लखनऊ में हथियारों की बड़ी सौदेबाजी का खुलासा, शहीद स्मारक के पास अवैध असलहा बेचने पहुंचे दो तस्कर रंगे हाथ गिरफ्तार
लखनऊ । राजधानी  में शनिवार की शाम शहीद स्मारक के पास उस वक्त हड़कंप मच गया जब वजीरगंज पुलिस ने दो ऐसे युवकों को धर दबोचा जो अवैध असलहा बेचने की फिराक में घूम रहे थे। पकड़े गए तस्करों के पास से एक 315 बोर का तमंचा, 20 जिंदा कारतूस, चाकू और उनकी मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय हथियार तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

चेकिंग के दौरान भिड़े तस्कर, पलभर में घेराबंदी

डीसीपी कमलेश दीक्षित ने बताया कि वजीरगंज कोतवाली के उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह कुशवाहा अपनी टीम के साथ शहीद स्मारक क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए चेकिंग कर रहे थे। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक अवैध हथियार बेचने आ रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत क्षेत्र की घेराबंदी की। कुछ ही मिनटों में संदिग्ध मोटरसाइकिल आती दिखी और पुलिस ने उसे रोककर दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया।

थैले में छिपा था असलहे का जखीरा

तलाशी लेने पर एक थैले से 315 बोर का अवैध तमंचा, 20 कारतूस और चाकू बरामद हुआ।पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों युवक किसी खरीदार से मिलने और हथियार बेचने की तैयारी में थे।

गिरफ्तार तस्करों के नाम हारिश खान, निवासी हाजीपुर, थाना इमलिया सुल्तानपुर, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: मुंगफली मंडी, वजीरगंज, मोहम्मद जीशान, निवासी हरिहरपुर, थाना महमूदाबाद, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: रहीमनगर, मड़ियांव है। दोनों शहर में सक्रिय होकर अवैध असलहे की सप्लाई कर रहे थे।

अवैध हथियार नेटवर्क पर बड़ा झटका

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार वे कहां से लाते थे और किसे बेचने जा रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी किसी बड़े सप्लायर गिरोह के संपर्क में थे।वजीरगंज पुलिस की सतर्कता से राजधानी में होने वाली बड़ी आपराधिक वारदात टल गई। शहीद स्मारक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दो तस्करों का रंगे हाथ पकड़ा जाना पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
विकसित भारत @2047 राज्य-स्तरीय कार्यशाला में आधुनिक तकनीक शिक्षा स्वच्छता और विकास का मॉडल-महापौर।

प्रयागराज—विकास और परिवर्तन की दिशा में अग्रणी-महापौर।

स्थान:डायरेक्टरेट ऑफ अर्बन लोकल बॉडीज सेक्टर-7 गोमती नगर एक्सटेशन लखनऊ

संजय द्विवेदी प्रयागराज।विकसित UP for विकसित भारत के अन्तर्गत एक राज्य-स्तरीय परामर्श कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।सुबह 9:30 बजे पंजीकरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियो नगर निकायो के जनप्रतिनिधियो राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानो के विशेषज्ञो तथा विभिन्न नगर निगमों के आयुक्तो ने प्रतिभाग किया।इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की अध्यक्षता नगर विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा ने किया।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य:-उत्तर प्रदेश की शहरी व्यवस्था को विकसित भारत 2047 के अनुरूप ढालना था—स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

ई-गवर्नेंस शहरी गतिशीलता एवं ट्रांजिट सिस्टम शहरी सततता इंटीग्रेटेड अर्बन प्लानिंग इन बिन्दुओ पर विस्तृत चर्चा करते हुए सतत समावेशी और तकनीक आधारित नगर विकास का रोडमैप तैयार किया गया।

विशेष सत्र:महापौर उमेश चन्द्र गणेश केसरवानी प्रयागराज का सम्बोधन।

महापौर ने विशेष अतिथि वक्ता के रुप में उपस्थित रहे अपने सम्बोधन में कहा—प्रयागराज आज परम्परा तकनीक शिक्षा स्वच्छता और नवाचार का ऐसा आदर्श संगम बन चुका है जो विकसित भारत 2047 की मजबूत नीव रखता है।

प्रयागराज—विकास और परिवर्तन की दिशा में अग्रणी

महापौर ने शहर में हुए तीव्र बदलावो का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयागराज ने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर यह सिद्ध किया है कि संकल्प और योजना के साथ कोई भी शहर राष्ट्रीय आदर्श बन सकता है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया—

शिक्षा में क्रांति:ऑपरेशन कायाकल्प

महापौर ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प योजना के माध्यम से प्रयागराज के प्राथमिक विद्यालयों का अभूतपूर्व कायाकल्प किया गया है—

प्राथमिक विद्यालयो में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए।

आधुनिक तकनीक आधारित डिजिटल लर्निंग सिस्टम शुरू किया गया।

बच्चो के लिए स्वच्छ शौचालय RO पेयजल फर्नीचर खेल सामग्री व पूर्णत:विकसित परिसर तैयार किए गए।

सभी विद्यालयों को सुरक्षित आकर्षक और तकनीकी रूप से सक्षम मॉडल स्कूल के रूप में बदला गया।

उन्होने कहा कि प्रयागराज का हर विद्यालय अब आधुनिक भारत के बच्चो के सपनो को पंख देने वाला ज्ञान मंदिर बन चुका है।

महा माघ मेला 2026 : विश्व स्तरीय आयोजन की तैयारी

उन्होंने कहा कि प्रयागराज आगामी महा माघमेला 2026 हेतु—

अत्याधुनिक यातायात व्यवस्था

नवाचार आधारित सुविधाएं

पर्यावरण-मित्र तकनीक

को अपनाते हुए वैश्विक स्तर की तैयारियाँ कर रहा है।

स्वच्छता एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में प्रयागराज ने देश में 12वाँ स्थान प्राप्त किया।

वॉटर गंगा टाउन सहित कई राष्ट्रीय अवार्ड।मियावाकी तकनीक से सिर्फ 1 वर्ष में संपूर्ण शहर में घने वन।

SBM कंट्रोल रूम से 24×7 स्वच्छता निगरानी।पुराने कूड़े के पहाड़ो का वैज्ञानिक निस्तारण।धरोहर व सौन्दर्य संवर्धन.हेरिटेज मोहल्ला. साहित्य तीर्थ पार्क.रामसेतु एवं आधुनिक प्रकाश व्यवस्था.विश्व की सबसे बड़ी रंगोली के माध्यम से वसुधैव कुटुम्बकम् का सन्देश

तकनीक आधारित नगर प्रबन्धन.IIT की सोच पर आधारित नवाचार.स्मार्ट सिटी के अंतर्गत डिजिटल शासन.ई-गवर्नेंस से त्वरित नागरिक सेवाएं.कार्यशाला के तकनीकी सत्र.कार्यक्रम में विभिन्न तकनीकी और विषयगत सत्रो का आयोजन हुआ—1-स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ई-गवर्नेस 2-अर्बन मोबिलिटी एवं ट्रांज़िट सिस्टम 3-अर्बन सस्टेनेबिलिटी4-इंटीग्रेटेड अर्बन प्लानिंग.इन सत्रों में NIUA. UNEP.WRI India.NITI Aayog.Smart City Mission.नगर विकास विभाग विभिन्न नगर निगमो के आयुक्त व विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियां दी।

महापौर का समापन सन्देश-

अपने सम्बोधन का समापन करते हुए महापौर ने कहा- विकसित भारत 2047 का सपना केवल योजनाओ से नही बल्कि हर शहर में वास्तविक परिवर्तन से पूरा होगा।प्रयागराज साबित कर रहा है कि यदि नीयत नीति और तकनीक साथ चले तो विकास अपने आप रास्ता बना लेता है।

बखिरा पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुये चोरी के 02 मामले से सम्बन्धित अभियुक्त को किया गया गिरफ्तार

रमेश दूबे

अभियुक्त के पास से एक

अदद चोरी की मोटरसाइकिल, गैस सिलेन्डर, 2000 रु0 नगद बरामद

पुलिस अधीक्षक जनपद संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह द्वारा जनपद संतकबीरनगर में अपराध एवं अपराधियो के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्वदवन सिंह के निकट पर्यवेक्षण में थाना बखिरा पुलिस द्वारा आज दिनाँक 29.11.2025 को 01 अभियुक्त नाम पता भालचन्द्र उर्फ सगेन्द्र उर्फ सगेदू पुत्र बनारसी निवासी ग्राम बिहारे थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर को चोरी की एक अदद मोटरसाइकिल, गैस सिलेन्डर, 2000 रु0 नगद बरामद करते हुए नन्दौर के पास से गिरफ्तार किया गया ।

घटना का संक्षिप्त विवरण-

प्रथम घटना- दिनाँक 30.09.2025 को वादी श्री श्यामकरन पुत्र श्री बिहारी निवासी थाना बिहारे जनपद संतकबीरनगर द्वारा थाना बखिरा पर दिनाँक 04.09.2025 को वादी के घर में चोरी हो जाने के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र दिया गया था । प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना बखिरा पर मु0अ0सं0 360/2025 धारा 351(2),115(2),305 बीएनएस पंजीकृत किया गया था ।

द्वितीय घटना- दिनाँक 28.11.2025 को वादी श्री धर्मेन्द्र चौधरी पुत्र श्री स्व0 रामनरेश चौधरी निवासी सुन्दरपुर बजहां थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर द्वारा थाना बखिरा पर दिनाँक 27.11.2025 को वादी की मोटरसाइकिल देवकली चौराहा से चोरी हो जाने के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र दिया गया था । प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना बखिरा पर मु0अ0सं0 461/2025 धारा 303(2) बीएनएस पंजीकृत किया गया था ।

गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पताः-

भालचन्द्र उर्फ सगेन्द्र उर्फ सगेदू पुत्र बनारसी निवासी ग्राम बिहारे थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर ।

बरामदगी का विवरणः- चोरी की एक अदद मोटरसाइकिल, गैस सिलेन्डर, 2000 रु0 नगद।

गिरफ्तार करने वाले पुलिस बल का विवरणः-* उ0नि0 श्री राजकुमार मिश्रा, हे0का0 मनोज यादव, का0 अमित कुमार यादव ।

डॉ. चिन्मय पांड्या का भव्य स्वागत

करनैलगंज। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख, देव संस्कृति विश्व विद्यालय के कुलपति विचार कान्ति अभियान के धर्म ध्वजवाहक डाॅ.चिन्मय पांड्या के प्रथम आगमन पर नगर के संतोषी माता मंदिर पर भव्य स्वागत किया गया। गायत्री शक्ति पीठ सकरौरा के महंत पंडित तिलक राम तिवारी एवं सुशीला सिंह ने चन्दन रोली लगाकर स्वागत किया। गायत्री परिवार सकरौरा के कार्यकर्ता ने सैकडौ संख्या मे एकत्र होकर फूल माला से उनका भव्यता से स्वागत किया।

इस मौके पर बाल गोपाल वैश्य, माखनलाल सिंह, इंद्रमणि तिवारी, ज्वाला पसाद तिवारी, दिनेश कुमार सिंह, शिव पूजन, मुकेश वैश्य, मुकेश सोनी, अखिल, सुमित मिश्रा, कन्हैयालाल, श्रीराम सोनी, आशीष सोनी, रतन सोनी, अनूप जयसवाल, रिचा तिवारी, मन्जू तिवारी, मन्जू यादव, हरि कुमार, जितेन्द्र, सूर्यांश तिवारी आदि गायत्री परिवार के कार्यकर्ता शामिल रहे।

श्रीमद् भागवत कथा के पूर्व प्रदेश के मुखिया ने दी शुभकामनाएं








संजय द्विवेदी, प्रयागराज।यमुनानगर अन्तर्गत विधान सभा मेजा क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नही बल्कि आत्मा को ईश्वर की ओर ले जाने वाला महान आध्यात्मिक उत्सव है।यह जीवन भक्ति तथा जीवन मूल्यों का अनन्त प्रकाश देता है जिसने सदियो से मानव को धर्म सत्य प्रेम संयम और करुणा का संदेश दिया है।




मुख्यमंत्री ने यह विचार एडवोकेट हाईकोर्ट एवं प्रदेश सह संयोजक(विधि विभाग) भाजपा उत्तर प्रदेश सुशील कुमार मिश्र को सम्बोधित शुभकामना सन्देश में व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होने कहा कि जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज जैसे सन्तो की वाणी केवल शास्त्रो के रूप में अध्ययन नही की जाती बल्कि अनुभूति बनकर हृदय में उतरती है।ऐसी दिव्य कथा मानव जीवन को सतमार्ग पर चलने का मार्ग प्रशस्त करता है।तथा भक्ति एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्रदान करता है।मुख्यमंत्री ने अपेक्षा जताई कि दुर्गावती इण्टर नेशनल स्कूल एंड कॉलेज गोसौरा कला(मेजा रोड प्रयागराज)में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा प्रदेशवासियो के जीवन में ज्ञान शांति और मंगल का प्रकाश एवं सतमार्ग पर चलने का सन्देश प्राप्त हो।और उन्होने वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओ से आह्वान किया कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम धर्म और निष्काम कर्म के सन्देश को जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र की समृद्धि में अपना अहम योगदान दे।




अंत में उन्होने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हो तथा सभी उपस्थित श्रद्धालुओ पर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा निरन्तर बनी रहे।भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

25 गरीब परिवारो को नही मिल पा रहा न्याय.प्रशासन लाचार

संजय द्विवेदी, प्रयागराज। यमुनानगर अन्तर्गत में तहसील बारा क्षेत्र के गौहनिया बाई पास पर भारतीय किसान यूनियन(किसान)का सत्याग्रह आन्दोलन 12 वें दिन भी जारी रहा।भाकियू(किसान)ने छह सूत्रीय मांगों को लेकर सत्याग्रह प्रारम्भ किया था।जिसमें मुख्य रूप से जल जीवन मिशन- हर घर नल से जल- योजना में भ्रष्टाचार की जांच एवं गरीबो को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाने की मांगे थी।दो गांवों की सीमा पर एक बुजुर्ग महिला की दबंगई से जहां 25 दलित परिवारो को उनके ही बैनामे की जमीन पर कब्जा नही मिल पा रहा है।वही इस मामले बुजुर्ग महिला की दबंगई के प्रशासन भी लाचार हो गया है।

सत्याग्रह के 12 वें दिन शनिवार को बारा तहसील के कानूनगो सुभाष त्रिपाठी ने दो गांवों गडरा व टिकरी तालुका कंजासा का सीमांकन कर वहां पत्थर भी गड़वा दिया लेकिन स्थानीय दबंगो के कारण 25 परिवार अपनी बैनामे की भूमि पर कब्जा नहीं कर पा रहे है।भाकियू किसान की मांग पर एसीपी कौंधियारा ने हस्तक्षेप किया।गरीबो को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाने के लिये एसओ घूरपुर ने भी आश्वासन दिया।लेकिन अभी तक स्थानीय एक बुजुर्ग महिला की दबंगई के कारण पुलिस प्रशासन भी लाचार हो गया लगता है।

भारतीय किसान यूनियन (किसान)के पूर्वांचल प्रभारी राजीव चन्देल ने कहा कि 25 दलित समाज के गरीब परिवारो को जब तक न्याय नही मिलेगा तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा। 2 दिसम्बर तक फैसला न हुआ तो सैकड़ो की संख्या में पीड़ित किसान पैदल लखनऊ मुख्यमंत्री से फरियाद करने जायेगे सत्याग्रह आन्दोलन प्रदेश महासचिव विक्रम सिंह मण्डल महासचिव धर्मेन्द्र सिंहावलोकन है पटेल मण्डल अध्यक्ष मंजूराज आदिवासी मंडल उपाध्यक्ष मनोरमा आदिवासी जिलाध्यक्ष जेपी यादव जिला संगठन मंत्री शिव शंकर सिंह मीडिया प्रभारी पुष्पराज सिंह रमाकांत निषाद जिलाध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ श्याम सिंह बघेल अधिवक्ता दिनेश निषाद सीता आदिवासी सेवा लाल बलराम बंसल सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे।

किसानों को आर्थिक रूप से “समृद्ध’ कर उत्तर प्रदेश को सशक्त बना रही योगी सरकार
* धान कॉमन की 2369 रुपये तथा (ग्रेड-ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल की दर से हो रही खरीद

* बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये प्रति कुंतल किया गया है निर्धारित, यूपी के 33 जनपदों में ही हो रही खरीद

लखनऊ। योगी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से ‘समृद्ध’ कर उत्तर प्रदेश को सशक्त बना रही है। सीएम योगी के निर्देश के उपरांत 48 घंटे के भीतर धान व बाजरा किसानों को किया जा रहा भुगतान इसका उदाहरण है। पहली अक्टूबर से धान खरीद शुरू हुई थी, तबसे 28 नवंबर तक धान किसानों को 1868.35 करोड़ व बाजरा किसानों को 263.03 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यही कारण है कि योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों की बदौलत अपनी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त करने के लिए किसान फसल की बिक्री राजकीय क्रय केंद्रों पर कर रहे हैं। क्रय केंद्रों पर 17 फीसदी नमी तक का धान खरीदा जा रहा है।

*धान किसानों को 1868.35 करोड़ रुपये का भुगतान*

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर समय-समय पर धान खरीदारी की समीक्षा हो रही है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, खाद्य व रसद विभाग लगातार इसकी मॉनीटरिंग कर रहा है। पहली अक्टूबर से 28 नवंबर तक के मध्य सरकारी क्रय केंद्रों पर 1.40 लाख से अधिक किसानों ने धान बिक्री की। इसके एवज में किसानों को अब तक 1868.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बचे किसानों के लिए भी सरकार द्वारा तत्काल भुगतान की प्रक्रिया चालू है।

*बाजरा किसानों को 263.03 करोड़ का किया गया भुगतान*

यूपी में श्री अन्न की खरीद भी पहली अक्टूबर से जारी है। श्री अन्न के अंतर्गत बाजरा किसान भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी फसल को लेकर जा रहे हैं। 28 नवंबर तक लगभग 22000 किसानों को 263.03 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष बचे किसानों को भी तत्काल भुगतान करने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। बाजरा की बिक्री के लिए 64 हजार से अधिक किसानों ने पंजीकरण भी करा लिया है।  
बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। बाजरा खरीद सिर्फ 33 जनपदों में ही हो रही है। इसके लिए 281 क्रय केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है। धान खरीद (कॉमन) 2369 रुपये तथा (ग्रेड-ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हो रही है।
सीएम योगी ने हाल में बैठक लेकर अधिक से अधिक किसानों से क्रय केंद्रों पर धान की खरीद कराने का निर्देश दिया था। इसके पीछे उनकी मंशा अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाना था। उत्तर प्रदेश में धान खरीद प्रणाली को लेकर योगी सरकार की मंशा धरातल पर मजबूती से दिखाई दे रही है। ई-पॉप मशीनों से बायोमीट्रिक सत्यापन, पंजीकृत किसानों से ही खरीद, बिचौलियों की समाप्त होती भूमिका और 48 घंटे में भुगतान आदि ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है। रिकॉर्ड स्तर की धान खरीद, राइस मिलों को मिली राहत और किसानों के लिए की गई सुविधाओं ने उनकी आमदनी, भरोसे और आत्मनिर्भरता को नई दिशा दी है।
धान क्रय एवं खाद की उपलब्धता हेतु नवीन गल्ला मण्डी तथा सहकारी समिति केशवपुर पहड़वा का किया औचक निरीक्षण

गोण्डा। 29 नवम्बर,2025 जिलाधिकारी गोण्डा प्रियंका निरंजन ने आज जिले में धान क्रय एवं खाद उपलब्धता की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करने हेतु नवीन गल्ला मण्डी, बहराइच रोड बड़गांव तथा बहु उद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि०, केशवपुर पहड़वा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों की जानकारी प्राप्त की।

नवीन गल्ला मण्डी में धान बेचने आए किसानों से जिलाधिकारी ने पूछा कि उन्हें क्रय केंद्र पर किसी प्रकार की दिक्कत या परेशानी का सामना तो नहीं करना पड़ा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि धान खरीद प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सुगम तरीके से संचालित हो, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए तथा तौल एवं भुगतान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

इसके पश्चात जिलाधिकारी ने बहु उद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि०, केशवपुर पहड़वा का निरीक्षण कर वहां धान क्रय की स्थिति एवं खाद की उपलब्धता की विस्तृत जानकारी एआर कोऑपरेटिव तथा केंद्र प्रभारी/सचिव से प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि केंद्र पर खाद उपलब्ध नहीं थी। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि जिले के सभी सहकारी समितियों एवं क्रय केंद्रों पर खाद की पर्याप्त उपलब्धता समय से सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना पड़े, यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने निर्देशित किया कि खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक कदम तत्काल प्रभाव से उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी केंद्र पर खाद की कमी पाई जाती है या किसानों को परेशानी होती है, तो दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कृषि से संबंधित सभी व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर बनाने के निर्देश दिए तथा अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं एवं निर्देशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

निरीक्षण के दौरान जिला खाद्य विपणन अधिकारी एनके पाठक, एआर कोऑपरेटिव रवि शंकर चौधरी तथा यूपीपीसीएफ प्रबंधक जितेंद्र वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

आजमगढ़: शताब्दी वर्ष पूरा होने पर भाकपा ने दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन निकाला जुलूस किया जन सभा
आजमगढ़।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आजमगढ़ ने पार्टी के शताब्दी वर्ष पर अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन विशाल रैली और सभा की।जिसकी अध्यक्षता हरिगेन राम और संचालन जिला सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय ने किया। भाकपा के कार्यकर्ता जिले के कोने कोने से जजी मैदान में एकजुट होकर लाल झंडो और बैनरों के साथ पूरे उत्साह के साथ जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट का चक्रमण किया।उसके बाद रैली सभा में बदल गई। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव अरविंद राज स्वरूप ने कहा कि भाकपा की स्थापना कानपुर में हुई थी।कानपुर के साथ आजमगढ़ का नाम लिया जाता है।स्वतंत्रता सेनानी जयबहादुर सिंह,झारखंडे राय,डॉ जेड ए अहमद,दशरथ राय शास्त्री,बच्चे लाल शास्त्री,मुंशी नर्वदेश्वर लाल जैसे लोगों की कुर्बानियां की गाथा आज भी सुनाई देती है।स्वरूप ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार को अब शहीद याद आते हैं।जबकि बीजेपी का शहीदों से कोई लेना देना नहीं है। एस आई आर कराकर सरकार गरीबों को वोट के अधिकार से वंचित करना चाहती है। एस आई आर का समय बहुत सीमित है,जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। स्वरूप ने आगे कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी विचारों की पार्टी है।हम। सौ साल से पूंजीपतियों के खिलाफ गरीबों के हक,हुकूक के लिए संघर्ष किया है और करती रहेगी। भगत सिंह के भांजे प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारें भगत सिंह से डरती हैं।क्योंकि भगत सिंह जाति,धर्म,संप्रदाय और पूंजीवादी विचारधारा के कट्टर विरोधी थे।आज सरकारों को कार्पोरेट चला रहा है।देश की सकल पूंजी पर चंद पूंजीपतियों का कब्जा है।भगत सिंह मजदूरों,किसानों,महिलाओं, विद्यार्थियों,नवजवानों के हक अधिकार के बारे में खुलकर बोला था।जगमोहन सिंह ने कहा कि आजमगढ़ में हमारा आगमन पहली बार हुआ है।बृहस्पतिवार से हम कैफ़ी आज़मी जन्म स्थान मिज़वा,शहीद द्वार, शिब्ली मंजिल,राहुल सांकृत्यायन जन्म स्थान पन्दहा,निजामाबाद ऐतिहासिक गुरुद्वारा और शेख मसूद इंटर कॉलेज फरिहा में मेरा जितना आदर और सत्कार किया गया।उसके लिए मै साथी हरिमंदिर पाण्डेय का आभार करता हूं।जिनकी वजह से आजमगढ़ में हमारा आगमन हुआ। इस सभा के माध्यम से जिले के विकास से जुड़ी बीस सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी आजमगढ़ को दिया गया। इस सभा को पार्टी प्रदेश सचिव मंडल सदस्य हामिद अली,उप्र किसान सभा अध्यक्ष इम्तेयाज बेग,खेत मजदूर नेता खरपत्तू राजभर,रामाज्ञा यादव,गंगादीन, मो शेख औबेदुल्ला,मुजम्मिल जाहिद अली,राम अवध यादव,तेज़बहादुर मौर्य,मंगलदेव यादव, जियालाल आदि लोगों ने सभा को संबोधित किया।
लखनऊ में हथियारों की बड़ी सौदेबाजी का खुलासा, शहीद स्मारक के पास अवैध असलहा बेचने पहुंचे दो तस्कर रंगे हाथ गिरफ्तार
लखनऊ । राजधानी  में शनिवार की शाम शहीद स्मारक के पास उस वक्त हड़कंप मच गया जब वजीरगंज पुलिस ने दो ऐसे युवकों को धर दबोचा जो अवैध असलहा बेचने की फिराक में घूम रहे थे। पकड़े गए तस्करों के पास से एक 315 बोर का तमंचा, 20 जिंदा कारतूस, चाकू और उनकी मोटरसाइकिल बरामद की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय हथियार तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

चेकिंग के दौरान भिड़े तस्कर, पलभर में घेराबंदी

डीसीपी कमलेश दीक्षित ने बताया कि वजीरगंज कोतवाली के उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह कुशवाहा अपनी टीम के साथ शहीद स्मारक क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए चेकिंग कर रहे थे। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक अवैध हथियार बेचने आ रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत क्षेत्र की घेराबंदी की। कुछ ही मिनटों में संदिग्ध मोटरसाइकिल आती दिखी और पुलिस ने उसे रोककर दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया।

थैले में छिपा था असलहे का जखीरा

तलाशी लेने पर एक थैले से 315 बोर का अवैध तमंचा, 20 कारतूस और चाकू बरामद हुआ।पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों युवक किसी खरीदार से मिलने और हथियार बेचने की तैयारी में थे।

गिरफ्तार तस्करों के नाम हारिश खान, निवासी हाजीपुर, थाना इमलिया सुल्तानपुर, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: मुंगफली मंडी, वजीरगंज, मोहम्मद जीशान, निवासी हरिहरपुर, थाना महमूदाबाद, जिला सीतापुर, वर्तमान पता: रहीमनगर, मड़ियांव है। दोनों शहर में सक्रिय होकर अवैध असलहे की सप्लाई कर रहे थे।

अवैध हथियार नेटवर्क पर बड़ा झटका

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार वे कहां से लाते थे और किसे बेचने जा रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी किसी बड़े सप्लायर गिरोह के संपर्क में थे।वजीरगंज पुलिस की सतर्कता से राजधानी में होने वाली बड़ी आपराधिक वारदात टल गई। शहीद स्मारक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दो तस्करों का रंगे हाथ पकड़ा जाना पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
गृहस्थ आश्रम : जीवन-दर्शन का स्वर्णिम मध्यस्थ
संजीव सिंह बलिया! गृहस्थ आश्रम : भारतीय जीवन-दर्शन का केंद्रबिंदु भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रवाह हजारों वर्षों से ऐसे चलता आया है, मानो हिमालय की शाश्वत शृंखलाओं से निकली कोई दिव्य नदी हो—कभी शांत, कभी प्रचण्ड, परन्तु सदैव जीवनदायिनी। इस परम्परा में गृहस्थ आश्रम कभी न तो उपेक्षा का विषय रहा है, न ही निन्दा का। भारतीय मानस समझता रहा है कि जीवन केवल संन्यास की पथरीली कंदराओं में ही नहीं, बल्कि गृहस्थी के दीप-स्तंभों में भी वैसे ही प्रकाशित होता है जैसे किसी मन्दिर की ज्योति में ईश्वर का तेज। भारत के ऋषि-कुल को देखें तो प्रतीत होगा कि हमारा समाज वास्तव में “ऋषियों की संतान” है। लगभग प्रत्येक ऋषि—अत्रि, वशिष्ठ, कश्यप, याज्ञवल्क्य—सभी गृहस्थ थे; उनकी ऋचाएँ, ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म की ऊँचाइयाँ गृहस्थ जीवन की गोद में ही पलकर विराटता प्राप्त कर सकीं। सोलह संस्कारों में विवाह को प्रमुख इसलिए कहा गया कि यह न केवल एक वैयक्तिक संस्कार था, बल्कि सम्पूर्ण समाज के संतुलन का आधार-स्तंभ था—मानो मनुष्य-जीवन का वह द्वार जहाँ से कर्तव्य, प्रेम, त्याग और सृजन सब मिलकर प्रवेश करते हों। सनातन वैदिक धर्म ने मनुष्य-जीवन को सौ वर्ष का पूर्ण वृत्त मानकर उसे चार आश्रमों में विभाजित किया—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। यह विभाजन मात्र आयु-क्रम नहीं था; यह जीवन का एक चतुर्ऋतु-चक्र था—ब्रह्मचर्य वसंत की तरह ज्ञान और उत्साह का; गृहस्थ ग्रीष्म की भाँति कर्म, तप और दायित्व का; वानप्रस्थ शरद की तरह मन्द, उज्ज्वल और अनुभवों का; और संन्यास हेमंत की तरह निर्मल, शांत और मोक्षमार्ग का। सबको इन चारों से होकर गुजरना था ताकि व्यक्ति जीवन को सम्पूर्ण रूप में जी सके और अन्ततः समाज को अपनी परिपक्व प्रतिभा अर्पित कर सके। जो पंथ जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में ही संन्यास अनिवार्य कर बैठे—वे एक ओर सूखे हुए वृक्षों की तरह खड़े रहे, जिनकी जड़ें समाज की मिट्टी से कट गईं; और जब जड़ों का रस ही समाप्त हो जाए, तो वृक्ष कितने दिन टिक सकता है? फलतः ऐसे पंथ काल के थपेड़ों में विलीन हो गए। भारतीय इतिहास पर दृष्टि डालें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रवृत्ति और निवृत्ति किसी विशाल समुद्र में उठती-गिरती लहरों की तरह हैं—कभी प्रवृत्ति की ज्वार, तो कभी निवृत्ति का भाटा। वैदिक काल कर्म, यज्ञ और सामाजिक सक्रियता का युग था; उपनिषदकाल में निवृत्ति के बीज अंकुरित हुए—मौन, ध्यान, आत्मबोध शिखर की ओर बढ़े; बौद्ध काल में निवृत्ति ने वटवृक्ष का रूप ले लिया—विस्तार, गहराई और व्यापकता के साथ; और पुनः मुगल व आधुनिक युग में प्रवृत्ति ने अपनी जमीन वापस पा ली—कर्म, समाज, कुटुम्ब और राष्ट्र की चेतना उन्नत हुई। इस प्रकार भारत में प्रवृत्ति से निवृत्ति और निवृत्ति से प्रवृत्ति का आवागमन निरंतर चलता रहा—मानो सूर्य दिन में चमके और रात में चन्द्रमा; दोनों आवश्यक, दोनों पूरक। समाज ने मनुष्य को सामाजिक बनाया है; इसलिए समाज का ऋण चुकाए बिना संन्यास लेकर पलायन कर जाना भारतीय मनस्विता का मार्ग नहीं रहा। वन ही सत्य का एकमात्र द्वार नहीं—गृहस्थ का अन्न, गृहस्थ की अग्नि और गृहस्थ की करुणा से ही ऋषियों का वन-जीवन पोषित हुआ। गृहस्थ आश्रम बिना पानी के वह नदी होता, जिसमें न तो प्रवाह होता न जीवन। अतः संन्यास को भी वही व्यक्ति ग्रहण करता था जिसने गृहस्थ-धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया हो—तभी उसका संन्यास समाज के लिए प्रकाश-दीप होता था, पलायन नहीं। भारतीय जीवन-दर्शन कभी एकांगी नहीं रहा। उसने प्रवृत्ति और निवृत्ति, गृहस्थ और संन्यास, कर्म और ध्यान—सबको एक ही सूत्र में पिरोया। इससे सम्बंधित दृष्टांत महाभारत के वन पर्व में वर्णित है, जिसमें ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर को यह कहानी सुनाई थी। इसे कपोतोपाख्यान (कबूतर की कहानी) के नाम से जाना जाता है। यह कहानी धर्म, वैराग्य, और गृहस्थ धर्म के श्रेष्ठ आदर्शों को दर्शाती है -एक समय की बात है, एक अति सुंदर और गुणवान ऋषिकुमार थे, जो बचपन से ही विरक्त (दुनिया से मोह रहित) और तपस्वी स्वभाव के थे। वह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए वन में वास करते थे। उसी राज्य में एक राजकुमारी थी, जो अत्यंत रूपवती और धर्मात्मा थी। जब वह विवाह योग्य हुई, तो राजा ने उसका स्वयंवर आयोजित किया। देश-विदेश के अनेक राजकुमार और प्रतिष्ठित व्यक्ति उस स्वयंवर में उपस्थित हुए। राजकुमारी ने जब सभा में उपस्थित सभी लोगों को देखा, तो उसे कोई भी अपने योग्य नहीं लगा। तभी उसकी दृष्टि उस ऋषिकुमार पर पड़ी जो किसी कारणवश सभा में मौजूद थे। ऋषिकुमार का तेजस्वी रूप, शांत स्वभाव और वैराग्य से भरा व्यक्तित्व राजकुमारी को इतना भाया कि उसने लेशमात्र भी विचार किए बिना, उन ऋषिकुमार के गले में वरमाला डाल दी। यह देखकर पूरी सभा चकित रह गई, क्योंकि ऋषिकुमार तो वैरागी थे और विवाह के बंधन से दूर रहना चाहते थे। जैसे ही राजकुमारी ने ऋषिकुमार को वरमाला पहनाई, तो ऋषिकुमार को लगा कि उनका ब्रह्मचर्य भंग हो रहा है और वह सांसारिक मोह-माया के बंधन में फंस रहे हैं। राजकुमारी के चयन को स्वीकार न करते हुए, वह तत्काल उस स्वयंवर सभा से उठकर गहन वन की ओर भाग गए। राजकुमारी भी उनके पीछे भागी, लेकिन ऋषिकुमार वैराग्य की धुन में तेजी से आगे निकल गए और घने जंगल में अदृश्य हो गए। राजकुमारी ने जब ऋषिकुमार को भागते हुए देखा, तो वह अत्यंत दुखी हुई और राजा से कहा कि वह उसी ऋषिकुमार को पति के रूप में स्वीकार करेंगी। राजा अपनी बेटी के हठ के कारण चिंतित हुए और अपने मंत्री के साथ उस ऋषिकुमार को ढूंढने के लिए जंगल की ओर निकल पड़े। काफी देर तक भटकने के बाद भी वे ऋषिकुमार को नहीं ढूंढ पाए। राजा और मंत्री दोनों ही जंगल में रास्ता भटक गए और दिन ढलने लगा। वे भूख-प्यास से व्याकुल हो गए और थककर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठ गए। जिस पेड़ के नीचे राजा और मंत्री बैठे थे, उसी पर एक कबूतर (कपोत) अपनी पत्नी कबूतरी (कपोती) के साथ एक घोंसले में रहता था। जब कबूतरी ने नीचे राजा और मंत्री को ठंड से ठिठुरते और भूख से पीड़ित देखा, तो वह अपने पति कबूतर से बोली - "हे नाथ! ये दोनों अतिथि हैं और भूख-प्यास से व्याकुल हैं। अतिथि का सत्कार करना गृहस्थ का परम धर्म है। हमारे पास इन्हें देने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन हमें किसी भी प्रकार से इनकी सेवा करनी चाहिए।" कबूतर, जो धर्मात्मा और परम ज्ञानी था, अपनी पत्नी के धर्मनिष्ठ विचार से अत्यंत प्रसन्न हुआ और बोला -"तुम धन्य हो प्रिये! आज तुमने मुझे गृहस्थ धर्म का सच्चा महत्व समझा दिया।" सबसे पहले, कबूतर पास से सूखी टहनियाँ और घास लाकर लाया और एक जगह पर आग जलाई, ताकि राजा और मंत्री ठंड से बच सकें। फिर कबूतर ने राजा से कहा - "हे अतिथि! मैं आपका सत्कार कैसे करूँ? मेरे पास आपको खिलाने के लिए कोई अन्न नहीं है। इसलिए, मैं स्वयं ही आपकी क्षुधा शांत करने के लिए अपने शरीर की आहुति देता हूँ। आप मुझे पकाकर अपनी भूख मिटाइए।" यह कहकर, वह धर्मात्मा कबूतर बिना किसी संकोच के धधकती आग में कूद गया और अपने प्राणों का त्याग कर दिया। राजा और मंत्री यह देखकर बहुत दुखी और शर्मिंदा हुए। अभी उनकी भूख पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। तब कबूतरी ने अपने पति के पदचिह्नों पर चलते हुए राजा से कहा - "महाराज! मेरे पति ने अतिथि धर्म का पालन किया है। मैं भी उनके मार्ग पर चलते हुए आपकी सेवा करना चाहती हूँ। मेरी देह भी आपकी क्षुधा शांत करने में सहायक हो।" और कबूतरी भी तुरंत उस आग में कूद गई और अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। कबूतर दम्पत्ति के इस अभूतपूर्व आत्म-त्याग और अतिथि सत्कार को देखकर राजा और मंत्री की आँखें खुल गईं। उनकी भूख तो शांत हुई या नहीं, लेकिन उनका अहंकार और मोह पूरी तरह शांत हो गया। उन्होंने कबूतर दम्पत्ति के चरणों में सिर नवाया और उस स्थान को छोड़कर वापस लौट गए। ऋषि माकंदव्य ने युधिष्ठिर से कहा - सन्यासी हो तो उस ऋषिकुमार की तरह जिसने राज्य-वैभव और राजकुमारी के प्रेम को ठुकराकर वैराग्य को सर्वोपरि माना और मोह से बचने के लिए जंगल में भाग गया। गृहस्थ हो तो कबूतर दम्पत्ति की तरह जिन्होंने अपने जीवन का मोह त्यागकर, केवल 'अतिथि सत्कार' और 'गृहस्थ धर्म' के पालन को ही अपना परम कर्तव्य समझा। यह कथा सिखाती है कि सच्चा त्याग वैराग्य में भी है और निःस्वार्थ सेवा भाव से युक्त गृहस्थ जीवन में भी है। ऋषिकुमार का त्याग विरक्ति का प्रतीक है, जबकि कबूतर दम्पत्ति का त्याग परमार्थ (दूसरों के हित) का प्रतीक है। यह वह भूमि है जहाँ कृषक हल चलाते समय भी ऋग्वेद की ऋचाएँ गाता है, और संन्यासी गहन समाधि में भी “सर्वभूतहिते रतः” का संकल्प लेता है। अतः भारत की आत्मा का सन्देश स्पष्ट है—जीवन को सम्पूर्णता में जियो, प्रत्येक आश्रम का सम्मान करो, और समाज को कुछ दिए बिना किसी एक मार्ग को श्रेष्ठ कहकर दूसरे को तुच्छ मत समझो। गृहस्थ हो या संन्यासी—दोनों भारतीय संस्कृति के दो पंख हैं; एक भी टूट जाए तो उड़ान अधूरी रह जाती है। ©® डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
विकसित भारत @2047 राज्य-स्तरीय कार्यशाला में आधुनिक तकनीक शिक्षा स्वच्छता और विकास का मॉडल-महापौर।

प्रयागराज—विकास और परिवर्तन की दिशा में अग्रणी-महापौर।

स्थान:डायरेक्टरेट ऑफ अर्बन लोकल बॉडीज सेक्टर-7 गोमती नगर एक्सटेशन लखनऊ

संजय द्विवेदी प्रयागराज।विकसित UP for विकसित भारत के अन्तर्गत एक राज्य-स्तरीय परामर्श कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।सुबह 9:30 बजे पंजीकरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियो नगर निकायो के जनप्रतिनिधियो राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानो के विशेषज्ञो तथा विभिन्न नगर निगमों के आयुक्तो ने प्रतिभाग किया।इस महत्वपूर्ण कार्यशाला की अध्यक्षता नगर विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा ने किया।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य:-उत्तर प्रदेश की शहरी व्यवस्था को विकसित भारत 2047 के अनुरूप ढालना था—स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

ई-गवर्नेंस शहरी गतिशीलता एवं ट्रांजिट सिस्टम शहरी सततता इंटीग्रेटेड अर्बन प्लानिंग इन बिन्दुओ पर विस्तृत चर्चा करते हुए सतत समावेशी और तकनीक आधारित नगर विकास का रोडमैप तैयार किया गया।

विशेष सत्र:महापौर उमेश चन्द्र गणेश केसरवानी प्रयागराज का सम्बोधन।

महापौर ने विशेष अतिथि वक्ता के रुप में उपस्थित रहे अपने सम्बोधन में कहा—प्रयागराज आज परम्परा तकनीक शिक्षा स्वच्छता और नवाचार का ऐसा आदर्श संगम बन चुका है जो विकसित भारत 2047 की मजबूत नीव रखता है।

प्रयागराज—विकास और परिवर्तन की दिशा में अग्रणी

महापौर ने शहर में हुए तीव्र बदलावो का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रयागराज ने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर यह सिद्ध किया है कि संकल्प और योजना के साथ कोई भी शहर राष्ट्रीय आदर्श बन सकता है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया—

शिक्षा में क्रांति:ऑपरेशन कायाकल्प

महापौर ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प योजना के माध्यम से प्रयागराज के प्राथमिक विद्यालयों का अभूतपूर्व कायाकल्प किया गया है—

प्राथमिक विद्यालयो में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए।

आधुनिक तकनीक आधारित डिजिटल लर्निंग सिस्टम शुरू किया गया।

बच्चो के लिए स्वच्छ शौचालय RO पेयजल फर्नीचर खेल सामग्री व पूर्णत:विकसित परिसर तैयार किए गए।

सभी विद्यालयों को सुरक्षित आकर्षक और तकनीकी रूप से सक्षम मॉडल स्कूल के रूप में बदला गया।

उन्होने कहा कि प्रयागराज का हर विद्यालय अब आधुनिक भारत के बच्चो के सपनो को पंख देने वाला ज्ञान मंदिर बन चुका है।

महा माघ मेला 2026 : विश्व स्तरीय आयोजन की तैयारी

उन्होंने कहा कि प्रयागराज आगामी महा माघमेला 2026 हेतु—

अत्याधुनिक यातायात व्यवस्था

नवाचार आधारित सुविधाएं

पर्यावरण-मित्र तकनीक

को अपनाते हुए वैश्विक स्तर की तैयारियाँ कर रहा है।

स्वच्छता एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में प्रयागराज ने देश में 12वाँ स्थान प्राप्त किया।

वॉटर गंगा टाउन सहित कई राष्ट्रीय अवार्ड।मियावाकी तकनीक से सिर्फ 1 वर्ष में संपूर्ण शहर में घने वन।

SBM कंट्रोल रूम से 24×7 स्वच्छता निगरानी।पुराने कूड़े के पहाड़ो का वैज्ञानिक निस्तारण।धरोहर व सौन्दर्य संवर्धन.हेरिटेज मोहल्ला. साहित्य तीर्थ पार्क.रामसेतु एवं आधुनिक प्रकाश व्यवस्था.विश्व की सबसे बड़ी रंगोली के माध्यम से वसुधैव कुटुम्बकम् का सन्देश

तकनीक आधारित नगर प्रबन्धन.IIT की सोच पर आधारित नवाचार.स्मार्ट सिटी के अंतर्गत डिजिटल शासन.ई-गवर्नेंस से त्वरित नागरिक सेवाएं.कार्यशाला के तकनीकी सत्र.कार्यक्रम में विभिन्न तकनीकी और विषयगत सत्रो का आयोजन हुआ—1-स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ई-गवर्नेस 2-अर्बन मोबिलिटी एवं ट्रांज़िट सिस्टम 3-अर्बन सस्टेनेबिलिटी4-इंटीग्रेटेड अर्बन प्लानिंग.इन सत्रों में NIUA. UNEP.WRI India.NITI Aayog.Smart City Mission.नगर विकास विभाग विभिन्न नगर निगमो के आयुक्त व विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियां दी।

महापौर का समापन सन्देश-

अपने सम्बोधन का समापन करते हुए महापौर ने कहा- विकसित भारत 2047 का सपना केवल योजनाओ से नही बल्कि हर शहर में वास्तविक परिवर्तन से पूरा होगा।प्रयागराज साबित कर रहा है कि यदि नीयत नीति और तकनीक साथ चले तो विकास अपने आप रास्ता बना लेता है।

बखिरा पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुये चोरी के 02 मामले से सम्बन्धित अभियुक्त को किया गया गिरफ्तार

रमेश दूबे

अभियुक्त के पास से एक

अदद चोरी की मोटरसाइकिल, गैस सिलेन्डर, 2000 रु0 नगद बरामद

पुलिस अधीक्षक जनपद संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह द्वारा जनपद संतकबीरनगर में अपराध एवं अपराधियो के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्वदवन सिंह के निकट पर्यवेक्षण में थाना बखिरा पुलिस द्वारा आज दिनाँक 29.11.2025 को 01 अभियुक्त नाम पता भालचन्द्र उर्फ सगेन्द्र उर्फ सगेदू पुत्र बनारसी निवासी ग्राम बिहारे थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर को चोरी की एक अदद मोटरसाइकिल, गैस सिलेन्डर, 2000 रु0 नगद बरामद करते हुए नन्दौर के पास से गिरफ्तार किया गया ।

घटना का संक्षिप्त विवरण-

प्रथम घटना- दिनाँक 30.09.2025 को वादी श्री श्यामकरन पुत्र श्री बिहारी निवासी थाना बिहारे जनपद संतकबीरनगर द्वारा थाना बखिरा पर दिनाँक 04.09.2025 को वादी के घर में चोरी हो जाने के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र दिया गया था । प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना बखिरा पर मु0अ0सं0 360/2025 धारा 351(2),115(2),305 बीएनएस पंजीकृत किया गया था ।

द्वितीय घटना- दिनाँक 28.11.2025 को वादी श्री धर्मेन्द्र चौधरी पुत्र श्री स्व0 रामनरेश चौधरी निवासी सुन्दरपुर बजहां थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर द्वारा थाना बखिरा पर दिनाँक 27.11.2025 को वादी की मोटरसाइकिल देवकली चौराहा से चोरी हो जाने के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र दिया गया था । प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना बखिरा पर मु0अ0सं0 461/2025 धारा 303(2) बीएनएस पंजीकृत किया गया था ।

गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पताः-

भालचन्द्र उर्फ सगेन्द्र उर्फ सगेदू पुत्र बनारसी निवासी ग्राम बिहारे थाना बखिरा जनपद संतकबीरनगर ।

बरामदगी का विवरणः- चोरी की एक अदद मोटरसाइकिल, गैस सिलेन्डर, 2000 रु0 नगद।

गिरफ्तार करने वाले पुलिस बल का विवरणः-* उ0नि0 श्री राजकुमार मिश्रा, हे0का0 मनोज यादव, का0 अमित कुमार यादव ।

डॉ. चिन्मय पांड्या का भव्य स्वागत

करनैलगंज। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख, देव संस्कृति विश्व विद्यालय के कुलपति विचार कान्ति अभियान के धर्म ध्वजवाहक डाॅ.चिन्मय पांड्या के प्रथम आगमन पर नगर के संतोषी माता मंदिर पर भव्य स्वागत किया गया। गायत्री शक्ति पीठ सकरौरा के महंत पंडित तिलक राम तिवारी एवं सुशीला सिंह ने चन्दन रोली लगाकर स्वागत किया। गायत्री परिवार सकरौरा के कार्यकर्ता ने सैकडौ संख्या मे एकत्र होकर फूल माला से उनका भव्यता से स्वागत किया।

इस मौके पर बाल गोपाल वैश्य, माखनलाल सिंह, इंद्रमणि तिवारी, ज्वाला पसाद तिवारी, दिनेश कुमार सिंह, शिव पूजन, मुकेश वैश्य, मुकेश सोनी, अखिल, सुमित मिश्रा, कन्हैयालाल, श्रीराम सोनी, आशीष सोनी, रतन सोनी, अनूप जयसवाल, रिचा तिवारी, मन्जू तिवारी, मन्जू यादव, हरि कुमार, जितेन्द्र, सूर्यांश तिवारी आदि गायत्री परिवार के कार्यकर्ता शामिल रहे।

श्रीमद् भागवत कथा के पूर्व प्रदेश के मुखिया ने दी शुभकामनाएं








संजय द्विवेदी, प्रयागराज।यमुनानगर अन्तर्गत विधान सभा मेजा क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नही बल्कि आत्मा को ईश्वर की ओर ले जाने वाला महान आध्यात्मिक उत्सव है।यह जीवन भक्ति तथा जीवन मूल्यों का अनन्त प्रकाश देता है जिसने सदियो से मानव को धर्म सत्य प्रेम संयम और करुणा का संदेश दिया है।




मुख्यमंत्री ने यह विचार एडवोकेट हाईकोर्ट एवं प्रदेश सह संयोजक(विधि विभाग) भाजपा उत्तर प्रदेश सुशील कुमार मिश्र को सम्बोधित शुभकामना सन्देश में व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होने कहा कि जगद्गुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज जैसे सन्तो की वाणी केवल शास्त्रो के रूप में अध्ययन नही की जाती बल्कि अनुभूति बनकर हृदय में उतरती है।ऐसी दिव्य कथा मानव जीवन को सतमार्ग पर चलने का मार्ग प्रशस्त करता है।तथा भक्ति एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी प्रदान करता है।मुख्यमंत्री ने अपेक्षा जताई कि दुर्गावती इण्टर नेशनल स्कूल एंड कॉलेज गोसौरा कला(मेजा रोड प्रयागराज)में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा प्रदेशवासियो के जीवन में ज्ञान शांति और मंगल का प्रकाश एवं सतमार्ग पर चलने का सन्देश प्राप्त हो।और उन्होने वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओ से आह्वान किया कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम धर्म और निष्काम कर्म के सन्देश को जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र की समृद्धि में अपना अहम योगदान दे।




अंत में उन्होने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हो तथा सभी उपस्थित श्रद्धालुओ पर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा निरन्तर बनी रहे।भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

25 गरीब परिवारो को नही मिल पा रहा न्याय.प्रशासन लाचार

संजय द्विवेदी, प्रयागराज। यमुनानगर अन्तर्गत में तहसील बारा क्षेत्र के गौहनिया बाई पास पर भारतीय किसान यूनियन(किसान)का सत्याग्रह आन्दोलन 12 वें दिन भी जारी रहा।भाकियू(किसान)ने छह सूत्रीय मांगों को लेकर सत्याग्रह प्रारम्भ किया था।जिसमें मुख्य रूप से जल जीवन मिशन- हर घर नल से जल- योजना में भ्रष्टाचार की जांच एवं गरीबो को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाने की मांगे थी।दो गांवों की सीमा पर एक बुजुर्ग महिला की दबंगई से जहां 25 दलित परिवारो को उनके ही बैनामे की जमीन पर कब्जा नही मिल पा रहा है।वही इस मामले बुजुर्ग महिला की दबंगई के प्रशासन भी लाचार हो गया है।

सत्याग्रह के 12 वें दिन शनिवार को बारा तहसील के कानूनगो सुभाष त्रिपाठी ने दो गांवों गडरा व टिकरी तालुका कंजासा का सीमांकन कर वहां पत्थर भी गड़वा दिया लेकिन स्थानीय दबंगो के कारण 25 परिवार अपनी बैनामे की भूमि पर कब्जा नहीं कर पा रहे है।भाकियू किसान की मांग पर एसीपी कौंधियारा ने हस्तक्षेप किया।गरीबो को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाने के लिये एसओ घूरपुर ने भी आश्वासन दिया।लेकिन अभी तक स्थानीय एक बुजुर्ग महिला की दबंगई के कारण पुलिस प्रशासन भी लाचार हो गया लगता है।

भारतीय किसान यूनियन (किसान)के पूर्वांचल प्रभारी राजीव चन्देल ने कहा कि 25 दलित समाज के गरीब परिवारो को जब तक न्याय नही मिलेगा तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा। 2 दिसम्बर तक फैसला न हुआ तो सैकड़ो की संख्या में पीड़ित किसान पैदल लखनऊ मुख्यमंत्री से फरियाद करने जायेगे सत्याग्रह आन्दोलन प्रदेश महासचिव विक्रम सिंह मण्डल महासचिव धर्मेन्द्र सिंहावलोकन है पटेल मण्डल अध्यक्ष मंजूराज आदिवासी मंडल उपाध्यक्ष मनोरमा आदिवासी जिलाध्यक्ष जेपी यादव जिला संगठन मंत्री शिव शंकर सिंह मीडिया प्रभारी पुष्पराज सिंह रमाकांत निषाद जिलाध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ श्याम सिंह बघेल अधिवक्ता दिनेश निषाद सीता आदिवासी सेवा लाल बलराम बंसल सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे।

किसानों को आर्थिक रूप से “समृद्ध’ कर उत्तर प्रदेश को सशक्त बना रही योगी सरकार
* धान कॉमन की 2369 रुपये तथा (ग्रेड-ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल की दर से हो रही खरीद

* बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये प्रति कुंतल किया गया है निर्धारित, यूपी के 33 जनपदों में ही हो रही खरीद

लखनऊ। योगी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से ‘समृद्ध’ कर उत्तर प्रदेश को सशक्त बना रही है। सीएम योगी के निर्देश के उपरांत 48 घंटे के भीतर धान व बाजरा किसानों को किया जा रहा भुगतान इसका उदाहरण है। पहली अक्टूबर से धान खरीद शुरू हुई थी, तबसे 28 नवंबर तक धान किसानों को 1868.35 करोड़ व बाजरा किसानों को 263.03 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यही कारण है कि योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों की बदौलत अपनी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त करने के लिए किसान फसल की बिक्री राजकीय क्रय केंद्रों पर कर रहे हैं। क्रय केंद्रों पर 17 फीसदी नमी तक का धान खरीदा जा रहा है।

*धान किसानों को 1868.35 करोड़ रुपये का भुगतान*

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर समय-समय पर धान खरीदारी की समीक्षा हो रही है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, खाद्य व रसद विभाग लगातार इसकी मॉनीटरिंग कर रहा है। पहली अक्टूबर से 28 नवंबर तक के मध्य सरकारी क्रय केंद्रों पर 1.40 लाख से अधिक किसानों ने धान बिक्री की। इसके एवज में किसानों को अब तक 1868.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बचे किसानों के लिए भी सरकार द्वारा तत्काल भुगतान की प्रक्रिया चालू है।

*बाजरा किसानों को 263.03 करोड़ का किया गया भुगतान*

यूपी में श्री अन्न की खरीद भी पहली अक्टूबर से जारी है। श्री अन्न के अंतर्गत बाजरा किसान भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी फसल को लेकर जा रहे हैं। 28 नवंबर तक लगभग 22000 किसानों को 263.03 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष बचे किसानों को भी तत्काल भुगतान करने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। बाजरा की बिक्री के लिए 64 हजार से अधिक किसानों ने पंजीकरण भी करा लिया है।  
बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2775 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। बाजरा खरीद सिर्फ 33 जनपदों में ही हो रही है। इसके लिए 281 क्रय केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है। धान खरीद (कॉमन) 2369 रुपये तथा (ग्रेड-ए) 2389 रुपये प्रति कुंतल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हो रही है।
सीएम योगी ने हाल में बैठक लेकर अधिक से अधिक किसानों से क्रय केंद्रों पर धान की खरीद कराने का निर्देश दिया था। इसके पीछे उनकी मंशा अधिक से अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ दिलाना था। उत्तर प्रदेश में धान खरीद प्रणाली को लेकर योगी सरकार की मंशा धरातल पर मजबूती से दिखाई दे रही है। ई-पॉप मशीनों से बायोमीट्रिक सत्यापन, पंजीकृत किसानों से ही खरीद, बिचौलियों की समाप्त होती भूमिका और 48 घंटे में भुगतान आदि ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है। रिकॉर्ड स्तर की धान खरीद, राइस मिलों को मिली राहत और किसानों के लिए की गई सुविधाओं ने उनकी आमदनी, भरोसे और आत्मनिर्भरता को नई दिशा दी है।
धान क्रय एवं खाद की उपलब्धता हेतु नवीन गल्ला मण्डी तथा सहकारी समिति केशवपुर पहड़वा का किया औचक निरीक्षण

गोण्डा। 29 नवम्बर,2025 जिलाधिकारी गोण्डा प्रियंका निरंजन ने आज जिले में धान क्रय एवं खाद उपलब्धता की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करने हेतु नवीन गल्ला मण्डी, बहराइच रोड बड़गांव तथा बहु उद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि०, केशवपुर पहड़वा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों की जानकारी प्राप्त की।

नवीन गल्ला मण्डी में धान बेचने आए किसानों से जिलाधिकारी ने पूछा कि उन्हें क्रय केंद्र पर किसी प्रकार की दिक्कत या परेशानी का सामना तो नहीं करना पड़ा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि धान खरीद प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सुगम तरीके से संचालित हो, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए तथा तौल एवं भुगतान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

इसके पश्चात जिलाधिकारी ने बहु उद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि०, केशवपुर पहड़वा का निरीक्षण कर वहां धान क्रय की स्थिति एवं खाद की उपलब्धता की विस्तृत जानकारी एआर कोऑपरेटिव तथा केंद्र प्रभारी/सचिव से प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि केंद्र पर खाद उपलब्ध नहीं थी। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि जिले के सभी सहकारी समितियों एवं क्रय केंद्रों पर खाद की पर्याप्त उपलब्धता समय से सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना पड़े, यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने निर्देशित किया कि खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक कदम तत्काल प्रभाव से उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी केंद्र पर खाद की कमी पाई जाती है या किसानों को परेशानी होती है, तो दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कृषि से संबंधित सभी व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर बनाने के निर्देश दिए तथा अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं एवं निर्देशों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

निरीक्षण के दौरान जिला खाद्य विपणन अधिकारी एनके पाठक, एआर कोऑपरेटिव रवि शंकर चौधरी तथा यूपीपीसीएफ प्रबंधक जितेंद्र वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

आजमगढ़: शताब्दी वर्ष पूरा होने पर भाकपा ने दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन निकाला जुलूस किया जन सभा
आजमगढ़।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आजमगढ़ ने पार्टी के शताब्दी वर्ष पर अपने दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन विशाल रैली और सभा की।जिसकी अध्यक्षता हरिगेन राम और संचालन जिला सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय ने किया। भाकपा के कार्यकर्ता जिले के कोने कोने से जजी मैदान में एकजुट होकर लाल झंडो और बैनरों के साथ पूरे उत्साह के साथ जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट का चक्रमण किया।उसके बाद रैली सभा में बदल गई। सभा को संबोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव अरविंद राज स्वरूप ने कहा कि भाकपा की स्थापना कानपुर में हुई थी।कानपुर के साथ आजमगढ़ का नाम लिया जाता है।स्वतंत्रता सेनानी जयबहादुर सिंह,झारखंडे राय,डॉ जेड ए अहमद,दशरथ राय शास्त्री,बच्चे लाल शास्त्री,मुंशी नर्वदेश्वर लाल जैसे लोगों की कुर्बानियां की गाथा आज भी सुनाई देती है।स्वरूप ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार को अब शहीद याद आते हैं।जबकि बीजेपी का शहीदों से कोई लेना देना नहीं है। एस आई आर कराकर सरकार गरीबों को वोट के अधिकार से वंचित करना चाहती है। एस आई आर का समय बहुत सीमित है,जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। स्वरूप ने आगे कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी विचारों की पार्टी है।हम। सौ साल से पूंजीपतियों के खिलाफ गरीबों के हक,हुकूक के लिए संघर्ष किया है और करती रहेगी। भगत सिंह के भांजे प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारें भगत सिंह से डरती हैं।क्योंकि भगत सिंह जाति,धर्म,संप्रदाय और पूंजीवादी विचारधारा के कट्टर विरोधी थे।आज सरकारों को कार्पोरेट चला रहा है।देश की सकल पूंजी पर चंद पूंजीपतियों का कब्जा है।भगत सिंह मजदूरों,किसानों,महिलाओं, विद्यार्थियों,नवजवानों के हक अधिकार के बारे में खुलकर बोला था।जगमोहन सिंह ने कहा कि आजमगढ़ में हमारा आगमन पहली बार हुआ है।बृहस्पतिवार से हम कैफ़ी आज़मी जन्म स्थान मिज़वा,शहीद द्वार, शिब्ली मंजिल,राहुल सांकृत्यायन जन्म स्थान पन्दहा,निजामाबाद ऐतिहासिक गुरुद्वारा और शेख मसूद इंटर कॉलेज फरिहा में मेरा जितना आदर और सत्कार किया गया।उसके लिए मै साथी हरिमंदिर पाण्डेय का आभार करता हूं।जिनकी वजह से आजमगढ़ में हमारा आगमन हुआ। इस सभा के माध्यम से जिले के विकास से जुड़ी बीस सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी आजमगढ़ को दिया गया। इस सभा को पार्टी प्रदेश सचिव मंडल सदस्य हामिद अली,उप्र किसान सभा अध्यक्ष इम्तेयाज बेग,खेत मजदूर नेता खरपत्तू राजभर,रामाज्ञा यादव,गंगादीन, मो शेख औबेदुल्ला,मुजम्मिल जाहिद अली,राम अवध यादव,तेज़बहादुर मौर्य,मंगलदेव यादव, जियालाल आदि लोगों ने सभा को संबोधित किया।