था।

आजमगढ़:-जाली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 8 गिरफ्तार,सरगना मनीष मिश्रा अभी फरार

वी कुमार यदुवंशी

आजमगढ़। रौनापार थाना पुलिस ने जाली करेंसी बनाने और बाजार में चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 1.19 लाख रुपये की जाली मुद्रा, जाली नोट छापने के उपकरण, लैपटॉप-प्रिंटर, एक कार और 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार होली त्योहार के मद्देनजर क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि टेकनपुर पुलिया के पास कुछ लोग सफेद कार में जाली नोटों का लेन-देन कर रहे हैं। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस की तीन टीमों ने मौके पर पहुंचकर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और निशानदेही के आधार पर दो अन्य आरोपियों को भी बाद में गिरफ्तार किया गया।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में नितिन सिंह उर्फ भोला, ऋषिकेश सिंह उर्फ शनि, अभिषेक सिंह उर्फ कान्हा, आदित्य सिंह उर्फ चंकी, शिवम सिंह उर्फ विदुर (सभी निवासी बरडीहा, थाना रौनापार) के साथ मुन्ना पांडेय (बड़हलगंज, गोरखपुर), मनोज कुमार (गांगेपुर, रौनापार) और रुद्र पांडेय (जगदीशपुर, जीयनपुर) शामिल हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह का सरगना मनीष मिश्रा है, जो लैपटॉप और प्रिंटर की मदद से ए-4 पेपर पर जाली नोट प्रिंट करवाता था। बाद में पेपर कटर से नोटों को असली आकार में काटकर असली नोटों की गड्डियों के बीच रखकर बाजारों और दुकानों में चलाया जाता था, जिससे लोग आसानी से पहचान नहीं कर पाते थे।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रौनापार थाने में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय भेज दिया है। साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी की जा रही है।
मूत्र असंयम को नजरअंदाज न करें: समय पर इलाज और जागरूकता से मिल सकती है राहत
मुंबई के Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital के कंसल्टेंट रोबोटिक रिकंस्ट्रक्टिव यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडे के अनुसार मूत्र असंयम (Urinary Incontinence) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को बिना इच्छा के मूत्र का रिसाव होने लगता है। यह समस्या खासतौर पर महिलाओं में अधिक देखी जाती है और कई बार लोग शर्म या झिझक के कारण इसका इलाज नहीं कराते।
डॉ. पांडे बताते हैं कि स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस (Stress Incontinence) तब होता है जब खाँसने, छींकने, हँसने, झुकने या भारी काम करने के दौरान मूत्र का अनियंत्रित रिसाव हो जाता है। भारत में किए गए अध्ययनों के अनुसार करीब 10 से 42 प्रतिशत महिलाओं में यह समस्या पाई जाती है और हर तीन में से एक महिला को जीवन में कभी न कभी इसका सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों का कमजोर होना, नसों को नुकसान, प्रसव के बाद शरीर में बदलाव और रजोनिवृत्ति जैसी स्थितियाँ इसके प्रमुख कारण हो सकती हैं। इसके अलावा अर्ज इन्कॉन्टिनेंस (Urge Incontinence), मिक्स्ड इन्कॉन्टिनेंस (Mixed Incontinence) और नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस (Nocturnal Enuresis) जैसे अन्य प्रकार भी होते हैं, जिनमें अचानक मूत्र त्याग की तीव्र इच्छा या नींद के दौरान मूत्र का रिसाव हो सकता है।
डॉ. पांडे का कहना है कि जीवनशैली में कुछ बदलाव कर इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। फाइबर युक्त भोजन, वजन नियंत्रित रखना, धूम्रपान से दूरी, कैफीन व शराब का कम सेवन और केगल (Kegel) व्यायाम पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार होते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को हँसने, खाँसने या दौड़ने जैसी सामान्य गतिविधियों के दौरान मूत्र रिसाव हो, या इस समस्या के कारण उसे डायपर पहनना पड़े अथवा सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। जांच के लिए मूत्र डायरी, यूरोफ्लोमेट्री, युरोडायनामिक स्टडी और अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सही इलाज से इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। उपचार में दवाइयाँ, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ और जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी शामिल हो सकती है। गंभीर मामलों में स्लिंग सर्जरी, कोल्पोसस्पेंशन या अन्य आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का सहारा लिया जाता है।
डॉ. संजय पांडे का कहना है कि महिलाएँ अक्सर इस समस्या को चुपचाप सहती रहती हैं, जबकि समय पर उपचार से इससे राहत पाना संभव है। इसलिए डर या शर्म के कारण इसे छिपाने के बजाय जागरूक होकर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
सीतापुर के स्वामी दयाल जूनियर हाईस्कूल के 6 छात्रों ने NMMS परीक्षा पास कर बढ़ाया विद्यालय का मान

कमलेश मेहरोत्रा लहरपुर (सीतापुर)। क्षेत्र के ग्राम बेनी संराय के स्वामी दयाल जूनियर हाईस्कूल के छात्रों ने (National means - cum - marit scholarship) राष्ट्रीय आय एवम् योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2025-26 में 6 बच्चों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर विद्यालय का नाम रोशन किया। ज्ञातव्य है कि यह भारत सरकार द्वारा कक्षा 8 के मेधावी  आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रति वर्ष रु 12000 की छात्रवृत्ति प्रदान करने वाली परीक्षा है जिसमेंविद्यालय के 6 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर  अपने विद्यालय का नाम रोशन किया है। विद्यालय के छात्र-सुमित,प्रगति वर्मा,  सचिन, लक्ष्मी देवी,अंशिका व प्रज्ञा जायसवाल ने परीक्षा में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर अपने विद्यालय का नाम रोशन किया।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक डा ओमप्रकाश वर्मा ने परीक्षा में उत्तीर्ण सभी छात्र छात्राओं का उत्साह वर्धन कर आगे बढ़ने व उन्नति करने के रास्ते बताए और सभी चयनित छात्र छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया, उन्होंने बताया कि उक्त बच्चों को मैरिट में लाने के लिए विद्यालय के अध्यापक  पवन कुमार व रोहित वर्मा का विशेष मार्गदर्शन रहा। इस मौके पर शिक्षक राम लखन मिश्रा सहित अन्य सभी अध्यापकों ने उक्त छात्रों को उत्साहित किया जिससे भविष्य में वह सभी और अधिक उत्साह व लगन से शिक्षा ग्रहण कर  क्षेत्र व विद्यालय का नाम रोशन कर सकें।
राज्यसभा जाने के फैसले पर जदयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी, जहानाबाद में दिखी मायूसी।
जहानाबाद: मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में जहानाबाद स्थित Janata Dal (United) (जदयू) कार्यालय में भी कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी और मायूसी देखने को मिली। कई कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
नाराज कार्यकर्ता मायूस और भावुक नजर आए। विरोध जताते हुए कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यालय परिसर में पड़ी कुर्सियों पर अपना आक्रोश उतारा और कुर्सियां तोड़ दीं। इस दौरान कई कार्यकर्ता भावुक भी दिखे और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि नीतीश कुमार को अभी बिहार में रहकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने जनता से यह वादा किया था कि “25 से 30 साल फिर से नीतीश” के संकल्प के साथ बिहार का विकास किया जाएगा। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक है। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति से अलग होकर राज्यसभा जाना चाहते थे, तो इससे पहले उन्हें बिहार की राजनीतिक जिम्मेदारी अपने बेटे Nishant Kumar को सौंपनी चाहिए थी। उनका मानना है कि यदि नेतृत्व परिवर्तन करना ही था, तो पार्टी और सरकार की कमान पहले नई पीढ़ी को देकर जाना बेहतर होता। वहीं नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पार्टी में अब जमीनी कार्यकर्ताओं को अनदेखा किया जा रहा है और इस तरह के बड़े फैसले लेने से पहले कार्यकर्ताओं से राय-मशविरा नहीं किया जाता। कार्यकर्ताओं ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही पार्टी को मजबूती मिली है, इसलिए उनका बिहार की राजनीति से दूर जाना कार्यकर्ताओं को स्वीकार नहीं है। फिलहाल इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में इसका असर बिहार की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।
असम में फाइटर जेट सुखोई हुआ क्रैश, वायुसेना के 2 पायलट शहीद

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इंडियन एयर फोर्स का एक सुखोई-30 MKI फाइटर जेट गुरुवार की शाम को असम के कार्बी आंगलोंग जिले में क्रैश हो गया। इस फाइटर जेट में दो पायलट थे। इस हादसे में दोनों पायलटने जान गंवा दी।

दो जवान शहीद

सुखोई-30 प्लेन क्रैश में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर को अपनी जडान गंवानी पड़ी। भारतीय वायु सेना ने स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर के निधन पर गहरा शोक जताया है। सेना ने कहा गया कि भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं और इस दुख की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

ट्रेनिंग मिशन पर था फाइटर जेट

पहले इस विमान के लापता होने की सूचना आई थी। फाइटर जेट एक ट्रेनिंग मिशन पर था। अधिकारियों ने कहा था कि विमान ने असम के जोरहाट से उड़ान भरने के बाद रडार से संपर्क खो दिया था। बृहस्पतिवार शाम को जोरहाट हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद असम के कार्बी आंगलोंग जिले के ऊपर से गुजरते समय रडार से संपर्क टूट गया था। यह फाइटर जेट जोरहाट से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग इलाके में क्रैश हो गया।

सबसे दमदार लड़ाकू विमान माना जाता है सुखोई

भारतीय वायु सेना के पास 260 से अधिक Su-30MKI जेट विमानों का बेड़ा है। 2000 के दशक की शुरुआत में वायु सेना में शामिल किया गया सुखोई Su-30 MKI सबसे दमदार लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है।

पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब सुखोई जेट क्रैश हुआ हो। इससे पहले सुखोई-30 एमकेआई एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुका है। अगस्त 2019 में सुखोई-30 एमकेआई एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन के दौरान असम में तेजपुर के पास धान के खेत में क्रैश हो गया था। उस दौरान दोनों पायलट सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे और बाद में उनकी जान बचा ली गई थी। मई 2015 में सुखोई-30 एमकेआई एयरक्राफ्ट टेक-ऑफ के तुरंत बाद तेजपुर एयर फोर्स बेस से लगभग 36 किलोमीटर दूर दक्षिण में क्रैश हो गया था, जिसमें क्रैश होने से पहले दोनों पायलट सुरक्षित निकल गए थे।

यूपी में ‘क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो’ बढ़कर 60% हुआ, फिर भी पूर्वांचल-बुंदेलखंड के कई जिले कर्ज वितरण में पीछे


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बैंकों का क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो (सीडी रेशियो) वर्ष 2017 के 47 प्रतिशत से बढ़कर अब 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बैंकों में जमा कुल राशि का करीब 60 प्रतिशत प्रदेश के लोगों की आर्थिक जरूरतों और विकास कार्यों के लिए ऋण के रूप में खर्च किया जा रहा है।
हालांकि, इसके बावजूद प्रदेश के पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई जिलों में कर्ज वितरण की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के केवल 10 जिलों में ही क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो 75 से 89 प्रतिशत के बीच है। वहीं 69 जिलों में यह अनुपात पहले की तुलना में बढ़ा जरूर है, लेकिन जिलों के बीच अंतर अभी भी काफी ज्यादा बना हुआ है।
प्रदेश के जिन जिलों में क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो 50 प्रतिशत से कम है, उनमें राजधानी लखनऊ भी शामिल है। इसके अलावा बहराइच, चित्रकूट, जालौन, भदोही, संतकबीर नगर, अमेठी, बांदा, मिर्जापुर, कौशांबी, औरैया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, देवरिया, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, प्रयागराज, बागपत, सोनभद्र, अयोध्या, प्रतापगढ़, आजमगढ़, बलिया और उन्नाव जैसे जिले भी इस सूची में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ बैंकिंग सेवाओं और ऋण वितरण को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
यूपी: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, हजारों पद खाली; भर्ती प्रक्रिया भी अटकी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार लेवल-2 और लेवल-3 श्रेणी के डॉक्टरों के पद सबसे अधिक खाली हैं, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और जिला अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक लेवल-2 के डॉक्टरों के कुल 7240 पदों में से 5497 पद खाली हैं, जबकि लेवल-3 में 5199 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 2007 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इसके अलावा संयुक्त निदेशक स्तर के 2858 पदों में से 1330 पद रिक्त हैं। डेंटल सर्जन के 70 में से 58 पद और साधारण ग्रेड के डेंटल सर्जन के 970 पदों में से 157 पद भी खाली पड़े हैं।
स्वास्थ्य अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और हेल्थ कैंप में अहम भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 8853 पदों में से 6364 पद खाली हैं। वहीं स्टाफ नर्स के 8113 पदों में से 3257 पदों पर अब तक भर्ती नहीं हो सकी है।
भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं हो पाईं। स्वास्थ्य विभाग ने 601 विशेषज्ञ और 1790 एमबीबीएस डॉक्टरों की भर्ती के लिए नवंबर 2025 में आवेदन मांगे थे। जनवरी 2026 में इंटरव्यू भी कराए गए, लेकिन 30 जनवरी को आने वाला परिणाम मेरिट और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच जारी नहीं हो सका।
इसके अलावा पिछले वर्ष दिसंबर में “वॉक-इन इंटरव्यू” के जरिए 2300 से अधिक पदों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए थे, लेकिन उनमें भी एक भी नियुक्ति नहीं हो सकी।
इस संबंध में प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य का कहना है कि “मेडिकल भर्ती बोर्ड” के गठन के बाद अब भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से जल्द नियुक्तियां की जाएंगी।
स्वर्ग से भी बड़ा होता है मां का स्थान : पंडित धर्मराज तिवारी

जौनपुर। मां प्रत्यक्ष ईश्वर होती है, जो न सिर्फ हमें पैदा करती है अपितु हमारा पालन पोषण करती है और हमारी बुराइयों को नष्ट करने का काम करती है। यही कारण है कि मां का स्थान स्वर्ग से बड़ा माना गया है। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित घनश्यामपुर में प्रमोद कुमार तिवारी के यहां आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास से बोलते हुए प्रख्यात पंडित धर्मराज तिवारी ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि माँ का महत्व हमारे जीवन में सांसों की तरह है; वह पहली गुरु, निस्वार्थ प्रेम की मूरत और भावनात्मक सहारा होती हैं। वे निस्वार्थ भाव से पालन-पोषण, शिक्षा और संस्कार देती हैं, जो हमें जीवन की चुनौतियों से लड़ने और एक बेहतर इंसान बनने के लिए सक्षम बनाते हैं।

माँ के बिना जीवन अधूरा और स्नेहविहीन होता है। 5 मार्च से प्रारंभ कथा का समापन 11 मार्च को होगा। 12 मार्च को हवन महाप्रसाद का आयोजन किया गया है। कथा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। मुख्य यजमान के रूप में प्रमोद कुमार तिवारी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती तारा देवी प्रतिदिन पूजा अर्चना और आरती कर रहे हैं। परिवार की तरफ से अशोक कुमार तिवारी और अजय कुमार तिवारी आए हुए लोगों का स्वागत सम्मान कर रहे हैं। आज की कथा में उपस्थित प्रमुख लोगों में कमला प्रसाद तिवारी बड़े बाबू, डॉ ओमप्रकाश तिवारी, रामकृष्ण दुबे, पूर्व प्रधान रामजियावन तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, पूर्व प्रधानाचार्य रमेश सिंह, प्रधानाचार्य डॉ विनोद मिश्र ,वीरेंद्र सिंह, रामसागर सिंह,राजेंद्र तिवारी, गोरखनाथ गुप्ता, सुरेश चंद तिवारी, पारसनाथ गुप्ता, शिवपूजन बरनवाल, हरिओम बरनवाल, अच्छेलाल मिश्र, शंभू नाथ मिश्र, दुर्गेश श्रीवास्तव आदि का समावेश रहा।
कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, सिद्धरमैया सरकार की बड़ी घोषणा

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कर्नाटक में सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। कर्नाटक में बच्चे अब फेसबुक-इंस्टाग्राम नहीं चला पाएंगे। यह घोषणा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने बजट भाषण के दौरान की।

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सोशल मीडिया बैन का क्या मकसद

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने आज 2026-27 के लिए राज्य का बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा, बच्चों पर बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के बुरे असर को रोकने के मकसद से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बैन का मकसद मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों पर पड़ने वाले बुरे असर को रोकना है।

सिद्धारमैया ने कुलपतियों से मांगी थी राय

पिछले महीने सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में आयोजित कुलपति सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा की थी और कुलपतियों से राय मांगी थी। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने मोबाइल की लत, ऑनलाइन गेमिंग, बच्चों की शिक्षा और शारीरिक फिटनेस पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

आंध्र प्रदेश में भी बैन की तैयारी

ऑनलाइन लत, दुरुपयोग और डिजिटल हानि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़ा कदम उठाए हैं। राज्य के मंत्री नारा लोकेश ने कहा था कि सोशल मीडिया पर भरोसा “टूट रहा है” और “बच्चे निरंतर उपयोग में फिसलते जा रहे हैं”, इसलिए सरकार कानूनी विकल्पों का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। लोकेश के मुताबिक, राज्य सरकार ने मेटा, गूगल, एक्स और शेयर चैट जैसी प्रमुख कंपनियों को आमंत्रित किया है, ताकि वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा कर प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सके।

अमेरिका ने भारत को दी रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट, भड़का विपक्ष

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अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए '30 दिन की छूट दी है। अमेरिका ने ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से पैदा हो रहे ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत को एक वैकल्पिक रास्ते का ऑफर दिया है। अमेरिका ने कहा है कि भारत फिलहाल 30 दिनों तक रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है।

सिर्फ 30 दिनों की अस्थायी छूट

मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। यह दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का रास्ता है। भारत अपनी 88 प्रतिशत से ज्यादा तेल जरूरत आयात करता है और इसमें से आधा से ज्यादा खाड़ी देशों से आता है। ऐसे में सप्लाई में रुकावट से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और भारत को महंगा पड़ सकता है। इस बीच अमेरिका ने रूस के समुद्र में फंसे तेल के जहाजों को भारत भेजने की इजाजत दे दी है। यह सिर्फ 30 दिनों की अस्थायी छूट है।

यूएस ने बताई 30 दिनों की अस्थाई छूट की वजह

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ''वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए अमेरिकी ट्रेज़री विभाग (वित्त मंत्रालय) भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली 30 दिनों की अस्थाई छूट जारी कर रहा है। यह जानबूझकर बहुत कम अवधि के लिए दिया गया है, इसलिए इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उन तेल सौदों की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल से जुड़े हैं।''

राहुल गांधी ने विदेश नीति पर उठाया सवाल

इस अमेरिकी घोषणा पर कांग्रेस तिलमिला गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "हमारी विदेश नीति हमारे इतिहास, हमारी भौगोलिक स्थिति और हमारे मूल्यों के आधार पर तय होना चाहिए। ये सत्य और अहिंसा पर आधारित होनी चाहिए।" उन्होंने कहा, "आज जो हम देख रहे हैं, वह कोई नीति नहीं है। यह एक समझौता कर चुके व्यक्ति के शोषण का परिणाम है।"

कांग्रेस बोली-भारतीय संप्रभुता पर हमला

वहीं, दूसरे कांग्रसी नेताओं ने इस छूट को न सिर्फ भारतीय संप्रभुता पर हमला कहा, बल्कि इसे ब्लैकमेलिंग बताया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट करके लिखा है, ''ट्रंप का नया खेल, दिल्ली दोस्त को कहा, पुतिन से ले सकते हो तेल, कबतक चलेगा ये अमेरिकी ब्लैकमेल।'' कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने तो इसे देश की संप्रभुता तक से जोड़ा। उन्होंने लिखा, 30 दिन की छूट जारी करना, दबाव की पाखंडी भाषा, नव-साम्राज्यवादी अहंकार से भरा है....क्या हम बनाना रिपब्लिक हैं, जो हमें अपने लिए तेल खरीदने के लिए अमेरिकी अनुमति की जरूरत है? वैसे ज्यादा बोलने वाली सरकार की चुप्पी कुछ अधिक है। क्या इसे नहीं पता कि संप्रभुता का मतलब क्या है?''

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त 25 फ़ीसदी का टैरिफ लगा दिया था। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 फ़ीसदी हो गया था।

आजमगढ़:-जाली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 8 गिरफ्तार,सरगना मनीष मिश्रा अभी फरार

वी कुमार यदुवंशी

आजमगढ़। रौनापार थाना पुलिस ने जाली करेंसी बनाने और बाजार में चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 1.19 लाख रुपये की जाली मुद्रा, जाली नोट छापने के उपकरण, लैपटॉप-प्रिंटर, एक कार और 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार होली त्योहार के मद्देनजर क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि टेकनपुर पुलिया के पास कुछ लोग सफेद कार में जाली नोटों का लेन-देन कर रहे हैं। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस की तीन टीमों ने मौके पर पहुंचकर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और निशानदेही के आधार पर दो अन्य आरोपियों को भी बाद में गिरफ्तार किया गया।
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में नितिन सिंह उर्फ भोला, ऋषिकेश सिंह उर्फ शनि, अभिषेक सिंह उर्फ कान्हा, आदित्य सिंह उर्फ चंकी, शिवम सिंह उर्फ विदुर (सभी निवासी बरडीहा, थाना रौनापार) के साथ मुन्ना पांडेय (बड़हलगंज, गोरखपुर), मनोज कुमार (गांगेपुर, रौनापार) और रुद्र पांडेय (जगदीशपुर, जीयनपुर) शामिल हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह का सरगना मनीष मिश्रा है, जो लैपटॉप और प्रिंटर की मदद से ए-4 पेपर पर जाली नोट प्रिंट करवाता था। बाद में पेपर कटर से नोटों को असली आकार में काटकर असली नोटों की गड्डियों के बीच रखकर बाजारों और दुकानों में चलाया जाता था, जिससे लोग आसानी से पहचान नहीं कर पाते थे।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रौनापार थाने में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय भेज दिया है। साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी की जा रही है।
मूत्र असंयम को नजरअंदाज न करें: समय पर इलाज और जागरूकता से मिल सकती है राहत
मुंबई के Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital के कंसल्टेंट रोबोटिक रिकंस्ट्रक्टिव यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडे के अनुसार मूत्र असंयम (Urinary Incontinence) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को बिना इच्छा के मूत्र का रिसाव होने लगता है। यह समस्या खासतौर पर महिलाओं में अधिक देखी जाती है और कई बार लोग शर्म या झिझक के कारण इसका इलाज नहीं कराते।
डॉ. पांडे बताते हैं कि स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस (Stress Incontinence) तब होता है जब खाँसने, छींकने, हँसने, झुकने या भारी काम करने के दौरान मूत्र का अनियंत्रित रिसाव हो जाता है। भारत में किए गए अध्ययनों के अनुसार करीब 10 से 42 प्रतिशत महिलाओं में यह समस्या पाई जाती है और हर तीन में से एक महिला को जीवन में कभी न कभी इसका सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों का कमजोर होना, नसों को नुकसान, प्रसव के बाद शरीर में बदलाव और रजोनिवृत्ति जैसी स्थितियाँ इसके प्रमुख कारण हो सकती हैं। इसके अलावा अर्ज इन्कॉन्टिनेंस (Urge Incontinence), मिक्स्ड इन्कॉन्टिनेंस (Mixed Incontinence) और नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस (Nocturnal Enuresis) जैसे अन्य प्रकार भी होते हैं, जिनमें अचानक मूत्र त्याग की तीव्र इच्छा या नींद के दौरान मूत्र का रिसाव हो सकता है।
डॉ. पांडे का कहना है कि जीवनशैली में कुछ बदलाव कर इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। फाइबर युक्त भोजन, वजन नियंत्रित रखना, धूम्रपान से दूरी, कैफीन व शराब का कम सेवन और केगल (Kegel) व्यायाम पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार होते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को हँसने, खाँसने या दौड़ने जैसी सामान्य गतिविधियों के दौरान मूत्र रिसाव हो, या इस समस्या के कारण उसे डायपर पहनना पड़े अथवा सामाजिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। जांच के लिए मूत्र डायरी, यूरोफ्लोमेट्री, युरोडायनामिक स्टडी और अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार सही इलाज से इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। उपचार में दवाइयाँ, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ और जरूरत पड़ने पर सर्जरी भी शामिल हो सकती है। गंभीर मामलों में स्लिंग सर्जरी, कोल्पोसस्पेंशन या अन्य आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का सहारा लिया जाता है।
डॉ. संजय पांडे का कहना है कि महिलाएँ अक्सर इस समस्या को चुपचाप सहती रहती हैं, जबकि समय पर उपचार से इससे राहत पाना संभव है। इसलिए डर या शर्म के कारण इसे छिपाने के बजाय जागरूक होकर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
सीतापुर के स्वामी दयाल जूनियर हाईस्कूल के 6 छात्रों ने NMMS परीक्षा पास कर बढ़ाया विद्यालय का मान

कमलेश मेहरोत्रा लहरपुर (सीतापुर)। क्षेत्र के ग्राम बेनी संराय के स्वामी दयाल जूनियर हाईस्कूल के छात्रों ने (National means - cum - marit scholarship) राष्ट्रीय आय एवम् योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2025-26 में 6 बच्चों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर विद्यालय का नाम रोशन किया। ज्ञातव्य है कि यह भारत सरकार द्वारा कक्षा 8 के मेधावी  आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रति वर्ष रु 12000 की छात्रवृत्ति प्रदान करने वाली परीक्षा है जिसमेंविद्यालय के 6 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण कर  अपने विद्यालय का नाम रोशन किया है। विद्यालय के छात्र-सुमित,प्रगति वर्मा,  सचिन, लक्ष्मी देवी,अंशिका व प्रज्ञा जायसवाल ने परीक्षा में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर अपने विद्यालय का नाम रोशन किया।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक डा ओमप्रकाश वर्मा ने परीक्षा में उत्तीर्ण सभी छात्र छात्राओं का उत्साह वर्धन कर आगे बढ़ने व उन्नति करने के रास्ते बताए और सभी चयनित छात्र छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया, उन्होंने बताया कि उक्त बच्चों को मैरिट में लाने के लिए विद्यालय के अध्यापक  पवन कुमार व रोहित वर्मा का विशेष मार्गदर्शन रहा। इस मौके पर शिक्षक राम लखन मिश्रा सहित अन्य सभी अध्यापकों ने उक्त छात्रों को उत्साहित किया जिससे भविष्य में वह सभी और अधिक उत्साह व लगन से शिक्षा ग्रहण कर  क्षेत्र व विद्यालय का नाम रोशन कर सकें।
राज्यसभा जाने के फैसले पर जदयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी, जहानाबाद में दिखी मायूसी।
जहानाबाद: मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में जहानाबाद स्थित Janata Dal (United) (जदयू) कार्यालय में भी कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी और मायूसी देखने को मिली। कई कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
नाराज कार्यकर्ता मायूस और भावुक नजर आए। विरोध जताते हुए कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यालय परिसर में पड़ी कुर्सियों पर अपना आक्रोश उतारा और कुर्सियां तोड़ दीं। इस दौरान कई कार्यकर्ता भावुक भी दिखे और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर की।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि नीतीश कुमार को अभी बिहार में रहकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने जनता से यह वादा किया था कि “25 से 30 साल फिर से नीतीश” के संकल्प के साथ बिहार का विकास किया जाएगा। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक है। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति से अलग होकर राज्यसभा जाना चाहते थे, तो इससे पहले उन्हें बिहार की राजनीतिक जिम्मेदारी अपने बेटे Nishant Kumar को सौंपनी चाहिए थी। उनका मानना है कि यदि नेतृत्व परिवर्तन करना ही था, तो पार्टी और सरकार की कमान पहले नई पीढ़ी को देकर जाना बेहतर होता। वहीं नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पार्टी में अब जमीनी कार्यकर्ताओं को अनदेखा किया जा रहा है और इस तरह के बड़े फैसले लेने से पहले कार्यकर्ताओं से राय-मशविरा नहीं किया जाता। कार्यकर्ताओं ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही पार्टी को मजबूती मिली है, इसलिए उनका बिहार की राजनीति से दूर जाना कार्यकर्ताओं को स्वीकार नहीं है। फिलहाल इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में इसका असर बिहार की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।
असम में फाइटर जेट सुखोई हुआ क्रैश, वायुसेना के 2 पायलट शहीद

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इंडियन एयर फोर्स का एक सुखोई-30 MKI फाइटर जेट गुरुवार की शाम को असम के कार्बी आंगलोंग जिले में क्रैश हो गया। इस फाइटर जेट में दो पायलट थे। इस हादसे में दोनों पायलटने जान गंवा दी।

दो जवान शहीद

सुखोई-30 प्लेन क्रैश में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर को अपनी जडान गंवानी पड़ी। भारतीय वायु सेना ने स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर के निधन पर गहरा शोक जताया है। सेना ने कहा गया कि भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं और इस दुख की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

ट्रेनिंग मिशन पर था फाइटर जेट

पहले इस विमान के लापता होने की सूचना आई थी। फाइटर जेट एक ट्रेनिंग मिशन पर था। अधिकारियों ने कहा था कि विमान ने असम के जोरहाट से उड़ान भरने के बाद रडार से संपर्क खो दिया था। बृहस्पतिवार शाम को जोरहाट हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद असम के कार्बी आंगलोंग जिले के ऊपर से गुजरते समय रडार से संपर्क टूट गया था। यह फाइटर जेट जोरहाट से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग इलाके में क्रैश हो गया।

सबसे दमदार लड़ाकू विमान माना जाता है सुखोई

भारतीय वायु सेना के पास 260 से अधिक Su-30MKI जेट विमानों का बेड़ा है। 2000 के दशक की शुरुआत में वायु सेना में शामिल किया गया सुखोई Su-30 MKI सबसे दमदार लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है।

पहले भी हो चुका है ऐसा हादसा

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब सुखोई जेट क्रैश हुआ हो। इससे पहले सुखोई-30 एमकेआई एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुका है। अगस्त 2019 में सुखोई-30 एमकेआई एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन के दौरान असम में तेजपुर के पास धान के खेत में क्रैश हो गया था। उस दौरान दोनों पायलट सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे और बाद में उनकी जान बचा ली गई थी। मई 2015 में सुखोई-30 एमकेआई एयरक्राफ्ट टेक-ऑफ के तुरंत बाद तेजपुर एयर फोर्स बेस से लगभग 36 किलोमीटर दूर दक्षिण में क्रैश हो गया था, जिसमें क्रैश होने से पहले दोनों पायलट सुरक्षित निकल गए थे।

यूपी में ‘क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो’ बढ़कर 60% हुआ, फिर भी पूर्वांचल-बुंदेलखंड के कई जिले कर्ज वितरण में पीछे


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बैंकों का क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो (सीडी रेशियो) वर्ष 2017 के 47 प्रतिशत से बढ़कर अब 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि बैंकों में जमा कुल राशि का करीब 60 प्रतिशत प्रदेश के लोगों की आर्थिक जरूरतों और विकास कार्यों के लिए ऋण के रूप में खर्च किया जा रहा है।
हालांकि, इसके बावजूद प्रदेश के पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई जिलों में कर्ज वितरण की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के केवल 10 जिलों में ही क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो 75 से 89 प्रतिशत के बीच है। वहीं 69 जिलों में यह अनुपात पहले की तुलना में बढ़ा जरूर है, लेकिन जिलों के बीच अंतर अभी भी काफी ज्यादा बना हुआ है।
प्रदेश के जिन जिलों में क्रेडिट-डिपोजिट रेशियो 50 प्रतिशत से कम है, उनमें राजधानी लखनऊ भी शामिल है। इसके अलावा बहराइच, चित्रकूट, जालौन, भदोही, संतकबीर नगर, अमेठी, बांदा, मिर्जापुर, कौशांबी, औरैया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, देवरिया, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, प्रयागराज, बागपत, सोनभद्र, अयोध्या, प्रतापगढ़, आजमगढ़, बलिया और उन्नाव जैसे जिले भी इस सूची में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ बैंकिंग सेवाओं और ऋण वितरण को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
यूपी: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी, हजारों पद खाली; भर्ती प्रक्रिया भी अटकी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार लेवल-2 और लेवल-3 श्रेणी के डॉक्टरों के पद सबसे अधिक खाली हैं, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और जिला अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक लेवल-2 के डॉक्टरों के कुल 7240 पदों में से 5497 पद खाली हैं, जबकि लेवल-3 में 5199 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 2007 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इसके अलावा संयुक्त निदेशक स्तर के 2858 पदों में से 1330 पद रिक्त हैं। डेंटल सर्जन के 70 में से 58 पद और साधारण ग्रेड के डेंटल सर्जन के 970 पदों में से 157 पद भी खाली पड़े हैं।
स्वास्थ्य अभियानों, जागरूकता कार्यक्रमों और हेल्थ कैंप में अहम भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 8853 पदों में से 6364 पद खाली हैं। वहीं स्टाफ नर्स के 8113 पदों में से 3257 पदों पर अब तक भर्ती नहीं हो सकी है।
भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं हो पाईं। स्वास्थ्य विभाग ने 601 विशेषज्ञ और 1790 एमबीबीएस डॉक्टरों की भर्ती के लिए नवंबर 2025 में आवेदन मांगे थे। जनवरी 2026 में इंटरव्यू भी कराए गए, लेकिन 30 जनवरी को आने वाला परिणाम मेरिट और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच जारी नहीं हो सका।
इसके अलावा पिछले वर्ष दिसंबर में “वॉक-इन इंटरव्यू” के जरिए 2300 से अधिक पदों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए थे, लेकिन उनमें भी एक भी नियुक्ति नहीं हो सकी।
इस संबंध में प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य का कहना है कि “मेडिकल भर्ती बोर्ड” के गठन के बाद अब भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से जल्द नियुक्तियां की जाएंगी।