दिल्ली का भूजल ‘जहरीला’, 55% नमूने फेल: CAG रिपोर्ट में गंभीर खुलासा
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पीने के पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली का लगभग आधा भूजल पीने योग्य नहीं है। यह रिपोर्ट 7 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में पेश की गई। CAG की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच लिए गए 16,234 भूजल नमूनों में से 8,933 नमूने, यानी करीब 55 प्रतिशत, निर्धारित मानकों पर फेल पाए गए। कुछ वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुँच गया। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि असुरक्षित भूजल की आपूर्ति सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। ऑडिट में यह भी सामने आया कि दिल्ली में प्रतिदिन 80 से 90 मिलियन गैलन कच्चा और बिना शोधित पानी बोरवेल और रैनी वेल के माध्यम से सीधे जलाशयों और उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड की प्रयोगशालाएँ संसाधनों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण केवल 12 मापदंडों पर ही पानी की जांच कर पा रही हैं, जबकि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार पानी की गुणवत्ता की जांच 43 मापदंडों पर किया जाना अनिवार्य है। रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि पानी में मौजूद घातक रसायनों जैसे आर्सेनिक, सीसा, रेडियोधर्मी तत्व और अन्य जहरीले जैविक मापदंडों की जांच नहीं की जा रही है। इसके अलावा, निजी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांटों में अब भी प्रतिबंधित और कैंसरजनक ‘पॉलीइलेक्ट्रोलाइट्स’ का इस्तेमाल जारी है। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने इस रिपोर्ट को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताते हुए सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। संस्था ने कच्चे पानी की आपूर्ति पर रोक लगाने, पानी की गुणवत्ता को 100 प्रतिशत BIS मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने, प्रयोगशालाओं में योग्य स्टाफ और आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने तथा पानी की गुणवत्ता से संबंधित सभी आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।
उत्तराखंड : मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ी आस्था की लहर, गंगा में श्रद्धालुओं ने लगाई पावन डुबकी

* हर की पैड़ी से नारायणी शिला मंदिर तक भक्तों का सैलाब, गूंजे हर-हर गंगे के जयकारे



हरिद्वार। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सागर उमड़ पड़ा। सुबह तड़के चार बजे से ही हर की पैड़ी और आसपास के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा की पवित्र धारा में स्नान शुरू कर दिया। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन धारण कर गंगा स्नान करने, अन्न, वस्त्र, तिल और गुड़ का दान करने का विशेष महत्व है। नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि माघ माह की यह अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान करने से कुंभ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता और ऋषि-मुनि भी पृथ्वी पर स्नान करने आते हैं तथा दान-पुण्य करने से सहस्त्र वर्षों तक पुण्य फल मिलता है।

कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से हरिद्वार पहुंचे। सुबह ठंड अधिक होने के कारण शुरुआती घंटों में भीड़ अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन जैसे-जैसे धूप तेज हुई, घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई।

अमावस्या के कारण नारायणी शिला मंदिर में भी विशेष चहल-पहल देखने को मिली। यहां श्रद्धालु अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और पूजन करते नजर आए। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में पितरों के निमित्त किए गए कर्म से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल और गोताखोरों की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। मौनी अमावस्या पर हरिद्वार की यह दिव्य और अलौकिक छटा एक बार फिर भक्तों की अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बनकर सामने आई।
भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय ने पार्टी कार्यकर्ताओं में भरा उत्साह*
भाजपा नेत्री के संयोजन में झारखंड शिव मंदिर में आयोजित हुआ समरसता खिचड़ी भोज*

आगामी विधानसभा चुनाव में जीत का जताया संकल्प* 

सुल्तानपुर,इसौली विधानसभा क्षेत्र के रवनिया स्थित झारखंड प्राचीन शिव मंदिर परिसर में भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय के संयोजन में समरसता खिचड़ी भोज आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिव नगर के नवनिर्वाचित मंडल अध्यक्ष मनीष तिवारी ने की। इस दौरान भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी जो भी विधानसभा प्रत्याशी घोषित करेगी,उसे भारी मतों से जीत दिलाने में सभी जुटें।उन्होंने इसौली विधानसभा के ठप पड़े विकास को गति देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस दौरान कार्यक्रम में धर्मेंद्र तिवारी,राकेश मिश्रा,अनुज द्विवेदी, भोलानाथ तिवारी,बजरंग नारायण द्विवेदी, मंडल अध्यक्ष मनीष तिवारी और कई बूथ अध्यक्ष मौजूद रहे।
सावनी फुहार पुस्तक पर परिचर्चा‌ एवं काव्य संध्या संपन्न

मुंबई । साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था काव्य सृजन के तत्वावधान एवं डॉ सागर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में शनिवार 17 जनवरी 2026 को पुस्तक परिचर्चा एवं काव्य संध्या का आयोजन डॉ सागर त्रिपाठी लाइब्रेरी पुष्प विहार कुलाबा‌ नेवी नगर मुंबई में आयोजित किया गया।जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कृपाशंकर मिश्र ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार, समालोचक,मार्गदर्शक हौसला प्रसाद सिंह अन्वेषी उपस्थित थे।उक्त समारोह का नियोजन एवं संयोजन शिव प्रकाश जमदग्निपुरी एवं डा.सागर त्रिपाठी ने किया तथा खूबसूरत संचालन डॉ त्रिपाठी ने स्वयं किया।विशिष्ट अतिथि साहित्यकारों में ओमप्रकाश तिवारी, आत्मिक श्रीधर मिश्र, माता प्रसाद शर्मा,विनय शर्मा दीप,पं.जमदग्निपुरी, अरुण दूबे अविकल,समाज सेवी संगठन केसीएनए क्लब के अध्यक्ष,पत्रकार नंदन मिश्र त्यागी के पावन उपस्थिति में भव्य काव्यपाठ हुआ।विलुप्त होती कजरी विधा को जागृत करने एवं पाठकों के बीच लाने का प्रयास संपादक जमदग्निपुरी एवं उप संपादक विनय शर्मा दीप ने किया।परिचर्चा की कड़ी में डॉ सागर त्रिपाठी ने सावनी फुहार संकलन को सराहनीय कदम बताया तो वहीं हौसला प्रसाद अन्वेषी ने सनातनी गीत विधा परंपरा को बचाने का उत्कृष्ट कदम बताया। ओमप्रकाश तिवारी ने भूरी भूरी प्रशंसा की तो डॉ कृपाशंकर मिश्र ने वातावरण, समय,परिधान व पौराणिक त्योहारों के प्रसंगों से गीत, कजरी,फाग,चैता,बिरहा की उत्पत्ति बताया और संकलन की सराहना किया।उपस्थित सभी साहित्यकारों ने अपने-अपने काव्य की प्रस्तुति देते हुए काव्य संध्या का आनंद उठाया।अंत में रुद्र प्रताप सागर ने उपस्थित सभी साहित्यकारों का स्नेहिल आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
दावोस में गूंजेगा 'जोहार': झारखंड के पर्यटन में निवेश के लिए दुनिया को आमंत्रण, प्रकृति और आध्यात्म का वैश्विक हब बनेगा राज्य।

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान बनाने की ओर अग्रसर है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के मंच से झारखंड दुनिया को एक ऐसी यात्रा का निमंत्रण देगा, जो प्रकृति, संस्कृति, आध्यात्म और रोमांच का अद्भुत संगम है। राज्य सरकार का लक्ष्य निवेश के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और विकास के नए अवसरों को सृजित करना है।

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विविध भौगोलिक पहचान और आकर्षण

छोटा नागपुर पठार की गोद में बसे झारखंड की भौगोलिक बनावट इसे एक बेजोड़ पर्यटन स्थल बनाती है।

झरनों का शहर: हुंडरू, दशम, जोन्हा और लोध जैसे भव्य जलप्रपात पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करते हैं।

पहाड़ों की रानी: नेतरहाट की पहाड़ियाँ और सनसेट व्यू वैश्विक स्तर पर सराहे जा रहे हैं।

विशिष्ट धरोहर: 'मैक्लुस्कीगंज' जैसे गांव अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशिष्टता के लिए जाने जाते हैं।

आदिवासी विरासत और कला का जीवंत अनुभव

झारखंड का पर्यटन इसकी आदिवासी संस्कृति में रचा-बसा है। सरहुल, करम और सोहराय जैसे त्योहारों के साथ-साथ डोकरा आर्ट, पैतकर पेंटिंग और छऊ नृत्य जैसे कला रूप पर्यटकों को एक गहरा अनुभव प्रदान करते हैं। इसके साथ ही देवघर का बैद्यनाथ धाम और मलूटी के मंदिर समूह राज्य के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाते हैं।

एडवेंचर और वाइल्डलाइफ टूरिज्म में संभावनाएं

साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए झारखंड अब पैराग्लाइडिंग, रॉक क्लाइम्बिंग और वॉटरफॉल रैपलिंग जैसे अवसर प्रदान कर रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व और दलमा हाथी अभयारण्य जैसे वन्यजीव केंद्र इसे वन्यजीव प्रेमियों की पहली पसंद बना रहे हैं।

दावोस में 'जोहार' का संदेश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विश्व आर्थिक मंच में बताएंगे कि कैसे झारखंड का पर्यटन मॉडल "सहअस्तित्व और निरंतरता" पर आधारित है। राज्य सरकार निजी निवेशकों को ईको-टूरिज्म, वेलनेस सेंटर और एडवेंचर पार्क विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी मजबूती मिले।

235 पेड़ों को बचाने सड़क पर उतरी गांधीगिरी

इंदौर के रीगल चौराहे पर 16 दिन से जारी है शांतिपूर्ण धरना



इंदौर। विकास के नाम पर लगातार सिमटती हरियाली के बीच इंदौर में पर्यावरण संरक्षण की एक अनोखी और प्रेरक मिसाल सामने आई है। शहर के व्यस्ततम रीगल चौराहे पर मेट्रो परियोजना के तहत प्रस्तावित पेड़ कटाई के विरोध में जागरूक नागरिकों ने गांधीगिरी का रास्ता अपनाते हुए पिछले 16 दिनों से लगातार धरना शुरू कर रखा है। प्रदर्शनकारी पेड़ों के बीच ही बिस्तर बिछाकर दिन-रात उनकी निगरानी कर रहे हैं, ताकि उन्हें किसी भी समय काटा न जा सके।

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में हरियाली का दायरा घटकर महज 9 प्रतिशत रह गया है। इसके बावजूद मेट्रो रेल परियोजना के अंतर्गत रीगल चौराहे के रानी सराय क्षेत्र में प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के लिए यहां मौजूद 235 हरे-भरे पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि इन पेड़ों पर प्रतिदिन शाम को हजारों तोते बसेरा करते हैं, जिनके जीवन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

पेड़ों को बचाने की इस मुहिम की अगुवाई जनहित पार्टी के अभय जैन कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन, नगर निगम और मेट्रो रेल प्रबंधन को कई बार ज्ञापन सौंपे, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 1 जनवरी से शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। उनके साथ कई पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय नागरिक लगातार डटे हुए हैं। अब इस आंदोलन को उन राहगीरों का भी समर्थन मिलने लगा है, जो किसी अन्य कार्य से यहां आते हैं लेकिन पेड़ों को बचाने के उद्देश्य से जुड़ रहे हैं।

धरना स्थल पर 235 पेड़ों का विस्तृत पंचनामा तैयार किया गया है, जिसमें उनकी प्रजाति, पर्यावरणीय उपयोगिता और उन्हें न काटने की अपील दर्ज की गई है। पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े स्लोगन और जागरूकता संदेश लिखे गए हैं, जो लोगों का ध्यान इस आंदोलन की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

अभय जैन का कहना है:

“सभी जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है, जिसकी सुनवाई शीघ्र होगी। 16 दिन और 16 रात से धरना इसलिए जारी है ताकि पेड़ दिन या रात किसी भी समय चोरी-छिपे न काटे जा सकें और हजारों तोतों की जान बचाई जा सके।”

वहीं मेट्रो रेल कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु ग्रोवर का कहना है कि,

“इस विषय में कोई भी निर्णय शीर्ष प्रबंधन स्तर पर ही लिया जा सकता है।”

पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि जयपुर, कानपुर, लखनऊ और पुणे जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं पर भारी निवेश के बावजूद यात्री संख्या अपेक्षा से कम रही है। इसके बावजूद हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेकर ऐसी योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनकी कीमत शहरों को अपनी हरियाली गंवाकर चुकानी पड़ रही है।

पर्यावरणविद मनीष काले का कहना है:

“मेट्रो जैसी परियोजनाएं अब फैशन आइकॉन बनती जा रही हैं। यह पश्चिमी विकास मॉडल है, जो कर्ज पर आधारित है। इसके बदले पेड़-पौधों का विनाश भविष्य में गंभीर संकट खड़ा करेगा। दिल्ली में सांसों का संकट इसका उदाहरण है। यदि इंदौर में भी हरियाली खत्म हुई, तो आने वाले समय में यहां भी वही हालात बन सकते हैं।”

फिलहाल रीगल चौराहे पर जारी यह गांधीगिरी विकास बनाम पर्यावरण के सवाल को एक बार फिर केंद्र में ले आई है और यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या विकास की कीमत प्रकृति की बलि देकर चुकाई जानी चाहिए।

एसपी देहात ने किया जानसठ थाने का औचक निरीक्षण, लंबित विवेचनाओं के निस्तारण हेतु दिए कड़े निर्देश

जानसठ मुजफ्फरनगर । जनपद में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और थानों की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण  आदित्य बंसल ने थाना जानसठ का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस रिकॉर्ड्स के रखरखाव से लेकर महिला सुरक्षा तक के बिंदुओं पर बारीकी से जांच की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान एसपी देहात सबसे पहले थाना कार्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने महत्वपूर्ण अभिलेखों (रजिस्टरों) के रखरखाव की जांच की। उन्होंने कंप्यूटर कक्ष में जाकर डिजिटल डेटा की फीडिंग को देखा और तकनीकी कार्यों की समीक्षा की। विशेष रूप से महिला हेल्प डेस्क और साइबर हेल्प डेस्क पर पहुँचकर उन्होंने वहां आने वाली शिकायतों के निस्तारण की स्थिति जानी। उन्होंने निर्देश दिया कि पीड़ित महिलाओं और साइबर ठगी के शिकार लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन पर तत्काल कार्रवाई  की जाए।

इसके पश्चात एसपी देहात ने थाना परिसर में विवेचकों के साथ एक समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने विवेचनाओं में हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त करते हुए सख्त लहजे में कहा कि लंबित विवेचनाओं का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष तरीके से जल्द से जल्द किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अपराधियों की धरपकड़ और सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए।  लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों और वारंटियों के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए। महिला सुरक्षा को लेकर महिला संबंधी अपराधों और प्रार्थना पत्रों पर प्राथमिकता के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जाए। तथा थाने आने वाले हर फरियादी के साथ शालीन व्यवहार हो और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए।

निरीक्षण के दौरान डीएसपी  रुपाली रॉय, थाना प्रभारी विनोद कुमार सहित थाने के समस्त उपनिरीक्षक और पुलिसकर्मी मौजूद रहे। एसपी देहात के इस औचक निरीक्षण से थाना पुलिस में हड़कंप की स्थिति रही ।
उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा
* 03 करोड़ महिलाओं को समूहों से जोड़ने और 01 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य

* उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखपति दीदी अभियान की कार्ययोजना को धरातल पर उतारने के दिए निर्देश

लखनऊ। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और गरीबी उन्मूलन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत 03 करोड़ पात्र महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने तथा 01 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करने हेतु तैयार विस्तृत एक्शन प्लान के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘लखपति दीदी’ बनाने की कार्ययोजना को केवल कागज़ों तक सीमित न रखते हुए धरातल पर उतारा जाए। इसके लिए जनपदवार लक्ष्य निर्धारित कर नए स्वयं सहायता समूहों के गठन, नए सदस्यों को जोड़ने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की प्रक्रिया तेज की जाए। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत धनराशि का शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए, किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
श्री मौर्य ने जानकारी दी कि अब तक प्रदेश में 9,06,225 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर 99,39,191 परिवारों की महिलाओं को योजना से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए शेष पात्र परिवारों को भी विशेष अभियान के माध्यम से समूहों से जोड़ने के निर्देश दिए।
झारखंड बंद का असर, आदिवासी संगठन कोई लीपापोती नहीं, सोमा मुंडा के हत्यारों का गर्दन चाहिए़ - निशा भगत

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रांची : झारखंड में बेखौफ है अपराधि आए दिन किसी को उठा लेते हर तो किसी को मार देते है। ऐसी ही एक घटना खूंटी जिला में हुई थी जहां अपराधियों ने आदिवासी नेता सह पड़हा राजा सोमा मुंडा की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी। जिसके बाद अगले ही दिन खूंटी बंद रहा, आदिवासी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया। लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। इधर आदिवासी संगठन विरोध जताते हुए आज झारखंड बंद का आवाहन किया है। आज सुबह ही कुछ जगह पर इसका विरोध प्रदर्शन देखने को मिला वही कुछ जगहों पर सामान्य गाड़िया चलती रही। दोपहर 1 बजे अल्बर्ट एक्का चौक पर लोग बंद कराने सड़क पर उतरे। इस बीच निशा भगत भी अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतरी। इस बीच आम लोगों से भी उलझी..

इस बीच निशा भगत ने सोमा मुंडा हत्याकांड में कहा कि लीपापोती नहीं हमें इंसाफ चाहिए आदिवासी संगठन की यही मांग है। हेमंत सरकार को भी खरीखौटी सुनाई और आदिवासी विरोधी बताया।

अन्य जिला की बात करे तो खूंटी और चाईबासा में सुबह होते ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर गये और ट्रैफिक सिस्टम को ठप कर दिया। रांची में बस टर्मिनल सुनसान रहा। खूंटी सिमडेगा तोड़पा के लिए बसे बंद रही वहां जाने वाले यात्री परेशान रहे। वही लंबी दूरी जो राज्य से बाहर जाती है उसमें में यात्रियों की संख्या कम रही। आदिवासी संगठनों के द्वारा झारखंड बंद बुलाने का मिलाजुला असर देखने को मिला है।

“खूबसूरत लड़की देख मन भटक सकता है…” कांग्रेस MLA का घिनौना बयान
मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के एक बयान ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को लेकर उनकी टिप्पणी सामने आते ही विपक्षी दल भाजपा ने इसे “घिनौनी और विकृत मानसिकता” करार दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

वायरल वीडियो में विधायक कहते नजर आ रहे हैं कि कोई पुरुष अगर सड़क पर चलते हुए किसी बेहद खूबसूरत लड़की को देख ले, तो उसका मन भटक सकता है और बलात्कार हो सकता है। इस बयान को लेकर लोगों का कहना है कि यह अपराध को सही ठहराने जैसा है और महिलाओं के खिलाफ खतरनाक सोच को बढ़ावा देता है।

बरैया ने आगे अपने बयान में जातिगत संदर्भ जोड़ते हुए कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी समुदायों की महिलाएं खूबसूरत मानी जाती हैं और इसी वजह से उनके साथ ज्यादा अपराध होते हैं। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों की विकृत व्याख्याओं का जिक्र करते हुए यह दावा भी किया कि कुछ लोग यौन हिंसा को आध्यात्मिक पुण्य से जोड़ते हैं।

भाजपा ने इस बयान को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को घेर लिया है। पार्टी के नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ एक विधायक की सोच नहीं, बल्कि कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा मीडिया प्रभारी ने आरोप लगाया कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के प्रति कांग्रेस की सोच संवेदनहीन रही है।

वहीं, कांग्रेस विधायक ने अपने बचाव में कहा कि उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि वे महिलाओं के पक्षधर हैं और उनका उद्देश्य समाज में फैली विकृत मान्यताओं को उजागर करना था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके विचार लंबे अध्ययन और अवलोकन पर आधारित हैं।

हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग इस सफाई से संतुष्ट नजर नहीं आए। कई यूजर्स ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सोच-समझकर बोलना चाहिए। महिला संगठनों ने भी इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कार्रवाई की मांग की है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। ऐसे बयान न केवल राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को भी प्रभावित करते हैं।
दिल्ली का भूजल ‘जहरीला’, 55% नमूने फेल: CAG रिपोर्ट में गंभीर खुलासा
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पीने के पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्ली का लगभग आधा भूजल पीने योग्य नहीं है। यह रिपोर्ट 7 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में पेश की गई। CAG की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2022 के बीच लिए गए 16,234 भूजल नमूनों में से 8,933 नमूने, यानी करीब 55 प्रतिशत, निर्धारित मानकों पर फेल पाए गए। कुछ वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुँच गया। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि असुरक्षित भूजल की आपूर्ति सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। ऑडिट में यह भी सामने आया कि दिल्ली में प्रतिदिन 80 से 90 मिलियन गैलन कच्चा और बिना शोधित पानी बोरवेल और रैनी वेल के माध्यम से सीधे जलाशयों और उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड की प्रयोगशालाएँ संसाधनों और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण केवल 12 मापदंडों पर ही पानी की जांच कर पा रही हैं, जबकि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार पानी की गुणवत्ता की जांच 43 मापदंडों पर किया जाना अनिवार्य है। रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि पानी में मौजूद घातक रसायनों जैसे आर्सेनिक, सीसा, रेडियोधर्मी तत्व और अन्य जहरीले जैविक मापदंडों की जांच नहीं की जा रही है। इसके अलावा, निजी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांटों में अब भी प्रतिबंधित और कैंसरजनक ‘पॉलीइलेक्ट्रोलाइट्स’ का इस्तेमाल जारी है। जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने इस रिपोर्ट को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताते हुए सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। संस्था ने कच्चे पानी की आपूर्ति पर रोक लगाने, पानी की गुणवत्ता को 100 प्रतिशत BIS मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने, प्रयोगशालाओं में योग्य स्टाफ और आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने तथा पानी की गुणवत्ता से संबंधित सभी आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।
उत्तराखंड : मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ी आस्था की लहर, गंगा में श्रद्धालुओं ने लगाई पावन डुबकी

* हर की पैड़ी से नारायणी शिला मंदिर तक भक्तों का सैलाब, गूंजे हर-हर गंगे के जयकारे



हरिद्वार। मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का सागर उमड़ पड़ा। सुबह तड़के चार बजे से ही हर की पैड़ी और आसपास के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा की पवित्र धारा में स्नान शुरू कर दिया। घाटों पर “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन धारण कर गंगा स्नान करने, अन्न, वस्त्र, तिल और गुड़ का दान करने का विशेष महत्व है। नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि माघ माह की यह अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान करने से कुंभ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता और ऋषि-मुनि भी पृथ्वी पर स्नान करने आते हैं तथा दान-पुण्य करने से सहस्त्र वर्षों तक पुण्य फल मिलता है।

कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से हरिद्वार पहुंचे। सुबह ठंड अधिक होने के कारण शुरुआती घंटों में भीड़ अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन जैसे-जैसे धूप तेज हुई, घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई।

अमावस्या के कारण नारायणी शिला मंदिर में भी विशेष चहल-पहल देखने को मिली। यहां श्रद्धालु अपने पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और पूजन करते नजर आए। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में पितरों के निमित्त किए गए कर्म से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। घाटों पर पर्याप्त पुलिस बल और गोताखोरों की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। मौनी अमावस्या पर हरिद्वार की यह दिव्य और अलौकिक छटा एक बार फिर भक्तों की अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बनकर सामने आई।
भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय ने पार्टी कार्यकर्ताओं में भरा उत्साह*
भाजपा नेत्री के संयोजन में झारखंड शिव मंदिर में आयोजित हुआ समरसता खिचड़ी भोज*

आगामी विधानसभा चुनाव में जीत का जताया संकल्प* 

सुल्तानपुर,इसौली विधानसभा क्षेत्र के रवनिया स्थित झारखंड प्राचीन शिव मंदिर परिसर में भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय के संयोजन में समरसता खिचड़ी भोज आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिव नगर के नवनिर्वाचित मंडल अध्यक्ष मनीष तिवारी ने की। इस दौरान भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी जो भी विधानसभा प्रत्याशी घोषित करेगी,उसे भारी मतों से जीत दिलाने में सभी जुटें।उन्होंने इसौली विधानसभा के ठप पड़े विकास को गति देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस दौरान कार्यक्रम में धर्मेंद्र तिवारी,राकेश मिश्रा,अनुज द्विवेदी, भोलानाथ तिवारी,बजरंग नारायण द्विवेदी, मंडल अध्यक्ष मनीष तिवारी और कई बूथ अध्यक्ष मौजूद रहे।
सावनी फुहार पुस्तक पर परिचर्चा‌ एवं काव्य संध्या संपन्न

मुंबई । साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था काव्य सृजन के तत्वावधान एवं डॉ सागर त्रिपाठी के मार्गदर्शन में शनिवार 17 जनवरी 2026 को पुस्तक परिचर्चा एवं काव्य संध्या का आयोजन डॉ सागर त्रिपाठी लाइब्रेरी पुष्प विहार कुलाबा‌ नेवी नगर मुंबई में आयोजित किया गया।जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कृपाशंकर मिश्र ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार, समालोचक,मार्गदर्शक हौसला प्रसाद सिंह अन्वेषी उपस्थित थे।उक्त समारोह का नियोजन एवं संयोजन शिव प्रकाश जमदग्निपुरी एवं डा.सागर त्रिपाठी ने किया तथा खूबसूरत संचालन डॉ त्रिपाठी ने स्वयं किया।विशिष्ट अतिथि साहित्यकारों में ओमप्रकाश तिवारी, आत्मिक श्रीधर मिश्र, माता प्रसाद शर्मा,विनय शर्मा दीप,पं.जमदग्निपुरी, अरुण दूबे अविकल,समाज सेवी संगठन केसीएनए क्लब के अध्यक्ष,पत्रकार नंदन मिश्र त्यागी के पावन उपस्थिति में भव्य काव्यपाठ हुआ।विलुप्त होती कजरी विधा को जागृत करने एवं पाठकों के बीच लाने का प्रयास संपादक जमदग्निपुरी एवं उप संपादक विनय शर्मा दीप ने किया।परिचर्चा की कड़ी में डॉ सागर त्रिपाठी ने सावनी फुहार संकलन को सराहनीय कदम बताया तो वहीं हौसला प्रसाद अन्वेषी ने सनातनी गीत विधा परंपरा को बचाने का उत्कृष्ट कदम बताया। ओमप्रकाश तिवारी ने भूरी भूरी प्रशंसा की तो डॉ कृपाशंकर मिश्र ने वातावरण, समय,परिधान व पौराणिक त्योहारों के प्रसंगों से गीत, कजरी,फाग,चैता,बिरहा की उत्पत्ति बताया और संकलन की सराहना किया।उपस्थित सभी साहित्यकारों ने अपने-अपने काव्य की प्रस्तुति देते हुए काव्य संध्या का आनंद उठाया।अंत में रुद्र प्रताप सागर ने उपस्थित सभी साहित्यकारों का स्नेहिल आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
दावोस में गूंजेगा 'जोहार': झारखंड के पर्यटन में निवेश के लिए दुनिया को आमंत्रण, प्रकृति और आध्यात्म का वैश्विक हब बनेगा राज्य।

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट स्थान बनाने की ओर अग्रसर है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के मंच से झारखंड दुनिया को एक ऐसी यात्रा का निमंत्रण देगा, जो प्रकृति, संस्कृति, आध्यात्म और रोमांच का अद्भुत संगम है। राज्य सरकार का लक्ष्य निवेश के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और विकास के नए अवसरों को सृजित करना है।

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विविध भौगोलिक पहचान और आकर्षण

छोटा नागपुर पठार की गोद में बसे झारखंड की भौगोलिक बनावट इसे एक बेजोड़ पर्यटन स्थल बनाती है।

झरनों का शहर: हुंडरू, दशम, जोन्हा और लोध जैसे भव्य जलप्रपात पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करते हैं।

पहाड़ों की रानी: नेतरहाट की पहाड़ियाँ और सनसेट व्यू वैश्विक स्तर पर सराहे जा रहे हैं।

विशिष्ट धरोहर: 'मैक्लुस्कीगंज' जैसे गांव अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशिष्टता के लिए जाने जाते हैं।

आदिवासी विरासत और कला का जीवंत अनुभव

झारखंड का पर्यटन इसकी आदिवासी संस्कृति में रचा-बसा है। सरहुल, करम और सोहराय जैसे त्योहारों के साथ-साथ डोकरा आर्ट, पैतकर पेंटिंग और छऊ नृत्य जैसे कला रूप पर्यटकों को एक गहरा अनुभव प्रदान करते हैं। इसके साथ ही देवघर का बैद्यनाथ धाम और मलूटी के मंदिर समूह राज्य के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाते हैं।

एडवेंचर और वाइल्डलाइफ टूरिज्म में संभावनाएं

साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए झारखंड अब पैराग्लाइडिंग, रॉक क्लाइम्बिंग और वॉटरफॉल रैपलिंग जैसे अवसर प्रदान कर रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व और दलमा हाथी अभयारण्य जैसे वन्यजीव केंद्र इसे वन्यजीव प्रेमियों की पहली पसंद बना रहे हैं।

दावोस में 'जोहार' का संदेश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विश्व आर्थिक मंच में बताएंगे कि कैसे झारखंड का पर्यटन मॉडल "सहअस्तित्व और निरंतरता" पर आधारित है। राज्य सरकार निजी निवेशकों को ईको-टूरिज्म, वेलनेस सेंटर और एडवेंचर पार्क विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी मजबूती मिले।

235 पेड़ों को बचाने सड़क पर उतरी गांधीगिरी

इंदौर के रीगल चौराहे पर 16 दिन से जारी है शांतिपूर्ण धरना



इंदौर। विकास के नाम पर लगातार सिमटती हरियाली के बीच इंदौर में पर्यावरण संरक्षण की एक अनोखी और प्रेरक मिसाल सामने आई है। शहर के व्यस्ततम रीगल चौराहे पर मेट्रो परियोजना के तहत प्रस्तावित पेड़ कटाई के विरोध में जागरूक नागरिकों ने गांधीगिरी का रास्ता अपनाते हुए पिछले 16 दिनों से लगातार धरना शुरू कर रखा है। प्रदर्शनकारी पेड़ों के बीच ही बिस्तर बिछाकर दिन-रात उनकी निगरानी कर रहे हैं, ताकि उन्हें किसी भी समय काटा न जा सके।

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में हरियाली का दायरा घटकर महज 9 प्रतिशत रह गया है। इसके बावजूद मेट्रो रेल परियोजना के अंतर्गत रीगल चौराहे के रानी सराय क्षेत्र में प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के लिए यहां मौजूद 235 हरे-भरे पेड़ों को काटने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि इन पेड़ों पर प्रतिदिन शाम को हजारों तोते बसेरा करते हैं, जिनके जीवन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

पेड़ों को बचाने की इस मुहिम की अगुवाई जनहित पार्टी के अभय जैन कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन, नगर निगम और मेट्रो रेल प्रबंधन को कई बार ज्ञापन सौंपे, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 1 जनवरी से शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। उनके साथ कई पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय नागरिक लगातार डटे हुए हैं। अब इस आंदोलन को उन राहगीरों का भी समर्थन मिलने लगा है, जो किसी अन्य कार्य से यहां आते हैं लेकिन पेड़ों को बचाने के उद्देश्य से जुड़ रहे हैं।

धरना स्थल पर 235 पेड़ों का विस्तृत पंचनामा तैयार किया गया है, जिसमें उनकी प्रजाति, पर्यावरणीय उपयोगिता और उन्हें न काटने की अपील दर्ज की गई है। पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े स्लोगन और जागरूकता संदेश लिखे गए हैं, जो लोगों का ध्यान इस आंदोलन की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

अभय जैन का कहना है:

“सभी जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है, जिसकी सुनवाई शीघ्र होगी। 16 दिन और 16 रात से धरना इसलिए जारी है ताकि पेड़ दिन या रात किसी भी समय चोरी-छिपे न काटे जा सकें और हजारों तोतों की जान बचाई जा सके।”

वहीं मेट्रो रेल कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु ग्रोवर का कहना है कि,

“इस विषय में कोई भी निर्णय शीर्ष प्रबंधन स्तर पर ही लिया जा सकता है।”

पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि जयपुर, कानपुर, लखनऊ और पुणे जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं पर भारी निवेश के बावजूद यात्री संख्या अपेक्षा से कम रही है। इसके बावजूद हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लेकर ऐसी योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनकी कीमत शहरों को अपनी हरियाली गंवाकर चुकानी पड़ रही है।

पर्यावरणविद मनीष काले का कहना है:

“मेट्रो जैसी परियोजनाएं अब फैशन आइकॉन बनती जा रही हैं। यह पश्चिमी विकास मॉडल है, जो कर्ज पर आधारित है। इसके बदले पेड़-पौधों का विनाश भविष्य में गंभीर संकट खड़ा करेगा। दिल्ली में सांसों का संकट इसका उदाहरण है। यदि इंदौर में भी हरियाली खत्म हुई, तो आने वाले समय में यहां भी वही हालात बन सकते हैं।”

फिलहाल रीगल चौराहे पर जारी यह गांधीगिरी विकास बनाम पर्यावरण के सवाल को एक बार फिर केंद्र में ले आई है और यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि क्या विकास की कीमत प्रकृति की बलि देकर चुकाई जानी चाहिए।

एसपी देहात ने किया जानसठ थाने का औचक निरीक्षण, लंबित विवेचनाओं के निस्तारण हेतु दिए कड़े निर्देश

जानसठ मुजफ्फरनगर । जनपद में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और थानों की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण  आदित्य बंसल ने थाना जानसठ का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस रिकॉर्ड्स के रखरखाव से लेकर महिला सुरक्षा तक के बिंदुओं पर बारीकी से जांच की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान एसपी देहात सबसे पहले थाना कार्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने महत्वपूर्ण अभिलेखों (रजिस्टरों) के रखरखाव की जांच की। उन्होंने कंप्यूटर कक्ष में जाकर डिजिटल डेटा की फीडिंग को देखा और तकनीकी कार्यों की समीक्षा की। विशेष रूप से महिला हेल्प डेस्क और साइबर हेल्प डेस्क पर पहुँचकर उन्होंने वहां आने वाली शिकायतों के निस्तारण की स्थिति जानी। उन्होंने निर्देश दिया कि पीड़ित महिलाओं और साइबर ठगी के शिकार लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और उन पर तत्काल कार्रवाई  की जाए।

इसके पश्चात एसपी देहात ने थाना परिसर में विवेचकों के साथ एक समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने विवेचनाओं में हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त करते हुए सख्त लहजे में कहा कि लंबित विवेचनाओं का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष तरीके से जल्द से जल्द किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अपराधियों की धरपकड़ और सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए।  लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों और वारंटियों के खिलाफ अभियान चलाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए। महिला सुरक्षा को लेकर महिला संबंधी अपराधों और प्रार्थना पत्रों पर प्राथमिकता के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जाए। तथा थाने आने वाले हर फरियादी के साथ शालीन व्यवहार हो और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए।

निरीक्षण के दौरान डीएसपी  रुपाली रॉय, थाना प्रभारी विनोद कुमार सहित थाने के समस्त उपनिरीक्षक और पुलिसकर्मी मौजूद रहे। एसपी देहात के इस औचक निरीक्षण से थाना पुलिस में हड़कंप की स्थिति रही ।
उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा
* 03 करोड़ महिलाओं को समूहों से जोड़ने और 01 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य

* उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखपति दीदी अभियान की कार्ययोजना को धरातल पर उतारने के दिए निर्देश

लखनऊ। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और गरीबी उन्मूलन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत 03 करोड़ पात्र महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने तथा 01 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करने हेतु तैयार विस्तृत एक्शन प्लान के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘लखपति दीदी’ बनाने की कार्ययोजना को केवल कागज़ों तक सीमित न रखते हुए धरातल पर उतारा जाए। इसके लिए जनपदवार लक्ष्य निर्धारित कर नए स्वयं सहायता समूहों के गठन, नए सदस्यों को जोड़ने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की प्रक्रिया तेज की जाए। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत धनराशि का शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए, किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
श्री मौर्य ने जानकारी दी कि अब तक प्रदेश में 9,06,225 स्वयं सहायता समूहों का गठन कर 99,39,191 परिवारों की महिलाओं को योजना से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए शेष पात्र परिवारों को भी विशेष अभियान के माध्यम से समूहों से जोड़ने के निर्देश दिए।
झारखंड बंद का असर, आदिवासी संगठन कोई लीपापोती नहीं, सोमा मुंडा के हत्यारों का गर्दन चाहिए़ - निशा भगत

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रांची : झारखंड में बेखौफ है अपराधि आए दिन किसी को उठा लेते हर तो किसी को मार देते है। ऐसी ही एक घटना खूंटी जिला में हुई थी जहां अपराधियों ने आदिवासी नेता सह पड़हा राजा सोमा मुंडा की ताबड़तोड़ गोली मारकर हत्या कर दी। जिसके बाद अगले ही दिन खूंटी बंद रहा, आदिवासी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया। लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। इधर आदिवासी संगठन विरोध जताते हुए आज झारखंड बंद का आवाहन किया है। आज सुबह ही कुछ जगह पर इसका विरोध प्रदर्शन देखने को मिला वही कुछ जगहों पर सामान्य गाड़िया चलती रही। दोपहर 1 बजे अल्बर्ट एक्का चौक पर लोग बंद कराने सड़क पर उतरे। इस बीच निशा भगत भी अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतरी। इस बीच आम लोगों से भी उलझी..

इस बीच निशा भगत ने सोमा मुंडा हत्याकांड में कहा कि लीपापोती नहीं हमें इंसाफ चाहिए आदिवासी संगठन की यही मांग है। हेमंत सरकार को भी खरीखौटी सुनाई और आदिवासी विरोधी बताया।

अन्य जिला की बात करे तो खूंटी और चाईबासा में सुबह होते ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर गये और ट्रैफिक सिस्टम को ठप कर दिया। रांची में बस टर्मिनल सुनसान रहा। खूंटी सिमडेगा तोड़पा के लिए बसे बंद रही वहां जाने वाले यात्री परेशान रहे। वही लंबी दूरी जो राज्य से बाहर जाती है उसमें में यात्रियों की संख्या कम रही। आदिवासी संगठनों के द्वारा झारखंड बंद बुलाने का मिलाजुला असर देखने को मिला है।

“खूबसूरत लड़की देख मन भटक सकता है…” कांग्रेस MLA का घिनौना बयान
मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के एक बयान ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को लेकर उनकी टिप्पणी सामने आते ही विपक्षी दल भाजपा ने इसे “घिनौनी और विकृत मानसिकता” करार दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

वायरल वीडियो में विधायक कहते नजर आ रहे हैं कि कोई पुरुष अगर सड़क पर चलते हुए किसी बेहद खूबसूरत लड़की को देख ले, तो उसका मन भटक सकता है और बलात्कार हो सकता है। इस बयान को लेकर लोगों का कहना है कि यह अपराध को सही ठहराने जैसा है और महिलाओं के खिलाफ खतरनाक सोच को बढ़ावा देता है।

बरैया ने आगे अपने बयान में जातिगत संदर्भ जोड़ते हुए कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी समुदायों की महिलाएं खूबसूरत मानी जाती हैं और इसी वजह से उनके साथ ज्यादा अपराध होते हैं। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों की विकृत व्याख्याओं का जिक्र करते हुए यह दावा भी किया कि कुछ लोग यौन हिंसा को आध्यात्मिक पुण्य से जोड़ते हैं।

भाजपा ने इस बयान को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को घेर लिया है। पार्टी के नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ एक विधायक की सोच नहीं, बल्कि कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा मीडिया प्रभारी ने आरोप लगाया कि महिलाओं और कमजोर वर्गों के प्रति कांग्रेस की सोच संवेदनहीन रही है।

वहीं, कांग्रेस विधायक ने अपने बचाव में कहा कि उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर निकालकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि वे महिलाओं के पक्षधर हैं और उनका उद्देश्य समाज में फैली विकृत मान्यताओं को उजागर करना था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके विचार लंबे अध्ययन और अवलोकन पर आधारित हैं।

हालांकि, सोशल मीडिया पर लोग इस सफाई से संतुष्ट नजर नहीं आए। कई यूजर्स ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर सोच-समझकर बोलना चाहिए। महिला संगठनों ने भी इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कार्रवाई की मांग की है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। ऐसे बयान न केवल राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को भी प्रभावित करते हैं।