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वक्फ बिल पर नीतीश-नायडू ने भी निभाई यारी, क्या मुस्लिम वोटबैंक खिसकने का खौफ खत्म हुआ?

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वक्फ संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो गया है। वक्फ संशोधन बिल को पास कराना बीजेपी के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा थी। हालांकि, बीजेपी पूरे जोश में नजर आई। ऐसा इसलिए है क्योंकि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल सभी पार्टियां सरकार के साथ दिया। वो वक्फ बिल पर सपोर्ट करते रहे। सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार की जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी को लेकर थी। सभी के मन में सवाल था कि क्या वो वक्फ संशोधन बिल का सपोर्ट करेंगे? आखिरकार दोनों ही पार्टियों ने बिल पेश होने से पहले वक्फ बिल के समर्थन का ऐलान कर दिया था। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि बिल के समर्थन के पीछे की वजह क्या है?

नीतीश-नायडू टस से मस नहीं हुए

वक्फ संसोधन बिल 2025 को संसद से पास कराना मोदी सरकार के लिए आसान नहीं था। बिल पास कराने में बड़ी अड़चन थी। मुस्लिमों से जुड़ा बिल होने के चलते मिल्ली तंजीमों और विपक्षी दलों ने बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के सहयोगी दलों पर दबाव बनाने की कवायद सड़क से संसद तक की। रमजान के महीने में मुस्लिम संगठन ने बीजेपी के सहयोगी दलों की रोजा इफ्तार पार्टी का बॉयकाट तक करके दबाव बनाने की कोशिश की। इसके अलावा बिहार और आंध्र प्रदेश में बड़ी जनसभाएं करके भी प्रेशर पॉलिटिक्स करने की स्ट्रैटेजी अपनाई। लेकिन बीजेपी के सहयोगी खासकर नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू टस से मस नहीं हुए।

जेडीडू-टीडीपी में मुस्‍ल‍िम वोट ख‍िसकने का डर खत्‍म हो गया?

बीजेपी के नीतीश और नायडू ने मुस्लिम वोटबैंक की परवाह किए बगैर वक्फ संशोधन बिल पर मोदी सरकार के साथ मजबूती से खड़ी रही। शायद नीतीश और नायडू को भरोसा है कि मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण उनके खिलाफ उतना प्रभावी नहीं होगा। बिहार में मुस्लिम आबादी करीब 17% है और आंध्र प्रदेश में यह 9% से अधिक है। दोनों राज्यों में मुस्लिम वोट चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, दोनों नेताओं ने बिल का समर्थन किया, जिससे लगता है कि वे इस जोखिम को उठाने को तैयार थे।

बीजेपी के साथ से राह होगी आसान?

बिहार में नीतीश का मुकाबला तेजस्वी यादव की आरजेडी से है, जो मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर निर्भर है। नीतीश शायद मानते हैं कि उनका विकास का ट्रैक रिकॉर्ड और बीजेपी के साथ गठबंधन उन्हें गैर-मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा दिलाएगा, जो मुस्लिम वोटों के नुकसान की भरपाई कर देगा। नायडू के लिए भी आंध्र में वाईएसआरसीपी और कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी का साथ उनकी स्थिति को मजबूत करता है।

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रमों पर ज्यादा भरोसा

नीतीश कुमार ने बिहार में मुस्लिम समुदाय के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं, जैसे मदरसों का आधुनिकीकरण और अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम। इसी तरह, नायडू ने आंध्र प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के लिए स्कॉलरशिप और अन्य योजनाओं को बढ़ावा दिया है। दोनों को लगता होगा कि ये कदम उनके मुस्लिम वोट बैंक को बनाए रखने में मदद करेंगे, भले ही वक्फ बिल पर उनका रुख विवादास्पद हो। दूसरा, वक्‍फ बोर्ड के फैसलों से तमाम मुस्‍लि‍म ही खफा हैं। जो नुकसान के बजाय फायदेमंद होने वाला है।

आखिर पूरी हुई मुरादः बैंकॉक में पीएम मोदी से मिले मोहम्मद यूनुस, जानें क्या हुई बात?

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में मुलाकात हुई है। पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रशासक नियुक्त किया गया था। ऐसे में दोनों नेताओं की यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।

पीएम मोदी और यूनुस बिम्सटेक के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने बैंकॉक पहुंचे हैं। इसी दौरान विम्सटेक से इतर दोनों नेताओं ने मुलाकात की। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच की मुलाकात में वो बात नजर नहीं आई, जैसे मोदी के दूसरे वैश्विक नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान देखी जाती है। पीएम मोदी अक्सर वैश्विक नेताओं से गर्मजोशी से मिलते हैं। लेकिन मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक के दौरान ये गर्मजोशी नहीं दिख रही थी।

पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के मुलाकात के वीडियो में दिख रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए जब मोहम्मद यूनुस आ रहे होते हैं, तो पीएम मोदी पहले भारतीय परंपरा को दर्शाते हुए हाथ जोड़कर अभिनंदन करते हैं और मोहम्मद यूनुस के पहुंचने के बाद उनसे हाथ मिलाते हैं।

वहीं, दूसरे विदेशी नेताओं से मुलाकात के वक्त प्रधानमंत्री मोदी का हावभाव काफी अलग रहता है। किसी दूसरे नेता से मिलते वक्त प्रधानमंत्री मोदी को खुद आगे बढ़कर उनका स्वागत करते हुए देखा गया है। इस दौरान वो उनसे गले भी मिलते हैं और भारी मुस्कुराहट के साथ उनका स्वागत करते हैं। लेकिन मोहम्मद यूनुस के साथ मुलाकात के दौरान ऐसा कुछ नहीं दिखा।

यूनुस और मोदी के बीच मुलाकात के दौरान क्या बातचीत हुई है, इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक भी मौजूद थे। ऐसे में माना जा रहा है कि ये बातचीत समसमायिक मुद्दे और दोनों देशों के व्यापार समझौते को लेकर हो सकता है।

दरअसल, शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर हो जाने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ चुकी है। मोहम्मद यूनुस के शासन में बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) पर अत्याचार के कई मामले सामने आ चुके हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले को लेकर खुद पीएम मोदी ने चिंता जताई है।

वहीं, बांग्लादेश ने भारत को दरकिनार कर पाकिस्तान और चीन से रिश्तों को प्रगाढ़ किया है। पिछले हफ्ते ही जब मोहम्मद यूनुस बीजिंग में थे तो उन्होंने एंटी-इंडिया बात करते हुए खुद को बंगाल की खाड़ी का गार्जियन बताया था। पिछले हफ्ते चीन की अपनी यात्रा के दौरान यूनुस ने बीजिंग से बांग्लादेश में अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ाने का आग्रह किया और विवादास्पद रूप से उल्लेख किया कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का भूमि से घिरा होना एक अवसर साबित हो सकता है।

वक्फ विधेयक को चुनौती देने की तैयारी में कांग्रेस, खटखटाएगी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

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लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी वक्फ संशोधन विधेयक पास हो गया। हालांकि, वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध जारी है। कांग्रेस वक्फ संशोधन विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है। कांग्रेस पार्टी वक्फ संशोधन बिल की 'संवैधानिकता' को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। कांग्रेस सांसद और पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने इसका ऐलान किया है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बहुत जल्द ही वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। कांग्रेस पहले से ही कई कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है। इनमें सीएए 2019, आरटीआई एक्ट 2005 में संशोधन और चुनाव नियमों में संशोधन शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी पूजा स्थल अधिनियम-1991 को बरकरार रखने के लिए अदालत में हस्तक्षेप कर रही है। कांग्रेस के सीएए-2019 को चुनौती देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। साथ ही आरटीआई अधिनियम, 2005 में 2019 के संशोधनों को चुनौती देने के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

मोदी सरकार के सभी हमलों का विरोध जारी रखेंगे-जयराम रमेश

जयराम रमेश ने कहा, हमें पूरा भरोसा है और हम भारत के संविधान में निहित सिद्धांतों, प्रावधानों और प्रथाओं पर मोदी सरकार के सभी हमलों का विरोध करना जारी रखेंगे। राज्यसभा में वक्फ विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों की ओर से कड़ी आपत्तियां देखी गईं, जिन्होंने विधेयक को "मुस्लिम विरोधी" और "मुस्लिम विरोधी" करार दिया।

स्टालिन ने भी कोर्ट जाने का किया एलान

इससे पहले वक्फ विधेयक को लेकर स्टालिन ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का एलान कर दिया था। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने गुरुवार को कहा था कि उनकी पार्टी इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएगी। लोकसभा से विधेयक पारित होने के विरोध में स्टालिन विधानसभा में काली पट्टी बांधकर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत में बड़ी संख्या में दलों के विरोध के बावजूद कुछ सहयोगियों के इशारे पर रात दो बजे संशोधन को अपनाना संविधान की संरचना पर हमला है।

थाईलैंड में साथ नजर आए पीएम मोदी और यूनुस, मुलाकत के लिए मिन्नत के बीच आई दिलचस्प तस्वीर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस एक साथ बैठे नजर आए। ये दिलचस्प तस्वीर बैंकॉक में बिम्सटेक समूह के नेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज के दौरान सामने आई। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिम्सटेक शिखर सम्मेलन शामिल होने के लिए थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हैं। जहां रात्रिभोज के समय पीएम मोदी के साथ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस बैठे दिखाए दिए।बिम्मसटेक शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के बीच द्विपक्षीय चर्चाओं की संभावना से पहले रात्रिभोज में दोनों नेता बगल-बगल बैठे दिखाई दिए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस बैंकॉक में बिम्सटेक समूह के नेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज में एक साथ बैठे नजर आये। थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनवात्रा ने इस भोज की मेजबानी की। यूनुस के कार्यालय ने कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिसमें चाओ फ्राया नदी के तट पर स्थित होटल 'शांगरी-ला' में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख को मोदी के बगल में बैठे देखा जा सकता है।

ये तस्वीर ऐसे समय में सामने आई है, जब कहा जा रहा है कि पीएम मोदी शुक्रवार यानी आज बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के साथ वार्ता कर सकते हैं। मोदी की यूनुस से मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हसीना के सत्ता से बाहर होने और उस देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में खटास आई है। भारत और बांग्लादेश के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। लेकिन, शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद नई सरकार की भारत के प्रति नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह मुलाकात यूनुस की हाल की चीन यात्रा की पृष्ठभूमि में भी अहम है, जहां उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र के बारे में कुछ टिप्पणियां की थीं, जो भारत को पसंद नहीं आईं।

पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़कर भारत आने के बाद मोदी-यूनुस के बीच यह पहली मुलाकात होगी। बांग्लादेश लगातार इस कोशिश में लगा हुआ है कि पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की द्विपक्षीय मुलाकात हो जाए। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से इतर होने की संभावना है। मोहम्मद यूनुस एक जाने-माने अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता हैं, और बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत उनकी नीतियों को लेकर उत्सुक है। अगर मोदी और यूनुस की मुलाकात होती है, तो इसमें क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, सुरक्षा और सीमा संबंधी मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

फिल्म अभिनेता मनोज कुमार का निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख

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सिनेमा के दिग्गज एक्टर और फिल्म डायरेक्टर मनोज कुमार का निधन हो गया है। दिग्गज एक्टर ने 87 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। मनोज कुमार का निधन मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल हुआ। मनोज कुमार को खासतौर पर उनकी देशभक्ति के लिए जाना जाता था। इसके अलावा उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना जाता है।

मनोज कुमार के बेटे कुणाल गोस्वामी ने बताया, उन्हें लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं। यह भगवान की कृपा है कि उन्होंने शांतिपूर्वक इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनका अंतिम संस्कार कल होगा।

मनोज कुमार काफी समय से लिवर सिरोसिस से जूझ रहे थे। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें 21 फरवरी, 2025 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनोज कुमार को श्रद्धांजलि दी है। पीएम ने 'एक्स' पर लिखा: 'महान अभिनेता और फिल्म निर्माता श्री मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दुख हुआ। वह भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें विशेष रूप से उनकी देशभक्ति के उत्साह के लिए याद किया जाता था, जो उनकी फिल्मों में भी झलकता था। मनोज जी के कार्यों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रज्वलित किया और यह पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।'

हिंदी सिनेमा में अपने लिए एक अलग पहचान बनाई

24 जुलाई, 1937 को अमृतसर (पंजाब) में हरिकृष्ण गोस्वामी के रूप में जन्मे मनोज कुमार ने हिंदी सिनेमा में अपने लिए एक अलग पहचान बनाई। 'शहीद', 'उपकार' और 'रंग दे बसंती' जैसी फिल्मों में उनकी प्रतिष्ठित भूमिकाएं देशभक्ति की भावनाओं से गहराई से जुड़ी थीं। अपने पूरे करियर के दौरान मनोज कुमार राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना पर आधारित फिल्मों में अपने अभिनय और निर्देशन दोनों के लिए जाने जाते थे। 

इन पुरस्कारों से हुए सम्मानित

मनोज कुमार को 7 फिल्म फेयर पुरस्कार मिले थे। पहला फिल्म फेयर 1968 में फिल्म उपकार के लिए मिला था। उपकार ने बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्टोरी और बेस्ट डायलॉग के लिए चार फिल्म फेयर जीते। 1992 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2016 में उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया।

लंबे समय से हाशिये पर रहे लोगों को सहारा मिलेगा', दोनों सदनों से वक्फ बिल पारित होने पर बोले पीएम मोदी

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वक्फ संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई है। सरकार ने इसे पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में विस्तृत चर्चा के बाद पास कराया। संसद से वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर पहली प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने कहा कि संसद के दोनों सदनों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक का पारित होना सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास के लिए हमारी सामूहिक खोज में एक महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से उन लोगों को मदद मिलेगी जो लंबे समय से हाशिये पर हैं।

पीएम मोदी ने 'एक्स' पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए। पीएम मोदी ने लिखा, 'दशकों से वक्फ व्यवस्था पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का पर्याय रही है। इससे खास तौर पर मुस्लिम महिलाओं, गरीब मुसलमानों, पसमांदा मुसलमानों को नुकसान पहुंचा। संसद की ओर से पारित कानून पारदर्शिता को बढ़ावा देंगे और लोगों के अधिकारों की रक्षा भी करेंगे।'

पीएम मोदी ने आगे लिखा, 'अब हम ऐसे युग में प्रवेश करेंगे जहां ढांचा अधिक आधुनिक और सामाजिक न्याय के प्रति संवेदनशील होगा। व्यापक रूप से हम प्रत्येक नागरिक की गरिमा को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी तरह हम एक मजबूत, अधिक समावेशी और अधिक दयालु भारत का निर्माण भी कर सकते हैं।'

वक्फ संशोधन बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो गया। करीब 12 घंटे की मैराथन चर्चा के बाद इस बिल को लोकसभा में पास किया गया था। बिल के पक्ष में 288 वोट पड़े थे जबकि इसके खिलाफ 232 वोट पड़े थे। इसके बाद राज्यसभा की बारी आई है। वहां भी इस बिल पर लंबी चर्चा हुई। करीब 13 घंटे की बहस के बाद इस बिल का राज्यसभा से भी पास कर दिया गया।

राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में 128 वोट जबकि इसके खिलाफ में 95 वोट पड़े। संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर के बाद बन यह कानून बन जाएगा।

लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पास हुआ वक्फ संशोधन बिल, 13 घंटे चले मंथन के बाद पक्ष में पड़े 128 वोट

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लोकसभा के बाद वक्फ संशोधन विधेयक राज्यसभा से पास हो गया है। बिल के पक्ष में 128 तो विपक्ष में 95 वोट पड़े।वक्फ संशोधन विधेयक पर 13 घंटे से भी अधिक समय तक चली चर्चा के बाद बृहस्पतिवार देर रात ढाई बजे के बाद राज्यसभा ने भी अपनी मुहर लगा दी। राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर फैसला ध्वनि मत से नहीं, बल्कि मत-विभाजन से किया गया। इससे पहले, लोकसभा ने बुधवार रात करीब 1.56 बजे वक्फ संशोधन विधेयक बहुमत से पारित कर दिया था। विधेयक के पक्ष में 288, जबकि विरोध में 232 मत पड़े। विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई थी। विधेयक अब हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति के पास जाएगा और सरकार की ओर से अधिसूचित होते ही कानून का रूप ले लेगा।

राज्यसभा में 13 घंटे से ज्यादा समय तक चली बहस के बाद वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 को मंजूरी मिल गई। विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद नंबर गेम में मोदी सरकार जीत गई। राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने वक्फ बिल पर कड़ा विरोध जताया। विपक्षी दलों ने इस विधेयक को मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक बताया। वहीं सरकार ने जवाब दिया कि यह ऐतिहासिक सुधार अल्पसंख्यक समुदाय के लिए फायदेमंद होगा।

राज्यसभा में वक्फ बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर मुस्लिम समुदाय को विधेयक से डराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ सभी के लिए काम करती है। रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है। ऐसे में सभी सरकारी निकायों की तरह यह धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड में कुछ गैर-मुस्लिमों को शामिल करने से बोर्ड के फैसलों में कोई बदलाव नहीं आएगा। बल्कि इससे मूल्य में इजाफा ही होगा।

आपको वक्फ में कलेक्टर को रखने पर आपत्ति थी, तो...

किरेन रिजिजू ने विपक्ष के उठाए मुद्दों का सिलसिलेवार जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष के इस दावे को गलत बताया कि राष्ट्रीय वक्फ काउंसिल में गैर मुस्लिमों का बहुमत होगा। रिजिजू ने कहा, 20 सदस्यीय बॉडी में पदेन अध्यक्ष समेत चार से अधिक गैर मुस्लिम सदस्य हो ही नहीं सकते। इसी प्रकार 11 सदस्यीय राज्य बॉडी में 3 से अधिक गैर मुस्लिम नहीं होंगे।साथ ही उन्होंने कहा कि जेपीसी में विपक्ष की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि हर जिले में जो भी जमीनी विवाद होता है, उसे कलेक्टर देखता है। आपको वक्फ में कलेक्टर को रखने पर आपत्ति थी, इसलिए हमने उससे ऊपर के अफसर को रखा है।

सभी के सुझाव को ध्यान में रखा गया- रिजिजू

केंद्रीय मंत्री ने कहा, अधिकांश सदस्यों ने आरोप लगाया कि जेपीसी या सरकार ने कानून पर उनके सुझाव नहीं माने। सरकार किसी की नहीं सुनती। यह आरोप पूरी तरह गलत है। हम सुझाव नहीं मानते तो इस विधेयक का जो मूल मसौदा आया था और जो विधेयक आज पेश हुआ है उसमें इतना बदलाव नहीं होता। विधायक में बड़े पैमाने पर बदलाव है और यह सदस्यों के सुझाव के सुझाव पर ही हुआ है। रिजिजू ने कहा, पहले से रजिस्टर संपत्तियों में छेड़छाड़ नहीं हो सकती यह संशोधन जेपीसी में विपक्ष के सुझाव पर ही शामिल किया गया। इसी प्रकार गैर रजिस्टर्ड वक्फ ट्रस्टों के लिए छह महीने की समय सीमा को भी विपक्ष के सुझाव पर बढ़ाया गया। इसके अलावा भी कई संशोधन विपक्ष के सुझाव पर लिए गए।

वक्फ बिल पर बीजेडी का यू-टर्न, अंतर्आत्मा की आवाज सुनने की अपील, राज्यसभा से बिल पास कराना हुआ आसान

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बीजू जनता दल ने वक्फ (संशोधन) विधेयक पर अपना रुख बदल दिया है। लोकसभा में बिल के पेश किए जाने के बाद बीजेडी ने इसके खिलाफ स्टैंड लिया था। लेकिन बावजूद इसके बिल लोकसभा से पारित हो गया। अब संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में बिल पर बहस हो रही है। अब बीजेडी ने भी अपना स्टैंड बदल लिया है और पार्टी के सांसदों को अंतर्आत्मा की आवाज सुनने को कहा है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वोटिंग के लिए कोई व्हिप जारी नहीं किया जाएगा।

राज्यसभा सांसद और बीजेडी के प्रवक्ता डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा, "हम वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के संबंध में अल्पसंख्यक समुदायों के विभिन्न वर्गों द्वारा व्यक्त की गई भावनाओं का सम्मान करते हैं। हमारी पार्टी ने राज्य सभा में अपने सदस्यों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि यदि विधेयक मतदान के लिए आता है तो वे न्याय, सद्भाव और सभी समुदायों के अधिकारों के सर्वोत्तम हित में अपने विवेक का प्रयोग करेंगे। कोई पार्टी व्हिप जारी नहीं की गई है।"

इससे पहले पात्रा ने बुधवार को कहा था कि राज्यसभा सदस्य मुजीबुल्ला खान मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे और विधेयक के संबंध में पार्टी की चिंताओं को सदन में रखेंगे। पात्रा ने कहा कि पार्टी विधेयक से संतुष्ट नहीं है। केंद्र ने संयुक्त संसदीय समिति की समीक्षा के बाद कुछ बिंदुओं में संशोधन किया है।

गौरतलब है कि बीजद ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा से पहले इसका विरोध की बात कही थी। हालांकि, अब फैसला बदलने से राज्यसभा में विपक्ष की स्थिति और कमजोर हुई है। दरअसल, राज्यसभा में बीजद के 7 सांसद हैं। पहले इनकी गिनती विपक्ष में होती थी। हालांकि, अब इन सांसदों का रुख तय नहीं है। ऐसे में वक्फ विधेयक पर विपक्ष की ताकत और कमजोर होना तय है।

राज्यसभा में क्या है समर्थन का गणित?

वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में एनडीए के बहुमत की वजह से पास हो गया। हालांकि, इसे चुनौती राज्यसभा में मिलने की संभावना है। राज्यसभा में कुल सांसद 245 हो सकते हैं। हालांकि, मौजूदा समय में सदन में 236 सांसद हैं। वहीं, 9 सीटें खाली हैं। राज्यसभा में कुल 12 सांसद नामित हो सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या फिलहाल 6 है। इस लिहाज से राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

एनडीए के पास कितना संख्या बल?

राज्यसभा में भी आंकड़ों के लिहाज से एनडीए के पास पूर्ण बहुमत है। दरअसल, राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और उसके पास कुल 98 सांसद हैं। इसके अलावा लोकसभा की तरह ही जदयू, तेदेपा, राकांपा व अन्य दलों की तरफ से एनडीए को समर्थन मिला हुआ है। 

राज्यसभा में जो अन्य दल एनडीए के साथ हैं, उनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) का एक सांसद, पत्तली मक्कल काची, तमिल मनिला कांग्रेस (टीएमसी-एम), नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के एक-एक सांसद, रामदास आठवले की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई-ए) का एक सांसद और दो निर्दलीय सांसद हैं। 

राज्यसभा में विपक्ष के आंकड़े

दूसरी तरफ राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक के विपक्ष में भी कई पार्टियां जुटी हैं। हालांकि, यह समर्थन विधेयक को रोकने के लिए नाकाफी साबित हो सकता है। राज्यसभा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। विपक्ष से इसके राज्यसभा में सबसे ज्यादा 27 सांसद हैं। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप) और द्रमुक अगली बड़ी पार्टी हैं। 

जो अन्य दल वक्फ संशोधन विधेयक में विपक्ष के साथ हैं उनमें जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी, एआईएडीएमके भी विपक्ष के साथ हैं।

लोकसभा से पास हुआ वक्फ बिल

बता दें कि बुधवार को करीब 12 घंटे की चर्चा के बाद वक्फ बिल लोकसभा से पास हुआ था। बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट डाले गए थे। गुरुवार को इसे राज्यसभा में पेश किया गया। वक्फ बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर टकराव हुआ है। विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया है। दूसरी ओर सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष गलत बातें फैला रहा है। टीएमसी सांसद मोहम्मद नदीमुल इस्लाम ने विधेयक को “सांस्कृतिक बर्बरता” कहा और वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।

क्या है बिम्सटेक, जिसके समिट में शामिल होने बैंकॉक पहुंचे पीएम मोदी, भारत के लिए क्यों जरूरी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक पहुंचे। पीएम मोदी बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन यानि बिम्सटेक के शिखर सम्मेलन में शामिल होंने बैंकॉक पहुंचे हैं।कल यह सम्मेलन होना है।वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले से ही बैंकॉक में हैं। उन्होंने आज 20वीं बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि बिम्सटेक क्या है और यह भारत के लिए क्यों इतना जरूरी है कि पीएम मोदी और एस जयशंकर इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए बैंकॉक पहुंचे हैं।

बिम्सटेक क्या है?

बिम्सटेक यानी बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल है। यह एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें बंगाल की खाड़ी के आसपास स्थित सात सदस्य देश शामिल हैं। इस उप-क्षेत्रीय संगठन की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से की गई थी। सात सदस्य देशों में दक्षिण एशिया के पांच देश- बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका- और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश- म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। मूल रूप से, इस ब्लॉक की शुरुआत चार सदस्य देशों के साथ हुई थी, जिसका नाम 'BIST-EC' (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) था।

क्या है संगठन का मुख्य उद्देश्य?

संगठन का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों की आर्थिक तरक्की, आपसी सहयोग, क्षेत्रीय चुनौतियों से मिलकर निपटने की नीति, आपसी हितों पर विचार-विमर्श करना आदि था। सहयोग और समानता की भावना पैदा करने के साथ ही शिक्षा, विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में एक-दूसरे की खुलकर मदद करना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। समान संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, शांतिपूर्ण श-अस्तित्व, पारस्परिक लाभ, सदस्य देशों के बीच अन्य द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दे भी इस महत्वपूर्ण संगठन के प्रमुख सिद्धांतों में शामिल किये गए हैं।

दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बिम्सटेक?

दुनिया के लिए भी यह बेहद महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो दुनिया की कुल आबादी का 22 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इन्हीं सात देशों में निवास करता है। दुनिया के कुल व्यापार का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरता है। सदस्य देशों की संयुक्त जीडीपी लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताई जाती है।ये आंकड़े यह बताने को काफी हैं कि दुनिया के लिए यह संगठन और इसके सदस्य देश कितने महत्वपूर्ण हैं।

बिम्सटेक की पहल पर कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम हुआ, जिसका सीधा लाभ सदस्य देशों को मिल रहा है। इनमें भारत और म्यांमार को जोड़ने वाली कलादान मल्टी मॉडल परियोजना, म्यांमार से होकर भारत और थाईलैंड को जोड़ने वाली एशियाई त्रिपक्षीय राजमार्ग तथा यात्री एवं माल परिवहन के सुगम प्रवाह हेतु बांग्लादेश-भारत-भूटान-नेपाल मोटर वाहन समझौता शामिल है।

थाईलैंड में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, थाई रामायण का मंचन देख हुए गदगद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के दौरे पर हैं। पीएम मोदी आज यानी गुरुवार को 2 दिन के थाईलैंड दौरे पर पहुंचे हैं। बैंकॉक में थाईलैंड के उप-प्रधानमंत्री प्रसर्ट जंतररुआंगटों और उनके शीर्ष अधिकारियों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत। इस दौरान पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। इसके बाद थाई रामायण का मंचन देखा। यहां रामायण को रामाकेन कहा जाता है।

एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री मोदी बैंकॉक के होटल पहुंचे। इस दौरान भारतीय प्रवासियों और भारतीय समुदाय के सदस्यों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी ने कहा कि बैंकॉक में भारतीय समुदाय द्वारा गर्मजोशी से किए गए स्वागत के लिए आभारी हूं।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि भारत और थाईलैंड के बीच एक गहरा सांस्कृतिक बंधन है जो हमारे लोगों के माध्यम से फलता-फूलता रहता है। यह देखकर खुशी हुई कि यह संबंध यहां इतनी मजबूती से परिलक्षित होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामायण के थाई संस्करण रामकियेन का प्रदर्शन देखा। उन्होंने कहा कि एक ऐसा सांस्कृतिक जुड़ाव जो किसी और से नहीं मिलता। थाई रामायण, रामकियेन का एक आकर्षक प्रदर्शन देखा। यह वास्तव में समृद्ध अनुभव था जिसने भारत और थाईलैंड के बीच साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया। रामायण वास्तव में एशिया के इतने सारे हिस्सों में दिलों और परंपराओं को जोड़ना जारी रखती है।

इसके बाद पीएम मोदी ने थाईलैंड की पीएम पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा से द्विपक्षीय मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने व्यापारिक संबंधों पर चर्चा की। यात्रा के दूसरे दिन यानी कल पीएम मोदी बिम्सटेक सम्मेलन में भाग लेंगे