आजमगढ़: सराय सागर गांव में उमड़ा आस्था का जन सैलाब,यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर लोग हो रहें हैं निहाल
आजमगढ़ । क्षेत्र के सराय सागर गांव में चल रही श्री शत् चंडी महायज्ञ एवं सनातन धर्म सम्मेलन में आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर मन वांछित फल की कामना की। गांव में भक्ति रस की अविरल गंगोत्री बह रही है।
क्षेत्र के सराय सागर गांव में श्री श्री 1008 योगी रामानंद दास जी महाराज के सानिध्य में 18 भी से नौ दिवसीय पांच कुण्डीय श्री शत् चंडी महायज्ञ एवं सनातन धर्म सम्मेलन का शुभारंभ कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। महायज्ञ में दूसरे दिन यज्ञ मण्डप में यज्ञाचार्य के नेतृत्व में ब्राह्मणो द्वारा ध्वनि विस्तारक यंत्रों के वैदिक मंत्रों के उच्चारण पूजन अर्चन से दिशाएं गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर मन वांछित फल की कामना की।शाम को लोग प्रवचन का आंनद उठा रहे हैं।
श्री श्री 10008 स्वामी रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि यज्ञ का उद्देश्य मानव कल्याण की भावना निहित है। समाज से आपसी राग द्वेष बैर भाव मिटाकर समता समरसता आपसी सौहार्द पूर्ण भाई चारा कायम करना है। उन्होंने ने कहा कि जब सनातन धर्म से ही अखण्ड भारत का नव निर्माण हो सकता है। इस अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय, राकेश उपाध्याय,राम प्रसाद,अजय राय, पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिव मूरत यादव आदि मौजूद रहे।
डीएम व एसपी की संयुक्त अध्यक्षता में आगामी त्यौहारों को शांति व सौहार्दपूर्ण वातावरण में सकुशल सम्पन्न कराने हेतु पीस कमेटी की बैठक हुई आयोजित
*गंगा दशहरा और बकरीद को लेकर प्रशासन अलर्ट, जिलाधिकारी ने पीस कमेटी की बैठक में दिये गये कडे़ निर्देश*

सुलतानपुर,जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक चारू निगम की संयुक्त अध्यक्षता में आगामी त्यौहार- गंगा दशहरा मेला व ईदुज्जुहा (बकरीद) को सकुशल, शांतिपूर्ण तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराये जाने हेतु नवीन कलेक्ट्रेट सभागार में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गयी। उक्त बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी (प्रशा0), सम्बन्धित उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, थानाध्यक्ष व पीस कमेटी के सम्मानित सदस्यगण उपस्थित रहे। अपर जिलाधिकारी(प्रशासन) द्वारा आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत थानावार, तहसीलवार पीस कमेटी की बैठक की अद्यतन स्थिति तथा समस्त आधारभूत सुविधाओं जैसे- साफ सफाई, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, परिवहन व्यवस्था, मेडिकल सहायता एवं लॉ एण्ड आर्डर आदि के दृष्टिगत विस्तृत चर्चा की गयी।
         
उक्त बैठक में प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा की गयी। समस्त थानाध्यक्षों द्वारा अवगत कराया गया कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी त्यौहार को सकुशल सम्पन्न कराया जायेगा। उन्होंने समस्त स्थलों का चिन्हांकन कर साफ-सफाई व पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु आश्वस्त किया गया।
         
पुलिस अधीक्षक महोदया ने पीस कमेटी की बैठक में जिलाधिकारी महोदय सहित सभी सम्मानित सदस्यों व सम्बन्धित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पीस कमेटी की बैठक में सम्मानित सदस्यों द्वारा जिन बिंदुओं को चिन्हित किया गया है उन पर ससमय कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित एसडीएम व पुलिस क्षेत्राधिकारियों द्वारा मेला स्थल, सार्वजनिक कुर्बानी स्थल, जुलूस मार्ग आदि का संयुक्त निरीक्षण अवश्य कर लिया जाय तथा निरोधात्मक कार्यवाही को समय रहते सुनिश्चित किया जाय। उन्होंने सभी सम्मानित सदस्यों से अपील की कि भ्रामक व अफवाह फैलाने वाली खबरों से बचें, कहीं कोई भी समस्या हो, तो सबसे पहले प्रशासन को अवगत कराएं, जिससे त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
       
बैठक के अन्त में जिलाधिकारी महोदय द्वारा पीस कमेटी के सभी सम्मानित सदस्यों व उपस्थित अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बैठक में आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत सभी आधारभूत सुविधाओं से सम्बन्धित बिन्दुओं को चिन्हित किया गया है। उन्होंने पीस कमेटी के सदस्यों को आश्वस्त किया कि चिन्हित किये गये बिन्दुओं पर ससमय कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने आगामी त्योहारों के दृष्टिगत नगरक्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति, साफ-सफाई, चिकित्सकीय सहायता व पेयजल की आपूर्ति हेतु सम्बन्धित को निर्देशित किया।
       
उन्होंने मेला स्थल, सभी सार्वजनिक कुर्बानी स्थल, जुलूस मार्ग आदि का सम्बन्धित एसडीएम व सीओ द्वारा संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिये। उन्होंने आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत आयोजित होने वाले गंगा दशहरा मेला, सार्वजनिक कुर्बानी स्थल, जुलूस मार्ग तथा प्रमुख मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का निरीक्षण करने के निर्देश सम्बन्धित को दिये। इसी प्रकार उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को चिकित्सा के दृष्टिगत आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी धर्मगुरुओं से अपील की कि सभी धर्म समुदाय के लोग आपसी भाईचारे व सौहार्दपूर्ण वातावरण में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी त्यौहार को सकुशल सम्पन्न करायें। इस अवसर पर समस्त सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
टीवी 9 भारतवर्ष के डायरेक्टर हेमंत शर्मा ने जनकवि अदम गोंडवी को बताया व्यवस्था से टकराने वाला शायर

परसपुर (गोण्डा)। टीवी9 भारतवर्ष के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने जनकवि अदम गोंडवी पर विस्तृत लेख लिखते हुए उन्हें व्यवस्था और समाज के बीच संघर्ष की सबसे सशक्त आवाज बताया है। उन्होंने लिखा कि समाज हमेशा बदलाव चाहता है जबकि सत्ता यथास्थिति बनाए रखना चाहती है। ऐसे में जो व्यक्ति व्यवस्था को चुनौती देता है, वह सत्ता के लिए विद्रोही और समाज के लिए नायक बन जाता है। हेमंत शर्मा ने कहा कि अदम गोंडवी की कविता में कबीर का विद्रोह, धूमिल की जनपक्षधरता, दुष्यंत का अंदाजे बयां और मुक्तिबोध की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। उनकी गजलें प्रेम और सौंदर्य नहीं बल्कि भूख, गरीबी, मुफलिसी और आमजन की पीड़ा को आवाज देती हैं। उन्होंने कहा कि अदम गोंडवी की भाषा खुरदुरी लेकिन सीधी चोट करने वाली थी, जिसमें शोषित और पीड़ित वर्ग की वेदना साफ दिखाई देती है। हेमंत शर्मा ने कहा कि हिंदी साहित्य और अकादमिक संस्थानों ने अदम गोंडवी के साथ न्याय नहीं किया और उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कवि एवं आलोचक डॉ. जय नारायण बुधवार की पुस्तक ‘जनकवि अदम गोंडवी’ की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक अदम गोंडवी को उनके समय और समाज के साथ समझने का गंभीर प्रयास है। लेख में हेमंत शर्मा ने अदम गोंडवी की कई प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कविता व्यवस्था के खिलाफ जनता की सबसे सच्ची गवाही है। उन्होंने अदम गोंडवी को कबीर परंपरा का आखिरी बड़ा रचनाकार बताते हुए कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक ढोंग, सामाजिक विषमता, जातिवाद और राजनीतिक पाखंड पर खुलकर चोट की। हेमंत शर्मा ने कहा कि अदम गोंडवी केवल कवि नहीं बल्कि जनता की आवाज थे, जिन्हें संस्थानों ने भुलाने की कोशिश की लेकिन जनता आज भी उन्हें याद करती है। लेख के अंत में उन्होंने डॉ. जय नारायण बुधवार के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सच्चा साहित्य अंततः अपना रास्ता बना ही लेता है और अदम गोंडवी की गजलें आने वाले समय में भी प्रतिरोध और जनचेतना की आवाज बनी रहेंगी।
सीसीएल की मनमानी के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, सांसद मनीष जायसवाल के नेतृत्व में हजारों लोगों ने किया महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव

गिद्दी/अरगडा: सीसीएल अरगडा क्षेत्र में व्याप्त बिजली-पानी की घोर किल्लत, गिद्दी-ए अस्पताल की लचर व्यवस्था, सीसीएल कॉलोनियों की बदहाली और सीसीएल अधिकारियों की लालफीताशाही एवं मनमानी सहित अन्य जनसमस्याओं के खिलाफ मंगलवार को हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन सह महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव किया गया। सांसद मनीष जायसवाल के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में अरगडा, सिरका, गिद्दी-ए, गिद्दी-सी, रेलीगढ़ा और गिद्दी वाश री क्षेत्र के कुल 14 पंचायतों से हजारों की संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सड़कों पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन में उमड़े जनसैलाब में जनता के आक्रोश को देखते हुए सीसीएल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। विदित हो कि इस क्षेत्र की लगभग एक लाख से अधिक की आबादी बुनियादी सुविधाओं के लिए सीसीएल पर निर्भर है और पिछले करीब 25 दिनों से क्षेत्र में बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप्प होने से जनता त्राहिमाम कर रही थी। स्थानीय लोगों के इस दर्द को समझते हुए क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने दो दिन पूर्व इस महाआंदोलन का बिगुल फूंका था, जो आज एक ऐतिहासिक प्रदर्शन में तब्दील हो गया।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'सीसीएल महाप्रबंधक हाय-हाय', 'बिजली-पानी देना होगा' और 'सांसद मनीष जायसवाल जिंदाबाद' के गगनभेदी नारे खूब लगाए और प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस धरने की अध्यक्षता स्थानीय डाडी भाजपा मंडल अध्यक्ष राजदीप प्रसाद ने की, जबकि संचालन रंजीत पांडेय व पुरुषोत्तम पाण्डेय ने किया। धरनास्थल पर उपस्थित विशाल भीड़ को संबोधित करते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने सीसीएल प्रबंधन पर तीखे बाण चलाए और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पिछले 25 दिनों से आपूर्ति बंद करके आम जनता को दूषित पानी पीने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीसीएल प्रबंधन के कुछ निरंकुश अधिकारी अपने दमनकारी नीति के तहत अपनी मनमानी से जनता को प्रताड़ित कर यहाँ की खनिज संपदा को लूटने में लगे हैं, जो बेहद शर्मनाक है।

सांसद मनीष जायसवाल ने प्रबंधन के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि अपने अधिकारियों के लिए अलग और आम जनता के लिए अलग नीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई बहाने बनाकर आम लोगों को बिजली और पानी देने से मना किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र की बदहाली का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए कहा कि गिद्दी-ए सीसीएल अस्पताल में 5 डॉक्टर पदस्थापित हैं, लेकिन पूरी डिस्पेंसरी में मात्र एक बीपी मशीन है, जिससे यहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह लचर हो चुकी है। इसके अलावा हमलोग के बड़ी मशक्कत के बाद पास हुआ गिद्दी पुल का निर्माण कार्य भी अब तक शुरू नहीं हो सका है। सीसीएल क्वार्टर और कॉलोनियों की हालत इतनी दयनीय है कि निचले तबके के कर्मचारी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन सालों से सीएसआर की राशि खर्च कर रहा है, लेकिन धरातल पर विकास शून्य है और जनजीवन बेहाल है। सांसद मनीष जायसवाल ने इस धरने को अंतिम चेतावनी बताते हुए कहा कि प्रबंधन समय रहते सुधर जाए, अन्यथा अगली बार जनता इनका बोरिया-बिस्तर बंधवा देगी।

सांसद मनीष जायसवाल के इस कड़े रुख और जनता के भारी आक्रोश के आगे आखिरकार सीसीएल प्रबंधन को घुटने टेकने पड़े। अरगडा क्षेत्र के महाप्रबंधक सत्यजीत कुमार अन्य आला अधिकारियों के साथ खुद धरना स्थल पर पहुंचे और सांसद मनीष जायसवाल की मांगों को जायज ठहराते हुए उन्हें जल्द सुधार करते हुए जनहित में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। महाप्रबंधक ने कहा कि क्षेत्र में बिजली और पानी की स्थिति को आज से ही सुधार लिया जा रहा है और आने वाले 10 महीनों के भीतर एक आधुनिक फिल्टरेशन प्लांट का निर्माण कराकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने सीसीएल क्वार्टर और कॉलोनियों की दयनीय स्थिति में भी जल्द सुधार करने की बात कही। महाप्रबंधक द्वारा मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का भरोसा दिए जाने के बाद सांसद मनीष जायसवाल ने एक ज्ञापन सौंपने के साथ इस ऐतिहासिक धरने को समाप्त करने की घोषणा की लेकिन उन्हें चेताते हुए कहा कि जनता को अपना मालिक समझें और जन-जरूरतों को पूरा करने में अपनी सकारात्मक ऊर्जा खपाएं अन्यथा जनता उग्र हुई तो कुर्सी में बैठने लायक नहीं रहिएगा ।

मौके पर विशेषरूप से हजारीबाग जिला परिषद अध्यक्ष उमेश प्रसाद मेहता, हजारीबाग भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह, रामगढ़ भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव कुमार बबला, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि सत्येंद्र नारायण सिंह, सीसीएल कोयलांचल के सांसद प्रतिनिधि रंजीत पांडेय, रामगढ़ जिला सांसद प्रतिनिधि राजीव जायसवाल, बड़कागांव विधानसभा सांसद प्रतिनिधि पूनम साहू, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनिल मिश्रा, हजारीबाग भाजपा जिला महामंत्री जयनारायण प्रसाद, रामगढ़ जिला महामंत्री राजू चतुर्वेदी, पुरुषोत्तम पाण्डेय, करुण सिंह,जुगनू सिंह, सुशांत पाण्डेय, उमेश दांगी, विजय जायसवाल, राजू रंजन पांडेय, प्रो.संजय सिंह, अनमोल सिंह, शिबू मेहता, विजय यादव, भागीरथ ठाकुर, रीमा कुमार, योगेश कुशवाहा, महेंद्र सिंह, जवाहर प्रसाद, प्रमोद कुमार दास, भीम प्रजापति, मनोज गिरी, शंकर करमाली, सुरेंद्र करमाली, रूपा कुमारी, धनंजय कुमार पुटूस, दिलीप सिंह, अजय पासवान, विशाल वाल्मीकि, अजय पांडेय, पवन गुप्ता, विक्रमादित्य, शिव कुमार महतो, राजदीप प्रसाद, रंजन फौजी, बसंत प्रजापति, सिंकी पासवान, सेतराज पासवान, रामप्रसाद मल्लिक, लक्ष्मी देवी, भागीरथ ठाकुर, अशोक सोनी, विवेक गुप्ता, रेखा देवी, राजीव कुशवाहा, सतीश मोहन मिश्रा, गुंजन साव, दिनेश यादव, फलेंद्र राम, गुलशन साव, चंदन सिंह, गिरिजा सिंह, वृजकिशोर पाठक, रामसहाय वेदिया, ललन साव, विनोद सिंह, मिंटू सोनी, संतोष शर्मा, मीनू भगत, उत्तम सिन्हा, बिहारी प्रजापति, ऋषि कुमार, सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहें ।

पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि, NEET घोटाले पर कांग्रेस का प्रदर्शन:भदोही कलेक्ट्रेट पर धरना, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा

रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही।‌भदोही जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला अध्यक्ष वसीम अंसारी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल - डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों, महंगाई तथा नीट परीक्षा घोटाले के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से आम जनता, किसानों, मजदूरों छात्रों और मध्यम वर्ग पर पड़े रहे महंगाई के बोझ से तत्काल राहत देने की मांग की गई। कांग्रेस ने बढ़ती मंहगाई को गंभीर मुद्दा बताया और सरकार से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया।‌ज्ञापन में प्रमुख रूप से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत कम करने, बढ़ती मंहगाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने और पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए अत्यधिक टैक्स को घटाने की मांग की गई। नीट परीक्षा घोटाले और पेपर लीक मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की भी मांग की गई। इसके अतिरिक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र के इस्तीफे और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तत्काल भंग कर एक न‌ई , पारदर्शी एवं जवाबदेही परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई।
इस अवसर पर जिला वसीम अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल - डीजल पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने बताया कि मंहगाई चरम पर है, जिससे अधिक प्रभावित है। अंसारी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पिछले वर्षों में पेट्रोलियम पदार्थों से भारी टैक्स वसूला है, फिर भी आप जनता को कोई राहत नहीं दी जा रही है। पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र कुमार दूबे राजन ने नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस घटना ने देश के लाखों का भविष्य संकट में डाल दिया है और परीक्षा प्रणाली से छात्रों व अभिभावकों का विश्वास उठ रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच, दोषियों को सजा और NIT को भंग कर पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।‌इस अवसर पर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सुरेश चंद्र मिश्रा,  किसान कांग्रेस प्रदेश कोऑर्डिनेटर दिलीप मिश्रा, प्रेम बिहारी उपाध्याय, मुशीर इकबाल, सुरेश गौतम, सुबुकतगीन अंसारी,  राजेन्द्र प्रसाद मौर्य,नाजिम अली, सुरेश चौहान,शिव पूजन मिश्रा, सवालेह अंसारी, शमशीर अहमद,  अशोक मिश्रा पाराशर, विष्णु जी उपाध्याय, सुमित शुक्ला, शक्ति मिश्रा, राकेश पाल,  विशाल गौतम , अजय प्रजापति,  गुलाब धर प्रजापति, मोनीश अंसारी,  नरेश पाल,  जनार्दन पाल इत्यादि लोग उपस्थित रहें.
पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि, NEET घोटाले पर कांग्रेस का प्रदर्शन:भदोही कलेक्ट्रेट पर धरना, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा



रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही।‌भदोही जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला अध्यक्ष वसीम अंसारी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल - डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों, महंगाई तथा नीट परीक्षा घोटाले के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से आम जनता, किसानों, मजदूरों छात्रों और मध्यम वर्ग पर पड़े रहे महंगाई के बोझ से तत्काल राहत देने की मांग की गई। कांग्रेस ने बढ़ती मंहगाई को गंभीर मुद्दा बताया और सरकार से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया।‌ज्ञापन में प्रमुख रूप से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत कम करने, बढ़ती मंहगाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने और पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए अत्यधिक टैक्स को घटाने की मांग की गई। नीट परीक्षा घोटाले और पेपर लीक मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की भी मांग की गई। इसके अतिरिक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र के इस्तीफे और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तत्काल भंग कर एक न‌ई , पारदर्शी एवं जवाबदेही परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई।
इस अवसर पर जिला वसीम अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल - डीजल पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने बताया कि मंहगाई चरम पर है, जिससे अधिक प्रभावित है। अंसारी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पिछले वर्षों में पेट्रोलियम पदार्थों से भारी टैक्स वसूला है, फिर भी आप जनता को कोई राहत नहीं दी जा रही है। पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र कुमार दूबे राजन ने नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस घटना ने देश के लाखों का भविष्य संकट में डाल दिया है और परीक्षा प्रणाली से छात्रों व अभिभावकों का विश्वास उठ रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच, दोषियों को सजा और NIT को भंग कर पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।‌इस अवसर पर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सुरेश चंद्र मिश्रा,  किसान कांग्रेस प्रदेश कोऑर्डिनेटर दिलीप मिश्रा, प्रेम बिहारी उपाध्याय, मुशीर इकबाल, सुरेश गौतम, सुबुकतगीन अंसारी,  राजेन्द्र प्रसाद मौर्य,नाजिम अली, सुरेश चौहान,शिव पूजन मिश्रा, सवालेह अंसारी, शमशीर अहमद,  अशोक मिश्रा पाराशर, विष्णु जी उपाध्याय, सुमित शुक्ला, शक्ति मिश्रा, राकेश पाल,  विशाल गौतम , अजय प्रजापति,  गुलाब धर प्रजापति, मोनीश अंसारी,  नरेश पाल,  जनार्दन पाल इत्यादि लोग उपस्थित रहें.
महाराणा प्रताप जयंती व बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव का भव्य आयोजन

वसई। राजपूताना परिवार फाउंडेशन के तत्वावधान में चैत्र महोत्सव, संवत 2083 का भव्य स्वागत श्रद्धा, शौर्य एवं संस्कार के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति एवं क्षत्रिय धर्म का जीवंत उत्सव था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा महापुरुषों को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की लौ ने जैसे ही सभा को आलोकित किया, पूरा प्रांगणजय भवानी  के उद्घोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण कारगिल के वीर योद्धा नायक दीपचंद पंचग्रामी रहे, जिनका वीरता के लिए भव्य सम्मान किया गया। जनता ने खड़े होकर अपने नायक का अभिनंदन किया।
विश्वामित्र की भूमिका में "महर्षि" टाइटल से अलंकृत नालासोपारा के अघोर पीठाधीश्वर महंत बाबा अलख राम ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सनातन  का आध्यात्मिक महत्व बताया एवं क्षत्रिय धर्म पर जोर देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा ही क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य है। मुख्य वक्ता डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने मार्गदर्शन देते हुए कहा, _"आज से 200 साल पहले जब अंग्रेज नहीं आए थे तब एक जनवरी को नववर्ष नही मनाया जाता था, तब हमारे यहां केवल विक्रम संवत ही चलता था तथा वसंत पंचमी से होली तक पिछले वर्ष की विदाई की जाती थी एवं संपूर्ण चैत्र माह में चैत्र महोत्सव मनाकर नववर्ष का स्वागत किया जाता था । हमारे देश का हर वर्ग पूरे उत्साह से चैत्र महोत्सव मनाता था. आजके आधुनिक काल मे हर वर्ष चैत्र महोत्सव मनाकर ददन सिंह अपनी खोई हुई संस्कृती की पुनर्स्थापना कर रहे है. अपनी जड़ों से जुड़ना ही सच्चा राष्ट्रवाद है। मंच संचालन की बागडोर श्रीप्रकाश सिंह ने कुशलता से संभाली। पधारे हुए सभी अतिथियों का सत्कार राजपूताना परिवार फाउंडेशन के अध्यक्ष दद्दन सिंह चौहान ने शॉल एवं श्रीफल भेंट कर किया। कार्यक्रम में सम्मानमूर्ति के रूप में पधारीं क्षत्राणी नगरसेविका का विशेष सम्मान किया गया एवं  समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु श्रीमती बबीता देवराज सिंह, एकता सिंह, पिंकी राठौर, प्रदीपिका सिंह, जेपी सिंह, अभय कक्कड़, अशोक शेलके आदि को सम्मानित किया गया। 
नासिक से पधारे राजेंद्र सिंह चौहान, रामदुलार सिंह, लाल साहब सिंह, वीरेंद्र सिंह तोमर, कुमार शैलेंद्र सिंह, जय प्रकाश सिंह एवं श्रीमती रीता सिंह सहित अनेक आर्मी एवं नेवी के जवानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। सभी वीरों ने महाराणा प्रताप जयंती एवं बाबू वीर कुंवर सिंह जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गायक दामोदर राव, नंदिनी तिवारी, पूनम सिंह एवं सूरज सिंह 'तूफानी ने अपनी सुमधुर गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति और वीर रस के गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। राजपूताना परिवार के सदस्य वीरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, राजेश सिंह सूर्यवंशी, बबन सिंह, ललन सिंह, अरबिंद सिंह मनोज सिंह राकेश सिंह नाहर सिंह केदार सिंह रूपेश सिंह अजय सिंह सरवन सिंह सिसोदिया नरेंद्र सिंह राणावत वीरभद्र सिंह जडेजा अश्विन सिंह जाडेजा स्वरूप सिंह जडेजा जयेंद्र सिंह जडेजा जगदीश सिंह जडेजा सत्येंद्र रावत सुनील सिंह, मोहित सिंह, विजय सिंह, विनोद सिंह, राधा रमन सिंह, अमित सिंह, नाहर सिंह, भावेश सिंह, रोहित सिंह, राम सिंह, केदारनाथ सिंह, राज चौरसिया, जयकुमार यादव एवं संस्था के सभी सदस्यो पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। श्रीमती अंजू सिंह, खुशबू सिंह, आशा सिंह, गरिमा सिंह, सुषमा सिंह, संध्या सिंह, किरण सिंह, बबीता सिंह सहित तमाम बहनों एवं माताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।कार्यक्रम के पश्चात सभी ने *सुरुचिपूर्ण भोज* का आनंद लिया एवं प्रसाद ग्रहण किया।
सुनील सिंघवी को सर्वसम्मति से सौंपी गई जयपुर प्रवासी संघ की कमान
मुंबई। राजस्थानी समाज की प्रमुख संस्था जयपुर प्रवासी संघ (जेपीएस) की नई कार्यकारिणी के गठन की घोषणा समारोहपूर्वक की गई। पार्ले इंटरनेशनल होटल में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष पद के लिए सुनील सिंघवी का सर्वसम्मति से चयन किया गया। समारोह के दौरान जेपीएस की निवर्तमान कार्यकारिणी के कार्यों की सराहना के साथ उनको भावभीनी विदाई दी गई।जयपुर प्रवासी संघ के गवर्निंग संरक्षक कृष्ण कुमार राठी, संरक्षक कुसुम काबरा, चुनाव अधिकारी मनमोहन बागड़ी, वर्तमान अध्यक्ष धर्मचंद कोठारी, सचिव अरुण कुमार निगोतिया, कोषाध्यक्ष अनिल हीरावत सहित संघ के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित सदस्यों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुनील सिंघवी को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में जेपीएस नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा समाजहित के कार्यों को और अधिक गति मिलेगी। जेपीएस की नई कार्यकारिणी में अनिल कुमार हीरावत, अनिल अग्रवाल, अनिल कर्णावट, अनीता माहेश्वरी, धर्मचंद कोठारी, दीपेंद्र बैराठी, गिरीश अग्रवाल, मधु कुमार राठी, निलीन सोखिया, राज कुमार बैद, मनीष शाह, मनीष कचोलिया एवं विजय सेठ को शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि सुनील सिंघवी इससे पूर्व भी संघ में सचिव एवं अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। सभी सदस्यों ने सुनील सिंघवी को संस्था के प्रत्येक कार्य में पूर्ण योगदान का विश्वास दिलाते हुए गतिविधियों को आगे बढ़ाने की सहमति जताई। जेपीएस के संरक्षक कृष्ण कुमार राठी ने निवर्तमान कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के योगदान की सराहना करते हुए उनका सम्मान किया तथा नई कार्यकारिणी के सफल कार्यकाल की कामना की। नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुनील सिंघवी ने नई कार्यकारिणी के सदस्यों की घोषणा की।
हस्तिनापुर क्षेत्र के गांव खेडी कला खादर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, भूमाफियाओं से कब्जामुक्त कराई गई वन भूमि

संवाददाता/परविंदर चौधरी


हस्तिनापुर। थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव खेड़ी कला खादर में सोमवार दिनांक 18/05/2026 को प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए कई वर्षों से विवादित पड़ी एम.एल.सी की भूमि एवं वन विभाग की भूमि को भूमाफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल, राजस्व विभाग की टीम तथा वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में राजस्व विभाग, थाना हस्तिनापुर पुलिस तथा स्थानीय ग्रामीणों की सहमति से कब्जाई गई भूमि को खाली कराया गया। बताया गया कि भूमाफियाओं द्वारा लंबे समय से वन एवं एमएलसी की भूमि पर अवैध रूप से खेती की जा रही थी तथा आज ट्रैक्टरों के के द्वारा करीब 200-400 बीघा (भूमि ) जमीन को जोत कर कब्जा मुक्त कराया गया और भविष्य में बची हुई भूमि को भी कब्जा मुक्त कराया जाएगा, इस भूमि से क्षेत्र में लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई थी। कई बार इस भूमि को लेकर तनाव एवं खूनी रंजिश जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी थीं।
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग द्वारा संबंधित भूमि को वन विभाग के सुपुर्द किया गया। वन विभाग की टीम वन दरोगा, अतुल स्वामी, अंकित यादव, ऋषभ कुमार, नितिन फौजी, वनरक्षक अशोक, वनरक्षक रवि चपराना , वनरक्षक डालचंद, वाचर अमित, पवन,हर्षित चौहान, राजेंद्र,ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश कराते हुए कब्जामुक्त कराया। खेड़ी कला के ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि भूमाफियाओं के कब्जे के कारण उनकी पैतृक एवं लगानी भूमि लगातार प्रभावित हो रही थी। खेतों के आसपास अवैध कब्जों के चलते नीलगाय व अन्य जंगली पशु फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे, जिससे किसान परेशान थे।
वन रेंज क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि अभयारण क्षेत्र की वन भूमि है, जो वन्य जीवों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा कि वन विभाग भविष्य में भी अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रखेगा तथा वन संपदा और वन्य जीवों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
इस कार्रवाई में राजस्व विभाग से कानूनगो सीताराम, पटवारी नीरज तोमर, थाना प्रभारी हस्तिनापुर ने  उपनिरीक्षक मनीष, उपनिरीक्षक निर्दोष कुमार सहित पूरी पुलिस टीम एवं महिला कांस्टेबल मौजूद रहीं। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपस्थित रहे और इस प्रशासनिक कार्य में अड़चन भी आई कुछ किसानों ने इसका विरोध किया जिससे पुलिस बल ने उन्हें समझाया ,प्रशासनिक अपने प्रशासनिक कार्य में कोई भी हस्तीक्षेप किया तो आपको पुलिस हिरासत में ले लिया जाएगा , और सभी ने कार्रवाई का समर्थन किया।
राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

आजमगढ़: सराय सागर गांव में उमड़ा आस्था का जन सैलाब,यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर लोग हो रहें हैं निहाल
आजमगढ़ । क्षेत्र के सराय सागर गांव में चल रही श्री शत् चंडी महायज्ञ एवं सनातन धर्म सम्मेलन में आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर मन वांछित फल की कामना की। गांव में भक्ति रस की अविरल गंगोत्री बह रही है।
क्षेत्र के सराय सागर गांव में श्री श्री 1008 योगी रामानंद दास जी महाराज के सानिध्य में 18 भी से नौ दिवसीय पांच कुण्डीय श्री शत् चंडी महायज्ञ एवं सनातन धर्म सम्मेलन का शुभारंभ कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। महायज्ञ में दूसरे दिन यज्ञ मण्डप में यज्ञाचार्य के नेतृत्व में ब्राह्मणो द्वारा ध्वनि विस्तारक यंत्रों के वैदिक मंत्रों के उच्चारण पूजन अर्चन से दिशाएं गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने यज्ञ मण्डप की परिक्रमा कर मन वांछित फल की कामना की।शाम को लोग प्रवचन का आंनद उठा रहे हैं।
श्री श्री 10008 स्वामी रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि यज्ञ का उद्देश्य मानव कल्याण की भावना निहित है। समाज से आपसी राग द्वेष बैर भाव मिटाकर समता समरसता आपसी सौहार्द पूर्ण भाई चारा कायम करना है। उन्होंने ने कहा कि जब सनातन धर्म से ही अखण्ड भारत का नव निर्माण हो सकता है। इस अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय, राकेश उपाध्याय,राम प्रसाद,अजय राय, पूर्व जिला पंचायत सदस्य शिव मूरत यादव आदि मौजूद रहे।
डीएम व एसपी की संयुक्त अध्यक्षता में आगामी त्यौहारों को शांति व सौहार्दपूर्ण वातावरण में सकुशल सम्पन्न कराने हेतु पीस कमेटी की बैठक हुई आयोजित
*गंगा दशहरा और बकरीद को लेकर प्रशासन अलर्ट, जिलाधिकारी ने पीस कमेटी की बैठक में दिये गये कडे़ निर्देश*

सुलतानपुर,जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक चारू निगम की संयुक्त अध्यक्षता में आगामी त्यौहार- गंगा दशहरा मेला व ईदुज्जुहा (बकरीद) को सकुशल, शांतिपूर्ण तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराये जाने हेतु नवीन कलेक्ट्रेट सभागार में पीस कमेटी की बैठक आयोजित की गयी। उक्त बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी (प्रशा0), सम्बन्धित उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, थानाध्यक्ष व पीस कमेटी के सम्मानित सदस्यगण उपस्थित रहे। अपर जिलाधिकारी(प्रशासन) द्वारा आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत थानावार, तहसीलवार पीस कमेटी की बैठक की अद्यतन स्थिति तथा समस्त आधारभूत सुविधाओं जैसे- साफ सफाई, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, परिवहन व्यवस्था, मेडिकल सहायता एवं लॉ एण्ड आर्डर आदि के दृष्टिगत विस्तृत चर्चा की गयी।
         
उक्त बैठक में प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा की गयी। समस्त थानाध्यक्षों द्वारा अवगत कराया गया कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी त्यौहार को सकुशल सम्पन्न कराया जायेगा। उन्होंने समस्त स्थलों का चिन्हांकन कर साफ-सफाई व पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु आश्वस्त किया गया।
         
पुलिस अधीक्षक महोदया ने पीस कमेटी की बैठक में जिलाधिकारी महोदय सहित सभी सम्मानित सदस्यों व सम्बन्धित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पीस कमेटी की बैठक में सम्मानित सदस्यों द्वारा जिन बिंदुओं को चिन्हित किया गया है उन पर ससमय कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित एसडीएम व पुलिस क्षेत्राधिकारियों द्वारा मेला स्थल, सार्वजनिक कुर्बानी स्थल, जुलूस मार्ग आदि का संयुक्त निरीक्षण अवश्य कर लिया जाय तथा निरोधात्मक कार्यवाही को समय रहते सुनिश्चित किया जाय। उन्होंने सभी सम्मानित सदस्यों से अपील की कि भ्रामक व अफवाह फैलाने वाली खबरों से बचें, कहीं कोई भी समस्या हो, तो सबसे पहले प्रशासन को अवगत कराएं, जिससे त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
       
बैठक के अन्त में जिलाधिकारी महोदय द्वारा पीस कमेटी के सभी सम्मानित सदस्यों व उपस्थित अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बैठक में आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत सभी आधारभूत सुविधाओं से सम्बन्धित बिन्दुओं को चिन्हित किया गया है। उन्होंने पीस कमेटी के सदस्यों को आश्वस्त किया कि चिन्हित किये गये बिन्दुओं पर ससमय कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने आगामी त्योहारों के दृष्टिगत नगरक्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति, साफ-सफाई, चिकित्सकीय सहायता व पेयजल की आपूर्ति हेतु सम्बन्धित को निर्देशित किया।
       
उन्होंने मेला स्थल, सभी सार्वजनिक कुर्बानी स्थल, जुलूस मार्ग आदि का सम्बन्धित एसडीएम व सीओ द्वारा संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिये। उन्होंने आगामी त्यौहारों के दृष्टिगत आयोजित होने वाले गंगा दशहरा मेला, सार्वजनिक कुर्बानी स्थल, जुलूस मार्ग तथा प्रमुख मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का निरीक्षण करने के निर्देश सम्बन्धित को दिये। इसी प्रकार उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को चिकित्सा के दृष्टिगत आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी धर्मगुरुओं से अपील की कि सभी धर्म समुदाय के लोग आपसी भाईचारे व सौहार्दपूर्ण वातावरण में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी आगामी त्यौहार को सकुशल सम्पन्न करायें। इस अवसर पर समस्त सम्बन्धित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
टीवी 9 भारतवर्ष के डायरेक्टर हेमंत शर्मा ने जनकवि अदम गोंडवी को बताया व्यवस्था से टकराने वाला शायर

परसपुर (गोण्डा)। टीवी9 भारतवर्ष के डायरेक्टर एवं वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने जनकवि अदम गोंडवी पर विस्तृत लेख लिखते हुए उन्हें व्यवस्था और समाज के बीच संघर्ष की सबसे सशक्त आवाज बताया है। उन्होंने लिखा कि समाज हमेशा बदलाव चाहता है जबकि सत्ता यथास्थिति बनाए रखना चाहती है। ऐसे में जो व्यक्ति व्यवस्था को चुनौती देता है, वह सत्ता के लिए विद्रोही और समाज के लिए नायक बन जाता है। हेमंत शर्मा ने कहा कि अदम गोंडवी की कविता में कबीर का विद्रोह, धूमिल की जनपक्षधरता, दुष्यंत का अंदाजे बयां और मुक्तिबोध की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। उनकी गजलें प्रेम और सौंदर्य नहीं बल्कि भूख, गरीबी, मुफलिसी और आमजन की पीड़ा को आवाज देती हैं। उन्होंने कहा कि अदम गोंडवी की भाषा खुरदुरी लेकिन सीधी चोट करने वाली थी, जिसमें शोषित और पीड़ित वर्ग की वेदना साफ दिखाई देती है। हेमंत शर्मा ने कहा कि हिंदी साहित्य और अकादमिक संस्थानों ने अदम गोंडवी के साथ न्याय नहीं किया और उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कवि एवं आलोचक डॉ. जय नारायण बुधवार की पुस्तक ‘जनकवि अदम गोंडवी’ की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक अदम गोंडवी को उनके समय और समाज के साथ समझने का गंभीर प्रयास है। लेख में हेमंत शर्मा ने अदम गोंडवी की कई प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कविता व्यवस्था के खिलाफ जनता की सबसे सच्ची गवाही है। उन्होंने अदम गोंडवी को कबीर परंपरा का आखिरी बड़ा रचनाकार बताते हुए कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक ढोंग, सामाजिक विषमता, जातिवाद और राजनीतिक पाखंड पर खुलकर चोट की। हेमंत शर्मा ने कहा कि अदम गोंडवी केवल कवि नहीं बल्कि जनता की आवाज थे, जिन्हें संस्थानों ने भुलाने की कोशिश की लेकिन जनता आज भी उन्हें याद करती है। लेख के अंत में उन्होंने डॉ. जय नारायण बुधवार के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सच्चा साहित्य अंततः अपना रास्ता बना ही लेता है और अदम गोंडवी की गजलें आने वाले समय में भी प्रतिरोध और जनचेतना की आवाज बनी रहेंगी।
सीसीएल की मनमानी के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, सांसद मनीष जायसवाल के नेतृत्व में हजारों लोगों ने किया महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव

गिद्दी/अरगडा: सीसीएल अरगडा क्षेत्र में व्याप्त बिजली-पानी की घोर किल्लत, गिद्दी-ए अस्पताल की लचर व्यवस्था, सीसीएल कॉलोनियों की बदहाली और सीसीएल अधिकारियों की लालफीताशाही एवं मनमानी सहित अन्य जनसमस्याओं के खिलाफ मंगलवार को हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन सह महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव किया गया। सांसद मनीष जायसवाल के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में अरगडा, सिरका, गिद्दी-ए, गिद्दी-सी, रेलीगढ़ा और गिद्दी वाश री क्षेत्र के कुल 14 पंचायतों से हजारों की संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे सड़कों पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन में उमड़े जनसैलाब में जनता के आक्रोश को देखते हुए सीसीएल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। विदित हो कि इस क्षेत्र की लगभग एक लाख से अधिक की आबादी बुनियादी सुविधाओं के लिए सीसीएल पर निर्भर है और पिछले करीब 25 दिनों से क्षेत्र में बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप्प होने से जनता त्राहिमाम कर रही थी। स्थानीय लोगों के इस दर्द को समझते हुए क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने दो दिन पूर्व इस महाआंदोलन का बिगुल फूंका था, जो आज एक ऐतिहासिक प्रदर्शन में तब्दील हो गया।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'सीसीएल महाप्रबंधक हाय-हाय', 'बिजली-पानी देना होगा' और 'सांसद मनीष जायसवाल जिंदाबाद' के गगनभेदी नारे खूब लगाए और प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस धरने की अध्यक्षता स्थानीय डाडी भाजपा मंडल अध्यक्ष राजदीप प्रसाद ने की, जबकि संचालन रंजीत पांडेय व पुरुषोत्तम पाण्डेय ने किया। धरनास्थल पर उपस्थित विशाल भीड़ को संबोधित करते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने सीसीएल प्रबंधन पर तीखे बाण चलाए और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पिछले 25 दिनों से आपूर्ति बंद करके आम जनता को दूषित पानी पीने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीसीएल प्रबंधन के कुछ निरंकुश अधिकारी अपने दमनकारी नीति के तहत अपनी मनमानी से जनता को प्रताड़ित कर यहाँ की खनिज संपदा को लूटने में लगे हैं, जो बेहद शर्मनाक है।

सांसद मनीष जायसवाल ने प्रबंधन के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि अपने अधिकारियों के लिए अलग और आम जनता के लिए अलग नीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कई बहाने बनाकर आम लोगों को बिजली और पानी देने से मना किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र की बदहाली का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए कहा कि गिद्दी-ए सीसीएल अस्पताल में 5 डॉक्टर पदस्थापित हैं, लेकिन पूरी डिस्पेंसरी में मात्र एक बीपी मशीन है, जिससे यहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह लचर हो चुकी है। इसके अलावा हमलोग के बड़ी मशक्कत के बाद पास हुआ गिद्दी पुल का निर्माण कार्य भी अब तक शुरू नहीं हो सका है। सीसीएल क्वार्टर और कॉलोनियों की हालत इतनी दयनीय है कि निचले तबके के कर्मचारी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन सालों से सीएसआर की राशि खर्च कर रहा है, लेकिन धरातल पर विकास शून्य है और जनजीवन बेहाल है। सांसद मनीष जायसवाल ने इस धरने को अंतिम चेतावनी बताते हुए कहा कि प्रबंधन समय रहते सुधर जाए, अन्यथा अगली बार जनता इनका बोरिया-बिस्तर बंधवा देगी।

सांसद मनीष जायसवाल के इस कड़े रुख और जनता के भारी आक्रोश के आगे आखिरकार सीसीएल प्रबंधन को घुटने टेकने पड़े। अरगडा क्षेत्र के महाप्रबंधक सत्यजीत कुमार अन्य आला अधिकारियों के साथ खुद धरना स्थल पर पहुंचे और सांसद मनीष जायसवाल की मांगों को जायज ठहराते हुए उन्हें जल्द सुधार करते हुए जनहित में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। महाप्रबंधक ने कहा कि क्षेत्र में बिजली और पानी की स्थिति को आज से ही सुधार लिया जा रहा है और आने वाले 10 महीनों के भीतर एक आधुनिक फिल्टरेशन प्लांट का निर्माण कराकर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने सीसीएल क्वार्टर और कॉलोनियों की दयनीय स्थिति में भी जल्द सुधार करने की बात कही। महाप्रबंधक द्वारा मांगों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का भरोसा दिए जाने के बाद सांसद मनीष जायसवाल ने एक ज्ञापन सौंपने के साथ इस ऐतिहासिक धरने को समाप्त करने की घोषणा की लेकिन उन्हें चेताते हुए कहा कि जनता को अपना मालिक समझें और जन-जरूरतों को पूरा करने में अपनी सकारात्मक ऊर्जा खपाएं अन्यथा जनता उग्र हुई तो कुर्सी में बैठने लायक नहीं रहिएगा ।

मौके पर विशेषरूप से हजारीबाग जिला परिषद अध्यक्ष उमेश प्रसाद मेहता, हजारीबाग भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह, रामगढ़ भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव कुमार बबला, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि सत्येंद्र नारायण सिंह, सीसीएल कोयलांचल के सांसद प्रतिनिधि रंजीत पांडेय, रामगढ़ जिला सांसद प्रतिनिधि राजीव जायसवाल, बड़कागांव विधानसभा सांसद प्रतिनिधि पूनम साहू, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनिल मिश्रा, हजारीबाग भाजपा जिला महामंत्री जयनारायण प्रसाद, रामगढ़ जिला महामंत्री राजू चतुर्वेदी, पुरुषोत्तम पाण्डेय, करुण सिंह,जुगनू सिंह, सुशांत पाण्डेय, उमेश दांगी, विजय जायसवाल, राजू रंजन पांडेय, प्रो.संजय सिंह, अनमोल सिंह, शिबू मेहता, विजय यादव, भागीरथ ठाकुर, रीमा कुमार, योगेश कुशवाहा, महेंद्र सिंह, जवाहर प्रसाद, प्रमोद कुमार दास, भीम प्रजापति, मनोज गिरी, शंकर करमाली, सुरेंद्र करमाली, रूपा कुमारी, धनंजय कुमार पुटूस, दिलीप सिंह, अजय पासवान, विशाल वाल्मीकि, अजय पांडेय, पवन गुप्ता, विक्रमादित्य, शिव कुमार महतो, राजदीप प्रसाद, रंजन फौजी, बसंत प्रजापति, सिंकी पासवान, सेतराज पासवान, रामप्रसाद मल्लिक, लक्ष्मी देवी, भागीरथ ठाकुर, अशोक सोनी, विवेक गुप्ता, रेखा देवी, राजीव कुशवाहा, सतीश मोहन मिश्रा, गुंजन साव, दिनेश यादव, फलेंद्र राम, गुलशन साव, चंदन सिंह, गिरिजा सिंह, वृजकिशोर पाठक, रामसहाय वेदिया, ललन साव, विनोद सिंह, मिंटू सोनी, संतोष शर्मा, मीनू भगत, उत्तम सिन्हा, बिहारी प्रजापति, ऋषि कुमार, सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहें ।

पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि, NEET घोटाले पर कांग्रेस का प्रदर्शन:भदोही कलेक्ट्रेट पर धरना, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा

रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही।‌भदोही जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला अध्यक्ष वसीम अंसारी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल - डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों, महंगाई तथा नीट परीक्षा घोटाले के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से आम जनता, किसानों, मजदूरों छात्रों और मध्यम वर्ग पर पड़े रहे महंगाई के बोझ से तत्काल राहत देने की मांग की गई। कांग्रेस ने बढ़ती मंहगाई को गंभीर मुद्दा बताया और सरकार से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया।‌ज्ञापन में प्रमुख रूप से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत कम करने, बढ़ती मंहगाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने और पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए अत्यधिक टैक्स को घटाने की मांग की गई। नीट परीक्षा घोटाले और पेपर लीक मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की भी मांग की गई। इसके अतिरिक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र के इस्तीफे और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तत्काल भंग कर एक न‌ई , पारदर्शी एवं जवाबदेही परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई।
इस अवसर पर जिला वसीम अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल - डीजल पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने बताया कि मंहगाई चरम पर है, जिससे अधिक प्रभावित है। अंसारी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पिछले वर्षों में पेट्रोलियम पदार्थों से भारी टैक्स वसूला है, फिर भी आप जनता को कोई राहत नहीं दी जा रही है। पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र कुमार दूबे राजन ने नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस घटना ने देश के लाखों का भविष्य संकट में डाल दिया है और परीक्षा प्रणाली से छात्रों व अभिभावकों का विश्वास उठ रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच, दोषियों को सजा और NIT को भंग कर पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।‌इस अवसर पर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सुरेश चंद्र मिश्रा,  किसान कांग्रेस प्रदेश कोऑर्डिनेटर दिलीप मिश्रा, प्रेम बिहारी उपाध्याय, मुशीर इकबाल, सुरेश गौतम, सुबुकतगीन अंसारी,  राजेन्द्र प्रसाद मौर्य,नाजिम अली, सुरेश चौहान,शिव पूजन मिश्रा, सवालेह अंसारी, शमशीर अहमद,  अशोक मिश्रा पाराशर, विष्णु जी उपाध्याय, सुमित शुक्ला, शक्ति मिश्रा, राकेश पाल,  विशाल गौतम , अजय प्रजापति,  गुलाब धर प्रजापति, मोनीश अंसारी,  नरेश पाल,  जनार्दन पाल इत्यादि लोग उपस्थित रहें.
पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि, NEET घोटाले पर कांग्रेस का प्रदर्शन:भदोही कलेक्ट्रेट पर धरना, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा



रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही।‌भदोही जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला अध्यक्ष वसीम अंसारी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल - डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों, महंगाई तथा नीट परीक्षा घोटाले के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से आम जनता, किसानों, मजदूरों छात्रों और मध्यम वर्ग पर पड़े रहे महंगाई के बोझ से तत्काल राहत देने की मांग की गई। कांग्रेस ने बढ़ती मंहगाई को गंभीर मुद्दा बताया और सरकार से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया।‌ज्ञापन में प्रमुख रूप से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत कम करने, बढ़ती मंहगाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने और पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए अत्यधिक टैक्स को घटाने की मांग की गई। नीट परीक्षा घोटाले और पेपर लीक मामले में निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की भी मांग की गई। इसके अतिरिक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र के इस्तीफे और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तत्काल भंग कर एक न‌ई , पारदर्शी एवं जवाबदेही परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई।
इस अवसर पर जिला वसीम अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल - डीजल पर टैक्स बढ़ाकर जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने बताया कि मंहगाई चरम पर है, जिससे अधिक प्रभावित है। अंसारी ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पिछले वर्षों में पेट्रोलियम पदार्थों से भारी टैक्स वसूला है, फिर भी आप जनता को कोई राहत नहीं दी जा रही है। पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र कुमार दूबे राजन ने नीट परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस घटना ने देश के लाखों का भविष्य संकट में डाल दिया है और परीक्षा प्रणाली से छात्रों व अभिभावकों का विश्वास उठ रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच, दोषियों को सजा और NIT को भंग कर पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।‌इस अवसर पर पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सुरेश चंद्र मिश्रा,  किसान कांग्रेस प्रदेश कोऑर्डिनेटर दिलीप मिश्रा, प्रेम बिहारी उपाध्याय, मुशीर इकबाल, सुरेश गौतम, सुबुकतगीन अंसारी,  राजेन्द्र प्रसाद मौर्य,नाजिम अली, सुरेश चौहान,शिव पूजन मिश्रा, सवालेह अंसारी, शमशीर अहमद,  अशोक मिश्रा पाराशर, विष्णु जी उपाध्याय, सुमित शुक्ला, शक्ति मिश्रा, राकेश पाल,  विशाल गौतम , अजय प्रजापति,  गुलाब धर प्रजापति, मोनीश अंसारी,  नरेश पाल,  जनार्दन पाल इत्यादि लोग उपस्थित रहें.
महाराणा प्रताप जयंती व बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव का भव्य आयोजन

वसई। राजपूताना परिवार फाउंडेशन के तत्वावधान में चैत्र महोत्सव, संवत 2083 का भव्य स्वागत श्रद्धा, शौर्य एवं संस्कार के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति एवं क्षत्रिय धर्म का जीवंत उत्सव था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा महापुरुषों को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की लौ ने जैसे ही सभा को आलोकित किया, पूरा प्रांगणजय भवानी  के उद्घोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण कारगिल के वीर योद्धा नायक दीपचंद पंचग्रामी रहे, जिनका वीरता के लिए भव्य सम्मान किया गया। जनता ने खड़े होकर अपने नायक का अभिनंदन किया।
विश्वामित्र की भूमिका में "महर्षि" टाइटल से अलंकृत नालासोपारा के अघोर पीठाधीश्वर महंत बाबा अलख राम ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में सनातन  का आध्यात्मिक महत्व बताया एवं क्षत्रिय धर्म पर जोर देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा ही क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य है। मुख्य वक्ता डॉ. ओमप्रकाश दुबे ने मार्गदर्शन देते हुए कहा, _"आज से 200 साल पहले जब अंग्रेज नहीं आए थे तब एक जनवरी को नववर्ष नही मनाया जाता था, तब हमारे यहां केवल विक्रम संवत ही चलता था तथा वसंत पंचमी से होली तक पिछले वर्ष की विदाई की जाती थी एवं संपूर्ण चैत्र माह में चैत्र महोत्सव मनाकर नववर्ष का स्वागत किया जाता था । हमारे देश का हर वर्ग पूरे उत्साह से चैत्र महोत्सव मनाता था. आजके आधुनिक काल मे हर वर्ष चैत्र महोत्सव मनाकर ददन सिंह अपनी खोई हुई संस्कृती की पुनर्स्थापना कर रहे है. अपनी जड़ों से जुड़ना ही सच्चा राष्ट्रवाद है। मंच संचालन की बागडोर श्रीप्रकाश सिंह ने कुशलता से संभाली। पधारे हुए सभी अतिथियों का सत्कार राजपूताना परिवार फाउंडेशन के अध्यक्ष दद्दन सिंह चौहान ने शॉल एवं श्रीफल भेंट कर किया। कार्यक्रम में सम्मानमूर्ति के रूप में पधारीं क्षत्राणी नगरसेविका का विशेष सम्मान किया गया एवं  समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हेतु श्रीमती बबीता देवराज सिंह, एकता सिंह, पिंकी राठौर, प्रदीपिका सिंह, जेपी सिंह, अभय कक्कड़, अशोक शेलके आदि को सम्मानित किया गया। 
नासिक से पधारे राजेंद्र सिंह चौहान, रामदुलार सिंह, लाल साहब सिंह, वीरेंद्र सिंह तोमर, कुमार शैलेंद्र सिंह, जय प्रकाश सिंह एवं श्रीमती रीता सिंह सहित अनेक आर्मी एवं नेवी के जवानों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवान्वित किया। सभी वीरों ने महाराणा प्रताप जयंती एवं बाबू वीर कुंवर सिंह जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
गायक दामोदर राव, नंदिनी तिवारी, पूनम सिंह एवं सूरज सिंह 'तूफानी ने अपनी सुमधुर गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति और वीर रस के गीतों पर पूरा पंडाल झूम उठा। राजपूताना परिवार के सदस्य वीरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, राजेश सिंह सूर्यवंशी, बबन सिंह, ललन सिंह, अरबिंद सिंह मनोज सिंह राकेश सिंह नाहर सिंह केदार सिंह रूपेश सिंह अजय सिंह सरवन सिंह सिसोदिया नरेंद्र सिंह राणावत वीरभद्र सिंह जडेजा अश्विन सिंह जाडेजा स्वरूप सिंह जडेजा जयेंद्र सिंह जडेजा जगदीश सिंह जडेजा सत्येंद्र रावत सुनील सिंह, मोहित सिंह, विजय सिंह, विनोद सिंह, राधा रमन सिंह, अमित सिंह, नाहर सिंह, भावेश सिंह, रोहित सिंह, राम सिंह, केदारनाथ सिंह, राज चौरसिया, जयकुमार यादव एवं संस्था के सभी सदस्यो पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया। श्रीमती अंजू सिंह, खुशबू सिंह, आशा सिंह, गरिमा सिंह, सुषमा सिंह, संध्या सिंह, किरण सिंह, बबीता सिंह सहित तमाम बहनों एवं माताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।कार्यक्रम के पश्चात सभी ने *सुरुचिपूर्ण भोज* का आनंद लिया एवं प्रसाद ग्रहण किया।
सुनील सिंघवी को सर्वसम्मति से सौंपी गई जयपुर प्रवासी संघ की कमान
मुंबई। राजस्थानी समाज की प्रमुख संस्था जयपुर प्रवासी संघ (जेपीएस) की नई कार्यकारिणी के गठन की घोषणा समारोहपूर्वक की गई। पार्ले इंटरनेशनल होटल में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष पद के लिए सुनील सिंघवी का सर्वसम्मति से चयन किया गया। समारोह के दौरान जेपीएस की निवर्तमान कार्यकारिणी के कार्यों की सराहना के साथ उनको भावभीनी विदाई दी गई।जयपुर प्रवासी संघ के गवर्निंग संरक्षक कृष्ण कुमार राठी, संरक्षक कुसुम काबरा, चुनाव अधिकारी मनमोहन बागड़ी, वर्तमान अध्यक्ष धर्मचंद कोठारी, सचिव अरुण कुमार निगोतिया, कोषाध्यक्ष अनिल हीरावत सहित संघ के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। समारोह में उपस्थित सदस्यों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुनील सिंघवी को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में जेपीएस नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा समाजहित के कार्यों को और अधिक गति मिलेगी। जेपीएस की नई कार्यकारिणी में अनिल कुमार हीरावत, अनिल अग्रवाल, अनिल कर्णावट, अनीता माहेश्वरी, धर्मचंद कोठारी, दीपेंद्र बैराठी, गिरीश अग्रवाल, मधु कुमार राठी, निलीन सोखिया, राज कुमार बैद, मनीष शाह, मनीष कचोलिया एवं विजय सेठ को शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि सुनील सिंघवी इससे पूर्व भी संघ में सचिव एवं अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। सभी सदस्यों ने सुनील सिंघवी को संस्था के प्रत्येक कार्य में पूर्ण योगदान का विश्वास दिलाते हुए गतिविधियों को आगे बढ़ाने की सहमति जताई। जेपीएस के संरक्षक कृष्ण कुमार राठी ने निवर्तमान कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के योगदान की सराहना करते हुए उनका सम्मान किया तथा नई कार्यकारिणी के सफल कार्यकाल की कामना की। नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुनील सिंघवी ने नई कार्यकारिणी के सदस्यों की घोषणा की।
हस्तिनापुर क्षेत्र के गांव खेडी कला खादर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, भूमाफियाओं से कब्जामुक्त कराई गई वन भूमि

संवाददाता/परविंदर चौधरी


हस्तिनापुर। थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव खेड़ी कला खादर में सोमवार दिनांक 18/05/2026 को प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए कई वर्षों से विवादित पड़ी एम.एल.सी की भूमि एवं वन विभाग की भूमि को भूमाफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल, राजस्व विभाग की टीम तथा वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान में राजस्व विभाग, थाना हस्तिनापुर पुलिस तथा स्थानीय ग्रामीणों की सहमति से कब्जाई गई भूमि को खाली कराया गया। बताया गया कि भूमाफियाओं द्वारा लंबे समय से वन एवं एमएलसी की भूमि पर अवैध रूप से खेती की जा रही थी तथा आज ट्रैक्टरों के के द्वारा करीब 200-400 बीघा (भूमि ) जमीन को जोत कर कब्जा मुक्त कराया गया और भविष्य में बची हुई भूमि को भी कब्जा मुक्त कराया जाएगा, इस भूमि से क्षेत्र में लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई थी। कई बार इस भूमि को लेकर तनाव एवं खूनी रंजिश जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी थीं।
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग द्वारा संबंधित भूमि को वन विभाग के सुपुर्द किया गया। वन विभाग की टीम वन दरोगा, अतुल स्वामी, अंकित यादव, ऋषभ कुमार, नितिन फौजी, वनरक्षक अशोक, वनरक्षक रवि चपराना , वनरक्षक डालचंद, वाचर अमित, पवन,हर्षित चौहान, राजेंद्र,ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश कराते हुए कब्जामुक्त कराया। खेड़ी कला के ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि भूमाफियाओं के कब्जे के कारण उनकी पैतृक एवं लगानी भूमि लगातार प्रभावित हो रही थी। खेतों के आसपास अवैध कब्जों के चलते नीलगाय व अन्य जंगली पशु फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे, जिससे किसान परेशान थे।
वन रेंज क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि अभयारण क्षेत्र की वन भूमि है, जो वन्य जीवों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा कि वन विभाग भविष्य में भी अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रखेगा तथा वन संपदा और वन्य जीवों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
इस कार्रवाई में राजस्व विभाग से कानूनगो सीताराम, पटवारी नीरज तोमर, थाना प्रभारी हस्तिनापुर ने  उपनिरीक्षक मनीष, उपनिरीक्षक निर्दोष कुमार सहित पूरी पुलिस टीम एवं महिला कांस्टेबल मौजूद रहीं। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी उपस्थित रहे और इस प्रशासनिक कार्य में अड़चन भी आई कुछ किसानों ने इसका विरोध किया जिससे पुलिस बल ने उन्हें समझाया ,प्रशासनिक अपने प्रशासनिक कार्य में कोई भी हस्तीक्षेप किया तो आपको पुलिस हिरासत में ले लिया जाएगा , और सभी ने कार्रवाई का समर्थन किया।
राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।