मगध विश्वविद्यालय में वैचारिक टकराव गहराया, जातीय उन्माद और हिंदू विरोधी विचारों के प्रसार के आरोप

गया-बोधगया। मगध विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध कॉलेजों में हाल के दिनों में हो रही कुछ गतिविधियों ने शैक्षणिक वातावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ व्यक्तियों द्वारा वामपंथी विचारधारा के नाम पर छात्रों के बीच जातीय उन्माद फैलाने तथा हिंदू विरोधी सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संतुलन प्रभावित होता प्रतीत हो रहा है, जो चिंता का विषय है।एबीवीपी के छात्र नेता सूरज सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान के केंद्र होते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में सुनियोजित ढंग से छात्रों को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर छात्रों को बांटना तथा हिंदू आस्था, परंपरा एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध नकारात्मक वातावरण तैयार करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल छात्र एकता कमजोर होती है, बल्कि उनके शैक्षणिक विकास और भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सूरज सिंह ने आगे आरोप लगाया कि कुछ तत्व एकतरफा विचारधारा और भ्रामक प्रचार के माध्यम से छात्रों व ख़ास कर छात्राओं को गुमराह कर रहे हैं, जिससे परिसर में अविश्वास और तनाव का माहौल बनता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के मंदिर में किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति या वैचारिक उन्माद को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सूरज सिंह ने सभी छात्र संगठनों, शिक्षकों और समाज के जिम्मेदार नागरिकों से भी अपील की कि वे छात्रों को जोड़ने, आपसी सद्भाव बढ़ाने और सकारात्मक, समावेशी एवं शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में कार्य करें।

इधर छात्र समुदाय के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई छात्रों का मानना है कि विचारों की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है, लेकिन किसी भी विचारधारा के नाम पर समाज या किसी धर्म विशेष के खिलाफ माहौल बनाना तथा छात्रों को विभाजित करना शिक्षा की मूल भावना के विपरीत है।

गुस्साए आसपास गांवों के सैकड़ो ग्रामीणों ने पुल को लेकर हुए लामबंद

दर्जनों गांव के ग्रामीण आगामी चुनाव में वोट का करेंगे बहिष्कार- पुल नहीं तो वोट नहीं*

पीयूष तिवारी
अहिरोरी - जनपद हरदोई में जनप्रतिनिधियों द्वारा बराबर कागज पर विकास की तो गंगा बहाई जा रही है लेकिन धरातल पर कुछ ओर ही नजर आ रहा है बता दे विकासखंड अहिरोरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत चठिया मजरा ढपरापुर गांव के बाहर निकली घरेरा नदी पर आजादी के बाद अभी तक ग्रामीणों को पुल नसीब नहीं हुआ है जिसका दंश आज भी वहां के इलाकाई ग्रामीण झेलने को मजबूर है। ढ़परापुर,शोभे पुरवा,पत्तीपुर,चठिया,बांनेकुइया,चाहलैहिया,रघुनाथपुर,सुनौवा, जलालपुर,पत्तीपुर डीह सहित दर्जनों गांव के गुस्साए सैकड़ो ग्रामीणों ने सोमवार को लामबंद होकर पुल निर्माण की मांग उठाई पुल नहीं तो वोट नहीं। प्रधान कृष्ण कुमार मौर्य,ब्रह्मशरण मिश्रा, मुकेश यादव,रजनीश,कृष्णपाल रविंद्र मिश्रा,राजकुमार,कुलदीप सहित सैकड़ो ग्रामीणों ने पुल निर्माण को लेकर अपना दर्द बयां किया है ग्रामीणों का कहना है बरसात के समय इस मार्ग से दर्जनों गांव के ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो जाता है क्योंकि यह मार्ग ढ़परापुर गांव से सीधे प्रताप नगर सीतापुर मार्ग को जोड़ता है जिसकी दूरी गांव से करीब 1 से 2 किलोमीटर बताई है ग्रामीणों का कहना है यहां के जिम्मेदार सांसद,विधायक जनप्रतिनिधियों से कई बार कहां गया लेकिन अनसुनी कर देते।
*गुस्साए ग्रामीण विधानसभा,लोकसभा चुनाव में वोट का करेंगे बहिष्कार*
गुस्साए ग्रामीणों ने इस बार मन बना लिया है इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र के सारे ग्रामीण लामबंद होकर आगामी विधानसभा,लोकसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे।
*शीघ्र ही समस्या का समाधान कराया जाएगा- क्षेत्रीय विधायक प्रभास कुमार*
क्षेत्रीय विधायक प्रभास कुमार ने कहा यह मामला मेरे संज्ञान में है शीघ्र ही समस्या का समाधान कराया जाएगा।
*रोड निर्माण कार्य का प्रस्ताव भेजा गया है*
बालामऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामपाल वर्मा ने कहा प्रताप नगर सीतापुर मार्ग पुलिस चौकी से घरेरा नदी तक रोड निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है प्रस्ताव स्वीकृत होते ही रोड निर्माण कार्य कराया जाएगा। जिससे वहां के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
पश्चिम एशिया संकट का असर : हीलियम, एल्युमीनियम से लेकर मेडिकल उपकरण पर भी असर
अमरेश द्विवेदी

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को शांत करने के लिए किए जा रहे सीजफायर प्रयासों में अभी भी बड़ा गतिरोध बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ इसे “स्टैंडस्टिल” यानी ठहराव की स्थिति बता रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यस्थ देशों (जैसे पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र) की कोशिशों से अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी सीजफायर प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और रणनीतिक समुद्री रास्ते (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) खोलने की बात शामिल थी।
हालांकि, ईरान ने इससे पहले कई छोटे और अस्थायी सीजफायर प्रस्तावों को भी खारिज कर दिया है और कहा है कि वह केवल दीर्घकालिक और ठोस समझौते पर ही बात करेगा।
इस संघर्ष का असर केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर भी गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से जुड़े तनाव के कारण तेल और गैस बाजार पहले ही प्रभावित हैं, लेकिन अब इसका असर कई महत्वपूर्ण औद्योगिक संसाधनों पर भी पड़ने लगा है।
ईरान से जुड़े तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर हीलियम की आपूर्ति पर देखा जा रहा है।
कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े हीलियम उत्पादकों में से एक है, ने कुछ औद्योगिक घटनाओं और हमलों के बाद उत्पादन में अस्थायी रोक की घोषणा की है। इससे वैश्विक हीलियम सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
हीलियम प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का एक महत्वपूर्ण बाय-प्रोडक्ट है और इसका उपयोग कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में होता है, जैसे - सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, मेडिकल उपकरण (एमआरआई मशीन), स्पेस टेक्नोलॉजी और रॉकेट लॉन्चिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स कूलिंग सिस्टम आदि।
विशेषज्ञों का मानना है कि हीलियम की कमी से चिप निर्माण उद्योग प्रभावित हो सकता है, जिससे स्मार्टफोन, लैपटॉप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों की प्रगति धीमी पड़ सकती है।
इसके अलावा एल्युमीनियम सप्लाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी देशों का वैश्विक एल्युमीनियम उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है और किसी भी प्रकार की रुकावट से इसकी कीमतों में वृद्धि हो सकती है। एल्युमीनियम का उपयोग बड़े पैमाने पर पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण उद्योग में होता है। सप्लाई बाधित होने से इन सभी क्षेत्रों में लागत बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है।
तेल और गैस आपूर्ति में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित है। गैसोलीन और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो यह वैश्विक मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकता है।
सेमीकंडक्टर और एआई इंडस्ट्री पहले से ही सप्लाई चेन चुनौतियों का सामना कर रही है। हीलियम और अन्य दुर्लभ गैसों की कमी से चिप निर्माण की गति धीमी हो सकती है। इसका असर सीधे तौर पर स्मार्टफोन निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो कई कंपनियों को अपने उत्पादन लक्ष्य में देरी करनी पड़ सकती है।
हीलियम की कमी का असर मेडिकल सेक्टर पर भी पड़ सकता है, क्योंकि एमआरआई मशीनों और अन्य हाई-टेक मेडिकल उपकरणों में इसका उपयोग जरूरी होता है। इसके अलावा स्पेस इंडस्ट्री में रॉकेट फ्यूल टैंक की सफाई और लॉन्चिंग प्रक्रियाओं में भी हीलियम का उपयोग होता है।
स्पेस कंपनियों के बढ़ते लॉन्च कार्यक्रमों के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कमी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में यह तनाव लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक सप्लाई चेन को गहराई से प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि कई कंपनियां पहले से ही संभावित कमी और कीमतों में वृद्धि को देखते हुए अपने प्रोडक्शन प्लान में बदलाव कर रही हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता फिलहाल ठहराव की स्थिति में है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद अब तक दूर नहीं हो पाए हैं। इस बीच वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, हीलियम, एल्युमीनियम और हाई-टेक उद्योगों पर असर बढ़ने की आशंका है।
स्थिति अगर जल्द नहीं सुधरी, तो इसका प्रभाव आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम उपभोक्ताओं तक महसूस किया जाएगा।
आजमगढ़:-भव्य आयोजन में मनी भगवान परशुराम जयंती, ब्राह्मण समाज ने किया व्यक्तित्व-कृतित्व का गुणगान

वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। फूलपुर तहसील क्षेत्र के अम्बारी पाण्डेय का पूरा में सोमवार को भगवान परशुराम की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। यह आयोजन एक शादी समारोह के दौरान ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद, तहसील फूलपुर इकाई के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के गणमान्य लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित सामाजिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और सत्य के प्रतीक भी थे। उनके जीवन से समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सदैव धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर पंडित देव नाथ पाण्डेय, केश भान पाण्डेय, सौरभ पाण्डेय, लोकेश पाण्डेय, पद्मेश पाण्डेय, त्रयम्बकेश्वर पाण्डेय, अंकित मिश्रा और मनीष तिवारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया और समाज में एकता एवं नैतिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिद्धेश्वर पाण्डेय ने की, जबकि संचालन पंडित देबनाथ पाण्डेय द्वारा किया गया। आयोजन के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को जयंती की शुभकामनाएं दीं।
कुल्हनामऊ में भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर भव्य प्रतिमा का अनावरण

जौनपुर। अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम के जन्मदिन के पावन अवसर पर जिले के कुल्हनामऊ चौराहे पर स्थापित 11 फीट ऊंची भगवान परशुराम की प्रतिमा का विधिवत पूजन-अर्चन एवं अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सर्व समाज के लोग उपस्थित रहे और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।कार्यक्रम का आयोजन मुरलीधर चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी समाजसेवी एवं उद्योगपति प्रमोद पाठक के संयोजन में किया गया। शाम शुरू हुए कार्यक्रम में 51बटुको द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना, आरती और परशुराम चालीसा का पाठ किया गया। आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई।इस मौके पर प्रमोद पाठक ने कहा कि भगवान परशुराम किसी एक समाज के नहीं बल्कि पूरे समाज के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि “भगवान को जातियों में बांटना गलत सोच है, वे सर्व समाज के लिए समान रूप से पूजनीय हैं।” कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों की सहभागिता इस संदेश को मजबूत करती दिखी।राजनीतिक चर्चाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, इसे किसी प्रकार के शक्ति प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने धर्म की रक्षा में भगवान परशुराम के योगदान पर प्रकाश डाला। प्रतिमा अनावरण के इस अवसर पर राजनीतिक सीमाओं से परे हटकर विभिन्न जन प्रतिनिधि एक साथ नजर आए। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा की कुल्हनामऊ का यह जमदग्निपुरम पार्क न केवल पर्यटन का केंद्र बनेगा बल्कि युवाओं को धर्म और पुरुषार्थ की सीख भी देगा वहीं विधायक बदलापुर ने सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि जनता स्वयं सही-गलत का निर्णय करेगी।आयोजन की सफलता में कई लोगों का योगदान रहा, जिसमें परमिशन से लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा तक विभिन्न स्तरों पर सहयोग मिला। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में इस स्थल को “परशुराम चौक” या “परशुराम पार्क” के रूप में विकसित करने की योजना है।कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों सहित हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया। इस मौके पर विधायक इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, मंत्री गिरीश चंद्र यादव, नगरपालिका अध्यक्ष मनोरमा मौर्या, उद्योगपति तथा वरिष्ठ समाजसेवी ज्ञानप्रकाश सिंह ,पूर्व ब्लाक प्रमुख राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पं श्रीपति उपाध्याय जिलाध्यक्ष भाजपा अजीत प्रजापति, पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह ,कुंवर मृगेंद्र सिंह समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
सीबीआई करेगी अस्मिता मिश्रा हत्याकांड की जांच, हाई कोर्ट ने दिया आदेश
मुंबई। मुंबई के प्रसिद्ध समाजसेवी अमर मिश्रा की बेटी अस्मिता मिश्रा की ‘हत्या’ के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश द्वय सारंग कोतवाल और संदेश पाटिल की खंडपीठ ने 16 अप्रैल को इस आशय का आदेश सीबीआई को दिया। अमर मिश्रा मुंबई के उपनगर मालाड में रहते हैं। उनकी पुत्री अस्मिता मिश्रा (26) की शादी ठाणे जिले के मीरा रोड में रहने वाले मनीष मिश्रा के बेटे अभय मिश्रा के साथ 20 नवंबर 2021 को हुई थी। 12 मई 2022 को गौना हुआ था। गौने के बाद से ही मनीष मिश्रा अमर मिश्रा से उनके मीरा रोड के फ्लैट को अभय मिश्रा के नाम पर कर देने की ज़िद करने लगा। बहाने से 35 लाख रुपए कीमत का डायमंड भी मांगने लगा। इसको लेकर पूरा परिवार अस्मिता को प्रताड़ित करने लगा। अस्मिता का गर्भपात भी करवा दिया।
22 फरवरी 2023 को अस्मिता ने फ़ोन कर अमर मिश्रा को बताया कि ससुराल वालों ने उसकी पिटाई कर दी है। वे तलाक माँग रहे हैं। अमर मिश्रा ने पत्नी सहित अस्मिता से उसके ससुराल जाकर मुलाक़ात की तब माफी मांग कर शांत कर दिया। इस बीच 24 फरवरी 2023 को अभय मिश्रा ने अमर मिश्रा को सूचित किया कि अस्मिता ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। अस्मिता को वॉकहार्ट हॉस्पिट मीरा रोड लाया है,   पंडित भीमसेन जोशी जनरल अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ।अमर मिश्रा रिश्तेदारों के साथ अस्पताल पहुंचे तो अस्मिता के शरीर पर चोट के निशान दिखे। शव की फोटो लेने लगे तो पति अभय मिश्रा ने धमकाया कि इसका परिणाम बुरा होगा। इधर काशीमीरा पुलिस स्टेशन का सीनियर इंस्पेक्टर संदीप कदम ADR लिखकर शांत बैठ गया था। वह अमर मिश्रा का कोई तर्क सुन ही नहीं रहा था। सोशल मीडिया पर अपील कर अमर मिश्रा ने 27 फरवरी 2023 को काशीमीरा पुलिस स्टेशन पर मोर्चा निकाल दिया। तब संदीप कदम ने आईपीसी की धारा 304(बी), 306, 420, 406, 313, 323, 498(ए), 504, r/w 34, 3 और 4 के तहत एफआईआर (संख्या-147/2023) दर्ज कर ससुर मनीष मिश्रा, सास प्रेमलता मिश्रा, ननद पायल मिश्रा, ननद पूर्णिमा मिश्रा और देवर जयराज मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। पति अभय मिश्रा को बॉम्बे हाई कोर्ट से गिरफ्तारी पूर्व जमानत मिल गई।
अमर मिश्रा चाहते थे कि आरोपियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज हो। परिस्थितियाँ बताती थीं कि यह स्पष्ट रूप से हत्या है। जैसे कि परिवार ने बताया था कि वे दरवाज़ा तोड़कर कमरे में गए। परंतु दरवाज़ा टूटने का कोई प्रमाण नहीं मिला। अस्मिता ने जिस ओढ़नी से फाँसी लगाई थी वह पंखे पर लटकी मिली जबकि पंचनामा में पुलिस ने लिखा कि वह बेड पर थी। अस्मिता के शव का पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर तेजश्री सोनवणे ने लिखा था कि उसने सुबह 9.30 बजे से 10.30 बजे के बीच पोस्टमॉर्टम किया, जबकि बायोमीट्रिक अटेंडेंस सुबह 9.51.04 बजे आई थी।
पूरे मामले में ऐसी बहुत सी विसंगतियां मिलीं। अमर मिश्रा ने एडवोकेट घनश्याम उपाध्याय (लॉ ज्यूरिस) के मार्फ़त मामले की सीबीआई जाँच करवाने की मांग को लेकर बॉम्बे हाई में पिटीशन दाख़िल कर दी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुरुआत में ऑर्डर पास किया कि मामले की जाँच जे.जे. अस्पताल के सीनियर डॉक्टर से करायें। जे. जे. अस्पताल ने सीनियर डॉक्टर के बजाय जूनियर डॉक्टर से जांच करवा दी। उधर डॉक्टर तेजश्री सोनवणे कहती रही कि वह पोस्टमार्टम करना नहीं जानती। जूनियर डॉक्टर ने जांच रिपोर्ट में बताया कि यह आत्महत्या का मामला है। वकील घनश्याम उपाध्याय के युक्तिवाद से प्रेरित बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया।
Sambhal बुलडोजर एक्शन पर सियासी संग्राम: “मुसलमानों को टारगेट कर रही सरकार” - AIMIM जिलाध्यक्ष का बड़ा हमला
सम्भल जिले के मुबारकपुर बंद और बिछौली में ईदगाह, मदरसा और मस्जिदों पर चले बुलडोजर को लेकर सियासत गरमा गई है। AIMIM जिलाध्यक्ष असद अब्दुल्ला ने इस कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

असद अब्दुल्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश के जिन राज्यों में बीजेपी या उसके सहयोगी दलों की सरकार है, वहां मुसलमानों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि बिना पर्याप्त नोटिस और अदालत के फैसले का इंतजार किए धार्मिक स्थलों को गिराना एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल मस्जिद, मदरसे और इबादतगाह ही ग्राम समाज की जमीन पर हैं? अन्य धर्मों के स्थलों पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं होती? उनके मुताबिक, सरकार हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन पैदा कर सियासत कर रही है। वहीं प्रशासन का दावा है कि सभी निर्माण कानूनी प्रक्रिया के तहत अवैध पाए जाने पर ही हटाए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए AIMIM नेता ने कहा कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है। उन्होंने बेरोजगारी, किसानों की बदहाल स्थिति और हाल ही में आई आपदाओं को लेकर सरकार को घेरा। असद अब्दुल्ला ने दावा किया कि 2027 के चुनाव में जनता नफरत की राजनीति का जवाब देगी और एक सेक्युलर सरकार बनेगी। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि AIMIM सम्भल जिले की असमोली और सम्भल सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी और “हिस्सेदारी की लड़ाई” जारी रखेगी। कुल मिलाकर, बुलडोजर कार्रवाई अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि बड़ा सियासी मुद्दा बन चुकी है, जिस पर आने वाले चुनावों में जोरदार घमासान तय माना जा रहा है।
*खान-पान एवं लू के कारण पेट मरीजों की संख्या बढ़ी*


नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन नगरी में इन दिनों हीटवेव के हालात बनने शुरू हो गए हैं। आगामी दिनों में राहत की उम्मीदें नहीं हैं। उधर, खान-पान एवं लू के कारण पेट मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में बचाव से ही खुद को बीमार होने से बचाया जा सकता है। उधर, सरकारी अस्पतालों में इन दिनों डायरिया, पेट के रोगियों की संख्या 30 फीसदी तक पहुंच गई है। डाक्टरों को इलाज करने में पसीने छूट जा रहे हैं। बता दें कि इन दिनों सूबे के साथ ही कालीन नगरी में गर्मी का प्रकोप जारी है। पुरवाई के बाद भी पारा दिन का करीब 43 डिग्री के पार जबकि रात का 30 डिग्री के नीचे नहीं आ रहा है।
उधर, इन दिनों शादियों की धूम है। इसके कारण लोग देर रात भोजन कर रहे हैं। अब ऐसे में पेट दर्द, डायरिया के मरीजों की संख्या ज्यादा देखी जा रही है। जिला अस्पताल ज्ञानपुर एवं महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल भदोही में इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीजों की भरमार नजर आ रही है। तेज धूप की तपिश से हवा भी झुलसा रही है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। अचानक घर से बाहर पैदल एवं बाइक से निकलकर धूप में जाना खतरनाक साबित हो सकता है।डाक्टरों ने कहा कि हर घंटे पर एक गिलास पानी या फिर तरल पदार्थ का सेवन करते रहें। दोपहर में यदि निकलना बेहद जरूरी हो तो धूप से बचने के लिए छाता लगाकर निकलें या फिर गमछा आदि से सिर और चेहरे को पूरी तरह से ढककर गर्म हवा से सुरक्षित रखें।बीमारी से बचाव को यह करें-फल एवं गन्ने का जूस, नारियल पानी का प्रयोग करें कच्चे आम को भूनकर पना बनाकर पीएं धूप में निकलने से पहले सिर को अच्छी तरह से ढकें0 बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग धूप में निकलने से बचें दिन भर में कम से कम आठ से 10 गिलास पानी पीएं।शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें और दोपहर में घर से निकलने से बचें गर्मी में बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत करने से बचें। धूप से बचने के लिए छाता, गमछा, दुपट्टा एवं हैट का इस्तेमाल करें
जापान में आया 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

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जापानी में एक शक्तिशाली भूकंप आया है। उत्तरी जापानी तट पर आए शक्तिशाली भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने क्षेत्र में सुनामी की चेतावनी जारी की है। 7.4 की प्रारंभिक तीव्रता वाला यह भूकंप उत्तरी जापान के सैनरिकु के तट पर स्थानीय समयानुसार शाम लगभग 4:53 बजे आया।

सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी महसूस हुए झटके

भूकंप की गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है।

सुनामी की चेतावनी

जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि सोमवार दोपहर को देश के उत्तर-पूर्वी तट के पास 7.4 की शुरुआती तीव्रता वाला भूकंप आया। भूकंप के बाद एजेंसी ने इवाते आओमोरी और होक्काइडो प्रांतों में 3 मीटर (9.84 फीट) तक ऊंची सुनामी आने की चेतावनी दी है। जापान के इवाते प्रान्त, होक्काइडो के प्रशांत तट के मध्य भाग और आओमोरी प्रान्त के प्रशांत तट के लिए सुनामी चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में बड़े नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है।

भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर में

जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर में था और यह 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। जापान के भूकंपीय तीव्रता पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 'ऊपरी 5' मापी गई। ये इतनी तेज थी कि लोगों का इधर-उधर चलना-फिरना मुश्किल हो गया।

जापान में बार-बार आता है भूकंप

जापान दुनिया के सबसे भूकंपीय रूप से सक्रिय देशों (एक्टिव) में से एक है, जो प्रशांत "रिंग ऑफ फायर" के पश्चिमी किनारे पर चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के शीर्ष पर स्थित है। जापान लगभग 12.5 करोड़ लोगों का घर है और एक द्वीपसमूह पर बसा है। यह देश आम तौर पर हर साल लगभग 1,500 झटके महसूस करता है और दुनिया के लगभग 18 प्रतिशत भूकंपों के लिए जिम्मेदार है।

स्कूल चलो अभियान की भयावह विफलता: नौनिहालों का भविष्य धूंध में, बाल मजदूरी का दलदल गहराता जा रहा
बबलू प्रजापति पिहानी

पिहानी (हरदोई):सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ और जन जागरूकता योजनाओं को बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू किया था, लेकिन पिहानी में आज यह अभियान पूरी तरह धराशायी हो चुका है। नौनिहाल जिनके हाथों में कलम होनी चाहिए, वे फावड़ा, ईंटें और चाय के जूठे गिलास उठाने पर मजबूर हैं। निर्माण स्थलों, ढाबों और होटल जैसे जगहों पर ये मासूम बच्चे काम कर रहे हैं, जबकि शिक्षा का अधिकार सिर्फ एक नाम बनकर रह गया है।
श्रम व शिक्षा विभाग की लापरवाही इस त्रासदी का मुख्य कारण है। अधिकारियों ने सिर्फ दिखावे के कार्यक्रम आयोजित किए, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बाल मजदूरी की घटनाएं रोज सामने आ रही हैं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। स्थानीय लोग आक्रोशित हैं और पूछ रहे हैं कि आखिर कब प्रशासन इस जघन्य अपराध पर लगाम लगाएगा। बच्चों का भविष्य दांव पर है, और अगर अभी जाग नहीं हुई, तो ये मासूम पीढ़ी कभी शिक्षा का उजाला नहीं देख पाएगी।बाल मजदूरी के दलदल में धकेले जा रहे हैं। सरकार के आदेशों के बावजूद, शिक्षा व श्रम विभाग केवल दिखावा कर रहे हैं, बच्चों का उज्ज्वल भविष्य अधर में लटका हुआ।क्षेत्र में सैकड़ों मासूम बच्चे आज भी बाल मजदूरी के दलदल में फंसे हुए हैं। ये बच्चे स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पा रहे, बल्कि होटल, ढाबों और निर्माण स्थलों पर काम करते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब सरकार शिक्षा को लेकर इतने बड़े अभियान चला रही है, तो आखिर ये बच्चे शिक्षा से वंचित क्यों हैं?
मगध विश्वविद्यालय में वैचारिक टकराव गहराया, जातीय उन्माद और हिंदू विरोधी विचारों के प्रसार के आरोप

गया-बोधगया। मगध विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध कॉलेजों में हाल के दिनों में हो रही कुछ गतिविधियों ने शैक्षणिक वातावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ व्यक्तियों द्वारा वामपंथी विचारधारा के नाम पर छात्रों के बीच जातीय उन्माद फैलाने तथा हिंदू विरोधी सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संतुलन प्रभावित होता प्रतीत हो रहा है, जो चिंता का विषय है।एबीवीपी के छात्र नेता सूरज सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान के केंद्र होते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में सुनियोजित ढंग से छात्रों को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर छात्रों को बांटना तथा हिंदू आस्था, परंपरा एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध नकारात्मक वातावरण तैयार करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल छात्र एकता कमजोर होती है, बल्कि उनके शैक्षणिक विकास और भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सूरज सिंह ने आगे आरोप लगाया कि कुछ तत्व एकतरफा विचारधारा और भ्रामक प्रचार के माध्यम से छात्रों व ख़ास कर छात्राओं को गुमराह कर रहे हैं, जिससे परिसर में अविश्वास और तनाव का माहौल बनता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के मंदिर में किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति या वैचारिक उन्माद को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सूरज सिंह ने सभी छात्र संगठनों, शिक्षकों और समाज के जिम्मेदार नागरिकों से भी अपील की कि वे छात्रों को जोड़ने, आपसी सद्भाव बढ़ाने और सकारात्मक, समावेशी एवं शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में कार्य करें।

इधर छात्र समुदाय के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई छात्रों का मानना है कि विचारों की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है, लेकिन किसी भी विचारधारा के नाम पर समाज या किसी धर्म विशेष के खिलाफ माहौल बनाना तथा छात्रों को विभाजित करना शिक्षा की मूल भावना के विपरीत है।

गुस्साए आसपास गांवों के सैकड़ो ग्रामीणों ने पुल को लेकर हुए लामबंद

दर्जनों गांव के ग्रामीण आगामी चुनाव में वोट का करेंगे बहिष्कार- पुल नहीं तो वोट नहीं*

पीयूष तिवारी
अहिरोरी - जनपद हरदोई में जनप्रतिनिधियों द्वारा बराबर कागज पर विकास की तो गंगा बहाई जा रही है लेकिन धरातल पर कुछ ओर ही नजर आ रहा है बता दे विकासखंड अहिरोरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत चठिया मजरा ढपरापुर गांव के बाहर निकली घरेरा नदी पर आजादी के बाद अभी तक ग्रामीणों को पुल नसीब नहीं हुआ है जिसका दंश आज भी वहां के इलाकाई ग्रामीण झेलने को मजबूर है। ढ़परापुर,शोभे पुरवा,पत्तीपुर,चठिया,बांनेकुइया,चाहलैहिया,रघुनाथपुर,सुनौवा, जलालपुर,पत्तीपुर डीह सहित दर्जनों गांव के गुस्साए सैकड़ो ग्रामीणों ने सोमवार को लामबंद होकर पुल निर्माण की मांग उठाई पुल नहीं तो वोट नहीं। प्रधान कृष्ण कुमार मौर्य,ब्रह्मशरण मिश्रा, मुकेश यादव,रजनीश,कृष्णपाल रविंद्र मिश्रा,राजकुमार,कुलदीप सहित सैकड़ो ग्रामीणों ने पुल निर्माण को लेकर अपना दर्द बयां किया है ग्रामीणों का कहना है बरसात के समय इस मार्ग से दर्जनों गांव के ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो जाता है क्योंकि यह मार्ग ढ़परापुर गांव से सीधे प्रताप नगर सीतापुर मार्ग को जोड़ता है जिसकी दूरी गांव से करीब 1 से 2 किलोमीटर बताई है ग्रामीणों का कहना है यहां के जिम्मेदार सांसद,विधायक जनप्रतिनिधियों से कई बार कहां गया लेकिन अनसुनी कर देते।
*गुस्साए ग्रामीण विधानसभा,लोकसभा चुनाव में वोट का करेंगे बहिष्कार*
गुस्साए ग्रामीणों ने इस बार मन बना लिया है इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र के सारे ग्रामीण लामबंद होकर आगामी विधानसभा,लोकसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे।
*शीघ्र ही समस्या का समाधान कराया जाएगा- क्षेत्रीय विधायक प्रभास कुमार*
क्षेत्रीय विधायक प्रभास कुमार ने कहा यह मामला मेरे संज्ञान में है शीघ्र ही समस्या का समाधान कराया जाएगा।
*रोड निर्माण कार्य का प्रस्ताव भेजा गया है*
बालामऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामपाल वर्मा ने कहा प्रताप नगर सीतापुर मार्ग पुलिस चौकी से घरेरा नदी तक रोड निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है प्रस्ताव स्वीकृत होते ही रोड निर्माण कार्य कराया जाएगा। जिससे वहां के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
पश्चिम एशिया संकट का असर : हीलियम, एल्युमीनियम से लेकर मेडिकल उपकरण पर भी असर
अमरेश द्विवेदी

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को शांत करने के लिए किए जा रहे सीजफायर प्रयासों में अभी भी बड़ा गतिरोध बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत तो चल रही है, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ इसे “स्टैंडस्टिल” यानी ठहराव की स्थिति बता रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्यस्थ देशों (जैसे पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र) की कोशिशों से अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी सीजफायर प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और रणनीतिक समुद्री रास्ते (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) खोलने की बात शामिल थी।
हालांकि, ईरान ने इससे पहले कई छोटे और अस्थायी सीजफायर प्रस्तावों को भी खारिज कर दिया है और कहा है कि वह केवल दीर्घकालिक और ठोस समझौते पर ही बात करेगा।
इस संघर्ष का असर केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर भी गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान से जुड़े तनाव के कारण तेल और गैस बाजार पहले ही प्रभावित हैं, लेकिन अब इसका असर कई महत्वपूर्ण औद्योगिक संसाधनों पर भी पड़ने लगा है।
ईरान से जुड़े तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर हीलियम की आपूर्ति पर देखा जा रहा है।
कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े हीलियम उत्पादकों में से एक है, ने कुछ औद्योगिक घटनाओं और हमलों के बाद उत्पादन में अस्थायी रोक की घोषणा की है। इससे वैश्विक हीलियम सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
हीलियम प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग का एक महत्वपूर्ण बाय-प्रोडक्ट है और इसका उपयोग कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में होता है, जैसे - सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, मेडिकल उपकरण (एमआरआई मशीन), स्पेस टेक्नोलॉजी और रॉकेट लॉन्चिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स कूलिंग सिस्टम आदि।
विशेषज्ञों का मानना है कि हीलियम की कमी से चिप निर्माण उद्योग प्रभावित हो सकता है, जिससे स्मार्टफोन, लैपटॉप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों की प्रगति धीमी पड़ सकती है।
इसके अलावा एल्युमीनियम सप्लाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी देशों का वैश्विक एल्युमीनियम उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है और किसी भी प्रकार की रुकावट से इसकी कीमतों में वृद्धि हो सकती है। एल्युमीनियम का उपयोग बड़े पैमाने पर पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्माण उद्योग में होता है। सप्लाई बाधित होने से इन सभी क्षेत्रों में लागत बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है।
तेल और गैस आपूर्ति में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित है। गैसोलीन और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो यह वैश्विक मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकता है।
सेमीकंडक्टर और एआई इंडस्ट्री पहले से ही सप्लाई चेन चुनौतियों का सामना कर रही है। हीलियम और अन्य दुर्लभ गैसों की कमी से चिप निर्माण की गति धीमी हो सकती है। इसका असर सीधे तौर पर स्मार्टफोन निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो कई कंपनियों को अपने उत्पादन लक्ष्य में देरी करनी पड़ सकती है।
हीलियम की कमी का असर मेडिकल सेक्टर पर भी पड़ सकता है, क्योंकि एमआरआई मशीनों और अन्य हाई-टेक मेडिकल उपकरणों में इसका उपयोग जरूरी होता है। इसके अलावा स्पेस इंडस्ट्री में रॉकेट फ्यूल टैंक की सफाई और लॉन्चिंग प्रक्रियाओं में भी हीलियम का उपयोग होता है।
स्पेस कंपनियों के बढ़ते लॉन्च कार्यक्रमों के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे कमी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में यह तनाव लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक सप्लाई चेन को गहराई से प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि कई कंपनियां पहले से ही संभावित कमी और कीमतों में वृद्धि को देखते हुए अपने प्रोडक्शन प्लान में बदलाव कर रही हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता फिलहाल ठहराव की स्थिति में है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद अब तक दूर नहीं हो पाए हैं। इस बीच वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, हीलियम, एल्युमीनियम और हाई-टेक उद्योगों पर असर बढ़ने की आशंका है।
स्थिति अगर जल्द नहीं सुधरी, तो इसका प्रभाव आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम उपभोक्ताओं तक महसूस किया जाएगा।
आजमगढ़:-भव्य आयोजन में मनी भगवान परशुराम जयंती, ब्राह्मण समाज ने किया व्यक्तित्व-कृतित्व का गुणगान

वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। फूलपुर तहसील क्षेत्र के अम्बारी पाण्डेय का पूरा में सोमवार को भगवान परशुराम की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। यह आयोजन एक शादी समारोह के दौरान ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद, तहसील फूलपुर इकाई के तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें समाज के गणमान्य लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित सामाजिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और सत्य के प्रतीक भी थे। उनके जीवन से समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सदैव धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर पंडित देव नाथ पाण्डेय, केश भान पाण्डेय, सौरभ पाण्डेय, लोकेश पाण्डेय, पद्मेश पाण्डेय, त्रयम्बकेश्वर पाण्डेय, अंकित मिश्रा और मनीष तिवारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया और समाज में एकता एवं नैतिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिद्धेश्वर पाण्डेय ने की, जबकि संचालन पंडित देबनाथ पाण्डेय द्वारा किया गया। आयोजन के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को जयंती की शुभकामनाएं दीं।
कुल्हनामऊ में भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर भव्य प्रतिमा का अनावरण

जौनपुर। अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम के जन्मदिन के पावन अवसर पर जिले के कुल्हनामऊ चौराहे पर स्थापित 11 फीट ऊंची भगवान परशुराम की प्रतिमा का विधिवत पूजन-अर्चन एवं अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सर्व समाज के लोग उपस्थित रहे और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।कार्यक्रम का आयोजन मुरलीधर चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी समाजसेवी एवं उद्योगपति प्रमोद पाठक के संयोजन में किया गया। शाम शुरू हुए कार्यक्रम में 51बटुको द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना, आरती और परशुराम चालीसा का पाठ किया गया। आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई।इस मौके पर प्रमोद पाठक ने कहा कि भगवान परशुराम किसी एक समाज के नहीं बल्कि पूरे समाज के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि “भगवान को जातियों में बांटना गलत सोच है, वे सर्व समाज के लिए समान रूप से पूजनीय हैं।” कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों की सहभागिता इस संदेश को मजबूत करती दिखी।राजनीतिक चर्चाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, इसे किसी प्रकार के शक्ति प्रदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने धर्म की रक्षा में भगवान परशुराम के योगदान पर प्रकाश डाला। प्रतिमा अनावरण के इस अवसर पर राजनीतिक सीमाओं से परे हटकर विभिन्न जन प्रतिनिधि एक साथ नजर आए। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा की कुल्हनामऊ का यह जमदग्निपुरम पार्क न केवल पर्यटन का केंद्र बनेगा बल्कि युवाओं को धर्म और पुरुषार्थ की सीख भी देगा वहीं विधायक बदलापुर ने सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि जनता स्वयं सही-गलत का निर्णय करेगी।आयोजन की सफलता में कई लोगों का योगदान रहा, जिसमें परमिशन से लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा तक विभिन्न स्तरों पर सहयोग मिला। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में इस स्थल को “परशुराम चौक” या “परशुराम पार्क” के रूप में विकसित करने की योजना है।कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों सहित हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया। इस मौके पर विधायक इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, मंत्री गिरीश चंद्र यादव, नगरपालिका अध्यक्ष मनोरमा मौर्या, उद्योगपति तथा वरिष्ठ समाजसेवी ज्ञानप्रकाश सिंह ,पूर्व ब्लाक प्रमुख राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पं श्रीपति उपाध्याय जिलाध्यक्ष भाजपा अजीत प्रजापति, पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह ,कुंवर मृगेंद्र सिंह समेत अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
सीबीआई करेगी अस्मिता मिश्रा हत्याकांड की जांच, हाई कोर्ट ने दिया आदेश
मुंबई। मुंबई के प्रसिद्ध समाजसेवी अमर मिश्रा की बेटी अस्मिता मिश्रा की ‘हत्या’ के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश द्वय सारंग कोतवाल और संदेश पाटिल की खंडपीठ ने 16 अप्रैल को इस आशय का आदेश सीबीआई को दिया। अमर मिश्रा मुंबई के उपनगर मालाड में रहते हैं। उनकी पुत्री अस्मिता मिश्रा (26) की शादी ठाणे जिले के मीरा रोड में रहने वाले मनीष मिश्रा के बेटे अभय मिश्रा के साथ 20 नवंबर 2021 को हुई थी। 12 मई 2022 को गौना हुआ था। गौने के बाद से ही मनीष मिश्रा अमर मिश्रा से उनके मीरा रोड के फ्लैट को अभय मिश्रा के नाम पर कर देने की ज़िद करने लगा। बहाने से 35 लाख रुपए कीमत का डायमंड भी मांगने लगा। इसको लेकर पूरा परिवार अस्मिता को प्रताड़ित करने लगा। अस्मिता का गर्भपात भी करवा दिया।
22 फरवरी 2023 को अस्मिता ने फ़ोन कर अमर मिश्रा को बताया कि ससुराल वालों ने उसकी पिटाई कर दी है। वे तलाक माँग रहे हैं। अमर मिश्रा ने पत्नी सहित अस्मिता से उसके ससुराल जाकर मुलाक़ात की तब माफी मांग कर शांत कर दिया। इस बीच 24 फरवरी 2023 को अभय मिश्रा ने अमर मिश्रा को सूचित किया कि अस्मिता ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। अस्मिता को वॉकहार्ट हॉस्पिट मीरा रोड लाया है,   पंडित भीमसेन जोशी जनरल अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ।अमर मिश्रा रिश्तेदारों के साथ अस्पताल पहुंचे तो अस्मिता के शरीर पर चोट के निशान दिखे। शव की फोटो लेने लगे तो पति अभय मिश्रा ने धमकाया कि इसका परिणाम बुरा होगा। इधर काशीमीरा पुलिस स्टेशन का सीनियर इंस्पेक्टर संदीप कदम ADR लिखकर शांत बैठ गया था। वह अमर मिश्रा का कोई तर्क सुन ही नहीं रहा था। सोशल मीडिया पर अपील कर अमर मिश्रा ने 27 फरवरी 2023 को काशीमीरा पुलिस स्टेशन पर मोर्चा निकाल दिया। तब संदीप कदम ने आईपीसी की धारा 304(बी), 306, 420, 406, 313, 323, 498(ए), 504, r/w 34, 3 और 4 के तहत एफआईआर (संख्या-147/2023) दर्ज कर ससुर मनीष मिश्रा, सास प्रेमलता मिश्रा, ननद पायल मिश्रा, ननद पूर्णिमा मिश्रा और देवर जयराज मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। पति अभय मिश्रा को बॉम्बे हाई कोर्ट से गिरफ्तारी पूर्व जमानत मिल गई।
अमर मिश्रा चाहते थे कि आरोपियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज हो। परिस्थितियाँ बताती थीं कि यह स्पष्ट रूप से हत्या है। जैसे कि परिवार ने बताया था कि वे दरवाज़ा तोड़कर कमरे में गए। परंतु दरवाज़ा टूटने का कोई प्रमाण नहीं मिला। अस्मिता ने जिस ओढ़नी से फाँसी लगाई थी वह पंखे पर लटकी मिली जबकि पंचनामा में पुलिस ने लिखा कि वह बेड पर थी। अस्मिता के शव का पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर तेजश्री सोनवणे ने लिखा था कि उसने सुबह 9.30 बजे से 10.30 बजे के बीच पोस्टमॉर्टम किया, जबकि बायोमीट्रिक अटेंडेंस सुबह 9.51.04 बजे आई थी।
पूरे मामले में ऐसी बहुत सी विसंगतियां मिलीं। अमर मिश्रा ने एडवोकेट घनश्याम उपाध्याय (लॉ ज्यूरिस) के मार्फ़त मामले की सीबीआई जाँच करवाने की मांग को लेकर बॉम्बे हाई में पिटीशन दाख़िल कर दी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुरुआत में ऑर्डर पास किया कि मामले की जाँच जे.जे. अस्पताल के सीनियर डॉक्टर से करायें। जे. जे. अस्पताल ने सीनियर डॉक्टर के बजाय जूनियर डॉक्टर से जांच करवा दी। उधर डॉक्टर तेजश्री सोनवणे कहती रही कि वह पोस्टमार्टम करना नहीं जानती। जूनियर डॉक्टर ने जांच रिपोर्ट में बताया कि यह आत्महत्या का मामला है। वकील घनश्याम उपाध्याय के युक्तिवाद से प्रेरित बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया।
Sambhal बुलडोजर एक्शन पर सियासी संग्राम: “मुसलमानों को टारगेट कर रही सरकार” - AIMIM जिलाध्यक्ष का बड़ा हमला
सम्भल जिले के मुबारकपुर बंद और बिछौली में ईदगाह, मदरसा और मस्जिदों पर चले बुलडोजर को लेकर सियासत गरमा गई है। AIMIM जिलाध्यक्ष असद अब्दुल्ला ने इस कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

असद अब्दुल्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश सहित देश के जिन राज्यों में बीजेपी या उसके सहयोगी दलों की सरकार है, वहां मुसलमानों को निशाना बनाकर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि बिना पर्याप्त नोटिस और अदालत के फैसले का इंतजार किए धार्मिक स्थलों को गिराना एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल मस्जिद, मदरसे और इबादतगाह ही ग्राम समाज की जमीन पर हैं? अन्य धर्मों के स्थलों पर ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं होती? उनके मुताबिक, सरकार हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन पैदा कर सियासत कर रही है। वहीं प्रशासन का दावा है कि सभी निर्माण कानूनी प्रक्रिया के तहत अवैध पाए जाने पर ही हटाए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए AIMIM नेता ने कहा कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है। उन्होंने बेरोजगारी, किसानों की बदहाल स्थिति और हाल ही में आई आपदाओं को लेकर सरकार को घेरा। असद अब्दुल्ला ने दावा किया कि 2027 के चुनाव में जनता नफरत की राजनीति का जवाब देगी और एक सेक्युलर सरकार बनेगी। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि AIMIM सम्भल जिले की असमोली और सम्भल सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी और “हिस्सेदारी की लड़ाई” जारी रखेगी। कुल मिलाकर, बुलडोजर कार्रवाई अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि बड़ा सियासी मुद्दा बन चुकी है, जिस पर आने वाले चुनावों में जोरदार घमासान तय माना जा रहा है।
*खान-पान एवं लू के कारण पेट मरीजों की संख्या बढ़ी*


नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन नगरी में इन दिनों हीटवेव के हालात बनने शुरू हो गए हैं। आगामी दिनों में राहत की उम्मीदें नहीं हैं। उधर, खान-पान एवं लू के कारण पेट मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में बचाव से ही खुद को बीमार होने से बचाया जा सकता है। उधर, सरकारी अस्पतालों में इन दिनों डायरिया, पेट के रोगियों की संख्या 30 फीसदी तक पहुंच गई है। डाक्टरों को इलाज करने में पसीने छूट जा रहे हैं। बता दें कि इन दिनों सूबे के साथ ही कालीन नगरी में गर्मी का प्रकोप जारी है। पुरवाई के बाद भी पारा दिन का करीब 43 डिग्री के पार जबकि रात का 30 डिग्री के नीचे नहीं आ रहा है।
उधर, इन दिनों शादियों की धूम है। इसके कारण लोग देर रात भोजन कर रहे हैं। अब ऐसे में पेट दर्द, डायरिया के मरीजों की संख्या ज्यादा देखी जा रही है। जिला अस्पताल ज्ञानपुर एवं महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल भदोही में इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीजों की भरमार नजर आ रही है। तेज धूप की तपिश से हवा भी झुलसा रही है। ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। अचानक घर से बाहर पैदल एवं बाइक से निकलकर धूप में जाना खतरनाक साबित हो सकता है।डाक्टरों ने कहा कि हर घंटे पर एक गिलास पानी या फिर तरल पदार्थ का सेवन करते रहें। दोपहर में यदि निकलना बेहद जरूरी हो तो धूप से बचने के लिए छाता लगाकर निकलें या फिर गमछा आदि से सिर और चेहरे को पूरी तरह से ढककर गर्म हवा से सुरक्षित रखें।बीमारी से बचाव को यह करें-फल एवं गन्ने का जूस, नारियल पानी का प्रयोग करें कच्चे आम को भूनकर पना बनाकर पीएं धूप में निकलने से पहले सिर को अच्छी तरह से ढकें0 बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग धूप में निकलने से बचें दिन भर में कम से कम आठ से 10 गिलास पानी पीएं।शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें और दोपहर में घर से निकलने से बचें गर्मी में बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत करने से बचें। धूप से बचने के लिए छाता, गमछा, दुपट्टा एवं हैट का इस्तेमाल करें
जापान में आया 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

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जापानी में एक शक्तिशाली भूकंप आया है। उत्तरी जापानी तट पर आए शक्तिशाली भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने क्षेत्र में सुनामी की चेतावनी जारी की है। 7.4 की प्रारंभिक तीव्रता वाला यह भूकंप उत्तरी जापान के सैनरिकु के तट पर स्थानीय समयानुसार शाम लगभग 4:53 बजे आया।

सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी महसूस हुए झटके

भूकंप की गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके काफी तेज महसूस किए गए। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर टोक्यो में भी ऊंची इमारतें हिल गईं। कई इलाकों में लोगों ने तेज झटके महसूस किए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं आई है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है।

सुनामी की चेतावनी

जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि सोमवार दोपहर को देश के उत्तर-पूर्वी तट के पास 7.4 की शुरुआती तीव्रता वाला भूकंप आया। भूकंप के बाद एजेंसी ने इवाते आओमोरी और होक्काइडो प्रांतों में 3 मीटर (9.84 फीट) तक ऊंची सुनामी आने की चेतावनी दी है। जापान के इवाते प्रान्त, होक्काइडो के प्रशांत तट के मध्य भाग और आओमोरी प्रान्त के प्रशांत तट के लिए सुनामी चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में बड़े नुकसान का अंदेशा जताया जा रहा है।

भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर में

जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, इस भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर में था और यह 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था। जापान के भूकंपीय तीव्रता पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 'ऊपरी 5' मापी गई। ये इतनी तेज थी कि लोगों का इधर-उधर चलना-फिरना मुश्किल हो गया।

जापान में बार-बार आता है भूकंप

जापान दुनिया के सबसे भूकंपीय रूप से सक्रिय देशों (एक्टिव) में से एक है, जो प्रशांत "रिंग ऑफ फायर" के पश्चिमी किनारे पर चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के शीर्ष पर स्थित है। जापान लगभग 12.5 करोड़ लोगों का घर है और एक द्वीपसमूह पर बसा है। यह देश आम तौर पर हर साल लगभग 1,500 झटके महसूस करता है और दुनिया के लगभग 18 प्रतिशत भूकंपों के लिए जिम्मेदार है।

स्कूल चलो अभियान की भयावह विफलता: नौनिहालों का भविष्य धूंध में, बाल मजदूरी का दलदल गहराता जा रहा
बबलू प्रजापति पिहानी

पिहानी (हरदोई):सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ और जन जागरूकता योजनाओं को बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू किया था, लेकिन पिहानी में आज यह अभियान पूरी तरह धराशायी हो चुका है। नौनिहाल जिनके हाथों में कलम होनी चाहिए, वे फावड़ा, ईंटें और चाय के जूठे गिलास उठाने पर मजबूर हैं। निर्माण स्थलों, ढाबों और होटल जैसे जगहों पर ये मासूम बच्चे काम कर रहे हैं, जबकि शिक्षा का अधिकार सिर्फ एक नाम बनकर रह गया है।
श्रम व शिक्षा विभाग की लापरवाही इस त्रासदी का मुख्य कारण है। अधिकारियों ने सिर्फ दिखावे के कार्यक्रम आयोजित किए, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बाल मजदूरी की घटनाएं रोज सामने आ रही हैं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। स्थानीय लोग आक्रोशित हैं और पूछ रहे हैं कि आखिर कब प्रशासन इस जघन्य अपराध पर लगाम लगाएगा। बच्चों का भविष्य दांव पर है, और अगर अभी जाग नहीं हुई, तो ये मासूम पीढ़ी कभी शिक्षा का उजाला नहीं देख पाएगी।बाल मजदूरी के दलदल में धकेले जा रहे हैं। सरकार के आदेशों के बावजूद, शिक्षा व श्रम विभाग केवल दिखावा कर रहे हैं, बच्चों का उज्ज्वल भविष्य अधर में लटका हुआ।क्षेत्र में सैकड़ों मासूम बच्चे आज भी बाल मजदूरी के दलदल में फंसे हुए हैं। ये बच्चे स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पा रहे, बल्कि होटल, ढाबों और निर्माण स्थलों पर काम करते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब सरकार शिक्षा को लेकर इतने बड़े अभियान चला रही है, तो आखिर ये बच्चे शिक्षा से वंचित क्यों हैं?