झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: धनबाद के 20 पुलिसकर्मियों का तबादला रद्द!
झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद जिले के 20 पुलिसकर्मियों के तबादला आदेश को रद्द कर दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना होगा कि तबादला एक नियमित प्रक्रिया और प्रशासनिक जरूरत हो सकता है, लेकिन इसका उपयोग किसी कर्मचारी को दंड देने के लिए ‘शॉर्टकट’ के रूप में नहीं किया जा सकता. अदालत ने पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि इन सभी कर्मियों का योगदान उनके मूल स्थान (धनबाद) में तुरंत स्वीकार किया जाए.
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सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ मामले का दिया हवाला
अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘सोमेश तिवारी बनाम भारत संघ’ मामले के कानूनी सिद्धांतों का उल्लेख किया. जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ लापरवाही के आरोप हैं, तो विभाग को उचित विभागीय जांच (Departmental Inquiry) और अनुशासनिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए. जांच के बिना सीधे ट्रांसफर का आदेश देना और उसे ‘प्रशासनिक आवश्यकता’ का नाम देना कानूनी रूप से गलत और दुर्भावनापूर्ण है.
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RTI ने खोली विभाग की पोल
सुनवाई के दौरान सूरज कुमार, अनुज कुमार सिंह, बलजीत कुमार और कौशल कुमार दुबे समेत 20 याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए बताया गया कि उन्हें 24 फरवरी को तबादला किया गया था और 11 मार्च को वर्तमान पद से मुक्त (Relieve) करने का आदेश दिया गया. विभाग ने इसे ‘प्रशासनिक जरूरत’ बताया था, लेकिन जब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो सच्चाई कुछ और निकली. आरटीआई के दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि धनबाद एसएसपी ने इन पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के आरोपों के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी. बिना किसी औपचारिक जांच या स्पष्टीकरण के किया गया यह तबादला पूरी तरह से दंडात्मक (Punitive) का था.
अधिकारियों को कड़ा संदेश
हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग दंड देने के लिए न करें. अदालत ने तबादला और पद से मुक्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत दी है. इस फैसले के बाद अब पुलिस महकमे के भीतर हलचल तेज है, क्योंकि यह आदेश भविष्य में उन अधिकारियों के लिए नजीर बनेगा जो बिना प्रक्रिया पूरी किए कर्मियों को इधर-उधर भेज देते हैं.







आश्वासन दिया गया। इसके बाद बार एसोसिएशन ने धरना अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।

ओबरा/सोनभद्र।उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर करोड़ों पौधे रोपकर प्रदेश को हरा-भरा बनाने का दावा कर रही है, वहीं सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। रेणुका नदी के तट पर पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर भ्रष्टाचार की ऐसी 'इबारत' लिखी गई है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए।
क्या स्वास्थ्य केंद्र की आड़ में चल रहा है भ्रष्टाचार का खेल?

16 min ago
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