सजी अदब और साहित्य की महफिल, मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में देर रात तक गूंजे शेरो-शायरी के रंग*
रितेश मिश्रा
हरदोई !! बिलग्राम कस्बे के गांधी मैरिज हॉल में हरदोई पत्रकार एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित मुशायरा एवं कवि सम्मेलन साहित्यिक सौहार्द और सांस्कृतिक चेतना का शानदार उदाहरण बन गया। देर रात तक चले इस भव्य आयोजन में क्षेत्र सहित आसपास के जनपदों से पहुंचे शायरों और कवियों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अदब, शायरी और कविता का ऐसा समागम देखने को मिला, जिसने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को देर रात तक बांधे रखा।
मुशायरे में हुजूर बिलग्रामी, शादाब गुहर, एजाज रियाज़ बरहक, ऐजाज रहबर, नईम शाद, शाहनवाज अकरम, फखरुद्दीन नश्तर मल्लावांवी, असगर बिलग्रामी, कमर बिलग्रामी, इमरान बिलग्रामी, दिव निशेष बिलग्रामी, अंचल द्विवेदी, जय नारायण अवस्थी तथा हाफिज मज़हर बिलग्रामी समेत अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, देशभक्ति, इंसानियत, भाईचारे और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। कवियों और शायरों की रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कवि राम नारायण शुक्ला ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि, “लड़खड़ाती हुई राजनीति को संभालना साहित्यकारों का मुख्य कार्य है। साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम है और कवि अपनी लेखनी से जनमानस को जागरूक करने का कार्य करते हैं।” उनके इस विचारपूर्ण वक्तव्य का उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. कपिल देव त्रिपाठी ने की जबकि सफल संचालन असगर बिलग्रामी ने किया। आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रमुख रूप से एडवोकेट सुरेश चन्द्र तिवारी, डॉ. रसूल बिलग्रामी, गणेश नारायण कपूर, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप यादव, सय्यद अनवर, एडवोकेट मन्नान, धर्मेंद्र यादव, अजयराज त्रिवेदी, सैफ अली जाफरी, नफीस अहमद फारूक़ क़ुरैशी, अतुल द्विवेदी, सुधीर अवस्थी, सहित एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाक्टर कपिल देव त्रिपाठी ने अपने संदेश में कहा कि हरदोई पत्रकार एसोसिएशन संस्था का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। उन्होंने एसोसिएशन के पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संवाद और रचनात्मक सोच को मजबूत करते हैं तथा नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने बिलग्राम की धरती को साहित्य से जुड़ी धरती बताया और कहा कि इस धरती पर रसलीन, मधनायक जैसे महान कवियों ने जन्म लिया है।
देर रात तक चले इस कार्यक्रम में श्रोताओं ने कवियों और शायरों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। आयोजन ने क्षेत्र के साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान की तथा अदबी माहौल को और अधिक मजबूती दी।
वाराणसी में भूटान बनाएगा बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस, 2 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी यूपी सरकार

लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार वाराणसी में रायल गवर्नमेंट ऑफ भूटान को बौद्ध मंदिर एवं गेस्ट हाउस निर्माण के लिए 02 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी। इसके लिए वाराणसी के मौजा पिण्डरा, अजईपुर कोलसला में भूमि चिन्हित की गई है और लीज डीड की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जा रही है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शासन स्तर पर लीज डीड की सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से डीड पर हस्ताक्षर के लिए विशेष सचिव पर्यटन विभाग मृदुल चौधरी को अधिकृत किया गया है। भूमि हस्तांतरण के लिए दोनों पक्षों के बीच जल्द ही एमओयू (समझौता ज्ञापन) का निष्पादन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि लीज डीड पर रायल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के प्रतिनिधियों तथा पर्यटन विभाग की ओर से हस्ताक्षर किए जाएंगे। भूटान सरकार की तरफ से रायल गवर्नमेंट ऑफ भूटान दूतावास, सांगचु सांगचु प्रमुख बौद्ध मंदिर बोधगया और छोटेन दोरजी लेयतशो दुगचेन को प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया है। यह पूरी प्रक्रिया प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि काशी और सारनाथ विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं बौद्ध आस्था केंद्र हैं, जहां पूरे वर्ष देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वाराणसी में बौद्ध मंदिर बनने से भारतीय और विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बौद्ध पर्यटक पहले से ही बड़ी संख्या में सारनाथ, संकिसा और कुशीनगर जैसे स्थलों पर पहुंचते हैं। वाराणसी में बनने वाला यह नया बौद्ध मंदिर बौद्ध सर्किट को और मजबूत करेगा। साथ ही, बौद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाले स्थलों को आधुनिक आधारभूत सुविधाओं से सुसज्जित करने का कार्य भी सरकार द्वारा लगातार किया जा रहा है।
आजमगढ़: खानपुर गांव में सामाजिक न्याय के प्रणेता चंद्रजीत यादव की मनाई गई पुण्य तिथि
जमगढ़।सरायमीर स्थित खानपुर गांव में सामाजिक न्याय के प्रणेता चंद्रजीत यादव की 19 वीं पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके लोगों ने नमन किया और सामाजिक न्याय पर एक गोष्ठी भी हुई।गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कॉमरेड रामसूरत यादव ने और संचालन कार्यक्रम के आयोजक राम प्रसाद यादव ने किया। इस अवसर पर पूर्व जिला जज शिवबचन यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव भारत सरकार में इस्पात और खान मंत्री के रूप में बहुत सराहनीय कार्य किए। गुटनिरपेक्षता,शांति और एकजुटता के लिए उनके प्रयासों को देश,विदेश में सराहना मिली।एक राजनेता के रूप में उनकी छवि बहुत ही साफ सुथरी थी। सीपीआई जिला सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय ने कहा कि चंद्रजीत यादव 26 साल की उम्र में मोहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र से सीपीआई के टिकट पर जीतकर पहली बार उप्र की विधानसभा में पहुंचे।इस उम्र में विधायक बनने का पूरे देश में पहला रिकॉर्ड भी चंद्रजीत यादव ने बनाया।वे समाजवादी सिद्धांतों पर हमेशा अडिग थे।यही कारण था कि उन्होंने सामाजिक न्याय का नारा दिया और उसपर मजबूती से आजीवन कार्य किए।इन्हीं सारी खूबियों के चलते चंद्रजीत यादव को लोग बड़े आदर से याद करते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य और किसान नेता राजनेत यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय का नारा तब फलीभूत होगा जब हम अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों को समझकर उसपर अमल करेंगे।अन्य वक्ताओं ने भी जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय के लिए जाति,धर्म से ऊपर उठकर समाज के सभी वंचित तबकों के लिए कार्य करना ही चंद्रजीत यादव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर जिला पंचायत सदस्य आराधना गौतम,सूबेदार रामजनम,जामवंत,अमरनाथ यादव,झूरी,आशीष,डॉ बृजमोहन आदि लोग उपस्थित रहे।
गंगा दशहरा पर आस्था का सैलाब: लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
फर्रुखाबाद l गंगा दशहरा पर जनपद के विभिन्न घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां गंगा के पावन जल में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे और पुण्य लाभ अर्जित किया। गंगा तटों पर दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने दान-दक्षिणा  अपने जीवन को पुण्य के लिए दिया।गंगा स्नान के लिए जिले के पांचालघाट, बरगदिया घाट , सिंगीरामपुर, ढाईघाट (शमशाबाद), दुर्वासा आश्रम जैसे प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। न केवल शहर के ही नहीं बल्कि बरेली, बदायूं, मैनपुरी, शिकोहाबाद, हरदोई आदि जनपदों से भी श्रद्धालु गंगा स्नान हेत पहुंचे।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल, पुलिस गोताखोरों की तैनाती की थी। बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था, स्वास्थ्य शिविर और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
बताते है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।गंगा की तेज धारा को रोकने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समाहित किया और फिर धीरे-धीरे उन्हें धरती पर प्रवाहित किया। तभी से इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि गंगा दशहरा पर स्नान से न केवल शरीर और मन की शुद्धि होता है,बल्कि पूर्वजों की आत्मा को भी शांति मिलती है।भक्तों ने कहा कि गंगा मां केवल एक नदी नहीं, मोक्षदायिनी हैं जो समस्त दुखों का हरण करती हैं।

पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देश पर पुलिस द्वारा ज्येष्ठ गंगा दशहरा मेला पर्व के दृष्टिगत थाना कादरीगेट क्षेत्र के पांचाल घाट, थाना कमालगंज क्षेत्र के सिंघी रामपुर घाट व थाना शमसाबाद क्षेत्र के ढाई घाट पर गंगा स्नान एवं मेला का सकुशल संचालन कराया जा रहा है । घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है । सुरक्षा की दृष्टि से घाटों पर ड्रोन कैमरा के जरिये नजर रखी जा रही है तथा प्रत्येक घाट पर नाव एवं गोताखोर तैनात किये गये हैं लाउड स्पीकर के जरिये श्रद्दालुओं को गहरे पानी में न जाने की सलाह दी जा रही है ।
एक जीवित विश्वविद्यालय का स्वरूप है स्त्री
—  डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार


माना कि महिलाएँ आज भी
रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र,
प्रबंधन, बैंकिंग और अनेक क्षेत्रों में
संख्या के आधार पर पुरुषों से कम दिखाई देती हैं…

लेकिन फिर भी
इन सभी क्षेत्रों के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों,
अर्थशास्त्रियों, प्रबंधकों और विद्वानों की
पहली गुरु, पहली पाठशाला
और पहली प्रयोगशाला
एक स्त्री ही होती है —
माँ।

वह प्रयोगशाला
जहाँ इंसान गढ़े जाते हैं…
जहाँ संस्कारों की नींव रखी जाती है,
जहाँ प्रेम, त्याग, अनुशासन
और मानवता का निर्माण होता है।

स्त्रियाँ जन्मजात विदुषी होती हैं।
वह लक्ष्मी भी हैं,
अन्नपूर्णा भी हैं,
सरस्वती भी हैं…
और समय आने पर
दुर्गा भी बन जाती हैं।

जिसे दुनिया अक्सर
केवल “घर संभालना” कहकर
छोटा समझ लेती है,
असल में वही
सबसे बड़ा प्रबंधन है।

एक पुरुष शायद घर चला सकता है,
पर एक स्त्री
पूरे घर में जीवन भर देती है।
वह दीवारों को घर
और घर को परिवार बनाती है।

इतिहास गवाह है
कि संसार के बड़े-बड़े वीर,
महापुरुष और युग निर्माता भी
किसी स्त्री की गोद में ही
संस्कार पाकर महान बने।

वह माँ राजमाता जिजाबाई ही थीं
जिन्होंने बालक शिवा को
केवल पुत्र नहीं,
एक वीर, धर्मरक्षक और राष्ट्रनायक
छत्रपति शिवाजी महाराज बनाया।

वह माँ जयवंता बाई ही थीं
जिन्होंने अपने पुत्र में
स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रप्रेम के
ऐसे संस्कार डाले
कि वही बालक आगे चलकर
महाराणा प्रताप बना।

क्योंकि संसार की हर महान प्रतिभा की
पहली पाठशाला
एक माँ होती है।

एक स्त्री कितनी विदुषी होती है,
आइए उसके जीवन को ही
एक जीवित विश्वविद्यालय मानकर
उसकी अद्भुत विद्वता को समझने का प्रयास करें।

क्या कभी किसी ने
सच में समझा है
उस स्त्री की बुद्धिमत्ता को
जो दिन-रात
सिर्फ घर नहीं संभालती,
बल्कि जीवन सँवारती है?

हम डिग्रियों में ज्ञान ढूँढते हैं,
पद और पहचान में सम्मान ढूँढते हैं…
पर हर घर में
एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय बसता है।

जहाँ बिना किसी किताब के
हर दिन जीवन का विज्ञान जन्म लेता है…
जहाँ अनुभव ही शिक्षा है,
और प्रेम ही सबसे बड़ी डिग्री।

जिसे दुनिया केवल घर समझती है,
वहीं से पीढ़ियाँ संस्कार सीखती हैं।
वहाँ केवल दिनचर्या नहीं चलती,
वहाँ रिश्ते, संवेदनाएँ
और सभ्यताएँ जन्म लेती हैं।

गणित वहाँ हर रोज़ मुस्कुराता है—

कितने लोगों की कितनी ज़रूरतें,
कहाँ कितना समय देना है,
कैसे सीमित साधनों में
सबकी इच्छाओं को संतुलित करना है।

बिना कॉपी-कलम के
हर हिसाब सही हो जाता है,
क्योंकि माँ के अनुभव में
ईश्वर का ज्ञान समा जाता है।

भौतिक विज्ञान भी वहीं बसता है—

कब धैर्य रखना है,
कब दृढ़ होना है,
कब मौन रहकर समझाना है,
और कब आवाज़ उठानी है।

जीवन की परिस्थितियों का
इतना सटीक संतुलन,
शायद किताबें भी
इतने प्रेम से न सिखा पाएँ।

रसायन विज्ञान का अद्भुत संसार—

वह टूटे मनों को जोड़ देती है,
क्रोध को प्रेम में बदल देती है,
उदासी में आशा घोल देती है,
और संघर्षों में साहस मिला देती है।

उसके स्पर्श में ऐसा जादू होता है
कि बिखरे हुए रिश्ते भी
फिर मुस्कुराने लगते हैं।

प्रबंधन कला की वह जीवित मिसाल है—

एक साथ चार काम करना,
सबको समय पर संभालना,
कम समय में सब व्यवस्थित करना।

यह किसी बड़ी कंपनी का
मैनेजमेंट नहीं तो और क्या है?

कॉरपोरेट की बड़ी-बड़ी बैठकों में
जिस “मैनेजमेंट स्किल” की बातें होती हैं,
उसका सबसे जीवंत रूप तो
सदियों से एक स्त्री के जीवन में दिखाई देता है।

मल्टीटास्किंग उसकी पहचान है—

एक तरफ चाय उबल रही है,
पूजा की थाली भी सज रही है,
पति और बच्चों का टिफिन भी भर रहा है,
बच्चों को उठाकर तैयार भी किया जा रहा है।

फोन भी उठा रही है,
दरवाज़ा भी खोल रही है,
और बारिश आ जाए तो
छत से कपड़े भी दौड़कर ला रही है।

खुद भी ऑफिस के लिए
तैयार हो रही है,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान रहती है,
और घर व्यवस्थित चलता रहता है।

उसकी निरीक्षण शक्ति अद्भुत होती है—

दाल पकी या नहीं,
बच्चे का मन उदास है या नहीं,
पति की थकान चेहरे पर दिख रही है या नहीं,
घर में कौन चुपचाप किसी चिंता में है—

उसकी नज़र सब समझ जाती है।
वह शब्दों से पहले
चेहरों की भाषा पढ़ लेती है।

अर्थशास्त्र भी वही संभालती है—

सीमित बजट में घर चलाना,
भोजन तैयार करना,
बचे हुए संसाधनों का सदुपयोग करना,
मौसम के अनुसार आवश्यकताओं को चुनना।

तीज-त्योहार की तैयारी,
अतिथियों की आवभगत,
नेग और रिश्तों का निर्वाह—
घर की आर्थिक नीति
अक्सर उसी की समझ से चलती है।

मनोविज्ञान भी उसे भलीभाँति आता है—

किसका मन उदास है,
किसे प्रोत्साहन चाहिए,
कौन बिना कहे दर्द छिपा रहा है—

वह सब जानती है।

कभी वह
मदर टेरेसा सी ममता बन जाती है,
तो कभी अपने दुःख छिपाकर
सबके जीवन में उजाला भर देती है।

वह केवल परिवार नहीं संभालती,
पूरा संसार सँभालने की क्षमता रखती है।

वह स्त्री चाहे पढ़ी-लिखी हो या नहीं,
अंग्रेज़ी जानती हो या नहीं,
पर उसके अनुभव, धैर्य और प्रेम के आगे
बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ भी छोटी लगती हैं।

वह केवल अन्नपूर्णा नहीं,
समय आने पर दुर्गा भी बन जाती है।
प्रेम दे तो गंगा सी निर्मल,
और अन्याय हो तो
चंडी सी प्रखर हो जाती है।

स्त्री को कम मत आँकिए,
क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक,
डॉक्टर, लेखक, सैनिक और उद्योगपति भी
सबसे पहले
एक माँ की गोद में ही गढ़े जाते हैं।

दुनिया की हर महान प्रतिभा की
पहली प्रयोगशाला,
एक स्त्री की ममता ही होती है।

क्योंकि
स्त्री केवल घर नहीं संभालती,
वह पीढ़ियाँ गढ़ती है,
संस्कार बोती है,
और प्रेम से संसार रचती है।

इसलिए अगली बार
जब वह चुपचाप
सबकी चिंता करती दिखाई दे,
तो उसे सामान्य मत समझिए…

एक पल रुककर
उस माँ, पत्नी, बहन या बेटी को
दिल से धन्यवाद ज़रूर कहिए,
जो अपने हिस्से की थकान छिपाकर भी
आपके जीवन को सहज बनाती है।

और केवल धन्यवाद ही नहीं…
कभी उसके लिए भी
थोड़ा समय निकालिए,
उसकी मुस्कान का कारण बनिए।

आइए नमन करें
उस महामानवी को,
जो अपने हाथों से
केवल कार्य नहीं करती,
बल्कि पूरे घर में
प्रेम, अपनापन और जीवन भर देती है।

जो हर परेशानी को
मुस्कान से हल्का कर देती है,
और अपने त्याग से
घर को सचमुच स्वर्ग बना देती है।
छात्रों को फर्श से अर्श पर पहुंचाने का निःशुल्क नीट कोचिंग देते हैं डॉ मिथिलेश कुमार बिंद
भदोही। ग्राम सभा हरिचंद पुर भीटी हंडिया प्रयागराज के रहने वाले डॉ मिथिलेश कुमार बिंद चर्म रोग विशेषज्ञ स्वरूप रानी हॉस्पिटल प्रयागराज में कार्यरत है।इस समय पूरे भदोही में चर्चा का विषय बने हुए हैं इनकी सोच हर वर्ष लगभग 100 बच्चों को ममता चैरिटेबल ट्रस्ट एंड स्किन केयर हॉस्पिटल सुभाष नगर भदोही के प्रांगण में एक सुपर 25 क्लासेस खोलकर निशुल्क नीट की तैयारी स्वयं और प्रशिक्षित प्रोफेसर डॉक्टर्स से नीट  विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देते हैं।बी एस वी एस न्यूज़ के साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य है कि जौनपुर, प्रयागराज, भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर ,जैसे शहरों में सुपर 25 प्रशिक्षण केंद्र खोलकर बच्चों के भविष्य का निर्माण करें।बच्चों के भविष्य और देश के निर्माण में सहायक महान समाजसेवी डॉ मिथिलेश कुमार बिंद को बहुचर्चित संगठन बिंद समाज विकास संघ ने अपनी टीम के साथ पहुंचकर बच्चों को मेडल और डॉ मिथिलेश कुमार बिंद  को, संघ का स्मृति चिन्ह दीवाल घड़ी से सम्मानित किया।शुभकामना देते हुए संघ ने कहा कि जिस तरह से घड़ी निरंतर चलती रहती है समय के महत्व को समझती है इस तरह आप हमेशा रुके  ना ,थके ना ,हिम्मत ना हारे और बच्चों के भविष्य को निरंतर निर्माण करते रहे।मुख्य रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शेषधर बिंद सहित,सूरत गुजरात प्रदेश अध्यक्ष फूलचंद बिंद, सूरत महासचिव दीनानाथ बिंद, सूरत प्रवक्ता गुलाब चंद्र बिंद, सूरत युवसेना अध्यक्ष सुरेश कुमार बिंद, बी एस वी एस न्यूज रिपोर्टर अरविंद बिंद,भदोही जिला अध्यक्ष डॉ रमाशंकर बिंद,जिला भदोही सलाहकार डॉ हरिश्चंद्र बिंद,जिला भदोही संगठन मंत्री मोहनलाल बिंद, युवासेना संगठन मंत्री राज बिहारी बिंद,उदल कुमार बिंद, बसंत लाल मौर्य,सुभाष बिंद, गोरेलाल बिंद मौजूद रहे।
मारपीट और गाली-गलौज के मामले में एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
धर्म सिंह
हरदोई-मल्लावां थाना पुलिस ने मारपीट और गाली-गलौज के मामले में एक नामजद आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार 23 मई 2026 को वादी आलोक मिश्रा पुत्र अमित मिश्रा निवासी ग्राम गंगारामपुर थाना मल्लावां ने थाने पर तहरीर देकर आरोप लगाया था कि हिमांशु पटेल पुत्र अशोक कुमार निवासी ग्राम तेंदुआ थाना मल्लावां समेत अन्य लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की।
तहरीर के आधार पर थाना मल्लावां में मुकदमा अपराध संख्या 265/2026 धारा 115(2), 352, 351(3) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने धारा 308(5) बीएनएस की बढ़ोत्तरी भी की।
मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नामजद आरोपी हिमांशु पटेल पुत्र अशोक कुमार निवासी ग्राम तेंदुआ थाना मल्लावां जनपद हरदोई को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक राधेश्याम और कांस्टेबल अंकुर राणा शामिल रहे।
देवघर भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 : विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन ।
देवघर: भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन - फाइनल में बादशाह - 11 को 5 विकेट से रौंदा - आकर्षक आतिशबाजी के बीच केकेएन स्टेडियम में समापन देवघर स्थानीय केकेएन स्टेडियम में खेले गए 'स्व. बर्धन खवाड़े ट्रॉफी सीजन- 2 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में विरांश स्टाइलिश- 11 ने बादशाह-11 को 5 विकेट से हराकर चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। खेल प्रेमियों की भारी भीड़ के बीच खेला गया खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। इस अवसर पर अपने संबोधन के क्रम में खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े ने टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर बधाई देते हुए कहा कि जिस तरह से यह क्रिकेट टूर्नामेंट देवघर सहित झारखंड में प्रसिद्ध हो रहा है आने वाले दिनों में इसे और भव्य रूप दिया जाएगा। खिलाड़ियों के जोश को देखते हुए घोषणा की कि खिलाड़ियों को और बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए अगले साल स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट को और आकर्षक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नकद पुरस्कार राशि भी बढ़ाई जाएगी। कहा कि क्रिकेट सहित अन्य खेलों को भी भी बढ़ावा देने के लिए हमेशा पहल होगी। कोशिश के प्रयासों ने दिलायी जीत :- टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बादशाह - 11 की शुरुआत ठीक-ठाक रही, लेकिन विरांश स्टाइलिश 11 की कसी हुई गेंदबाजी के सामने निर्धारित 12 ओवरों में 9 विकेट खोकर 119 रन ही बना सकी। बादशाह 11 की ओर से सीनियर वर्मा ने सर्वाधिक 39 रन (24 गेंद) और अभिषेक ने 22 रनों का योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 की तरफ से तुपलाला ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 3 ओवर में केवल 16 रन देकर 2 विकेट चटकाए। 120 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी विरांश स्टाइलिश 11 की शुरुआत बेहद खराब रही और शीर्ष 4 बल्लेबाज मात्र 14 रन के कुल स्कोर पर पवेलियन लौट गए। उसके बाद कोशिश कुमार ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए मैच का पासा ही पलट दिया। कोशिश ने मात्र 31 गेंदों में 4 चौकों और 6 गगनचुंबी छक्कों की मदद से नाबाद 70 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। वहीं, मोनू सिंह ने 29 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 ने 11.1 ओवर में 5 विकेट खोकर 123 रन बनाकर खिताबी जीत दर्ज की। विजेता और उपविजेता पर हुई पैसों की बारिश :- टूर्नामेंट के समापन के बाद मुख्य अतिथि सह टूर्नामेंट के चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े सहित विशिष्ट अतिथि एसबीआई के आरएम प्रशांत मिश्रा ने संयुक्त रूप से विजेता टीम विरांश स्टाइलिश 11 के कैप्टन को चमचमाती ट्रॉफी और 1 लाख 10 हजार रुपए का नकद पुरस्कार सौंपा। वहीं, उपविजेता टीम बादशाह 11 के कैप्टन व फ्रेंचाइजी को प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. निशांत चौरसिया और टोयोटा धनबाद के मैनेजर राजीव रंजन द्वारा उप- विजेता ट्रॉफी और 55 हजार रुपए की नगद राशि प्रदान की गई। टूर्नामेंट के दौरान दर्शकों का उत्साह भी चरम पर था। कैच पकड़ने वाले दर्शक को 5100 :- चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े द्वारा स्टैंड्स में एक शानदार कैच पकड़ने वाले दर्शक राज को 5100 रुपए का नकद पुरस्कार भी दिया गया। टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कार :- - मैन ऑफ द सीरीज :- लोकनाथ (पीवीआर पैंथर) - बेस्ट बैट्समैन :- संजू यादव (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट बॉलर :- विशाल (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट फील्डर :- अभिषेक (बादशाह 11) इनकी रही भूमिका :- मैच में निर्णायक (अंपायर) की भूमिका लाली और खुशहाल शेख ने निभाई, जबकि राकेश राय, अशोक कुमार, शैलेश कुमार और गौरव ने उद्घोषक के रूप में समां बांधा। कौन-कौन रहे उपस्थित :- मंच पर उपस्थित अतिथियों और कमेटी सदस्यों में आयोजन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह, रितेश केसरी, धर्मेंद्र देव और ऋषि राज सिंह ने भी खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर मुख्य रूप से नवीन शर्मा मुखिया सुशील महथा, दीपक दुबे, अजय खवाड़े, रोहित कुमार, नीरज झा, धीरज और पंकज वाजपेई आदि उपस्थित रहे। डॉल्फ़िन डांस के कलाकारों ने मोहा मन :- डॉल्फिन डांस एकेडमी के बच्चों द्वारा प्रशिक्षक पल्लवी झा के नेतृत्व में गणेश वंदना सहित अन्य गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
समाज को बांटना और तोड़ना, कांग्रेस की फितरत, यह षड्यंत्र सफल नहीं होने देंगे : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने और तोड़ने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया है। आदिवासी समागम का विरोध करने को लेकर श्री मरांडी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने इन दलों को चेताते हुए कहा कि समाज को बांटने और मूल आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने की उनकी साजिश कतई सफल नहीं होगी। श्री मरांडी भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई अंतर नहीं है। बल्कि इनमें समानता है। ये प्रकृति की पूजा करते हैं और पेड़, पहाड़, पत्थर, जल, धरती माता की भी पूजा करते हैं। सरना, सनातन और हिंदू में ही जाति व्यवस्था है। यहां जातियों की अनेकों समूह हैं। यहां 36 कोटि देवी देवता हैं। आदिवासी समाज में देश के अंदर 700 से अधिक जातियां हैं, झारखंड में भी 32-33 जातियां हैं। अपने गांव घरों में इनकी अपनी अपनी देवी देवता हैं। यह जो विविधता में एकता है, इसका समावेश सनातन, हिंदू, सरना में है। जहां इतनी अधिक समानता है वहां पर कांग्रेस और jmm के लोग कहते हैं कि इन्हें हिंदू बनाया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि हिंदू बनाने का कहीं कोई परंपरा ही नहीं है। बनाए तो क्रिश्चन और मुसलमान जाते हैं। सरना, सनातन और हिंदू तो पैदाइशी होते हैं।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास सभी को पता है। कांग्रेस का गठन करने वाले अंग्रेज रहे हैं। 1857 के सिपाही विद्रोह के बाद ही अंग्रेजों को लगने लगा कि अब देश को संभालना होगा तो एक सेफ्टी वाल्ब के रूप में कांग्रेस पार्टी का गठन किया गया। अंग्रेज ने समाज को विभाजित और तोड़कर, लोगों को आपस में लड़ा कर इस देश पर राज किया। कांग्रेस पार्टी तो उन्हीं के एक मानस पुत्र रहे हैं। इसलिए जब देश स्वतंत्र हुआ तो महात्मा गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी को खत्म कर देनी चाहिए परंतु कांग्रेस ने गांधी जी की बातों को अनसुना कर दिया। अंग्रेजों की "फूट डालो और राज करो" की संस्कृति पर ही कांग्रेस देश में लंबे वर्षों तक कार्य करती रही। अब जब देश से कांग्रेस की विदाई हो रही है तो यह पार्टी समाज को तोड़ने का नया-नया हथकंडा अपना रही है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा भाजपा व आरएसएस पर आदिवासियों को हिंदू बनाने का लगाया गया आरोप उसी हथकंडा का एक हिस्सा है। समाज को तोड़ना और कुर्सी प्राप्त करना तो कांग्रेस की फितरत है।

श्री मरांडी ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी समाज में विभाजन पैदा करने का काम कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पेसा कानून की नियमावली में आदिवासी परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। जो लोग आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं को बदलने का काम करते हैं, उन पर ये दल मौन रहते हैं। इसलिए कांग्रेस और झामुमो के मुँह से आदिवासी हित की बात शोभा नहीं देती।

श्री मरांडी ने कहा कि जहां 32वां या सुदृढ़ीकरण कर आदिवासियों को क्रिश्चियन बनाया जा रहा है, कलमा पढ़ाकर किसी को मुसलमान बनाया जाता है, लोगों की संस्कृति, परंपरा, विश्वास, आस्था को मिटाने का काम किया जा रहा है, उस मुद्दे पर कांग्रेस और झामुमो के लोग कुछ नहीं बोलते हैं। वोट बैंक की राजनीति के लिए यहां के आदिवासी, जनजाति जो मूल समाज है उनको कैसे समाज से अलग किया जाए, उनमें अलगाव पैदा किया जाए, इसके लिए षड्यंत्र किया जा रहा है, इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। सत्ता में बैठे कांग्रेस और jmm के लोग समाज को सिर्फ बांटने तोड़ने का काम कर रहे हैं। इस प्रकार की नीतियां बहुत दिनों तक नहीं चलेगी। बहुत दिनों तक इन दलों ने बरगलाकर समाज को गुमराह किया। अब समाज जागरूक हो चुका है। समाज की अपनी मूल पहचान है, इसे समाज पहचान चुका है।

श्री मरांडी ने कहा कि जितनी भी जनजातियों की पूजा स्थल है, उसको संरक्षित, सुरक्षित और विकसित करने की जरूरत है। जगह-जगह पर सरना मसना, पहनाई की जमीन जमीन बर्बाद हो रही है, माफियाओं के चंगुल में जा रहा है। इसको बचाने और संरक्षित करने की जरूरत है, तभी संस्कृति बचेगी। जब झारखंड बना और हमारी सरकार बनी तो हमने ही जाहेरथान की घेराबंदी शुरू करवाई, मांझी थान बनवाने का काम शुरू हुआ। रघुवर दास की सरकार ने इस काम को आगे बढ़ाया।

इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित रही।

भारतीय किसान यूनियन चौधरी का कुनबा बढ़ा,2 दर्जन से अधिका युवाओं ने संभाली संगठन की कमान

युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलबहार के नेतृत्व में दर्जनों युवाओं ने ली सदस्यता, किसान हितों की लड़ाई को और मजबूत करने का लिया संकल्प

आशीष कुमार

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन चौधरी का संगठन लगातार मजबूत होता जा रहा है। संगठन के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलबहार के नेतृत्व में दर्जनों युवाओं ने संगठन की सदस्यता ग्रहण कर किसान हितों की आवाज को बुलंद करने का संकल्प लिया। युवाओं के बढ़ते जुड़ाव से संगठन में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है।कार्यक्रम के दौरान संगठन में नई जिम्मेदारियों की भी घोषणा की गई। राजकुमार सक्सेना को भारतीय किसान यूनियन चौधरी का उत्तर प्रदेश मंत्री नियुक्त किया गया, जबकि सावन कुमार झा को पुरकाजी युवा ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। नई जिम्मेदारियों के ऐलान के बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने दोनों पदाधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत कर शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलबहार ने कहा कि संगठन किसानों, मजदूरों और युवाओं की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवाओं का संगठन से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि किसान हितों की लड़ाई को नई ताकत मिल रही है। संगठन गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं को उठाने और उनके
अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगा।नवनियुक्त उत्तर प्रदेश मंत्री राजकुमार सक्सेना ने कहा कि संगठन ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, वह उसका पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करेंगे। वहीं सावन कुमार झा ने कहा कि युवाओं को जोड़कर संगठन को और मजबूत बनाया जाएगा तथा किसानों की आवाज को प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा।ग्यास खान राष्ट्रीय महामंत्री चिकित्सा प्रकोष्ठ,युवा जिला अध्यक्ष आरिफ चौधरी,सावन पुरकाजी युवा ब्लॉक अध्यक्ष,राजकुमार सक्सेना प्रदेश मंत्री उत्तर प्रदेश,अजय सिंह,पप्पी कुमार,सनी कुमार,मनजीत सिंह,रितिक कुमार,रोहित कुमार,अंशुल कुमार,बलराम सिंह,सचिन,निकित,प्रियांशु कुमार,जीतेन्द्र नाथीराम,मोनू सौरव, विक्की कुमार,रवी कुमार सहित अनेको कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
सजी अदब और साहित्य की महफिल, मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में देर रात तक गूंजे शेरो-शायरी के रंग*
रितेश मिश्रा
हरदोई !! बिलग्राम कस्बे के गांधी मैरिज हॉल में हरदोई पत्रकार एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित मुशायरा एवं कवि सम्मेलन साहित्यिक सौहार्द और सांस्कृतिक चेतना का शानदार उदाहरण बन गया। देर रात तक चले इस भव्य आयोजन में क्षेत्र सहित आसपास के जनपदों से पहुंचे शायरों और कवियों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अदब, शायरी और कविता का ऐसा समागम देखने को मिला, जिसने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को देर रात तक बांधे रखा।
मुशायरे में हुजूर बिलग्रामी, शादाब गुहर, एजाज रियाज़ बरहक, ऐजाज रहबर, नईम शाद, शाहनवाज अकरम, फखरुद्दीन नश्तर मल्लावांवी, असगर बिलग्रामी, कमर बिलग्रामी, इमरान बिलग्रामी, दिव निशेष बिलग्रामी, अंचल द्विवेदी, जय नारायण अवस्थी तथा हाफिज मज़हर बिलग्रामी समेत अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, देशभक्ति, इंसानियत, भाईचारे और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। कवियों और शायरों की रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कवि राम नारायण शुक्ला ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि, “लड़खड़ाती हुई राजनीति को संभालना साहित्यकारों का मुख्य कार्य है। साहित्य समाज को दिशा देने का माध्यम है और कवि अपनी लेखनी से जनमानस को जागरूक करने का कार्य करते हैं।” उनके इस विचारपूर्ण वक्तव्य का उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. कपिल देव त्रिपाठी ने की जबकि सफल संचालन असगर बिलग्रामी ने किया। आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रमुख रूप से एडवोकेट सुरेश चन्द्र तिवारी, डॉ. रसूल बिलग्रामी, गणेश नारायण कपूर, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप यादव, सय्यद अनवर, एडवोकेट मन्नान, धर्मेंद्र यादव, अजयराज त्रिवेदी, सैफ अली जाफरी, नफीस अहमद फारूक़ क़ुरैशी, अतुल द्विवेदी, सुधीर अवस्थी, सहित एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाक्टर कपिल देव त्रिपाठी ने अपने संदेश में कहा कि हरदोई पत्रकार एसोसिएशन संस्था का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। उन्होंने एसोसिएशन के पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संवाद और रचनात्मक सोच को मजबूत करते हैं तथा नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने बिलग्राम की धरती को साहित्य से जुड़ी धरती बताया और कहा कि इस धरती पर रसलीन, मधनायक जैसे महान कवियों ने जन्म लिया है।
देर रात तक चले इस कार्यक्रम में श्रोताओं ने कवियों और शायरों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। आयोजन ने क्षेत्र के साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान की तथा अदबी माहौल को और अधिक मजबूती दी।
वाराणसी में भूटान बनाएगा बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस, 2 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी यूपी सरकार

लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार वाराणसी में रायल गवर्नमेंट ऑफ भूटान को बौद्ध मंदिर एवं गेस्ट हाउस निर्माण के लिए 02 एकड़ भूमि उपलब्ध कराएगी। इसके लिए वाराणसी के मौजा पिण्डरा, अजईपुर कोलसला में भूमि चिन्हित की गई है और लीज डीड की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जा रही है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शासन स्तर पर लीज डीड की सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से डीड पर हस्ताक्षर के लिए विशेष सचिव पर्यटन विभाग मृदुल चौधरी को अधिकृत किया गया है। भूमि हस्तांतरण के लिए दोनों पक्षों के बीच जल्द ही एमओयू (समझौता ज्ञापन) का निष्पादन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि लीज डीड पर रायल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के प्रतिनिधियों तथा पर्यटन विभाग की ओर से हस्ताक्षर किए जाएंगे। भूटान सरकार की तरफ से रायल गवर्नमेंट ऑफ भूटान दूतावास, सांगचु सांगचु प्रमुख बौद्ध मंदिर बोधगया और छोटेन दोरजी लेयतशो दुगचेन को प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया है। यह पूरी प्रक्रिया प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि काशी और सारनाथ विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं बौद्ध आस्था केंद्र हैं, जहां पूरे वर्ष देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वाराणसी में बौद्ध मंदिर बनने से भारतीय और विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि बौद्ध पर्यटक पहले से ही बड़ी संख्या में सारनाथ, संकिसा और कुशीनगर जैसे स्थलों पर पहुंचते हैं। वाराणसी में बनने वाला यह नया बौद्ध मंदिर बौद्ध सर्किट को और मजबूत करेगा। साथ ही, बौद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाले स्थलों को आधुनिक आधारभूत सुविधाओं से सुसज्जित करने का कार्य भी सरकार द्वारा लगातार किया जा रहा है।
आजमगढ़: खानपुर गांव में सामाजिक न्याय के प्रणेता चंद्रजीत यादव की मनाई गई पुण्य तिथि
जमगढ़।सरायमीर स्थित खानपुर गांव में सामाजिक न्याय के प्रणेता चंद्रजीत यादव की 19 वीं पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके लोगों ने नमन किया और सामाजिक न्याय पर एक गोष्ठी भी हुई।गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कॉमरेड रामसूरत यादव ने और संचालन कार्यक्रम के आयोजक राम प्रसाद यादव ने किया। इस अवसर पर पूर्व जिला जज शिवबचन यादव ने कहा कि चंद्रजीत यादव भारत सरकार में इस्पात और खान मंत्री के रूप में बहुत सराहनीय कार्य किए। गुटनिरपेक्षता,शांति और एकजुटता के लिए उनके प्रयासों को देश,विदेश में सराहना मिली।एक राजनेता के रूप में उनकी छवि बहुत ही साफ सुथरी थी। सीपीआई जिला सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय ने कहा कि चंद्रजीत यादव 26 साल की उम्र में मोहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र से सीपीआई के टिकट पर जीतकर पहली बार उप्र की विधानसभा में पहुंचे।इस उम्र में विधायक बनने का पूरे देश में पहला रिकॉर्ड भी चंद्रजीत यादव ने बनाया।वे समाजवादी सिद्धांतों पर हमेशा अडिग थे।यही कारण था कि उन्होंने सामाजिक न्याय का नारा दिया और उसपर मजबूती से आजीवन कार्य किए।इन्हीं सारी खूबियों के चलते चंद्रजीत यादव को लोग बड़े आदर से याद करते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य और किसान नेता राजनेत यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय का नारा तब फलीभूत होगा जब हम अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों को समझकर उसपर अमल करेंगे।अन्य वक्ताओं ने भी जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय के लिए जाति,धर्म से ऊपर उठकर समाज के सभी वंचित तबकों के लिए कार्य करना ही चंद्रजीत यादव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर जिला पंचायत सदस्य आराधना गौतम,सूबेदार रामजनम,जामवंत,अमरनाथ यादव,झूरी,आशीष,डॉ बृजमोहन आदि लोग उपस्थित रहे।
गंगा दशहरा पर आस्था का सैलाब: लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
फर्रुखाबाद l गंगा दशहरा पर जनपद के विभिन्न घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां गंगा के पावन जल में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे और पुण्य लाभ अर्जित किया। गंगा तटों पर दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने दान-दक्षिणा  अपने जीवन को पुण्य के लिए दिया।गंगा स्नान के लिए जिले के पांचालघाट, बरगदिया घाट , सिंगीरामपुर, ढाईघाट (शमशाबाद), दुर्वासा आश्रम जैसे प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। न केवल शहर के ही नहीं बल्कि बरेली, बदायूं, मैनपुरी, शिकोहाबाद, हरदोई आदि जनपदों से भी श्रद्धालु गंगा स्नान हेत पहुंचे।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल, पुलिस गोताखोरों की तैनाती की थी। बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था, स्वास्थ्य शिविर और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
बताते है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।गंगा की तेज धारा को रोकने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समाहित किया और फिर धीरे-धीरे उन्हें धरती पर प्रवाहित किया। तभी से इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि गंगा दशहरा पर स्नान से न केवल शरीर और मन की शुद्धि होता है,बल्कि पूर्वजों की आत्मा को भी शांति मिलती है।भक्तों ने कहा कि गंगा मां केवल एक नदी नहीं, मोक्षदायिनी हैं जो समस्त दुखों का हरण करती हैं।

पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देश पर पुलिस द्वारा ज्येष्ठ गंगा दशहरा मेला पर्व के दृष्टिगत थाना कादरीगेट क्षेत्र के पांचाल घाट, थाना कमालगंज क्षेत्र के सिंघी रामपुर घाट व थाना शमसाबाद क्षेत्र के ढाई घाट पर गंगा स्नान एवं मेला का सकुशल संचालन कराया जा रहा है । घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है । सुरक्षा की दृष्टि से घाटों पर ड्रोन कैमरा के जरिये नजर रखी जा रही है तथा प्रत्येक घाट पर नाव एवं गोताखोर तैनात किये गये हैं लाउड स्पीकर के जरिये श्रद्दालुओं को गहरे पानी में न जाने की सलाह दी जा रही है ।
एक जीवित विश्वविद्यालय का स्वरूप है स्त्री
—  डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार


माना कि महिलाएँ आज भी
रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र,
प्रबंधन, बैंकिंग और अनेक क्षेत्रों में
संख्या के आधार पर पुरुषों से कम दिखाई देती हैं…

लेकिन फिर भी
इन सभी क्षेत्रों के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों,
अर्थशास्त्रियों, प्रबंधकों और विद्वानों की
पहली गुरु, पहली पाठशाला
और पहली प्रयोगशाला
एक स्त्री ही होती है —
माँ।

वह प्रयोगशाला
जहाँ इंसान गढ़े जाते हैं…
जहाँ संस्कारों की नींव रखी जाती है,
जहाँ प्रेम, त्याग, अनुशासन
और मानवता का निर्माण होता है।

स्त्रियाँ जन्मजात विदुषी होती हैं।
वह लक्ष्मी भी हैं,
अन्नपूर्णा भी हैं,
सरस्वती भी हैं…
और समय आने पर
दुर्गा भी बन जाती हैं।

जिसे दुनिया अक्सर
केवल “घर संभालना” कहकर
छोटा समझ लेती है,
असल में वही
सबसे बड़ा प्रबंधन है।

एक पुरुष शायद घर चला सकता है,
पर एक स्त्री
पूरे घर में जीवन भर देती है।
वह दीवारों को घर
और घर को परिवार बनाती है।

इतिहास गवाह है
कि संसार के बड़े-बड़े वीर,
महापुरुष और युग निर्माता भी
किसी स्त्री की गोद में ही
संस्कार पाकर महान बने।

वह माँ राजमाता जिजाबाई ही थीं
जिन्होंने बालक शिवा को
केवल पुत्र नहीं,
एक वीर, धर्मरक्षक और राष्ट्रनायक
छत्रपति शिवाजी महाराज बनाया।

वह माँ जयवंता बाई ही थीं
जिन्होंने अपने पुत्र में
स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रप्रेम के
ऐसे संस्कार डाले
कि वही बालक आगे चलकर
महाराणा प्रताप बना।

क्योंकि संसार की हर महान प्रतिभा की
पहली पाठशाला
एक माँ होती है।

एक स्त्री कितनी विदुषी होती है,
आइए उसके जीवन को ही
एक जीवित विश्वविद्यालय मानकर
उसकी अद्भुत विद्वता को समझने का प्रयास करें।

क्या कभी किसी ने
सच में समझा है
उस स्त्री की बुद्धिमत्ता को
जो दिन-रात
सिर्फ घर नहीं संभालती,
बल्कि जीवन सँवारती है?

हम डिग्रियों में ज्ञान ढूँढते हैं,
पद और पहचान में सम्मान ढूँढते हैं…
पर हर घर में
एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय बसता है।

जहाँ बिना किसी किताब के
हर दिन जीवन का विज्ञान जन्म लेता है…
जहाँ अनुभव ही शिक्षा है,
और प्रेम ही सबसे बड़ी डिग्री।

जिसे दुनिया केवल घर समझती है,
वहीं से पीढ़ियाँ संस्कार सीखती हैं।
वहाँ केवल दिनचर्या नहीं चलती,
वहाँ रिश्ते, संवेदनाएँ
और सभ्यताएँ जन्म लेती हैं।

गणित वहाँ हर रोज़ मुस्कुराता है—

कितने लोगों की कितनी ज़रूरतें,
कहाँ कितना समय देना है,
कैसे सीमित साधनों में
सबकी इच्छाओं को संतुलित करना है।

बिना कॉपी-कलम के
हर हिसाब सही हो जाता है,
क्योंकि माँ के अनुभव में
ईश्वर का ज्ञान समा जाता है।

भौतिक विज्ञान भी वहीं बसता है—

कब धैर्य रखना है,
कब दृढ़ होना है,
कब मौन रहकर समझाना है,
और कब आवाज़ उठानी है।

जीवन की परिस्थितियों का
इतना सटीक संतुलन,
शायद किताबें भी
इतने प्रेम से न सिखा पाएँ।

रसायन विज्ञान का अद्भुत संसार—

वह टूटे मनों को जोड़ देती है,
क्रोध को प्रेम में बदल देती है,
उदासी में आशा घोल देती है,
और संघर्षों में साहस मिला देती है।

उसके स्पर्श में ऐसा जादू होता है
कि बिखरे हुए रिश्ते भी
फिर मुस्कुराने लगते हैं।

प्रबंधन कला की वह जीवित मिसाल है—

एक साथ चार काम करना,
सबको समय पर संभालना,
कम समय में सब व्यवस्थित करना।

यह किसी बड़ी कंपनी का
मैनेजमेंट नहीं तो और क्या है?

कॉरपोरेट की बड़ी-बड़ी बैठकों में
जिस “मैनेजमेंट स्किल” की बातें होती हैं,
उसका सबसे जीवंत रूप तो
सदियों से एक स्त्री के जीवन में दिखाई देता है।

मल्टीटास्किंग उसकी पहचान है—

एक तरफ चाय उबल रही है,
पूजा की थाली भी सज रही है,
पति और बच्चों का टिफिन भी भर रहा है,
बच्चों को उठाकर तैयार भी किया जा रहा है।

फोन भी उठा रही है,
दरवाज़ा भी खोल रही है,
और बारिश आ जाए तो
छत से कपड़े भी दौड़कर ला रही है।

खुद भी ऑफिस के लिए
तैयार हो रही है,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान रहती है,
और घर व्यवस्थित चलता रहता है।

उसकी निरीक्षण शक्ति अद्भुत होती है—

दाल पकी या नहीं,
बच्चे का मन उदास है या नहीं,
पति की थकान चेहरे पर दिख रही है या नहीं,
घर में कौन चुपचाप किसी चिंता में है—

उसकी नज़र सब समझ जाती है।
वह शब्दों से पहले
चेहरों की भाषा पढ़ लेती है।

अर्थशास्त्र भी वही संभालती है—

सीमित बजट में घर चलाना,
भोजन तैयार करना,
बचे हुए संसाधनों का सदुपयोग करना,
मौसम के अनुसार आवश्यकताओं को चुनना।

तीज-त्योहार की तैयारी,
अतिथियों की आवभगत,
नेग और रिश्तों का निर्वाह—
घर की आर्थिक नीति
अक्सर उसी की समझ से चलती है।

मनोविज्ञान भी उसे भलीभाँति आता है—

किसका मन उदास है,
किसे प्रोत्साहन चाहिए,
कौन बिना कहे दर्द छिपा रहा है—

वह सब जानती है।

कभी वह
मदर टेरेसा सी ममता बन जाती है,
तो कभी अपने दुःख छिपाकर
सबके जीवन में उजाला भर देती है।

वह केवल परिवार नहीं संभालती,
पूरा संसार सँभालने की क्षमता रखती है।

वह स्त्री चाहे पढ़ी-लिखी हो या नहीं,
अंग्रेज़ी जानती हो या नहीं,
पर उसके अनुभव, धैर्य और प्रेम के आगे
बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ भी छोटी लगती हैं।

वह केवल अन्नपूर्णा नहीं,
समय आने पर दुर्गा भी बन जाती है।
प्रेम दे तो गंगा सी निर्मल,
और अन्याय हो तो
चंडी सी प्रखर हो जाती है।

स्त्री को कम मत आँकिए,
क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक,
डॉक्टर, लेखक, सैनिक और उद्योगपति भी
सबसे पहले
एक माँ की गोद में ही गढ़े जाते हैं।

दुनिया की हर महान प्रतिभा की
पहली प्रयोगशाला,
एक स्त्री की ममता ही होती है।

क्योंकि
स्त्री केवल घर नहीं संभालती,
वह पीढ़ियाँ गढ़ती है,
संस्कार बोती है,
और प्रेम से संसार रचती है।

इसलिए अगली बार
जब वह चुपचाप
सबकी चिंता करती दिखाई दे,
तो उसे सामान्य मत समझिए…

एक पल रुककर
उस माँ, पत्नी, बहन या बेटी को
दिल से धन्यवाद ज़रूर कहिए,
जो अपने हिस्से की थकान छिपाकर भी
आपके जीवन को सहज बनाती है।

और केवल धन्यवाद ही नहीं…
कभी उसके लिए भी
थोड़ा समय निकालिए,
उसकी मुस्कान का कारण बनिए।

आइए नमन करें
उस महामानवी को,
जो अपने हाथों से
केवल कार्य नहीं करती,
बल्कि पूरे घर में
प्रेम, अपनापन और जीवन भर देती है।

जो हर परेशानी को
मुस्कान से हल्का कर देती है,
और अपने त्याग से
घर को सचमुच स्वर्ग बना देती है।
छात्रों को फर्श से अर्श पर पहुंचाने का निःशुल्क नीट कोचिंग देते हैं डॉ मिथिलेश कुमार बिंद
भदोही। ग्राम सभा हरिचंद पुर भीटी हंडिया प्रयागराज के रहने वाले डॉ मिथिलेश कुमार बिंद चर्म रोग विशेषज्ञ स्वरूप रानी हॉस्पिटल प्रयागराज में कार्यरत है।इस समय पूरे भदोही में चर्चा का विषय बने हुए हैं इनकी सोच हर वर्ष लगभग 100 बच्चों को ममता चैरिटेबल ट्रस्ट एंड स्किन केयर हॉस्पिटल सुभाष नगर भदोही के प्रांगण में एक सुपर 25 क्लासेस खोलकर निशुल्क नीट की तैयारी स्वयं और प्रशिक्षित प्रोफेसर डॉक्टर्स से नीट  विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देते हैं।बी एस वी एस न्यूज़ के साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य है कि जौनपुर, प्रयागराज, भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर ,जैसे शहरों में सुपर 25 प्रशिक्षण केंद्र खोलकर बच्चों के भविष्य का निर्माण करें।बच्चों के भविष्य और देश के निर्माण में सहायक महान समाजसेवी डॉ मिथिलेश कुमार बिंद को बहुचर्चित संगठन बिंद समाज विकास संघ ने अपनी टीम के साथ पहुंचकर बच्चों को मेडल और डॉ मिथिलेश कुमार बिंद  को, संघ का स्मृति चिन्ह दीवाल घड़ी से सम्मानित किया।शुभकामना देते हुए संघ ने कहा कि जिस तरह से घड़ी निरंतर चलती रहती है समय के महत्व को समझती है इस तरह आप हमेशा रुके  ना ,थके ना ,हिम्मत ना हारे और बच्चों के भविष्य को निरंतर निर्माण करते रहे।मुख्य रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शेषधर बिंद सहित,सूरत गुजरात प्रदेश अध्यक्ष फूलचंद बिंद, सूरत महासचिव दीनानाथ बिंद, सूरत प्रवक्ता गुलाब चंद्र बिंद, सूरत युवसेना अध्यक्ष सुरेश कुमार बिंद, बी एस वी एस न्यूज रिपोर्टर अरविंद बिंद,भदोही जिला अध्यक्ष डॉ रमाशंकर बिंद,जिला भदोही सलाहकार डॉ हरिश्चंद्र बिंद,जिला भदोही संगठन मंत्री मोहनलाल बिंद, युवासेना संगठन मंत्री राज बिहारी बिंद,उदल कुमार बिंद, बसंत लाल मौर्य,सुभाष बिंद, गोरेलाल बिंद मौजूद रहे।
मारपीट और गाली-गलौज के मामले में एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
धर्म सिंह
हरदोई-मल्लावां थाना पुलिस ने मारपीट और गाली-गलौज के मामले में एक नामजद आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार 23 मई 2026 को वादी आलोक मिश्रा पुत्र अमित मिश्रा निवासी ग्राम गंगारामपुर थाना मल्लावां ने थाने पर तहरीर देकर आरोप लगाया था कि हिमांशु पटेल पुत्र अशोक कुमार निवासी ग्राम तेंदुआ थाना मल्लावां समेत अन्य लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की।
तहरीर के आधार पर थाना मल्लावां में मुकदमा अपराध संख्या 265/2026 धारा 115(2), 352, 351(3) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने धारा 308(5) बीएनएस की बढ़ोत्तरी भी की।
मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नामजद आरोपी हिमांशु पटेल पुत्र अशोक कुमार निवासी ग्राम तेंदुआ थाना मल्लावां जनपद हरदोई को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक राधेश्याम और कांस्टेबल अंकुर राणा शामिल रहे।
देवघर भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 : विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन ।
देवघर: भविष्य में और भव्य होगा टूर्नामेंट: डॉ. सुनील खवाड़े - स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट सीजन 2 विरांश स्टाइलिश -11 बना चैंपियन - फाइनल में बादशाह - 11 को 5 विकेट से रौंदा - आकर्षक आतिशबाजी के बीच केकेएन स्टेडियम में समापन देवघर स्थानीय केकेएन स्टेडियम में खेले गए 'स्व. बर्धन खवाड़े ट्रॉफी सीजन- 2 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में विरांश स्टाइलिश- 11 ने बादशाह-11 को 5 विकेट से हराकर चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। खेल प्रेमियों की भारी भीड़ के बीच खेला गया खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। इस अवसर पर अपने संबोधन के क्रम में खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े ने टूर्नामेंट के सफल आयोजन पर बधाई देते हुए कहा कि जिस तरह से यह क्रिकेट टूर्नामेंट देवघर सहित झारखंड में प्रसिद्ध हो रहा है आने वाले दिनों में इसे और भव्य रूप दिया जाएगा। खिलाड़ियों के जोश को देखते हुए घोषणा की कि खिलाड़ियों को और बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए अगले साल स्व. बर्धन खवाड़े टूर्नामेंट को और आकर्षक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नकद पुरस्कार राशि भी बढ़ाई जाएगी। कहा कि क्रिकेट सहित अन्य खेलों को भी भी बढ़ावा देने के लिए हमेशा पहल होगी। कोशिश के प्रयासों ने दिलायी जीत :- टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी बादशाह - 11 की शुरुआत ठीक-ठाक रही, लेकिन विरांश स्टाइलिश 11 की कसी हुई गेंदबाजी के सामने निर्धारित 12 ओवरों में 9 विकेट खोकर 119 रन ही बना सकी। बादशाह 11 की ओर से सीनियर वर्मा ने सर्वाधिक 39 रन (24 गेंद) और अभिषेक ने 22 रनों का योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 की तरफ से तुपलाला ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 3 ओवर में केवल 16 रन देकर 2 विकेट चटकाए। 120 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी विरांश स्टाइलिश 11 की शुरुआत बेहद खराब रही और शीर्ष 4 बल्लेबाज मात्र 14 रन के कुल स्कोर पर पवेलियन लौट गए। उसके बाद कोशिश कुमार ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए मैच का पासा ही पलट दिया। कोशिश ने मात्र 31 गेंदों में 4 चौकों और 6 गगनचुंबी छक्कों की मदद से नाबाद 70 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। वहीं, मोनू सिंह ने 29 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया। विरांश स्टाइलिश 11 ने 11.1 ओवर में 5 विकेट खोकर 123 रन बनाकर खिताबी जीत दर्ज की। विजेता और उपविजेता पर हुई पैसों की बारिश :- टूर्नामेंट के समापन के बाद मुख्य अतिथि सह टूर्नामेंट के चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े सहित विशिष्ट अतिथि एसबीआई के आरएम प्रशांत मिश्रा ने संयुक्त रूप से विजेता टीम विरांश स्टाइलिश 11 के कैप्टन को चमचमाती ट्रॉफी और 1 लाख 10 हजार रुपए का नकद पुरस्कार सौंपा। वहीं, उपविजेता टीम बादशाह 11 के कैप्टन व फ्रेंचाइजी को प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. निशांत चौरसिया और टोयोटा धनबाद के मैनेजर राजीव रंजन द्वारा उप- विजेता ट्रॉफी और 55 हजार रुपए की नगद राशि प्रदान की गई। टूर्नामेंट के दौरान दर्शकों का उत्साह भी चरम पर था। कैच पकड़ने वाले दर्शक को 5100 :- चेयरमैन डॉ. सुनील खवाड़े द्वारा स्टैंड्स में एक शानदार कैच पकड़ने वाले दर्शक राज को 5100 रुपए का नकद पुरस्कार भी दिया गया। टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कार :- - मैन ऑफ द सीरीज :- लोकनाथ (पीवीआर पैंथर) - बेस्ट बैट्समैन :- संजू यादव (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट बॉलर :- विशाल (विरांश स्टाइलिश 11) - बेस्ट फील्डर :- अभिषेक (बादशाह 11) इनकी रही भूमिका :- मैच में निर्णायक (अंपायर) की भूमिका लाली और खुशहाल शेख ने निभाई, जबकि राकेश राय, अशोक कुमार, शैलेश कुमार और गौरव ने उद्घोषक के रूप में समां बांधा। कौन-कौन रहे उपस्थित :- मंच पर उपस्थित अतिथियों और कमेटी सदस्यों में आयोजन के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह, रितेश केसरी, धर्मेंद्र देव और ऋषि राज सिंह ने भी खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान मंच पर मुख्य रूप से नवीन शर्मा मुखिया सुशील महथा, दीपक दुबे, अजय खवाड़े, रोहित कुमार, नीरज झा, धीरज और पंकज वाजपेई आदि उपस्थित रहे। डॉल्फ़िन डांस के कलाकारों ने मोहा मन :- डॉल्फिन डांस एकेडमी के बच्चों द्वारा प्रशिक्षक पल्लवी झा के नेतृत्व में गणेश वंदना सहित अन्य गीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
समाज को बांटना और तोड़ना, कांग्रेस की फितरत, यह षड्यंत्र सफल नहीं होने देंगे : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने और तोड़ने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया है। आदिवासी समागम का विरोध करने को लेकर श्री मरांडी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने इन दलों को चेताते हुए कहा कि समाज को बांटने और मूल आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने की उनकी साजिश कतई सफल नहीं होगी। श्री मरांडी भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई अंतर नहीं है। बल्कि इनमें समानता है। ये प्रकृति की पूजा करते हैं और पेड़, पहाड़, पत्थर, जल, धरती माता की भी पूजा करते हैं। सरना, सनातन और हिंदू में ही जाति व्यवस्था है। यहां जातियों की अनेकों समूह हैं। यहां 36 कोटि देवी देवता हैं। आदिवासी समाज में देश के अंदर 700 से अधिक जातियां हैं, झारखंड में भी 32-33 जातियां हैं। अपने गांव घरों में इनकी अपनी अपनी देवी देवता हैं। यह जो विविधता में एकता है, इसका समावेश सनातन, हिंदू, सरना में है। जहां इतनी अधिक समानता है वहां पर कांग्रेस और jmm के लोग कहते हैं कि इन्हें हिंदू बनाया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि हिंदू बनाने का कहीं कोई परंपरा ही नहीं है। बनाए तो क्रिश्चन और मुसलमान जाते हैं। सरना, सनातन और हिंदू तो पैदाइशी होते हैं।

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास सभी को पता है। कांग्रेस का गठन करने वाले अंग्रेज रहे हैं। 1857 के सिपाही विद्रोह के बाद ही अंग्रेजों को लगने लगा कि अब देश को संभालना होगा तो एक सेफ्टी वाल्ब के रूप में कांग्रेस पार्टी का गठन किया गया। अंग्रेज ने समाज को विभाजित और तोड़कर, लोगों को आपस में लड़ा कर इस देश पर राज किया। कांग्रेस पार्टी तो उन्हीं के एक मानस पुत्र रहे हैं। इसलिए जब देश स्वतंत्र हुआ तो महात्मा गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी को खत्म कर देनी चाहिए परंतु कांग्रेस ने गांधी जी की बातों को अनसुना कर दिया। अंग्रेजों की "फूट डालो और राज करो" की संस्कृति पर ही कांग्रेस देश में लंबे वर्षों तक कार्य करती रही। अब जब देश से कांग्रेस की विदाई हो रही है तो यह पार्टी समाज को तोड़ने का नया-नया हथकंडा अपना रही है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा भाजपा व आरएसएस पर आदिवासियों को हिंदू बनाने का लगाया गया आरोप उसी हथकंडा का एक हिस्सा है। समाज को तोड़ना और कुर्सी प्राप्त करना तो कांग्रेस की फितरत है।

श्री मरांडी ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी समाज में विभाजन पैदा करने का काम कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पेसा कानून की नियमावली में आदिवासी परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। जो लोग आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं को बदलने का काम करते हैं, उन पर ये दल मौन रहते हैं। इसलिए कांग्रेस और झामुमो के मुँह से आदिवासी हित की बात शोभा नहीं देती।

श्री मरांडी ने कहा कि जहां 32वां या सुदृढ़ीकरण कर आदिवासियों को क्रिश्चियन बनाया जा रहा है, कलमा पढ़ाकर किसी को मुसलमान बनाया जाता है, लोगों की संस्कृति, परंपरा, विश्वास, आस्था को मिटाने का काम किया जा रहा है, उस मुद्दे पर कांग्रेस और झामुमो के लोग कुछ नहीं बोलते हैं। वोट बैंक की राजनीति के लिए यहां के आदिवासी, जनजाति जो मूल समाज है उनको कैसे समाज से अलग किया जाए, उनमें अलगाव पैदा किया जाए, इसके लिए षड्यंत्र किया जा रहा है, इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। सत्ता में बैठे कांग्रेस और jmm के लोग समाज को सिर्फ बांटने तोड़ने का काम कर रहे हैं। इस प्रकार की नीतियां बहुत दिनों तक नहीं चलेगी। बहुत दिनों तक इन दलों ने बरगलाकर समाज को गुमराह किया। अब समाज जागरूक हो चुका है। समाज की अपनी मूल पहचान है, इसे समाज पहचान चुका है।

श्री मरांडी ने कहा कि जितनी भी जनजातियों की पूजा स्थल है, उसको संरक्षित, सुरक्षित और विकसित करने की जरूरत है। जगह-जगह पर सरना मसना, पहनाई की जमीन जमीन बर्बाद हो रही है, माफियाओं के चंगुल में जा रहा है। इसको बचाने और संरक्षित करने की जरूरत है, तभी संस्कृति बचेगी। जब झारखंड बना और हमारी सरकार बनी तो हमने ही जाहेरथान की घेराबंदी शुरू करवाई, मांझी थान बनवाने का काम शुरू हुआ। रघुवर दास की सरकार ने इस काम को आगे बढ़ाया।

इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित रही।

भारतीय किसान यूनियन चौधरी का कुनबा बढ़ा,2 दर्जन से अधिका युवाओं ने संभाली संगठन की कमान

युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलबहार के नेतृत्व में दर्जनों युवाओं ने ली सदस्यता, किसान हितों की लड़ाई को और मजबूत करने का लिया संकल्प

आशीष कुमार

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन चौधरी का संगठन लगातार मजबूत होता जा रहा है। संगठन के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलबहार के नेतृत्व में दर्जनों युवाओं ने संगठन की सदस्यता ग्रहण कर किसान हितों की आवाज को बुलंद करने का संकल्प लिया। युवाओं के बढ़ते जुड़ाव से संगठन में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है।कार्यक्रम के दौरान संगठन में नई जिम्मेदारियों की भी घोषणा की गई। राजकुमार सक्सेना को भारतीय किसान यूनियन चौधरी का उत्तर प्रदेश मंत्री नियुक्त किया गया, जबकि सावन कुमार झा को पुरकाजी युवा ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। नई जिम्मेदारियों के ऐलान के बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने दोनों पदाधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत कर शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलबहार ने कहा कि संगठन किसानों, मजदूरों और युवाओं की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवाओं का संगठन से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि किसान हितों की लड़ाई को नई ताकत मिल रही है। संगठन गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं को उठाने और उनके
अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगा।नवनियुक्त उत्तर प्रदेश मंत्री राजकुमार सक्सेना ने कहा कि संगठन ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, वह उसका पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निर्वहन करेंगे। वहीं सावन कुमार झा ने कहा कि युवाओं को जोड़कर संगठन को और मजबूत बनाया जाएगा तथा किसानों की आवाज को प्रशासन और सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा।ग्यास खान राष्ट्रीय महामंत्री चिकित्सा प्रकोष्ठ,युवा जिला अध्यक्ष आरिफ चौधरी,सावन पुरकाजी युवा ब्लॉक अध्यक्ष,राजकुमार सक्सेना प्रदेश मंत्री उत्तर प्रदेश,अजय सिंह,पप्पी कुमार,सनी कुमार,मनजीत सिंह,रितिक कुमार,रोहित कुमार,अंशुल कुमार,बलराम सिंह,सचिन,निकित,प्रियांशु कुमार,जीतेन्द्र नाथीराम,मोनू सौरव, विक्की कुमार,रवी कुमार सहित अनेको कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।