भारतीय आभूषणों की विरासतः अतीत से वर्तमान तक एक निरंतर यात्रा

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ उजागर करती हैं भारतीय शिल्प, सौंदर्य और सांस्कृतिक निरंतरता का अद्भुत संगम भारत में आभूषण केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान, आस्था और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के सशक्त प्रतीक रहे हैं। बदलते समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन अवश्य हुआ है, किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि प्राचीन आभूषण शैलियाँ समय-समय पर आधुनिक फैशन में पुनः उभरती रहती हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय परंपरा की गहरी जड़ों और उसकी निरंतरता को दर्शाती है।

संचालनालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ इस सांस्कृतिक यात्रा का सजीव प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। इन मूर्तियों में अंकित आभूषण न केवल उस समय की शिल्पकला और तकनीकी दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि समाज की सौंदर्य दृष्टि और जीवन शैली को भी जीवंत रूप में सामने लाते हैं।

द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व की शुंगकालीन यक्षी प्रतिमा, भरहुत से प्राप्त, भारतीय आभूषणों के प्रारंभिक विकसित स्वरूप को दर्शाती है। विकसित कमल के मध्य अंकित इस प्रतिमा में मोतियों के पंचवली हार, कर्ण-कुंडल और बहु-लड़ी हारावली का सुंदर अंकन है। यक्षी अपने हाथों में सनाल पद्म धारण किए हुए हैं। यक्षी के चेहरे पर हल्की मुस्कान और शिरो-सज्जा में बालों का व्यवस्थित विन्यास उस समय की सौंदर्य दृष्टि को दर्शाता है।

9वीं-10वीं शताब्दी की हरिहर प्रतिमा में शिव और विष्णु का संयुक्त स्वरूप अंकित है। आधे भाग में जटामुकुट और दूसरे भाग में किरीट मुकुट, दोनों देवताओं की पहचान को स्पष्ट करते हैं। अन्य आभूषणों में केयूर, शिव सर्पकुंडल तथा विष्णु सूर्यवृत कुंडल, एकावलीहार, यज्ञोपवीत, उरूदाम धारण किए हुए हैं। हरि का वाहन गरुड मानव रूप में आलेखित हैं, तथा हर का वाहन नंदी भी प्रदर्शित हैं।

11वीं शताब्दी की परमारकालीन शिव-पार्वती प्रतिमा में 'रावणानुग्रह' का दृश्य अंकित है। शिव-पार्वती को कैलाश पर्वत पर अपने अपने वाहन नंदी एवं सिंह पर बैठा दिखाया गया हैं। पार्वती जटामुकुट धारण किए हुए हैं। पादपीठ पर रावण को कैलाश पर्वत उठाने के लिए घुटने के बल मुड़े हुए दिखाया गया हैं। गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा-विष्णु के साथ विद्याधर एवं गन्धों का आलेखन हैं। शिव के कानों में चक्राकार कर्णकुंडल, गले में एकावली (मुक्तामाला) तथा उसके ऊपर तीन लड़ी वाला हार दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त भुजाओं में केयूर (भुजबंध) अलंकरण को और समृद्ध बनाते हैं। एक बनमाला भी नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई गई है, जिसे पुष्पमाला के रूप में सजाया गया है।

पार्वती के कानों में भिन्न प्रकार के कुंडल; एक ओर चक्रकुंडल और दूसरी ओर ताटंक दर्शाए गए हैं। गले के आभूषण में हारावली मध्य भाग से नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई देती है, और भीतर की ओर स्तनसूत्र का भी अंकन है।

11वीं शताब्दी की कलचुरी कला में आभूषणों की सूक्ष्मता और जटिलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सुर सुंदरी स्खलित वसना प्रतिमा की भावांकन में सरलता, चक्र-कुंडल, एकावली, चंद्रहार, स्तनसूत्र, कुचबंध, केयूर, कंकण धारण किए हुए हैं। इस प्रतिमा में नायिका के स्नानोपरांत वस्त्र धारण करने का आलेखन है।

11-12वीं शताब्दी की कच्छपघात शैली की वैष्णवी प्रतिमा में क्षेत्रीय कला का प्रभाव स्पष्ट है। भुजाओं में शंख, चक्र, गदा एवं पद्म धारण किए हुए हैं। देवी किरीट मुकुट कुंडल, हार, स्तनहार, कटीमेखला, वैजयंती माला, नूपुर, कंगन, बाजूबंध आदी आभूषणों से अलंकृत हैं। पादपीठ पर परिचारक देवी से आशीर्वाद ले रहा हैं।

उमा-महेश्वर अपने अपने वाहन सिंह एवं नंदी पर बैठे हुए जटा मुकुट, हार, बाजूबंद, कटीमेखला, नूपुर धारण किए हैं। प्रतिमा में उमा-महेश्वर को एक दूसरे की ओर निहारते हुए दिखाया गया हैं। चतुर्भुजी शिव की भुजाओं में त्रिशूल, सर्प, कमलपुष्प अंकित हैं। पार्वती की दाहिनी भुजा शिव के स्कन्ध एवं बांयी भुजा में दर्पण लिए हैं।

समभंग में स्थानक देवी के घुटने के नीचे का भाग खंडित हैं। द्विभुजी देवी की दायीं भुजा में अक्षमाला, बांयी भुजा में कमंडल का अंकन हैं। अलंकृत केश दोनों कंधों पर फैलें हुए हैं। देवी कर्णकुंडल, ग्रैवेयक, केयूर, कटीमेखला, पारदर्शी अधोवस्त्र आदि से अलंकृत हैं।

संयुक्त निदेशक डॉ. मनीषा शर्मा के शब्दों में, भारतीय आभूषण केवल अलंकरण नहीं, बल्कि समय, समाज और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ हैं। इन मूर्तियों में अंकित प्रत्येक कुंडल, हार और कटिमेखला अपने युग की सौंदर्य दृष्टि और सांस्कृतिक मूल्यों की कहानी कहती है। संचालनालय में संरक्षित ये धरोहर हमें यह समझने का अवसर देती हैं कि परंपरा कभी स्थिर नहीं होती; वह निरंतर विकसित होती है, फिर भी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी रहती है। आज के आभूषणों में जो रूप दिखाई देते हैं, वे इन्हीं प्राचीन परंपराओं की पुनरावृत्ति हैं, जो अतीत और वर्तमान के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती हैं।

कांग्रेसी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की भतीजी ने करोड़ों में बेच दी वक्फ संपत्ति

स्टे के बाद भी वक्फ कब्रिस्तान पर तन रहीं दुकानें

• नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति हो रही खुर्द बुर्द

खान आशु 

भोपाल। प्रदेश की संस्कारधानी कहलाने वाली जगह से सटे नरसिंहपुर जिले में भू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। संस्कारों को धता दिखाते हुए यहां एक वक्फ संपत्ति को औने पौने दाम पर बेच दिया गया है तो दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों के स्थान कब्रिस्तान को भी निशाना बनाने से नहीं चूका गया है। जमीन का सौदा करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया गया है, जिसपर जिला पंजीयक ने भी नजर नहीं डाली है। जबकि स्टे हो चुके कब्रिस्तान की जमीन पर हो रहे निर्माण पर भी प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। कांग्रेसियों द्वारा किए जा रहे इस गोरखधंधे को भाजपा शासनकाल में भाजपाइयों की शिकायत पर भी असर नहीं हो रहा है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान जैसे कई लोग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से लेकर वक्फ बोर्ड के जिम्मेदारों से गुहार लगा चुके हैं।

मामला नरसिंहपुर जिले का है। यहां जिला मुख्यालय की नगरीय सीमा में स्थित है वक्फ दरगाह जहांगीर शाह एवं इमामबाड़ा। खसरा नंबर 35/1 एवं 35/2 पर बसी इस कृषि भूमि का आधिपत्य मप्र वक्फ बोर्ड का है, इसके रिकॉर्ड में यह दर्ज है। लेकिन कुछ भू माफियाओं की बदनीयत इस जमीन पर पड़ गई, जिसके लिए उन्होंने कुछ कूटरचित दस्तावेज बनाकर इसका सौदा कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की भतीजी शालिनी प्रजापति की इसमें मुख्य भूमिका है। उन्होंने खुद को इस वक्फ संपत्ति का मालिक करार देते हुए इसका सौदा विश्वास गोटे नामक व्यक्ति को कर दिया है। जानकारी के मुताबिक करीब एक करोड़, 24 रूपये के इस सौदे पर जिला पंजीयक ने भी बिना पड़ताल के सहमति की मुहर लगा दी है। प्रशासनिक अधिकारियों की जल्दबाजी का आलम यह है कि आनन फानन में वे इस विवादास्पद सौदे पर नामांतरण करने को भी तैयार हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्फ अमेंडमेंड बिल की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

शासकीय स्टे को भी धता

नरसिंहपुर जिले की तहसील है गाडरवाड़ा। जिसका एक गांव है कुंडिया। यहां मुस्लिम समाज का एक बरसों पुराना कब्रस्तान है, जो वक्फ बोर्ड के आधिपत्य में है। इस कब्रिस्तान पर भी नजर तिरछी कर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा। जिससे भविष्य में कब्रिस्तान की जगह कम तो होगी ही साथ एक नए विवाद की शुरुआत इससे हो सकती है। जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी ने इस निर्माण पर स्टे दे दिया है। लेकिन हठधर्मिता का आलम यह है कि स्टे के बावजूद यहां निर्माण कार्य सतत जारी है।

शिकायत सीएम से लेकर अध्यक्ष तक 

शहर के जिम्मेदारों और फिक्रमंद लोगों में शामिल जिला वक्फ कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के हुसैन पठान ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से शिकायत की है। उन्होंने वक्फ संपत्ति की इस बर्बादी को रोकने के लिए बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल से भी गुहार लगाई है। पठान ने कहा कि इस तरह वक्फ की बर्बादी से कल के लिए नया उदाहरण तय होगा, साथ ही इससे समाज में भी गलत संदेश जाएगा।

* इनका कहना है 

नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति के बारे में शिकायत मिली है। जिले के अधिकारियों को स्थिति को दुरुस्त करने के लिए कहा जा रहा है।

डॉ. सनव्वर पटेल 

अध्यक्ष 

मप्र वक्फ बोर्ड

आरक्षण का लाभ उन्हीं को मिले जिनके लिए व्यवस्था बनाई गई है....बाबूलाल मरांडी

भाजपा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धर्मांतरण के बाद आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट का संरक्षण प्राप्त करने वाले लोगों के संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले पर बड़ी प्रतिक्रिया दी।

श्री मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा... यानी धर्म परिवर्तन के बाद वह व्यक्ति आरक्षण या अन्य संवैधानिक लाभों का दावा नहीं कर सकता।

कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो वह उस सामाजिक संरचना से बाहर हो जाता है, जिसके आधार पर उसे आरक्षण का अधिकार मिला था। ऐसे में उस व्यक्ति द्वारा आरक्षित वर्ग के लाभों का दावा करना संविधान की भावना के विपरीत माना गया है।

कहा कि हाल के वर्षों में यह भी देखा गया है कि कुछ संगठित नेटवर्क लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करते हैं, जिसके पीछे सामाजिक या आर्थिक लाभ की सोच भी जुड़ी रहती है। इस तरह के प्रयास न केवल समाज में भ्रम पैदा करते हैं, बल्कि आरक्षण जैसी संवेदनशील व्यवस्था का दुरुपयोग भी करते हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाना आवश्यक था, ताकि वास्तविक हकदारों को ही इसका लाभ मिल सके।

कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय संविधान की गरिमा, सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना को सशक्त करता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आरक्षण का लाभ वास्तव में उन्हीं लोगों तक पहुंचे, जिनके उत्थान के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।

झारखंड विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति का गढ़वा दौरा, विकास योजनाओं की हुई समीक्षा।

गढ़वा :- झारखंड विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति ने गुरुवार को गढ़वा जिले का दौरा किया। इस अवसर पर समिति द्वारा परिसदन भवन में विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर जिले में संचालित जन-कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति -सह- माननीय विधायक गढ़वा- 80 विद्यानसभा क्षेत्र सत्येंद्र नाथ तिवारी ने की। बैठक में झारखंड विधानसभा के उपसचिव कुंदन सिंह, एसओ उमेश कुमार एवं निजी सचिव गौतम कुमार उपस्थित रहें।

वहीं बैठक के दौरान समिति ने विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित विकास योजनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्माणाधीन योजनाओं में आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। इस क्रम में विधायक फंड, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा भुगतान, सड़क निर्माण, विभिन्न संरचना निर्माण, ग्रामीण एवं शहरी जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति आदि की विशेष रूप से समीक्षा की गई।

वहीं समिति द्वारा विभिन्न सड़क निर्माण के दौरान अधिग्रहित किए गए भूमि के एवज में मुआवजा भुगतान से संबंधित अद्यतन रिपोर्ट से अवगत कराने की बात कही। साथ ही सड़क निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। सड़क निर्माण एवं मुआवजा राशि के भुगतान में हर समस्याओं व शिकायत का समय समाधान निकालने का निर्देश संबंधित पदाधिकारी को दिया गया। खनन विभाग की समीक्षा करते हुए अवैध बालू खनन पर रोक लगाने हेतु आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। लक्ष्य के अनुरूपधन अधिप्राप्ति किए जाने संबंधी अधिकतम प्रतिवेदन से अवगत होते हुए पैक्स के माध्यम से की गई धान अधिप्राप्ति के भुगतान में तेजी लाने के लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त एसी/डीसी बिल के मामलों पर भी गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश निर्गत किए गए। बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार, भू-अर्जन, खनन विभाग, भवन प्रमंडल, पीएचईडी सहित अन्य विभागों की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की गई। शहिद नीलांबर पीतांबर उत्तर कोयल परियोजना (मंडल डैम) के विस्थापितों को रंका रमकंडा क्षेत्र के विश्रामपुर व बलीगढ़ में पुनर्वासित करने के मामले की समीक्षा की गई एवं इस संदर्भ में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त पुल पुलिया का निर्माण, छात्रावास निर्माण, राशन वितरण, खेल विभाग द्वारा बनाया जा रहे हैं खेल मैदानों की की समीक्षा, बालू घाटों की नीलामी की समीक्षा, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों एवं बहाली की समीक्षा, गढ़वा जिले से मजदूरों के पलायन के मुद्दे, जिले में लंबित म्युटेशन की समीक्षा, सामाजिक वानिकी के तहत लिए गए योजनाओं की समीक्षा एवं विद्युत विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों समेत ग्रामीण एवं शहरी विभाग के द्वारा किए जा रहे हैं विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

वहीं इस अवसर पर समिति के सभापति सत्येंद्र नाथ तिवारी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए जनहित में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।

वहीं बैठक में उपरोक्त के अलावे उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा, डीएफओ ईबी अब्राहम, अपर समाहर्ता राज महेश्वरम, अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा संजय कुमार एवं अनुमंडल पदाधिकारी श्री बंशीधर नगर प्रभाकर मिर्धा, डीआरडीबी निदेशक प्रमेश कुशवाहा, भू-अर्जन पदाधिकारी संजय प्रसाद, जिला परिवहन पदाधिकारी धीरज प्रकाश, सिविल सर्जन डॉ. जेएफ कैनेडी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पंकज कुमार गिरी, विभिन्न अभियंत्रण विभागों के कार्यपालक अभियंतागण, जिला योजना पदाधिकारी शिशिर तिग्गा सहित विभिन्न विभागों के कार्यालय प्रधान व वरीय पदाधिकारीगण समेत अन्य कर्मी उपस्थित रहें।।

टोलकर्मियों की गुंडागर्दी के विरोध में भाकियू तोमर ने सौंपा ज्ञापन, महापंचायत की चेतावनी
मेरठ/बहसूमा। भारतीय किसान यूनियन (तोमर) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को शिवाया टोल प्लाजा पर टोलकर्मियों द्वारा कथित बदसलूकी, गुंडागर्दी और दुर्व्यवहार के विरोध में जोरदार आवाज उठाई। संगठन के जिलाध्यक्ष चौधरी इंतजार देशवाल के नेतृत्व में किसानों ने दौराला थाने पहुंचकर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में किसानों ने आरोप लगाया कि शिवाया टोल पर आए दिन टोलकर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है, जिससे क्षेत्र के किसानों और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

जिलाध्यक्ष चौधरी इंतजार देशवाल ने साफ कहा कि यदि 5 अप्रैल तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो भारतीय किसान यूनियन (तोमर) द्वारा शिवाया टोल पर महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति उत्पन्न होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

किसानों ने प्रशासन से टोलकर्मियों के व्यवहार में सुधार और व्यवस्था को सुचारु बनाने की मांग की है।
सीता हरण से सुग्रीव राज्याभिषेक तक, रामकथा में झूमे श्रद्धालु
रामेश्वर प्रजापति छांगुर नगरा (बलिया) स्थानीय पुरानी दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्री राम जन्म महोत्सव के अंतर्गत चल रहे रामकथा प्रवचन के आठवें दिन बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आया, जहां श्रद्धालु कथा श्रवण में तल्लीन रहे। कथा व्यास महाराज विजय कौशिक जी ने अपने ओजस्वी एवं मधुर वचनों से रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने सीता हरण प्रसंग को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करते हुए धर्म-अधर्म के संघर्ष को समझाया। साथ ही जटायु-रावण युद्ध का वर्णन करते हुए जटायु की वीरता और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा को विस्तार से बताया, जिससे श्रोता भावुक हो उठे। प्रवचन के दौरान बाली-सुग्रीव युद्ध का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया गया। महाराज जी ने बताया कि भगवान श्रीराम ने अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर सुग्रीव को उसका अधिकार दिलाया। इसके पश्चात सुग्रीव के राज्याभिषेक का सुंदर वर्णन करते हुए धर्म की स्थापना का संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ आरती के साथ हुआ, जिसमें विजय नारायण सिंह उर्फ गोपाल जी, निर्भय प्रकाश, मनमोहन सिंह, डॉ. डीपी सिंह, अरविंद नारायण सिंह, डॉ. बृजेश सिंह, बिट्टन सिंह, छट्ठू राम, डॉ. आर.एस. वर्मा, समरजीत सिंह, नंदलाल गुप्ता, आलोक यादव, संजीव गिरी, धनजी सिंह,संजय ,फतेह बहादुर सिंह सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सेवक के रूप में भगवान की आरती उतारकर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। कथा के दौरान “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। आयोजन स्थल पर व्यवस्था सुव्यवस्थित रही और श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ कथा का आनंद लिया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
साइबर ठगी में पश्चिम बंगाल के फरीद की जमानत खारिज
*जिला जज की अदालत ने 2.75 करोड़ की ठगी में नहीं दी राहत*

सुलतानपुर। ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाकर धोखाधड़ी करने व 2.75 करोड़ की साइबर ठगी के आरोप से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल के आरोपी फरीद मलिक की तरफ से प्रस्तुत जमानत अर्जी पर बुधवार को जिला जज की अदालत मे सुनवाई चली। प्रभारी जिला जज संध्या चौधरी की अदालत ने आरोपी के अपराध को समाज के लिए अत्यंत घातक व बेहद गंभीर मानते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दिया है।
कोतवाली नगर के विवेकानन्द नगर के वर्तमान व चांदा थाने के सफीपुर स्थायी निवासी भास्कर पांडेय ने गत 14 अक्टूबर को अशिका वेल्थ बिल्डर्स नेटवर्क के व्हाट्सएप ग्रुप के खिलाफ साइबर थाने में धोखाधड़ी व लाखों की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया। उनके आरोप के मुताबिक साइबर ठगों ने उन्हें अपने जाल में फंसाकर 10.11 लाख रुपए गत अप्रैल व मई माह में जमा कराकर उनसे ठग लिए। ठगी का शिकार होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने मामला दर्ज कराया। वहीं अमेठी जिले के अभिषेक सिंह ने भी इन्हीं साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।आरोपियो का यह गिरोह कई प्रदेशों में फैला हुआ है। पुलिस की जांच में करीब 2.75 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। मामले में लोगों को लुभावनी स्कीम बताकर उन्हें अपने जाल में फंसा कर निवेश करने व बड़े स्तर पर फ्रॉड का काम आरोपी करते रहे। पुलिस ने इस गिरोह में शामिल असम राज्य के हनीफ काजी, शमसुद्दीन,सफीकुल इस्लाम व जाकिर खान एवं मुंबई के संतोष सर्वे, विजय ईश्वर पश्चिम बंगाल के फरीद मलिक को जेल भेजने की कारवाई किया था। मामले में आरोपी जाकिर खान,संतोष सर्वे, विजय इश्वर व अन्य की जमानत अर्जी पूर्व में खारिज हो चुकी है। अदालत ने आरोपी फरीद मलिक की भूमिका को अत्यंत गंभीर मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दिया है।
गौ सेवा के संकल्प को नई दिशा: चौधरी सौदान सिंह बने राष्ट्रीय अध्यक्ष

मेरठ। भारतीय गौ सेवा संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा किए गए चयन के बाद चौधरी सौदान सिंह को संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस घोषणा के साथ ही संगठन में उत्साह की लहर दौड़ गई है और कार्यकर्ताओं ने नए नेतृत्व से गौ सेवा के कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद जताई है।

प्रदेश अध्यक्ष गौरव चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि गौ सेवा संघ का मुख्य उद्देश्य गौवंश की रक्षा, सेवा और संरक्षण करना है। भारतीय संस्कृति में गाय को विशेष महत्व प्राप्त है, और इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संगठन निरंतर कार्य कर रहा है।

मेरठ जनपद में भी संगठन की नई टीम सक्रिय रूप से कार्य करेगी। जिला अध्यक्ष के रूप में विजय भाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि जिला उपाध्यक्ष पद पर परविंदर चौधरी को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अजय भाई, विकास, मनोज, सचिन शर्मा, मोहित कुमार और विशाल कुमार सहित कई कार्यकर्ता संगठन से जुड़कर गौ सेवा के कार्यों में योगदान देंगे।

संगठन पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि नए नेतृत्व में गौ सेवा संघ सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करेगा।
परिषदीय विद्यालयों की बदली तस्वीर — संविलियन विद्यालय जसरा में वार्षिकोत्सव और नवारम्भ कार्यक्रम ने जीता दिल

बच्चों की प्रतिभा, अभिभावकों की भागीदारी और सांस्कृतिक रंगों से गूंजा विद्यालय परिसर, अधिकारियों ने की खुलकर सराहना

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज।विकास खंड जसरा क्षेत्र के संविलियन विद्यालय जसरा में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं नवारम्भ कार्यक्रम उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के बीच भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों तथा गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि अब परिषदीय विद्यालय भी किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं रह गए हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खण्ड विकास अधिकारी जसरा अनिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में परिषदीय विद्यालयों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, अभिभावकों की सहभागिता और बच्चों की रचनात्मक प्रस्तुति होती है, तो बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब सरकारी विद्यालयों की छवि तेजी से बदल रही है और इसका श्रेय शिक्षकों की मेहनत को जाता है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कक्षा 2 के नन्हे बच्चों ने “पेड़ लगाओ – जीवन बचाओ” गीत के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जिसे सुनकर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। वहीं कक्षा 6 के बच्चों ने “राधा संग होली खेले घनश्याम – रंग बरसे” जैसे होली गीत पर मनमोहक प्रस्तुति देकर आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश दिया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मनीषा यादव ने सभी अतिथियों का स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते हुए कहा कि विद्यालय परिवार का प्रयास है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ- साथ संस्कार और मंच देने का अवसर भी मिले। इस अवसर पर एडीओ समाज कल्याण गुलजार सिंह, शिक्षामित्र संघ जिलाध्यक्ष वसीम अहमद, माध्यमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष विश्वनाथ सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष जगत शुक्ला, समाजवादी व्यापार सभा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र केसरवानी, भूमि विकास बैंक अध्यक्ष लाल विष्णु पटेल, समाजसेवी राम बाबू यादव सहित कई गणमान्य लोगों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए मेधावी छात्रों और प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान आशीष सोनकर ने की, जबकि मंच संचालन दिलीप तिवारी ने प्रभावशाली ढंग से किया। इस मौके पर दशरथ भारती, पूनम सिंह, पूर्णिमा यादव, सुमन पाण्डेय, उमा राय, ममता मिश्रा, नीलम, गीता, मीना, धर्मेंद्र कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि यदि इसी प्रकार विद्यालयों में शैक्षिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती रहीं तो परिषदीय विद्यालयों की पहचान नई ऊंचाइयों तक

राम कथा में भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, राम गमन प्रसंग सुन छलक पड़े भाव
ामेश्वर प्रजापति छांगुर नगरा (बलिया) स्थानीय पुरानी दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे श्री राम जन्म महोत्सव के अंतर्गत आयोजित राम कथा प्रवचन के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास महाराज विजय कौशिक जी ने भगवान श्रीराम के वन गमन (राम गमन) प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि जब भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा रखते हुए अयोध्या का राज-पाट त्यागकर वन जाने का निर्णय लिया, तब पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई। माता कौशल्या, सुमित्रा एवं अयोध्यावासियों का विलाप सुन वातावरण भावुक हो उठा। श्रीराम के साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण का वन गमन त्याग, प्रेम और कर्तव्य का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा देता है। कथा के इस प्रसंग ने लोगों को जीवन मूल्यों का संदेश दिया, जिसे सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। प्रवचन के उपरांत भगवान श्रीराम की आरती का आयोजन किया गया, जिसमें नगर थाना अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा, पूर्व विधायक धनंजय कनौजिया, मनीष सिंह, श्याम प्रकाश सिंह, डीएन प्रसाद, बिट्टन सिंह, समरजीत सिंह, धनजी, संजय गुप्ता, आशु सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने सेवक के रूप में भाग लेकर आरती की। इस दौरान पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भारतीय आभूषणों की विरासतः अतीत से वर्तमान तक एक निरंतर यात्रा

भोपाल। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ उजागर करती हैं भारतीय शिल्प, सौंदर्य और सांस्कृतिक निरंतरता का अद्भुत संगम भारत में आभूषण केवल सजावट का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान, आस्था और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के सशक्त प्रतीक रहे हैं। बदलते समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन अवश्य हुआ है, किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि प्राचीन आभूषण शैलियाँ समय-समय पर आधुनिक फैशन में पुनः उभरती रहती हैं। यह प्रवृत्ति भारतीय परंपरा की गहरी जड़ों और उसकी निरंतरता को दर्शाती है।

संचालनालय द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ इस सांस्कृतिक यात्रा का सजीव प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। इन मूर्तियों में अंकित आभूषण न केवल उस समय की शिल्पकला और तकनीकी दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि समाज की सौंदर्य दृष्टि और जीवन शैली को भी जीवंत रूप में सामने लाते हैं।

द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व की शुंगकालीन यक्षी प्रतिमा, भरहुत से प्राप्त, भारतीय आभूषणों के प्रारंभिक विकसित स्वरूप को दर्शाती है। विकसित कमल के मध्य अंकित इस प्रतिमा में मोतियों के पंचवली हार, कर्ण-कुंडल और बहु-लड़ी हारावली का सुंदर अंकन है। यक्षी अपने हाथों में सनाल पद्म धारण किए हुए हैं। यक्षी के चेहरे पर हल्की मुस्कान और शिरो-सज्जा में बालों का व्यवस्थित विन्यास उस समय की सौंदर्य दृष्टि को दर्शाता है।

9वीं-10वीं शताब्दी की हरिहर प्रतिमा में शिव और विष्णु का संयुक्त स्वरूप अंकित है। आधे भाग में जटामुकुट और दूसरे भाग में किरीट मुकुट, दोनों देवताओं की पहचान को स्पष्ट करते हैं। अन्य आभूषणों में केयूर, शिव सर्पकुंडल तथा विष्णु सूर्यवृत कुंडल, एकावलीहार, यज्ञोपवीत, उरूदाम धारण किए हुए हैं। हरि का वाहन गरुड मानव रूप में आलेखित हैं, तथा हर का वाहन नंदी भी प्रदर्शित हैं।

11वीं शताब्दी की परमारकालीन शिव-पार्वती प्रतिमा में 'रावणानुग्रह' का दृश्य अंकित है। शिव-पार्वती को कैलाश पर्वत पर अपने अपने वाहन नंदी एवं सिंह पर बैठा दिखाया गया हैं। पार्वती जटामुकुट धारण किए हुए हैं। पादपीठ पर रावण को कैलाश पर्वत उठाने के लिए घुटने के बल मुड़े हुए दिखाया गया हैं। गणेश, कार्तिकेय, ब्रह्मा-विष्णु के साथ विद्याधर एवं गन्धों का आलेखन हैं। शिव के कानों में चक्राकार कर्णकुंडल, गले में एकावली (मुक्तामाला) तथा उसके ऊपर तीन लड़ी वाला हार दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त भुजाओं में केयूर (भुजबंध) अलंकरण को और समृद्ध बनाते हैं। एक बनमाला भी नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई गई है, जिसे पुष्पमाला के रूप में सजाया गया है।

पार्वती के कानों में भिन्न प्रकार के कुंडल; एक ओर चक्रकुंडल और दूसरी ओर ताटंक दर्शाए गए हैं। गले के आभूषण में हारावली मध्य भाग से नीचे की ओर झूलती हुई दिखाई देती है, और भीतर की ओर स्तनसूत्र का भी अंकन है।

11वीं शताब्दी की कलचुरी कला में आभूषणों की सूक्ष्मता और जटिलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सुर सुंदरी स्खलित वसना प्रतिमा की भावांकन में सरलता, चक्र-कुंडल, एकावली, चंद्रहार, स्तनसूत्र, कुचबंध, केयूर, कंकण धारण किए हुए हैं। इस प्रतिमा में नायिका के स्नानोपरांत वस्त्र धारण करने का आलेखन है।

11-12वीं शताब्दी की कच्छपघात शैली की वैष्णवी प्रतिमा में क्षेत्रीय कला का प्रभाव स्पष्ट है। भुजाओं में शंख, चक्र, गदा एवं पद्म धारण किए हुए हैं। देवी किरीट मुकुट कुंडल, हार, स्तनहार, कटीमेखला, वैजयंती माला, नूपुर, कंगन, बाजूबंध आदी आभूषणों से अलंकृत हैं। पादपीठ पर परिचारक देवी से आशीर्वाद ले रहा हैं।

उमा-महेश्वर अपने अपने वाहन सिंह एवं नंदी पर बैठे हुए जटा मुकुट, हार, बाजूबंद, कटीमेखला, नूपुर धारण किए हैं। प्रतिमा में उमा-महेश्वर को एक दूसरे की ओर निहारते हुए दिखाया गया हैं। चतुर्भुजी शिव की भुजाओं में त्रिशूल, सर्प, कमलपुष्प अंकित हैं। पार्वती की दाहिनी भुजा शिव के स्कन्ध एवं बांयी भुजा में दर्पण लिए हैं।

समभंग में स्थानक देवी के घुटने के नीचे का भाग खंडित हैं। द्विभुजी देवी की दायीं भुजा में अक्षमाला, बांयी भुजा में कमंडल का अंकन हैं। अलंकृत केश दोनों कंधों पर फैलें हुए हैं। देवी कर्णकुंडल, ग्रैवेयक, केयूर, कटीमेखला, पारदर्शी अधोवस्त्र आदि से अलंकृत हैं।

संयुक्त निदेशक डॉ. मनीषा शर्मा के शब्दों में, भारतीय आभूषण केवल अलंकरण नहीं, बल्कि समय, समाज और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ हैं। इन मूर्तियों में अंकित प्रत्येक कुंडल, हार और कटिमेखला अपने युग की सौंदर्य दृष्टि और सांस्कृतिक मूल्यों की कहानी कहती है। संचालनालय में संरक्षित ये धरोहर हमें यह समझने का अवसर देती हैं कि परंपरा कभी स्थिर नहीं होती; वह निरंतर विकसित होती है, फिर भी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी रहती है। आज के आभूषणों में जो रूप दिखाई देते हैं, वे इन्हीं प्राचीन परंपराओं की पुनरावृत्ति हैं, जो अतीत और वर्तमान के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करती हैं।

कांग्रेसी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की भतीजी ने करोड़ों में बेच दी वक्फ संपत्ति

स्टे के बाद भी वक्फ कब्रिस्तान पर तन रहीं दुकानें

• नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति हो रही खुर्द बुर्द

खान आशु 

भोपाल। प्रदेश की संस्कारधानी कहलाने वाली जगह से सटे नरसिंहपुर जिले में भू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। संस्कारों को धता दिखाते हुए यहां एक वक्फ संपत्ति को औने पौने दाम पर बेच दिया गया है तो दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों के स्थान कब्रिस्तान को भी निशाना बनाने से नहीं चूका गया है। जमीन का सौदा करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया गया है, जिसपर जिला पंजीयक ने भी नजर नहीं डाली है। जबकि स्टे हो चुके कब्रिस्तान की जमीन पर हो रहे निर्माण पर भी प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। कांग्रेसियों द्वारा किए जा रहे इस गोरखधंधे को भाजपा शासनकाल में भाजपाइयों की शिकायत पर भी असर नहीं हो रहा है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान जैसे कई लोग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से लेकर वक्फ बोर्ड के जिम्मेदारों से गुहार लगा चुके हैं।

मामला नरसिंहपुर जिले का है। यहां जिला मुख्यालय की नगरीय सीमा में स्थित है वक्फ दरगाह जहांगीर शाह एवं इमामबाड़ा। खसरा नंबर 35/1 एवं 35/2 पर बसी इस कृषि भूमि का आधिपत्य मप्र वक्फ बोर्ड का है, इसके रिकॉर्ड में यह दर्ज है। लेकिन कुछ भू माफियाओं की बदनीयत इस जमीन पर पड़ गई, जिसके लिए उन्होंने कुछ कूटरचित दस्तावेज बनाकर इसका सौदा कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की भतीजी शालिनी प्रजापति की इसमें मुख्य भूमिका है। उन्होंने खुद को इस वक्फ संपत्ति का मालिक करार देते हुए इसका सौदा विश्वास गोटे नामक व्यक्ति को कर दिया है। जानकारी के मुताबिक करीब एक करोड़, 24 रूपये के इस सौदे पर जिला पंजीयक ने भी बिना पड़ताल के सहमति की मुहर लगा दी है। प्रशासनिक अधिकारियों की जल्दबाजी का आलम यह है कि आनन फानन में वे इस विवादास्पद सौदे पर नामांतरण करने को भी तैयार हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्फ अमेंडमेंड बिल की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

शासकीय स्टे को भी धता

नरसिंहपुर जिले की तहसील है गाडरवाड़ा। जिसका एक गांव है कुंडिया। यहां मुस्लिम समाज का एक बरसों पुराना कब्रस्तान है, जो वक्फ बोर्ड के आधिपत्य में है। इस कब्रिस्तान पर भी नजर तिरछी कर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा। जिससे भविष्य में कब्रिस्तान की जगह कम तो होगी ही साथ एक नए विवाद की शुरुआत इससे हो सकती है। जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़े हुसैन पठान ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी। जिसके बाद राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी ने इस निर्माण पर स्टे दे दिया है। लेकिन हठधर्मिता का आलम यह है कि स्टे के बावजूद यहां निर्माण कार्य सतत जारी है।

शिकायत सीएम से लेकर अध्यक्ष तक 

शहर के जिम्मेदारों और फिक्रमंद लोगों में शामिल जिला वक्फ कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के हुसैन पठान ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से शिकायत की है। उन्होंने वक्फ संपत्ति की इस बर्बादी को रोकने के लिए बोर्ड अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल से भी गुहार लगाई है। पठान ने कहा कि इस तरह वक्फ की बर्बादी से कल के लिए नया उदाहरण तय होगा, साथ ही इससे समाज में भी गलत संदेश जाएगा।

* इनका कहना है 

नरसिंहपुर जिले की वक्फ संपत्ति के बारे में शिकायत मिली है। जिले के अधिकारियों को स्थिति को दुरुस्त करने के लिए कहा जा रहा है।

डॉ. सनव्वर पटेल 

अध्यक्ष 

मप्र वक्फ बोर्ड

आरक्षण का लाभ उन्हीं को मिले जिनके लिए व्यवस्था बनाई गई है....बाबूलाल मरांडी

भाजपा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धर्मांतरण के बाद आरक्षण और एससी/एसटी एक्ट का संरक्षण प्राप्त करने वाले लोगों के संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले पर बड़ी प्रतिक्रिया दी।

श्री मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा... यानी धर्म परिवर्तन के बाद वह व्यक्ति आरक्षण या अन्य संवैधानिक लाभों का दावा नहीं कर सकता।

कहा कि अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो वह उस सामाजिक संरचना से बाहर हो जाता है, जिसके आधार पर उसे आरक्षण का अधिकार मिला था। ऐसे में उस व्यक्ति द्वारा आरक्षित वर्ग के लाभों का दावा करना संविधान की भावना के विपरीत माना गया है।

कहा कि हाल के वर्षों में यह भी देखा गया है कि कुछ संगठित नेटवर्क लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करते हैं, जिसके पीछे सामाजिक या आर्थिक लाभ की सोच भी जुड़ी रहती है। इस तरह के प्रयास न केवल समाज में भ्रम पैदा करते हैं, बल्कि आरक्षण जैसी संवेदनशील व्यवस्था का दुरुपयोग भी करते हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाना आवश्यक था, ताकि वास्तविक हकदारों को ही इसका लाभ मिल सके।

कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय संविधान की गरिमा, सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना को सशक्त करता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आरक्षण का लाभ वास्तव में उन्हीं लोगों तक पहुंचे, जिनके उत्थान के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।

झारखंड विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति का गढ़वा दौरा, विकास योजनाओं की हुई समीक्षा।

गढ़वा :- झारखंड विधानसभा की सामान्य प्रयोजन समिति ने गुरुवार को गढ़वा जिले का दौरा किया। इस अवसर पर समिति द्वारा परिसदन भवन में विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर जिले में संचालित जन-कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति -सह- माननीय विधायक गढ़वा- 80 विद्यानसभा क्षेत्र सत्येंद्र नाथ तिवारी ने की। बैठक में झारखंड विधानसभा के उपसचिव कुंदन सिंह, एसओ उमेश कुमार एवं निजी सचिव गौतम कुमार उपस्थित रहें।

वहीं बैठक के दौरान समिति ने विभिन्न विभागों द्वारा क्रियान्वित विकास योजनाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्माणाधीन योजनाओं में आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। इस क्रम में विधायक फंड, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा भुगतान, सड़क निर्माण, विभिन्न संरचना निर्माण, ग्रामीण एवं शहरी जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति आदि की विशेष रूप से समीक्षा की गई।

वहीं समिति द्वारा विभिन्न सड़क निर्माण के दौरान अधिग्रहित किए गए भूमि के एवज में मुआवजा भुगतान से संबंधित अद्यतन रिपोर्ट से अवगत कराने की बात कही। साथ ही सड़क निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। सड़क निर्माण एवं मुआवजा राशि के भुगतान में हर समस्याओं व शिकायत का समय समाधान निकालने का निर्देश संबंधित पदाधिकारी को दिया गया। खनन विभाग की समीक्षा करते हुए अवैध बालू खनन पर रोक लगाने हेतु आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। लक्ष्य के अनुरूपधन अधिप्राप्ति किए जाने संबंधी अधिकतम प्रतिवेदन से अवगत होते हुए पैक्स के माध्यम से की गई धान अधिप्राप्ति के भुगतान में तेजी लाने के लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त एसी/डीसी बिल के मामलों पर भी गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश निर्गत किए गए। बैठक में राजस्व एवं भूमि सुधार, भू-अर्जन, खनन विभाग, भवन प्रमंडल, पीएचईडी सहित अन्य विभागों की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की गई। शहिद नीलांबर पीतांबर उत्तर कोयल परियोजना (मंडल डैम) के विस्थापितों को रंका रमकंडा क्षेत्र के विश्रामपुर व बलीगढ़ में पुनर्वासित करने के मामले की समीक्षा की गई एवं इस संदर्भ में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त पुल पुलिया का निर्माण, छात्रावास निर्माण, राशन वितरण, खेल विभाग द्वारा बनाया जा रहे हैं खेल मैदानों की की समीक्षा, बालू घाटों की नीलामी की समीक्षा, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों एवं बहाली की समीक्षा, गढ़वा जिले से मजदूरों के पलायन के मुद्दे, जिले में लंबित म्युटेशन की समीक्षा, सामाजिक वानिकी के तहत लिए गए योजनाओं की समीक्षा एवं विद्युत विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों समेत ग्रामीण एवं शहरी विभाग के द्वारा किए जा रहे हैं विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

वहीं इस अवसर पर समिति के सभापति सत्येंद्र नाथ तिवारी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए जनहित में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया।

वहीं बैठक में उपरोक्त के अलावे उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा, डीएफओ ईबी अब्राहम, अपर समाहर्ता राज महेश्वरम, अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा संजय कुमार एवं अनुमंडल पदाधिकारी श्री बंशीधर नगर प्रभाकर मिर्धा, डीआरडीबी निदेशक प्रमेश कुशवाहा, भू-अर्जन पदाधिकारी संजय प्रसाद, जिला परिवहन पदाधिकारी धीरज प्रकाश, सिविल सर्जन डॉ. जेएफ कैनेडी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पंकज कुमार गिरी, विभिन्न अभियंत्रण विभागों के कार्यपालक अभियंतागण, जिला योजना पदाधिकारी शिशिर तिग्गा सहित विभिन्न विभागों के कार्यालय प्रधान व वरीय पदाधिकारीगण समेत अन्य कर्मी उपस्थित रहें।।

टोलकर्मियों की गुंडागर्दी के विरोध में भाकियू तोमर ने सौंपा ज्ञापन, महापंचायत की चेतावनी
मेरठ/बहसूमा। भारतीय किसान यूनियन (तोमर) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को शिवाया टोल प्लाजा पर टोलकर्मियों द्वारा कथित बदसलूकी, गुंडागर्दी और दुर्व्यवहार के विरोध में जोरदार आवाज उठाई। संगठन के जिलाध्यक्ष चौधरी इंतजार देशवाल के नेतृत्व में किसानों ने दौराला थाने पहुंचकर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में किसानों ने आरोप लगाया कि शिवाया टोल पर आए दिन टोलकर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है, जिससे क्षेत्र के किसानों और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

जिलाध्यक्ष चौधरी इंतजार देशवाल ने साफ कहा कि यदि 5 अप्रैल तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो भारतीय किसान यूनियन (तोमर) द्वारा शिवाया टोल पर महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति उत्पन्न होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

किसानों ने प्रशासन से टोलकर्मियों के व्यवहार में सुधार और व्यवस्था को सुचारु बनाने की मांग की है।
सीता हरण से सुग्रीव राज्याभिषेक तक, रामकथा में झूमे श्रद्धालु
रामेश्वर प्रजापति छांगुर नगरा (बलिया) स्थानीय पुरानी दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्री राम जन्म महोत्सव के अंतर्गत चल रहे रामकथा प्रवचन के आठवें दिन बुधवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आया, जहां श्रद्धालु कथा श्रवण में तल्लीन रहे। कथा व्यास महाराज विजय कौशिक जी ने अपने ओजस्वी एवं मधुर वचनों से रामकथा के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने सीता हरण प्रसंग को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करते हुए धर्म-अधर्म के संघर्ष को समझाया। साथ ही जटायु-रावण युद्ध का वर्णन करते हुए जटायु की वीरता और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा को विस्तार से बताया, जिससे श्रोता भावुक हो उठे। प्रवचन के दौरान बाली-सुग्रीव युद्ध का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया गया। महाराज जी ने बताया कि भगवान श्रीराम ने अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर सुग्रीव को उसका अधिकार दिलाया। इसके पश्चात सुग्रीव के राज्याभिषेक का सुंदर वर्णन करते हुए धर्म की स्थापना का संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ आरती के साथ हुआ, जिसमें विजय नारायण सिंह उर्फ गोपाल जी, निर्भय प्रकाश, मनमोहन सिंह, डॉ. डीपी सिंह, अरविंद नारायण सिंह, डॉ. बृजेश सिंह, बिट्टन सिंह, छट्ठू राम, डॉ. आर.एस. वर्मा, समरजीत सिंह, नंदलाल गुप्ता, आलोक यादव, संजीव गिरी, धनजी सिंह,संजय ,फतेह बहादुर सिंह सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सेवक के रूप में भगवान की आरती उतारकर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। कथा के दौरान “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। आयोजन स्थल पर व्यवस्था सुव्यवस्थित रही और श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ कथा का आनंद लिया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
साइबर ठगी में पश्चिम बंगाल के फरीद की जमानत खारिज
*जिला जज की अदालत ने 2.75 करोड़ की ठगी में नहीं दी राहत*

सुलतानपुर। ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाकर धोखाधड़ी करने व 2.75 करोड़ की साइबर ठगी के आरोप से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल के आरोपी फरीद मलिक की तरफ से प्रस्तुत जमानत अर्जी पर बुधवार को जिला जज की अदालत मे सुनवाई चली। प्रभारी जिला जज संध्या चौधरी की अदालत ने आरोपी के अपराध को समाज के लिए अत्यंत घातक व बेहद गंभीर मानते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दिया है।
कोतवाली नगर के विवेकानन्द नगर के वर्तमान व चांदा थाने के सफीपुर स्थायी निवासी भास्कर पांडेय ने गत 14 अक्टूबर को अशिका वेल्थ बिल्डर्स नेटवर्क के व्हाट्सएप ग्रुप के खिलाफ साइबर थाने में धोखाधड़ी व लाखों की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया। उनके आरोप के मुताबिक साइबर ठगों ने उन्हें अपने जाल में फंसाकर 10.11 लाख रुपए गत अप्रैल व मई माह में जमा कराकर उनसे ठग लिए। ठगी का शिकार होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने मामला दर्ज कराया। वहीं अमेठी जिले के अभिषेक सिंह ने भी इन्हीं साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।आरोपियो का यह गिरोह कई प्रदेशों में फैला हुआ है। पुलिस की जांच में करीब 2.75 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। मामले में लोगों को लुभावनी स्कीम बताकर उन्हें अपने जाल में फंसा कर निवेश करने व बड़े स्तर पर फ्रॉड का काम आरोपी करते रहे। पुलिस ने इस गिरोह में शामिल असम राज्य के हनीफ काजी, शमसुद्दीन,सफीकुल इस्लाम व जाकिर खान एवं मुंबई के संतोष सर्वे, विजय ईश्वर पश्चिम बंगाल के फरीद मलिक को जेल भेजने की कारवाई किया था। मामले में आरोपी जाकिर खान,संतोष सर्वे, विजय इश्वर व अन्य की जमानत अर्जी पूर्व में खारिज हो चुकी है। अदालत ने आरोपी फरीद मलिक की भूमिका को अत्यंत गंभीर मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दिया है।
गौ सेवा के संकल्प को नई दिशा: चौधरी सौदान सिंह बने राष्ट्रीय अध्यक्ष

मेरठ। भारतीय गौ सेवा संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा किए गए चयन के बाद चौधरी सौदान सिंह को संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस घोषणा के साथ ही संगठन में उत्साह की लहर दौड़ गई है और कार्यकर्ताओं ने नए नेतृत्व से गौ सेवा के कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद जताई है।

प्रदेश अध्यक्ष गौरव चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि गौ सेवा संघ का मुख्य उद्देश्य गौवंश की रक्षा, सेवा और संरक्षण करना है। भारतीय संस्कृति में गाय को विशेष महत्व प्राप्त है, और इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संगठन निरंतर कार्य कर रहा है।

मेरठ जनपद में भी संगठन की नई टीम सक्रिय रूप से कार्य करेगी। जिला अध्यक्ष के रूप में विजय भाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि जिला उपाध्यक्ष पद पर परविंदर चौधरी को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अजय भाई, विकास, मनोज, सचिन शर्मा, मोहित कुमार और विशाल कुमार सहित कई कार्यकर्ता संगठन से जुड़कर गौ सेवा के कार्यों में योगदान देंगे।

संगठन पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि नए नेतृत्व में गौ सेवा संघ सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करेगा।
परिषदीय विद्यालयों की बदली तस्वीर — संविलियन विद्यालय जसरा में वार्षिकोत्सव और नवारम्भ कार्यक्रम ने जीता दिल

बच्चों की प्रतिभा, अभिभावकों की भागीदारी और सांस्कृतिक रंगों से गूंजा विद्यालय परिसर, अधिकारियों ने की खुलकर सराहना

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज।विकास खंड जसरा क्षेत्र के संविलियन विद्यालय जसरा में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं नवारम्भ कार्यक्रम उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के बीच भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों तथा गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि अब परिषदीय विद्यालय भी किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं रह गए हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खण्ड विकास अधिकारी जसरा अनिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में परिषदीय विद्यालयों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, अभिभावकों की सहभागिता और बच्चों की रचनात्मक प्रस्तुति होती है, तो बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब सरकारी विद्यालयों की छवि तेजी से बदल रही है और इसका श्रेय शिक्षकों की मेहनत को जाता है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कक्षा 2 के नन्हे बच्चों ने “पेड़ लगाओ – जीवन बचाओ” गीत के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जिसे सुनकर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। वहीं कक्षा 6 के बच्चों ने “राधा संग होली खेले घनश्याम – रंग बरसे” जैसे होली गीत पर मनमोहक प्रस्तुति देकर आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश दिया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मनीषा यादव ने सभी अतिथियों का स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते हुए कहा कि विद्यालय परिवार का प्रयास है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ- साथ संस्कार और मंच देने का अवसर भी मिले। इस अवसर पर एडीओ समाज कल्याण गुलजार सिंह, शिक्षामित्र संघ जिलाध्यक्ष वसीम अहमद, माध्यमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष विश्वनाथ सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष जगत शुक्ला, समाजवादी व्यापार सभा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र केसरवानी, भूमि विकास बैंक अध्यक्ष लाल विष्णु पटेल, समाजसेवी राम बाबू यादव सहित कई गणमान्य लोगों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए मेधावी छात्रों और प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान आशीष सोनकर ने की, जबकि मंच संचालन दिलीप तिवारी ने प्रभावशाली ढंग से किया। इस मौके पर दशरथ भारती, पूनम सिंह, पूर्णिमा यादव, सुमन पाण्डेय, उमा राय, ममता मिश्रा, नीलम, गीता, मीना, धर्मेंद्र कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि यदि इसी प्रकार विद्यालयों में शैक्षिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती रहीं तो परिषदीय विद्यालयों की पहचान नई ऊंचाइयों तक

राम कथा में भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, राम गमन प्रसंग सुन छलक पड़े भाव
ामेश्वर प्रजापति छांगुर नगरा (बलिया) स्थानीय पुरानी दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे श्री राम जन्म महोत्सव के अंतर्गत आयोजित राम कथा प्रवचन के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास महाराज विजय कौशिक जी ने भगवान श्रीराम के वन गमन (राम गमन) प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि जब भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा रखते हुए अयोध्या का राज-पाट त्यागकर वन जाने का निर्णय लिया, तब पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई। माता कौशल्या, सुमित्रा एवं अयोध्यावासियों का विलाप सुन वातावरण भावुक हो उठा। श्रीराम के साथ माता सीता और भाई लक्ष्मण का वन गमन त्याग, प्रेम और कर्तव्य का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा देता है। कथा के इस प्रसंग ने लोगों को जीवन मूल्यों का संदेश दिया, जिसे सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। प्रवचन के उपरांत भगवान श्रीराम की आरती का आयोजन किया गया, जिसमें नगर थाना अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा, पूर्व विधायक धनंजय कनौजिया, मनीष सिंह, श्याम प्रकाश सिंह, डीएन प्रसाद, बिट्टन सिंह, समरजीत सिंह, धनजी, संजय गुप्ता, आशु सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने सेवक के रूप में भाग लेकर आरती की। इस दौरान पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।